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पाकिस्तान की ‘कश्मीर सॉलिडैरिटी’ का सच, आतंक के खिलाफ बोलने वाले कश्मीरी बुद्धिजीवियों को डराने में जुटी ISI

Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals
Junaid Qureshi

Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals: पाकिस्तान की कश्मीर नीति की असलियत एक बार फिर सामने आ गई है। एक तरफ इस्लामाबाद हर साल 5 फरवरी को तथाकथित “कश्मीर सॉलिडैरिटी डे” मनाकर कश्मीरियों के साथ खड़े होने का दावा करता है, तो दूसरी तरफ उसकी खुफिया एजेंसी और आतंकवादी प्रॉक्सी उन्हीं कश्मीरियों को निशाना बना रही हैं, जो हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क ने प्रो-इंडिया और आतंक-विरोधी कश्मीरी बुद्धिजीवियों को सीधे मौत की धमकी दी है।

सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंकों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए पाकिस्तान उन आवाजों को खामोश करना चाहता है, जो उसकी “कश्मीर नैरेटिव” को दुनिया के सामने बेनकाब कर रही हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि उस पूरी सोच पर हमला है, जो कश्मीर में शांति, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals: धमकी का मकसद डर फैलाना और चुप कराना

जनवरी 2026 में सामने आए इस मामले में एक प्रमुख कश्मीरी मूल के काउंटर-टेररिज्म एक्सपर्ट को सीधे जान से मारने की धमकी दी गई। यह धमकी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भेजी गई, जिसमें आतंकवादी संगठन की ब्रांडिंग साफ दिखाई दे रही थी। मैसेज में न सिर्फ उन्हें “गद्दार” कहा गया, बल्कि यह भी लिखा गया कि उन्हें मारने में किसी तरह की हिचक नहीं होगी।

सूत्रों ने बताया कि यह धमकी लश्कर ए तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रजिस्टेंट फ्रंट यानी टीआरएफ ने जुनैद कुरैशी को एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (जैसे टेलीग्राम या सिग्नल) के जरिए दी थी। बता दें कि जुनैद कुरैशी यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) के डायरेक्टर हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह पिछले कुछ महीनों में दूसरी ऐसी घटना है, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क ने उन कश्मीरी बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बोल रहे हैं। धमकी की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्द इस बात का संकेत देते हैं कि इसका मकसद डर फैलाना और चुप कराना है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

रावलपिंडी से ऑपरेट हो रहा अकाउंट

धमकी पाने वाले विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी ने मीडिया से बातचीत में सीधे तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह धमकी लश्कर ए तैयबा के कमांडर शेख सज्जाद गुल के जरिए आई। खास बात यह ही धमकी में जिन जानकारियों का जिक्र किया गया, वे सार्वजनिक नहीं थीं और सिर्फ सीमित लोगों तक ही पहुंच रखती थीं। क्योंकि मैसेज में एक प्रस्तावित कश्मीरी इंटेलेक्चुअल थिंक टैंक की संवेदनशील जानकारी थी, जो पब्लिक डोमेन में नहीं है। इससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि इस पूरे मामले के पीछे संगठित खुफिया नेटवर्क काम कर रहा है।

जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि धमकी भेजने वाला अकाउंट पाकिस्तान के रावलपिंडी क्षेत्र से ऑपरेट हो रहा था और इसका इस्तेमाल पहले भी आतंकवादी प्रचार सामग्री फैलाने के लिए किया जा चुका है। यह अकाउंट 24 अगस्त 2025 को बनाया गया और टीआरएफ के प्रोपेगैंडा फोटोज, अपडेट्स फैलाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह वही तरीका है, जिसे पाकिस्तान लंबे समय से अपनाता रहा है, वह आतंकवादी संगठनों को आगे रखकर खुद पर्दे के पीछे रहता है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

जुनैद ने पिता की आतंकी विचारधारा को किया रिजेक्ट

जुनैद कुरैशी ने अपने एक्स अकाउंट @JQ_plaintalk पर पर पोस्ट किया कि धमकियां उन्हें शांति और टेररिज्म के खिलाफ काम करने से नहीं रोकेंगी। उन्होंने अपने काम को जारी रखने का ऐलान किया है। जुनैद कुरैशी कश्मीरी मूल के हैं और EFSAS के डायरेक्टर हैं। उनके पिता हाशिम कुरैशी 1971 में एयर इंडिया फ्लाइट IC-405 के हाईजैकर्स में से एक थे, लेकिन जुनैद ने सार्वजनिक रूप से अपने पिता की विचारधारा को रिजेक्ट करते हुए अपने जन्म से पहले हुए हाईजैकिंग कांड को टेररिज्म का ऐक्ट बताया थाा।

अपनी संस्था के जरिए, जुनैद अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स (जैसे यूएन, यूरोपीय पार्लियामेंट) पर पाकिस्तान की स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म को एक्सपोज करते हैं। वे दिखाते हैं कि कश्मीर में “आजादी की लड़ाई” वास्तव में आईएसआई का चलाया हुआ कैंपेन है, जिसमें लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद शामिल हैं।

2019 में पुलवामा अटैक की निंदा करने के लिए जुनैद को एक ब्लॉग पर हिट-लिस्ट में शामिल किया गया था। उन्होंने एक्स पर कहा कि लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन हैं जो कश्मीर को बांटते हैं, और धमकियां उन्हें चुप नहीं कराएंगी। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

आतंकवाद के खिलाफ बोलने की चुकानी पड़ी कीमत

पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठनों द्वारा कश्मीरी बुद्धिजीवियों और समाज के जागरूक वर्ग को निशाना बनाने का लंबा और खूनी इतिहास रहा है। दशकों से ऐसे कश्मीरी, जो आतंकवाद का विरोध करते हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं या भारत के साथ शांति और सह-अस्तित्व का समर्थन करते हैं, लगातार इन टेरर प्रॉक्सीज के टारगेट पर रहे हैं।

आकंड़ों के मुताबिक 1989 से 2020 के बीच पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठनों ने 5000 से ज्यादा कश्मीरी नागरिकों, पत्रकारों, नेताओं और बुद्धिजीवियों की हत्या की थी। इनमें वे लोग शामिल थे, जिन्होंने खुले तौर पर आतंकवाद का विरोध किया या कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन इस पूरे दौर में इस खूनखराबे के प्रमुख जिम्मेदार रहे।

साल 2018 में इस पैटर्न का एक बेहद चौंकाने वाला उदाहरण तब सामने आया, जब ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्हें महीनों से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरेआम मार दिया गया। इस हत्या ने साफ कर दिया कि जो भी कश्मीर में हिंसा और आतंक के खिलाफ बोलता है, वह सीधे आतंकी संगठनों के निशाने पर आ जाता है।

साल 2018 में इस पैटर्न का एक बेहद चौंकाने वाला उदाहरण तब सामने आया, जब ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्हें महीनों से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरेआम मार दिया गया। इस हत्या ने साफ कर दिया कि जो भी कश्मीर में हिंसा और आतंक के खिलाफ बोलता है, वह सीधे आतंकी संगठनों के निशाने पर आ जाता है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

इसके बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमले की निंदा करने पर जुनैद कुरैशी को आतंकियों की हिट-लिस्ट में डाल दिया गया। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने खुले तौर पर आतंकवाद को गलत बताया और उसकी आलोचना की, उन्हें लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से धमकियों का सामना करना पड़ा।

हिंसा का यह सिलसिला हाल के सालों में भी जारी रहा। साल 2025 में कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल मैगरे की हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में इस हत्या के पीछे भी पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों पर शक जताया गया। यह घटना इस बात का संकेत थी कि भले ही हालात बदले हों, लेकिन आतंक के जरिए डर फैलाने की नीति नहीं बदली है।

इन घटनाओं के बीच कुछ और खौफनाक मिसालें भी सामने आई हैं। 2019 में लश्कर-ए-तैयबा ने एक कश्मीरी लड़की को जबरन शादी के लिए बंधक बना लिया था और एक 12 साल के बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया कि आतंकी संगठनों के लिए न उम्र मायने रखती है, न इंसानियत। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

“सॉलिडैरिटी” की यह है सच्चाई

पाकिस्तान हर साल “कश्मीर सॉलिडैरिटी डे” के नाम पर रैलियां करता है, भाषण देता है और खुद को कश्मीरियों का हितैषी बताता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिन कश्मीरियों की सोच पाकिस्तान की लाइन से मेल नहीं खाती, उन्हें या तो धमकाया जाता है या फिर हिंसा का शिकार बनाया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति केवल डर पैदा करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की आलोचना को कमजोर करना भी है। जब कश्मीरी मूल के लोग ही आतंकवाद को बेनकाब करते हैं, तो पाकिस्तान की पूरी कहानी ढहने लगती है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ता असर

हाल के वर्षों में कई कश्मीरी बुद्धिजीवियों और शोधकर्ताओं ने यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ यह दिखाया है कि कश्मीर में हिंसा किसी “जन आंदोलन” का नतीजा नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रायोजित आतंकवादी अभियान है।

यही वजह है कि ऐसे लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जानकार मानते हैं कि यह पाकिस्तान की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि उसकी कूटनीतिक रणनीति अब पहले जैसी असरदार नहीं रह गई है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

भारत की सुरक्षा एजेंसियों की है नजर

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन धमकियों को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई से जुड़ा मुद्दा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय दबाव ही सबसे प्रभावी हथियार हो सकता है। जब तक आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले ढांचे पर सीधा सवाल नहीं उठेगा, तब तक ऐसी धमकियां जारी रहेंगी। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

Vayushakti-2026: पाकिस्तान सीमा से सटे वेस्टर्न फ्रंट पर भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी फायर पावर एक्सरसाइज, जानें इस बार क्यों है खास?

Vayushakti 2026 Indian Air Force
Vayushakti-2026: Indian Air Force to Showcase Massive Firepower on Western Front in Pokhran

Vayushakti 2026 Indian Air Force: भारतीय वायुसेना फरवरी 2026 में एक बार फिर अपनी जबरदस्त फायर पावर और ऑपरेशनल तैयारी का प्रदर्शन करने जा रही है। इसके लिए वायुसेना ने अपने सबसे बड़े एयर पावर एक्सरसाइज ‘वायुशक्ति-2026’ की तैयारी शुरू कर दी है। इस एक्सरसाइज को लेकर नोटम भी जारी किया जा चुका है। जिसके मुताबिक वेस्टर्न फ्रंट, यानी पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के पोखरण में बड़े स्तर पर हवाई गतिविधियां होने वाली हैं।

एक्सरसाइज ‘वायुशक्ति-2026’ में दिन और रात, दोनों समय लाइव फायरिंग, एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक, एयर-टू-एयर मिशन, एयर डिफेंस और जॉइंट ऑपरेशन्स का अभ्यास किया जाएगा।

Vayushakti 2026 Indian Air Force: पोखरण फिर बनेगा वायुसेना की ताकत का गवाह

राजस्थान का पोखरण इलाका पहले भी भारत की सैन्य ताकत का गवाह रहा है। अब एक बार फिर रेगिस्तान का यह इलाका भारतीय वायुसेना की ताकत और तैयारी का केंद्र बनने जा रहा है। पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों के खुले आसमान में जब दर्जनों फाइटर जेट एक साथ उड़ान भरेंगे और अपने हथियारों का प्रदर्शन करेंगे, तो यह नजारा सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की हवाई शक्ति का प्रतीक होगा। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

