📍New Delhi | 7 Jan, 2026, 12:18 PM
India CUAS grid: India has been battling to further strengthen its security system, considering the rising threat of drone attacks. While the Central Government is preparing a comprehensive air defence shield under the Mission Sudarshan Chakra, Indian forces are now working towards a separate and special joint counter unmanaged aerial system (CUAS) grid pavement. The purpose of this grid is to identify, monitor and failure of the enemy or suspected drones, to protect the country’s military and civil installations from any kind of drone attack.
According to the formulas, this Joint CUAS grid existing Air Defense will be different from the network. The reason for this is that the number of small drones and unmanaged aerial systems is increasing rapidly and if their monitoring responsibility is put on existing systems, they may be more cumbersome than needed. A separate network is being erected by adding the CUAS systems of the three forces, taking into account the same. CUAS Grid
India Joint CUAS Grid: The new CUAS network will be different from IACCS
Integrated Air Command and Control System of Indian Air Force (Integrated Air Command and Control System)IACCS) Already monitors aircraft, missiles and large aerial threats. But small drones, low-altitude flying UAVs and low-cost unmanaged systems should have a separate system. The new CUAS grid will be separated from IACCS, so that both systems can fully focus on their own purpose.
यह जॉइंट सीयूएएस ग्रिड जॉइंट एयर डिफेंस सेंटर्स (JADC) के साथ जोड़ा जाएगा, जहां थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के अधिकारी मिलकर ड्रोन मूवमेंट पर नजर रखेंगे। इसका इस्तेमाल दुश्मन ड्रोन के साथ-साथ किसी भी तरह के रॉग या अनऑथराइज्ड ड्रोन की पहचान के लिए किया जाएगा। (India joint CUAS grid)
पिछले 10 साल में खरीदे गए सिस्टम होंगे एक नेटवर्क में
पिछले पांच से दस सालों में तीनों सेनाओं ने बड़ी संख्या में काउंटर-ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं। इनमें अलग-अलग रेंज के रडार, जैमर, एयर डिफेंस गन और अन्य काउंटर यूएएस तकनीक शामिल हैं। नए सीयूएएस ग्रिड में इन सभी सिस्टम्स को नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाएगा, ताकि ड्रोन से जुड़ी हर जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके।
इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी और किसी भी संदिग्ध ड्रोन को समय रहते ट्रैक कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह ग्रिड ड्रोन खतरे से निपटने के लिए एक डेडिकेटेड स्ट्रक्चर देगा, जिससे रेस्पॉन्स टाइम कम होगा और कॉर्डिनेशन बेहतर बनेगा। (India joint CUAS grid)
ऑपरेशन सिंदूर से मिली अहम सीख
ड्रोन खतरे की गंभीरता Operation Shifter के दौरान साफ तौर पर सामने आई थी। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से तुर्की और चीनी मूल के ड्रोनों का इस्तेमाल कर भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, तीनों सेनाओं की सतर्कता और खासकर आर्मी एयर डिफेंस की तत्परता के चलते इन हमलों को नाकाम कर दिया गया।
इस दौरान भारतीय सेना की एल-70 और जेडयू-23 एयर डिफेंस गनों ने बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन को मार गिराया। सूत्रों के अनुसार, इन गनों ने कम ऊंचाई पर उड़ रहे ड्रोन के खिलाफ बेहद शानदार प्रदर्शन किया। इसी अनुभव के आधार पर ड्रोन रोधी क्षमता को और मजबूत करने का फैसला लिया गया। (India joint CUAS grid)
आबादी वाले इलाकों में भी तैनात होंगी एयर डिफेंस गन
ड्रोन खतरे को देखते हुए भारतीय सेना अब आबादी वाले इलाकों में भी एयर डिफेंस गन तैनात करने पर काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि अगर किसी शहर, महत्वपूर्ण इंस्टॉलेशन या रणनीतिक इलाके की ओर ड्रोन आता है, तो उसे वहीं रोका जा सके। छोटे ड्रोन अक्सर कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, इसलिए गन आधारित एयर डिफेंस सिस्टम को एक प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
सेना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तैनाती से न सिर्फ सैन्य ठिकानों, बल्कि नागरिक इलाकों को भी अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी। ड्रोन के जरिए निगरानी, हमला या तस्करी जैसी गतिविधियों को रोकने में यह व्यवस्था अहम साबित हो सकती है। (India joint CUAS grid)
मिशन सुदर्शन चक्र के तहत व्यापक सुरक्षा कवच
जॉइंट सीयूएएस ग्रिड के साथ-साथ सरकार हाई लेवल पर मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम कर रही है। इस मिशन का उद्देश्य देश के लिए एक ऐसा एयर डिफेंस शील्ड तैयार करना है, जो हर तरह के एरियल खतरे से निपटने में सक्षम हो। इसके लिए पहले ही एक समिति बनाई जा चुकी है, जो विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है।
मिशन Sudarshan चक्र के तहत मिसाइल, फाइटर एयरक्राफ्ट, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए एक मल्टी-लेयर सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसमें सेंसर, रडार, कमांड एंड कंट्रोल और इंटरसेप्टर सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने पर जोर दिया जा रहा है। (India joint CUAS grid)
तीनों सेनाओं में तालमेल बढ़ाने की जिम्मेदारी सीडीएस के पास
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त क्षमता विकसित करने की जिम्मेदारी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस के पास है। सीडीएस का मुख्य काम थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच एकीकरण को बढ़ाना और संयुक्त ऑपरेशन्स को मजबूत करना है। जॉइंट सीयूएएस ग्रिड इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन जैसे नए खतरों से निपटने के लिए अलग-अलग नहीं, बल्कि संयुक्त रूप से काम करना जरूरी है। सीयूएएस ग्रिड तीनों सेनाओं की क्षमताओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर इस जरूरत को पूरा करेगा। (India joint CUAS grid)
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