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The true of Pakistan’s ‘K Solidarity’, the juti ISI intimidating Kashmiri intellectuals speaking against terror

Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals
Junaid Qureshi

Pakistan terrorism intellectuals: The reality of Pakistan’s Kashmir policy has come up once again. On one hand Islamabad claims to stand up with Kashmiris by celebrating the so-called "K Solidarity Day" on February 5 every year, on the other hand, his intelligence agency and terrorist proxy are targeting the same Kashmiris, which are uttered against violence and terrorism. The recent Pakistan-backed terror network has threatened pro-India and anti-Terrorist Kashmiri intellectuals to death directly.

Sources associated with security agencies and international think-tanks say that it is part of a well-planned strategy, through which Pakistan wants to sniff the voices that his "Kannada Neratives are exposed to the world. He says that this case is not only the security of a person, but the attack on that whole thinking, which speaks of peace, dialogue and democratic values in Kashmir. Kashmiri intellectuals

Pakistan terror fraudi intellectuals: threatening fear spreading and stealing

The counter-terrism of a major Kashmiri origin was threatened to kill the Expert directly in January 2026. This threat was sent through the end-to-end encrypted messaging platform with the branding of the terrorist organization being visible clean. Not just in the message, they were called the "winter" but also wrote that they will not have any hesitation in killing.

Sources reported that this threat Lustful ए तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रजिस्टेंट फ्रंट यानी टीआरएफ ने जुनैद कुरैशी को एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (जैसे टेलीग्राम या सिग्नल) के जरिए दी थी। बता दें कि जुनैद कुरैशी यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) के डायरेक्टर हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह पिछले कुछ महीनों में दूसरी ऐसी घटना है, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क ने उन कश्मीरी बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बोल रहे हैं। धमकी की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्द इस बात का संकेत देते हैं कि इसका मकसद डर फैलाना और चुप कराना है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

रावलपिंडी से ऑपरेट हो रहा अकाउंट

धमकी पाने वाले विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी ने मीडिया से बातचीत में सीधे तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह धमकी लश्कर ए तैयबा के कमांडर शेख सज्जाद गुल के जरिए आई। खास बात यह ही धमकी में जिन जानकारियों का जिक्र किया गया, वे सार्वजनिक नहीं थीं और सिर्फ सीमित लोगों तक ही पहुंच रखती थीं। क्योंकि मैसेज में एक प्रस्तावित कश्मीरी इंटेलेक्चुअल थिंक टैंक की संवेदनशील जानकारी थी, जो पब्लिक डोमेन में नहीं है। इससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि इस पूरे मामले के पीछे संगठित खुफिया नेटवर्क काम कर रहा है।

जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि धमकी भेजने वाला अकाउंट पाकिस्तान के रावलपिंडी क्षेत्र से ऑपरेट हो रहा था और इसका इस्तेमाल पहले भी आतंकवादी प्रचार सामग्री फैलाने के लिए किया जा चुका है। यह अकाउंट 24 अगस्त 2025 को बनाया गया और टीआरएफ के प्रोपेगैंडा फोटोज, अपडेट्स फैलाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह वही तरीका है, जिसे पाकिस्तान लंबे समय से अपनाता रहा है, वह आतंकवादी संगठनों को आगे रखकर खुद पर्दे के पीछे रहता है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

जुनैद ने पिता की आतंकी विचारधारा को किया रिजेक्ट

जुनैद कुरैशी ने अपने एक्स अकाउंट @JQ_plaintalk पर पर पोस्ट किया कि धमकियां उन्हें शांति और टेररिज्म के खिलाफ काम करने से नहीं रोकेंगी। उन्होंने अपने काम को जारी रखने का ऐलान किया है। जुनैद कुरैशी कश्मीरी मूल के हैं और EFSAS के डायरेक्टर हैं। उनके पिता हाशिम कुरैशी 1971 में एयर इंडिया फ्लाइट IC-405 के हाईजैकर्स में से एक थे, लेकिन जुनैद ने सार्वजनिक रूप से अपने पिता की विचारधारा को रिजेक्ट करते हुए अपने जन्म से पहले हुए हाईजैकिंग कांड को टेररिज्म का ऐक्ट बताया थाा।

अपनी संस्था के जरिए, जुनैद अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स (जैसे यूएन, यूरोपीय पार्लियामेंट) पर पाकिस्तान की स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म को एक्सपोज करते हैं। वे दिखाते हैं कि कश्मीर में “आजादी की लड़ाई” वास्तव में आईएसआई का चलाया हुआ कैंपेन है, जिसमें लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद शामिल हैं।

2019 में पुलवामा अटैक की निंदा करने के लिए जुनैद को एक ब्लॉग पर हिट-लिस्ट में शामिल किया गया था। उन्होंने एक्स पर कहा कि लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन हैं जो कश्मीर को बांटते हैं, और धमकियां उन्हें चुप नहीं कराएंगी। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

आतंकवाद के खिलाफ बोलने की चुकानी पड़ी कीमत

पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठनों द्वारा कश्मीरी बुद्धिजीवियों और समाज के जागरूक वर्ग को निशाना बनाने का लंबा और खूनी इतिहास रहा है। दशकों से ऐसे कश्मीरी, जो आतंकवाद का विरोध करते हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं या भारत के साथ शांति और सह-अस्तित्व का समर्थन करते हैं, लगातार इन टेरर प्रॉक्सीज के टारगेट पर रहे हैं।

आकंड़ों के मुताबिक 1989 से 2020 के बीच पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठनों ने 5000 से ज्यादा कश्मीरी नागरिकों, पत्रकारों, नेताओं और बुद्धिजीवियों की हत्या की थी। इनमें वे लोग शामिल थे, जिन्होंने खुले तौर पर आतंकवाद का विरोध किया या कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन इस पूरे दौर में इस खूनखराबे के प्रमुख जिम्मेदार रहे।

साल 2018 में इस पैटर्न का एक बेहद चौंकाने वाला उदाहरण तब सामने आया, जब ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्हें महीनों से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरेआम मार दिया गया। इस हत्या ने साफ कर दिया कि जो भी कश्मीर में हिंसा और आतंक के खिलाफ बोलता है, वह सीधे आतंकी संगठनों के निशाने पर आ जाता है।

साल 2018 में इस पैटर्न का एक बेहद चौंकाने वाला उदाहरण तब सामने आया, जब ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्हें महीनों से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरेआम मार दिया गया। इस हत्या ने साफ कर दिया कि जो भी कश्मीर में हिंसा और आतंक के खिलाफ बोलता है, वह सीधे आतंकी संगठनों के निशाने पर आ जाता है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

इसके बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमले की निंदा करने पर जुनैद कुरैशी को आतंकियों की हिट-लिस्ट में डाल दिया गया। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने खुले तौर पर आतंकवाद को गलत बताया और उसकी आलोचना की, उन्हें लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से धमकियों का सामना करना पड़ा।

हिंसा का यह सिलसिला हाल के सालों में भी जारी रहा। साल 2025 में कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल मैगरे की हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में इस हत्या के पीछे भी पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों पर शक जताया गया। यह घटना इस बात का संकेत थी कि भले ही हालात बदले हों, लेकिन आतंक के जरिए डर फैलाने की नीति नहीं बदली है।

इन घटनाओं के बीच कुछ और खौफनाक मिसालें भी सामने आई हैं। 2019 में लश्कर-ए-तैयबा ने एक कश्मीरी लड़की को जबरन शादी के लिए बंधक बना लिया था और एक 12 साल के बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया कि आतंकी संगठनों के लिए न उम्र मायने रखती है, न इंसानियत। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

“सॉलिडैरिटी” की यह है सच्चाई

पाकिस्तान हर साल “कश्मीर सॉलिडैरिटी डे” के नाम पर रैलियां करता है, भाषण देता है और खुद को कश्मीरियों का हितैषी बताता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिन कश्मीरियों की सोच पाकिस्तान की लाइन से मेल नहीं खाती, उन्हें या तो धमकाया जाता है या फिर हिंसा का शिकार बनाया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति केवल डर पैदा करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की आलोचना को कमजोर करना भी है। जब कश्मीरी मूल के लोग ही आतंकवाद को बेनकाब करते हैं, तो पाकिस्तान की पूरी कहानी ढहने लगती है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ता असर

हाल के वर्षों में कई कश्मीरी बुद्धिजीवियों और शोधकर्ताओं ने यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की भूमिका को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ यह दिखाया है कि कश्मीर में हिंसा किसी “जन आंदोलन” का नतीजा नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रायोजित आतंकवादी अभियान है।

यही वजह है कि ऐसे लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जानकार मानते हैं कि यह पाकिस्तान की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि उसकी कूटनीतिक रणनीति अब पहले जैसी असरदार नहीं रह गई है। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

भारत की सुरक्षा एजेंसियों की है नजर

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन धमकियों को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई से जुड़ा मुद्दा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय दबाव ही सबसे प्रभावी हथियार हो सकता है। जब तक आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले ढांचे पर सीधा सवाल नहीं उठेगा, तब तक ऐसी धमकियां जारी रहेंगी। (Pakistan terror proxies Kashmiri intellectuals)

Vayushakti-2026: India’s largest fire power exercise on the western front adjacent to the Pakistan border, why is it special?

Vayushakti 2026 Indian Air Force
Indian Air Force to showcase Massive Firepower on Front Western Pokhran

Vayushakti 2026 Indian Air Force: Indian Air Force is going to demonstrate its tremendous fire power and operational preparation once again in February 2026. The Air Force has started preparing for its largest air power exercise ‘Awayushti-2026’. NoteM has also been released on this exercise. According to which Western Front, i.e. Pakistan is going to have large air activities in the Pokhran of Rajasthan adjacent to the border.

Exercise The ‘Airpower-2026’ will be practiced both day and night, live firing, air-to-ground strike, air-to-air mission, air defense, and joint operations.

