📍नई दिल्ली | 1 Oct, 2026, 8:12 PM
China LD-2000 Air Defence System: क्या पाकिस्तान वायुसेना चीन का एलडी-2000 नियर रेंज डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रही है? हाल ही में पाकिस्तानी वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम के एक आधिकारिक इन्फोग्राफिक में एलडी-2000 जैसा सिस्टम दिखाई दिया। हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ओपन सोर्स इंटेलिजेंस और कई मिलिट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान अपनी एयर वॉरफेयर रणनीति में बदलाव कर कर रहा है।
दरअसल Operation Shifter के दौरान जिस तरह से भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों ने पकिस्तान के एयरबेस, रडार स्टेशन और कमांड सेंटर को निशाना बनाया था, उसके बाद से पाकिस्तान अपने एसेट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर हो गया है।
China LD-2000 Air Defence System: पाकिस्तान के इन्फोग्राफिक से खुला राज
हाल ही में पाकिस्तान वायुसेना द्वारा जारी एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम इन्फोग्राफिक में एक मोबाइल गन आधारित एयर डिफेंस सिस्टम दिखाई दिया। जो चीन के एलडी-2000 क्लोज-इन वेपन सिस्टम (सीआईडब्ल्यूएस) से काफी मिलता-जुलता था।
जिसके बाद बाद दावे किए जाने लगे कि यह सिस्टम चीनी नौसेना के टाइप-730 गैटलिंग गन पर आधारित एलडी-2000 हो सकता है। हालांकि पाकिस्तान एयर फोर्स या पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इसके बावजूद इस तस्वीर को गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि मिलिट्री इन्फोग्राफिक्स में आमतौर पर उन्हीं प्लेटफॉर्मों को दिखाया जाता है जो किसी न किसी रूप में डिफेंस प्रोजेक्ट, मूल्यांकन या भविष्य के फॉरमेशंस का हिस्सा हों। (China LD-2000 Air Defence System)

क्या है एलडी-2000 सिस्टम?
एलडी-2000 चीन का बनाया एक नियर रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे क्लोज-इन वेपन सिस्टम यानी सीआईडब्ल्यूएस क्लास में रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के उन हवाई खतरों को नष्ट करना है जो अंतिम चरण में टारगेट के बेहद करीब पहुंच चुके हों।
यह सिस्टम चीनी नौसेना के प्रसिद्ध टाइप-730 सात बैरल गैटलिंग गन सिस्टम के लैंड वर्जन के तौर पर देखा जाता है। इसमें 30 मिमी की सात बैरल वाली गैटलिंग गन लगाई जाती है, जो अत्यधिक तेज रफ्तार से फायरिंग कर सकती है।
इसका फायरिंग रेट लगभग 5,600 राउंड प्रति मिनट तक पहुंच सकता है। (China LD-2000 Air Defence System)
ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशंस को रोकेगा
एलडी-2000 को खास तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के खिलाफ बनाया गया है। इसमें क्रूज मिसाइल, ड्रोन, कामिकाजे ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, स्मार्ट वेपन और तेज गति वाले मानवरहित प्लेटफॉर्म (यूएवी) शामिल हैं।
आधुनिक युद्ध में कई हथियार रडार से बचते हुए बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। ऐसे टारगेट्स को इंटरसेप्ट करना अक्सर मुश्किल होता है। एलडी-2000 जैसे सिस्टम इन्हीं खतरों के खिलाफ अंतिम सुरक्षा घेरा बनाते हैं।
इसी कारण इसे “टर्मिनल डिफेंस सिस्टम” भी कहा जाता है। जब लंबी और मध्यम दूरी की एयर डिफेंस लेयर किसी खतरे को रोकने में विफल रहती है, तब एलडी-2000 जैसे सिस्टम एक्टिव हो जाते हैं। (China LD-2000 Air Defence System)

