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Illegal Indian Migrants: अमेरिका में अवैध घुसपैठ पर ट्रंप सख्त; डंकी रूट से यूएस गए 18,000 भारतीयों को वापस लाएगा भारत!

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📍नई दिल्ली | 21 Jan, 2025, 8:54 PM

Illegal Indian Migrants: भारत सरकार ने डंकी रूट से अमेरिका गए अवैध प्रवासियों को वापस लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन के साथ सहयोग करने की योजना बनाई है। यह कदम नई दिल्ली द्वारा ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों को बनाए रखने और संभावित व्यापार युद्ध से बचने की रणनीति का हिस्सा है।

Illegal Indian Migrants: Trump Cracks Down, India to Repatriate 18,000 from US via Donkey Route!

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों की पहचान की है, जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं और जिन्हें भारत वापस भेजा जाएगा। हालांकि, यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि अवैध भारतीय प्रवासियों की सही संख्या का अनुमान जुटाना कठिन है।

ट्रंप प्रशासन से तालमेल बैठाने की कोशिश

अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई ट्रंप के चुनावी वादों का हिस्सा रही है। ट्रंप ने अपने आदेश में साफ किया कि अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले प्रवासियों को वापस उनके देश भेजा जाएगा। उनकी घोषणा ने भारतीय समुदाय में खलबली मचा द हैी, क्योंकि अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले करीब 7.5 लाख भारतीय प्रवासियों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। अपने शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही, ट्रंप ने कदम उठाते हुए नागरिकता कानून और बॉर्डर सिक्योरिटी पर सख्त फैसले लिए। इस बीच, भारत ने भी यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि ट्रंप प्रशासन खासकर छात्र वीजा और एच-1बी वीजा जैसे प्रोग्राम के लिए भारतीयों के लीगल माइग्रेशन के रास्ते खुले रखे।

एच-1बी वीजा के मामले में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। 2023 में जारी किए गए कुल 3,86,000 वीजा में से लगभग तीन-चौथाई भारतीय नागरिकों को दिए गए।

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Illegal Indian Migrants: अवैध प्रवासियों के मामले में तीसरे नंबर पर है भारत

अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या की बात करें, तो भारत तीसरे नंबर पर है। 2024 में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोलिंग अधिकारियों द्वारा पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या कुल का केवल 3 फीसदी थी। हालांकि, हाल के वर्षों में यह आंकड़ा उत्तरी अमेरिकी सीमा पर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक अमेरिका में लगभग 2,20,000 अवैध भारतीय प्रवासी रह रहे थे।

अवैध प्रवासी रचते हैं भारत के खिलाफ साजिश

भारत सरकार ने अवैध प्रवासियों की वापसी के लिए अमेरिका के साथ सहयोग को एक अवसर के रूप में देखा है। यह कदम केवल अवैध प्रवासन को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत के विदेश में अलगाववादी आंदोलनों, जैसे खालिस्तान आंदोलन, को कमजोर करने के उद्देश्य से भी देखा जा रहा है। खालिस्तान आंदोलन के कुछ समर्थक अमेरिका और कनाडा में रह रहे हैं, जिनमें से कई को अवैध प्रवासी माना जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंधों के बावजूद, भारत अमेरिका से किसी भी अप्रत्याशित कदम को लेकर सतर्क है। ट्रंप ने बार-बार भारत की इंपोर्ट ड्यूटी की आलोचना की है और अमेरिकी व्यापार पर इसके असर का हवाला देते हुए जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी है।

उत्तरी अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासी

यह बात भी सामने आई है कि उत्तरी अमेरिका की सीमा पर भारतीय प्रवासियों का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी सीमा गश्ती आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी सीमा पर पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या अन्य किसी भी देश से अधिक है।

इसकी वजह 2023 में अल सल्वाडोर द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रैवल को खत्म करना और कनाडा के लिए भारतीय नागरिकों के ट्रैवल करने में आसानी शामिल हो सकती है।

वहीं, अगर भारत अवैध प्रवासियों की वापसी का कदम उठाता है, तो यहां देश के भीतर भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव डाल सकते हैं। अवैध प्रवासियों की वापसी से भारत में रोजगार संकट बढ़ सकता है, क्योंकि पहले से ही देश में नौकरियों की कमी है।

अमेरिका ने 519 भारतीय अवैध प्रवासियों को किया वापस

तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 7 दिसंबर 2024 को लोकसभा में जानकारी दी कि अमेरिका ने 2023-24 के बीच 519 अवैध भारतीय प्रवासियों को कमर्शियल और चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारत वापस भेजा।

अमेरिका के कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 के बीच हर घंटे करीब 10 भारतीयों ने अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने का प्रयास किया। इस दौरान, 90,000 से अधिक भारतीयों को सीमा पर गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 50 फीसदी गुजरात से थे।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2020 से 2022 के बीच करीब 1 लाख भारतीयों ने अवैध रूप से अमेरिका जाने की कोशिश की। इनमें से अधिकांश ने ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया, जो दक्षिण अमेरिका से अमेरिका तक का खतरनाक मार्ग है। इस मार्ग पर शाहरुख खान की फिल्म “डंकी” भी बनी है, जिसने इस समस्या को चर्चा में लाया।