Vayushakti 2026 Indian Air Force: Awakening the Strength of the Air Force Will Remain

Rajasthan Poetry Ilaka has witnessed India’s military strength even earlier. Once again, this Isaac of the desert is going to become the centre of the strength and preparation of the Indian Air Force. In the open sky of the countryside adjacent to the Pakistan border when dozens of fighter jets will fly together and perform their arms, this njara will be not just military exercises, but a symbol of India’s air force. Indian Air Force

Exercise in three phases

NoteAccording to these, the exercise of Indian Air Force will be held in three phases. The first phase will last from 9 February to 14 February 2026, the second phase is scheduled from 16 February to 19 February and the third and final phase from 20 February to 28 February 2026.

शुरुआती दो चरणों में ग्राउंड से 30,000 फीट तक हवाई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद तीसरे चरण में यह सीमा हटा दी गई है। यानी आखिरी चरण में वायुसेना पूरी ऊंचाई और पूरी क्षमता के साथ अपने हथियारों और प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सकती है। आमतौर पर ऐसा तभी किया जाता है, जब बड़े पैमाने पर कॉम्बैट सिमुलेशन और लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक का अभ्यास होता हो। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

क्यों खास है वायुशक्ति एक्सरसाइज

वायुशक्ति भारतीय वायुसेना की सबसे प्रतिष्ठित फायर पावर एक्सरसाइज मानी जाती है। इसे हर कुछ वर्षों में आयोजित किया जाता है, ताकि वायुसेना अपनी युद्धक तैयारियों को न सिर्फ परखे, बल्कि देश और दुनिया को भी दिखा सके।

पिछली वायुशक्ति एक्सरसाइज में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000 और मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स ने लाइव हथियारों के साथ अपने टारगेट्स को निशाना बनाया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित वायुशक्ति 2026 का संस्करण इससे भी बड़ा और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

Vayushakti 2026 Indian Air Force

वेस्टर्न फ्रंट पर फोकस क्यों

हाल के वर्षों में भारत के सामने दो-फ्रंट चैलेंज लगातार चर्चा में रहा है। एक तरफ पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान, तो दूसरी तरफ उत्तरी सीमा पर चीन। ऐसे में वायुसेना की रणनीति यह है कि वह दोनों मोर्चों पर एक साथ जवाब देने में सक्षम रहे।

वायुशक्ति-2026 के जरिए वायुसेना वेस्टर्न फ्रंट पर अपनी रैपिड रिस्पॉन्स, डीप-स्ट्राइक और प्रिसिजन अटैक क्षमताओं को परखेगी। इस अभ्यास के जरिए पाकिस्तान को यह संदेश दिया जाएगा कि किसी भी हालात में भारतीय वायुसेना तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

कौन-कौन से एयरक्राफ्ट होंगे शामिल

हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी प्लेटफॉर्म्स की सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन पिछले ट्रेंड और तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस एक्सरसाइज में वायुसेना के लगभग सभी फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट शामिल होंगे।

इसमें राफेल फाइटर जेट्स की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। राफेल अपनी लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम के लिए जाना जाता है। सुखोई-30 एमकेआई एयर सुपीरियॉरिटी और हेवी स्ट्राइक का जिम्मा संभालेगा, जबकि स्वदेशी तेजस फाइटर जेट आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दिखाएगा।

इसके अलावा मिराज-2000, मिग-29, जैगुआर, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर और सी-130जे जैसे सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी मिशन का हिस्सा बन सकते हैं। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

दिन और रात दोनों में ऑपरेशन

वायुशक्ति-2026 की एक बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें दिन और रात, दोनों समय मिशन को अंजाम दिया जाएगा। रात के ऑपरेशन असली युद्ध की दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं, क्योंकि मॉडर्न वॉरफेयर में अंधेरे में सटीक हमला करने की क्षमता निर्णायक होती है।

रात के समय टारगेट पर सटीक बमबारी, मिसाइल लॉन्च और एयर डिफेंस इंटरसेप्शन यह दिखाएंगे कि भारतीय वायुसेना हर हालात में ऑपरेशनल रेडी है। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का अभ्यास

इस एक्सरसाइज में सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि दुश्मन के हमलों से बचाव का अभ्यास भी किया जाएगा। एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को भी परखा जाएगा।

इससे यह देखा जाएगा कि अगर दुश्मन हवाई हमला करता है, तो भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम उसे कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से रोक पाते हैं। (Vayushakti 2026 Indian Air Force)

Starting preparations for creating High Thrust Supercruz Jet Engine for Indigenous AMCA, GTRE with Indian partner will create 200 engines

Indigenous Jet Engine India
India Moves Towards Indigenous High-Thrust Jet Engine, DRDO’s GTRE Seeks Indian Industry Partner

Indigenous Jet Engine India: India has started preparations about creating indigenous jet engines. Gas Turbine Research Assessment (GTRE), Bengaluru, working under Defence Research and Development Organization (DRDO), has started the process of choosing a special partner from the country companies. Under which development-less-production partners will be created in the Advanced High Thrust Class Jet Engine Program to a company in the country. The selected company will assume responsibility for the manufacture, testing and certification of this turbofan engine. This partner will play an important role in developing and producing India’s own advanced high thrust class jet engine.

India has its own indigenous Jet Engine Not and for this he is dependent on other countries. Prime Minister Narendra Modi emphasized the Jet Engine on Made in India in the speech of the 79th Independence Day from Red Fort on 15th August last year. He had directed all the departments of young scientists, engineers, talented Youth and the government that India should create their own jet engine for their indigenous fighter jets. Introducing it as a national challenge, he said that vaccine created in Covid, UPI created, the jet engine should also be in India. Now GTRE has started this initiative. Indigenous Jet Engine India

Indigenous Jet Engine India: Why Ahmed Is The Step

जेट इंजन किसी भी फाइटर एयरक्राफ्ट का दिल होता है। अगर इंजन विदेशी हो, तो संकट के समय सप्लाई रुक सकती है, अपग्रेड में दिक्कत आ सकती है और ऑपरेशनल आजादी सीमित हो जाती है। भारत ने यह सब पहले भी देखा है।

कावेरी इंजन प्रोग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा है। इस प्रोग्राम से बहुत कुछ सीखा गया, लेकिन वह इंजन पूरी तरह लड़ाकू विमान के लिए तैयार नहीं हो पाया। इसके बाद भारत ने तय किया कि इंजन टेक्नोलॉजी में आधे-अधूरे कदम नहीं, बल्कि पूरी ताकत झोंकनी होगी।

इसी सोच के साथ अब एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास इंजन प्रोग्राम शुरू किया गया है, जो भविष्य के पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स जैसे एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) को ताकत देगा। (Indigenous Jet Engine India)

क्या किया है जीटीआरई ने

GTREE ने भारतीय कंपनियों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया है। इसका मतलब है कि सरकार अब निजी और सार्वजनिक भारतीय कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में सीधे शामिल करना चाहती है। चुनी जाने वाली कंपनी सिर्फ पार्ट्स बनाने वाली नहीं होगी, बल्कि इंजन के निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन तक की जिम्मेदारी संभालेगी।

सरल शब्दों में कहें, तो लैब में बने डिजाइन को उड़ने लायक इंजन में बदलने की पूरी जिम्मेदारी इसी भारतीय कंपनी के कंधों पर होगी। (Indigenous Jet Engine India)

कैसा होगा यह नया जेट इंजन

जिस इंजन को बनाने की योजना है, वह आज की दुनिया के सबसे एडवांस्ड मिलिटरी इंजनों की कैटेगरी में आएगा। इसमें 10:1 का थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो होगा, यानी इंजन हल्का होने के बावजूद बेहद ताकतवर होगा।

इस इंजन की एक खास क्षमता सुपरक्रूज होगी। इसका मतलब है कि Fighter Jet बिना आफ्टरबर्नर जलाए भी सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ सकेगा। इससे ईंधन की बचत होगी और विमान की रेंज और स्टेल्थ दोनों बढ़ेंगी।

इसके अलावा इंजन का इंफ्रारेड सिग्नेचर कम रखा जाएगा, ताकि दुश्मन के सेंसर और मिसाइल इसे आसानी से ट्रैक न कर सकें। इंजन में सिंगल क्रिस्टल ब्लेड्स का इस्तेमाल होगा, जो बहुत ज्यादा तापमान सह सकती हैं और इंजन की उम्र बढ़ाती हैं। (Indigenous Jet Engine India)

क्या है एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास इंजन

एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एक ट्विन-इंजन फाइटर जेट है, इसलिए इसकी ताकत को आमतौर पर प्रति इंजन थ्रस्ट के आधार पर समझा जाता है। एएमसीए को दो अलग-अलग चरणों में डेवलप किया जा रहा है और दोनों में इंजन को लेकर रणनीति भी अलग है।

एएमसीए के एमके-1 वर्जन में शुरुआती तौर पर अमेरिकी जीई एफ414 इंजन लगाने की योजना है। यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ लगभग 98 किलो-न्यूटन (kN) तक का अधिकतम थ्रस्ट देता है। चूंकि विमान में दो इंजन होंगे, इसलिए कुल थ्रस्ट करीब 196 kN के आसपास रहेगा। यह कॉन्फिगरेशन शुरुआती ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए चुना गया है, ताकि एयरक्राफ्ट की डेवलपमेंट टाइमलाइन प्रभावित न हो।

वहीं एएमसीए एमके-2 के लिए पूरी तरह अलग और ज्यादा महत्वाकांक्षी योजना है। इस वर्जन में स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे जीटीआरई और साफरान के सहयोग से को-डेवलप किया जाएगा। इस इंजन की प्लान्ड आफ्टरबर्नर थ्रस्ट क्षमता लगभग 120 kN प्रति इंजन होगी, जिसे भविष्य में 140 kN तक स्केल किया जा सकेगा। इस तरह दो इंजनों के साथ कुल थ्रस्ट करीब 240 kN तक पहुंच जाएगा।

इतनी ज्यादा थ्रस्ट क्षमता एएमसीए एमके-2 को सुपरक्रूज, बेहतर एक्सेलेरेशन और हाई मैन्यूवरेबिलिटी जैसी खूबियां देगी। यही वजह है कि इस इंजन को “एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास” कैटेगरी में रखा गया है।

जहां तक ड्राई थ्रस्ट की बात है, तो स्वदेशी इंजन से करीब 73 से 75 kN प्रति इंजन ड्राई थ्रस्ट मिलने की उम्मीद की जा रही है। यह आंकड़ा आफ्टरबर्नर के बिना भी तेज रफ्तार और लंबी रेंज ऑपरेशन के लिए अहम माना जाता है।