तीन चरणों में एक्सरसाइज

नोटम-इन के मुताबिक, भारतीय वायुसेना की यह एक्सरसाइज तीन चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण 9 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक चलेगा, दूसरा चरण 16 फरवरी से 19 फरवरी तक और तीसरा व अंतिम चरण 20 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक निर्धारित किया गया है।

शुरुआती दो चरणों में ग्राउंड से 30,000 फीट तक हवाई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद तीसरे चरण में यह सीमा हटा दी गई है। यानी आखिरी चरण में वायुसेना पूरी ऊंचाई और पूरी क्षमता के साथ अपने हथियारों और प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सकती है। आमतौर पर ऐसा तभी किया जाता है, जब बड़े पैमाने पर कॉम्बैट सिमुलेशन और लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक का अभ्यास होता हो। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

क्यों खास है वायुशक्ति एक्सरसाइज

वायुशक्ति भारतीय वायुसेना की सबसे प्रतिष्ठित फायर पावर एक्सरसाइज मानी जाती है। इसे हर कुछ वर्षों में आयोजित किया जाता है, ताकि वायुसेना अपनी युद्धक तैयारियों को न सिर्फ परखे, बल्कि देश और दुनिया को भी दिखा सके।

पिछली वायुशक्ति एक्सरसाइज में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000 और मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स ने लाइव हथियारों के साथ अपने टारगेट्स को निशाना बनाया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित वायुशक्ति 2026 का संस्करण इससे भी बड़ा और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

Vayushakti 2026 Indian Air Force

वेस्टर्न फ्रंट पर फोकस क्यों

हाल के वर्षों में भारत के सामने दो-फ्रंट चैलेंज लगातार चर्चा में रहा है। एक तरफ पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान, तो दूसरी तरफ उत्तरी सीमा पर चीन। ऐसे में वायुसेना की रणनीति यह है कि वह दोनों मोर्चों पर एक साथ जवाब देने में सक्षम रहे।

वायुशक्ति-2026 के जरिए वायुसेना वेस्टर्न फ्रंट पर अपनी रैपिड रिस्पॉन्स, डीप-स्ट्राइक और प्रिसिजन अटैक क्षमताओं को परखेगी। इस अभ्यास के जरिए पाकिस्तान को यह संदेश दिया जाएगा कि किसी भी हालात में भारतीय वायुसेना तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

कौन-कौन से एयरक्राफ्ट होंगे शामिल

हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी प्लेटफॉर्म्स की सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन पिछले ट्रेंड और तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस एक्सरसाइज में वायुसेना के लगभग सभी फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट शामिल होंगे।

इसमें राफेल फाइटर जेट्स की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। राफेल अपनी लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम के लिए जाना जाता है। सुखोई-30 एमकेआई एयर सुपीरियॉरिटी और हेवी स्ट्राइक का जिम्मा संभालेगा, जबकि स्वदेशी तेजस फाइटर जेट आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दिखाएगा।

इसके अलावा मिराज-2000, मिग-29, जैगुआर, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर और सी-130जे जैसे सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी मिशन का हिस्सा बन सकते हैं। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

दिन और रात दोनों में ऑपरेशन

वायुशक्ति-2026 की एक बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें दिन और रात, दोनों समय मिशन को अंजाम दिया जाएगा। रात के ऑपरेशन असली युद्ध की दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं, क्योंकि मॉडर्न वॉरफेयर में अंधेरे में सटीक हमला करने की क्षमता निर्णायक होती है।

रात के समय टारगेट पर सटीक बमबारी, मिसाइल लॉन्च और एयर डिफेंस इंटरसेप्शन यह दिखाएंगे कि भारतीय वायुसेना हर हालात में ऑपरेशनल रेडी है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का अभ्यास

इस एक्सरसाइज में सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि दुश्मन के हमलों से बचाव का अभ्यास भी किया जाएगा। एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को भी परखा जाएगा।

इससे यह देखा जाएगा कि अगर दुश्मन हवाई हमला करता है, तो भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम उसे कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से रोक पाते हैं। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

स्वदेशी AMCA के लिए हाई थ्रस्ट सुपरक्रूज जेट इंजन बनाने की तैयारियां शुरू, भारतीय पार्टनर संग GTRE बनाएगा 200 इंजन

Indigenous Jet Engine India
India Moves Towards Indigenous High-Thrust Jet Engine, DRDO’s GTRE Seeks Indian Industry Partner

Indigenous Jet Engine India: भारत ने स्वदेशी जेट इंजन बनाने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत काम करने वाली गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई), बेंगलुरु ने देश की कंपनियों से एक खास पार्टनर चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिसके तहत देश की किसी कंपनी को एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास जेट इंजन प्रोग्राम में डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर बनाया जाएगा। चुनी गई कंपनी इस टर्बोफैन इंजन के निर्माण, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की जिम्मेदारी संभालेगी। यह पार्टनर भारत का अपना एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास जेट इंजन डेवलप करने और बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

भारत के पास अभी तक अपना स्वदेशी जेट इंजन नहीं है और इसके लिए वह दूसरे देशों पर निर्भर है। पिछले साल 15 अगस्त को लाल किला से 79वें स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेट इंजन को लेकर मेड इन इंडिया पर जोर दिया था। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, टैलेंटेड यूथ और सरकार के सभी विभागों को सीधा आह्वान किया था कि भारत को अपने स्वदेशी फाइटर जेट्स के लिए अपना खुद का जेट इंजन बनाना चाहिए। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय चुनौती के रूप में पेश करते हुए कहा कि कोविड में वैक्सीन बनाई, यूपीआई बनाया, वैसे ही जेट इंजन भी भारत में बनना चाहिए। वहीं अब जीटीआरई ने इस पहल की शुरुआत कर दी है। (Indigenous Jet Engine India)

Indigenous Jet Engine India: क्यों अहम है यह कदम

जेट इंजन किसी भी फाइटर एयरक्राफ्ट का दिल होता है। अगर इंजन विदेशी हो, तो संकट के समय सप्लाई रुक सकती है, अपग्रेड में दिक्कत आ सकती है और ऑपरेशनल आजादी सीमित हो जाती है। भारत ने यह सब पहले भी देखा है।

कावेरी इंजन प्रोग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा है। इस प्रोग्राम से बहुत कुछ सीखा गया, लेकिन वह इंजन पूरी तरह लड़ाकू विमान के लिए तैयार नहीं हो पाया। इसके बाद भारत ने तय किया कि इंजन टेक्नोलॉजी में आधे-अधूरे कदम नहीं, बल्कि पूरी ताकत झोंकनी होगी।

इसी सोच के साथ अब एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास इंजन प्रोग्राम शुरू किया गया है, जो भविष्य के पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स जैसे एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) को ताकत देगा। (Indigenous Jet Engine India)

क्या किया है जीटीआरई ने

जीटीआरई ने भारतीय कंपनियों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। इसका मतलब है कि सरकार अब निजी और सार्वजनिक भारतीय कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में सीधे शामिल करना चाहती है। चुनी जाने वाली कंपनी सिर्फ पार्ट्स बनाने वाली नहीं होगी, बल्कि इंजन के निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन तक की जिम्मेदारी संभालेगी।

सरल शब्दों में कहें, तो लैब में बने डिजाइन को उड़ने लायक इंजन में बदलने की पूरी जिम्मेदारी इसी भारतीय कंपनी के कंधों पर होगी। (Indigenous Jet Engine India)

कैसा होगा यह नया जेट इंजन

जिस इंजन को बनाने की योजना है, वह आज की दुनिया के सबसे एडवांस्ड मिलिटरी इंजनों की कैटेगरी में आएगा। इसमें 10:1 का थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो होगा, यानी इंजन हल्का होने के बावजूद बेहद ताकतवर होगा।

इस इंजन की एक खास क्षमता सुपरक्रूज होगी। इसका मतलब है कि फाइटर जेट बिना आफ्टरबर्नर जलाए भी सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ सकेगा। इससे ईंधन की बचत होगी और विमान की रेंज और स्टेल्थ दोनों बढ़ेंगी।

इसके अलावा इंजन का इंफ्रारेड सिग्नेचर कम रखा जाएगा, ताकि दुश्मन के सेंसर और मिसाइल इसे आसानी से ट्रैक न कर सकें। इंजन में सिंगल क्रिस्टल ब्लेड्स का इस्तेमाल होगा, जो बहुत ज्यादा तापमान सह सकती हैं और इंजन की उम्र बढ़ाती हैं। (Indigenous Jet Engine India)

क्या है एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास इंजन

एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एक ट्विन-इंजन फाइटर जेट है, इसलिए इसकी ताकत को आमतौर पर प्रति इंजन थ्रस्ट के आधार पर समझा जाता है। एएमसीए को दो अलग-अलग चरणों में डेवलप किया जा रहा है और दोनों में इंजन को लेकर रणनीति भी अलग है।

एएमसीए के एमके-1 वर्जन में शुरुआती तौर पर अमेरिकी जीई एफ414 इंजन लगाने की योजना है। यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ लगभग 98 किलो-न्यूटन (kN) तक का अधिकतम थ्रस्ट देता है। चूंकि विमान में दो इंजन होंगे, इसलिए कुल थ्रस्ट करीब 196 kN के आसपास रहेगा। यह कॉन्फिगरेशन शुरुआती ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए चुना गया है, ताकि एयरक्राफ्ट की डेवलपमेंट टाइमलाइन प्रभावित न हो।

वहीं एएमसीए एमके-2 के लिए पूरी तरह अलग और ज्यादा महत्वाकांक्षी योजना है। इस वर्जन में स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे जीटीआरई और साफरान के सहयोग से को-डेवलप किया जाएगा। इस इंजन की प्लान्ड आफ्टरबर्नर थ्रस्ट क्षमता लगभग 120 kN प्रति इंजन होगी, जिसे भविष्य में 140 kN तक स्केल किया जा सकेगा। इस तरह दो इंजनों के साथ कुल थ्रस्ट करीब 240 kN तक पहुंच जाएगा।

इतनी ज्यादा थ्रस्ट क्षमता एएमसीए एमके-2 को सुपरक्रूज, बेहतर एक्सेलेरेशन और हाई मैन्यूवरेबिलिटी जैसी खूबियां देगी। यही वजह है कि इस इंजन को “एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास” कैटेगरी में रखा गया है।

जहां तक ड्राई थ्रस्ट की बात है, तो स्वदेशी इंजन से करीब 73 से 75 kN प्रति इंजन ड्राई थ्रस्ट मिलने की उम्मीद की जा रही है। यह आंकड़ा आफ्टरबर्नर के बिना भी तेज रफ्तार और लंबी रेंज ऑपरेशन के लिए अहम माना जाता है।

किस तरह का इंजन बनेगा

यह इंजन एक मॉडर्न टर्बोफैन जेट इंजन होगा। इसमें लो प्रेशर कंप्रेसर, हाई प्रेशर कंप्रेसर, कंबस्टर, हाई प्रेशर टरबाइन, लो प्रेशर टरबाइन, आफ्टरबर्नर और एग्जॉस्ट सिस्टम जैसे सभी एडवांस्ड हिस्से शामिल होंगे।

इसके साथ गियरबॉक्स, फ्यूल सिस्टम, ऑयल सिस्टम और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम यानी फाडेक (फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल) भी पूरी तरह आधुनिक होंगे। (Indigenous Jet Engine India)

