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INS Mahendragiri joined the Indian Navy, Defence Minister Bole- Both Maritime Shakti and Self-sufficiency in the Changing War

Defence Minister Rajnath Singh said our navy has repeatedly proved that whether there is a relief campaign in a maritime area, stopping maritime robbery, have to assist in natural disaster or help countries in crisis, Indian Navy always arrives first...

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📍New Delhi / Visakhapatnam | 11 Jul, 2026, 11:56 AM

INS Mahendragiri Commissioned: The Indian Navy got another state-of-the-art indigenous Health Frigate on Saturday. INS Mahendragiri was formally incorporated into the Eastern naval fleet in Visakhapatnam. It is the sixth stalth frigate prepared under the Warship Project-17A and has been built by Mazgaon Dock Shipbuilders Limited (MDL) in Mumbai.

On this spot, Defence Minister Rajnath Singh said that joining Mahendragiri’s navy is not only the beginning of a new warship, but it is also evidence of India’s growing maritime power, indigenous defence production and modern warship building capacity.

INS Mahendragiri Commissioned: New strength to meet the eastern marine area

Defence Minister said INS Mahendragiri By joining the Navy of the Eastern Fleet war will be capacity and strong. This will lead to the Blue Water Capacity of Indian Navy and its presence in the Indian Ocean region.

In his address, the Defence Minister said that Visakhapatnam today is not only the headquarters of the Eastern Naval Command, but has become a major centre for the maritime security of India. In the past few years, the city has hosted several large international naval events. It has also strengthened cooperation with the maritime diplomacy and friend countries of India.

He said Andhra Pradesh is now becoming an important centre of defence and aerospace sector. Here is fast working on defense production, military platform, test features and new technologies. Several important tasks associated with the country’s indigenous fifth generation fighter aircraft program are also being carried out in the same state.

The strong example of self-sufficient India is Mahendergiri

Rajnath Singh said that INS Mahendergiri is a great example of self-sufficient India campaign. It has been constructed by MDL based on design prepared by the Bureau of Warship Design of Indian Navy. He said that many defence industries, micro, small and medium industries and private companies have also played a significant role in the construction of this warship. Protecting the country has become industrial base and strong.

Must adopt techniques

Defence Minister said that the form of war in the world is changing rapidly. Now Artificial Intelligence, Cyber War, Space Based Technique, Hypersonic Weapons and Unmanned Systems have become part of modern military campaigns.

He said it is necessary to adopt new techniques, but with this the traditional military abilities must also be strengthened. According to them, the technique will play a significant role in future wars, but the actual strength of any country will be determined by its trained soldier, strong military organization and national resolution.

Operations Lessons Meet From the Sindoor

Defence Minister The operation shifter proved that India’s forces are fully capable of responding to every challenge. This campaign demonstrated our combined military capacity, technical efficiency and better coordination in front of the world.

वहीं, हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज समुद्री सुरक्षा केवल नौसेना का विषय नहीं रह गई है। यह देश की आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से भी जुड़ी हुई है।

भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।

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उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना ने बार-बार यह साबित किया है कि चाहे किसी समुद्री क्षेत्र में राहत अभियान चलाना हो, समुद्री डकैती रोकनी हो, प्राकृतिक आपदा में सहायता पहुंचानी हो या संकट में फंसे देशों की मदद करनी हो, भारतीय नौसेना हमेशा सबसे पहले पहुंचती है।

इसी कारण भारतीय नौसेना को आज दुनिया में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” और “प्रीफर्ड सिक्योरिटी पार्टनर” के रूप में देखा जाता है। (INS Mahendragiri Commissioned)

आंध्र प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा रक्षा उद्योग

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनकापल्ली जिले में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की नई नेवल सिस्टम कंस्ट्रक्शन युनिट डेवलप की जा रही है। इस इकाई में ऑटोनॉमस पानी में चलने वाले वाहन, टॉरपीडो और अंडरवॉटर काउंटर मेजर सिस्टम जैसे आधुनिक रक्षा उपकरण बनाए जाएंगे। पहले इन प्रणालियों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था।

