📍नई दिल्ली | 12 Oct, 2026, 8:07 PM
Indian Navy Shakti EW System: भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता को मजबूत करने के लिए पुराने एलोरा एमके-II सिस्टम की जगह स्वदेशी शक्ति इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) सिस्टम लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नौसेना मुख्यालय ने 6 अक्टूबर को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), हैदराबाद को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है।
इस खरीद का उद्देश्य युद्धपोतों पर ऐसे सिस्टम लगाना है, जो आसपास मौजूद रडार सिग्नल की पहचान कर सकें और दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक तथा मिसाइल खतरों से निपटने में मदद करें।
Indian Navy Shakti EW System: बीईएल को भेजा आरएफपी
नौसेना मुख्यालय ने यह टेंडर केवल बीईएल को भेजा है। कंपनी हैदराबाद स्थित अपनी युनिट के जरिए डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम बनाती है और शक्ति ईडब्ल्यू सिस्टम की मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) है।
आरएफपी के मुताबिक, प्रपोजल में शक्ति सिस्टम के साथ बीईएल को इंस्टॉलेशन में मदद, सिस्टम चालू करने, हार्बर और सी ट्रायल तथा ऑपरेटरों की ट्रेनिंग भी देनी होगी। सिस्टम की डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट प्रभावी होने की तारीख से 18 महीने के भीतर करनी होगी। इसे विशाखापट्टनम स्थित वेपन इक्विपमेंट डिपो तक पहुंचाया जाएगा।
क्या है शक्ति इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम?
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का इस्तेमाल युद्ध के दौरान दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को पहचानने, उनका विश्लेषण करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बाधित करने के लिए किया जाता है। समुद्र में ऑपरेशन के दौरान युद्धपोतों को अलग-अलग तरह के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से खतरा हो सकता है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम जहाज के आसपास मौजूद गतिविधियों की जानकारी जुटाने में मदद करता है।
शक्ति सिस्टम का फ्रीक्वेंसी कवरेज 0.175 से 40 गीगाहर्ट्ज तक है। इतनी व्यापक कवरेज के चलते यह अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करने वाले रडार सिग्नल को इंटरसेप्ट और पहचान सकता है।
इसमें डायरेक्शन फाइंडिंग (डीएफ) की सटीकता 2 से 3 डिग्री आरएमएस बताई गई है। इससे सिग्नल किस तरफ से आ रहा है, इसका अनुमान लगाने में मदद मिलती है। सिस्टम में रडार फिंगरप्रिंटिंग सिस्टम (आरएफपीएस) भी है। इसके जरिए रडार के सिग्नल की विशेषताओं का विश्लेषण करके उसकी पहचान करने में मदद मिलती है। (Indian Navy Shakti EW System)
दुश्मन के रडार को जाम करने की क्षमता
शक्ति सिस्टम की एक अहम विशेषता इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स (ईसीएम) क्षमता है। यह 6 से 40 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी रेंज में उपलब्ध है। इसमें डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी (डीआरएफएम) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
यह तकनीक प्राप्त रेडियो सिग्नल को डिजिटल रूप में रिकॉर्ड और प्रोसेस करने में मदद करती है। इसके जरिए सिस्टम अलग-अलग प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक खतरों के जवाब में जैमिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर सकता है।
इसके अलावा इसमें नॉइज जैमिंग और डिसेप्शन जैमिंग जैसी खूबियां भी हैं। नॉइज जैमिंग का उद्देश्य दुश्मन के रडार को मिलने वाले सिग्नल में व्यवधान पैदा करना होता है। वहीं, डिसेप्शन जैमिंग में रडार को गलत या भ्रमित करने वाली जानकारी मिलने की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जाती है।
आरएफपी में 6 से 18 गीगाहर्ट्ज बैंड में औसत इक्विवेलेंट रेडिएटेड पावर (ईआरपी) 50 किलोवाट तक और 18 से 40 गीगाहर्ट्ज बैंड में 10 किलोवाट तक है। सिस्टम में लो प्रोबेबिलिटी ऑफ इंटरसेप्ट (एलपीआई) रडार से जुड़े सिग्नल को संभालने की क्षमता भी शामिल है। (Indian Navy Shakti EW System)
युद्धपोत के दूसरे सिस्टम से होगा तालमेल
किसी भी आधुनिक युद्धपोत पर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम अकेले काम नहीं करता। उसे जहाज के अन्य उपकरणों के साथ मिल कर काम करना होता है। आरएफपी में शक्ति सिस्टम को जहाज के कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस), रडार, जीपीएस, जायरो और चैफ सिस्टम के साथ जोड़ने की मांग रखी गई है।
इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी भी महत्वपूर्ण है। सिस्टम को जहाज पर लगे दूसरे उपकरणों के साथ इस तरह काम करना होगा कि एक उपकरण के चलने से दूसरे उपकरण पर इलेक्ट्रॉनिक असर न पड़े।
सिस्टम में मिलिट्री स्टैंडर्ड एमआईएल-एसटीडी-461जी के मुताबिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस और कम्पैटिबिलिटी संबंधी जरूरतें पूरी करने की क्षमता भी हो। (Indian Navy Shakti EW System)
हो समुद्र में काम करने की क्षमता
नौसेना के उपकरणों को लंबे समय तक समुद्री वातावरण में काम करना पड़ता है। समुद्र में नमी, नमक, कंपन, जहाज की लगातार गति और मौसम में बदलाव इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए चुनौती पैदा करते हैं।
शक्ति सिस्टम को सी स्टेट-5 तक की समुद्री परिस्थितियों और 25 मीटर प्रति सेकंड तक हवा की गति में काम करने में सक्षम होना चाहिए। इसे लगातार 24 घंटे ऑपरेशन करने की क्षमता भी रखनी होगी। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए रिपेयर का औसत समय यानी एमटीटीआर 30 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। सभी कंपोनेंट मिलिट्री ग्रेड के होने चाहिए। (Indian Navy Shakti EW System)
इंस्टॉलेशन और ट्रायल की जिम्मेदारी
सिस्टम को नौसेना में इस्तेमाल से पहले हार्बर एक्सेप्टेंस ट्रायल (एचएटी) और सी एक्सेप्टेंस ट्रायल (एसएटी) किए जाएंगे। हार्बर ट्रायल में जहाज के बंदरगाह पर रहते हुए उपकरणों की जांच की जाती है, जबकि सी ट्रायल में समुद्र में सिस्टम के कामकाज और प्रदर्शन को परखा जाता है।
बीईएल को ऑपरेटरों और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए ट्रेनिंग भी देनी होगी। इसके साथ तकनीकी दस्तावेज, इंस्टॉलेशन सामग्री और जरूरी स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराने होंगे। (Indian Navy Shakti EW System)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





