📍नई दिल्ली | 26 Dec, 2025, 12:01 AM
Tactical RPA RFI: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना अब भविष्य की जंग के लिए खुद को एक नए स्तर पर तैयार कर रही है। सीमाओं पर बदलते खतरे, ड्रोन युद्ध की बढ़ती भूमिका और चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की बढ़ती हिमाकत को देखते हुए सेना ने एक अहम कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से टैक्टिकल रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (टैक आरपीए) यानी मॉडर्न मिलिट्री ड्रोन के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी की है।
आरएफआई के जरिए सेना यह जानना चाहती है कि भारत में कौन-कौन सी कंपनियां ऐसे एडवांस हथियारबंद ड्रोन बना सकती हैं, जो मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में हर हालात में काम कर सकें। (Tactical RPA RFI)
Tactical RPA RFI: सेना को चाहिए 20 टैक्टिकल आरपीए ड्रोन
जारी आरएफआई के तहत सेना लगभग 20 टैक्टिकल आरपीए ड्रोन शामिल करने की योजना बना रही है। यह पूरी खरीद मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत होगी। सेना की योजना के मुताबिक इनमें से 10 ड्रोन मैदानी इलाकों के लिए होंगे, जबकि 10 को खास तौर पर ऊंचाई वाले और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा। सेना की तैयारी है कि ये ड्रोन ऐसे होने चाहिए, जो पंजाब और राजस्थान जैसे मैदानी इलाकों से लेकर लद्दाख और अरुणाचल की ऊंची चोटियों तक, हर जगह काम कर सकें। सेना चाहती है कि ये ड्रोन दिन-रात, हर मौसम और हर हालात में उड़ान भर सकें। (Tactical RPA RFI)
सेना की इस पहल को हाल के समय में सीमाओं पर बदले हालात से जोड़कर देखा जा रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल और लाइन ऑफ कंट्रोल पर ड्रोन गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। इन ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन देश निगरानी से लेकर, हथियार गिराने और जासूसी में लगातार किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय सेना के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह सिर्फ जवाबी कार्रवाई न करे, बल्कि पहले से ही दुश्मन की हर चाल पर नजर रख सके। (Tactical RPA RFI)
Tactical RPA RFI: अपग्रेड करने का भी हो विकल्प
सेना के मुताबिक टैक्टिकल रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट एक मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म होगा, जो एक साथ कई काम कर सके। इसमें निगरानी, जासूसी, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और जरूरत पड़ने पर सीधे हमले की क्षमता भी होनी चाहिए। ड्रोन का डिजाइन मॉड्यूलर होना चाहिए, ताकि भविष्य में बिना पूरे सिस्टम को बदले नए सेंसर और हथियार जोड़े जा सकें। सेना चाहती है कि ये ड्रोन आने वाले 15–20 साल तक तकनीकी रूप से एडवांस बने रहें, ताकि उन्हें अपग्रेड भी किया जा सके। (Tactical RPA RFI)
Tactical RPA RFI: झेल सकें 60 नॉट्स तक की तेज हवा
सेना ने आरएफआई में साफ किया है कि ये ड्रोन दिन और रात दोनों समय काम करने में सक्षम होने चाहिए। खराब मौसम, तेज हवा, बारिश, अत्यधिक ठंड और गर्मी जैसे हालात में भी ये काम कर सकें। ऊंचाई वाले इलाकों में ऐसे ड्रोन चााहिए जो 60 नॉट्स तक की तेज हवा झेल सकें, जबकि मैदानी इलाकों में इस्तेमाल किए जाने वाले 30 नॉट्स तक की हवा में भी स्थिर उड़ान भर सकें। (Tactical RPA RFI)

