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रक्षा मंत्रालय के रडार पर SMPP! लग सकता है 6 महीने तक कारोबारी प्रतिबंध

डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इस मामले में रक्षा मंत्रालय के नए दिशानिर्देश महत्वपूर्ण हैं...

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📍नई दिल्ली | 16 Oct, 2026, 11:16 AM

SMPP Defence Ministry Suspension: रक्षा मंत्रालय डिफेंस इक्विपमेंट्स बनाने वाली कंपनी एसएमपीपी लिमिटेड के साथ कारोबार निलंबित करने पर विचार कर रहा है। कंपनी सीबीआई जांच के दायरे में है। आरोप है कि सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) से करीब 500 करोड़ रुपये का गोला-बारूद सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए घूस दी गई। मामले में एसएमपीपी के प्रमोटर आशीष कंसल समेत तीन लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इस मामले में रक्षा मंत्रालय के नए दिशानिर्देश महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके तहत केंद्रीय जांच एजेंसी की एफआईआर में नाम आने पर किसी कंपनी के साथ कारोबारी संबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है।

SMPP Defence Ministry Suspension: 500 करोड़ के गोला-बारूद सौदे में क्या हैं आरोप?

मामले की जांच सीबीआई कर रही है। यह मामला एमआईएल से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के गोला-बारूद सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट से जु़ड़ा है। आरोप है कि इस कॉन्ट्रैक्ट को हासिल करने के लिए एमआईएल के एक अधिकारी को रिश्वत दी गई। जांच में कथित तौर पर आधिकारिक पक्षपात और रक्षा खरीद से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा किए जाने के आरोप भी शामिल हैं।

इस मामले में सीबीआई ने 12 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की और 13 अक्टूबर को कार्रवाई करते हुए एसएमपीपी के प्रमोटर आशीष कंसल, एमआईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-ऑपरेशंस अनिल कुमार और अनिल कुमार के भाई बी. हरषवर्धन को गिरफ्तार किया। मामले में एसएमपीपी के कर्मचारी रवित कुमार तेवतिया और अनिल कुमार की पत्नी का नाम भी सामने आया है।

जांच के दौरान करीब 2.23 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसमें पुणे से बरामद लगभग 1.73 करोड़ रुपये शामिल बताए गए हैं।

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SMPP Defence Ministry Suspension: कंपनी के साथ कारोबार पर लगाने की तैयारी

रक्षा मंत्रालय के इस साल लागू दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या केंद्र सरकार की किसी अन्य जांच एजेंसी की ओर से यह सूचना मिलती है कि संस्था के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की जा रही है या प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है, तो भी संबंधित विभाग का सचिव उसके साथ कारोबारी लेन-देन पर रोक लगा सकता है।

ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य जांच के दौरान सरकारी खरीद और रक्षा सौदों की प्रक्रिया को सुरक्षित रखना है। हालांकि यह कदम अस्थायी होता है और यह पूर्ण प्रतिबंध यानी डिबारमेंट नहीं होता।

दिशानिर्देशों के तहत निलंबन की अवधि सामान्य तौर पर छह महीने हो सकती है। निलंबन का आदेश जारी होने के छह महीने के भीतर उसकी समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा आदेश में निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले की जानी चाहिए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, सक्षम अधिकारी इसकी अवधि बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं। प्रत्येक बार अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए विस्तार दिया जा सकता है। कार्रवाई का दायरा कंपनी की सहयोगी इकाइयों तक बढ़ाया जा सकता है। अगर किसी अंडरटेकिंग या कंसोर्टियम को निलंबित किया जाता है, तो उसके दूसरे साझेदारों पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, सामान्य हालात में शुरुआती निलंबन और उसके विस्तार को मिलाकर कुल अवधि दो साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर कोई असाधारण परिस्थिति हो और निलंबन जारी रखने के पर्याप्त वजह मौजूद हों, तो संबंधित सचिव दो साल की अवधि पूरी होने के बाद भी निलंबन जारी रखने का फैसला कर सकता है।