कैसे काम करता है यह सिस्टम?
एलडी-2000 केवल एक गन नहीं बल्कि खुद में एक पूरा Air Defense प्लेटफॉर्म है। इसमें आधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और फायर कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं।
जब कोई टारगेट इसकी जद आता है तो रडार उसकी स्थिति, गति और दिशा का पता लगाता है। इसके बाद फायर कंट्रोल कंप्यूटर टारगेट की संभावित फ्लाइट डायरेक्शन की गणना करता है।
जैसे ही टारगेट प्रभावी मारक दूरी में आता है, गैटलिंग गन कुछ सेकंड के भीतर सैकड़ों गोलियां दाग सकती है। इसका उद्देश्य टारगेट को पूरी तरह नष्ट करना या उसे उसके मिशन को पूरा करने से पहले उसे निशाना बनाना होता है। (China LD-2000 Air Defence System)

एयरबेस की सुरक्षा बनी टेंशन
Operation In Sintered ब्रह्मोस मिसाइलों ने पााकिस्तान के कई एयरबेसों पर कहर बरपाया था और रनवे को निशाना बनाया था। इनमें पाकिस्तान के कई स्ट्रेटेजिक एयरबेस जिनमें इस्लामाबाद से करीब 10 किमी दूर नूर खान (रावलपिंडी/चकलाला), भोलारी, ड्रोन बेस मुरीद एयरबेस (चकवाल), जैकोबाबाद (शाहबाज), मुशफ (सरगोधा), रहीम यार खान और सुक्कुर शामिल थे। वहीं, जैकोबाबाद के एफ-16 हैंगर का एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, और कम से कम दो कमांड-कंट्रोल सेंटर भी क्षतिग्रस्त हुए थे।
आधुनिक युद्ध में एयरबेस किसी भी वायुसेना की रीढ़ होते हैं। अगर रनवे, हैंगर, ईंधन भंडार, हथियार डिपो या कमांड सेंटर क्षतिग्रस्त हो जाएं तो अत्याधुनिक फाइटर जेट भी प्रभावी ढंग से ऑपरेशन नहीं कर पाते।
किसी भी बड़े संघर्ष में एयरबेस और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर शुरुआती टारगेट्स होते हैं। इसी वजह से कई देश अब मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क डेवलप कर रहे हैं। इसमें लंबी दूरी की मिसाइलें, मध्यम दूरी के डिफेंस सिस्टम्स और टर्मिनल फेज गन बेस्ड सिस्टम्स शामिल होते हैं। एलडी-2000 को भी इसी अंतिम सुरक्षा परत का हिस्सा माना जा रहा है।
बता दें कि पाकिस्तान पहले से ही चीन के जेएफ-17 थंडर, जे-10सी फाइटर जेट, एचक्यू-9बीई लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम और एलवाई-80 मध्यम दूरी का मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। इन सिस्टम्स को पाकिस्तान के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। (China LD-2000 Air Defence System)

ब्रह्मोस को रोकना नामुमकिन
सूत्रों के मुताबिक, एलडी-2000 की प्रभावी रेंज लगभग 2.5 से 3.5 किलोमीटर तक होती है और यह एयर डिफेंस की आखिरी सुरक्षा परत (लास्ट-डिच लेयर) के रूप में काम करता है। यह सिस्टम सबसोनिक ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों और रॉकेट तथा मोर्टार जैसे खतरों के खिलाफ तो कारगर है। लेकिन ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के मामले में यह फेल है। ऐसी मिसाइलें लंबी दूरी से लॉन्च होकर तेज रफ्तार से टारगेट की ओर बढ़ती हैं, जिसके चलते उन्हें रोकने के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता।
सूत्रों का कहना है कि गन बेस्ड सीआईडब्ल्यूएस (क्लोज-इन वेपन सिस्टम) रनवे को नुकसान पहुंचाने वाले हमलों या दूर से किए गए स्टैंडऑफ अटैक को नहीं रोक सकती। इसका मुख्य उद्देश्य केवल उस मिसाइल, ड्रोन या गोला-बारूद को मार गिराने की कोशिश करना होता है जो पहले ही एयरबेस के ऊपर या उसके बेहद करीब पहुंच चुका हो। (China LD-2000 Air Defence System)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





