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MH-60R 2nd squadron: 17 दिसंबर भारतीय नौसेना के लिए होगा बेहद खास, गोवा में कमीशन होगी रोमियो हेलीकॉप्टर्स की दूसरी स्क्वाड्रन

MH-60R 2nd squadron

MH-60R 2nd squadron: भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को जबरदस्त बूस्ट मिलने वाला है। नौसेना 17 दिसंबर को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में अपनी दूसरी एमएच-60आर यानी रोमियो हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन को कमीशन करेगी। इसका पहला स्क्वाड्रन आईएनएएस 334 ‘सीहॉक्स’ पहले कोच्चि के आईएनएस गरूड़ पर मार्च 2024 में कमीशन किया गया था। यह स्क्वाड्रन उस समय बनाया गया था जब शुरु में एमएच-60आर हेलिकॉप्टर्स भारत आए थे।

एमएच-60आर हेलिकॉप्टर की नई स्क्वाड्रन का नाम आईएनएएस 335 ‘ऑस्प्रेज’ रखा गया है। इनकी कमीशनिंग के मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी मौजूद रहेंगे। यह कमीशनिंग भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। (MH-60R 2nd squadron)

इससे पहले नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 4 दिसंबर की नेवी डे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दिसंबर 2025 में ही आईएनएस हंसा, गोवा में फुल स्क्वाड्रन कमीशन होगा। नौसेना की योजना तीन स्क्वाड्रन बनाने की है इनमें से दो को वेस्टर्न फ्लीट के लिए, एक ईस्टर्न के लिए तैनात कियाा जाएगा।

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वहीं, आईएनएएस 335 स्क्वाड्रन के कमीशन होने से नौसेना की समुद्री निगरानी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और सतह पर मौजूद खतरों से निपटने की क्षमता को सीधा फायदा मिलेगा। एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों को दुनिया के सबसे आधुनिक मैरीटाइम हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। (MH-60R 2nd squadron)

MH-60R 2nd squadron: एमएच-60आर हेलिकॉप्टर क्यों हैं खास

एमएच-60आर हेलिकॉप्टर को ‘रोमियो’ नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऑल-वेदर मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर है, जिसे खासतौर पर एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक सेंसर, एडवांस एवियोनिक्स और ताकतवर विपन सिस्टम लगा है। यही वजह है कि यह हेलिकॉप्टर ट्रेडीशनल एंड एसिमेट्रिकल दोनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम है। (MH-60R 2nd squadron)

ये हेलिकॉप्टर्स शिप्स (जैसे विक्रांत, विक्रमादित्य, डिस्ट्रॉयर्स) से ऑपरेट होते हैं, इसलिए एक स्क्वाड्रन के कुछ हेलिकॉप्टर्स अलग-अलग शिप्स पर एम्बार्क्ड रहते हैं।

MH-60R 2nd squadron

भारतीय नौसेना ने साल 2020 में अमेरिका से 24 एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों की खरीद का समझौता किया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.4 अरब डॉलर थी। अब तक इनमें से 15 हेलिकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं। सभी की डिलीवरी 2027 तक पूरी हो जाएगी। इनमें से कुछ हेलिकॉप्टर अभी अमेरिका में ही हैं, जहां भारतीय पायलटों और टेक्निकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। (MH-60R 2nd squadron)

MH-60R 2nd squadron: पहले भी साबित कर चुके हैं क्षमता

रोमियो हेलिकॉप्टर पहले ही नौसेना के फ्लीट ऑपरेशंस में पूरी तरह इंटीग्रेट हो चुके हैं और कई मौकों पर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। इन हेलिकॉप्टरों को वॉरशिप्स से ऑपरेट किया जा सकता है, जिससे समुद्र के बड़े इलाके में निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ जाती है। (MH-60R 2nd squadron)

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इन हेलिकॉप्टरों में डिपिंग सोनार, मल्टी-मोड रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम लगे हैं, जो समुद्र के भीतर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद करते हैं। इसके साथ ही ये हेलिकॉप्टर मार्क-54 टॉरपीडो और हेलफायर एयर-टू-सर्फेस मिसाइलों से लैस हैं। (MH-60R 2nd squadron)

MH-60R 2nd squadron: आईएनएस हंसा से मिलेगी पश्चिमी में बढ़त

ऑस्प्रेज स्क्वाड्रन को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में तैनात किया जाएगा, जो पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना का प्रमुख एयर बेस है। यहां से अरब सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्र में निगरानी और ऑपरेशनल गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। यह इलाका रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। (MH-60R 2nd squadron)

भारतीय नौसेना पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में हो रही हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है। हाल के वर्षों में चीनी नौसैनिक और रिसर्च जहाजों की मौजूदगी इस क्षेत्र में बढ़ी है, ऐसे में रोमियो जैसे आधुनिक हेलिकॉप्टर नौसेना के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। (MH-60R 2nd squadron)

MH-60R 2nd squadron: पुराने हेलिकॉप्टरों की जगह ले रहे रोमियो

रोमियो हेलिकॉप्टर भारतीय नौसेना में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पुराने सी किंग हेलिकॉप्टरों की जगह ले रहे हैं। सी किंग हेलिकॉप्टर अब अपनी मूल भूमिका की तुलना में ज्यादा ट्रांसपोर्ट कार्यों में इस्तेमाल हो रहे थे। नए हेलिकॉप्टरों के आने से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता फिर से मजबूत हो रही है। (MH-60R 2nd squadron)

