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नौसेना को मिला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल INS समर्थक, हथियारों और अनमैन्ड सिस्टम्स की टेस्टिंग होगी आसान

उपराष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के इतिहास से जुड़ी घटनाओं को याद किया। जब अमेरिकी विमानवाहक पोत एंटरप्राइज हिंद महासागर में पहुंचा था और भारत में चिंता का माहौल पैदा हुआ था...

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📍कारवार, कर्नाटक | 16 Oct, 2026, 1:23 PM

INS Samarthak Commissioned: भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 16 अक्टूबर को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना के स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल आईएनएस समर्थक को कमीशन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा उत्पादन क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।

एलएंडटी के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में निर्मित यह जहाज 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है। इसकी खासियत समुद्र में नए हथियारों और सेंसर की टेस्टिंग, मानवरहित सिस्टम के संचालन और दूसरे नौसैनिक जहाजों की सहायता करने की क्षमता है।

आईएनएस समर्थक भारतीय नौसेना का पहला ऐसा मल्टी-पर्पज वेसल है, जिसे किसी निजी शिपयार्ड ने तैयार किया है। समर्थक पश्चिमी नौसेना कमान के तहत काम करेगाा। वहीं, कमांडर एसके सिंह इसके पहले कमांडिंग ऑफिसर हैं।

INS Samarthak Commissioned: 1971 के युद्ध को किया याद

अपने भाषण में उपराष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के इतिहास से जुड़ी घटनाओं को याद किया। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारतीय नौसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस गाजी के विशाखापत्तनम के पास नष्ट होने की घटना को याद किया। उनके अनुसार, उस समय आधुनिक निगरानी तकनीक और वैज्ञानिक संसाधन आज की तरह उपलब्ध नहीं थे, फिर भी भारतीय नौसेना ने अपनी क्षमता और सूझबूझ का परिचय दिया।

उपराष्ट्रपति ने उस दौर को भी याद किया जब अमेरिकी विमानवाहक पोत एंटरप्राइज हिंद महासागर में पहुंचा था और भारत में चिंता का माहौल पैदा हुआ था।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने उस समय से लेकर आज तक लंबा सफर तय किया है। इसकी ऑपरेशनल क्षमता और तैयारी में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना को अपनी क्षमताओं को लगातार आगे बढ़ाते रहना होगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज और चोल साम्राज्य की समुद्री विरासत

उपराष्ट्रपति ने भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं का उल्लेख करते हुए कोंकण तट और छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि कोंकण तट ने अरब सागर के रास्ते भारत के समुद्री व्यापार को दूर-दराज के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज ने समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए एक मजबूत नौसैनिक बेड़ा तैयार किया था।

उपराष्ट्रपति के अनुसार, शिवाजी महाराज ने 1650 के दशक में यूरोपीय शक्तियों से कोंकण तट की रक्षा के लिए नौसैनिक क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। उनका मानना था कि समुद्र पर नियंत्रण किसी भी क्षेत्र की सुरक्षा और प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने तमिलनाडु के चोल साम्राज्य का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चोल शासकों के पास मजबूत नौसैनिक शक्ति थी और उन्होंने बंगाल की खाड़ी के पार दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का समुद्री प्रभाव बढ़ाया। राजेंद्र चोल को उन्होंने उस दौर का एक महत्वपूर्ण सैन्य नेता बताया। (INS Samarthak Commissioned)

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Vice President CP Radhakrishnan

हिंद महासागर भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए अहम

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भारत के समुद्री हित केवल देश की तटीय सीमा तक सीमित नहीं हैं। भारत का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होने वाले व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर है। यही समुद्री मार्ग भारत को दुनिया के अन्य क्षेत्रों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि, सुरक्षा और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।

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उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना केवल देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। उसने हिंद महासागर क्षेत्र में संकट के समय मदद पहुंचाने, समुद्री डकैती रोकने और दूसरे देशों के साथ सुरक्षा सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय नागरिकों को संकटग्रस्त क्षेत्रों से निकालने के अभियानों और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत अभियानों में नौसेना के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों ने भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार और संकट के समय मदद पहुंचाने वाली प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया है।

अपने भाषण में उपराष्ट्रपति ने कहा कि समुद्री तकनीक तेजी से बदल रही है। ऑटोनॉमस सिस्टम्स, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म, आधुनिक सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेटवर्क बेस्ड ऑपरेशन नौसैनिक युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को समझने, उनका परीक्षण करने और उन्हें वास्तविक परिचालन जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए आईएनएस समर्थक जैसे जहाज महत्वपूर्ण हैं। (INS Samarthak Commissioned)

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईएनएस समर्थक में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उनके अनुसार, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बन रही है।

