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Bharat Rice: राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान; सेना के लिए खुलेंगे FCI के गोदाम, ऑपरेशन सिंदूर से मिली लॉजिस्टिक्स की सीख

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में सैनिकों के स्वास्थ्य, मनोबल, भोजन की गुणवत्ता और दुर्गम इलाकों में समय पर सप्लाई पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया...

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📍नई दिल्ली | 12 Oct, 2026, 12:25 PM

Indian Army FCI Partnership: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियार और सैन्य तकनीक ही निर्णायक नहीं होते, बल्कि सैनिकों तक सही समय पर राशन, जरूरी सामान और अन्य संसाधन पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘भारत राइस’ की लॉन्चिंग को भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बीच रणनीतिक लॉजिस्टिक्स साझेदारी को राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया। इस पहल का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर एफसीआई के गोदामों, भंडारण सुविधाओं और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल सेना की जरूरतों के लिए करना है।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में सैनिकों के स्वास्थ्य, मनोबल, भोजन की गुणवत्ता और दुर्गम इलाकों में समय पर सप्लाई पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात जवानों को यह भरोसा होना चाहिए कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

Indian Army FCI Partnership: देश में कई जगहों पर एफसीआई के गोदाम

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना और एफसीआई के बीच यह सहयोग केवल प्रशासनिक समझौता नहीं है। इसे देश में पहले से मौजूद संसाधनों का राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहतर इस्तेमाल करने की पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।

एफसीआई के पास देश के अलग-अलग हिस्सों में गोदाम, भंडारण सुविधाएं, अनाज संभालने के उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। इनमें से कुछ सुविधाएं ऐसे क्षेत्रों के नजदीक भी हैं, जो सैन्य अभियानों और सप्लाई सिस्टम के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

राजनाथ सिंह के अनुसार, आपात स्थिति या ऑपरेशनल जरूरत के समय भारतीय सेना इन निर्धारित भंडारण सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेगी। इससे सेना की सप्लाई व्यवस्था को सहयोग मिलेगा और पहले से उपलब्ध राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

उन्होंने इस पहल को सरकार, सेना, नागरिक प्रशासन और अन्य संस्थानों के बीच तालमेल का उदाहरण बताया। (Indian Army FCI Partnership)

आधुनिक युद्ध में लॉजिस्टिक्स भी लड़ने की ताकत

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “लॉजिस्टिक्स खुद एक कॉम्बैट पावर है।” इसका मतलब है कि युद्ध में सैनिकों और हथियारों की क्षमता के साथ-साथ उन्हें लगातार जरूरी सामान उपलब्ध कराना भी बेहद जरूरी है।

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आधुनिक युद्ध केवल सीमा पर तैनात सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं रहता। इसके पीछे मजबूत सप्लाई चेन, भंडारण व्यवस्था, परिवहन नेटवर्क और समय पर संसाधनों की भरपाई करने की क्षमता भी काम करती है।

रक्षा मंत्री ने लॉजिस्टिक्स की तुलना सेना की ब्लड वेसल्स से करते हुए समझाया कि जैसे शरीर में रक्त का लगातार प्रवाह जरूरी है, उसी तरह सेना तक जरूरी सामान का सुरक्षित और लगातार पहुंचना भी आवश्यक है।

अगर किसी सैन्य अभियान के दौरान राशन, ईंधन, उपकरण या अन्य जरूरी सामग्री की सप्लाई बाधित हो जाए, तो लंबे समय तक अभियान चलाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सेना की ऑपरेशनल तैयारी में लॉजिस्टिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। (Indian Army FCI Partnership)

Indian Army FCI Partnership
Indian Army launches ‘Bharat Rice’ for troops in the presence of Raksha Mantri and Minister of Consumer Affairs, Food & Public Distribution. (Photo: MoD)

