📍नई दिल्ली | 13 Apr, 2026, 12:22 PM
GE-IAF F404 Engine Depot: अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस ने भारतीय वायुसेना के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत देश में ही एफ-404 इंजन के लिए डिपो फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। यह वही इंजन है जो तेजस एलसीए फाइटर जेट में इस्तेमाल किया जाता है। इस फैसिलिटी के बनने के बाद भारत को इंजन की मरम्मत और ओवरहॉल के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।
GE-IAF F404 Engine Depot: क्या है नया समझौता
इस समझौते के तहत देश में एफ-404-आईएन20 इंजन के लिए एक इन-कंट्री डिपो तैयार किया जाएगा। इस डिपो को ऑपरेट और मेंटेन भारतीय वायुसेना करेगी। इसमें जीई एरोस्पेस तकनीकी सहयोग देगा, जिसमें ट्रेनिंग, सपोर्ट स्टाफ, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और विशेष उपकरण शामिल होंगे।
इसका मकसद यह है कि तेजस फ्लीट के इंजनों को समय पर रिपेयर और मेंटेनेंस मिल सके और विमान ज्यादा समय तक ऑपरेशनल रहें।
एफ-404-आईएन20 इंजन भारतीय वायुसेना के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके1 और एमके1ए वेरिएंट में इस्तेमाल होता है। अभी तक जब भी इंजन में बड़ी मरम्मत की जरूरत होती थी, तो उसे विदेश भेजना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था, जिससे कई बार विमान लंबे समय तक ग्राउंडेड रहते थे। अब देश में ही डिपो बनने से यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी और इंजनों की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी। (GE-IAF F404 Engine Depot)
यह डिपो पूरी तरह भारत में बनाया जाएगा और इसका ऑपरेशन भारतीय वायुसेना करेगी। जीई एरोस्पेस इस फैसिलिटी को तकनीकी रूप से सपोर्ट करेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग भी देगी, साथ ही जरूरी उपकरण उपलब्ध कराएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी मरम्मत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो। इसके अलावा कंपनी स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई में भी मदद करेगी, ताकि रिपेयर का काम बिना रुकावट चलता रहे।
जीई एरोस्पेस ने भारत में पहले भी कई स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाए हैं, जिनमें हजारों लोगों को मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई है। इस नई फैसिलिटी के जरिए भी स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। (GE-IAF F404 Engine Depot)
इस फैसिलिटी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इंजन रिपेयर में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। पहले इंजन को विदेश भेजने, वहां जांच और मरम्मत कराने और फिर वापस लाने में लंबा समय लगता था। अब यह पूरा काम भारत में ही हो सकेगा, जिससे टर्नअराउंड टाइम कम होगा। इसका सीधा असर यह होगा कि ज्यादा से ज्यादा तेजस विमान ऑपरेशन के लिए उपलब्ध रहेंगे।
इस डिपो फैसिलिटी को देश में स्थापित करने का मकसद सिर्फ सुविधा बढ़ाना नहीं है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना भी है। जब इंजन की मरम्मत और मेंटेनेंस देश में ही होगी, तो विदेशी निर्भरता कम होगी और तकनीकी क्षमता भी बढ़ेगी। इससे देश के अंदर ही एक मजबूत एविएशन सपोर्ट सिस्टम तैयार होगा, जो भविष्य में अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए भी उपयोगी रहेगा। (GE-IAF F404 Engine Depot)
पी-8आई, एमएच-60आर और अपाचे में जीई के इंजन
जीई एरोस्पेस और भारत के बीच साझेदारी नई नहीं है। पिछले करीब 40 सालों से यह कंपनी भारत के एविएशन सेक्टर के साथ काम कर रही है। तेजस विमान के अलावा कंपनी के इंजन भारतीय नौसेना के पी-8आई मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर में भी इस्तेमाल हो रहे हैं।
इसके अलावा एलएम2500 गैस टरबाइन इंजन भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत में भी लगाए गए हैं।
इस बीच एचएएल और जीई एरोस्पेस के बीच एफ-414 इंजन को लेकर तकनीकी समझौते पर भी बातचीत हुई है।
यह इंजन तेजस एमके2 के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जो मौजूदा एफ-404 इंजन से ज्यादा ताकतवर है। एचएएल और जीई अब इस प्रोजेक्ट की अगली स्टेज में पहुंच गए हैं, जहां कमर्शियल बातचीत आगे बढ़ेगी।
इससे पहले पिछले हफ्ते बुधवार को बेंगलुरु में एचएएल के साथ जीई के अधिकारियों की अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में जीई एरोस्पेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने एचएएल के अधिकारियों से मुलाकात की। इस अहम बैठक का फोकस तेजस के इंजन की डिलीवरी में देरी और आगे की योजना को लेकर था। बैठक में जीई एरोस्पेस की टीम का नेतृत्व कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी कर रही थीं। जबकि एचएएल की तरफ से चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील और डायरेक्टर (ऑपरेशंस) रवि के. शामिल हुए थे। (GE-IAF F404 Engine Depot)