Tactical RPA RFI: माइनस 40 डिग्री सेल्सियस में भी करे काम
तापमान को लेकर भी सेना ने मानक तय किए हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ड्रोन को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर प्लस 30 डिग्री सेल्सियस तक काम करना होगा। वहीं मैदानी इलाकों में यह सीमा माइनस 20 से लेकर प्लस 45 डिग्री सेल्सियस तक रखी गई है। इसका मतलब है कि इन ड्रोन को सियाचिन जैसी ठंडी जगह और राजस्थान जैसी गर्म जगह पर भी समान रूप से सक्षम होना होगा। (Tactical RPA RFI)
Tactical RPA RFI: रेंज 400 किलोमीटर तक
ड्रोनों की उड़ान क्षमता को लेकर सेना ने कड़े मानक तय किए हैं। ड्रोन को सामान्य रेडियो कंट्रोल यानी लाइन ऑफ साइट मोड में कम से कम 120 किलोमीटर तक काम करना होगा। वहीं अगर सैटेलाइट कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाए, तो इसकी रेंज 400 किलोमीटर या उससे अधिक होनी चाहिए। इससे सेना को दूर-दराज के इलाकों में भी निगरानी और ऑपरेशन करने की सुविधा मिलेगी। (Tactical RPA RFI)
Tactical RPA RFI: 8 घंटे लगातार हवा में रहें ड्रोन
इसके अलावा आरएफआई की शर्तों में ऊंचाई को लेकर सेना में स्टैंडर्ड तय किए हैं। मैदानी इलाकों के लिए ड्रोन को कम से कम 14,000 फीट की ऊंचाई तक काम करने में सक्षम होना होगा। वहीं ऊंचाई वाले इलाकों के लिए यह सीमा 24,000 फीट तक रखी गई है। इसके साथ ही ड्रोन में कम से कम 8 घंटे लगातार हवा में रहने की क्षमता भी होनी चाहिए। ताकि लंबे समय तक निगरानी और मिशन को अंजाम दिया जा सके। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
Tactical RPA RFI: रनवे पर निर्भरता नहीं
सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्रोन को उड़ाने के लिए लंबे और पक्के रनवे की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में ऐसी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए ड्रोन या तो सीधे ऊपर उठकर यानी वीटीओएल मोड में उड़ान भर सके, या फिर 200 मीटर की कच्ची पट्टी से टेकऑफ कर सके। साथ ही कुछ मामलों में कैटापल्ट लॉन्च और पैराशूट के जरिए लैंडिंग का भी फीचर होना चाहिए। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
50 किमी दूर से पहचानने की हो क्षमता
ड्रोन के सेंसर और पेलोड को लेकर भी सेना चाहती है कि ड्रोन में ऐसे कैमरे और सिस्टम लगाए जाएं, जो दिन और रात दोनों समय हाई-डेफिनिशन फोटो और वीडियो दे सकें। इसमें इलेक्ट्रो ऑप्टिक और इंफ्रारेड कैमरा, थर्मल सेंसर, और लेजर बेस्ड सिस्टम शामिल होंगे, जो अंधेरे, धुंध और खराब मौसम में भी दुश्मन की हलचल को पकड़ सकें। इनमें लेजर रेंज फाइंडर और लेजर डिजाइनटर भी होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर सटीक हमला किया जा सके।
इसके अलावा ड्रोन को इंसानों और वाहनों को 40-50 किलोमीटर दूर से पहचानने और करीब 15 किलोमीटर से साफ तौर पर पहचानने में सक्षम होना चाहिए। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
पकड़ सकें दुश्मन के सिग्नल
आरएफआई में यह भी कहा गया है कि यह ड्रोन सिर्फ देखने वाला नहीं होगा, बल्कि सुनने वाला भी होगा। इसमें ईएलआईएनटी और कॉमइंट सिस्टम लगाए जाएंगे, जो दुश्मन के रेडियो, मोबाइल, रडार और कम्युनिकेशन सिग्नल को पकड़ सकें। सेना चाहती है कि ड्रोन 100 किलोमीटर दूर से भी ऐसे सिग्नल पकड़ सके। इससे दुश्मन की गतिविधियों की पहले से जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा ड्रोन में एफओपीईएन रडार भी होना चाहिए, जो जंगलों के अंदर छिपे टारगेट्स, बर्फीले इलाकों और पहाड़ी ढलानों पर मौजूद गतिविधियों को भी आसानी से पहचान सके। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