उन्होंने यह भी बताया कि कर्नूल को देश के बड़े ड्रोन निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिस तरह सूरत हीरा उद्योग और बेंगलुरु सूचना प्रौद्योगिकी के लिए जाना जाता है, उसी तरह कर्नूल को मानव रहित प्रणालियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने के साथ आंध्र प्रदेश समुद्री सुरक्षा और मानव रहित रक्षा तकनीक, दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। (INS Mahendragiri Commissioned)

तय समय सीमा के भीतर पूरा किया गया महेंद्रगिरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण के दौरान कहा कि महेंद्रगिरि का निर्माण तय समय सीमा के भीतर पूरा किया गया है। यह केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और मजबूत रक्षा उद्योग का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि हर नए युद्धपोत के साथ देश का रक्षा उद्योग और अधिक परिपक्व, सक्षम और आत्मविश्वासी बनता जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जहाज निर्माण केवल एक उद्योग नहीं है। इससे इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, इंजन, सॉफ्टवेयर, प्रिसीजन इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और अनेक सहायक उद्योगों को भी काम मिलता है। इसी कारण सरकार जहाज निर्माण क्षेत्र में लंबे समय के निवेश को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर जहाज निर्माण और समुद्री रक्षा तकनीक का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसमें निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार करने वाले युवा और वैश्विक साझेदार सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड, शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम और शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं से देश का औद्योगिक आधार मजबूत होगा, जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी और भारत अपने समुद्री तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए और अधिक सक्षम बनेगा।

नेवी चीफ बोले- विशाखापत्तनम बना समुद्री सुरक्षा का प्रमुख केंद्र

वहीं, इस मौके पर बोलते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि विशाखापत्तनम समुद्री सुरक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यह शहर भारत के समुद्री दृष्टिकोण और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में हमारी रणनीतिक सोच का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में Visakhapatnam ने अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू, मिलन नौसैनिक अभ्यास, इंडियन ओशन नेवल संगोष्ठी (आईओएनएस) और कई महत्वपूर्ण समुद्री कार्यक्रमों की सफल मेजबानी की है। इन आयोजनों ने भारत की समुद्री कूटनीति और मित्र देशों के साथ सहयोग को नई मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्वी समुद्री तट की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में विशाखापत्तनम की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। (INS Mahendragiri Commissioned)

महेंद्रगिरि ने जोड़ा पूर्वी और पश्चिमी तट

नौसेना प्रमुख ने कहा कि महेंद्रगिरि का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में हुआ, जबकि इसे भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल किया जा रहा है। एक तरह से यह युद्धपोत भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों समुद्री तटों को जोड़ने का प्रतीक है। यह हमारी एकीकृत, आधुनिक और बहु-केंद्रित नौसैनिक क्षमता को भी दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आईएनएस महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा। यह जहाज देश के समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और पूर्वी बेड़े की ताकत को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि महेंद्रगिरि का ध्येय वाक्य “माइटी, मेजेस्टिक, मैचलेस” है। मुझे विश्वास है कि यह युद्धपोत अपने नाम और अपने आदर्शों के अनुरूप हर मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा। (INS Mahendragiri Commissioned)

इन प्रोजेक्ट्स से एमडीएल में मिलीं छह हजार नौकरियां

वहीं, इस मौके पर बोलते हुए एमडीएल के चैयरमेन और एमडी रिटायर्ड कैप्टन जगमोहन ने बताया कि महेंद्रगिरि के शामिल होने के साथ ही एमडीएल ने पिछले लगभग 20 सालों में भारतीय नौसेना द्वारा सौंपे गए सभी प्रमुख युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम पूरे कर लिए हैं।

इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 85 हजार करोड़ रुपये रही है। इन परियोजनाओं ने भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया है और देश में आधुनिक जहाज निर्माण की क्षमता को नई ऊंचाई दी है।

उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से एमडीएल में छह हजार से अधिक कुशल कर्मचारियों को लगातार रोजगार मिला।

इसके अलावा देशभर में 25 हजार से अधिक अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा हुए। 500 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इन परियोजनाओं का हिस्सा बने।