मेंटेनेंस और सपोर्ट पर भी फोकस

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच रोमियो हेलिकॉप्टरों (MH-60R 2nd squadron) के लिए लगभग 7,995 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन सपोर्ट समझौता भी हुआ है। इसके तहत अगले पांच वर्षों तक इन हेलिकॉप्टरों के मेंटेनेस, रिपेयर और स्पेयर सपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। भारत में ही इंटरमीडिएट लेवल मेंटेनेंस फैसिलिटी स्थापित की जाएगी, जिससे ऑपरेशनल क्षमता और बढ़ेगी।

HELINA missile production: दुश्मन टैंकों पर भारी पड़ेगी हेलिना, DRDO का निजी कंपनियों को बड़ा ऑफर

HELINA missile production
HELINA missile

HELINA missile production: दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए डीआरडीओ ने हेलिना एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को आगे आने का आमंत्रण दिया है। डीआरडीओ के मिसाइल और सामरिक सिस्टम क्लस्टर ने इसके लिए एक नया एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है, जिसके तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों को पूरी हेलिना हथियार प्रणाली के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की गई है।

हेलिना का पूरा नाम हेलिकॉप्टर लॉन्च्ड नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। यह मिसाइल विशेष रूप से हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए बनाई गई है और दुश्मन के आधुनिक टैंकों को नष्ट कर सकती है। डीआरडीओ के इस कदम से साफ है कि सेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अब सिर्फ भारत डायनामिक्स लिमिटेड पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि अतिरिक्त प्रोडक्शन पार्टनर भी जोड़े जाएंगे। (HELINA missile production)

HELINA missile production: क्यों जरूरी हुआ यह फैसला

भारतीय सेना की चीन और पाकिस्तान के साथ लगी सीमाओं पर तैनाती लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एंटी-टैंक मिसाइलों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इन्हीं जरूरतों को देखते हुए हेलिना और इसके वायुसेना संस्करण ध्रुवास्त्र के उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। मार्च 2025 में भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने डीआरडीओ के साथ हेलिना और ध्रुवास्त्र के सीरियल प्रोडक्शन के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़ा पहला लाइसेंसिंग समझौता किया था। (HELINA missile production)

सेना का आकलन है कि अगले सात से आठ वर्षों में उसे 5,000 से अधिक हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलों की जरूरत होगी। इसके साथ ही 400 से ज्यादा ड्यूल-ट्यूब लॉन्चरों की भी मांग की गई है। इन मिसाइलों को रुद्र और प्रचंड जैसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में तैनात किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में उत्पादन के लिए मौजूदा उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं मानी जा रही, इसी वजह से निजी कंपनियों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। (HELINA missile production)

HELINA missile production: हर साल सैकड़ों मिसाइलें बनाने का लक्ष्य

डीआरडीओ द्वारा जारी किए गए नए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के अनुसार, चयनित निजी कंपनियों को हर साल 500 से 800 हेलिना मिसाइलें बनाने में सक्षम स्वतंत्र उत्पादन लाइनें बनानी होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में गोला-बारूद की सप्लाई में कमी न आए। वर्ष 2020 में गलवान झड़प के बाद सेना ने यह नीति अपनाई है कि हर अहम हथियार प्रणाली के लिए कम से कम दो स्वतंत्र उत्पादन लाइनें मौजूद हों। (HELINA missile production)

इसी के तहत हेलिना मिसाइल को अब ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी प्रमुख स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की श्रेणी में रखा गया है।

HELINA missile production: हेलीकॉप्टर बेड़े को मिलेगी नई ताकत

हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलें भारतीय सेना के अटैक हेलीकॉप्टर बेड़े की मुख्य ताकत बनने वाली हैं। इन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में आने वाले अन्य हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में भी इन मिसाइलों के इस्तेमाल की योजना है। (HELINA missile production)

ये मिसाइलें फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर आधारित हैं, यानी लॉन्च के बाद इन्हें दुश्मन के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए किसी अतिरिक्त गाइडेंस की जरूरत नहीं होती। जिससे युद्ध के दौरान हेलीकॉप्टर और पायलट दोनों सुरक्षित रहते हैं।

टैंकों के लिए बड़ा खतरा

हेलिना मिसाइलें आधुनिक सेंसर और गाइडेंस सिस्टम से लैस हैं, और ये दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों पर सटीक हमला कर सकती हैं। बड़े पैमाने पर इन मिसाइलों का उत्पादन भारतीय सेना को सीमाओं पर तेजी से बदलते हालात का जवाब देने में मदद करेगा और स्वदेशी रक्षा उत्पादन भी मजबूत होगा। (HELINA missile production)

Great Nicobar Airfield: हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी, ग्रेट निकोबार में दूसरे एयरफील्ड की तैयारी शुरू

Great Nicobar Airfield
Pic: Car Nicobar Air Force Station/wikipedia

Great Nicobar Airfield: भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक और नया एयरफील्ड बनाने की तैयारी कर रहा है। देश के सबसे दक्षिणी हिस्से ग्रेट निकोबार द्वीप पर दूसरे एयरफील्ड बनाने की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। यह एयरफील्ड मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद नजदीक स्थित होगा, जो चीन और सुदूर पूर्वी देशों की ओर जाने वाले सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।

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यह प्रस्तावित एयरफील्ड ग्रेट निकोबार के चिंगेन क्षेत्र में बनाया जाएगा, जो गैलेथिया बे के पास स्थित है। यह इलाका इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बांडा आचेह से करीब 150 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पड़ता है। गैलेथिया बे की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह उस शिपिंग चैनल के और करीब है, जो सीधे मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाता है।

Great Nicobar Airfield: पहले से मौजूद आईएनएस बाज के पास नया एयरफील्ड

ग्रेट निकोबार द्वीप पर पहले से ही भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण एयरबेस आईएनएस बाज मौजूद है, जो कैंपबेल बे में स्थित है। यह एयरबेस सिक्स डिग्री शिपिंग चैनल पर नजर रखता है, जिसके जरिए बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाज आवाजाही करते हैं। नया एयरफील्ड आईएनएस बाज से कुछ ही किलोमीटर दक्षिण में बनाया जाएगा।

सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 96 हजार से ज्यादा जहाज मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 260 से ज्यादा जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ग्रेट निकोबार में दूसरा एयरफील्ड भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

Great Nicobar Airfield: 8,573 करोड़ रुपये की ड्यूल-यूज परियोजना

इस एयरफील्ड परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,573 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस परियोजना को एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई संभाल रही है। इसे एक ग्रीनफील्ड ड्यूल-यूज एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, यानी इसका इस्तेमाल सिविल और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।

एएआई ने इस परियोजना के लिए भारतीय कंपनियों से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में बोली आमंत्रित की है। यह टेंडर “ग्रेट निकोबार द्वीप पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज” के नाम से जारी किया गया है। इन बोलियों की अंतिम तारीख 26 दिसंबर तय की गई है।

हालांकि एयरपोर्ट का निर्माण एएआई की देखरेख में होगा, लेकिन इसका इस्तेमाल भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और मानवरहित हवाई वाहनों यानी यूएवी के लिए भी किया जाएगा। यह एयरफील्ड चंडीगढ़, डाबोलिम, पुणे, लेह और श्री विजय पुरम जैसे ड्यूल-यूज एयरपोर्ट्स की तर्ज पर काम करेगा।

Great Nicobar Airfield: गैलेथिया बे पोर्ट परियोजना से जुड़ा एयरफील्ड

यह एयरफील्ड गैलेथिया बे में प्रस्तावित इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट परियोजना का भी हिस्सा है। इस पोर्ट को सिंगापुर के मुकाबले एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है। हालांकि इस परियोजना को लेकर पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दे सामने आए थे, लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अगस्त में कहा था कि रणनीतिक सुविधा के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए विशेष और प्रभावी उपाय शामिल किए गए हैं।

Great Nicobar Airfield: आईएनएस बाज और अन्य सैन्य ठिकानों का विस्तार

ग्रेट निकोबार में मौजूद आईएनएस बाज एयरबेस का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2023 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं मौके पर जाकर इस बेस के विस्तार कार्यों की समीक्षा की थी। इस एयरबेस से स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट, डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, वायुसेना के सी-130जे और एयरबस सी-295 जैसे विमानों को ऑपरेट किया जा सकता है।

इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहले से ही एक जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर मौजूद है, जहां से निगरानी और अन्य सैन्य अभियानों की संयुक्त योजना बनाई जाती है। उत्तर अंडमान के शिबपुर में स्थित आईएनएस कोहासा नेवल एयर स्टेशन के रनवे को भी बड़ा करने की योजना है, ताकि वहां बड़े सैन्य विमान, नए गोला-बारूद भंडार और फाइटर जेट्स की तैनाती की क्षमता बढ़ाई जा सके।

IAF Graduation Parade 2025: एयर चीफ बोले- कमीशन पाना उपलब्धि नहीं, देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने की शुरुआत, सीडीएस ने दी घमंड से दूर रहने की सलाह

IAF Graduation Parade 2025

IAF Graduation Parade 2025: सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सेना की वर्दी गर्व का विषय है, लेकिन इसके साथ विनम्रता, अनुशासन और सिद्धांतों पर अडिग रहना सबसे जरूरी है। उन्होंने नए अधिकारियों से घमंड और अज्ञान से दूर रहने तथा हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया। वहीं, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नए फ्लाइंग ऑफिसर्स से अपेक्षा जताई कि वे अनुशासन, साहस और पेशेवर ईमानदारी को अपनी पहचान बनाएं।

13 दिसंबर को हैदराबाद के दुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में कम्बाइंड ग्रेजुएशन परेड का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर जनरल अनिल चौहान ने रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में परेड की समीक्षा की और 216वें कोर्स के कैडेट्स को राष्ट्रपति कमीशन प्रदान किया।

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कम्बाइंड ग्रेजुएशन परेड को संबोधित करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने नए वायुसेना अधिकारियों से कहा कि सेना की वर्दी सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक अधिकारी को घमंड और अज्ञान से हमेशा दूर रहना चाहिए और हर हाल में सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए।

IAF Graduation Parade 2025

सीडीएस ने कहा कि आज का युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक, सूचना और सोच के स्तर पर भी लड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा फ्यूजन, मैन-अनमैनड टीमिंग, ऑटोनॉमस सिस्टम और कॉग्निटिव डोमेन ऑपरेशंस युद्ध की दिशा तय करेंगे।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय वायुसेना की उच्च पेशेवर क्षमता और तैयारी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भविष्य की सैन्य शक्ति का आधार JAI मॉडल होगा, यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन। सीडीएस ने नए अधिकारियों से निर्भीक होकर नेतृत्व करने और देशसेवा में पूरी निष्ठा रखने का आह्वान किया।

वहीं, चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने परेड के समापन के मौके पर नए अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वायुसेना में कमीशन पाना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने की शुरुआत है।

एयर फोर्स चीफ ने कहा कि भारतीय वायुसेना तेजी से मॉडर्न टेक्नोलॉजी-बेस्ड फोर्स बन रही है और इसमें नए अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्होंने कहा कि आज का वायु युद्ध नेटवर्क सेंट्रिक, ड्रोन आधारित और हाई-प्रिसीजन होता जा रहा है, ऐसे में अधिकारियों को लगातार सीखते रहना होगा।