कई चरणों में बंटा प्रोजेक्ट

जीटीआरई ने इस पूरे प्रोजेक्ट को कई चरणों में बांटा है। पहले चरण में डिजाइन से जुड़े काम होंगे। इसमें ड्रॉइंग, थ्री-डी मॉडल, डिजाइन में बदलाव और टेस्ट के आधार पर सुधार शामिल होंगे।

दूसरे चरण में मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी होगी। यानी किस हिस्से को कैसे बनाया जाएगा, कौन सी मशीन लगेगी, कौन सा मटेरियल इस्तेमाल होगा और क्वालिटी कैसे जांची जाएगी।

तीसरे चरण में असली मैन्युफैक्चरिंग शुरू होगी। इसमें पार्ट्स बनाना, सब-असेंबली तैयार करना और जरूरी टेस्ट करना शामिल होगा।

चौथे और सबसे अहम चरण में इंजन की असेंबली, बैलेंसिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन और फाइनल टेस्टिंग होगी। इसके बाद इंजन को सर्टिफिकेशन के लिए तैयार किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट में जीटीआरई डिजाइन अथॉरिटी बना रहेगा। यानी इंजन का टेक्निकल कंट्रोल सरकार के पास रहेगा। वहीं चुनी गई कंपनी इंडस्ट्रियल एग्जिक्यूशन की जिम्मेदारी निभाएगी।

इसमें एयरवर्थिनेस एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन, क्वालिटी कंट्रोल, डॉक्यूमेंटेशन और लाइफ-साइकिल सपोर्ट भी शामिल होगा। (Indigenous Jet Engine India)

मजबूत फाइनेंशियल बैकग्राउंड जरूरी

जीटीआरई ने साफ कर दिया है कि यह काम हर किसी के बस का नहीं है। कंपनी के पास मजबूत फाइनेंशियल बैकग्राउंड होना जरूरी है। कम से कम 1500 करोड़ रुपये का टर्नओवर, अच्छी क्रेडिट रेटिंग और मजबूत फाइनेंशियल बैकिग जरूरी रखी गई है।

तकनीकी तौर पर कंपनी को टाइटेनियम, निकेल एलॉय, एडवांस्ड मटेरियल और हाई प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही एयरोस्पेस क्वालिटी सिस्टम जैसे एएस9100 का पालन जरूरी होगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 10 साल में 18 इंजन तैयार किए जाएंगे। जीटीआरई ने साफ बोल दिया है कि सातवें साल से इंजन की डिलीवरी शुरू होगी, जो 10वें साल तक 18 तक पहुंच जाएगी। शुरुआत में इंजन बनाने की रफ्तार धीमी रहेगी, ताकि क्वालिटी और भरोसे को मजबूत किया जा सके।

सरकार का इरादा सिर्फ प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं है। भविष्य में करीब 200 इंजन बनाने का रास्ता भी इसी प्रोजेक्ट से खुलेगा। इसका मतलब है कि भारत में पहली बार एक पूरी मिलिट्री जेट इंजन प्रोडक्शन लाइन खड़ी हो सकती है। (Indigenous Jet Engine India)

क्यों बदल सकता है भारत का भविष्य

अगर यह प्रोजेक्ट अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, तो भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा, जो अपने दम पर एडवांस्ड फाइटर जेट इंजन बना सकते हैं। इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को भी नई ऊंचाई मिलेगी। (Indigenous Jet Engine India)

क्या है रीआर्म इनिशिएटिव? क्यों यूरोप फिर से हथियारों पर झोंक रहा है अरबों यूरो और कैसे भारत बन रहा है बड़ा पार्टनर

ReArm Initiative explainer
What is the EU’s ReArm Initiative (Readiness 2030) and Why India is Emerging as a Key Defence Partner

ReArm Initiative explainer: यूरोप एक बार फिर अपने सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में है। दशकों तक शांति, कूटनीति और अमेरिका की सुरक्षा के भरोसे रहने के बाद अब यूरोपीय संघ ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाना चाहता है। शीत युद्ध के बाद लंबे समय तक यूरोपीय देशों ने यह मान लिया था कि बड़े युद्ध अब अतीत का हिस्सा बन चुके हैं और भविष्य में कूटनीति, आर्थिक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही सुरक्षा की गारंटी होंगी। इसी भरोसे यूरोप ने न सिर्फ अपने रक्षा खर्च में कटौती की, बल्कि अमेरिका और नाटो की सुरक्षा छतरी पर निर्भरता भी बढ़ा दी।

लेकिन बीते कुछ वर्षों में बदले वैश्विक हालात ने इस सोच को पूरी तरह झकझोर दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत, साइबर हमलों का खतरा और अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं ने यूरोप को यह एहसास करा दिया कि अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे खुद उठानी होगी। इसी बदली हुई सोच से जन्म हुआ है ‘रीआर्म इनिशिएटिव’, जिसे अब आधिकारिक तौर पर रीडिनेस 2030 (Readiness 2030) कहा जाता है। (ReArm Initiative explainer)

यह पहल सिर्फ हथियार खरीदने या सेना मजबूत करने तक सीमित नहीं है। यह यूरोप की पूरी सुरक्षा सोच, रक्षा उद्योग, सप्लाई चेन और वैश्विक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश है। इस प्रक्रिया में भारत भी एक अहम और भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। (ReArm Initiative explainer)

ReArm Initiative explainer: रीआर्म इनिशिएटिव क्या है

रीआर्म इनिशिएटिव का पूरा नाम रीआर्म यूरोप प्लान / रीडिनेस 2030 है। इस योजना को यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पेश किया था। शुरुआत में इसका नाम “रीआर्म यूरोप” रखा गया था, लेकिन इटली और स्पेन जैसे कुछ देशों को यह नाम जरूरत से ज्यादा आक्रामक लगा। उनका तर्क था कि “रीआर्म” शब्द यूरोप की शांत छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसी आपत्ति के बाद इस योजना को रीडिनेस 2030 के नाम से रीब्रैंड किया गया। नाम बदला, लेकिन उद्देश्य वही रहा। इस पहल का सीधा और स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक यूरोप को सैन्य रूप से पूरी तरह तैयार किया जाए, ताकि वह किसी भी बड़े खतरे का सामना अपने दम पर कर सके। (ReArm Initiative explainer)

यूरोप को अचानक हथियारों की जरूरत क्यों पड़ी

पिछले तीन से चार दशकों में यूरोप ने डिफेंस को प्राथमिकता सूची में काफी नीचे रखा। शीत युद्ध के खत्म होने के बाद यह धारणा मजबूत हो गई थी कि अब यूरोप में बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना नहीं है। इसी सोच के चलते कई देशों ने अपनी सेनाओं का साइज घटाया, हथियारों के भंडार कम किए और रक्षा बजट में लगातार कटौती की।

लेकिन वर्ष 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध इस सोच पर करारा तमाचा साबित हुआ। इस युद्ध ने यह साफ कर दिया कि यूरोप के पास न तो पर्याप्त गोला-बारूद है और न ही लंबे समय तक युद्ध झेलने की तैयारी। इसके साथ ही यह भी उजागर हुआ कि यूरोप अब भी अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और नाटो पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है।

तीसरा बड़ा सबक यह था कि आधुनिक युद्ध सिर्फ टैंक और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गए हैं। साइबर अटैक, ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अब युद्ध का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में पुरानी रणनीतियां और कमजोर सिक्योरिटी स्ट्रक्चर यूरोप के लिए बड़ा जोखिम बन गए। (ReArm Initiative explainer)

इसी बीच अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनकी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी ने यूरोप की चिंता और बढ़ा दी। अमेरिका ने साफ कर दिया कि उसकी पहली प्राथमिकता अब चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र है, न कि यूरोप। इसका मतलब यह था कि भविष्य में यूरोप को अमेरिकी सैन्य मदद सीमित तौर पर ही मिल सकती है। (ReArm Initiative explainer)

इन सभी कारणों ने मिलकर यूरोप को मजबूर कर दिया कि उसे अब खुद अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।

रीआर्म इनिशिएटिव का सबसे बड़ा लक्ष्य

रीआर्म इनिशिएटिव का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य है लगभग 800 बिलियन यूरो, यानी करीब 80 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस इन्वेस्टमेंट जुटाना। यह राशि किसी एक बजट या एक स्रोत से नहीं आएगी। इसके लिए अलग-अलग वित्तीय रास्ते अपनाए जाएंगे, जिनमें सरकारी बजट, यूरोपीय संस्थानों की फंडिंग, लोन और प्राइवेट निवेश शामिल होंगे।

यूरोपीय संघ का मानना है कि अगर उसे 2030 तक पूरी तरह तैयार होना है, तो उसे रक्षा क्षेत्र में उसी स्तर का निवेश करना होगा, जैसा शीत युद्ध के दौर में किया गया था। (ReArm Initiative explainer)

रक्षा खर्च बढ़ाने की नई सोच

रीआर्म इनिशिएटिव के तहत यूरोपीय देशों से कहा गया है कि वे अपने रक्षा खर्च को धीरे-धीरे बढ़ाकर जीडीपी का 3.5 फीसदी तक ले जाएं। वर्ष 2024 में यह औसतन सिर्फ 1.9 फीसदी थी। यूरोप अब इस निष्कर्ष पर पहुंच चुका है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और सुरक्षित समाज के लिए मजबूत सेना भी जरूरी है। बिना पर्याप्त रक्षा क्षमता के न तो व्यापार सुरक्षित रह सकता है और न ही नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी दी जा सकती है। (ReArm Initiative explainer)

इस योजना के पांच बड़े स्तंभ

सेफ (SAFE) और संयुक्त खरीद की रणनीति

रीआर्म इनिशिएटिव का एक अहम हिस्सा है सेफ यानी सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप। इसके तहत यूरोपीय संघ कैपिटल मार्केट से करीब 150 बिलियन यूरो तक का लोन जुटाएगा। यह पैसा सदस्य देशों को दिया जाएगा ताकि वे मिलकर हथियार और रक्षा सिस्टम खरीद सकें।

इस संयुक्त खरीद का मकसद लागत कम करना, टैक्निकल स्टैंडर्ड्स एक जैसे रखना और आपसी तालमेल बढ़ाना है। मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, एयर डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में इसका खास फोकस रहेगा। (ReArm Initiative explainer)

फिस्कल नियमों में छूट और ज्यादा खर्च की आजादी

यूरोपीय संघ के सख्त वित्तीय नियम आमतौर पर देशों को ज्यादा घाटा करने से रोकते हैं। लेकिन रीआर्म इनिशिएटिव के तहत रक्षा खर्च को लेकर इन नियमों में अस्थायी छूट दी गई है।

अब सदस्य देश बिना नियम तोड़े अपने जीडीपी का अतिरिक्त 1.5 फीसदी डिफेंस पर खर्च कर सकेंगे। इससे करीब 650 बिलियन यूरो का अतिरिक्त रक्षा निवेश संभव हो सकेगा। (ReArm Initiative explainer)

कोहेशन फंड और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक की नई भूमिका

अब तक यूरोपीय संघ के कोहेशन फंड मुख्य रूप से क्षेत्रीय और सामाजिक विकास के लिए इस्तेमाल होते थे। लेकिन नई रणनीति के तहत इन फंड्स का कुछ हिस्सा रक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी लगाया जा सकेगा।

इसके साथ ही यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक को रक्षा कंपनियों को ज्यादा लोन देने की अनुमति दी गई है। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले यह बैंक रक्षा क्षेत्र से दूरी बनाए रखता था। (ReArm Initiative explainer)

