📍नई दिल्ली | 11 Oct, 2026, 5:02 PM
IAF Apache Helicopter Grounding: अमेरिकी सेना के एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों में इम्प्रूव्ड ड्राइव सिस्टम (आईडीएस) से जुड़ी संभावित तकनीकी खराबी सामने आने के बाद इस बेड़े की उड़ानों पर अस्थायी रोक लगा दी थी। जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने भी अपने अपाचे हेलीकॉप्टरों को एहतियातन ग्राउंड कर दिया था। वहीं, हाल ही में भारतीय वायुसेना ने भी अपने अपाचे हेलीकॉप्टरों को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दी है।
IAF Apache Helicopter Grounding: भारतीय वायुसेना ने भी की जांच
वायुसेना के वरिष्ठ सूत्रों ने रक्षा समाचार को बताया, अमेरिकी अपाचे बेड़े से जुड़ी तकनीकी चिंताओं के बाद भारतीय वायुसेना ने भी अपने अपाचे हेलीकॉप्टर बड़े की उड़ानें रोककर जांच कराई थी। करीब एक पिछले हफ्ते तक चली जांच के बाद हाल ही में 9 अक्टूबर को इन्हें उड़ान की अनुमति दी गई।
भारत ने अपनी वायुसेना के लिए 22 एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे थे। इनकी डिलीवरी 2019 में शुरू हुई थी। ये हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना की आक्रामक और नजदीकी एयर सपोर्ट संबंधी क्षमताओं का हिस्सा हैं। ये हेलीकॉप्टर पठानकोट स्थित 125 हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन सहित वायुसेना के जोरहाट में तैनात हैं।
भारतीय वायुसेना के अपाचे हेलीकॉप्टरों को लद्दाख और पश्चिमी सेक्टर में सैन्य जरूरतों के मुताबिक तैनात किया जाता है। इनका इस्तेमाल आर्मर्ड व्हीकल्स के खिलाफ हमले, जमीनी सैनिकों को हवाई सहायता और कठिन इलाकों में सैन्य अभियानों के दौरान किया जा सकता है। (IAF Apache Helicopter Grounding)
वीर गार्जियन और तरंग शक्ति में नहीं दिखे अपाचे
सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के अपाचे हेलीकॉप्टरों ने हाल के कुछ प्रमुख अभ्यासों में हिस्सा नहीं लिया। इनमें वीर गार्जियन 2026 और तरंग शक्ति 2026 शामिल हैं।
इससे पहले अगस्त 2026 में वायुसेना के अपाचे हेलीकॉप्टर एक्सरसाइज रोटर क्लैप-3 में शामिल हुए थे। यह अभ्यास राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था। इसका मुख्य फोकस काउंटर-यूएएस यानी दुश्मन के ड्रोन और दूसरे मानवरहित हवाई सिस्टम का पता लगाने तथा उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता पर था।
इस अभ्यास में अपाचे के साथ प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, एमआई-25/35, रुद्र, एमआई-17, चिनूक और ध्रुव जैसे हेलीकॉप्टर भी शामिल हुए थे। अभ्यास में लाइव फायरिंग के जरिए हथियारों और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच की गई थी।
वहीं, इस साल 27 फरवरी को पोखरण में आयोजित वायु शक्ति अभ्यास में भी अपाचे ने हिस्सा लिया था। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने विभिन्न हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों की मदद से अपनी फायरपावर क्षमता का प्रदर्शन किया था। (IAF Apache Helicopter Grounding)
थल सेना के अपाचे युद्ध अभ्यास में हुए शामिल
भारतीय वायुसेना के अपाचे हेलीकॉप्टरों की जांच के बीच भारतीय थल सेना के एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिका के साथ युद्ध अभ्यास 2026 में शामिल हुए। यह भारत और अमेरिका के बीच आयोजित 22वां द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास था, जो 9 सितंबर से 28 सितंबर तक चला था।
यह अभ्यास उत्तराखंड के औली और राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया। औली में ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में युद्ध की ट्रेनिंग पर ध्यान दिया गया, जबकि महाजन में रेगिस्तानी क्षेत्र में सैन्य अभियान और लंबी दूरी की फायरिंग का अभ्यास किया गया।
इस अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैनिकों ने हिस्सा लिया। भारतीय थल सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर भी इसका हिस्सा रहे। थल सेना के पास छह एएच-64ई अपाचे हैं, जिनकी डिलीवरी दिसंबर 2025 में पूरी हुई थी। ये हेलीकॉप्टर जोधपुर स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं। (IAF Apache Helicopter Grounding)
अमेरिकी सेना ने रोकी थीं अपाचे की उड़ानें?
अमेरिकी सेना ने 2 अक्टूबर को स्टेटमेंट जारी करके बताया था कि एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों में इस्तेमाल होने वाले इम्प्रूव्ड ड्राइव सिस्टम के मेन ट्रांसमिशन में संभावित खराबी सामने आने के बाद उड़ानों पर अस्थायी रोक लगाई है। अमेरिकी सेना ने इस फैसले के पीछे पहले जारी किए गए उड़ान सुरक्षा निर्देशों, रखरखाव रिपोर्टों, निरीक्षण के नतीजों और इंजीनियरिंग विश्लेषण का हवाला दिया था।
करीब 400 अपाचे हेलीकॉप्टरों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, अमेरिकी सेना ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया था कि कुल कितने हेलीकॉप्टरों की उड़ानें रोकी गईं और सभी विमानों को दोबारा उड़ान की अनुमति कब मिलेगी।
अपाचे अमेरिकी सेना के प्रमुख अटैक हेलीकॉप्टरों में शामिल है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और अन्य सैन्य ठिकानों के खिलाफ किया जाता है। (IAF Apache Helicopter Grounding)
क्या है अपाचे का इम्प्रूव्ड ड्राइव सिस्टम?