उन्होंने नए फ्लाइंग ऑफिसर्स से अपेक्षा जताई कि वे अनुशासन, साहस और पेशेवर ईमानदारी को अपनी पहचान बनाएं। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना हमेशा अपने जवानों से उच्चतम मानकों की उम्मीद करती है और नए अधिकारी इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।

परेड के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तीन विमानों के किरण फॉर्मेशन को उड़ाया और लीड किया और नए अधिकारियों को पहला सलाम भी दिया। समापन में सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की रोमांचक उड़ान ने समारोह को यादगार बना दिया।

IAF Graduation Parade 2025

समारोह में कुल 244 फ्लाइट कैडेट्स वायुसेना अधिकारी बने, जिनमें 215 पुरुष और 29 महिला कैडेट्स शामिल थे। परेड के दौरान सीडीएस को एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड तथा एयर मार्शल पीके वोहरा, कमांडेंट, एयर फोर्स अकादमी ने स्वागत किया। परेड में शानदार मार्च-पास्ट और जनरल सलामी दी गई।

इस मौके पर भारतीय नौसेना के छह अधिकारी, भारतीय तटरक्षक बल के आठ अधिकारी और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के दो ट्रेनीज को सफल उड़ान प्रशिक्षण पूरा करने पर ‘विंग्स’ प्रदान किए गए। वहीं नेविगेशन ट्रेनिंग पूरी करने वाले पांच अधिकारियों को ‘ब्रेवेट्स’ दिए गए।

परेड का मुख्य आकर्षण कमीशनिंग सेरेमनी रही, जिसमें फ्लाइट कैडेट्स को फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन दिया गया। अधिकारियों ने देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा की शपथ ली। परेड के दौरान पिलाटस पीसी-7, हॉक, किरण और चेतक एयरक्राफ्ट द्वारा सटीक और तालमेल भरा फ्लाई-पास्ट किया गया। आकाश गंगा टीम और एयर वॉरियर ड्रिल टीम के प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए फ्लाइंग ब्रांच के फ्लाइंग ऑफिसर तनिष्क अग्रवाल को ओवरऑल मेरिट में प्रथम स्थान पर रहने के लिए प्रेसिडेंट्स प्लाक और नवानगर स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। नेविगेशन स्ट्रीम में फ्लाइंग ऑफिसर सक्षम डोबरियाल और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच में फ्लाइंग ऑफिसर नितेश कुमार को प्रेसिडेंट्स प्लाक प्रदान किया गया।

IMA POP 2025: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले- सेना की वर्दी नौकरी नहीं, आजीवन कर्तव्य, 559 कैडेट बने भारतीय सेना के अफसर

IMA POP 2025 Indian Military Academy Passing Out Parade 2025: General Upendra Dwivedi Reviews 157th POP at IMA Dehradun
Indian Military Academy Passing Out Parade 2025: General Upendra Dwivedi Reviews 157th POP at IMA Dehradun

IMA POP 2025: थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि सेना की वर्दी कोई नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति आजीवन कर्तव्य है। यह ऐसा दायित्व है, जिसमें जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान भी देना पड़ता है। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) में आयोजित 157वीं पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते हुए उन्होंने नव-नियुक्त अधिकारियों से कहा कि आने वाला समय चुनौतीपूर्ण होगा, जहां नेतृत्व, नैतिक साहस और सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे बड़ी कसौटी बनेगी।

देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) के ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वेयर में शनिवार को 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर सैकड़ों युवा अधिकारी कैडेटों को भारतीय सेना में कमीशन दिया गया गया।

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इस ऐतिहासिक समारोह की समीक्षा थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने की। उन्होंने परेड की सलामी ली और ट्रेनिंग पूरी करने वाले सभी अधिकारी कैडेट्स को बधाई दी। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना में अधिकारी बनना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति आजीवन कर्तव्य और निस्वार्थ सेवा का संकल्प है। उन्होंने युवा अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे हर परिस्थिति में साहस, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करेंगे।

IMA POP 2025 Indian Military Academy Passing Out Parade 2025: General Upendra Dwivedi Reviews 157th POP at IMA Dehradun

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज का सुरक्षा माहौल तेजी से बदल रहा है, जहां सैन्य शक्ति के साथ-साथ तकनीक, कूटनीति और समाजिक समझ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी हो गया है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बेहतर समन्वय, सही निर्णय और समय पर कार्रवाई से जीता जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना लगातार आधुनिकीकरण और इनोवेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है और नए अधिकारी इस परिवर्तन का अहम हिस्सा होंगे।

उन्होंने युवा अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने जवानों के लिए उदाहरण बनें, नैतिक मूल्यों का पालन करें और संकट की स्थिति में संयम बनाए रखें। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियां हमेशा स्पष्ट नहीं होंगी, लेकिन एक सच्चा अधिकारी वही होता है जो अनिश्चित परिस्थितियों में भी सही नेतृत्व दे सके।

इस अवसर पर थल सेना प्रमुख ने 14 मित्र देशों से आए 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि आईएमए में बनी यह दोस्ती भविष्य में देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी। उन्होंने अकादमी के प्रशिक्षकों और स्टाफ की भी सराहना की, जिन्होंने कठिन प्रशिक्षण के माध्यम से कैडेट्स को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया।

परेड का समापन पारंपरिक ‘अंतिम पग’ के साथ हुआ, जब नए अधिकारी पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। समारोह में कुल 559 अधिकारी कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया गया। इनमें 157वां रेगुलर कोर्स, 46वां टेक्निकल एंट्री स्कीम कोर्स, 140वां टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वां स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्जाम 2023 कोर्स के कैडेट्स शामिल थे।

