📍नई दिल्ली | 4 Nov, 2025, 9:26 PM
IAF Chief on Drones: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार को कहा कि ड्रोन की आजकल हर कोई चर्चा कर रहा है, लेकिन केवल ड्रोन के दम पर युद्ध नहीं जीता जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव चलित पारंपरिक एयरक्राफ्ट आने वाले समय में भी बेहद जरूरी रहेंगे।
भारत शक्ति द्वारा आयोजित इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव में एयर चीफ सिंह ने कहा कि “ड्रोन नई तकनीक हैं और ये युद्ध के दौरान भ्रम पैदा कर सकते हैं या मदद कर सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई जीतने के लिए अब भी ऐसे हथियारों की जरूरत होती है जो दुश्मन के अंदर तक जाकर सटीक हमला करें। फिलहाल ड्रोन अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि “अगर किसी लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट करना है या दुश्मन की सीमा के भीतर गहराई तक वार करना है, तो इसके लिए भारी हथियारों से लैस विमान की जरूरत होती है। भविष्य में भी इंसान की भूमिका खत्म नहीं होगी, क्योंकि मुश्किल हालात में हमेशा ‘मैन इन द लूप’ यानी इंसानी कंट्रोल जरूरी होता है।”
एयर चीफ सिंह ने बताया कि दुनिया के कई देश इस समय छठी पीढ़ी के विमान बना रहे हैं, जो मैन्ड और बिना पायलट वाले विमानों के मिश्रण पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “इससे साफ है कि मैनड एयरक्राफ्ट कहीं नहीं जा रहे।”
वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या लंबी दूरी के मिसाइलें ही भविष्य हैं, तो उन्होंने कहा कि यह हालात और टारगेट पर निर्भर करता है। “हर हालात में लंबी दूरी का हथियार जरूरी नहीं होता। कुछ जगहों पर कम नुकसान वाला हथियार चाहिए होता है। इसलिए हमें हर तरह के हथियारों का मिश्रण चाहिए यानी हर बीमारी की दवा पैरासिटामोल नहीं हो सकती।”
देश में आत्मनिर्भरता के प्रयासों पर बात करते हुए एयर चीफ ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। “हम अंधेरे में नहीं टटोल रहे, पर हमें और तेजी से काम करना होगा। नीतियों और नियमों को इस दिशा में लाया जा रहा है कि निजी क्षेत्र को अधिक मौके मिलें।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को सब कुछ अकेले करने की जिद नहीं रखनी चाहिए। “जहां हमें विशेषज्ञता की कमी है, वहां हमें साझेदारी करनी चाहिए। अच्छी तकनीक के लिए सही भागीदारों के साथ काम करने से ही हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं।”
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि दुनिया को इससे यह सीख लेनी चाहिए कि संघर्ष को सही समय पर खत्म करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “दुनिया भर में कई जगह लक्ष्य तय कर लिए जाते हैं, लेकिन समय के साथ लोग यह भूल जाते हैं कि उन्होंने किस मकसद से लड़ाई शुरू की थी। इसके बाद युद्ध केवल अहंकार या राजनीतिक बयानबाजी का रूप ले लेता है।”
उन्होंने कहा कि कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन अपने लक्ष्य हासिल कर लिए थे, लेकिन पाकिस्तान युद्ध को बढ़ाना चाहता था। उन्होंने कहा, “जब भी दुश्मन ने युद्ध विराम की बात की, भारत ने उसे स्वीकार किया, और यह बिल्कुल सही फैसला था।”
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