किस तरह का इंजन बनेगा

यह इंजन एक मॉडर्न टर्बोफैन जेट इंजन होगा। इसमें लो प्रेशर कंप्रेसर, हाई प्रेशर कंप्रेसर, कंबस्टर, हाई प्रेशर टरबाइन, लो प्रेशर टरबाइन, आफ्टरबर्नर और एग्जॉस्ट सिस्टम जैसे सभी एडवांस्ड हिस्से शामिल होंगे।

इसके साथ गियरबॉक्स, फ्यूल सिस्टम, ऑयल सिस्टम और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम यानी फाडेक (फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल) भी पूरी तरह आधुनिक होंगे। (Indigenous Jet Engine India)

कई चरणों में बंटा प्रोजेक्ट

GTREE ने इस पूरे प्रोजेक्ट को कई चरणों में बांटा है। पहले चरण में डिजाइन से जुड़े काम होंगे। इसमें ड्रॉइंग, थ्री-डी मॉडल, डिजाइन में बदलाव और टेस्ट के आधार पर सुधार शामिल होंगे।

दूसरे चरण में मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी होगी। यानी किस हिस्से को कैसे बनाया जाएगा, कौन सी मशीन लगेगी, कौन सा मटेरियल इस्तेमाल होगा और क्वालिटी कैसे जांची जाएगी।

तीसरे चरण में असली मैन्युफैक्चरिंग शुरू होगी। इसमें पार्ट्स बनाना, सब-असेंबली तैयार करना और जरूरी टेस्ट करना शामिल होगा।

चौथे और सबसे अहम चरण में इंजन की असेंबली, बैलेंसिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन और फाइनल टेस्टिंग होगी। इसके बाद इंजन को सर्टिफिकेशन के लिए तैयार किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट में जीटीआरई डिजाइन अथॉरिटी बना रहेगा। यानी इंजन का टेक्निकल कंट्रोल सरकार के पास रहेगा। वहीं चुनी गई कंपनी इंडस्ट्रियल एग्जिक्यूशन की जिम्मेदारी निभाएगी।

इसमें एयरवर्थिनेस एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन, क्वालिटी कंट्रोल, डॉक्यूमेंटेशन और लाइफ-साइकिल सपोर्ट भी शामिल होगा। (Indigenous Jet Engine India)

मजबूत फाइनेंशियल बैकग्राउंड जरूरी

जीटीआरई ने साफ कर दिया है कि यह काम हर किसी के बस का नहीं है। कंपनी के पास मजबूत फाइनेंशियल बैकग्राउंड होना जरूरी है। कम से कम 1500 करोड़ रुपये का टर्नओवर, अच्छी क्रेडिट रेटिंग और मजबूत फाइनेंशियल बैकिग जरूरी रखी गई है।

तकनीकी तौर पर कंपनी को टाइटेनियम, निकेल एलॉय, एडवांस्ड मटेरियल और हाई प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही एयरोस्पेस क्वालिटी सिस्टम जैसे एएस9100 का पालन जरूरी होगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 10 साल में 18 इंजन तैयार किए जाएंगे। जीटीआरई ने साफ बोल दिया है कि सातवें साल से इंजन की डिलीवरी शुरू होगी, जो 10वें साल तक 18 तक पहुंच जाएगी। शुरुआत में इंजन बनाने की रफ्तार धीमी रहेगी, ताकि क्वालिटी और भरोसे को मजबूत किया जा सके।

सरकार का इरादा सिर्फ प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं है। भविष्य में करीब 200 इंजन बनाने का रास्ता भी इसी प्रोजेक्ट से खुलेगा। इसका मतलब है कि भारत में पहली बार एक पूरी मिलिट्री जेट इंजन प्रोडक्शन लाइन खड़ी हो सकती है। (Indigenous Jet Engine India)

क्यों बदल सकता है भारत का भविष्य

अगर यह प्रोजेक्ट अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, तो भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा, जो अपने दम पर एडवांस्ड फाइटर जेट इंजन बना सकते हैं। इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को भी नई ऊंचाई मिलेगी। (Indigenous Jet Engine India)

What is Rearm Initiative? Why Europe Is Shacking on Weapons Again Arabs Euro and How India Becomes Big Partner

ReArm Initiative explainer
What is the EU’s ReArm Initiative (Readiness 2030) Key Defense Partner

ReArm Initiative explainer: Europe is once again in preparation to make its security structure stand fresh. Now the European Union has cleared the indication that he wants to raise the responsibility of his own safety, after the decades of peace, diplomacy, and America’s safety. The long-term European countries after the Cold War assumed that the big wars have now become part of the past and will guarantee the future diplomacy, economic partnerships and international institutions. That’s why Europe didn’t just cut down its defence costs, but also extended dependence on US and NATO’s security umbrella.

But in the past few years, the global situation completely annoyed this thinking. Russia-Ukraine War, China’s growing military strength, threat of cyber attacks, and the US’s changing priorities made Europe realize that now the responsibility of its security will have to be raised. This changed thinking has led to the ‘Rearm Initiative’, which is now officially called Redines 2030 (Readiness 2030). Reasoning

यह पहल सिर्फ हथियार खरीदने या सेना मजबूत करने तक सीमित नहीं है। यह यूरोप की पूरी सुरक्षा सोच, रक्षा उद्योग, सप्लाई चेन और वैश्विक रणनीति को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश है। इस प्रक्रिया में भारत भी एक अहम और भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। (ReArm Initiative explainer)

ReArm Initiative explainer: रीआर्म इनिशिएटिव क्या है

रीआर्म इनिशिएटिव का पूरा नाम रीआर्म यूरोप प्लान / रीडिनेस 2030 है। इस योजना को यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पेश किया था। शुरुआत में इसका नाम “रीआर्म यूरोप” रखा गया था, लेकिन इटली और स्पेन जैसे कुछ देशों को यह नाम जरूरत से ज्यादा आक्रामक लगा। उनका तर्क था कि “रीआर्म” शब्द यूरोप की शांत छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसी आपत्ति के बाद इस योजना को रीडिनेस 2030 के नाम से रीब्रैंड किया गया। नाम बदला, लेकिन उद्देश्य वही रहा। इस पहल का सीधा और स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक यूरोप को सैन्य रूप से पूरी तरह तैयार किया जाए, ताकि वह किसी भी बड़े खतरे का सामना अपने दम पर कर सके। (ReArm Initiative explainer)

यूरोप को अचानक हथियारों की जरूरत क्यों पड़ी

पिछले तीन से चार दशकों में यूरोप ने डिफेंस को प्राथमिकता सूची में काफी नीचे रखा। शीत युद्ध के खत्म होने के बाद यह धारणा मजबूत हो गई थी कि अब यूरोप में बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना नहीं है। इसी सोच के चलते कई देशों ने अपनी सेनाओं का साइज घटाया, हथियारों के भंडार कम किए और रक्षा बजट में लगातार कटौती की।

लेकिन वर्ष 2022 में शुरू हुआ Russia-Ukraine युद्ध इस सोच पर करारा तमाचा साबित हुआ। इस युद्ध ने यह साफ कर दिया कि यूरोप के पास न तो पर्याप्त गोला-बारूद है और न ही लंबे समय तक युद्ध झेलने की तैयारी। इसके साथ ही यह भी उजागर हुआ कि यूरोप अब भी अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और नाटो पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है।

तीसरा बड़ा सबक यह था कि आधुनिक युद्ध सिर्फ टैंक और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गए हैं। साइबर अटैक, ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अब युद्ध का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में पुरानी रणनीतियां और कमजोर सिक्योरिटी स्ट्रक्चर यूरोप के लिए बड़ा जोखिम बन गए। (ReArm Initiative explainer)

इसी बीच अमेरिका में Donald Trump की वापसी और उनकी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी ने यूरोप की चिंता और बढ़ा दी। अमेरिका ने साफ कर दिया कि उसकी पहली प्राथमिकता अब चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र है, न कि यूरोप। इसका मतलब यह था कि भविष्य में यूरोप को अमेरिकी सैन्य मदद सीमित तौर पर ही मिल सकती है। (ReArm Initiative explainer)

इन सभी कारणों ने मिलकर यूरोप को मजबूर कर दिया कि उसे अब खुद अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।

रीआर्म इनिशिएटिव का सबसे बड़ा लक्ष्य

रीआर्म इनिशिएटिव का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य है लगभग 800 बिलियन यूरो, यानी करीब 80 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस इन्वेस्टमेंट जुटाना। यह राशि किसी एक बजट या एक स्रोत से नहीं आएगी। इसके लिए अलग-अलग वित्तीय रास्ते अपनाए जाएंगे, जिनमें सरकारी बजट, यूरोपीय संस्थानों की फंडिंग, लोन और प्राइवेट निवेश शामिल होंगे।

यूरोपीय संघ का मानना है कि अगर उसे 2030 तक पूरी तरह तैयार होना है, तो उसे रक्षा क्षेत्र में उसी स्तर का निवेश करना होगा, जैसा शीत युद्ध के दौर में किया गया था। (ReArm Initiative explainer)

रक्षा खर्च बढ़ाने की नई सोच

रीआर्म इनिशिएटिव के तहत यूरोपीय देशों से कहा गया है कि वे अपने रक्षा खर्च को धीरे-धीरे बढ़ाकर जीडीपी का 3.5 फीसदी तक ले जाएं। वर्ष 2024 में यह औसतन सिर्फ 1.9 फीसदी थी। यूरोप अब इस निष्कर्ष पर पहुंच चुका है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और सुरक्षित समाज के लिए मजबूत सेना भी जरूरी है। बिना पर्याप्त रक्षा क्षमता के न तो व्यापार सुरक्षित रह सकता है और न ही नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी दी जा सकती है। (ReArm Initiative explainer)

इस योजना के पांच बड़े स्तंभ

सेफ (SAFE) और संयुक्त खरीद की रणनीति

रीआर्म इनिशिएटिव का एक अहम हिस्सा है सेफ यानी सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप। इसके तहत यूरोपीय संघ कैपिटल मार्केट से करीब 150 बिलियन यूरो तक का लोन जुटाएगा। यह पैसा सदस्य देशों को दिया जाएगा ताकि वे मिलकर हथियार और रक्षा सिस्टम खरीद सकें।