परेड के दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित भी किया गया। स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और गोल्ड मेडल अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी को प्रदान किया गया। सिल्वर मेडल बैटालियन अंडर ऑफिसर बादल यादव को और ब्रॉन्ज मेडल सीनियर अंडर ऑफिसर कमलजीत सिंह को मिला। टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में प्रथम स्थान के लिए ऑफिसर कैडेट जाधव सुजीत संपत और टेक्निकल एंट्री स्कीम-46 में प्रथम स्थान के लिए विंग कैडेट कैप्टन अभिनव मेहरोत्रा को सम्मानित किया गया। स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स में ऑफिसर कैडेट सुनील कुमार छेत्री को सिल्वर मेडल मिला, जबकि विदेशी कैडेट्स में प्रथम स्थान बांग्लादेश के मोहम्मद सफीन अशरफ को मिला। ऑटम टर्म 2025 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए इंफाल कंपनी को थल सेना प्रमुख बैनर प्रदान किया गया।

Indian Army Pinaka 120 km: भारतीय सेना को चाहिए 120 किमी रेंज वाला ‘आग का तूफान’, गाइडेड पिनाका रॉकेट्स की खरीद के लिए भेजा प्रस्ताव

Indian Army Pinaka 120 km
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Indian Army Pinaka 120 km: भारतीय सेना ने 120 किमी की रेंज वाले पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नए गाइडेड रॉकेट्स खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा है। यह प्रस्ताव ऑपरेशन सिंदूर के बाद लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 2,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का नेतृत्व डीआरडीओ करेगा और जल्द ही इसके ट्रायल शुरू किए जाएंगे।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्ताव में कहा गया है कि नया 120 किमी रेंज वाला रॉकेट मौजूदा पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स में आसानी होगी और अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट में डीआरडीओ की लैब्स आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई), हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) और हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) गाइडेंस सिस्टम और नेविगेशन किट डेवलप करेंगे।

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सूत्रों का कहना है कि पहले परीक्षण अगले वित्तीय वर्ष में होने की योजना है और उसके बाद डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स (डीसीपीपी) चुने जाएंगे, जिनके साथ प्रोडक्शन और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू की जाएगी।

सेना की यह पहल आर्टिलरी मॉडर्नाइजेशन योजना का हिस्सा है। पिनाका सिस्टम 40 किमी और इसका गाइडेड वेरिएंट 75 किमी से ज्यादा मार कर सकता है। जबकि नया वेरिएंट 120 किमी तक मार कर सकेगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि नए रॉकेट में जीपीएस-आधारित गाइडेंस और कंट्रोल किट लगाया जाएगा ताकि सटीकता बढ़े और सर्कुलर एरर प्रोबबल (सीईपी) घट कर 10 से 20 मीटर के बीच रहे। पेलोड के तौर पर 250 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड वॉरहेड या एरिया-डिनायल म्यूनिशन (एडीएम) इस्तेमाल किया जाएगा।

इस साल पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम से जुड़े कई कॉन्ट्रैक्ट भी हुए हैं। साल की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने इकनॉमिक एक्सप्लोजिव लिमिटेड टाइप-1 और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड के साथ एरिया डिनायल म्यूनिशन और हाई एक्सप्लोसिव प्री फ्रैगमेंटेड (एचईपीएफ) रॉकेट्स के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट भी किये गए थे। जिसकी कुल लागत 10,147 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ शक्ति नामक सॉफ्टवेयर के अपग्रेड के लिए भी समझौता हुआ है। रक्षा सचिव की मौजूदगी में इन समझौतों पर दस्तखत किये गये थे।

पिनाका एमएलआरएस (मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम) डीआरडीओ के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में से एक रहा है और इससे भारतीय सेना की तुरंत प्रतिक्रिया और बड़े पैमाने पर सैल्वो फायरिंग क्षमता मिलती है। वहीं, पिनाका को एक्सपोर्ट भी किया जा चुका है और आर्मेनिया जैसे देशों ने यह सिस्टम खरीदा है। जबकि फ्रांस, आसियान, अफ्रीकी देशों समेत कई यूरोपियन देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पहले ही साफ कह चुके हैं कि पिनाका का नया लॉन्ग-रेंज वेरिएंट के डेवलप होते ही सेना दूसरे हथियारों पर की गई योजनाओं पर पुनर्विचार कर सकती है।

प्रस्ताव के हिसाब से डीआरडीओ पहले प्रोटोटाइप और वैलिडेशन ट्रायल करेगा, फिर बिड प्रोसेस के जरिये डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स चुने जाएंगे। रक्षा सूत्रों ने कहा कि प्रस्ताव को जल्द ही डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) के पास मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।

पिनाका का नया 120 किमी वेरिएंट मौजूदा लॉन्चरों से दागा जा सकेगा और इससे तैनाती व ऑपरेशन में आसानी होगी। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख है कि डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में कई सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की कंपनियां सहयोग करेंगी। इनमें सोलर इंडस्ट्रीज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टूब्रो शामिल हैं।

पिनाका के एक बड़े ट्रक पर 8 या 12 ट्यूब लगे होते हैं, और ये सिर्फ 40-44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग देता है। इसी वजह से इसे सेना में “आग का तूफान” भी कहा जाता है। एक पूरी बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं, जो 1 मिनट में 72 रॉकेट दाग कर तकरीबन 1 वर्ग किलोमीटर के इलाके को पूरी तरह से तबाह कर सकता है।