उन्होंने कहा, “स्वदेशी सामग्री केवल कागज पर लिखा हुआ एक प्रतिशत नहीं है। हर स्वदेशी उपकरण के पीछे भारतीय डिजाइनरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और शोध संस्थानों का योगदान होता है।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना ने इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाई है। समय के साथ नौसेना केवल दूसरे देशों से प्लेटफॉर्म खरीदने वाली संस्था नहीं रही, बल्कि जटिल समुद्री प्रणालियों के निर्माण, इंटीग्रेशन और इस्तेमाल की क्षमता भी विकसित कर रही है।

निजी शिपयार्ड में तैयार हुआ पहला बड़ा युद्धपोत

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कमीशनिंग समारोह में कहा, “समर्थक का कमीशन होना दो वजहों से महत्वपूर्ण है। पहला, यह भारतीय नौसेना में अपनी तरह का पहला मल्टी-पर्पज वेसल है। दूसरा, यह देश के निजी शिपयार्ड में तैयार हुआ पहला बड़ा युद्धपोत है, जिसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।”

नौसेना प्रमुख ने कहा कि समर्थक नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के साथ अलग-अलग तरह के समुद्री मिशनों में उपयोगी साबित होगा। यह जहाज नए हथियारों, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण के लिए एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्लेटफॉर्म से किसी तकनीक के शुरुआती प्रोटोटाइप से ऑपरेशनल इस्तेमाल तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। (INS Samarthak Commissioned)

संकट में फंसे जहाजों की भी करेगा मदद

आईएनएस समर्थक को केवल परीक्षण संबंधी कामों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें हेवी टोइंग की सुविधा दी गई है। इसके जरिए समुद्र में खराब हो चुके या संकट में फंसे जहाजों को खींचने में मदद मिल सकती है। जहाज पर मेडिकल सुविधाएं और फायरफाइटिंग सिस्टम भी मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान किया जा सकता है

नौसेना प्रमुख ने कहा, जहाज की ये क्षमताएं समुद्र में लंबे समय तक चलने वाले अभियानों को बनाए रखने में भी मदद करेंगी। भारतीय नौसेना को अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में अपने जहाजों की तैनाती और ऑपरेशन के दौरान लॉजिस्टिक सहायता की जरूरत होती है।

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समर्थक का इस्तेमाल मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी एचएडीआर मिशनों में भी किया जा सकता है। समुद्री तूफान या अन्य आपदा के दौरान राहत सामग्री और जरूरी उपकरण पहुंचाने में इसकी भूमिका हो सकती है। जरूरत के अनुसार इसे सीमित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने वाले जहाज के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। (INS Samarthak Commissioned)

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Vice President CP Radhakrishnan

कंपनी ने तैयार किया स्टील का सोनार डोम

आईएनएस समर्थक का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण एलएंडटी ने अपने स्तर पर किया है। आईएनएस समर्थक का डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण एलएंडटी ने अपने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया। यह शिपयार्ड तमिलनाडु में चेन्नई के पास स्थित है। इसके बाद जहाज को कमीशनिंग के लिए कर्नाटक के कारवार लाया गया।

एलएंडटी के शिपबिल्डिंग कारोबार के प्रमुख रियर एडमिरल जीके हरीश (रिटायर्ड) ने बताया कि जहाज ने समुद्री परीक्षणों के दौरान डिस्प्लेसमेंट, गति, स्थिरता और सीकीपिंग से जुड़े डिजाइन मानकों को पूरा किया।

उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सप्लाई चेन में रुकावटों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियां सामने आईं। रेड सी मार्ग में व्यवधान के चलते जहाज से जुड़े कुछ जरूरी उपकरणों को जर्मनी से हवाई मार्ग के जरिए मंगाना पड़ा। उन्होंने बताया कि लगभग 30 टन के गियरबॉक्स और शाफ्ट से जुड़े उपकरणों को एयरलिफ्ट किया गया। सोनार डोम का कंपोजिट वर्जन उपलब्ध नहीं होने पर कंपनी ने विशेष जिग और फिक्स्चर की मदद से स्टील का सोनार डोम तैयार किया।

एडमिरल हरीश के अनुसार, एलएंडटी ने पिछले 15 सालों में नौसेना, तटरक्षक बल और अन्य ग्राहकों के लिए 74 जहाजों का निर्माण कर उन्हें सौंपा है। कंपनी 200 से अधिक जहाजों की मरम्मत भी कर चुकी है।

2022 में हुआ था निर्माण का समझौता

रक्षा मंत्रालय और एलएंडटी के बीच 25 मार्च 2022 को दो मल्टी-पर्पज वेसल बनाने के लिए लगभग 887 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। इसी प्रोजेक्ट के तहत आईएनएस समर्थक का निर्माण किया गया। जहाज की कील 20 मार्च 2023 को रखी गई और 14 अक्टूबर 2024 को इसे लॉन्च किया गया था।

