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DRDO बना रहा है स्वदेशी पोर्टेबल ELINT सिस्टम, जैसे ही दुश्मन चालू करेगा रडार, पकड़े जएंगे सिग्नल!

मैन-पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस मॉड्यूल्स दरअसल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) का हिस्सा है। इस तकनीक से रडार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले सिग्नलों को पकड़ा जाता है...

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📍नई दिल्ली | 16 Oct, 2026, 6:04 PM

DRDO Man-Portable ELINT System: आधुनिक युद्ध में दुश्मन की लोकेशन और हथियारों की जानकारी जुटाने के लिए केवल सैटेलाइट तस्वीरों या ड्रोन पर निर्भर रहना काफी नहीं होता। दुश्मन के रडार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से निकलने वाले सिग्नल भी अहम जानकारी देते हैं। इन्हीं सिग्नलों को पकड़ने और उनका विश्लेषण करने के लिए डीआरडीओ मैन-पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस मॉड्यूल्स (एमपीईएम) के डेवलप करने की तैयारी कर रहा है।

यह टेंडर हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (डीएलआरएल) ने जारी किया है। टेंडर के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को 450 दिनों में पूरा करना है।

DRDO Man-Portable ELINT System: क्या है मैन-पोर्टेबल ELINT सिस्टम?

मैन-पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस मॉड्यूल्स दरअसल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) का हिस्सा है। इस तकनीक से रडार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले सिग्नलों को पकड़ा जाता है। इन सिग्नलों का विश्लेषण करके पता लगाया जा सकता है कि किस तरह का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम काम कर रहा है और उससे संबंधित तकनीकी जानकारी क्या है।

अगर कोई रडार अपने आसपास के हवाई क्षेत्र की निगरानी करने या किसी टारगेट को ट्रैक करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल भेजता है, तो ELINT उपकरण इन सिग्नलों को रिकॉर्ड करके उनके पैटर्न का विश्लेषण कर सकता है। इससे संबंधित रडार की पहचान और उसकी गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।

वहीं, मैन-पोर्टेबल सिस्टम को सैनिक अपने साथ लेकर चल सकते हैं।

रडार के सिग्नल से कैसे मिलती है जानकारी?

ईएलआईएनटी सिस्टम दुश्मन के रडार से निकलने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को सुनता है और उनकी विशेषताओं के आधार पर रडार की पहचान करने की कोशिश करता है। इसके लिए सिग्नल को पकड़ने से लेकर उसकी पहचान और खतरे का आकलन करने तक कई चरणों में काम किया जाता है।

सबसे पहले ईएलआईएनटी सिस्टम अपने एंटीना और रिसीवर की मदद से आसपास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को पकड़ता है। अलग-अलग रडार अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड में काम कर सकते हैं। इसलिए सिस्टम में ऐसे एंटीना और रिसीवर इस्तेमाल किए जाते हैं, जो कई फ्रीक्वेंसी बैंड के सिग्नल पकड़ सकें।

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सिग्नल मिलने के बाद सिस्टम उसकी ताकत, फ्रीक्वेंसी और अन्य तकनीकी विशेषताओं से जुड़ी जानकारी जुटाता है। यह जानकारी आगे के विश्लेषण में काम आती है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

सिग्नल की विशेषताओं का पता लगाना

सिग्नल पकड़ने के बाद सिस्टम यह समझने की कोशिश करता है कि उसकी तकनीकी विशेषताएं क्या हैं। इसके लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां निकाली जाती हैं।

फ्रीक्वेंसी से पता चलता है कि सिग्नल किस फ्रिक्वेंसी पर काम कर रहा है। पल्स विड्थ बताती है कि सिग्नल का एक पल्स कितनी देर तक रहता है। पल्स रिपीटिशन इंटरवल (PRI) से पता चलता है कि दो पल्स के बीच कितना समय है, जबकि पल्स रिपीटिशन फ्रीक्वेंसी (PRF) बताती है कि एक निश्चित समय में कितने पल्स भेजे जा रहे हैं।

इसके अलावा, सिस्टम सिग्नल की ताकत और उसके आने की दिशा का भी अनुमान लगा सकता है। सिग्नल के भीतर मौजूद मॉड्यूलेशन यानी उसमें किए गए तकनीकी बदलावों का विश्लेषण भी किया जाता है।

इन सभी जानकारियों को एक साथ दर्ज करने के लिए पल्स डिस्क्रिप्टर वर्ड (PDW) का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सिग्नल के तकनीकी विवरण का एक रिकॉर्ड समझ सकते हैं। आगे की पहचान और विश्लेषण इसी जानकारी के आधार पर होता है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

