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यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच रूस ने एयर डिफेंस सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, पैंटसिर सिस्टम में लगाईं 48 मिसाइलें!

पैंटसिर रूस का कम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका मुख्य काम महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, सैनिकों, कमांड पोस्ट, लॉजिस्टिक्स सेंटर और दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों को हवाई हमलों से बचाना है...

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📍नई दिल्ली | 17 Oct, 2026, 3:52 PM

Pantsir-SMD Air Defence System: रूस को हाल ही में अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए पैंटसिर-एस और पैंटसिर-एसएमडी सिस्टम की डिलीवरी मिली है। इन सिस्टम का इस्तेमाल ड्रोन, क्रूज मिसाइल, लड़ाकू विमान और दूसरे हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इस डिलीवरी की खास बात यह है कि पैंटसिर-एसएमडी में एक लॉन्चर पर 12 बड़ी मिसाइलों की जगह 48 छोटी एंटी-ड्रोन मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इससे एक ही सिस्टम को बार-बार मिसाइलों से लैस करने की जरूरत नहीं पड़ती और बड़ी संख्या में ड्रोन से निपटने की क्षमता मिलती है।

रूस यूक्रेन के लंबी दूरी तक हमला करने वाले ड्रोन के खिलाफ अपनी राजधानी मॉस्को और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा मजबूत कर रहा है। नई डिलीवरी इसी जरूरत से जुड़ी है। हालांकि, रूस को कितने सिस्टम मिले हैं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

Pantsir-SMD Air Defence System: पैंटसिर सिस्टम क्या है और इसकी जरूरत क्यों बढ़ी?

पैंटसिर रूस का कम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका मुख्य काम महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, सैनिकों, कमांड पोस्ट, लॉजिस्टिक्स सेंटर और दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों को हवाई हमलों से बचाना है। यह मिसाइलों और ऑटोमैटिक गन की मदद से अलग-अलग तरह के हवाई खतरों को निशाना बना सकता है।

पैंटसिर परिवार के दो प्रमुख वेरिएंट पैंटसिर-एस और पैंटसिर-एसएमडी हैं। पैंटसिर-एस एक मोबाइल सिस्टम है, जिसे ट्रक जैसे वाहन पर लगाया जाता है। इसे जरूरत के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। इसके उलट, पैंटसिर-एसएमडी को मुख्य रूप से स्थायी ठिकानों की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इसे छत, ऊंचे टावर या विशेष प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकता है।

इन दोनों सिस्टम का उद्देश्य एयर डिफेंस की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करना है। मोबाइल सिस्टम सैन्य टुकड़ियों के साथ आगे बढ़ सकता है, जबकि स्थायी सिस्टम किसी एयरबेस, सरकारी ईमारत या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा कर सकता है। (Pantsir-SMD Air Defence System)

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एक लॉन्चर से 48 मिसाइलें

पैंटसिर में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव मिसाइलों को लेकर है। पुराने पैंटसिर के एक लॉन्चर पर 12 मिसाइलें लगाई जाती हैं। लेकिन नए पैंटसिर-एसएमडी कॉन्फिगरेशन में छोटी ग्वोज्द मिसाइलों का इस्तेमाल करके यह संख्या 48 तक पहुंचाई जा सकती है।

इसमें एक मिसाइल के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पर चार छोटी मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इस तरह 12 लॉन्च पोजिशन में कुल 48 छोटी मिसाइलें रखी जा सकती हैं।

यह बदलाव इसलिए किया गया है कि क्योंकि हर हवाई खतरे को रोकने के लिए बड़ी और महंगी मिसाइल इस्तेमाल करना जरूरी नहीं होता। छोटे ड्रोन को रोकने के लिए छोटी मिसाइल काफी है। यदि ऐसे ड्रोन बड़ी संख्या में हमला करते हैं, तो ज्यादा मिसाइलों वाला सिस्टम लंबे समय ड्रोनों को निशाना बना सकता है।

हालांकि, 48 मिसाइलों वाला कॉन्फिगरेशन हर खतरे के लिए नहीं है। छोटी मिसाइलों की रेंज कम होती है। इसलिए जरूरत के हिसाब से बड़ी और छोटी मिसाइलों को एक साथ भी लगाया जा सकता है। (Pantsir-SMD Air Defence System)

Pantsir-SMD Air Defence System
Russia’s Pantsir-SMD System Uses 48 Small Missiles to Counter Drone Attacks.

