📍New Delhi | 25 Feb, 2026, 3:41 PM
Indian Navy Helicopter Lease: Indian Navy has taken a big and important step to meet the lack of utility helicopters. Naval has first started meeting its operational needs from the Private Sector to Helicopter Lease. Under this step the navy has incorporated the AW139 Utility Helicopter on the "Vet Leage" model. One of these helicopters have been deployed on the East Coast and on the Second Western Coast.
This step is taken at a time when Indian forces Helicopter The lack of long remains. Earlier, the Indian Army has also taken the helicopter lease from private companies by adopting similar models. Now the Navy is trying to meet its needs while moving on the same path. Indian Navy Helicopter Lease
Indian Navy Helicopter Lease: What is Wet Lez
Naval The helicopter has taken from a private operator company, which will also operate and maintain them. It is called Weight Lease, which also consists of Pilot, Maintenance and Support Staff with Helicopter. The navy of long waits without this model immediately gets operational capacity.
फरवरी 2026 की शुरुआत में इन हेलीकॉप्टरों में से एक ने पूर्वी समुद्री क्षेत्र में उड़ान भरनी शुरू कर दी है। यह हेलीकॉप्टर यूटिलिटी रोल में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, कम्युनिकेशन, मेडिकल इवैक्यूएशन और सर्च ऑपरेशन जैसे काम शामिल हैं। दूसरे हेलीकॉप्टर को पश्चिमी तट पर इसी तरह के कार्यों के लिए तैनात किया गया है। (Indian Navy Helicopter Lease)
2021 में 24 में हेलीकॉप्टर लीज पर लेने की थी तैयारी
नौसेना ने पहले भी साल 2021 में 24 हेलीकॉप्टर लीज पर लेने की योजना बनाई थी। इस योजना में ग्राउंड सपोर्ट, मेंटेनेंस और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं, लेकिन यह प्रोग्राम आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड ने एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर मार्क-3 (एएलएच एमके3) को शामिल किया, लेकिन हाल के वर्षों में इन हेलीकॉप्टरों के साथ कई हादसे हुए।
इन हादसों में कुल चार हेलीकॉप्टर खो गए, जिनमें से दो मामलों में जान का नुकसान भी हुआ। 5 जनवरी 2025 को हुए एक बड़े हादसे के बाद पूरे एएलएच फ्लीट को कुछ समय के लिए ग्राउंड कर दिया गया था। जांच में एक तकनीकी खराबी सामने आई थी, जिसके बाद इस फ्लीट की उड़ान पर असर पड़ा। (Indian Navy Helicopter Lease)
सी किंग पड़ चुके हैं पुराने
इस बीच पुराने हेलीकॉप्टर जैसे अलुएट-3 और C King भी धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं। नए हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में समय लग रहा है, जिससे नौसेना के सामने ऑपरेशनल गैप की स्थिति बन गई। इसी वजह से लीज मॉडल को फिर से अपनाया गया है।
नौसेना द्वारा लिए गए AW139 हेलीकॉप्टर सिविल एविएशन नियमों के तहत ऑपरेट किए जाएंगे। इसके लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए द्वारा तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार काम किया जाएगा। इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय इलाकों, जहाजों और ऑफशोर एसेट्स के बीच आवाजाही के लिए किया जाएगा।
हालांकि इन हेलीकॉप्टरों में कुछ सीमाएं भी हैं। इनमें रेस्क्यू विंच और ब्लेड फोल्डिंग की सुविधा नहीं है, जिसकी वजह से इन्हें जहाजों पर सीधे ऑपरेशन के लिए सीमित रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा। ऐसे में इनका उपयोग मुख्य रूप से ट्रांजिट और सपोर्ट मिशन के लिए किया जाएगा। (Indian Navy Helicopter Lease)
लियोनार्डो के AW139 को चुना
इस लीज प्रक्रिया के लिए ईस्टर्न नेवल कमांड और वेस्टर्न नेवल कमांड ने टेंडर जारी किया था। इसमें दो भारतीय कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। प्रतिस्पर्धा के बाद लियोनार्डो कंपनी के AW139 हेलीकॉप्टर को चुना गया, जिसने एयरबस डॉफिन N3 हेलीकॉप्टर को पीछे छोड़ा।
भारत में रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत हेलीकॉप्टर लीज करने का प्रावधान डीएपी 2020 में शामिल किया गया है। इसके जरिए सेना और नौसेना जैसी सेवाएं अपनी तत्काल जरूरतों को तेजी से पूरा कर सकती हैं। इसी मॉडल पर भारतीय सेना पहले से ही उत्तरी कमान में हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है।
वर्तमान में सेना के पास AS350 B3 और बेल 407 जैसे हल्के हेलीकॉप्टर प्राइवेट कंपनियों से लीज पर लिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कठिन इलाकों में लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन के लिए किया जा रहा है। अब नौसेना ने भी इसी तरह का मॉडल अपनाकर अपनी ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। (Indian Navy Helicopter Lease)
यूटिलिटी हेलीकॉप्टर-मैरीटाइम में है देरी
भारतीय नौसेना द्वारा हेलीकॉप्टर की कमी को पूरा करने के लिए प्राइवेट कंपनियों से चॉपर लीज पर लेने के बीच एक और अहम अपडेट सामने आया है। सेंटरम इलेक्ट्रॉनिक्स को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल से लगभग 66 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर यूटिलिटी हेलीकॉप्टर-मैरीटाइम यानी यूएच-एम के लिए एईएसए रडार के डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़ा है, जिसे अगले दो साल में पूरा किया जाना है।
एईएसए रडार एक आधुनिक रडार तकनीक है, जो एक साथ कई टारगेट को ट्रैक करने और ज्यादा सटीक जानकारी देता है। इस रडार का इस्तेमाल यूएच-एम हेलीकॉप्टर में किया जाएगा, जो भविष्य में नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
हालांकि, इस ऑर्डर से यह भी साफ संकेत मिलता है कि यूएच-एम प्रोग्राम अभी शुरुआती चरण में है। रडार के डेवलपमेंट में ही दो साल लगने हैं, इसके बाद हेलीकॉप्टर में इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी होगी। ऐसे में इस हेलीकॉप्टर के ऑपरेशनल रूप से शामिल होने में अभी करीब 4 से 5 साल का समय लग सकता है। यही वजह है कि फिलहाल नौसेना को अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए लीज मॉडल का सहारा लेना पड़ रहा है। (Indian Navy Helicopter Lease)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