प्राइवेट निवेश को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की कोशिश

रीआर्म इनिशिएटिव सिर्फ सरकारी पैसे पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यूरोपीय संघ चाहता है कि पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और बड़े निवेशक भी रक्षा उद्योग में निवेश करें।

इसके लिए सेविंग्स एंड इन्वेस्टमेंट यूनियन जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि प्राइवेट कैपिटल को डिफेंस सेक्टर की ओर मोड़ा जा सके। (ReArm Initiative explainer)

यूरोपीय रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाना

यूरोपीय संघ ने इसके लिए व्हाइट पेपर ऑन यूरोपियन डिफेंस – रीडिनेस 2030 जारी किया है। इसका उद्देश्य यूरोप के भीतर ही मिसाइल डिफेंस, आर्टिलरी, ड्रोन, एयर डिफेंस, स्पेस और साइबर डिफेंस जैसी क्षमताओं को मजबूत करना है।

इसके साथ ही यूक्रेन की रक्षा उद्योग को भी यूरोपीय रक्षा ढांचे से जोड़ा जा रहा है, ताकि युद्ध के अनुभव का इस्तेमाल पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए किया जा सके। (ReArm Initiative explainer)

अमेरिका की नई रणनीति से बढ़ी यूरोप की चिंता

जनवरी 2026 में अमेरिका ने अपनी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी जारी की, जिसमें चीन को सबसे बड़ा रणनीतिक चुनौती बताया गया। इस दस्तावेज में साफ किया गया कि अमेरिका की प्राथमिकता अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र है।

यूरोप के लिए यह एक स्पष्ट संकेत था कि भविष्य में उसे अपनी पारंपरिक रक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। यही बयान यूरोप के लिए एक बड़े वेक-अप कॉल की तरह साबित हुआ। (ReArm Initiative explainer)

भारत का एंट्री पॉइंट कहां है

27 जनवरी यानी आज ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर हुए। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि भारत की रक्षा इंडस्ट्री रीआर्म इनिशिएटिव में अहम भूमिका निभा सकती है।

यूरोपीय संघ अब हथियारों के लिए सीमित सप्लायर्स पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करना चाहता है और यहीं भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आता है।

भारत और यूरोप का पुराना रक्षा रिश्ता

भारत और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग कोई नई बात नहीं है। राफेल फाइटर जेट, स्कॉर्पीन सबमरीन और सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे प्रोजेक्ट पहले से इस रिश्ते का हिस्सा हैं।

अब फर्क यह है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि यूरोपीय रक्षा सप्लाई चेन का सक्रिय हिस्सा बनता जा रहा है।

इसी के साथ-साथ भारत की निजी रक्षा कंपनियां भी यूरोप की मदद कर रही हैं। भारतीय कंपनियां यूरोपीय देशों को गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नौसैनिक जहाजों की मरम्मत सेवाएं और नए तरह के बिना पायलट वाले सिस्टम (अनमैन्ड सिस्टम) सप्लाई कर रही हैं। दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने तेजी से अपने हथियार और सैन्य तैयारियां बढ़ानी शुरू की हैं, लेकिन इस दौरान वहां इन चीजों की कमी सामने आई है। ऐसे में भारत की निजी रक्षा कंपनियां इन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। (ReArm Initiative explainer)

इंडियन ओशन में यूरोप की मौजूदगी

इस साझेदारी का एक अहम नतीजा यह भी है कि यूरोपीय संघ अब अपना एक लायजन ऑफिसर भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) गुरुग्राम में तैनात करेगा।

इससे काउंटर पाइरेसी, समुद्री सुरक्षा और खतरे के आकलन में भारत और यूरोप के बीच तालमेल और मजबूत होगा।

रीआर्म इनिशिएटिव पर उठते सवाल

हर बड़ी योजना की तरह रीआर्म इनिशिएटिव पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ देशों को चिंता है कि इससे सोशल और ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए फंड कम हो सकता है। कुछ को डर है कि यूरोपीय संघ जरूरत से ज्यादा सेंट्रलाइज्ड हो रहा है।

इसके बावजूद ज्यादातर यूरोपीय देश मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह कदम टालना संभव नहीं था। (ReArm Initiative explainer)

हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत-EU की ताकत; जर्मनी के बाद IFC-IOR में तैनात होगा यूरोपीय संघ का लायजन ऑफिसर

India EU defence cooperation
Raksha Mantri's meeting with the High Representative/Vice President of the European Union Commission held in New Delhi on January 27, 2026

India EU defence cooperation: भारतीय नौसेना और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग अब एक नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है। इंडियन ओशन रीजन में बढ़ती चुनौतियों और सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए यूरोपीय संघ ने एक अहम फैसला लिया है। ईयू अब अपना एक लायजन ऑफिसर (एलओ) भारतीय नौसेना के गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) में तैनात करेगा। इस कदम से समुद्री निगरानी, सूचना साझा करने और साझा सुरक्षा प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर 27 जनवरी को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ (ईयू) की हाई रिप्रेजेंटेटिव और यूरोपीय कमीशन की वाइस प्रेसिडेंट काजा कलास से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और इंडियन ओशन रीजन में साझा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और यूरोपीय संघ अपने रिश्तों को सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित न रखकर जमीन पर ठोस सहयोग में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि भारत और ईयू लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे मूल्यों को साझा करते हैं, और यही साझा सोच दोनों को एक मजबूत साझेदारी की ओर ले जाती है। (India EU defence cooperation)

India EU defence cooperation: रक्षा उद्योगों की साझेदारी पर जोर

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा उद्योगों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इसे “लार्जर ग्लोबल गुड” यानी बड़े वैश्विक हित के लिए जरूरी बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, यह सहयोग भारत के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप है और साथ ही यूरोपीय संघ की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी मेल खाता है।

उन्होंने कहा कि अगर भारत और ईयू की रक्षा सप्लाई चेन एक-दूसरे से जुड़ती हैं, तो इससे एक भरोसेमंद और मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम तैयार होगा। यह साझेदारी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सैन्य क्षमताएं विकसित करने में मदद करेगी और एक फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेगी। (India EU defence cooperation)

रीआर्म इनिशिएटिव’ में भारत की भूमिका

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत की रक्षा इंडस्ट्री यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म इनिशिएटिव’ में अहम भूमिका निभा सकती है। यूरोपीय संघ इस समय अपने रक्षा क्षेत्र में सप्लायर डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दे रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। ऐसे में भारत एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास आज रक्षा उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत आधार है, जिसे यूरोपीय जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा।

रक्षा मंत्री ने काजा कलास की भारत यात्रा को खास बताया, क्योंकि यह भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर यूरोपीय संघ की मौजूदगी दोनों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है।

काजा कलास ने भी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर परेड में यूरोपीय संघ की भागीदारी उनके लिए गर्व का विषय है और यह भारत–ईयू रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। (India EU defence cooperation)

India EU defence cooperation
India–EU Defence Cooperation Gains Momentum as EU to Deploy Liaison Officer at Indian Navy’s IFC-IOR

इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करने पर सहमति

काजा कलास ने बैठक के दौरान कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ग्लोबल ट्रेड और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिस से सीख सकते हैं।

उन्होंने जॉइंट एक्सरसाइज के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे न सिर्फ आपसी समझ मजबूत होगी, बल्कि समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी। (India EU defence cooperation)

भारतीय नौसेना के IFC-IOR में ईयू की मौजूदगी

इस बैठक में एक और अहम मुद्दे पर सहमति बनी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसके तहत ईयू एक लायजन ऑफिसर (एलओ) को भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर), गुरुग्राम में तैनात करेगा।

यह लायजन ऑफिसर समुद्री डकैती यानी काउंटर पाइरेसी और इंडियन ओशन रीजन में उभरते खतरों के आकलन में भारतीय नौसेना के साथ बेहतर तालमेल बनाएगा। इससे ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन मजबूत होगा और दोनों पक्षों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करना आसान होगा।

इससे पहले जर्मनी के चांसलर की भारत यात्रा के दौरान इंडियन ओशन रीजन में साझा सुरक्षा और सूचना साझेदारी को लेकर अहम सहमति बनी थी। जर्मनी ने भी अपना लायजन ऑफिसर आईएफसी-आईओआर में तैनात करने पर सहमति दी थी। (India EU defence cooperation)

क्या है आईएफसी-आईओआर

इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) भारतीय नौसेना का एक बेहद अहम केंद्र है, जिसकी स्थापना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए की गई है। यह केंद्र गुरुग्राम में स्थित है और इसका मुख्य काम हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखना है।

आईएफसी-आईओआर के जरिए अलग-अलग देशों की नौसेनाएं और समुद्री एजेंसियां आपस में जानकारी साझा करती हैं। यहां से जहाजों की आवाजाही, समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाती है। अगर किसी इलाके में कोई खतरा दिखता है, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित देशों तक पहुंचाई जाती है। (India EU defence cooperation)

आईएफसी-आईओआर को भारतीय नौसेना द्वारा होस्ट किया जाता है और इसमें मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के अधिकारी काम करते हैं। इसके साथ ही केंद्र में अंतरराष्ट्रीय लियाजन अफसर भी तैनात होते हैं, जो अन्य देशों से आते हैं। ये साझेदारी भागीदार देशों के प्रतिनिधि होते हैं और साझा समुद्री सुरक्षा जानकारी और सहयोग को बढ़ाते हैं।

अब तक आईएफसी-आईओआर में लगभग 12 देशों के लियाजन अफसर तैनात रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जापान, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, श्रीलंका, सेशेल्स, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के अफसर शामिल रहे हैं। केंद्र में तकनीकी और एनालिटिकल टीमों के सदस्य भी काम करते हैं, जो 24×7 समुद्री जानकारी एकत्रित और विश्लेषित करते हैं।

यह केंद्र हिंद महासागर के मैरिटाइम (समुद्री) सुरक्षा पर नजर रखता है और 28 देशों से 76 से ज्यादा लिंक-अप्स बनाए हुए है, जिसमें विभिन्न देशों और मल्टी-नेशनल सुरक्षा केंद्र शामिल होते हैं। (India EU defence cooperation)

भारत–ईयू रिश्तों में नया अध्याय

कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत और यूरोपीय संघ के रक्षा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। जहां एक ओर भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ भी भरोसेमंद साझेदारों के साथ अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना चाहता है। (India EU defence cooperation)

पाकिस्तान का झूठ फिर बेनकाब, जिस राफेल को गिराने का किया दावा, वही गणतंत्र दिवस परेड में आसमान में गरजा

Rafale BS-022
Rafale BS-022

Rafale BS-022: पाकिस्तान की तरफ से फैलााई गई मनगढ़ंत और झूठी खबरों की पोल एक बार फिर दुनिया के सामने खुल गई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने झूठ, आधे-अधूरे दावे और बिना सबूत की कहानियां गढ़कर अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश की थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना और वहां के कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने यह दावा करना शुरू कर दिया था कि पाकिस्तान एयर फोर्स (पीएएफ) ने भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के राफेल फाइटर जेट को मार गिराया है। इस दावे को ऐसे पेश किया गया जैसे यह कोई बड़ी सैन्य जीत हो। लेकिन अब 26 जनवरी पर ही पाकिस्तान की इस पूरे झूठे नैरेटिव की पूरी तरह पोल खुल गई है।

Rafale BS-022: ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों फैलाया झूठा प्रचार