वहीं, अगर एसएमपीपी के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी होता है, तो कंपनी रक्षा मंत्रालय और सेनाओं के टेंडर में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य हो सकती है। हालांकि, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपने आप रद्द हो जाएंगे, ऐसा जरूरी नहीं है। पुराने ऑर्डर पर असर का फैसला संबंधित मामले और लागू नियमों के आधार पर अलग से किया जा सकता है।

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वहीं, जांच में भ्रष्टाचार के आरोप स्थापित होते हैं या सीबीआई औपचारिक आरोपपत्र दाखिल करती है, तो कंपनी के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें डिबारमेंट भी शामिल हो सकता है।

पल्प पैकेजिंग के कारोबार से शुरुआत

एसएमपीपी की शुरुआत पल्प पैकेजिंग के कारोबार से हुई थी। बाद में कंपनी ने रक्षा क्षेत्र में कदम रखा और बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट तथा दूसरे सुरक्षा उपकरण बनाने लगी। पिछले कुछ सालों में कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और गोला-बारूद, ड्रोन तथा लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया। लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसे हथियार होते हैं जो कुछ समय तक किसी क्षेत्र में उड़ान भर सकते हैं और टारगेट मिलने पर उस पर हमला कर सकते हैं।

कंपनी ने हिमाचल प्रदेश में गोला-बारूद निर्माण संयंत्र भी स्थापित किया है। इस परियोजना में उसकी साझेदारी ग्लोबल डिफेंस कंपनी राइनमेटल के दक्षिण अफ्रीकी कारोबार से जुड़ी है।

एसएमपीपी के पास ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन सहित रक्षा मंत्रालय के 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर हैं। कंपनी के पास यूरोपीय रक्षा कंपनी केएनडीएस के साथ लोइटरिंग म्यूनिशन और प्रिसिजन-गाइडेड एम्युनिशन से जुड़े सहयोग समझौते भी हैं।

2019 में भी बुलेटप्रूफ जैकेट को लेकर उठे थे सवाल

एसएमपीपी पहले भी विवादों में रही है। वर्ष 2019 में कंपनी के बुलेटप्रूफ जैकेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवाल उठे थे। उस समय आरोप लगा था कि ट्रायल्स के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ कंपोनेंट पश्चिमी देशों से आए थे, लेकिन डिलीवरी के समय उनमें चीनी मूल के कंपोनेंट इस्तेमाल किए गए।

निलंबन होने पर पुरानी सप्लाई का क्या होगा?

किसी डिफेंस कंपनी के खिलाफ कारोबारी लेन-देन निलंबित होने पर सबसे अहम सवाल यह होता है कि पहले से खरीदे गए उपकरणों के रखरखाव, मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति कैसे जारी रहेगी।

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रक्षा मंत्रालय के नियमों में कुछ परिस्थितियों के लिए अपवाद की व्यवस्था है। अगर किसी हथियार या उपकरण के स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड या मेंटेनेंस के लिए वही कंपनी एकमात्र उपलब्ध सोर्स है, तो सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से उसे सीमित उद्देश्य के लिए काम करने की अनुमति दी जा सकती है।

ऐसी अनुमति देते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को ध्यान में रखा जाता है। संबंधित सैन्य सेवा या रक्षा उत्पादन विभाग को यह सर्टिफाई करना पड़ सकता है कि जरूरी उपकरणों के लिए कोई दूसरा सोर्स उपलब्ध नहीं है।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट में सस्पेंशन और डिबारमेंट दो अलग-अलग कार्रवाई हैं। निलंबन आम तौर पर जांच के दौरान उठाया जाने वाला अस्थायी कदम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक कंपनी नए सरकारी रक्षा सौदों में हिस्सा न ले सके।

इसके विपरीत, डिबारमेंट अधिक कड़ी कार्रवाई है, जिसके तहत किसी कंपनी को निर्धारित अवधि के लिए रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया से प्रतिबंधित किया जा सकता है। ऐसी कार्रवाई के लिए संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फैसला लिया जाता है। (SMPP Defence Ministry Suspension)

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