📍नई दिल्ली | 4 Aug, 2026, 5:39 PM
Indian Navy Special Operations Assault Craft: भारतीय नौसेना अपने स्पेशल ऑपरेशंस के लिए 10 नई स्पेशल ऑपरेशंस असॉल्ट क्राफ्ट (एसओएसी) खरीदने की तैयारी कर रही है। ये सामान्य पेट्रोलिंग बोट नहीं होंगी। इन्हें तेज रफ्तार से समुद्र में आगे बढ़ने, कम गहरे पानी में ऑपरेट करने, निगरानी करने और जरूरत के मुताबिक हथियार तथा ड्रोन ले जाने के लिए तैयार किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है।
Indian Navy Special Operations Assault Craft: समुद्र से तट तक निगरानी की क्षमता
स्पेशल ऑपरेशंस असॉल्ट क्राफ्ट को नौसेना के स्पेशल ऑपरेशंस में फायर सपोर्ट और सर्विलांस-रिकॉनिसेंस जैसी भूमिकाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। क्राफ्ट अपने सेंसर और हथियारों की मदद से खुद ऑपरेट होगी, और दूसरे क्राफ्ट को भी फायर सपोर्ट देगी।
इसकी सबसे खास बात इसका अनमैन्ड सिस्टम है। इसके जरिए समुद्र के साथ तटीय इलाके और तट के अंदर के क्षेत्र पर भी निगरानी की जा सकेगी। इसमें अलग-अलग तरह के अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) भी शामिल होंगे।
क्राफ्ट को लॉइटरिंग म्यूनिशन और दूसरे मिशन पेलोड ले जाने के हिसाब से भी कॉन्फिगर किया जा सकेगा। इसके पीछे कम से कम चार मीटर लंबा और तीन मीटर चौड़ा खुला डेक भी होगा। इस हिस्से को अलग-अलग मिशन के मुताबिक बदला जा सकेगा।
45 नॉट तक होगी स्प्रिंट स्पीड
एसओएसी की लंबाई करीब 14 से 17 मीटर के बीच होगी। इसकी चौड़ाई अधिकतम पांच मीटर और पूरी तरह लोड होने पर ड्राफ्ट एक मीटर से अधिक नहीं रखा जाएगा। कम ड्राफ्ट का फायदा उथले समुद्री क्षेत्रों में ऑपरेशन के दौरान मिलता है। इसका अधिकतम डिस्प्लेसमेंट 17 टन रखा गया है।
अधिकतम पेलोड के साथ 85 प्रतिशत मैक्सिमम कंटीन्यूअस रेटिंग पर इसकी स्पीड कम से कम 40 नॉट होगी। जरूरत पड़ने पर इसकी स्प्रिंट स्पीड न्यूनतम 45 नॉट तक जा सकेगी।
क्राफ्ट में 30 नॉट की क्रूजिंग स्पीड पर कम से कम 400 नॉटिकल मील चलने की क्षमता होनी चाहिए। इसमें क्रू समेत आठ लोग जा सकेंगे।
इसके इंजन इनबोर्ड होंगे। प्रोपल्शन के लिए वॉटरजेट या सरफेस ड्राइव जैसे विकल्प होंगे। वॉटरजेट या सरफेस ड्राइव जैसे सिस्टम तेज रफ्तार और कम गहरे पानी में चलने वाली बोट के लिए उपयोगी होती हैं। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
बैलिस्टिक प्रोटेक्शन वाला केबिन
क्राफ्ट में बंद और क्लाइमेट-कंट्रोल्ड केबिन होगा। साथ ही यह बैलिस्टिक प्रूफ होना चाहिए, ताकि इस पर गोलियों का भी असर न पड़े। केबिन में चालक दल के लिए शॉक मिटिगेटिंग सीट लगाई जाएंगी, जिससे तेज रफ्तार में लहरों से होने वाले झटकों का असर कम किया जा सके।
आरएफपी में तय भारतीय मानक के अनुसार थ्रेट लेवल-6 तक ऑल-अराउंड बैलिस्टिक प्रोटेक्शन की जरूरत रखी गई है। अलग-अलग हिस्सों में थ्रेट लेवल-5 और 6 की मॉड्यूलर सुरक्षा प्लेट लगाने की व्यवस्था भी होगी, जिन्हें जरूरत के अनुसार लगाया या हटाया जा सकेगा।
क्राफ्ट के लिए हल्के लेकिन मजबूत मरीन-ग्रेड कम्पोजिट और कार्बन फाइबर जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। समुद्र में स्थिरता और हथियारों से सटीक निशाना लगाने में मदद के लिए जायरोस्कोपिक स्टेबिलाइजेशन का भी फीचर होगा। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
12.7 मिमी और 7.62 मिमी गन से लैस
एसओएसी के वेपन पैकेज में आगे की तरफ 12.7 मिलीमीटर गन लगाई जाएगी। यह स्टेबिलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल गन या हेवी मशीन गन हो सकती है। पीछे की तरफ 7.62 मिलीमीटर गन होगी, जिसके लिए गैटलिंग गन या मीडियम मशीन गन लगाई जा सकती है।
हथियारों को क्रू द्वारा सीधे चलाने के साथ रिमोट मोड से कंट्रोल करने का सिस्टम भी होगा। इसके लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर, गन माउंट, वेपन फायर कंट्रोल स्टेशन और जरूरी सेफ्टी लिमिटर पूरे सिस्टम का हिस्सा होंगे।