मई 2025 में शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के लिए सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका था। भारत ने आतंकवादी हमलों के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। 100 से ज्यादा आतंकी ढेर किए। इस दौरान भारतीय वायुसेना, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और आर्टिलरी का इस्तेमाल हुआ। पाकिस्तान न सिर्फ इन हमलों को रोकने में नाकाम रहा, बल्कि उसे कुछ ही दिनों में सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा। (Rafale BS-022)

ऐसे में पाकिस्तान के सामने अपनी घरेलू जनता और सेना का मनोबल बनाए रखने की बड़ी चुनौती थी। इसी दबाव में वहां की सेना और समर्थक मीडिया ने यह झूठा दावा उछाल दिया कि उन्होंने भारत के राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट को मार गिराया है। सोशल मीडिया पर पुराने फोटो, एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक ग्राफिक्स फैलाए गए। कभी कहा गया कि एक राफेल गिराया गया, तो कभी संख्या बढ़ाकर चार, पांच या आठ तक बता दी गई। दावों की संख्या बदलती रही, लेकिन सबूत एक भी नहीं दिया गया। (Rafale BS-022)

वह राफेल शामिल हुआ गणतंत्र दिवस फ्लाइपास्ट में

पाकिस्तान के झूठ की सबसे बड़ी पोल इस साल 26 जनवरी को खुद-ब-खुद खुल गई। नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय वायुसेना का भव्य फ्लाइपास्ट हुआ। इस फ्लाइपास्ट में कई आधुनिक फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल थे। इसी दौरान आसमान में राफेल फाइटर जेट्स की गर्जना भी सुनाई दी।

सबसे अहम बात यह रही कि फ्लाइपास्ट में राफेल BS-022 भी शामिल था। यही वही एयरक्राफ्ट है, जिसके बारे में पाकिस्तान ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे मार गिराया गया था। अगर पाकिस्तान का दावा सच होता, तो यह राफेल न तो भारतीय वायुसेना के बेड़े में मौजूद होता और न ही देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में उड़ान भरता नजर आता। (Rafale BS-022)

BS-022 का पूरी क्षमता के साथ उड़ान भरना इस बात का सीधा और ठोस सबूत है कि पाकिस्तान का दावा पूरी तरह झूठा था। वहीं भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की तरह ढोल पीटते हुए उसके दावे पर न तो किसी तरह का बयान या प्रेस रिलीज जारी नहीं की, बल्कि खुले आसमान में पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के झूठ नैरेटिव का अपने अंदाज में जवाब दिया। (Rafale BS-022)

ऑपरेशन सिंदूर फॉर्मेशन से दिया जवाब

26 जनवरी के मौके पर भारतीय वायुसेना ने खास सिंदूर फॉर्मेशन तैयार की थी। यह फॉर्मेशन मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर को ट्रिब्यूट थी, जिसमें भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक्स की थीं। इस फॉर्मेशन का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की सटीकता, हवाई श्रेष्ठता और ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की गई रणनीति को दर्शाना था। यह पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने इस नाम की फॉर्मेशन को गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट में शामिल किया, जो पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को भी बेनकाब करने का एक तरीका था।

सिंदूर फॉर्मेशन की खूबी यह थी कि यह फॉर्मेशन एक “स्पीयरहेड” या कॉम्पैक्ट एरे शेप में थी, जो ऑपरेशन सिंदूर की स्ट्राइक पैकेज को मिरर करती थी। इसमें 7-विमान शामिल थे। जिसमें 2 राफेल फाइटर जेट्स, 2 मल्टी-रोल फाइटर्स सुखोई-30, 2 मिग-29 और ग्राउंड अटैक के लिए प्रसिद्ध एक जगुआर शामिल था। इन दो राफेल में से एक BS-022 था, जिसे पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में मार गिराने का झूठा दावा किया था। (Rafale BS-022)

झूठा प्रोपेगैंडा कोई नई बात नहीं

राफेल को लेकर फैलाया गया यह झूठ पाकिस्तान की पुरानी आदतों का ही हिस्सा है। इससे पहले भी बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने तरह-तरह के झूठे दावे किए थे। कभी कहा गया कि भारतीय एयरस्ट्राइक में कोई नुकसान नहीं हुआ, कभी यह दावा किया गया कि भारत के कई फाइटर जेट मार गिराए गए। बाद में वही पाकिस्तान अपने ही बयानों से पलटता नजर आया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी वही पैटर्न दोहराया गया। सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट्स ने खुद को “डिफेंस एक्सपर्ट” बताकर राफेल के गिरने की कहानियां गढ़ीं। पाकिस्तानी टीवी चैनलों ने बिना किसी जांच-पड़ताल के इन्हें चला दिया। लेकिन जब समय आया, तो सच्चाई ने खुद ही झूठ का पर्दाफाश कर दिया। (Rafale BS-022)

राफेल F4 अपग्रेड ने भी किया साफ इशारा

पाकिस्तान के झूठ को उजागर करने वाला एक और बड़ा फैक्ट भारतीय वायुसेना का राफेल एफ4 अपग्रेड है। भारत ने अपने राफेल फ्लीट को और आधुनिक बनाने के लिए एफ4 स्टैंडर्ड अपग्रेड का फैसला किया है। यह अपग्रेड 35 राफेल विमानों के लिए किया जा रहा है।

अगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सच में कोई राफेल नष्ट हुआ होता, जैसा कि पाकिस्तान दावा कर रहा था, तो विमानों की संख्या में फर्क साफ नजर आता। लेकिन 35 राफेल्स के लिए किया गया अपग्रेड यह दिखाता है कि भारतीय वायुसेना का राफेल बेड़ा पूरी तरह सुरक्षित है।

एफ4 अपग्रेड में बेहतर रडार, ज्यादा एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, नए हथियार और बेहतर नेटवर्क-सेंट्रिक कैपेबिलिटी शामिल होंगी। यह अपग्रेड इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना भविष्य की चुनौतियों के लिए अपने बेड़े को लगातार मजबूत कर रही है, न कि किसी नुकसान से उबरने की कोशिश कर रही है। (Rafale BS-022)

भारत की रणनीति: शोर नहीं, केवल सबूत

इस पूरे मामले में भारत का रवैया भी गौर करने लायक है। पाकिस्तान के दावों पर भारत ने न तो तुरंत प्रतिक्रिया दी और न ही किसी तरह की बयानबाजी की। भारतीय वायुसेना ने हमेशा की तरह प्रोफेशनल अप्रोच अपनाई। न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, न सोशल मीडिया पर जवाबी हमले।

भारत ने तथ्यों को अपने आप सामने आने दिया। गणतंत्र दिवस पर राफेल की उड़ान ही सबसे बड़ा जवाब बन गई। यह दिखाता है कि भारत की रणनीति शोर मचाने की नहीं, बल्कि काम करके दिखाने की है। (Rafale BS-022)

पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ऐसे झूठे दावों से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख लगातार कमजोर हो रही है। जब कोई देश बार-बार बिना सबूत के बड़े-बड़े दावे करता है और बाद में वे झूठ साबित होते हैं, तो दुनिया उसे गंभीरता से लेना बंद कर देती है। (Rafale BS-022)

गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगा अर्जुन टैंक का नया अवतार, जानें क्या-क्या हुए बदलाव?

Arjun Tank Republic Day 2026
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army showcases upgraded MBT with anti-drone protection

Arjun Tank Republic Day 2026: 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हर भारतीय की नजर भारतीय सेना पर होगी। वहीं, इस बार गणतंत्र दिवस परेड में भारत के मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन की खास मौजूदगी होगी। हालांकि यह टैंक पहले भी कई बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में अर्जुन टैंक की मौजूदगी कुछ अलग है। भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध के नए खतरों को कितनी गंभीरता से समझते हुए और उनसे निपटने के लिए किस तरह जमीन पर ही समाधान तैयार किए हैं।

Arjun Tank Republic Day 2026: मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से किए बदलाव

भारतीय सेना का यह स्वदेशी मेन बैटल टैंक (एमबीटी) इससे पहले भी कई बार कर्तव्य पथ पर दिख चुका है। लेकिन इस बार इसकी पहचान सिर्फ एक स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर होगी, जिसे मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से बदलाव किए गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक अब सीधे तौर पर भारतीय टैंकों में दिखाई देने लगे हैं।

भारतीय सेना की आर्मर्ड डिवीजन के लिए अर्जुन एक भरोसेमंद हथियार रहा है। यह थर्ड-जनरेशन एमबीटी-1 टैंक पहले ही अपनी ताकत, सटीकता और मजबूती साबित कर चुका है। हाल के सालों में दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते लेकिन घातक ड्रोन भारी टैंकों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। ड्रोन आमतौर पर टैंक के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वहां का कवच सामने और साइड की तुलना में पतला होता है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अर्जुन टैंक में एंटी-ड्रोन सुधार किए हैं। (Arjun Tank Republic Day 2026)

Arjun Tank Republic Day 2026
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army showcases upgraded MBT with anti-drone protection

ड्रोन युग के लिए तैयार अर्जुन टैंक

इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए अर्जुन टैंक में कुछ अहम फील्ड-लेवल बदलाव किए गए हैं, जो इस साल गणतंत्र दिवस परेड में साफ नजर आएंगे। सबसे पहली चीज जो लोगों की नजर में आएगी, वह है टैंक के ऊपर लगाया गया कोप-केज, यानी तार की जाली। यह साधारण दिखने वाला स्ट्रक्चर असल में टैंक के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। ड्रोन से गिराए गए हथियार या टॉप-अटैक वारहेड जब इस जाली से टकराते हैं, तो वे या तो समय से पहले फट जाते हैं या उनकी दिशा बदल जाती है। इससे टैंक के अंदर बैठे क्रू की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पश्चिमी सेक्टर में तैनात 75 आर्मर्ड रेजिमेंट के मेजर हितेश मेहता इस साल परेड में शामिल होने वाले एकमात्र अर्जुन टैंक के कमांडर हैं। वह बताते हैं कि यह कम लागत वाला लेकिन बेहद असरदार समाधान है। उनके मुताबिक, ऐसे बैटलफील्ड में जहां हर समय ऊपर से खतरा बना रहता है, यह जाली क्रू का भरोसा बढ़ाती है और उन्हें ज्यादा सुरक्षित महसूस कराती है। इसे तेजी से किसी भी टैंक पर लगाया जा सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन पर अब ड्रोन भी होंगे तैनात

ड्रोन खतरे से निपटने के लिए सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि हमला भी जरूरी है। इसी सोच के तहत अर्जुन टैंक को अब ड्रोन से लैस किया गया है। टैंक पर दो तरह के ड्रोन लगाए गए हैं। पहला ड्रोन हालात की जानकारी लेने के लिए इस्तेमाल होता है। इसकी उड़ान क्षमता करीब 25 से 30 मिनट की है और यह टैंक से कई किलोमीटर दूर जाकर इलाके की स्थिति की जानकारी दे सकता है। कम विजिबिलिटी वाले इलाकों में यह ड्रोन आंखों और कानों की तरह काम करता है।

मेजर मेहता ने बताया कि अगर टैंक किसी सीमित या खतरनाक इलाके में फंसा हो, तो यह ड्रोन उड़ाकर आगे के हालात देखे जा सकते हैं, जिससे बिना जोखिम लिए सही फैसला किया जा सके।

दूसरा ड्रोन कामिकाजे ड्रोन है। इसमें कम से कम 5 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। इसका इस्तेमाल लाइन-ऑफ-साइट से बाहर मौजूद टारगेट पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। यानी अब टैंक सिर्फ सामने दिख रहे खतरे तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर बैठे दुश्मन को भी निशाना बना सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

