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डिफेंस सेक्टर बनेगा बजट 2026 का बड़ा हीरो? अलोकेशन बढ़ा तो उड़ान भर सकते हैं BEL, HAL और BDL

आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने एक साल में करीब 33 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 और सेंसेक्स की बढ़त काफी कम रही...

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📍नई दिल्ली | 1 Feb, 2026, 10:55 AM

Defence stocks Budget 2026: यूनियन बजट 2026 को लेकर इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जिस सेक्टर की हो रही है, वह है डिफेंस यानी रक्षा क्षेत्र। सीमा पर बने हालात, बदलती वैश्विक राजनीति और सेनाओं के आधुनिकीकरण की जरूरतों के बीच यह माना जा रहा है कि आने वाले बजट में रक्षा क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता मिल सकती है। इसी उम्मीद के चलते डिफेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों और स्टॉक मार्केट एनालिस्ट्स की खास नजर बनी हुई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में डिफेंस अलोकेशन में 8 फीसदी से लेकर 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा फायदा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डेटा पैटर्न्स, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, कोचीन शिपयार्ड और पारस डिफेंस जैसी कंपनियों को मिल सकता है। (Defence stocks Budget 2026)

Defence stocks Budget 2026: क्यों बढ़ रही है डिफेंस सेक्टर से उम्मीद

पिछले कुछ सालों में भारत की सुरक्षा जरूरतें तेजी से बदली हैं। एक तरफ चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियां हैं, तो दूसरी तरफ आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एयर डिफेंस जैसी क्षमताओं का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में सरकार का फोकस सिर्फ हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि पूरी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है।

ब्रोकरेज फर्म चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन, फोर्स मॉडर्नाइजेशन और इंडिजिनाइजेशन पॉलिसी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में डिफेंस खर्च में करीब 20 फीसदी सालाना बढ़ोतरी देखी जा सकती है। उनका मानना है कि खर्च अब सिर्फ बड़े प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिस्टम्स, सब-सिस्टम्स और लाइफ-साइकिल कंपोनेंट्स पर भी बढ़ेगा। इससे कंपनियों को लंबे समय तक स्थिर रेवेन्यू मिलने की संभावना बनती है। (Defence stocks Budget 2026)

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किन प्रोग्राम्स से मिलेगा मल्टी-ईयर फायदा

एनालिस्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में तेजस एमके-2, क्यूआरएसएएम और एमआरएसएएम जैसे बड़े डिफेंस प्रोग्राम्स को एग्जीक्यूशन अप्रूवल मिल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इससे कई सालों तक कंपनियों को ऑर्डर विजिबिलिटी मिलेगी।

इसके अलावा, प्रोजेक्ट-75 (आई) यानी सबमरीन प्रोजेक्ट और उससे जुड़े फॉलो-ऑन ऑर्डर्स को भी एक लंबे कैपेक्स साइकल की शुरुआत माना जा रहा है। इसका सीधा फायदा मझगांव डॉक, कोचीन शिपयार्ड और एलएंडटी जैसी कंपनियों को मिल सकता है। (Defence stocks Budget 2026)

एयर और ड्रोन वॉरफेयर पर बढ़ेगा फोकस

एमके ग्लोबल का मानना है कि अगर बजट में एरियल वॉरफेयर यानी हवाई युद्ध क्षमताओं पर ज्यादा जोर दिया गया, तो पारस डिफेंस, एस्ट्रा माइक्रोवेव, जेन टेक्नोलॉजीज और डेटा पैटर्न्स जैसी कंपनियों के लिए यह सकारात्मक संकेत होगा।

ड्रोन सेक्टर को लेकर भी बड़ी उम्मीदें हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार “ड्रोन शक्ति मिशन” की शुरुआत कर सकती है, जिसके तहत करीब 10 हजार करोड़ रुपये का पांच साल का इंसेंटिव प्रोग्राम लाया जा सकता है। इसका मकसद भारत को ग्लोबल ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। (Defence stocks Budget 2026)

डिफेंस बजट और जीडीपी का समीकरण

अगर डिफेंस बजट को जीडीपी के प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए, तो साल 2009 में यह सबसे ज्यादा 2.9 फीसदी था। इसके बाद यह आमतौर पर 1.9 से 2 फीसदी के बीच बना रहा है, जबकि पार्लियामेंटरी कमिटी 3 फीसदी की सिफारिश कर चुकी है।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीडीपी के प्रतिशत में स्थिरता का मतलब यह नहीं है कि खर्च कम हुआ है। एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कुल डिफेंस अलोकेशन 6.81 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें कैपिटल आउटले करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का रहा। वहीं, 2025 के अंत तक डिफेंस प्रोजेक्ट अप्रूवल्स का पाइपलाइन साइज 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। (Defence stocks Budget 2026)

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पीएसई और प्राइवेट सेक्टर दोनों को फायदा

एक अहम बदलाव यह भी देखने को मिल सकता है कि डिफेंस खर्च का बड़ा हिस्सा डिफेंस पीएसई यानी पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के जरिए कैपेक्स के रूप में आए। इससे न सिर्फ बीईएल, बीडीएल और एचएएल जैसी कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि उनके सप्लाई चेन में शामिल प्राइवेट कंपनियों को भी काम मिलेगा।

मोटीलाल ओसवाल का कहना है कि डिफेंस कैपिटल आउटले ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। इससे इंडिजिनाइजेशन, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और प्राइवेट सेक्टर पार्टिसिपेशन को और बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि अप्रूवल प्रोसेस और कंप्लायंस को आसान करना जरूरी होगा, ताकि प्राइवेट निवेश तेजी से बढ़ सके। (Defence stocks Budget 2026)

निवेशकों की नजर क्यों टिकी है डिफेंस स्टॉक्स पर

आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने एक साल में करीब 33 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 और सेंसेक्स की बढ़त काफी कम रही। यही वजह है कि बजट से पहले डिफेंस स्टॉक्स निवेशकों के रडार पर बने हुए हैं।

एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर बजट में कैपिटल आउटले 20 से 25 फीसदी तक बढ़ता है, तो यह सेक्टर आने वाले सालों में भी मजबूत बना रह सकता है। हालांकि, निवेश से पहले जोखिमों और फाइनेंशियल सलाह पर ध्यान देना जरूरी है। (Defence stocks Budget 2026)

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

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