इस संयुक्त खरीद का मकसद लागत कम करना, टैक्निकल स्टैंडर्ड्स एक जैसे रखना और आपसी तालमेल बढ़ाना है। मिसाइल डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, एयर डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में इसका खास फोकस रहेगा। (ReArm Initiative explainer)

फिस्कल नियमों में छूट और ज्यादा खर्च की आजादी

EU के सख्त वित्तीय नियम आमतौर पर देशों को ज्यादा घाटा करने से रोकते हैं। लेकिन रीआर्म इनिशिएटिव के तहत रक्षा खर्च को लेकर इन नियमों में अस्थायी छूट दी गई है।

अब सदस्य देश बिना नियम तोड़े अपने जीडीपी का अतिरिक्त 1.5 फीसदी डिफेंस पर खर्च कर सकेंगे। इससे करीब 650 बिलियन यूरो का अतिरिक्त रक्षा निवेश संभव हो सकेगा। (ReArm Initiative explainer)

कोहेशन फंड और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक की नई भूमिका

अब तक यूरोपीय संघ के कोहेशन फंड मुख्य रूप से क्षेत्रीय और सामाजिक विकास के लिए इस्तेमाल होते थे। लेकिन नई रणनीति के तहत इन फंड्स का कुछ हिस्सा रक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी लगाया जा सकेगा।

इसके साथ ही यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक को रक्षा कंपनियों को ज्यादा लोन देने की अनुमति दी गई है। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले यह बैंक रक्षा क्षेत्र से दूरी बनाए रखता था। (ReArm Initiative explainer)

प्राइवेट निवेश को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की कोशिश

रीआर्म इनिशिएटिव सिर्फ सरकारी पैसे पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यूरोपीय संघ चाहता है कि पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और बड़े निवेशक भी रक्षा उद्योग में निवेश करें।

इसके लिए सेविंग्स एंड इन्वेस्टमेंट यूनियन जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि प्राइवेट कैपिटल को डिफेंस सेक्टर की ओर मोड़ा जा सके। (ReArm Initiative explainer)

यूरोपीय रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाना

यूरोपीय संघ ने इसके लिए व्हाइट पेपर ऑन यूरोपियन डिफेंस – रीडिनेस 2030 जारी किया है। इसका उद्देश्य यूरोप के भीतर ही मिसाइल डिफेंस, आर्टिलरी, ड्रोन, एयर डिफेंस, स्पेस और साइबर डिफेंस जैसी क्षमताओं को मजबूत करना है।

इसके साथ ही यूक्रेन की रक्षा उद्योग को भी यूरोपीय रक्षा ढांचे से जोड़ा जा रहा है, ताकि युद्ध के अनुभव का इस्तेमाल पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए किया जा सके। (ReArm Initiative explainer)

अमेरिका की नई रणनीति से बढ़ी यूरोप की चिंता

जनवरी 2026 में अमेरिका ने अपनी नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी जारी की, जिसमें चीन को सबसे बड़ा रणनीतिक चुनौती बताया गया। इस दस्तावेज में साफ किया गया कि अमेरिका की प्राथमिकता अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र है।

यूरोप के लिए यह एक स्पष्ट संकेत था कि भविष्य में उसे अपनी पारंपरिक रक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। यही बयान यूरोप के लिए एक बड़े वेक-अप कॉल की तरह साबित हुआ। (ReArm Initiative explainer)

भारत का एंट्री पॉइंट कहां है

27 जनवरी यानी आज ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर हुए। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि भारत की रक्षा इंडस्ट्री रीआर्म इनिशिएटिव में अहम भूमिका निभा सकती है।

यूरोपीय संघ अब हथियारों के लिए सीमित सप्लायर्स पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करना चाहता है और यहीं भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आता है।

भारत और यूरोप का पुराना रक्षा रिश्ता

भारत और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग कोई नई बात नहीं है। राफेल फाइटर जेट, स्कॉर्पीन सबमरीन और सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे प्रोजेक्ट पहले से इस रिश्ते का हिस्सा हैं।

अब फर्क यह है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि यूरोपीय रक्षा सप्लाई चेन का सक्रिय हिस्सा बनता जा रहा है।

इसी के साथ-साथ भारत की निजी रक्षा कंपनियां भी यूरोप की मदद कर रही हैं। भारतीय कंपनियां यूरोपीय देशों को गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नौसैनिक जहाजों की मरम्मत सेवाएं और नए तरह के बिना पायलट वाले सिस्टम (अनमैन्ड सिस्टम) सप्लाई कर रही हैं। दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने तेजी से अपने हथियार और सैन्य तैयारियां बढ़ानी शुरू की हैं, लेकिन इस दौरान वहां इन चीजों की कमी सामने आई है। ऐसे में भारत की निजी रक्षा कंपनियां इन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। (ReArm Initiative explainer)

इंडियन ओशन में यूरोप की मौजूदगी

इस साझेदारी का एक अहम नतीजा यह भी है कि यूरोपीय संघ अब अपना एक लायजन ऑफिसर भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) गुरुग्राम में तैनात करेगा।

इससे काउंटर पाइरेसी, समुद्री सुरक्षा और खतरे के आकलन में भारत और यूरोप के बीच तालमेल और मजबूत होगा।

रीआर्म इनिशिएटिव पर उठते सवाल

हर बड़ी योजना की तरह रीआर्म इनिशिएटिव पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ देशों को चिंता है कि इससे सोशल और ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए फंड कम हो सकता है। कुछ को डर है कि यूरोपीय संघ जरूरत से ज्यादा सेंट्रलाइज्ड हो रहा है।

इसके बावजूद ज्यादातर यूरोपीय देश मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह कदम टालना संभव नहीं था। (ReArm Initiative explainer)

India-EU’s strength to rise in the Indian Ocean; the European Union’s Lion Officer will be deployed after Germany in IFC-IOR

India EU defence cooperation
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India EU defence cooperation: Marine security cooperation between Indian Navy and the EU is now going to reach a new level. The European Union has taken an important decision in view of the growing challenges and security needs in Indian Ocean Region. EU is now a Liaison Officer (LO) Indian Navy Gurugram based Information Fusion Centre – Indian Ocean Region (IFC-IOR) Will deploy in. This step is expected to further strengthen marine monitoring, information sharing and shared security efforts.

India and EU During the defence and security cooperation, an important meeting took place in New Delhi on 27th January. Defence Minister Rajnath Singh met Vice President Kaja Kalas of the European Union (EU) High Representative and European Commission. During this time, both leaders discussed in bilateral security, defence industry cooperation, and shared strategy in Indian Ocean Region.

It has been met at a time when India and the European Union are trying to transform their relationships into solid cooperation on the ground by not just confining to the diplomatic level. The Defence Minister said that India and the EU share values such as democracy, pluralism and rule of law, and that the shared thinking leads both to a strong partnership. EU Defence Cooperation

India EU Defence Cooperation: Emphasis on Partnership of Defence Industries

During the meeting Rajnath Singh ने कहा कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा उद्योगों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इसे “लार्जर ग्लोबल गुड” यानी बड़े वैश्विक हित के लिए जरूरी बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, यह सहयोग भारत के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप है और साथ ही यूरोपीय संघ की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी मेल खाता है।

उन्होंने कहा कि अगर भारत और ईयू की रक्षा सप्लाई चेन एक-दूसरे से जुड़ती हैं, तो इससे एक भरोसेमंद और मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम तैयार होगा। यह साझेदारी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से सैन्य क्षमताएं विकसित करने में मदद करेगी और एक फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेगी। (India EU defence cooperation)

रीआर्म इनिशिएटिव’ में भारत की भूमिका

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत की रक्षा इंडस्ट्री यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म इनिशिएटिव’ में अहम भूमिका निभा सकती है। यूरोपीय संघ इस समय अपने रक्षा क्षेत्र में सप्लायर डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दे रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। ऐसे में भारत एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास आज रक्षा उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत आधार है, जिसे यूरोपीय जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा।

रक्षा मंत्री ने काजा कलास की भारत यात्रा को खास बताया, क्योंकि यह भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर यूरोपीय संघ की मौजूदगी दोनों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है।

काजा कलास ने भी Republic Day समारोह में शामिल होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर परेड में यूरोपीय संघ की भागीदारी उनके लिए गर्व का विषय है और यह भारत–ईयू रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। (India EU defence cooperation)

India EU defence cooperation
India–EU Defence Cooperation Gains Momentum as EU to Deploy Liaison Officer at Indian Navy’s IFC-IOR

इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करने पर सहमति

काजा कलास ने बैठक के दौरान कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को इंडियन ओशन रीजन में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ग्लोबल ट्रेड और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिस से सीख सकते हैं।

उन्होंने जॉइंट एक्सरसाइज के जरिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे न सिर्फ आपसी समझ मजबूत होगी, बल्कि समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी। (India EU defence cooperation)

भारतीय नौसेना के IFC-IOR में ईयू की मौजूदगी

इस बैठक में एक और अहम मुद्दे पर सहमति बनी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसके तहत ईयू एक लायजन ऑफिसर (एलओ) को भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर), गुरुग्राम में तैनात करेगा।

यह लायजन ऑफिसर समुद्री डकैती यानी काउंटर पाइरेसी और इंडियन ओशन रीजन में उभरते खतरों के आकलन में भारतीय नौसेना के साथ बेहतर तालमेल बनाएगा। इससे ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन मजबूत होगा और दोनों पक्षों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करना आसान होगा।

इससे पहले जर्मनी के चांसलर की भारत यात्रा के दौरान इंडियन ओशन रीजन में साझा सुरक्षा और सूचना साझेदारी को लेकर अहम सहमति बनी थी। जर्मनी ने भी अपना लायजन ऑफिसर आईएफसी-आईओआर में तैनात करने पर सहमति दी थी। (India EU defence cooperation)

क्या है आईएफसी-आईओआर

इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) भारतीय नौसेना का एक बेहद अहम केंद्र है, जिसकी स्थापना समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए की गई है। यह केंद्र गुरुग्राम में स्थित है और इसका मुख्य काम हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखना है।