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इन अवैध प्रवासियों में से कई अपनी जमीन बेचकर और कर्ज लेकर बेहतर जीवन की तलाश में अमेरिका जाते हैं। हालांकि, ऐसे कदम न केवल खतरनाक हैं बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

अमेरिका जाने के लिए डंकी रूट

अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले भारतीयों के लिए ‘डंकी रूट’ एक प्रमुख रास्ता बन गया है। इस रूट के जरिए लोग भारत से दक्षिण अमेरिका के देशों, जैसे मेक्सिको या पनामा, तक पहुंचते हैं और वहां से जंगलों और खतरनाक बॉर्डर्स को पार करते हुए अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

हाल ही में हरियाणा और गुजरात के कई परिवारों ने अपने बच्चों को इस रास्ते से अमेरिका भेजा, लेकिन यह यात्रा खतरों से भरी है। कई लोगों ने इस दौरान अपनी जान गंवाई।

अवैध रूप से अमेरिका जाने वाले भारतीय कई बार मानव तस्करी का शिकार हो जाते हैं। एजेंट लाखों रुपये लेकर उन्हें खतरनाक रास्तों से अमेरिका भेजने का वादा करते हैं। गुजरात और पंजाब से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को जंगलों, समुद्र और बर्फीले इलाकों के जरिए अमेरिका पहुंचाया गया।

2023 में, मेहसाणा जिले के एक परिवार की कनाडा-अमेरिका बॉर्डर पार करते समय मौत हो गई। वे भी डंकी रूट का सहारा ले रहे थे।

भारत में रोजगार की कमी: पलायन का मुख्य कारण

अमेरिका जाने वाले अधिकांश भारतीय युवाओं का कहना है कि भारत में बेरोजगारी और आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें इस तरह के खतरनाक कदम उठाने पड़े। हरियाणा के एक युवा ने बताया कि उसने अपनी जमीन बेचकर और 50 लाख रुपये कर्ज लेकर अमेरिका जाने का जोखिम उठाया। वह अमेरिका में ट्रक चला रहा है और हर महीने 2.5 लाख रुपये कमा रहा है।

भारत में छोटी फैक्ट्री या बिजनेस शुरू करने को लेकर उसने कहा, “भारत में बिजनेस सफल होना मुश्किल है। यहां महंगाई और बेरोजगारी ने जीवन कठिन बना दिया है।”

नागरिकता कानून में बदलाव 

डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। अमेरिका में 150 साल से यह कानून लागू है कि अगर कोई बच्चा अमेरिकी जमीन पर पैदा होता है, तो वह स्वतः रूप से अमेरिका का नागरिक बन जाता है। इसके लिए यह मायने नहीं रखता कि उसके माता-पिता कौन हैं, कहां से आए हैं, या उनकी नागरिकता का क्या दर्जा है। इस नीति का उद्देश्य ‘बर्थ टूरिज्म’ को रोकना है, जहां लोग सिर्फ अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए वहां जाते हैं।

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1868 के संविधान संशोधन के तहत यह प्रावधान किया गया था कि जो भी अमेरिका में जन्म लेता है, या अपनी मूल नागरिकता छोड़कर अमेरिका की नागरिकता के लिए आवेदन करता है, उसे अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। इस कानून के चलते पिछले डेढ़ सौ वर्षों में करोड़ों लोगों को अमेरिका की नागरिकता मिली है।

प्रोटेक्टिंग द मीनिंग एंड वैल्यू ऑफ अमेरिकन सिटीजनशिप कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि अगर माता-पिता के पास सही दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन बच्चा अमेरिका में जन्म लेता है, तो उसे समान अधिकार और सुरक्षा प्राप्त होगी। हालांकि, ट्रंप के इस नए आदेश ने इस प्रावधान में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब इस आदेश के तहत जन्म के आधार पर नागरिकता पाने की परंपरा पर विराम लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो लंबे समय से अमेरिका में विवाद का विषय रही है।

क्या भारत वापस भेजेगा अवैध बंग्लादेशी?

भारत में नागरिकता को लेकर कितनी बहसें हुईं, यह याद करना जरूरी है। धर्म के आधार पर नागरिकता देने का कानून जब पास हुआ, तब देश में व्यापक हिंसा हुई थी। इस कानून को लागू कराने के दौरान जो उथल-पुथल मची, वह आज भी लोगों के जेहन में है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इस कानून के पास होने के पांच साल बाद जाकर इसके नियम बनाए गए।

अवैध घुसपैठियों का पता लगाने के लिए असम में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू किया गया, लेकिन उससे कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। और अंत में, एनआरसी को औपचारिक रूप से स्वीकार भी नहीं किया गया। यह एक विडंबना है कि जब भारत में अवैध प्रवासियों को रोकने की कोशिशें इस तरह अधूरी रहीं, तब नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि आज अमेरिका में अवैध प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समूह भारतीयों का बन चुका है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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