तीन तरह की मिसाइलों से बनेगी एयर डिफेंस की लेयर

पैंटसिर सिस्टम में अलग-अलग प्रकार की मिसाइलें इस्तेमाल करने का विकल्प इसकी बड़ी खूबी है। इनमें 57ई6 मिसाइल, तेज रफ्तार वाली 57ई6एम मिसाइल और छोटी ग्वोज्द मिसाइल शामिल हैं।

57ई6 मिसाइल पैंटसिर की बेसिक मिसाइल है। इसकी रेंज लगभग 1.2 से 20 किलोमीटर और ऊंचाई पर निशाना लगाने की सीमा लगभग 15 किलोमीटर तक है। इसकी स्पीड करीब 1,300 मीटर प्रति सेकंड तक है।

दूसरी मिसाइल 57ई6एम है। इसकी रेंज लगभग 30 किलोमीटर तक है, जबकि कुछ रूसी दावों में यह रेंज 35 से 40 किलोमीटर तक बताई गई है। इसकी रफ्तार लगभग 1,700 मीटर प्रति सेकंड तक है। जो मैक-5 की स्पीड से थोड़ी अधिक है, इसलिए इसे हाइपरसोनिक स्पीड वाली मिसाइल भी कहा जा रहा है। 57ई6एम एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे रेडियो कमांड गाइडेंस से कंट्रोल किया जाता है।

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तीसरी मिसाइल ग्वोज्द है, जिसे छोटे ड्रोन जैसे टारगेट्स को रोकने के लिए बनाया गया है। इसे टीकेबी-1055 या 19वाई6 नाम से भी जाना जाता है। इसकी रेंज लगभग 500 मीटर से सात किलोमीटर तक है और यह करीब 15 मीटर से पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट्स को निशाना बना सकती है। ग्वोज्द मिसाइल में रेडियो कमांड गाइडेंस का इस्तेमाल होता है। (Pantsir-SMD Air Defence System)

यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने बढ़ी चुनौती

रूस के सामने एयर डिफेंस से जुड़ी बड़ी चुनौतियों में से एक सस्ते ड्रोन के लगातार हमले हैं। ऐसे ड्रोन कई बार एक ही इलाके में अलग-अलग दिशाओं से भेजे जाते हैं। कुछ ड्रोन निगरानी करते हैं, जबकि दूसरे सीधे टारगेट पर हमला करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। इनके साथ क्रूज मिसाइल या अन्य तेज रफ्तार वाले हथियार भी भेजे जा सकते हैं।

ऐसी स्थिति में एयर डिफेंस सिस्टम को हर टारगेट की पहचान करनी होती है और तय करना होता है कि उसे रोकने के लिए कौन-सी मिसाइल इस्तेमाल की जाए। अगर छोटे और कम लागत वाले ड्रोन को रोकने के लिए हर बार बड़ी मिसाइल दागी जाए, तो इससे मिसाइलों के खत्म होने का खतरा रहता है।

यही वजह है कि पैंटसिर-एसएमडी में 48 छोटी मिसाइलों बेहद अहम माना जा रहा है। इससे एक ही लॉन्चर अधिक संख्या में छोटे एरियल टारगेट्स को रोकने के लिए तैयार रह सकता है। (Pantsir-SMD Air Defence System)

पैंटसिर-एस में तोप और मिसाइल, दोनों का इस्तेमाल

मोबाइल पैंटसिर-एस में मिसाइलों के साथ 30 मिमी की 2ए38एम ऑटोमैटिक तोपें भी लगी होती हैं। इसमें दो ट्विन-बैरल तोपें होती हैं, जिनकी जॉइंट फायरिंग रेट लगभग 5,000 राउंड प्रति मिनट है।

इन तोपों का इस्तेमाल उन एरियल टारगेट्स के खिलाफ किया जा सकता है, जो सिस्टम के काफी करीब पहुंच गए हों। इस तरह पैंटसिर-एस में दो तरह के हथियार मौजूद रहते हैं। मिसाइलों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत दूर मौजूद टारगेट्स के लिए किया जा सकता है, जबकि तोपें लस्ट लेयर ऑफ डिफेंस के तौर पर काम करती हैं।

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इसकी मोबाइल क्षमता भी महत्वपूर्ण है। सैन्य अभियानों के दौरान कमांड पोस्ट, गोला-बारूद के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर लगातार स्थान बदल सकते हैं। ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम को भी इन ठिकानों के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।

पैंटसिर-एस को अलग-अलग स्थानों पर तैनात करके दूसरे एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा भी मजबूत की जा सकती है। इसका काम लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलों की जगह लेना नहीं, बल्कि उन खतरों को रोकना है जो दूसरी सुरक्षा परतों से निकलकर करीब पहुंच जाते हैं। (Pantsir-SMD Air Defence System)

मॉस्को की इमारतों और टावरों पर लगाए पैंटसिर-एसएमडी

पैंटसिर-एसएमडी को स्थायी ठिकानों की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इसमें मोबाइल पैंटसिर-एस की तरह ऑटोमैटिक तोपें नहीं होतीं। यह मुख्य रूप से मिसाइलों के जरिए हवाई खतरों को रोकने के लिए बनाया गया है।

इसके मॉड्यूलर डिजाइन की वजह से इसे इमारतों की छतों, टावरों और विशेष प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकताा है। मॉस्को में पैंटसिर फैमिली के सिस्टम इमारतों की छतों और विशेष रूप से बनाए गए टावरों पर लगाए गए हैं। राजधानी के आसपास ऐसी 100 से अधिक तैनातियां की गई हैं। रूस ने पैंटसिर-एसएमडी-ई मॉड्यूल लगाने के लिए एमआई-26 भारी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया है। (Pantsir-SMD Air Defence System)

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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