जैमिंग और जीपीएस फेल होने पर भी उड़ान भरें ड्रोन
आज की जंग में दुश्मन सबसे पहले जीपीएस जैमिंग और साइबर अटैक करता है। सेना इसलिए चाहती है कि ड्रोन सिर्फ जीपीएस पर निर्भर न रहे। ड्रोन को जीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो और नाविक, चारों सिस्टम इस्तेमाल करने होंगे। अगर फिर भी जीपीएस सिग्नल खत्म हो जाए, तो ड्रोन आईएनएस, आईएमयू और विजुअल नेविगेशन से उड़ान जारी रख सके। वहीं, अगर हालात बहुत खराब हों, तो ड्रोन अपने आप सुरक्षित तरीके से वापस बेस पर लौट आए। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
Tactical RPA RFI: हथियार भी ढो सकें ड्रोन
इन ड्रोनों को केवल निगरानी तक के लिए सीमित नहीं रखा गया है। सेना चाहती है कि यह ड्रोन 200 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम हो। इसमें एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, प्रिसिजन ग्लाइड बम, एंटी-टैंक हथियार और लॉइटरिंग म्यूनिशन शामिल हैं। यानी जरूरत पड़ने पर यह ड्रोन दुश्मन पर सीधा हमला भी कर सकेगा। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
डेटा सुरक्षा सबसे अहम
आरएफआई में कहा गया है कि ड्रोन से मिलने वाला सारा डेटा बेहद संवेदनशील होगा। इसलिए सेना ने साफ कहा है कि सारा डेटा 256-बिट एईएस एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होना चाहिए। अगर किसी कारण से ड्रोन गिर जाए या दुश्मन के हाथ लग जाए, तो उसमें मौजूद डेटा अपने आप नष्ट हो जाना चाहिए।
भारतीय सिस्टम से हो सके कनेक्ट
आरएफआई के मुताबिक यह ड्रोन भारतीय सेना के मौजूदा कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस सिस्टम से कनेक्ट होना चाहिए। ताकि लाइव वीडियो और डेटा सीधे कमांड सेंटर तक पहुंचता रहे। इसे सेना के काउंटर-ड्रोन सिस्टम के साथ भी इंटीग्रेट किया जाएगा, ताकि पूरे बैटलफील्ड की एक साझा तस्वीर मिल सके। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता
आरएफआई में कहा गया इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। आरएफआई के अनुसार, इसमें सिर्फ भारतीय कंपनियां या भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करने वाली विदेशी कंपनियां ही हिस्सा ले सकती हैं। कंपनियों से यह भी पूछा गया है कि ड्रोन में कितने प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा और भविष्य में मेंटेनेंस और सपोर्ट की व्यवस्था कैसे की जाएगी। इसके साथ ही कंपनियां यह भी बताएं कि भविष्य में किन-किन हिस्सों को और ज्यादा स्वदेशी बनाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि सिर्फ ड्रोन खरीदे न जाएं, बल्कि देश में ही पूरा ड्रोन इकोसिस्टम तैयार किया जाए। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)
Tactical RPA RFI: 18 मार्च 2026 तक का समय
रक्षा मंत्रालय ने आरएफआई का जवाब देने के लिए कंपनियों को 18 मार्च 2026 तक का समय दिया है। सके बाद सेना सभी जवाबों का अध्ययन करेगी, तकनीकी जरूरतें तय करेगी और फिर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा। (TACTICAL REMOTELY PILOTED AIRCRAFTS)