पिनाका का पूरा “फायर साइकिल” बेहद तेज होता है। सबसे पहले दुश्मन का लोकेशन ड्रोन, आर्टिलरी रडार, सैटेलाइट या फॉरवर्ड ऑब्जर्वर से मिलता है। वहीं, टारगेट का जीपीएस को-ऑर्डिनेट सीधे कमांड पोस्ट व्हीकल में भेज दिया जाता है। कमांड पोस्ट में लगा शक्ति सॉफ्टवेयर हवा, ऊंचाई, तापमान आदि को देखकर बैलिस्टिक कैलकुलेशन करता है। उसके बाद सिर्फ 2 मिनट में सभी लॉन्चरों को फायरिंग ऑर्डर भेज दिया जाता है।

COAS Artillery Conference 2025: आर्मी चीफ पहुंचे देवलाली, आर्टिलरी की मारक क्षमता और मॉर्डनाइजेशन पर हुआ गहन मंथन

COAS Artillery Conference 2025

COAS Artillery Conference 2025: भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देवलाली स्थित स्कूल ऑफ आर्टिलरी में आयोजित बाइएनियल आर्टिलरी कॉन्फ्रेंस 2025 की अध्यक्षता की। यह सम्मेलन 11–12 दिसंबर तक हाइब्रिड मोड में चला, जहां देशभर से कई वरिष्ठ सैन्य अफसर भी जुड़े। दो दिनों तक चली इस बैठक में आर्टिलरी रेजिमेंट की ऑपरेशनल तैयारियों, मॉडर्नाइजेशन और ट्रांसफॉर्मेशन योजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई।

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सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक और आर्टिलरी की रणनीतिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही शक्तिबान रेजिमेंट्स और दिव्यास्त्र बैटरियों के पुनर्गठन और गठन पर भी विशेष ध्यान दिया गया, जो भविष्य की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

आर्टिलरी के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल आदर्श कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने रेजिमेंट के मॉडर्नाइजेशन रोडमैप, ट्रेनिंग सुधार और मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सम्मेलन में 25 अलग-अलग सैन्य ठिकानों से अधिकारी और जेसीओ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

दौरे के दौरान आर्मी चीफ ने स्कूल ऑफ आर्टिलरी के ड्रोन एक्सपीरियंस सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्हें सिमुलेटर लैब, इन्क्यूबेशन सेंटर और ड्रोन मैन्यूवर एरीना में मिशन प्लानिंग, सर्विलांस और टार्गेटिंग ट्रेनिंग के तरीकों के बारे में बताया गया। आर्मी चीफ ने ड्रोन ऑपरेशन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और मिनी-आरपीएएस (रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम) मॉड्यूल का डेमोंस्ट्रेशन भी देखा और ट्रेनर्स की तारीफ भी की।

इसके बाद जनरल द्विवेदी ने नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (CAATS) का निरीक्षण किया और उसकी ऑपरेशनल रेडीनेस की समीक्षा की। अपने दौरे के अंत में उन्होंने देवलाली और नासिक के सैन्य स्टेशनों के वेटरंस से मुलाकात की और पांच पूर्व सैनिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वेटरन अचीवर्स अवार्ड प्रदान किया।

Operation Sagar Bandhu Update: चक्रवात दित्वाह के बाद भारतीय सेना ने श्रीलंका भेजी इंजीनियर टास्क फोर्स, बैली ब्रिज से करेंगे संपर्क बहाल

Operation Sagar Bandhu Update

Operation Sagar Bandhu Update: श्रीलंका में आए विनाशकारी चक्रवात दित्वाह ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। इस तूफान ने सड़कों, पुलों और कई इलाकों के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से नुकसान पहुंचाया। जिसके बाद भारत ने अपनी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत प्रभावित लोगों की मदद के लिए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना की एक विशेष इंजीनियर टास्क फोर्स को तुरंत एयरलिफ्ट करके श्रीलंका भेजा गया। वहां पहुंचते ही टीम ने प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया है।

इस टीम में 48 विशेषज्ञ सैनिक शामिल हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान से एयरलिफ्ट किया गया। टास्क फोर्स ने श्रीलंका पहुंचते ही उन इलाकों में काम शुरू कर दिया है, जहां चक्रवात के कारण संपर्क टूट गया था और लोगों को तुरंत राहत की जरूरत थी।

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यह इंजीनियर टास्क फोर्स में ब्रिजिंग एक्सपर्ट, हैवी मशीनरी ऑपरेटर, वॉटरमैनशिप स्पेशलिस्ट, ड्रोन ऑपरेटर, हाइड्रोग्राफिक और टोपोग्राफिक सर्वे टीम, और रिमोटली कंट्रोल्ड बोट ऑपरेटर शामिल हैं। टीम के साथ बड़ी मात्रा में तकनीकी उपकरण भी भेजे गए हैं ताकि राहत अभियान तेजी लाई जा सके।

टास्क फोर्स के पास इस समय चार सेट बैली ब्रिज मौजूद हैं। इन ब्रिज किट्स को भारतीय वायुसेना ने सीधे श्रीलंका एयरलिफ्ट किया। ये मॉड्यूलर ब्रिज हैं, जिन्हें किसी भी साइट के हिसाब से तुरंत तैयार किया जा सकता है। चक्रवात के बाद सबसे ज्यादा जरूरत टूटी सड़कों और पुलों को जोड़ने की है, और यही काम यह बैली ब्रिज तेजी से पूरा कर सकते हैं।

इसके अलावा टीम के पास न्यूमैटिक बोट्स, हाई-पावर आउटबोर्ड मोटर्स, हेस्को बैग्स, हैवी पेलोड ड्रोन, रिमोटली ऑपरेटेड बोट्स, वॉटर प्यूरीफिकेशन यूनिट, जनरेटर, और मोबाइल फ्लड लाइट्स भी मौजूद हैं। इन उपकरणों की मदद से बचाव कार्य रात-दिन चल रहा है।