निर्माण के बाद जहाज के समुद्री परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में इसकी गति, स्थिरता, समुद्र में संचालन और अन्य डिजाइन संबंधी मानकों की जांच की गई। इस साल 27 अगस्त को इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। वहीं, इस प्रोजेक्ट के दूसरे शिप का नाम उत्कर्ष है। इसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था और इसके समुद्री परीक्षण जारी हैं। (INS Samarthak Commissioned)

107 मीटर लंबा है आईएनएस समर्थक

आईएनएस समर्थक का डिस्प्लेसमेंट लगभग 3,750 टन है। इसकी लंबाई करीब 107 मीटर और चौड़ाई 18.6 मीटर है। जहाज की अधिकतम गति लगभग 15 नॉट्स है और इसकी रेंज करीब 4,500 नॉटिकल मील है। इससे यह लंबी दूरी तक समुद्र में काम कर सकता है।

जहाज पर लगभग 100 से 116 कर्मियों के रहने की व्यवस्था है। इसके हेलीकॉप्टर डेक पर एचएएल ध्रुव एमके-3 जैसे यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों को ऑपरेट किया जा सकता है।

इसमें सीओडीएडी यानी कंबाइंड डीजल एंड डीजल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। इसमें दो कमिंस क्यूएसके95 डीजल इंजन जहाज को पावर देते हैं।

इस जहाज की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम समुद्र में लहरों और हवा के प्रभाव के बावजूद जहाज को निर्धारित स्थान के आसपास स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। इससे समुद्र में परीक्षण के दौरान जहाज को बार-बार अपनी स्थिति ठीक करने की जरूरत कम होती है। (INS Samarthak Commissioned)

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स्वदेशी हथियारों और सेंसरों के परीक्षण में मिलेगी मदद

आईएनएस समर्थक की सबसे अहम भूमिका भारतीय नौसेना के लिए विकसित हो रहे हथियारों और सेंसरों के परीक्षण से जुड़ी है। किसी नए हथियार को युद्धपोत पर लगाने से पहले समुद्र में उसकी कार्यक्षमता, सटीकता और संबंधित सिस्टमों के साथ तालमेल की जांच करनी होती है।

इसी तरह नए रडार, सोनार और दूसरे सेंसरों को भी अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में परखा जाता है। समर्थक को इस तरह के परीक्षणों के लिए एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है।

इस जहाज की उपलब्धता से परीक्षणों के लिए नौसेना के मुख्य युद्धपोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे फ्रंटलाइन युद्धपोत अपने नियमित ऑपरेशनल मिशनों पर ध्यान दे सकते हैं, जबकि समर्थक पर तकनीकी परीक्षण किए जा सकते हैं। (INS Samarthak Commissioned)

अनमैन्ड और ऑटोनॉमस सिस्टम के लिए भी उपयोगी

आधुनिक नौसैनिक अभियानों में बिना चालक दल वाले सिस्टमों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी ड्रोन, समुद्र की सतह पर चलने वाले अनमैन्ड सरफेस व्हीकल और पानी के नीचे काम करने वाले ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल शामिल हैं।

आईएनएस समर्थक को ऐसे सिस्टमों के लिए मदरशिप की भूमिका निभाने के लिहाज से भी डिजाइन किया गया है। यह उन्हें समुद्र में ले जाने, तैनात करने, उनके परीक्षण करने और जरूरत पड़ने पर वापस जहाज पर लाने में मदद कर सकता है।

जहाज में विभिन्न प्रकार के टारगेट को समुद्र में तैनात करने और वापस हासिल करने की क्षमता भी है। यह सुविधा गनरी अभ्यास, टॉरपीडो परीक्षण और पनडुब्बी रोधी युद्ध से जुड़े परीक्षणों में बेहद उपयोगी है। (INS Samarthak Commissioned)

कारवार और प्रोजेक्ट सीबर्ड का महत्व

कारवार का भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक विशेष स्थान है। यहां का गहरा प्राकृतिक बंदरगाह और अरब सागर से इसकी रणनीतिक निकटता इसे नौसेना के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत कारवार में आधुनिक नौसैनिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। इस परियोजना में जहाजों को खड़ा करने के लिए बर्थिंग सुविधाएं, नौसैनिक एयर स्टेशन, आधुनिक नौसैनिक डॉकयार्ड, ड्राई डॉक और व्यापक लॉजिस्टिक्स सुविधाएं शामिल हैं।

इन सुविधाओं के पूरी तरह विकसित होने पर भारतीय नौसेना के लिए बड़ी संख्या में युद्धपोतों को यहां तैनात करना, उनकी देखभाल करना और लंबे समय तक समुद्र में संचालन के लिए तैयार रखना आसान होगा। साथ ही,
इस परियोजना से कारवार और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। (INS Samarthak Commissioned)

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