आईएफसी-आईओआर के जरिए अलग-अलग देशों की नौसेनाएं और समुद्री एजेंसियां आपस में जानकारी साझा करती हैं। यहां से जहाजों की आवाजाही, समुद्री डकैती, तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाती है। अगर किसी इलाके में कोई खतरा दिखता है, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित देशों तक पहुंचाई जाती है। (India EU defence cooperation)

आईएफसी-आईओआर को Indian Navy द्वारा होस्ट किया जाता है और इसमें मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के अधिकारी काम करते हैं। इसके साथ ही केंद्र में अंतरराष्ट्रीय लियाजन अफसर भी तैनात होते हैं, जो अन्य देशों से आते हैं। ये साझेदारी भागीदार देशों के प्रतिनिधि होते हैं और साझा समुद्री सुरक्षा जानकारी और सहयोग को बढ़ाते हैं।

अब तक आईएफसी-आईओआर में लगभग 12 देशों के लियाजन अफसर तैनात रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जापान, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, श्रीलंका, सेशेल्स, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के अफसर शामिल रहे हैं। केंद्र में तकनीकी और एनालिटिकल टीमों के सदस्य भी काम करते हैं, जो 24×7 समुद्री जानकारी एकत्रित और विश्लेषित करते हैं।

यह केंद्र हिंद महासागर के Maritime (समुद्री) सुरक्षा पर नजर रखता है और 28 देशों से 76 से ज्यादा लिंक-अप्स बनाए हुए है, जिसमें विभिन्न देशों और मल्टी-नेशनल सुरक्षा केंद्र शामिल होते हैं। (India EU defence cooperation)

भारत–ईयू रिश्तों में नया अध्याय

कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत और यूरोपीय संघ के रक्षा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। जहां एक ओर भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ भी भरोसेमंद साझेदारों के साथ अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना चाहता है। (India EU defence cooperation)

Pakistan’s lie then Benqab, which claims to fall off Raphael, is the same Republic Day on the parade in the sky.

Rafale BS-022
Rafale BS-022

Rafale BS-022: The poll of the arbitrary and false news spread on Pakistan side has once again opened in front of the world. After the operation shifter, Pakistan had tried to put a curtain on its failures by building false, half-lower claims and unproof stories. After the operation shift, the Pakistani army and some of the media platforms there had started claiming that the Pakistan Air Force (PAF) has dropped the Rafael fighter jet of the Indian Air Force (IAF). The claim was introduced as if it is a big military win. But now on January 26, Pakistan’s entire false narrative pole has been opened.

Rafale BS-022: Why spread false propaganda after operation shifter

Started in May 2025 Operation Shifter Pakistan had a big blow at both military and psychological levels. India targets terrorist and military bases in Pakistan and Pakistan authorized Kashmir in response to terrorist attacks. Over 100 panic stacks. Meanwhile, Indian Air Force, missile systems, drones and artillery were used. Pakistan has not only failed to stop these attacks, but he had to girdinate for a siesfire in a few days. (Rafale BS-022)

ऐसे में पाकिस्तान के सामने अपनी घरेलू जनता और सेना का मनोबल बनाए रखने की बड़ी चुनौती थी। इसी दबाव में वहां की सेना और समर्थक मीडिया ने यह झूठा दावा उछाल दिया कि उन्होंने भारत के Raphael जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट को मार गिराया है। सोशल मीडिया पर पुराने फोटो, एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक ग्राफिक्स फैलाए गए। कभी कहा गया कि एक राफेल गिराया गया, तो कभी संख्या बढ़ाकर चार, पांच या आठ तक बता दी गई। दावों की संख्या बदलती रही, लेकिन सबूत एक भी नहीं दिया गया। (Rafale BS-022)

वह राफेल शामिल हुआ गणतंत्र दिवस फ्लाइपास्ट में

पाकिस्तान के झूठ की सबसे बड़ी पोल इस साल 26 जनवरी को खुद-ब-खुद खुल गई। नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय वायुसेना का भव्य फ्लाइपास्ट हुआ। इस फ्लाइपास्ट में कई आधुनिक फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल थे। इसी दौरान आसमान में राफेल फाइटर जेट्स की गर्जना भी सुनाई दी।

सबसे अहम बात यह रही कि फ्लाइपास्ट में राफेल BS-022 भी शामिल था। यही वही एयरक्राफ्ट है, जिसके बारे में पाकिस्तान ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे मार गिराया गया था। अगर पाकिस्तान का दावा सच होता, तो यह राफेल न तो भारतीय वायुसेना के बेड़े में मौजूद होता और न ही देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह में उड़ान भरता नजर आता। (Rafale BS-022)

BS-022 का पूरी क्षमता के साथ उड़ान भरना इस बात का सीधा और ठोस सबूत है कि pakistan का दावा पूरी तरह झूठा था। वहीं भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की तरह ढोल पीटते हुए उसके दावे पर न तो किसी तरह का बयान या प्रेस रिलीज जारी नहीं की, बल्कि खुले आसमान में पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के झूठ नैरेटिव का अपने अंदाज में जवाब दिया। (Rafale BS-022)

ऑपरेशन सिंदूर फॉर्मेशन से दिया जवाब

26 जनवरी के मौके पर भारतीय वायुसेना ने खास सिंदूर फॉर्मेशन तैयार की थी। यह फॉर्मेशन मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर को ट्रिब्यूट थी, जिसमें भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले के जवाब में सर्जिकल स्ट्राइक्स की थीं। इस फॉर्मेशन का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की सटीकता, हवाई श्रेष्ठता और ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की गई रणनीति को दर्शाना था। यह पहली बार था जब भारतीय वायुसेना ने इस नाम की फॉर्मेशन को गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट में शामिल किया, जो पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को भी बेनकाब करने का एक तरीका था।

सिंदूर फॉर्मेशन की खूबी यह थी कि यह फॉर्मेशन एक “स्पीयरहेड” या कॉम्पैक्ट एरे शेप में थी, जो ऑपरेशन सिंदूर की स्ट्राइक पैकेज को मिरर करती थी। इसमें 7-विमान शामिल थे। जिसमें 2 राफेल फाइटर जेट्स, 2 मल्टी-रोल फाइटर्स सुखोई-30, 2 मिग-29 और ग्राउंड अटैक के लिए प्रसिद्ध एक जगुआर शामिल था। इन दो राफेल में से एक BS-022 था, जिसे पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में मार गिराने का झूठा दावा किया था। (Rafale BS-022)

झूठा प्रोपेगैंडा कोई नई बात नहीं

राफेल को लेकर फैलाया गया यह झूठ पाकिस्तान की पुरानी आदतों का ही हिस्सा है। इससे पहले भी बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने तरह-तरह के झूठे दावे किए थे। कभी कहा गया कि भारतीय एयरस्ट्राइक में कोई नुकसान नहीं हुआ, कभी यह दावा किया गया कि भारत के कई फाइटर जेट मार गिराए गए। बाद में वही पाकिस्तान अपने ही बयानों से पलटता नजर आया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी वही पैटर्न दोहराया गया। सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट्स ने खुद को “डिफेंस एक्सपर्ट” बताकर राफेल के गिरने की कहानियां गढ़ीं। पाकिस्तानी टीवी चैनलों ने बिना किसी जांच-पड़ताल के इन्हें चला दिया। लेकिन जब समय आया, तो सच्चाई ने खुद ही झूठ का पर्दाफाश कर दिया। (Rafale BS-022)

राफेल F4 अपग्रेड ने भी किया साफ इशारा

पाकिस्तान के झूठ को उजागर करने वाला एक और बड़ा फैक्ट भारतीय वायुसेना का राफेल एफ4 अपग्रेड है। भारत ने अपने राफेल फ्लीट को और आधुनिक बनाने के लिए एफ4 स्टैंडर्ड अपग्रेड का फैसला किया है। यह अपग्रेड 35 राफेल विमानों के लिए किया जा रहा है।

अगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सच में कोई राफेल नष्ट हुआ होता, जैसा कि पाकिस्तान दावा कर रहा था, तो विमानों की संख्या में फर्क साफ नजर आता। लेकिन 35 राफेल्स के लिए किया गया अपग्रेड यह दिखाता है कि भारतीय वायुसेना का राफेल बेड़ा पूरी तरह सुरक्षित है।

एफ4 अपग्रेड में बेहतर रडार, ज्यादा एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, नए हथियार और बेहतर नेटवर्क-सेंट्रिक कैपेबिलिटी शामिल होंगी। यह अपग्रेड इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना भविष्य की चुनौतियों के लिए अपने बेड़े को लगातार मजबूत कर रही है, न कि किसी नुकसान से उबरने की कोशिश कर रही है। (Rafale BS-022)

भारत की रणनीति: शोर नहीं, केवल सबूत

इस पूरे मामले में भारत का रवैया भी गौर करने लायक है। पाकिस्तान के दावों पर भारत ने न तो तुरंत प्रतिक्रिया दी और न ही किसी तरह की बयानबाजी की। भारतीय वायुसेना ने हमेशा की तरह प्रोफेशनल अप्रोच अपनाई। न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, न सोशल मीडिया पर जवाबी हमले।

भारत ने तथ्यों को अपने आप सामने आने दिया। गणतंत्र दिवस पर राफेल की उड़ान ही सबसे बड़ा जवाब बन गई। यह दिखाता है कि भारत की रणनीति शोर मचाने की नहीं, बल्कि काम करके दिखाने की है। (Rafale BS-022)

पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ऐसे झूठे दावों से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख लगातार कमजोर हो रही है। जब कोई देश बार-बार बिना सबूत के बड़े-बड़े दावे करता है और बाद में वे झूठ साबित होते हैं, तो दुनिया उसे गंभीरता से लेना बंद कर देती है। (Rafale BS-022)

The new embodiment of Arjun Tank will appear in the Republic Day Parade, learn what changes happened?