ऑपरेशन सिंदूर से मिली तैयारी की सीख

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सुरक्षा माहौल में किसी संघर्ष से पहले चेतावनी मिलने का समय बहुत कम हो सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में सेना को कम समय में कार्रवाई के लिए तैयार रहना पड़ता है। इसके लिए केवल आधुनिक हथियार होना काफी नहीं है। सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी लंबे समय तक काम करने में सक्षम होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप के बीच भारत को अपनी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा, ताकि सेना जरूरत के समय प्रभावी तरीके से अभियान चला सके।

इस संदर्भ में एफसीआई के गोदाम और परिवहन से जुड़े संसाधनों का इस्तेमाल सेना की तैयारियों को अतिरिक्त सपोर्ट दे सकता है। (Indian Army FCI Partnership)

सैनिकों के भोजन और स्वास्थ्य पर विशेष जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिकों की ऑपरेशनल तैयारी केवल उनके हथियारों, वर्दी और ट्रेनिंग से तय नहीं होती। उनके शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, मनोबल और सहनशक्ति का भी इसमें बड़ा योगदान होता है।

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उन्होंने कारगिल की बर्फीली ऊंचाइयों और राजस्थान के गर्म रेगिस्तानी इलाकों में तैनात जवानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सैनिक कठिन हालात में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। ऐसे में उन्हें अच्छी गुणवत्ता का भोजन, बेहतर उपकरण और जरूरी सुविधाएं मिलना आवश्यक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों के कल्याण को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। जब जवानों को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, तो उनका मनोबल मजबूत होता है और वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहते हैं। (Indian Army FCI Partnership)

सेना को हर साल चाहिए करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन चावल

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की खाद्य जरूरतों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सेना की सालाना चावल की जरूरत लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन है।

इतनी बड़ी मात्रा में चावल उपलब्ध कराने के लिए केवल खरीद करना पर्याप्त नहीं है। अनाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, उसकी उचित पैकेजिंग करना और समय पर संबंधित स्थानों तक पहुंचाना भी जरूरी है।

खासकर दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक राशन पहुंचाने में परिवहन, मौसम और भंडारण से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में बेहतर पैकेजिंग और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था सैनिकों को निर्धारित गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों से मिलने वाले फीडबैक और अलग-अलग संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद इस पहल को आगे बढ़ाया गया है। (Indian Army FCI Partnership)

नागरिक संसाधनों का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा में

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में मौजूद कई संसाधनों का उपयोग सामान्य नागरिक जरूरतों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और हाईवे केवल नागरिक यातायात के लिए नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ राजमार्ग सैन्य विमानों के उतरने और ऑपरेशन के वैकल्पिक स्थान के तौर पर भी काम कर सकते हैं।

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इसी तरह एफसीआई के गोदाम और भंडारण सुविधाएं सामान्य दिनों में खाद्यान्न की व्यवस्था संभालती हैं, जबकि ऑपरेशनल जरूरत के समय इन्हें सेना की सप्लाई चेन से जोड़ा जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने इस व्यवस्था को संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी मजबूत करने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की साझेदारी से अलग-अलग संस्थानों की क्षमताएं एक साझा उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। (Indian Army FCI Partnership)

सैनिकों के कल्याण में पूरे देश की भूमिका

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों के कल्याण की जिम्मेदारी केवल रक्षा मंत्रालय या सेना तक सीमित नहीं है। इसमें किसान, सहकारी क्षेत्र, नागरिक प्रशासन और देश के दूसरे संस्थानों की भी भूमिका है।

उन्होंने किसानों और सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान देश का पेट भरते हैं, जबकि सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। दोनों के काम अलग हैं, लेकिन उनका उद्देश्य राष्ट्र को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थानों की क्षमताएं जब एक साझा लक्ष्य के लिए साथ आती हैं, तो उनका प्रभाव बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों को बेहतर गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराने, सप्लाई चेन को तेज बनाने और अग्रिम क्षेत्रों तक जरूरी सामग्री की भरोसेमंद डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए नवाचार और आपसी समन्वय जरूरी है। (Indian Army FCI Partnership)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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