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Ban Lifted on Defence Firms: सरकार ने ब्लैकलिस्टेड विदेशी डिफेंस कंपनियों से हटाने शुरू किए प्रतिबंध! यह है वजह

प्रतिबंधित कंपनियों में राइनमेटल, एसटी किनेटिक्स, रोल्स-रॉयस और कई अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कई फर्मों ने आधिकारिक रूप से भारत से बैन हटाने की गुजारिश भी की है...

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📍नई दिल्ली | 8 Dec, 2025, 2:40 PM

Ban Lifted on Defence Firms: भारत सरकार ने कई साल से प्रतिबंधित चल रही इटली की रक्षा कंपनी लियोनार्डो पर लगा बैन हटा दिया है। यह फैसला रक्षा मंत्रालय की उस अपडेटेड लिस्ट के बाद सामने आया, जिसमें बताया गया कि अब कंपनी भारत के साथ दोबारा काम कर सकती है। यह बैन 2013-14 में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगाया गया था। उस समय कंपनी पर रिश्वत देने के आरोप लगे थे और भारत ने उसके साथ सभी रक्षा सौदे रद्द कर दिए थे।

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सूत्रों के अनुसार, लियोनार्डो पर लगा पुराना प्रतिबंध अब खत्म कर दिया गया है, लेकिन कंपनी भारत से पुराने किसी भी कॉन्ट्रैक्ट को लेकर वित्तीय दावा नहीं कर सकती। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि कंपनी पर चल रही जांच जारी रहेगी। बैन हटाने का मतलब केवल इतना है कि अब वह भारत के नए रक्षा प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले सकेगी।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बैन हटाने के साथ ही एक अहम कदम और उठाया गया है। मंत्रालय ने एक नई कमिटी बनाई है, जिसका नेतृत्व डायरेक्टर-जनरल (अक्विजीशन) ए. अनबरासु कर रहे हैं। यह कमिटी उन सभी अन्य विदेशी रक्षा कंपनियों पर लगे बैन की समीक्षा करेगी, जिन पर साल 2009 के ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड रिश्वतकांड के बाद रोक लगा दी गई थी। यह पहली बार है जब सरकार सभी कंपनियों के मामलों को एक साथ देखकर नई नीति बनाने जा रही है।

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इन प्रतिबंधित कंपनियों में राइनमेटल, एसटी किनेटिक्स, रोल्स-रॉयस और कई अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कई फर्मों ने आधिकारिक रूप से भारत से बैन हटाने की गुजारिश भी की है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, पुराना प्रतिबंध हटने से भारतीय सेनाओं को उपकरण खरीदने में ज्यादा विकल्प मिलेंगे और एक ही कंपनी पर निर्भरता कम होगी।

हालांकि सिंगापुर की रक्षा कंपनी एसटी किनेटिक्स ने भारत सरकार से अपनी 13 साल पुरानी पाबंदी हटाने की औपचारिक अपील की है। यह कंपनी लंबे समय से भारतीय रक्षा खरीद में भाग नहीं ले पा रही है। कंपनी ने हाल ही में रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजकर कहा कि यह रोक अब अपनी अवधि पूरी कर चुकी है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पर इसका गलत असर पड़ रहा है।

एसटी किनेटिक्स पर वर्ष 2012 में रोक लगाई गई थी। यह रोक 2009 के ओएफबी रिश्वत मामले से जुड़ी थी, जिसमें कई विदेशी कंपनियों पर जांच की वजह से खरीद प्रतिबंध लगाया गया था। शुरुआती 10 साल की पाबंदी 2022 में खत्म हो गई थी, लेकिन अप्रैल 2025 में इसे तीन साल और बढ़ा दिया गया, जिससे कंपनी भारत के किसी भी रक्षा टेंडर, जॉइंट वेंचर या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में शामिल नहीं हो पा रही है।

कंपनी का कहना है कि उस मामले में उसके खिलाफ कभी कोई आधिकारिक आरोप तय नहीं हुआ और न ही भारत सरकार के साथ उसकी कोई रक्षा डील हुई थी। एसटी किनेटिक्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में भी कई बार अपील की थी, जहां रक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया था कि कंपनी “ब्लैकलिस्टेड” नहीं, बल्कि “टेम्परेरी होल्ड” पर है। इससे दोनों पक्षों के बीच मामला सालों तक उलझा रहा।

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हाल ही में भारत और सिंगापुर के बीच हुई बैठक में एडवांस आर्टिलरी सिस्टम और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स पर सहयोग की संभावना पर बात हुई थी। ऐसे में सिंगापुर ने फिर से अनुरोध किया कि पाबंदी हटे, ताकि दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन पर काम आगे बढ़ सके। इससे पहले इस साल अप्रैल में रक्षा मंत्रालय ने छह कंपनियों, जिनमें एसटी किनेटिक्स भी शामिल है, पर लगी मौजूदा रोक तीन साल और बढ़ा दी है। मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि सभी विभाग इस फैसले का सख्ती से पालन करें।

पूर्व प्रतिबंधों होने ते चलते कई मामलों में सेना को जरूरी स्पेयर पार्ट्स और उपकरण आसानी से नहीं मिल पा रहे थे, क्योंकि कई तकनीकें उन्हीं कंपनियों के पास थीं, जिन पर बैन लगा था। यही वजह है कि सरकार अब एक नई नीति बनाने के पक्ष में है, जिससे रक्षा उत्पादन और खरीद दोनों में तेजी आए। सूत्र कहते हैं कि अगर सभी मामलों की समीक्षा होने के बाद जरूरी सुधार किए जाते हैं, तो इससे “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि विदेशी कंपनियाँ भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन कर सकेंगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लियोनार्डो पर लगा बैन हटना एक बड़ा संकेत है कि भारत अब पुराने विवादों को पीछे छोड़कर रक्षा सहयोग को नए तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और पारदर्शिता के नियम पहले की तरह ही सख्त रहेंगे।

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