क्रू की क्या हैं जिम्मेदारियां

अर्जुन टैंक में कुल चार सदस्यीय क्रू होता है। इसमें कमांडर, ड्राइवर, गनर और ऑपरेटर या लोडर शामिल होते हैं। ड्रोन को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी ऑपरेटर की होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कमांडर भी इसे कंट्रोल कर सकता है। वहीं, आधुनिक टैंक सिर्फ भारी हथियार नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।

अर्जुन मूल रूप से 120 मिमी की पावरफुल गन से लैस है, जो दुश्मन के टैंकों और ठिकानों के लिए एक बड़ा खतरा मानी जाती है। अब इसके साथ ड्रोन आधारित ऑफेंसिव और डिफेंसिव जुगाड़ जुड़ जाने से इसकी भूमिका और व्यापक हो गई है। भारतीय सेना भविष्य में टैंक क्रू को एंटी-ड्रोन गन देने पर भी विचार कर रही है, ताकि ड्रोन से आने वाले खतरे को मौके पर ही रोका जा सके। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन में किए 70 से अधिक अहम सुधार

अर्जुन एमके-1ए भारत का एडवांस मेन बैटल टैंक है, जिसके लिए भारतीय सेना ने 118 यूनिट्स का ऑर्डर दिया था। इस टैंक में डीआरडीओ ने 70 से अधिक अहम सुधार किए थे। इनमें कमांडर के लिए बेहतर पैनोरमिक साइट, रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन, मजबूत एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर, आधुनिक थर्मल इमेजिंग, नाइट विजन और ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा टैंक की मोबिलिटी और ट्रांसमिशन सिस्टम को भी बेहतर बनाया गया है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

टी-90 टैंक में भी बदलाव

गणतंत्र दिवस परेड में सिर्फ अर्जुन ही नहीं, बल्कि टी-90 टैंक भी शामिल होंगे। इन टैंकों में भी इसी तरह के बॉडी में बदलाव किए गए हैं, ताकि ड्रोन और टॉप-अटैक हथियारों से बचाव किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने ड्रोन को अब अस्थायी खतरा नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध का स्थायी हिस्सा मान लिया है।

दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते ड्रोन, जिनकी कीमत टैंक के मुकाबले बेहद कम होती है, ऊपर से हमला कर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। टैंकों का फ्रंट और साइड आर्मर भले ही मजबूत हो, लेकिन ऊपर का हिस्सा अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ड्रोन सटीक वार करते हैं। यही वजह है कि अब टैंक डिजाइन और इस्तेमाल दोनों में बदलाव हो रहा है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

Explained: जंग में कैसे लड़ती है भारतीय सेना? गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेगा पूरा बैटल फॉर्मेशन

Battle Array Republic Day 2026- How Indian Army showcases real combat formations at Kartavya Path
Battle Array Republic Day 2026- How Indian Army showcases real combat formations at Kartavya Path

Battle Array Republic Day 2026: इस बार गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ हर साल होने वाले मार्च-पास्ट और हथियारों की झलक तक सीमित नहीं रहेगी। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर पहली बार आम जनता ‘बैटल एरे’ यानी युद्ध जैसी सैन्य संरचना को करीब से देख पाएगी। यह वही क्रम होगा, जिसमें सेना असली युद्ध के समय आगे बढ़ती है, सबसे पहले निगरानी, फिर हमला, उसके बाद सुरक्षा और आखिर में लॉजिस्टिक्स यानी रसद व्यवस्था।

इस बार की परेड इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें पहली बार आम लोग यह देख पाएंगे कि भारतीय सेना युद्ध के समय कैसे आगे बढ़ती है। बैटल एरे के जरिए सेना की जॉइंटनेस, आत्मनिर्भर भारत, और डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन की झलक एक ही जगह देखने को मिलेगी। (Battle Array Republic Day 2026)

Battle Array Republic Day 2026: पहली बार ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन

गणतंत्र दिवस परेड से पहले आयोजित प्रेस ब्रीफ को संबोधित करते हुए दिल्ली एरिया के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों (विशिष्ट सेवा मेडल) ने बताया कि इस बार इंडियन आर्मी का दस्ता ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन में कर्तव्य पथ से गुजरेगा। बैटल एरे का मतलब है युद्ध जैसी रचना, जिसमें सेना के अलग-अलग हिस्से उसी क्रम में आगे बढ़ते हैं, जैसे वे असली लड़ाई में करते हैं।

उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब गणतंत्र दिवस परेड में इस तरह की कॉम्बटाइज्ड प्रेजेंटेशन दिखाई जाएगी। यानी प्लेटफॉर्म सिर्फ खड़े-खड़े नहीं दिखेंगे, बल्कि यह बताया जाएगा कि युद्ध के दौरान कौन-सा हिस्सा पहले आता है और कौन-सा बाद में। (Battle Array Republic Day 2026)

सबसे आगे होंगे निगरानी और टोही दस्ते

बैटल एरे की शुरुआत इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी निगरानी और टोही दस्तों से होगी। इसमें हाई मोबिलिटी रेक्की व्हीकल्स, सर्विलांस ड्रोन, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्स से लैस वाहन शामिल होंगे।

इन दस्तों का काम युद्ध से पहले दुश्मन की स्थिति, मूवमेंट और ठिकानों की जानकारी जुटाना होता है। यही वजह है कि बैटल एरे में इन्हें सबसे आगे रखा गया है। (Battle Array Republic Day 2026)

मैकेनाइज्ड फोर्स और टैंकों की एंट्री

इसके बाद मैकेनाइज्ड फोर्स यानी बख्तरबंद और टैंक यूनिट्स दिखाई देंगी। इस बार परेड में 61 कैवेलरी का माउंटेड कॉलम भी दिखेगा, जो भारतीय सेना की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित कैवेलरी यूनिट है। इसके साथ-साथ टी-90 भीष्म टैंक, एमबीटी अर्जुन, बीएमपी-2 सारथ, और नाग मिसाइल सिस्टम (नामिस-2) को भी उसी क्रम में दिखाया जाएगा, जैसे वे युद्ध के दौरान आगे बढ़ते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर ड्रोन, एटीजीएम काउंटर सिस्टम और एडवांस्ड सेंसर भी माउंटेड दिखाई देंगे। (Battle Array Republic Day 2026)

आसमान से मिलेगा एयर सपोर्ट

बैटल एरे में जमीन के साथ-साथ एयर सपोर्ट भी दिखाया जाएगा। इसमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव, रुद्र, अपाचे-64, और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड शामिल होंगे। इन हेलीकॉप्टरों को दिखाने का मकसद है कि युद्ध के समय जमीनी दस्तों को हवाई कवर कैसे मिलता है। (Battle Array Republic Day 2026)

आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम का दम

इसके बाद परेड में लंबी दूरी की मार करने वाले हथियार दिखाए जाएंगे। इनमें एटीएजीएस (एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम), धनुष 155 एमएम तोप, और यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (यूआरएलएस) और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल शामिल होंगी। यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 150 से 300 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं।

यह हिस्सा दिखाएगा कि किस तरह लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला किया जाता है, ताकि आगे बढ़ रही टुकड़ियों को रास्ता साफ मिले। (Battle Array Republic Day 2026)

बैटल एरे में एयर डिफेंस

बैटल एरे में एयर डिफेंस को भी उसी तरह दिखाया जाएगा, जैसे युद्ध में होता है। इसमें एल-70, आकाश मिसाइल सिस्टम, और बराक-8 जैसे मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम शामिल होंगे। ये सिस्टम जमीन पर मौजूद सैनिकों और प्लेटफॉर्म्स को हवाई हमलों से सुरक्षा देते हैं।

इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर की झलक

बैटल एरे का एक अहम हिस्सा होगा इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर (आईओसी)। यही वह जगह होती है, जहां युद्ध के दौरान अलग-अलग सेंसर, ड्रोन और रडार से मिली जानकारी को एक साथ देखा और समझा जाता है। परेड में इसे प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाएगा, ताकि लोग समझ सकें कि आधुनिक युद्ध में फैसले कैसे लिए जाते हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

ड्रोन, रोबोटिक सिस्टम और नई तकनीक

इस बार परेड में अनमैंड ग्राउंड व्हीकल्स (यूजीवी), ऑल टेरेन व्हीकल (एटीवी), लाइट स्ट्राइक व्हीकल (एलएसवी), रोबोटिक म्यूल्स, और रोबोटिक डॉग्स भी दिखाई देंगे। इसके साथ ड्रोन शक्ति वाहन भी होगा, जो ड्रोन की मरम्मत, बैटरी चार्जिंग और फील्ड सपोर्ट के लिए इस्तेमाल होता है। (Battle Array Republic Day 2026)

लॉजिस्टिक्स और एनिमल कंटिंजेंट

बैटल एरे का आखिरी हिस्सा लॉजिस्टिक्स यानी रसद और सपोर्ट सिस्टम का होगा। इसमें वे वाहन और साधन दिखाए जाएंगे, जो सैनिकों तक गोला-बारूद, ईंधन और जरूरी सामान पहुंचाते हैं।

इसके साथ-साथ एनिमल कंटिंजेंट भी परेड में शामिल होगा। इसमें बैक्ट्रियन कैमल्स, जंस्कार पोनी, और डॉग्स विद हैंडलर्स दिखाए जाएंगे। ये जानवर हिमालय और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में सेना के लिए आज भी बेहद अहम हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

पहली बार भैरव लाइट कमांडो बटालियन

इस साल परेड में भैरव लाइट कमांडो बटालियन भी पहली बार दिखाई देगी। यह यूनिट तेज़ कार्रवाई और विशेष अभियानों के लिए तैयार की गई है।

पूरा प्रदर्शन 15 मिनट का

यह पूरा बैटल एरे प्रदर्शन करीब 15 मिनट में पूरा होगा। परेड में कुल 18 मार्चिंग कंटिंजेंट और 13 बैंड हिस्सा लेंगे। इसके साथ-साथ फ्लाई-पास्ट में राफेल, एसयू-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच और एमआई-17 जैसे विमान और हेलीकॉप्टर अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। (Battle Array Republic Day 2026)

कितने लोग होंगे परेड का हिस्सा

इस साल परेड में करीब 6,050 जवान हिस्सा लेंगे। इसमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता भी शामिल होंगे। कुल मिलाकर सेना के छह मार्चिंग कंटिंजेंट होंगे, जबकि नौसेना और वायुसेना एक-एक मार्चिंग कंटिंजेंट के साथ परेड में शामिल होंगी। (Battle Array Republic Day 2026)

फ्लाई-पास्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम

परेड के दौरान 29 एयरक्राफ्ट का फ्लाई-पास्ट होगा, जिसमें फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। परेड के अंत में करीब 2,500 कलाकारों का सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा, जो भारत की सभ्यता, संस्कृति और प्रगति को दर्शाएगा।

परेड में 514 महिला कैडेट्स

इस वर्ष 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परेड और उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में कुल करीब 514 महिला कैडेट्स और प्रतिभागी शामिल होंगी। इनमें सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सहयोगी दस्तों की महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में महिला कलाकार भाग लेंगी। गणतंत्र दिवस परेड में शामिल महिला कैडेट्स अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिनमें मार्चिंग कंटिंजेंट, सहायक दल और आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