भारतीय सेना की यह टीम अपने साथ खाने, ईंधन, मेडिकल किट, टूल्स और स्पेयर पार्ट्स लेकर गई है, ताकि ग्राउंड पर किसी रुकावट का सामना न करना पड़े। श्रीलंका की सेना और रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों ने भारतीय टीम के साथ मिलकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त इलाकों की पहचान की है।

किलिनोच्ची इलाके में एक बड़ा पुल चक्रवात के पानी में पूरी तरह बह गया था। यह पुल दैनिक आवाजाही के लिए बेहद जरूरी था। भारतीय टीम ने यहां पहले दिन से ही काम शुरू कर दिया। ब्रिज साइट तैयार की गई, भूमि समतल की गई और ब्रिज लॉन्चिंग के लिए रोलर और लॉन्चिंग नोज लगाई गई। मॉड्यूलर बैली ब्रिज की खासियत यह है कि इसे मौके पर ही आवश्यक लंबाई के अनुसार तैयार किया जा सकता है।

इसके साथ ही मुल्लैतिवु, परंतन और मानर क्षेत्रों में भी ब्रिज सर्वे किए जा रहे हैं। अगले कुछ दिनों में यहां और दो से तीन बैली ब्रिज लगने की तैयारी है। इन पुलों के बनते ही कई गांवों का संपर्क फिर से बहाल हो जाएगा, जिससे राहत सामग्री और मेडिकल टीम आसानी से पहुंच सकेंगी।

ऑपरेशन सागर बंधु श्रीलंका के लिए एक बड़ी राहत है। चक्रवात दित्वाह की वजह से कई जगहों पर पानी भर गया, सड़कें टूट गईं और हजारों लोग फंसे रह गए। ऐसे में भारत का यह साथ दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों को और मजबूत कर रहा है।

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह मिशन सिर्फ राहत अभियान नहीं, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच भरोसे और दोस्ती का संदेश भी है। जब भी कोई संकट आता है, भारत हमेशा सबसे पहले मदद के लिए हाथ बढ़ाता है।

Pakistani balloons: बीकानेर के खाजूवाला में खेत में मिला पाकिस्तानी बैनर, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Pakistani balloons land in Bikaner’s Khajuwala

Pakistani balloons: बीकानेर के खाजूवाला क्षेत्र में एक बार फिर पाकिस्तान की ओर से आए गुब्बारों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया। 17 केवाईडी इलाके के एक किसान को अपने खेत में काले और पीले रंग के कई गुब्बारे पड़े मिले। खेत में सुबह निरीक्षण के दौरान किसान की नजर इन गुब्बारों पर पड़ी, जो फसलों के बीच पड़े थे। पहली नजर में ही यह साफ दिख रहा था कि यह गुब्बारे तेज हवाओं के साथ पाकिस्तान की तरफ से आए थे।

किसान ने तुरंत खाजूवाला पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित घेरा बनाकर सील कर दिया। पुलिस ने ग्रामीणों को पास न आने की सलाह दी और गुब्बारों के साथ आए बैनर की जांच शुरू की। इलाके में इससे पहले भी पाकिस्तान से आए गुब्बारों की घटनाएं हो चुकी हैं।

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जांच के दौरान गुब्बारों के साथ एक बैनर मिला, जिस पर “अल नूर ग्रुप प्रॉपर्टी एक्सपो 2025” लिखा था। यह बैनर पाकिस्तान के बहावलपुर में आयोजित किसी प्रॉपर्टी एक्सपो की सजावट का हिस्सा रहा होगा, जो हवा के चलते सीमा पार आ गया। हालांकि बैनर पूरी तरह सामान्य दिख रहा था, लेकिन बॉर्डर क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने सावधानी में कोई कमी नहीं छोड़ी।

सुरक्षा एजेंसियों ने गुब्बारों और बैनर की गहराई से जांच की और यह सुनिश्चित किया कि इनमें कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री न हो। आसपास के क्षेत्र की भी तलाशी ली गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने गुब्बारों और बैनर को नष्ट कर दिया, ताकि किसी तरह की अफवाह न फैले।

खाजूवाला और आसपास के गांवों में लोग ऐसी घटनाओं को लेकर पहले से ही सतर्क रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में बीकानेर सीमा क्षेत्र में कई बार पाकिस्तानी गुब्बारे हवा में उड़ कर यहां पहुंचे हैं। यह सिर्फ मौसम की वजह से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर छोड़े जाने वाले गुब्बारों का परिणाम भी हो सकता है।

Faiz Hameed Jail: जब पूर्व ISI चीफ फैज हमीद पर पत्नी ने चला दी थी गोली, इस महिला संग आशिकी करते दबोचा था रंगे हाथ

Faiz Hameed Jail

Faiz Hameed Jail: पाकिस्तान के पूर्व इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) फैज हमीद हाल ही में उस समय सुर्खियों में आए, जब पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने उन्हें चौदह साल की सजा सुनाई। यह फैसला देश की राजनीति और सेना में चल रहे खींचतान का हिस्सा बताया जा रहा है। लेकिन फैज हमीद का नाम केवल राजनीतिक मामलों के कारण ही नहीं, बल्कि एक पुराने निजी विवाद के चलते भी पाकिस्तान में लंबे समय तक चर्चा में रहा।

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यह विवाद वर्ष 2021 का है, जब फैज हमीद की निजी जिंदगी से जुड़ा एक मामला मीडिया में छाया रहा। खबरों के मुताबिक, उनकी पत्नी ने उन्हें एक महिला के साथ कथित रूप से “आपत्तिजनक स्थिति” में पकड़ लिया था। यह महिला कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तान की जानी-मानी पत्रकार और डिफेंस से जुड़ी लेखिका अरूसा आलम थीं। कहा जाता है कि गुस्से में पत्नी ने उन्हीं की सरकारी पिस्तौल से गोली चला दी, जो फैज हमीद को छूते हुए निकल गई। इस घटना को उस समय काफी दबाया गया, लेकिन बाद में कई पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस कहानी की पूरी कलई खोल दी। (Faiz Hameed Jail)