April 20, 2019
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army Shows Upgraded MBT with Anti-Drone Protection

Arjun Tank Republic Day will be seen on the Indian Army on the duty path of Delhi on January 26. At the same time, India’s main war tank will be present in the Republic Day Parade. While this tank has already become part of the Republic Day Parade several times before, the presence of Arjun Tank in the Republic Day Parade of this time is somewhat different. The Indian Army has prepared solutions on the ground in order to seriously understand and deal with the new threats of modern war.

Arjun Tank Republic Day 2026: Changes to Modern Warfare

The Indigenous Main Battle Tank (MBT) of the Indian Army has appeared on the duty path several times before it. But this time it will be identified not just as an indigenous main combat tank, but as a platform that is, Modern Warfare Changes are made accordingly. Russia-Ukraine Lessons from the war are now visible directly in Indian tanks.

Indian Army Armoured Division Arjun has been a trustworthy weapon for. This third-generation MBT-1 tank has already proved its strength, accuracy and robustness. In recent years, it has been seen that cheap but deadly drones have become a huge threat to heavy tanks. Drones usually target the upper part of the tank, as the armor of there is thinner than the front and the side. Considering this experience, the Indian Army has improved anti-drone in Arjun Tank. Arjun Tank Republic Day 2026

April 20, 2019
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army Shows Upgraded MBT with Anti-Drone Protection

Ready Arjun Tank for Drone Era

Taking into account the same danger Arjun Tank In some of the important field-level changes have been made, which will look clean in the Republic Day Parade this year. The first thing that will come to the sight of the people is the cope-cape, imposed above the tank, i.e. wire mesh. This simple-looking structure is basically an additional safety armor for the tank. Weapons or top-tack warheads dropped from the drone. When hitting this lattice, they either burst prematurely or change their direction. This increases the likelihood of avoiding the crook inside the tank.

Major Hitesh Mehta of 75 Armored Regiment posted in Western Sector The only to join Parade this year Arjun Tank The commanders are. He explains that it is a low-cost but extremely effective solution. According to them, in the Battlefield where the danger remains above all the time, it increases the trust of the forged crew and makes them feel much safer. It can be mounted on any tank faster. Arjun Tank Republic Day 2026

Arjuna will now have drones deployed

The drone is not only necessary to deal with danger, but also attack. Arjun tank is now equipped with drones under the same thinking. Two types of drones are mounted on the tank. The first drone is used to take recent information. Its flight capacity is about 25 to 30 minutes and it can give information to the terrain status by moving several kilometres away from the tank. This drone works like eyes and ears in areas with low visibility.

Major Mehta reported that if the tank is trapped in a limited or hazardous terrain, it can be seen by blowing the drone and further situations, making the right decision for no risk.

Second Drone Careers The drone is. It has the ability to carry at least 5 kg of payloads. It can be used to attack the targets present out of the line-of-site. i. Now the tank is not limited to the danger that looks just front, but can also target the enemy sitting away. Arjun Tank Republic Day 2026

What are Crew Responsibilities

Arjun tank has a total of four-member crew. It includes commander, driver, gunner and operator or loader. The main responsibility of handling the drone is the operator, but the commander can also control it when needed. While modern tanks are becoming not just heavy weapons, but multi-domain platforms.

Arjun is basically equipped with a powerful gun of 120 mm, which is considered a great threat to enemy tanks and bases. Now the drone-based offensive and defensive jugor has become its role and wider. Indian Army Future To Tank Crew Anti-Drone Also considering giving guns, so as to prevent the danger from drones on the spot. Arjun Tank Republic Day 2026

More than 70 important improvements made in Arjuna

Arjun MK-1A is India’s Advance Main Battle Tank for which Indian Army had ordered 118 units. DRDO in this tank improved more than 70 Ahmads. These include features like Better Panoramic Site, Remote Controlled Weapon Station, Strong Explosive Reactive Armour, Modern Thermal Imaging, Night Vision and Automatic Target Tracking for Commander. Also the mobility and transmission system of the tank is improved. Arjun Tank Republic Day 2026

T-90 tank also changes

Not only Arjuna in Republic Day Parade, but T-90 Tanks will also include. These tanks also have similar body changes to protect against drones and top-attack weapons. Sources say that the Indian army has assumed the drone no longer a temporary threat, but a permanent part of the future war.

It has been seen around the world that cheap drones, whose price is much lower than the tank, can cause heavy damage by attacking the top. The front and side of the tanks is even stronger, but the above part is relatively weak. The drones carry the advantage of the same weakness accurately carry. That’s why the tank is now changing both design and use. Arjun Tank Republic Day 2026

Explained: How does the Indian army fight in rust? The Republic Day Parade will first look in the Full Battle Formation

© 2019 Kartavya Path. All rights reserved.
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Battle Array Republic Day 2026: This time the Republic Day Parade will not be limited to March-Paste and Weapons, just every year. For the first time on the duty path on January 26, the general public will be able to see the military structure of the ‘Battle Are’ i.e. war. This will be the same order in which the army proceeds at the time of the real war, first of all the monitoring, then the attack, after that the security and finally logistics ie.

The parade of this time is considered to be special as the first few people in it will be able to see how the Indian Army moves during the war. The jointness of the Army through Battle Ere, self-sufficient India, and the glimpse of the Dicked of Transformation will be seen in the same place. (Battle Array Republic Day 2026)

Battle Array Republic Day 2026: First Time ‘Battle Array’ Formation

Republic Day Addressing the press brief held before the parade, Chief of Staff Major General Navraj Dhills (Typical Service Medal) of Delhi Area told that this time the Indian Army’s Shaft will undergo a duty path in the ‘Battle Array’ formation. Battle Array means war-like composition, in which different parts of the army proceed in the same order, as they do in the real battle.

He pointed out that this is the first time when such a combination of presentation will be visible in the Republic Day Parade. That is, the platform will not look just standing, but it will be told which part comes first during the war and which later. (Battle Array Republic Day 2026)

Next will be surveillance and towhey squad

Battle Array At the beginning of Intelligence, Surveillance and Reconissence i.e. Surveillance and Tohi will be from diarrhea. It will include vehicles equipped with high mobility linear vehicles, surveillance drones, Battlefield Surveillance Radar and anti-tank guided missiles.

The work of these diarrhea is to mobilize the enemy’s position, movement and bases before the war. That’s why these are placed in the Battle Are. (Battle Array Republic Day 2026)

Entry of Mechanized Forces and Tanks

Next Mechanized Force I.e. armored and tank units will appear. This time the parade will also show the mounted column of 61 Kavalry, the oldest and iconic Cavalry unit of the Indian Army. Along with this, the T-90 Bhishma Tank, MBT Arjun, BMP-2 Sarth, and the Nag Missile System (Namis-2) will also be shown in the same order, as they proceed during the war. Drones, ATGM counter systems and advanced sensors will also appear mounted on these platforms. (Battle Array Republic Day 2026)

Air support from the sky

Air support will also be shown in the Battle Array along with the ground. It has advanced light helicopter pole, Rudra, Apache-64, and Light Combat helicopter Сountry Join. The motive of showing these helicopters is how to get air cover to ground diarrhea at the time of war. (Battle Array Republic Day 2026)

Artillery and Missile System

Thereafter long-distance killing weapons will be shown in the parade. These will include ATAGS (Advanced Tooid Artillery Gun System), Bow 155mm Toap, and Universal Rocket Launcher System (URLS) and Brahmaos Supersonic Cruise Missile. Universal rocket launcher systems are able to distinguish targets from 150 to 300 kilometers.

This part will show how long distances are accurately attacked by enemy bases, so that the moving ensembles get the way clean. (Battle Array Republic Day 2026)

Air Defense in Battle Array

Air defenses will also be shown in the same way in the Battle Are, as in the war. It will include medium range surface-to-air missile systems like L-70, sky missile systems, and Barack-8. These systems protect the troops and platforms on the ground from air attacks.

Glimpses of Integrated Operational Centre

The Battle Are will be an important part of the Integrated Operational Centre (IOC). That’s where information found from different sensors, drones and radar during the war is viewed and understood simultaneously. It will be shown symbolically in the parade, so that people can understand how the decisions in the modern war go. (Battle Array Republic Day 2026)

Drone, robotic system and new technology

This time the parade will also show unmanned ground vehicles (UGV), all terrain vehicles (ATVs), light strike vehicles (LSVs), robotic mules, and robotic dogs. It will also have drone power vehicle, used for drone repair, battery charging and field support. (Battle Array Republic Day 2026)

Logistics and Animal Consultants

The last part of the Battle Array will be of logistics i.e. logistics and support systems. They will be shown vehicles and means, which delivers ammunition, fuel and essential goods to soldiers.

Along with this, animal content will also be included in the parade. It will show Bactrian Camels, Janskar Pony, and Dogs with handlers. These animals are very important today for the army in the inaccessible areas such as Himalayas and Sichen. (Battle Array Republic Day 2026)

First Time Bhairav Light Commando Battalion

The Bhairav Light Commando Battalion will also appear for the first time in the parade this year. This unit is designed for fast action and special campaigns.

Full Display 15 Minutes

This complete Battle Array display will be completed in about 15 minutes. The parade will take a total of 18 Marching content and 13 bands. Along with this, aircraft and helicopters like Rafael, SU-30, P-8I, C-295, Mig-29, Apache, LCH, ALH and Mi-17 will fly in different formulations. (Battle Array Republic Day 2026)

How many people will be part of the parade

This year the parade will have a close 6,050 young part. It will also include PVC and Ashok Chakra winners. Overall, six Marching of the Army will be continual, while the Navy and Air Force will join the parade with one-one Marching continuation. (Battle Array Republic Day 2026)

Fly-Paste and Cultural Program

During the parade there will be a fly-paste of 29 aircraft, which will include fighter jets, transport aircraft and helicopters. At the end of the parade there will be a cultural programme of about 2,500 artists, which will show India’s civilization, culture and progress.

