📍नई दिल्ली/मिजोरम | 20 Dec, 2025, 10:06 PM
Indian Army New Bases: बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों में बदलते हालात और घुसपैठ के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने बड़ी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीते कुछ महीनों में सेना ने पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में तीन नए सैन्य ठिकाने बनाए हैं। वहीं अब मिजोरम में चौथा मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी चल रही है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और कट्टरपंथी गतिविधियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
सेना के सूत्रों के अनुसार, आने वाले सालों में भारत-बांग्लादेश-म्यांमार सीमा से सटे इलाकों में सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा। सेना की इस रणनीति का मकसद केवल घुसपैठ रोकना नहीं है, बल्कि किसी भी तरह की अस्थिरता या बाहरी खतरे से निपटने की पहले ही तैयारी रखना है।
Indian Army New Bases: मिजोरम में क्यों जरूरी है नया मिलिट्री बेस
भारतीय सेना ने मिजोरम में दो जगहों परवा और सिलसुरी को नए मिलिट्री बेस के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। ये दोनों इलाके बेहद संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि यहां भारत, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाएं एक-दूसरे के बेहद सटी हुई हैं।
यह इलाका लंबे समय से तस्करी, अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा है। हाल के सालों में यहां ड्रग्स, हथियार और नकली सामान की तस्करी की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। सेना का मानना है कि अगर इस इलाके में स्थायी और मजबूत मिलिट्री स्ट्रक्चर खड़ा किया जाता है, तो सुरक्षा एजेंसियों को कार्रवाई करने में आसानी होगी।
अगले पांच सालों में ये है बड़ा प्लान
सेना की तैयारी केवल एक बेस बनाने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि अगले पांच सालों में इस इलाके में बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। इसमें दर्जनों आधुनिक बंकर, आर्टिफिशियल एम्बैंकमेंट्स, ब्लास्ट-प्रूफ शेल्टर और भूमिगत हथियार भंडार बनाए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक, करीब 45 सेट ऐसे स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे, ताकि जवानों को हर मौसम और हर स्थिति में सुरक्षित ठहरने और ऑपरेशन चलाने की सुविधा मिल सके। इन ठिकानों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जवाबी कार्रवाई की जा सके।
पहले से एक्टिव तीन नए ठिकाने
मिजोरम से पहले भारतीय सेना पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में तीन नए ऑपरेशनल बेस पहले ही बना चुकी है। इन इलाकों को खासतौर पर इसलिए चुना गया, क्योंकि यहां से बांग्लादेश की सीमा बेहद करीब है और अतीत में यहां से अवैध गतिविधियों की खबरें आती रही हैं।
इन ठिकानों का मकसद सीमावर्ती इलाकों में स्थायी मौजूदगी बढ़ाना और स्थानीय सुरक्षा बलों के साथ बेहतर तालमेल बनाना है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि अब सुरक्षा केवल पेट्रोलिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रियल-टाइम निगरानी और तुरंत कार्रवाई पर जोर होगा।
परवा में कमांडर का दौरा
इसी रणनीति के तहत हाल ही में भारतीय सेना की पूर्वी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने मिजोरम के परवा इलाके का दौरा किया। उनके साथ कई वरिष्ठ सैन्य अफसर भी मौजूद थे।
इस दौरे के दौरान उन्होंने स्पीयर कॉर्प्स के तहत आने वाले असम राइफल्स और बीएसएफ के कंपनी ऑपरेटिंग बेस का निरीक्षण किया। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा सुरक्षा हालात की समीक्षा की और जवानों से सीधे बातचीत भी की।
लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी ने जवानों की दृढ़ता, धैर्य और उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी की खुले तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवान बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका सबसे अहम होती है।
लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी ने अपने दौरे के दौरान राज्य प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना और सिविल प्रशासन के बीच तालमेल से ही ऐसे बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो पाते हैं।
उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि सेना उनकी सुरक्षा, सुविधाओं और संसाधनों को प्राथमिकता दे रही है, ताकि वे पूरी क्षमता के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर सकें।
त्रिपुरा के बेलोनिया का दौरा
इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया में स्थित सीमा चौकी का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने भारत–बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। आर्मी कमांडर ने फारवर्ड इलाकों में तैनात जवानों से बातचीत की और जमीनी हालात की जानकारी ली। उन्होंने भारतीय सेना, असम राइफल्स और बीएसएफ के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि सभी बल पूरी तरह सतर्क हैं और उनकी ऑपरेशनल तैयारी उच्च स्तर की है।
असम में नया सैन्य स्टेशन
पूर्वी कमान के तहत असम में भी बड़े स्तर पर सैन्य ढांचा तैयार किया जा रहा है। नवंबर 2025 में लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी ने धुबरी में नए लाचित बरफूकन मिलिट्री स्टेशन की आधारशिला रखी थी।
यह स्टेशन ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है और इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है। धुबरी न केवल बांग्लादेश की सीमा के करीब है, बल्कि भूटान से भी यह काफी नजदीक है। यह स्टेशन लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और प्रशासनिक जरूरतों का बड़ा केंद्र बनेगा।
सेना के अनुसार, यह नया स्टेशन पूर्वोत्तर भारत में मिलिट्री ऑपरेशन को और ज्यादा मजबूत करेगा और जरूरत पड़ने पर तेजी से बलों की तैनाती भी की जा सकेगी।
सेना के इन सभी कदमों के पीछे एक बड़ा वजह सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी है, जिसे आमतौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है। यह केवल 22 किलोमीटर चौड़ा इलाका है, जो भारत के मुख्य भूभाग को उसके आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
अगर इस कॉरिडोर के आसपास किसी भी तरह की अस्थिरता पैदा होती है, तो पूरे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सेना अब इस पूरे क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह रणनीति केवल प्रतिक्रिया भर नहीं है, बल्कि एक लंबी अवधि की तैयारी का हिस्सा है। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल, सीमापार तस्करी और कट्टरपंथी नेटवर्क की सक्रियता को देखते हुए भारत किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता।
नई मिलिट्री कैंटोनमेंट्स, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमावर्ती बलों के साथ तालमेल, ये सभी संकेत देते हैं कि भारत अब सीमा सुरक्षा को लेकर और ज्यादा सक्रिय और सतर्क रुख अपना रहा है।