इनमें से कई कंपनियां शुरुआत में छोटी आपूर्तिकर्ता थीं, लेकिन आज वे भारतीय रक्षा उद्योग की भरोसेमंद साझेदार बन चुकी हैं। मेरे विचार से यही आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी सफलता है। (INS Mahendragiri Commissioned)

एमडीएल ने बनाईं कलवरी क्लास की छह पनडुब्बियां

कैप्टन जगमोहन ने बताया कि एमडीएल द्वारा बनाए गए कलवरी श्रेणी की छह पनडुब्बियां, विशाखापत्तनम श्रेणी के चार विध्वंसक युद्धपोत और Project-17A की चार फ्रिगेट आज भारतीय नौसेना की अग्रिम युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इनमें से हर प्लेटफॉर्म भारत की तकनीकी क्षमता और स्वदेशी जहाज निर्माण की सफलता का उदाहरण है। इन्हें भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो, वारशिप ओवरसीइंग टीम, एमडीएल और भारतीय उद्योगों के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है। (INS Mahendragiri Commissioned)

20 हजार करोड़ रुपये का नया मेगा शिपयार्ड

एमडीएल के एमडी कैप्टन जगमोहन ने बताया कि महेंद्रगिरि के कमीशनिंग के साथ भविष्य की योजनाओं पर भी तेजी से काम जारी है। उन्होंने बताया कि एमडीएल एक नए मेगा शिपयार्ड की स्थापना की योजना पर काम कर रहा है। इस परियोजना में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।

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इस नए शिपयार्ड में बड़े वाणिज्यिक जहाजों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही यह भारत की क्षमता को बड़े नौसैनिक जहाजों के निर्माण, रखरखाव और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भी मजबूत करेगा।

यह परियोजना भारत सरकार के समुद्री अमृतकाल विजन-2047 को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भारत को दुनिया के प्रमुख जहाज निर्माण देशों में शामिल करने की दिशा में मदद करेगी।

75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री से तैयार हुआ युद्धपोत

आईएनएस महेंद्रगिरि का वजन लगभग 6,670 टन है। यह एक बहुउद्देश्यीय स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे समुद्र में अलग-अलग प्रकार के अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसका नाम ओडिशा के प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत के नाम पर रखा गया है।

इस युद्धपोत में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसमें इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख सिस्टम, सेंसर और उपकरण भारतीय उद्योगों ने तैयार किए हैं। इससे देश की डिजाइन क्षमता, निर्माण कौशल और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता का स्तर बढ़ा है। (INS Mahendragiri Commissioned)

आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस

महेंद्रगिरि को आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें लंबी दूरी तक निगरानी करने वाला मल्टी-फंक्शन रडार लगाया गया है। यह रडार एक साथ कई हवाई और समुद्री टारगेट्स पर नजर रख सकता है।

युद्धपोत में लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, पनडुब्बी रोधी हथियार, टॉरपीडो लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं, जो समुद्र के ऊपर और नीचे मौजूद खतरों का पता लगाने में मदद करते हैं।

महेंद्रगिरि को हवा, समुद्र और पानी के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ सामना करने के लिए तैयार किया गया है। (INS Mahendragiri Commissioned)

स्टेल्थ डिजाइन से दुश्मन के लिए पहचानना मुश्किल

यह युद्धपोत स्टेल्थ तकनीक पर आधारित है। इसके डिजाइन में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिससे रडार पर इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। जहाज की बाहरी संरचना इस तरह तैयार की गई है कि रडार तरंगों का परावर्तन कम हो।

इसके साथ ही जहाज में ऑटोमेशन का स्तर भी काफी अधिक है। कई सिस्टम कंप्यूटर आधारित हैं, जिससे कम समय में तेजी से निर्णय लेने और हथियारों के संचालन में मदद मिलती है।

महेंद्रगिरि में कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। जरूरत के अनुसार यह डीजल इंजन और गैस टरबाइन दोनों का उपयोग कर सकता है। इससे जहाज को लंबी दूरी तक संचालन और अधिक गति दोनों मिलती हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 28 नॉट है और इस पर करीब 225 अधिकारी और नाविक तैनात किए जा सकते हैं। (INS Mahendragiri Commissioned)

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  • Herry passport

    Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.

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Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.

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