📍नई दिल्ली | 2 Jan, 2026, 8:29 PM
Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी क्षमता को और बढ़ाने के लिए पुणे की नाइब कंपनी को करीब 292.69 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर सेना ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रावधान के तहत दिया है। इस समझौते के तहत कंपनी भारतीय सेना को लंबी दूरी तक अचूक मार करने वाले यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम उपलब्ध कराएगी। जिससे आने वाले समय में सेना की फायर पावर को नई मजबूती मिलेगी।
कंपनी ने इस सौदे की जानकारी बीएसई और एनएसई को भी दी है। कंपनी का कहना कि यह कॉन्ट्रैक्ट भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रोविजन के तहत किया गया है, जिसका मतलब है कि सिस्टम को कम समय में सेना तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को तुरंत पूरा किया जा सके।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब सेना सीमाओं पर अपनी ऑपरेशनल तैयारियों को और मजबूत करने पर फोकस कर रही है। हाल के सालों में बदलते सुरक्षा हालात और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की जरूरत को देखते हुए सेना आधुनिक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को तेजी से शामिल कर रही है।
नाइब लिमिटेड को मिला यह ऑर्डर यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म के लिए है। इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अलग-अलग रेंज और कैलिबर के रॉकेट्स को एक ही लॉन्चर से दागा जा सकता है। रक्षा समाचार डॉट कॉम को मिली जानकारी के अनुसार, यह सिस्टम दो अलग-अलग दूरी वाले रॉकेट्स को सपोर्ट कर सकता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: 12 महीनों में सप्लाई
नाइब लिमिटेड को इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से जुड़े लॉन्चर, ग्राउंड इक्विपमेंट, एक्सेसरीज, एन्हांस्ड सिस्टम प्रोजेक्टाइल्स और एम्युनिशन की सप्लाई करनी है। कंपनी को यह पूरी डिलीवरी 12 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरी करनी होगी। यानी तय समय के अंदर अलग-अलग किस्तों में सेना को यह सारा सिस्टम सौंपा जाएगा।
कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक, नाइब लिमिटेड को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के 30 दिनों के भीतर कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 10 फीसदी हिस्सा परफॉर्मेंस-कम-वारंटी बैंक गारंटी के तौर पर जमा करना होगा। ताकि सप्लाई समय पर और तय क्वॉलिटी स्टैंडर्ड्स के अनुसार हो सके। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
क्या है यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम
यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम दरअसल इजरायल की डिफेंस कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के बनाए पीयूएलएस (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक मल्टी-कैलिबर और मल्टी-रेंज प्लेटफॉर्म है।
सूत्रों का कहना है कि पीयूएलएस को भारत में “सूर्या” नाम दिया जा सकता है। पीयूएलएस यह एक मॉड्यूलर मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर (एमआरएल) है। इस सिस्टम से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागे जा सकते हैं। इसमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट्स को इंटीग्रेट करने की क्षमता है। सेना के लिए यह इसलिए अहम है, क्योंकि अब अलग-अलग रेंज के लिए अलग-अलग लॉन्चर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: एक प्लेटफॉर्म, कई रॉकेट
डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 122 एमएम, 160 एमएम और 306 एमएम जैसे अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट्स के साथ काम कर सकता है। रॉकेट पॉड्स की संख्या और कॉन्फिगरेशन इस्तेमाल होने वाले रॉकेट पर निर्भर करती है।
यह लॉन्चर 6×6 या 8×8 व्हीकल चैसिस पर लगाया जा सकता है, जिससे इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सके। पहाड़ी क्षेत्र हों, रेगिस्तानी इलाका हो या मैदानी क्षेत्र, यह सिस्टम हर मौसम और हर भूभाग में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: शूट एंड स्कूट क्षमता
यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की एक बड़ी खूबी इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता है। यानी रॉकेट फायर करने के तुरंत बाद लॉन्चर अपनी जगह बदल सकता है। आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बहुत जरूरी मानी जाती है, क्योंकि इससे दुश्मन की काउंटर फायर से बचा जा सकता है।
लॉन्चर के पीछे की तरफ एक रिमोटली कंट्रोल्ड और पावर्ड यूनिट लगी होती है। फायरिंग के समय वाहन के दोनों तरफ और पीछे हाइड्रॉलिक स्टेबलाइजर्स लगाए जाते हैं, जिससे लॉन्चर पूरी तरह स्थिर रहता है, इससे फायरिंग के दौरान सटीकता बनी रहती है और सिस्टम सुरक्षित रहता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। जुलाई 2025 में नाइब लिमिटेड ने एल्बिट सिस्टम्स के साथ समझौता किया था, जिसके तहत पीयूएलएस सिस्टम का निर्माण भारत में किया जाना है। अब भारतीय सेना के लिए इस सिस्टम का ऑर्डर मिलना उसी साझेदारी का बड़ा नतीजा माना जा रहा है।
इससे देश के भीतर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी। इसके साथ ही छोटे और मझोले उद्योगों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे सिस्टम्स के निर्यात की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।
इस सिस्टम के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद यह पहला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम होगा, जिसे सेना ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल करेगी। इससे पहले मई 2025 में भी नाइब लिमिटेड को एक इजरायली टेक्नोलॉजी कंपनी से 150.62 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर मिला था। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
सेना की मारक क्षमता में इजाफा
भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम्स पर खास ध्यान दे रही है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के एडवांस वर्जन, गाइडेड रॉकेट्स और अब यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर जैसे प्लेटफॉर्म इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
150 से 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट्स से लैस यह सिस्टम सेना को दुश्मन के इलाकों में गहराई तक मौजूद लक्ष्यों पर सटीक हमला करने की क्षमता देगा। इससे सीमावर्ती इलाकों में तैनात यूनिट्स को तेज प्रतिक्रिया और ज्यादा ऑपरेशनल विकल्प मिलेंगे। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)
रणनीतिक तौर पर अहम कदम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार करते हैं। एक ही सिस्टम से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागने की क्षमता आधुनिक युद्ध के लिहाज से बेहद अहम है। यह कॉन्ट्रैक्ट देश की रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले एक साल में जब यह सिस्टम सेना के पास पूरी तरह पहुंच जाएगा, तो भारतीय सेना की फायर पावर और ऑपरेशनल तैयारी में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)