514 Female Cadets in Parade

इस वर्ष 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परेड और उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में कुल करीब 514 महिला कैडेट्स और प्रतिभागी शामिल होंगी। इनमें सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सहयोगी दस्तों की महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में महिला कलाकार भाग लेंगी। गणतंत्र दिवस परेड में शामिल महिला कैडेट्स अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिनमें मार्चिंग कंटिंजेंट, सहायक दल और आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

गणतंत्र दिवस की शुरुआत कैसे होगी

मेजर जनरल ढिल्लों ने बताया कि 77वीं गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। यह परेड रायसीना हिल्स और विजय चौक से होते हुए कर्तव्य पथ, इंडिया गेट, तिलक मार्ग के रास्ते आगे बढ़ेगी। परेड की कुल अवधि लगभग 90 मिनट होगी।

गणतंत्र दिवस के दिन सबसे पहले देश के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। माननीय प्रधानमंत्री नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को नमन करेंगे। इसके बाद परेड की औपचारिक शुरुआत होगी। माननीय राष्ट्रपति सलामी लेंगी और राष्ट्रगान के दौरान इस वर्ष के मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

इस बार परेड के मुख्य अतिथि यूरोपियन यूनियन से होंगे। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट परेड में मौजूद रहेंगी। यूरोपियन यूनियन का दस्ता कर्नल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में परेड में शामिल होगा। (Battle Array Republic Day 2026)

Indian Air Force will be shown for the first time in the Republic Day Parade. Operation ‘Sindur’ Formation, ‘Pahar’ will bring three forces together.

Republic Day 2026 Flypast

Republic Day 2026 Flypast: This year, the Indian Air Force fighter aircraft and helicopter will fly in special formulations above the duty path on Republic Day. Indian Air Force has designed the Flypaste and Aerial Formation in a manner that will have a glimpse of operation shifter. The Indian Army and Naval Platform will also be flying along with the Air Force in the Republic Day Parade for the first time, which will show that the three forces are now moving rapidly towards the jointness. This year’s Republic Day Flight is so special as it is the first Republic Day after the operation shift.

Indian Air Force The wing of the commander Rajesh Yadav reported that the flight of this time will be in total eight formulations, with 29 aircraft part. These will include 16 fighter aircraft, 4 transport aircraft and 9 helicopters. The Fly Passt on duty paths will fly air crafts in the formation like flag, prahar, Varun, Arjun, Bajrang and Vijay. These will have the most special options. It will consist of two Raphael, two Mig-29, two Sukhoi 30 and one Jaguar part. All of these are the aircraft, which took part in the operation shifter. (Republic Day 2026 Flypast)

Republic Day 2026 Flypast

Republic Day 2026 Flypast: Bunta Flight in Two Parts

Flypaste is divided into two blocks according to Wing Commander Rajesh Yawal. First Block Parade During and after the second block parade ends. The first block will have four formations, which will appear in the sky with the parade. The second block will also be of four formulations, showing high-impact aerial values.

The beginning of the first block will be from the flag formation. It will fly four C-17 transport aircraft. The lead aircraft will fly by the national flag, while the three aircraft behind will appear in the sky with the flag of the Army, Navy and Air Force. During this time two aircraft will also rain the flowers on the audience. (Republic Day 2026 Flypast)

Thereafter, the practice forms will come in, including three ALH helicopters. The two helicopters will be of the Indian Army and an Air Force. This formation will show the role of helicopters in the ground battle and the inter-service coordination.

After this, the garland formation will appear. It will include an ALH, an Apache attack helicopter and an LCH. This formation explains how different platforms together play a decisive role in the battlefield. (Republic Day 2026 Flypast)

‘Sindur’ Formation: Multi-roll fighter aircraft will fly

The biggest attraction of this year will be the ‘Sindur’ formation. This is a single but extremely powerful compound Formation The multi-roll fighter aircraft of India will fly together. It will consist of two Raphael, two Mig-29, two Sukhoi 30 and one Jaguar part.

All these fighters will fly in a spearhead formation, which will be a symbol of the Operational Dominance and Combat Readiness of Indian Air Force. This formulation is directly dedicated to the success of the operation shifter and conveys that the air force is fully prepared to respond to any challenge. (Republic Day 2026 Flypast)

Republic Day 2026 Flypast

Transport Aircraft in Second Block

The second block will begin with the Transport Aircraft Formation, which will include C-130 and C-295. Thereafter the formulations that show the role of marine monitoring andfighter support will come, which will fly with P-8I and Sukhoi-30MKI.

Subsequently, Vajrang formations will appear, in which the fighter aircraft will fly into the aerobetic formation. This formulation will reflect the training, skill and technical capacity of the pilots. (Republic Day 2026 Flypast)

The completion of the flight will be from a single Rafael Fighter, which will be called ‘Vijay’. This aircraft will climb vertically by reaching the President and demonstrating its strength. This moment is considered to be the most exciting moment of the whole flowerist. (Republic Day 2026 Flypast)

What will happen in Jhanki: ‘From the signal to the nation’

Year Republic Day On Defence Services Waiters Table will also have special attractions. This is the theme of Jhanki’s ‘From Signal to Nation Creation’, which Indian Air Force has conceptualized and designed. Zhanki is divided into two main parts.

झांकी के आगे वाले हिस्से में देश के सभी सैन्य संघर्षों को दर्शाया गया है। सबसे ऊपर अमर जवान ज्योति की आकृति होगी, जो बलिदान का प्रतीक है। इसके ठीक नीचे एक घूमती हुई सिलिंड्रिकल दीवार होगी, जिस पर 1965 और 1971 के युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष को थ्री-डायमेंशनल रूप में दिखाया जाएगा। हर युद्ध को करीब 10 सेकंड का समय मिलेगा, जिससे दर्शक साफ तौर पर अलग-अलग युद्धों की झलक देख सकें। (Republic Day 2026 Flypast)

1965 के युद्ध में इस्तेमाल हुए टैंक और वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट, 1971 में टी-55 टैंक और आईएनएस राजपूत द्वारा पााकिस्तान की पनडुब्बी आईएनएस गाजी को डुबाने की घटना, और कारगिल युद्ध में मिराज-2000 और जगुआर की भूमिका को खास तौर पर दर्शाया जाएगा।

झांकी का पिछला हिस्सा युद्ध के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों के योगदान को दिखाएगा। इसमें स्वदेशी रक्षा निर्माण, इंडस्ट्री, मेडिकल सेवाएं, योग, कृषि और आपदा राहत कार्यों में वेटरन्स की भूमिका को दर्शाया जाएगा। इस हिस्से में एलईडी लाइटिंग और घूमते हुए गियर ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को मजबूत करेंगे। (Republic Day 2026 Flypast)

झांकी में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल छह वेटरंस भी मौजूद रहेंगे, जो दर्शकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन करेंगे। यह हिस्सा दर्शकों के लिए एक भावनात्मक सरप्राइज होगा।

इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में

भारतीय वायुसेना के डायरेक्टोरेट ऑफ सेरेमोनियल हेडक्वार्टर्स से एयर कमोडोर इमरान जैदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में है। गणतंत्र दिवस समारोह की हर गतिविधि को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और निर्णय लेने की ताकत साफ तौर पर दिखाई दे। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से होगी शुरुआत

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि समारोह से होगी, जहां प्रधानमंत्री देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करेंगे। इसके बाद एक इंटर-सर्विस गार्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना से सात-सात जवान शामिल होंगे। इस संयुक्त गार्ड की अगुवाई इस वर्ष वायुसेना करेगी और इसकी कमान स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कल्याण के हाथों में होगी। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रपति के आगमन के साथ परेड की औपचारिक शुरुआत

कर्तव्य पथ पर रिपब्लिक डे परेड की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सलामी दिए जाने के साथ होगी। इस दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति का आगमन भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ की आवाज़ में घोषित किया जाएगा, जो इस समारोह का एक विशेष और गौरवपूर्ण क्षण होगा।

भारतीय वायुसेना का मार्चिंग कंटिंजेंट

भारतीय वायुसेना का सेरेमोनियल मार्चिंग कंटिंजेंट इस वर्ष खास तौर पर आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस कंटिंजेंट में चार अधिकारी और 144 एयर वॉरियर्स शामिल होंगे, जो 12 रो और 12 कॉलम की बॉक्स फॉर्मेशन में मार्च करेंगे। इस कंटिंजेंट का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार करेंगे। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर लिखिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश भी अधिकारी के रूप में शामिल रहेंगे।

इन एयर वॉरियर्स का चयन भारतीय वायुसेना के अलग-अलग यूनिट्स से एक कड़े और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के जरिए किया गया है। परेड में शामिल होने से पहले इन जवानों ने लगभग दो महीने तक रोजाना 7 से 8 घंटे की कठिन प्रैक्टिस की है, जो सुबह 4 बजे से शुरू होती है। इसी अनुशासन और समर्पण की वजह से वायुसेना पहले भी कई बार बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट का खिताब जीत चुकी है। (Republic Day 2026 Flypast)

Republic Day 2026 Flypast

एयरफोर्स बैंड: पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार

मार्चिंग के दौरान 75 सदस्यीय भारतीय वायुसेना बैंड अपने शानदार संगीत से माहौल को देशभक्ति से भर देगा। इस बैंड में 66 अग्निवीर और पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार भी शामिल होंगी। बैंड का नेतृत्व चीफ एरॉनिस्ट डैनियल करेंगे, जो एक अनुभवी और कुशल ड्रम मेजर हैं।

बैंड द्वारा ‘साउंड बैरियर’, ‘वायु शक्ति’, ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘लीडर योद्धा’, ‘सारे जहां से अच्छा’, ‘फ्लाइंग स्टार’ और ‘एयर बैटल’ जैसे मार्शल ट्यून्स बजाए जाएंगे। जब वायुसेना का कंटिंजेंट राष्ट्रपति के सामने से गुजरेगा, तब खास तौर पर ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाई जाएगी, जो इस परेड का यादगार क्षण बनती है। (Republic Day 2026 Flypast)

Pakistan spreads from AI after the initiativegam CDS, Army Heads and IAF Chief’s Def Fake Video

Pahalgam AI fake narrative

Pahalgam AI fake narrative: When the terror incident occurred in the wrestling of Kashmir, the situation was not only impaired on the ground, but also a separate rust began in the digital world. It was fought with false content not from rust guns and bombs, but made from AI-based fake narrative i.e. Artificial Intelligence. The report released in January 2026 of the Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) stated that misinformation spread through Artificial Intelligence has become one of the most dangerous security challenges in today’s round. According to the report, fake video, fake satellite image and false military claims made of AI can mislead the situation in any sensitive area.