Faiz Hameed Jail: जनरल रानी से शुरू होती है कहानी

इस विवाद को समझने के लिए पहले “जनरल रानी” कही जाने वाली अकलीम अख्तर की कहानी जानना जरूरी है। 1960 और 70 के दशक में पाकिस्तान की राजनीति में अकलीम अख्तर का बड़ा प्रभाव था। वे सैन्य तानाशाह जनरल याह्या खान की बेहद करीबी रही थीं। बताया जाता है कि याह्या खान के शासनकाल में उनका इतना प्रभाव था कि सरकार और सेना से जुड़े कई फैसले उनकी मौजूदगी में तय होते थे। (Faiz Hameed Jail)

अकलीम का जन्म पंजाब के एक जमींदार परिवार में हुआ था। शादी, बच्चे और आम जीवन से निकलकर वे धीरे-धीरे उस सर्कल में शामिल हुईं, जहां सत्ता और ताकत वाले लोग आते थे। जनरल याह्या से करीबी बढ़ने के बाद उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव जमा लिया। पूर्वी पाकिस्तान संकट और 1971 की जंग के समय भी उनके रोल पर सवाल उठे, लेकिन याह्या खान के पतन के साथ ही उनका दौर भी खत्म हो गया।

उन्हीं की बेटी अरूसा आलम, जिन्हें बाद में “नई जनरल रानी” कहा गया, 1990 के दशक में मीडिया जगत की पहचान बनीं। पाकिस्तान में उन्हें डिफेंस रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। अरूसा का भारत से भी गहरा संबंध रहा है। वे कई बार भारत आ चुकी हैं और पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनकी दोस्ती लंबे समय तक चर्चा में रही। (Faiz Hameed Jail)

 

Faiz Hameed Jail: फैज हमीद और अरूसा आलम की दोस्ती

फैज हमीद जब आईएसआई चीफ के रूप में अपने करियर के सबसे ताकतवर दौर में थे, उसी समय अरूसा आलम के साथ उनकी मित्रता को लेकर बातें सामने आने लगीं। पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने बिना नाम लिए इस रिश्ते पर इशारे किए। सोशल मीडिया पर इस विषय पर कई पोस्ट वायरल हुए। हालांकि दोनों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं की।

विवाद की असली शुरुआत तब हुई जब 2021 में फैज हमीद की पत्नी द्वारा गोली चलाने की खबर सामने आई। हालांकि घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन कई पत्रकारों खासकर जियो टीवी के वरिष्ठ एंकर हामिद मीर ने अपने ट्वीट्स में इसका जिक्र किया। मीर ने कहा था कि अगर पत्रकारों पर दबाव डाला गया, तो “कुछ लोगों के घरों में हुए किस्से” बाहर आ जाएंगे। इसके बाद सोशल मीडिया पर फैज हमीद और अरूसा आलम का नाम तेजी से वायरल होने लगा। (Faiz Hameed Jail)

Faiz Hameed Jail: आईएसआई-मीडिया के बीच बढ़ा टकराव

उसी समय एक और घटना ने इस विवाद को हवा दी। हामिद मीर ने सेना की नीतियों पर आलोचना की थी, जिसके बाद उन पर दबाव बढ़ा और उनका शो बंद कर दिया गया। मीर ने सार्वजनिक मंच पर भाषण देते हुए साफ कहा था कि आईएसआई अधिकारियों को पत्रकारों के परिवारों को परेशान नहीं करना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि जिन लोगों के खुद के घर में मुद्दे हैं, वे दूसरों को धमकाने की कोशिश न करें।

इस बयान को पाकिस्तान के कई मीडिया समूहों ने फैज हमीद से जोड़कर देखा। हालांकि सेना की ओर से इसे खारिज किया गया, लेकिन सोशल मीडिया पर यह विषय लगातार चर्चा में बना रहा। (Faiz Hameed Jail)

अरूसा आलम का भारत कनेक्शन

अरूसा आलम का भारत आना-जाना, भारतीय नेताओं और कई सार्वजनिक हस्तियों के साथ उनके फोटो और पंजाब के राजनीतिक गलियारों में उनकी मौजूदगी हमेशा पाकिस्तान में बहस का विषय रहा है। कुछ वर्गों ने तो यह तक दावा किया कि भारत में उनकी मौजूदगी पाकिस्तान में उनकी आलोचना का एक कारण बनी।

जब फैज हमीद के साथ “निकटता” की अफवाहें फैलीं, तो पाकिस्तान में कई टीवी पैनल और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने इसे “क्रॉस-बॉर्डर एंगल” देकर सनसनी बढ़ाई। हालांकि कोई पुख्ता सबूत कभी सामने नहीं आए। (Faiz Hameed Jail)

सत्ता से जेल तक का सफर

फैज हमीद 2018–2021 के बीच पाकिस्तान की सत्ता संरचना के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल थे। उन्हें इमरान खान सरकार का मजबूत समर्थक माना जाता था। अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के समय काबुल के होटल में चाय पीते उन्होंने तस्वीर खिंचाई थी, जिसका मकसद को चिढ़ाना था।

लेकिन जैसे ही सेना की अंदरूनी राजनीति बदली, उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई। टॉप सिटी स्कैंडल, सत्ता दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितताओं जैसे आरोप सामने आए। 2025 में सैन्य अदालत ने उन्हें 14 साल की सजा दी। इस फैसले के बाद उनके पुराने निजी विवाद फिर चर्चा में आने लगे। (Faiz Hameed Jail)