इसके अलावा मिशन की जरूरत के अनुसार क्राफ्ट पर लॉइटरिंग म्यूनिशन वर्जन 1.0 और 2.0 तथा स्पाइक मिसाइल जैसे मिशन बेस्ड वेपन भी होंगे। रीकॉन्फिगरेबल डेक की वजह से अलग-अलग मिशन पेलोड लगाए जा सकेंगे।
क्राफ्ट से उड़ सकेगा 12 घंटे एंड्योरेंस वाला ड्रोन
एसओएसी में इंटीग्रल ड्रोन सिस्टम भी होगा। ताकि मिड-रेंज यूएएस को चलती हुई बोट से लॉन्च किया जा सके। जिसमें वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग यानी वीटीओएल सिस्टम की खूबी हो। क्योंकि छोटी बोट पर लंबा रनवे उपलब्ध नहीं होता।
मिड-रेंज यूएएस की एंड्योरेंस कम से कम 12 घंटे और मिशन रेंज न्यूनतम 80 नॉटिकल मील रखी गई है। जो कम से कम 30 नॉट की हवा में ऑपरेट कर सके। और इसकी ऑपरेशनल सीलिंग कम से कम 2,500 मीटर होगी।
ड्रोन पर बदले जा सकने वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर भी होंगे। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिटेक्शन और ट्रैकिंग क्षमता होगी। यूएएस को कम्युनिकेशन रिले के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा क्लोज-रेंज यूएएस भी पैकेज का हिस्सा होगा। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
रडार से सैटकॉम तक पूरा नेविगेशन पैकेज
छोटे साइज के बावजूद एसओएसी में आधुनिक नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम का बड़ा पैकेज होगा। नेविगेशन सूट में लो-पावर रडार, इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम, इकोसाउंडर, जायरो कंपास, जीपीएस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉग और ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम शामिल किए जाएंगे।
रात या कम रोशनी में ऑपरेशन के लिए नेविगेशन लाइट और हाई-बीम सर्च लाइट की व्यवस्था होगी।
कम्युनिकेशन के लिए आठ हैंडहेल्ड वीएचएफ सेट, इंट्रा-बोट कम्युनिकेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ग्लोबल मैरीटाइम डिस्ट्रेस एंड सेफ्टी सिस्टम और स्पेशल ऑपरेशंस कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे उपकरण भी होंगे। भारतीय नौसेना के सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) को भी कम्युनिकेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
एक ही जगह से नेविगेशन, हथियार और ड्रोन पर नजर
बोट के अंदर इंटीग्रेटेड कंट्रोल स्टेशन दिया जाएगा। इससे मशीनरी, नेविगेशन, हथियार, कम्युनिकेशन और सर्विलांस सिस्टम को कंट्रोल किया जा सकेगा।
समुद्र में लंबे ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए इसमें रिफ्यूलिंग की सुविधा भी होगी। क्राफ्ट को बड़े जहाज से समुद्र में उतारने और वापस उठाने के लिए होइस्टिंग और लोअरिंग सिस्टम होगा। इसमें हेनरिक्सन रिलीज हुक जैसे उपकरण लगाए जाएंगे।
घायल व्यक्ति को निकालने के लिए मेडिकल रैक भी होगा। लाइफ सेविंग उपकरणों के साथ सेल्फ-राइटिंग सिस्टम भी शामिल होगा, जिससे क्राफ्ट के पलटने जैसी स्थिति से निपटने में मदद मिल सके। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
कम से कम 12 साल की ऑपरेशनल लाइफ
यह खरीद बाय (इंडियन-आईडीडीएम) कैटेगरी में होगी। साथ ही, इसमें कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री की शर्त रखी गई है। इन क्राफ्ट की डिलीवरी मुंबई और विशाखापट्टनम में की जानी है।
नौसेना ने एसओएसी के लिए कम से कम 12 वर्ष की ऑपरेशनल लाइफ तय की है। इसे रोजाना आठ घंटे या उससे ज्यादा और साल में करीब 1,500 घंटे के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
क्राफ्ट में सी स्टेट-4 तक सुरक्षित तरीके से ऑपरेट करने की क्षमता होनी चाहिए। सी स्टेट-1 में 45 नॉट और सी स्टेट-4 में 20 नॉट के लिए सर्टिफाइड ऑपरेशनल एनवलप उपलब्ध कराना होगा।
खरीद में 24 महीने की वारंटी और उसके बाद 10 वर्ष की कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस व्यवस्था का प्रावधान है। प्रत्येक दो क्राफ्ट के लिए एक रोड ट्रेलर भी दिया जाएगा। (Indian Navy Special Operations Assault Craft)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





