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Op Sindoor Gallantry Awards: भारतीय वायु सेना को 26 साल बाद मिलेगा सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों का होगा सम्मान

26 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान एयर मार्शल विनोद पाटनी और दो सेना के अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल हरि मोहन खन्ना और लेफ्टिनेंट जनरल अमरजीत सिंह कालकाट को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था...

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📍नई दिल्ली | 14 Aug, 2025, 2:39 PM

Op Sindoor Gallantry Awards: इस स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के लिए वायुसेना के चार और दो सेना के अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (Sarvottam Yudh Seva Medal – SYSM) से सम्मानित किया जाएगा। यह वॉर टाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार, पीस टाइम में दिए जाने वाले परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) के बराबर माना जाता है। यह सम्मान उन अफसरों को दिया जाएगा, जिन्होंने युद्ध के समय असाधारण सेवा और नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। इससे पहले 26 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान एयर मार्शल विनोद पाटनी और दो सेना के अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल हरि मोहन खन्ना और लेफ्टिनेंट जनरल अमरजीत सिंह कालकाट को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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Op Sindoor Gallantry Awards: ऑपरेशन सिंदूर में किया शानदार प्रदर्शन

सूत्रों के अनुसार, यह सम्मान सीधे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। 7 से 10 मई 2025 के बीच हुए इस संघर्ष में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों, एयरबेस और शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी थी, लेकिन भारतीय वायुसेना की एयर डिफेंस शील्ड ने इन्हें नाकाम कर दिया। इस ऑपरेशन में वायुसेना ने न केवल दुश्मन के हमलों को विफल किया बल्कि कई रणनीतिक लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक भेदा। वायुसेना के जिन चार अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने युद्ध के इस निर्णायक दौर में नेतृत्व और सूझबूझ का शानदार प्रदर्शन किया।

Op Sindoor Gallantry Awards: कब मिलते हैं गैलेंट्री और विशिष्ट पुरस्कार

भारत में हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर गैलेंट्री अवॉर्ड (Gallantry Awards) की घोषणा होती है। गैलेंट्री अवॉर्ड का उद्देश्य युद्ध या शांति काल में असाधारण साहस और वीरता का सम्मान करना होता है। वॉर टाइम गैलेंट्री अवॉर्ड में परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र शामिल हैं, जो युद्धकाल में वीरता के लिए दिए जाते हैं। शांति काल में अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र प्रदान किए जाते हैं।

वहीं, विशिष्ट अवॉर्ड दो तरह के होते हैं, युद्धकाल के लिए YSM सीरीज (सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल) और शांति काल के लिए VSM सीरीज (परम विशिष्ट सेवा मेडल, अतिविशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल)। ऑपरेशन सिंदूर में गैलेंट्री और विशिष्ट दोनों तरह के पुरस्कारों के एलान होने की संभावना है।

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Op Sindoor Gallantry Awards: इन्हें मिलेगा सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल 

ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी और नेतृत्व का शानदार प्रदर्शन करने वाले सात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को इस बार सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया जाएगा। यह वॉर-टाइम डिस्टिंग्विश्ड सर्विस अवॉर्ड है, जो किसी ऑपरेशन के दौरान बेहतरीन नेतृत्व और रणनीतिक योगदान के लिए दिया जाता है।

सम्मान पाने वालों में सबसे पहले हैं लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, जो उत्तरी कमान (Northern Command) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्तरी सीमाओं पर सेना की कमान संभाल रहे थे। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) को भी यह अवॉर्ड मिलेगा, जिन्होंने पूरे ऑपरेशन की योजना और कॉर्डिनेशन में अहम भूमिका निभाई।

वायुसेना से यह सम्मान पाने वालों में शामिल हैं एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ; एयर मार्शल नागेश कपूर, सदर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ; एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ; और एयर मार्शल ए.के. भारती, डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस।

Op Sindoor Gallantry Awards: कारगिल युद्ध में वॉर टाइम अवॉर्ड

कारगिल युद्ध 1999 में भारत के सैन्य इतिहास में साहस और बलिदान की मिसाल बना। उस युद्ध में चार सैनिकों को परमवीर चक्र, नौ को महावीर चक्र और 55 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, एयर मार्शल विनोद पाटनी और दो सेना के अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, छह को उत्तम युद्ध सेवा मेडल और आठ को युद्ध सेवा मेडल मिला। कारगिल के बाद, 2021 में गलवान घाटी में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। इसके बाद यह पहला मौका है जब फिर से वॉर टाइम विशिष्ट सेवा अवॉर्ड दिया जा रहा है।

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पहलगाम हमले के लिया था बदला

ऑपरेशन सिंदूर 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को शुरू हुआ था, जो 10 मई तक चला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। हमलावरों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, उनके नाम और धर्म पूछकर क्रूरता की सारी हदें पार की थीं। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के शामिल होने की बात कही थी।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हवाई, जमीनी और समुद्री मोर्चों पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। इस दौरान, वायुसेना ने अपने एम्ब्राएर नेत्रा AWACS, सुखोई-30, मिग-29 और तेजस लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पहला मौका था जब तीनों सेनाओं ने एक साथ इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। 6-7 मई 2025 की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर मुख्यालय, लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके आधार और मुजफ्फराबाद व कोटली के आतंकी शिविर शामिल थे।

हमले में भारतीय वायु सेना ने SCALP क्रूज मिसाइल, हैमर प्रिसिजन-गाइडेड बम और लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया। ये हमले पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र से किए गए, और वायु सेना के विमानों ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया, और कार्रवाई में सटीकता और संयम का परिचय दिया।

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी शुरू की। 10 मई 2025 को भारतीय हमलों ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस और सरगोधा शामिल थे। भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की। यह युद्धविराम भारत की शर्तों पर हुआ, और प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।

अवॉर्ड देने की क्या है प्रक्रिया

अवार्ड की घोषणा राष्ट्रपति भवन से होती है, जहां सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर भारत के राष्ट्रपति इन सम्मानों की स्वीकृति देते हैं। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस की परेड में इन्हें औपचारिक रूप से प्रदान किया जाता है। वॉर टाइम अवॉर्ड का चयन एक बेहद गोपनीय और सख्त प्रक्रिया से गुजरता है। इसमें ऑपरेशन के दौरान संबंधित अफसरों और जवानों के योगदान, नेतृत्व क्षमता, मिशन के नतीजे और उनके साहसिक फैसलों को ध्यान में रखा जाता है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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