एएच-64ई अपाचे में दो जनरल इलेक्ट्रिक टी700-जीई-701डी इंजन लगे होते हैं। इन इंजनों से पैदा होने वाली ताकत को ट्रांसमिशन सिस्टम के जरिए मुख्य रोटर तक पहुंचाया जाता है। मुख्य रोटर हेलीकॉप्टर को हवा में उठाने और उड़ान बनाए रखने में मदद करता है, जबकि टेल रोटर उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर की दिशा और संतुलन नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इम्प्रूव्ड ड्राइव सिस्टम इस पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसमें किसी तरह की गंभीर खराबी आने पर हेलीकॉप्टर के दूसरे जरूरी सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं।
मई 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना के एक आंतरिक सुरक्षा दस्तावेज में आईडीएस मेन ट्रांसमिशन के कुछ हिस्सों में संभावित आंतरिक खराबी की आशंका जताई गई थी। इस खराबी से एक्सेसरी गियरबॉक्स की ड्राइव प्रभावित होने का खतरा बताया गया था। इसका असर टेल रोटर के थ्रस्ट, इलेक्ट्रिकल पावर और हाइड्रोलिक सिस्टम पर पड़ सकता है।
यदि टेल रोटर तक जरूरी पावर पहुंचने में समस्या आती है, तो हेलीकॉप्टर के लिए दिशा पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसी तरह हाइड्रोलिक और इलेक्ट्रिकल सिस्टम प्रभावित होने से फ्लाइट कंट्रोल और दूसरे जरूरी उपकरणों के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। (IAF Apache Helicopter Grounding)
अगस्त में दुर्घटना के बाद भी रोकी गई थीं उड़ानें
अमेरिकी अपाचे बेड़े को 2026 में तकनीकी जांच और दुर्घटनाओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 12 अगस्त को टेक्सास के फोर्ट हूड के पास एक एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में चालक दल के दोनों सदस्यों की मौत हो गई थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने लगभग एक सप्ताह तक अपाचे की ट्रेनिंग उड़ानों पर रोक लगाई थी।
मार्च 2026 में अलबामा के फोर्ट रकर में ट्रेनिंग के दौरान एक एएच-64ई दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें चालक दल के दो सदस्य घायल हो गए थे। अप्रैल में अलबामा में रखरखाव से जुड़ी समस्या के कारण एक अपाचे को एहतियातन उतारा गया था। मई में दक्षिण कोरिया के सियोल से करीब 40 मील दक्षिण में एक अपाचे ने धान के खेत में एहतियाती लैंडिंग की थी।
भारतीय थल सेना, भारतीय वायुसेना और अमेरिकी सेना के एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर मूल रूप से एक ही मॉडल के हैं। तीनों सेनाएं बोइंग के एएच-64ई अपाचे गार्डियन वर्जन का इस्तेमाल करती हैं। यह अपाचे हेलीकॉप्टर का आधुनिक संस्करण है, जिसे दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। (IAF Apache Helicopter Grounding)
सेना, वायुसेना और यूएस आर्मी के अपाचे एक जैसे
इन हेलीकॉप्टरों में कई प्रमुख सिस्टम समान हैं। इनमें दो टी700-जीई-701डी टर्बोशाफ्ट इंजन, कंपोजिट रोटर ब्लेड और बेहतर ट्रांसमिशन सिस्टम शामिल हैं। हथियारों में 30 एमएम की चेन गन, हेलफायर मिसाइलों, 70 मिमी हाइड्रा रॉकेट और हवा से हवा में मार करने वाली स्टिंगर मिसाइलें शामिल हैं। ये हथियार एंटी-टैंक मिशन और जमीनी टारगेट्स पर हमलों में इस्तेमाल होते हैं।
अपाचे में आधुनिक सेंसर, नाइट-विजन और डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम भी मौजूद हैं। जबकि कुछ हेलीकॉप्टरों में लॉन्गबो फायर कंट्रोल रडार लगाया गया है, जो टारगेट की पहचान और हथियारों के इस्तेमाल में मदद करता है।
इसकी एक महत्वपूर्ण खूबी एमयूएम-टी (मैनड-अनमैनड टीमिंग) है। इसके जरिए हेलीकॉप्टर चालक दल मानवरहित विमानों यानी ड्रोन से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल कर सकता है।
बता दें कि अपाचे हेलीकॉप्टर को मूल रूप से ह्यूजेस हेलीकॉप्टर्स ने डिजाइन किया था। बाद में इसका निर्माण मैकडॉनेल डगलस के पास गया और 1997 में कंपनी के बोइंग में विलय के बाद इसका निर्माण तथा अपग्रेड बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सिक्योरिटी के तहत किया जाने लगा। भारतीय वायुसेना और थल सेना दोनों के पास इसका एएच-64ई वर्जन है। (IAF Apache Helicopter Grounding)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





