📍नई दिल्ली | 16 Nov, 2025, 2:05 PM
Women soldiers Territorial Army: भारतीय सेना ने महिलाओं के लिए एक और नया रास्ता खोल दिया है। पहली बार टेरिटोरियल आर्मी (टीए) यानी प्रादेशिक सेना की कुछ इंफैंट्री बटालियनों में महिला सैनिकों की भर्ती की तैयारी शुरू हो गई है। यह फैसला सेना के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक महिलाओं को टीए की होम एंड हर्थ बटालियनों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी।
Women soldiers Territorial Army: 2025-26 के लिए नए पदों की सूची जारी
टेरिटोरियल आर्मी के डायरेक्टरेट जनरल ने हाल ही में साल 2025-26 के लिए नए पदों की सूची जारी की। इस सूची में पहली बार कुछ टीए की होम एंड हर्थ बटालियनों में “सेक्शन स्ट्रेंथ” के बराबर महिला सैनिकों की भर्ती का प्रावधान किया गया है। एक सेक्शन में आमतौर पर 10 सैनिक होते हैं। यानी, अब एक टीए बटालियन, जिसकी कुल संख्या 750 से 1,000 के बीच होती है, उसमें अलग से एक महिला सैनिकों का सेक्शन भी होगा।
टेरिटोरियल आर्मी की होम एंड हर्थ बटालियंस वर्ष 2004-05 में बनाई गई थीं। इनमें कुल 11 बटालियन हैं। इनमें से आठ जम्मू-कश्मीर के लिए और तीन नॉर्थ-ईस्ट के लिए बनाई गई थीं। इन बटालियनों का प्रमुख काम स्थानीय इलाकों की सुरक्षा में मदद करना, इंटेलिजेंस जुटाना, रोड ओपनिंग पार्टी में हिस्सा लेना, आंतरिक सुरक्षा में मदद करना और प्राकृतिक आपदा के समय मदद देना है। चूंकि ये बटालियन स्थानीय नागरिकों से ही बनती हैं, इसलिए इनकी इलाके पर स्वाभाविक पकड़ होती है।
इन बटालियनों में महिला सैनिकों की भर्ती का फैसला कई मायनों में अहम है। आज भी भारतीय सेना में महिलाएं मैन कॉम्बैट ब्रांच जैसे इंफैंट्री, आर्मर्ड कॉर्प्स और मैकेनाइज्ड इंफैंट्री में शामिल नहीं हो सकतीं। हालांकि कुछ कॉम्बैट सपोर्ट शाखाओं में महिला अधिकारी हैं, लेकिन सैनिक के रूप में भर्ती का विकल्प केवल मिलिट्री पुलिस तक ही सीमित है। ऐसे में टेरिटोरियल आर्मी की होम एंड हर्थ बटालियनों में महिलाओं की भर्ती एक नए परिवर्तन की शुरुआत मानी जा रही है।
सेना के अनुसार, शुरुआत में कुछ चुनिंदा बटालियनों में महिला सेक्शन शामिल किए जाएंगे। इसके बाद इसे सभी होम एंड हर्थ बटालियंस बटालियनों तक बढ़ाया जाएगा। आगे चलकर महिला सैनिकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। यह व्यवस्था पूरी तरह से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी, ताकि ट्रेनिंह से लेकर तैनाती तक सब कुछ सुचारू तरीके से हो सके।
टेरिटोरियल आर्मी को नागरिकों की स्वयंसेवी सेना कहा जाता है। इसमें वे लोग शामिल होते हैं जो अपनी सामान्य नौकरी या काम के साथ-साथ समय निकालकर देश की रक्षा में योगदान देना चाहते हैं। टीए की कुल ताकत लगभग 50,000 है। इसमें रेलवे, ओएनजीसी, आईओसी जैसी संस्थाओं की डिपार्टमेंटल टीए यूनिटें शामिल हैं। इसके अलावा इंफैंट्री टीए, होम एंड हर्थ टीए, इकोलॉजिकल बटालियंस, इंजीनियर रेजिमेंट टीए और राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा के लिए एक इको टास्क फोर्स भी मौजूद है।
इस वर्ष मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्रालय ने 32 इंफैंट्री टीए बटालियनों में से 14 को एक्टिव करने का फैसला लिया था। इन बटालियनों की तैनाती फरवरी 2028 तक विभिन्न इलाकों में की जाएगी। महिला सैनिकों की भर्ती इसी बड़े बदलाव का हिस्सा है, जो टीए की भूमिकाओं को और मजबूत करेगा।
टीए से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि इसमें कई जानी-मानी हस्तियां भी शामिल रही हैं या उन्हें ऑनरेरी रैंक दी गई है। इनमें अभिनेता नाना पाटेकर, मोहनलाल, क्रिकेटर एम. एस. धोनी, कपिल देव और ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा जैसे नाम शामिल हैं। इससे यह भी समझ आता है कि टेरिटोरियल आर्मी न केवल सेना के लिए बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रही है।
महिला सैनिकों की टीए में भर्ती की पहल को सेना के व्यापक सुधारों का हिस्सा बताया जा रहा है। सेना का कहना है कि यह कदम न केवल महिलाओं को अधिक अवसर देगा, बल्कि टीए बटालियनों की क्षमता भी बढ़ाएगा। सेना के मुताबिक, महिलाएं पहले से कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और टीए में भर्ती उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार करेगी।
Women soldiers Territorial Army: टेरिटोरियल आर्मी में “होम एंड हर्थ” क्या होता है?
टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना की पार्ट-टाइम रिजर्व फोर्स है। इसमें सैनिक अपनी आम नौकरी या बिजनेस करते हुए भी देश की सेवा कर सकते हैं। होम एंड हर्थ बटालियनें टेरिटोरियल आर्मी की खास इन्फैंट्री यूनिट होती हैं। इन्हें एक अनोखे कॉन्सेप्ट पर बनाया गया था, जिसका नाम है “संस ऑफ सोयल” यानी जिस इलाके के लोग हैं, उन्हें उसी इलाके की बटालियन में भर्ती करना। इसका मतलब यह है कि जो जवान जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व या किसी खास क्षेत्र से होते हैं, वही उसी इलाके की टीए होम एंड हर्थ बटालियन में शामिल होते हैं। इससे फायदा यह होता है कि स्थानीय लोग अपने इलाके के हालात, भाषा, रास्ते और माहौल को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी तरीके से हो पाते हैं।
जम्मू-कश्मीर में कई होम एंड हर्थ बटालियनों ने आर्मी की मदद की है। उत्तर-पूर्व में भी ये बटालियनें स्थानीय सुरक्षा के काम में लगी हैं। इनका काम रेगुलर आर्मी की फुल-टाइम यूनिटों जैसा नहीं होता, बल्कि इन्हें जरूरत पड़ने पर बुलाया जाता है। इन्हें इंटेलिजेंस जुटाने, रोड ओपनिंग, लोकल गाइडेंस, सुरक्षा ड्यूटी और आपदा की स्थिति में सिविल प्रशासन की मदद जैसे काम दिए जाते हैं।
Women soldiers Territorial Army: क्या मिलते हैं भत्ते या सैलरी?
अब एक बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या टेरिटोरियल आर्मी की होम एंड हर्थ में कोई भत्ता या सैलरी मिलती है। टीए पार्ट-टाइम फोर्स है। यहां अधिकांश जवान अपनी असली नौकरी करते रहते हैं और सिर्फ ट्रेनिंग या एम्बॉडीमेंट यानी जब सेना बुलाए तब कुछ समय के लिए फुल-टाइम ड्यूटी करते हैं। चूंकि टीए में रेगुलर आर्मी की तरह बार-बार ट्रांसफर नहीं होते, इसलिए कोई खास ट्रांसफर भत्ता या अलाउंस नहीं मिलता है।
टेरिटोरियल आर्मी में जब जवान ट्रेनिंग या एम्बॉडीमेंट पर होते हैं, तब उन्हें रेगुलर आर्मी की तरह वेतन, डीए, राशन, मेडिकल, कैंटीन सुविधा, लीव और अन्य सामान्य सुविधाएं मिलती हैं। टीए जवानों को कमीशनिंग के समय आउटफिट अलाउंस मिलता है और इंश्योरेंस तथा कुछ अन्य लाभ भी दिए जाते हैं। लेकिन चूंकि टीए एक रिजर्व फोर्स है और पोस्टिंग या ट्रांसफर बहुत सीमित रहते हैं।
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