गणतंत्र दिवस की शुरुआत कैसे होगी

मेजर जनरल ढिल्लों ने बताया कि 77वीं गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। यह परेड रायसीना हिल्स और विजय चौक से होते हुए कर्तव्य पथ, इंडिया गेट, तिलक मार्ग के रास्ते आगे बढ़ेगी। परेड की कुल अवधि लगभग 90 मिनट होगी।

गणतंत्र दिवस के दिन सबसे पहले देश के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। माननीय प्रधानमंत्री नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को नमन करेंगे। इसके बाद परेड की औपचारिक शुरुआत होगी। माननीय राष्ट्रपति सलामी लेंगी और राष्ट्रगान के दौरान इस वर्ष के मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

इस बार परेड के मुख्य अतिथि यूरोपियन यूनियन से होंगे। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट परेड में मौजूद रहेंगी। यूरोपियन यूनियन का दस्ता कर्नल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में परेड में शामिल होगा। (Battle Array Republic Day 2026)

गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भारतीय वायुसेना दिखाएगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन, ‘प्रहार’ में तीनों सेनाएं आएंगी एकसाथ

Republic Day 2026 Flypast

Republic Day 2026 Flypast: इस साल गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ के ऊपर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर खास फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। भारतीय वायुसेना ने फ्लाइपास्ट और एरियल फॉर्मेशन को इस तरह डिजाइन किया है, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की झलक मिलेगी। पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में वायुसेना के साथ भारतीय सेना और नौसेना के प्लेटफॉर्म भी उड़ान भरते दिखेंगे, जो दिखाएंगे कि तीनों सेनाए अब जॉइंटनेस की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। इस वर्ष का रिपब्लिक डे फ्लाइपास्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला गणतंत्र दिवस है।

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर राजेश देशवाल ने बतायाकि इस बार का फ्लाइपास्ट कुल आठ फॉर्मेशन में होगा, जिसमें 29 एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। इनमें 16 फाइटर एयरक्राफ्ट, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 9 हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। कर्तव्य पथ पर फ्लाई पास्ट में ध्वज, प्रहार, वरुण, अर्जुन, बजरंग और विजय जैसे फॉर्मेशन में एयर क्राफ्ट फ्लाई करेंगे। इनमें सबसे खास ऑपेरशन सिंदूर फॉर्मेशन होगा। इसमें दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई 30 और एक जगुवार हिस्सा लेंगे। ये सभी वे एयरक्राफ्ट हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लिया था। (Republic Day 2026 Flypast)

Republic Day 2026 Flypast

Republic Day 2026 Flypast: दो हिस्सों में बंटा फ्लाइपास्ट

विंग कमांडर राजेश देशवाल के मुताबिक फ्लाइपास्ट को दो ब्लॉक में बांटा गया है। पहला ब्लॉक परेड के दौरान होगा और दूसरा ब्लॉक परेड समाप्त होने के बाद। पहले ब्लॉक में चार फॉर्मेशन होंगी, जो परेड के साथ तालमेल में आसमान में दिखाई देंगी। दूसरा ब्लॉक भी चार फॉर्मेशन का होगा, जिसमें हाई-इम्पैक्ट एरियल मैन्यूवर्स दिखाए जाएंगे।

पहले ब्लॉक की शुरुआत ध्वज फॉर्मेशन से होगी। इसमें चार सी-17 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ान भरेंगे। लीड एयरक्राफ्ट राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ान भरेगा, जबकि पीछे के तीन एयरक्राफ्ट थल सेना, नौसेना और वायुसेना के ध्वज के साथ आसमान में दिखाई देंगे। इस दौरान दो एयरक्राफ्ट दर्शकों पर फूलों की वर्षा भी करेंगे। (Republic Day 2026 Flypast)

इसके बाद प्रहार फॉर्मेशन आएगी, जिसमें तीन एएलएच हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। इनमें दो हेलिकॉप्टर भारतीय थल सेना के और एक वायुसेना का होगा। यह फॉर्मेशन जमीनी लड़ाई में हेलिकॉप्टरों की भूमिका और इंटर-सर्विस कोऑर्डिनेशन को दर्शाएगी।

इसके तुरंत बाद गरुड़ फॉर्मेशन दिखाई देगी। इसमें एक एएलएच, एक अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और एक एलसीएच शामिल होगा। यह फॉर्मेशन बताती है कि कैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म एक साथ मिलकर युद्ध के मैदान में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। (Republic Day 2026 Flypast)

‘सिंदूर’ फॉर्मेशन: मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट भरेंगे उड़ान

इस साल का सबसे बड़ा आकर्षण ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन होगी। यह एक सिंगल लेकिन बेहद शक्तिशाली कॉम्पोजिट फॉर्मेशन होगी, जिसमें भारत के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट एक साथ उड़ान भरेंगे। इसमें दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई 30 और एक जगुवार हिस्सा लेंगे।

ये सभी फाइटर एक स्पीयरहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे, जो भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल डोमिनेंस और कॉम्बैट रेडीनेस का प्रतीक होगा। यह फॉर्मेशन सीधे तौर पर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित है और यह संदेश देती है कि वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। (Republic Day 2026 Flypast)

Republic Day 2026 Flypast

दूसरे ब्लॉक में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट

दूसरे ब्लॉक की शुरुआत ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट फॉर्मेशन से होगी, जिसमें सी-130 और सी-295 शामिल होंगे। इसके बाद समुद्री निगरानी और फाइटर सपोर्ट की भूमिका दिखाने वाली फॉर्मेशन आएगी, जिसमें पी-8आई और सुखोई-30 एमकेआई साथ उड़ान भरेंगे।

इसके बाद वजरंग फॉर्मेशन दिखाई देगी, जिसमें फाइटर एयरक्राफ्ट एरोबेटिक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। यह फॉर्मेशन पायलटों की ट्रेनिंग, स्किल और तकनीकी क्षमता को दर्शाएगी। (Republic Day 2026 Flypast)

फ्लाइपास्ट का समापन एक सिंगल राफेल फाइटर से होगा, जिसका कॉलसाइन ‘विजय’ होगा। यह एयरक्राफ्ट राष्ट्रपति के सामने पहुंचकर वर्टिकल क्लाइम्ब करेगा और अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा। यह क्षण पूरे फ्लाइपास्ट का सबसे रोमांचक पल माना जाता है। (Republic Day 2026 Flypast)

झांकी में क्या होगा खास: ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’

इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर डिफेंस सर्विसेज वेटरंस टेबल्यू भी खास आकर्षण होगा। इस झांकी की थीम है ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’, जिसे भारतीय वायुसेना ने कॉन्सेप्चुअलाइज और डिजाइन किया है। झांकी को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।

झांकी के आगे वाले हिस्से में देश के सभी सैन्य संघर्षों को दर्शाया गया है। सबसे ऊपर अमर जवान ज्योति की आकृति होगी, जो बलिदान का प्रतीक है। इसके ठीक नीचे एक घूमती हुई सिलिंड्रिकल दीवार होगी, जिस पर 1965 और 1971 के युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष को थ्री-डायमेंशनल रूप में दिखाया जाएगा। हर युद्ध को करीब 10 सेकंड का समय मिलेगा, जिससे दर्शक साफ तौर पर अलग-अलग युद्धों की झलक देख सकें। (Republic Day 2026 Flypast)

1965 के युद्ध में इस्तेमाल हुए टैंक और वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट, 1971 में टी-55 टैंक और आईएनएस राजपूत द्वारा पााकिस्तान की पनडुब्बी आईएनएस गाजी को डुबाने की घटना, और कारगिल युद्ध में मिराज-2000 और जगुआर की भूमिका को खास तौर पर दर्शाया जाएगा।

झांकी का पिछला हिस्सा युद्ध के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों के योगदान को दिखाएगा। इसमें स्वदेशी रक्षा निर्माण, इंडस्ट्री, मेडिकल सेवाएं, योग, कृषि और आपदा राहत कार्यों में वेटरन्स की भूमिका को दर्शाया जाएगा। इस हिस्से में एलईडी लाइटिंग और घूमते हुए गियर ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को मजबूत करेंगे। (Republic Day 2026 Flypast)

झांकी में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल छह वेटरंस भी मौजूद रहेंगे, जो दर्शकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन करेंगे। यह हिस्सा दर्शकों के लिए एक भावनात्मक सरप्राइज होगा।

इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में

भारतीय वायुसेना के डायरेक्टोरेट ऑफ सेरेमोनियल हेडक्वार्टर्स से एयर कमोडोर इमरान जैदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में है। गणतंत्र दिवस समारोह की हर गतिविधि को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और निर्णय लेने की ताकत साफ तौर पर दिखाई दे। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से होगी शुरुआत

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि समारोह से होगी, जहां प्रधानमंत्री देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करेंगे। इसके बाद एक इंटर-सर्विस गार्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना से सात-सात जवान शामिल होंगे। इस संयुक्त गार्ड की अगुवाई इस वर्ष वायुसेना करेगी और इसकी कमान स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कल्याण के हाथों में होगी। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रपति के आगमन के साथ परेड की औपचारिक शुरुआत

कर्तव्य पथ पर रिपब्लिक डे परेड की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सलामी दिए जाने के साथ होगी। इस दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति का आगमन भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ की आवाज़ में घोषित किया जाएगा, जो इस समारोह का एक विशेष और गौरवपूर्ण क्षण होगा।

भारतीय वायुसेना का मार्चिंग कंटिंजेंट

भारतीय वायुसेना का सेरेमोनियल मार्चिंग कंटिंजेंट इस वर्ष खास तौर पर आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस कंटिंजेंट में चार अधिकारी और 144 एयर वॉरियर्स शामिल होंगे, जो 12 रो और 12 कॉलम की बॉक्स फॉर्मेशन में मार्च करेंगे। इस कंटिंजेंट का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार करेंगे। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर लिखिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश भी अधिकारी के रूप में शामिल रहेंगे।

इन एयर वॉरियर्स का चयन भारतीय वायुसेना के अलग-अलग यूनिट्स से एक कड़े और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के जरिए किया गया है। परेड में शामिल होने से पहले इन जवानों ने लगभग दो महीने तक रोजाना 7 से 8 घंटे की कठिन प्रैक्टिस की है, जो सुबह 4 बजे से शुरू होती है। इसी अनुशासन और समर्पण की वजह से वायुसेना पहले भी कई बार बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट का खिताब जीत चुकी है। (Republic Day 2026 Flypast)

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एयरफोर्स बैंड: पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार

मार्चिंग के दौरान 75 सदस्यीय भारतीय वायुसेना बैंड अपने शानदार संगीत से माहौल को देशभक्ति से भर देगा। इस बैंड में 66 अग्निवीर और पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार भी शामिल होंगी। बैंड का नेतृत्व चीफ एरॉनिस्ट डैनियल करेंगे, जो एक अनुभवी और कुशल ड्रम मेजर हैं।

बैंड द्वारा ‘साउंड बैरियर’, ‘वायु शक्ति’, ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘लीडर योद्धा’, ‘सारे जहां से अच्छा’, ‘फ्लाइंग स्टार’ और ‘एयर बैटल’ जैसे मार्शल ट्यून्स बजाए जाएंगे। जब वायुसेना का कंटिंजेंट राष्ट्रपति के सामने से गुजरेगा, तब खास तौर पर ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाई जाएगी, जो इस परेड का यादगार क्षण बनती है। (Republic Day 2026 Flypast)