Sipperi took place between India-Pakistani after a particularly initiativegam terror attack Operation Shifter While referring to that the information makes a fake picture different from the false ground conditions spread across the domain, which can lead to false assessments and hurry decisions. The report also states that if AI based disinformation was not identified and prevented by time, it can lead to "Multi-Domain Escalation" where cyber, information and traditional military fronts can provoke together. After the attack of the wrestler FAC Nerative A fresh example of this danger is going to be considered, where digital lies tried to spoil the real situation. (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ही घंटों के भीतर ऐसी तस्वीरें, वीडियो और दावे वायरल होने लगे, जिनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन उनका मकसद साफ था डर फैलाना, भ्रम पैदा करना और हालात को और भड़काना। (Pahalgam AI fake narrative)

Pahalgam AI fake narrative: फेक नैरेटिव क्या होता है?

फेक नैरेटिव का मतलब सिर्फ झूठी खबर नहीं होता। यह एक सोची-समझी रणनीति होती है, जिसे इस तरह पेश किया जाता है कि लोग उसे सच मान लें। इसमें आधी सच्चाई, भावनात्मक भाषा और डर पैदा करने वाले विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। पहलगाम मामले में भी ऐसा ही हुआ। कुछ पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया गया है, कहीं यह बताया गया कि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है, तो कहीं पूरी तरह से नकली तस्वीरें दिखाकर माहौल को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई।

एआई की मदद से यह काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब किसी को घंटों फोटो एडिटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सेकंड में डीपफेक वीडियो, एआई-जनरेटेड इमेज और नकली ऑडियो तैयार हो जाता है, जो असली जैसा दिखता है। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम के बाद सोशल मीडिया पर क्या हुआ?

घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। कुछ अकाउंट्स ने दावा किया कि यह हमला किसी बड़े युद्ध की शुरुआत है। कुछ ने यह दिखाने की कोशिश की कि हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। यहां तक कि कुछ वीडियो ऐसे भी वायरल हुए, जो किसी और देश या पुराने संघर्ष से जुड़े थे, लेकिन उन्हें पहलगाम का बताकर शेयर किया गया।

समस्या यह थी कि इन पोस्ट्स को देखकर आम लोग घबरा गए। कई लोगों ने बिना जांचे-परखे इन्हें आगे शेयर कर दिया। देखते-ही-देखते फेक नैरेटिव सैकड़ों-हजारों लोगों तक पहुंच गया। यही वह बिंदु है जहां सूचना युद्ध खतरनाक बन जाता है। (Pahalgam AI fake narrative)

डीजीआईएसपीआर ने फैलाईं फेक न्यूज

ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन डीपफेक वीडियो, एडिट किए गए फुटेज और झूठी जानकारियां सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि ऑफिशियल चैनलों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक के जरिए फैलाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान ने सूचना के जरिये हमला करने की रणनीति अपनाई और यह सब पकिस्तानी सेना की एजेंसी डीजीआईएसपीआर (DGISPR) के जरिए किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक

ऑपरेशन सिंदूर वाले दिन पाकिस्तान की तरफ से 7 एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) साइबर ग्रुप्स सक्रिय थे और 7 मई को एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक किए गए। यही नहीं, ऑपरेशन के पहले दिन ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर करीब 3 करोड़ साइबर हमले दर्ज किए गए।

पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में यूट्यूब चैनल, एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स और सरकारी हैंडल्स का इस्तेमाल फेक न्यूज फैलाने के लिए किया गया। हैरानी की बात यह थी कि 30 से 40 मिनट के अंदर एक जैसी भाषा और एक जैसे मैसेज बड़ी संख्या में पोस्ट किए गए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 43 समान थ्रेड्स से एक लाख से ज्यादा वीडियो तैयार कर दिए गए, ताकि एक ही झूठी कहानी को बार-बार फैलाया जा सके।

इस सूचना युद्ध में इन्फ्लुएंसर्स के जरिए लोगों की राय बदलने की कोशिश की गई। इस संदर्भ में ज्योति मल्होत्रा केस का जिक्र किया जा सकता है जो यह दिखाता है कि किस तरह प्रभावशाली चेहरों का इस्तेमाल किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

सेना प्रमुख से जुड़े 23 डीपफेक वीडियोज

ऑपरेशन सिंदूर के आठ महीने बाद भी यह सिलसिला अभी भी रुका नहीं है। पिछले चार महीनों में 217 डीपफेक मामलों सामने आए, जिनमें से 164 भारतीय सेना से जुड़े थे। इनमें सीडीएस से जुड़े 9, थलसेना प्रमुख से जुड़े 23, वायुसेना प्रमुख से जुड़े 4 और नौसेना प्रमुख से जुड़े 3 डीपफेक शामिल हैं।

आज हालात ऐसे हो गए हैं कि जब भी कोई सैन्य प्रमुख किसी मंच से बोलता है, तो आधे घंटे के भीतर उसका एआई-आधारित डीपफेक वीडियो तैयार कर दिया जाता है, जिसमें बस थोड़े-बहुत बदलाव किए जाते हैं, ताकि वह पूरी तरह असली लगे। यह आज के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बन चुका है। (Pahalgam AI fake narrative)

एआई कैसे बना रहा है झूठ को और खतरनाक?

पहले झूठी खबरें पहचानना थोड़ा आसान था। फोटो धुंधली होती थी, वीडियो की क्वालिटी खराब होती थी या भाषा में साफ गलती दिख जाती थी। लेकिन अब एआई ने यह फर्क लगभग खत्म कर दिया है। डीपफेक टेक्नोलॉजी किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हाव-भाव इतनी सफाई से कॉपी कर सकती है कि आम आदमी के लिए सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

पहलगाम से जुड़े कुछ वीडियो में सुरक्षाबलों की कार्रवाई को गलत तरीके से दिखाया गया। कुछ में ऐसे बयान जोड़ दिए गए, जो कभी दिए ही नहीं गए थे। इन सबका मकसद सिर्फ एक था लोगों के दिमाग में शक और डर पैदा करना। (Pahalgam AI fake narrative)

क्यों होता है ऐसा फेक नैरेटिव?

फेक नैरेटिव यूं ही नहीं फैलता। इसके पीछे कई मकसद होते हैं। पहला मकसद होता है अफरा-तफरी फैलाना। जब लोग डरते हैं, तो वे तर्क से नहीं, भावना से फैसले लेते हैं। दूसरा मकसद होता है राजनीतिक या रणनीतिक दबाव बनाना। अगर यह दिखा दिया जाए कि हालात बहुत खराब हैं, तो सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ता है।

तीसरा और सबसे खतरनाक मकसद होता है एस्केलेशन यानी टकराव को बढ़ाना। अगर झूठे दावों के आधार पर कोई गलत फैसला लिया जाए, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम और मल्टी-डोमेन खतरा

आज की जंग सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब इसमें साइबर, स्पेस और इन्फॉर्मेशन डोमेन भी शामिल हो चुके हैं। यही बात अंतरराष्ट्रीय रिसर्च संस्थाएं भी लगातार कह रही हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की जनवरी 2026 की एक पॉलिसी पेपर में साफ कहा गया है कि एआई-आधारित डिसइन्फॉर्मेशन जैसे मल्टी-डोमेन टूल्स परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच भी हालात को खतरनाक मोड़ पर ले जा सकते हैं। खास तौर पर भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह जोखिम और ज्यादा है ।

इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर फेक नैरेटिव्स को समय रहते नहीं रोका गया, तो वे वास्तविक सैन्य हालात को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं, जिससे गलत आकलन और गलत फैसले हो सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

पहलगाम के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती थी। एक तरफ जमीन पर हालात को काबू में रखना और दूसरी तरफ डिजिटल दुनिया में फैल रहे झूठ को रोकना। यह काम आसान नहीं होता, क्योंकि फेक कंटेंट सेकंडों में फैल जाता है, जबकि सच तक पहुंचने में वक्त लगता है।

कई बार एजेंसियों को अपना कीमती समय और संसाधन सिर्फ इस बात पर लगाने पड़ते हैं कि कौन-सी खबर फर्जी है और उसे कैसे काउंटर किया जाए। यही वजह है कि आजकल सुरक्षा एजेंसियां इन्फ़ॉर्मेशन वॉरफेयर को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही हैं, जितनी पारंपरिक सुरक्षा को। (Pahalgam AI fake narrative)

मीडिया और आम लोगों की भूमिका

फेक नैरेटिव के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार या सेना नहीं जीत सकती। इसमें मीडिया और आम लोगों की भूमिका सबसे अहम है। पहलगाम के मामले में भी देखा गया कि कुछ जिम्मेदार मीडिया संस्थानों ने बिना पुष्टि के खबरें नहीं चलाईं। उन्होंने आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया और अफवाहों से दूरी बनाए रखी।

वहीं आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे हर वायरल पोस्ट पर भरोसा न करें। किसी भी वीडियो या तस्वीर को शेयर करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि इसका सोर्स क्या है और क्या यह जानकारी किसी भरोसेमंद जगह से आई है। (Pahalgam AI fake narrative)

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि लोग कुछ देर के लिए गुमराह हो जाते हैं। असली खतरा यह है कि यह भरोसे को कमजोर कर देता है। जब लोग यह नहीं समझ पाते कि क्या सच है और क्या झूठ, तो वे हर जानकारी पर शक करने लगते हैं। इससे समाज में तनाव बढ़ता है और हालात और बिगड़ते हैं।

पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में यह खतरा और ज्यादा होता है, क्योंकि यहां की हर खबर का असर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है। (Pahalgam AI fake narrative)

कैसे रोका जाए एआई-फेक नैरेटिव?

आने वाले समय में एआई-आधारित फेक नैरेटिव और भी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए इससे निपटने के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। सबसे पहले, टेक्नोलॉजी के स्तर पर ऐसे टूल्स विकसित करने होंगे, जो डीपफेक और फर्जी कंटेंट को जल्दी पहचान सकें।

दूसरा, लोगों को डिजिटली एजुकेट करना होगा, ताकि वे खुद समझ सकें कि कौन-सी जानकारी भरोसेमंद है और कौन-सी नहीं। तीसरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी, ताकि वे फेक कंटेंट को फैलने से पहले रोक सकें। (Pahalgam AI fake narrative)