विभिन्न रडार के सिग्नल को अलग करना

किसी ऑपरेशनल एरिया में एक से ज्यादा रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एक साथ काम कर सकते हैं। ऐसे में उनके सिग्नल एक ही समय पर रिसीवर तक पहुंच सकते हैं।

इस स्थिति में ईएलआईएनटी सिस्टम के सामने चुनौती होती है कि कौन-सा सिग्नल किस रडार से आया है।

इस प्रक्रिया को डी-इंटरलीविंग (Deinterleaving) कहा जाता है। इसमें सिग्नल की फ्रीक्वेंसी, पल्स के बीच का समय और दूसरी विशेषताओं का विश्लेषण करके अलग-अलग स्रोतों के सिग्नल को अलग करने की कोशिश की जाती है।

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आधुनिक सिस्टम में इस काम के लिए डिजिटल प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जाता है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

रडार की पहचान करना

सिग्नल अलग करने के बाद अगला काम उसकी पहचान करना होता है। इसके लिए प्राप्त जानकारी की तुलना पहले से उपलब्ध रडार सिग्नेचर लाइब्रेरी से की जाती है। इस लाइब्रेरी में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़े सिग्नल की विशेषताओं का रिकॉर्ड होता है।

तुलना के आधार पर सिस्टम यह अनुमान लगा सकता है कि सिग्नल किसी सर्च रडार, ट्रैकिंग रडार या फायर कंट्रोल रडार से संबंधित हो सकता है। सर्च रडार का काम किसी बड़े इलाके में टारगेट का पता लगाना होता है। ट्रैकिंग रडार किसी टारगेट पर नजर रखता है, जबकि फायर कंट्रोल रडार हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी प्रक्रिया में मदद करता है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

किस तरफ से आ रहा है सिग्नल?

ईएलआईएनटी सिस्टम सिग्नल की दिशा का भी अनुमान लगा सकता है। इसे एंगल ऑफ अराइवल (AoA) या डायरेक्शन ऑफ अराइवल कहा जाता है।

यदि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद सेंसर एक ही सिग्नल से जुड़ी जानकारी जुटाएं, तो उनकी जानकारी को मिलाकर लोकेशन का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इसमें ट्रायएंगुलेशन और टाइम डिफरेंस ऑफ अराइवल (TDOA) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

ईएलआईएनटी सिस्टम में डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसके जरिए प्राप्त सिग्नल की विशेषताओं को समझना और उनकी तुलना करना आसान होता है। फास्ट फूरियर ट्रांसफॉर्म (FFT) एक ऐसी तकनीक है, जो सिग्नल का फ्रीक्वेंसी के आधार पर विश्लेषण करने में मदद करती है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

खतरे का करेगा आकलन

सिग्नल की पहचान और विश्लेषण के बाद उसका महत्व समझने की कोशिश की जाती है। इसे थ्रेट असेसमेंट यानी खतरे का आकलन कहा जाता है।

इसमें सिग्नल की विशेषताओं, उसकी गतिविधि और उपलब्ध अन्य जानकारी को देखा जाता है। अगर किसी रडार के सिग्नल में बदलाव यह संकेत दे सकता है कि उसका काम करने का तरीका बदल गया है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

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डेवलपमेंट के साथ इंटीग्रेशन और टेस्टिंग भी जरूरी

इस प्रोजेक्ट में तीन प्रमुख काम शामिल हैं- डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन और क्वालिफिकेशन। डेवलपमेंट के तहत उपकरण और उसके मॉड्यूल डेवलप किए जाएंगे। वहीं, इंटीग्रेशन में अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए, जिसके सभी कंपोनेंट आपस में सही तरीके से काम कर सकें।

इसके बाद क्वालिफिकेशन की प्रक्रिया आती है। इसमें उपकरण को निर्धारित तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार जांचा जाता है। डिफेंस इक्विपमेंट्स के लिए तापमान, नमी, कंपन, झटके और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस जैसी परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। (DRDO Man-Portable ELINT System)

क्यों जरूरी है पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस?

मैदानी ऑपरेशन में हर जगह बड़े वाहन या स्थायी निगरानी उपकरण तैनात करना आसान नहीं होता। पहाड़ी क्षेत्रों, दुर्गम इलाकों और ऐसी जगहों पर जहां सैनिकों को तेजी से अपनी जगह बदलनी पड़ती है, छोटे और आसानी से ले जाए जा सकने वाले उपकरण उपयोगी हो सकते हैं।

पोर्टेबल ELINT सिस्टम से इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों की जानकारी जुटाने का काम किसी बड़े प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना किया जा सकता है। इससे फील्ड यूनिट्स को इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। (DRDO Man-Portable ELINT System)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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