पहलगाम के बाद पाकिस्तान ने AI से फैलाई थीं झूठी कहानियां, फर्जी नैरेटिव के लिए बना रहे CDS, सेना प्रमुख और IAF चीफ के डीफ फेक वीडियोज

Pahalgam AI fake narrative

Pahalgam AI fake narrative: कश्मीर के पहलगाम में जब आतंकी घटना हुई, तब हालात केवल जमीन पर ही नहीं बिगड़े, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी एक अलग तरह की जंग शुरू हो गई। यह जंग बंदूक और बम से नहीं, बल्कि एआई-आधारित फेक नैरेटिव यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए झूठे कंटेंट से लड़ी गई। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जनवरी 2026 में जारी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फैलाई जा रही गलत सूचनाएं आज के दौर में सबसे खतरनाक सुरक्षा चुनौतियों में से एक बन चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई से बने फेक वीडियो, नकली सैटेलाइट इमेज और झूठे सैन्य दावे किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में हालात को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं।

सिपरी ने खास तौर पर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत–पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए चेताया है कि इन्फॉर्मेशन डोमेन में फैला झूठ जमीनी हालात से अलग एक नकली तस्वीर बना देता है, जिससे गलत आकलन और जल्दबाजी में लिए गए फैसले बड़े सैन्य टकराव की वजह बन सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर एआई आधारित डिसइन्फॉर्मेशन को समय रहते पहचाना और रोका नहीं गया, तो यह “मल्टी-डोमेन एस्केलेशन” को जन्म दे सकता है, जहां साइबर, सूचना और पारंपरिक सैन्य मोर्चे एक साथ भड़क सकते हैं। पहलगाम हमले के बाद सामने आए फेक नैरेटिव इसी खतरे का ताजा उदाहरण माने जा रहे हैं, जहां डिजिटल झूठ ने वास्तविक स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ही घंटों के भीतर ऐसी तस्वीरें, वीडियो और दावे वायरल होने लगे, जिनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन उनका मकसद साफ था डर फैलाना, भ्रम पैदा करना और हालात को और भड़काना। (Pahalgam AI fake narrative)

Pahalgam AI fake narrative: फेक नैरेटिव क्या होता है?

फेक नैरेटिव का मतलब सिर्फ झूठी खबर नहीं होता। यह एक सोची-समझी रणनीति होती है, जिसे इस तरह पेश किया जाता है कि लोग उसे सच मान लें। इसमें आधी सच्चाई, भावनात्मक भाषा और डर पैदा करने वाले विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। पहलगाम मामले में भी ऐसा ही हुआ। कुछ पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया गया है, कहीं यह बताया गया कि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है, तो कहीं पूरी तरह से नकली तस्वीरें दिखाकर माहौल को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई।

एआई की मदद से यह काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब किसी को घंटों फोटो एडिटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सेकंड में डीपफेक वीडियो, एआई-जनरेटेड इमेज और नकली ऑडियो तैयार हो जाता है, जो असली जैसा दिखता है। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम के बाद सोशल मीडिया पर क्या हुआ?

घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। कुछ अकाउंट्स ने दावा किया कि यह हमला किसी बड़े युद्ध की शुरुआत है। कुछ ने यह दिखाने की कोशिश की कि हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। यहां तक कि कुछ वीडियो ऐसे भी वायरल हुए, जो किसी और देश या पुराने संघर्ष से जुड़े थे, लेकिन उन्हें पहलगाम का बताकर शेयर किया गया।

समस्या यह थी कि इन पोस्ट्स को देखकर आम लोग घबरा गए। कई लोगों ने बिना जांचे-परखे इन्हें आगे शेयर कर दिया। देखते-ही-देखते फेक नैरेटिव सैकड़ों-हजारों लोगों तक पहुंच गया। यही वह बिंदु है जहां सूचना युद्ध खतरनाक बन जाता है। (Pahalgam AI fake narrative)

डीजीआईएसपीआर ने फैलाईं फेक न्यूज

ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन डीपफेक वीडियो, एडिट किए गए फुटेज और झूठी जानकारियां सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि ऑफिशियल चैनलों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक के जरिए फैलाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान ने सूचना के जरिये हमला करने की रणनीति अपनाई और यह सब पकिस्तानी सेना की एजेंसी डीजीआईएसपीआर (DGISPR) के जरिए किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक

ऑपरेशन सिंदूर वाले दिन पाकिस्तान की तरफ से 7 एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) साइबर ग्रुप्स सक्रिय थे और 7 मई को एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक किए गए। यही नहीं, ऑपरेशन के पहले दिन ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर करीब 3 करोड़ साइबर हमले दर्ज किए गए।

पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में यूट्यूब चैनल, एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स और सरकारी हैंडल्स का इस्तेमाल फेक न्यूज फैलाने के लिए किया गया। हैरानी की बात यह थी कि 30 से 40 मिनट के अंदर एक जैसी भाषा और एक जैसे मैसेज बड़ी संख्या में पोस्ट किए गए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 43 समान थ्रेड्स से एक लाख से ज्यादा वीडियो तैयार कर दिए गए, ताकि एक ही झूठी कहानी को बार-बार फैलाया जा सके।

इस सूचना युद्ध में इन्फ्लुएंसर्स के जरिए लोगों की राय बदलने की कोशिश की गई। इस संदर्भ में ज्योति मल्होत्रा केस का जिक्र किया जा सकता है जो यह दिखाता है कि किस तरह प्रभावशाली चेहरों का इस्तेमाल किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

सेना प्रमुख से जुड़े 23 डीपफेक वीडियोज

ऑपरेशन सिंदूर के आठ महीने बाद भी यह सिलसिला अभी भी रुका नहीं है।  पिछले चार महीनों में 217 डीपफेक मामलों सामने आए, जिनमें से 164 भारतीय सेना से जुड़े थे। इनमें सीडीएस से जुड़े 9, थलसेना प्रमुख से जुड़े 23, वायुसेना प्रमुख से जुड़े 4 और नौसेना प्रमुख से जुड़े 3 डीपफेक शामिल हैं।

आज हालात ऐसे हो गए हैं कि जब भी कोई सैन्य प्रमुख किसी मंच से बोलता है, तो आधे घंटे के भीतर उसका एआई-आधारित डीपफेक वीडियो तैयार कर दिया जाता है, जिसमें बस थोड़े-बहुत बदलाव किए जाते हैं, ताकि वह पूरी तरह असली लगे। यह आज के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बन चुका है। (Pahalgam AI fake narrative)

एआई कैसे बना रहा है झूठ को और खतरनाक?

पहले झूठी खबरें पहचानना थोड़ा आसान था। फोटो धुंधली होती थी, वीडियो की क्वालिटी खराब होती थी या भाषा में साफ गलती दिख जाती थी। लेकिन अब एआई ने यह फर्क लगभग खत्म कर दिया है। डीपफेक टेक्नोलॉजी किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हाव-भाव इतनी सफाई से कॉपी कर सकती है कि आम आदमी के लिए सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

पहलगाम से जुड़े कुछ वीडियो में सुरक्षाबलों की कार्रवाई को गलत तरीके से दिखाया गया। कुछ में ऐसे बयान जोड़ दिए गए, जो कभी दिए ही नहीं गए थे। इन सबका मकसद सिर्फ एक था लोगों के दिमाग में शक और डर पैदा करना। (Pahalgam AI fake narrative)

क्यों होता है ऐसा फेक नैरेटिव?

फेक नैरेटिव यूं ही नहीं फैलता। इसके पीछे कई मकसद होते हैं। पहला मकसद होता है अफरा-तफरी फैलाना। जब लोग डरते हैं, तो वे तर्क से नहीं, भावना से फैसले लेते हैं। दूसरा मकसद होता है राजनीतिक या रणनीतिक दबाव बनाना। अगर यह दिखा दिया जाए कि हालात बहुत खराब हैं, तो सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ता है।

तीसरा और सबसे खतरनाक मकसद होता है एस्केलेशन यानी टकराव को बढ़ाना। अगर झूठे दावों के आधार पर कोई गलत फैसला लिया जाए, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम और मल्टी-डोमेन खतरा

आज की जंग सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब इसमें साइबर, स्पेस और इन्फॉर्मेशन डोमेन भी शामिल हो चुके हैं। यही बात अंतरराष्ट्रीय रिसर्च संस्थाएं भी लगातार कह रही हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की जनवरी 2026 की एक पॉलिसी पेपर में साफ कहा गया है कि एआई-आधारित डिसइन्फॉर्मेशन जैसे मल्टी-डोमेन टूल्स परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच भी हालात को खतरनाक मोड़ पर ले जा सकते हैं। खास तौर पर भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह जोखिम और ज्यादा है ।

इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर फेक नैरेटिव्स को समय रहते नहीं रोका गया, तो वे वास्तविक सैन्य हालात को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं, जिससे गलत आकलन और गलत फैसले हो सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

पहलगाम के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती थी। एक तरफ जमीन पर हालात को काबू में रखना और दूसरी तरफ डिजिटल दुनिया में फैल रहे झूठ को रोकना। यह काम आसान नहीं होता, क्योंकि फेक कंटेंट सेकंडों में फैल जाता है, जबकि सच तक पहुंचने में वक्त लगता है।

कई बार एजेंसियों को अपना कीमती समय और संसाधन सिर्फ इस बात पर लगाने पड़ते हैं कि कौन-सी खबर फर्जी है और उसे कैसे काउंटर किया जाए। यही वजह है कि आजकल सुरक्षा एजेंसियां इन्फ़ॉर्मेशन वॉरफेयर को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही हैं, जितनी पारंपरिक सुरक्षा को। (Pahalgam AI fake narrative)

मीडिया और आम लोगों की भूमिका

फेक नैरेटिव के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार या सेना नहीं जीत सकती। इसमें मीडिया और आम लोगों की भूमिका सबसे अहम है। पहलगाम के मामले में भी देखा गया कि कुछ जिम्मेदार मीडिया संस्थानों ने बिना पुष्टि के खबरें नहीं चलाईं। उन्होंने आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया और अफवाहों से दूरी बनाए रखी।

वहीं आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे हर वायरल पोस्ट पर भरोसा न करें। किसी भी वीडियो या तस्वीर को शेयर करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि इसका सोर्स क्या है और क्या यह जानकारी किसी भरोसेमंद जगह से आई है। (Pahalgam AI fake narrative)

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि लोग कुछ देर के लिए गुमराह हो जाते हैं। असली खतरा यह है कि यह भरोसे को कमजोर कर देता है। जब लोग यह नहीं समझ पाते कि क्या सच है और क्या झूठ, तो वे हर जानकारी पर शक करने लगते हैं। इससे समाज में तनाव बढ़ता है और हालात और बिगड़ते हैं।

पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में यह खतरा और ज्यादा होता है, क्योंकि यहां की हर खबर का असर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है। (Pahalgam AI fake narrative)

कैसे रोका जाए एआई-फेक नैरेटिव?

आने वाले समय में एआई-आधारित फेक नैरेटिव और भी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए इससे निपटने के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। सबसे पहले, टेक्नोलॉजी के स्तर पर ऐसे टूल्स विकसित करने होंगे, जो डीपफेक और फर्जी कंटेंट को जल्दी पहचान सकें।

दूसरा, लोगों को डिजिटली एजुकेट करना होगा, ताकि वे खुद समझ सकें कि कौन-सी जानकारी भरोसेमंद है और कौन-सी नहीं। तीसरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी, ताकि वे फेक कंटेंट को फैलने से पहले रोक सकें। (Pahalgam AI fake narrative)