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HAL GE F404 Engine Deal: एचएएल ने अमेरिकी कंपनी जीई के साथ किया बड़ा करार, 97 तेजस लड़ाकू विमानों के लिए मिलेंगे 113 इंजन

इस समझौते में भारत को न केवल इंजन मिलेंगे बल्कि इनके साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सेवाओं के लिए सपोर्ट पैकेज भी शामिल है। इसका मतलब यह है कि इन इंजनों की सर्विसिंग और तकनीकी रखरखाव अब भारत में ही किया जाएगा...

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📍नई दिल्ली | 7 Nov, 2025, 7:10 PM

HAL GE F404 Engine Deal: हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने शुक्रवार को 97 तेजस एमके1ए के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए हैं। इस समझौते के तहत 113 इंजन एफ404-जीई-आईएन20 खरीदे जाएंगे। साथ ही संबंधित सपोर्ट पैकेज भी भारत को उपलब्ध कराए जाएंगे। ये इंजन भारत के 97 एलसीए एमके-1ए फाइटर जेट्स में लगााए जाएंगे।

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तेजस एमके-1ए कार्यक्रम को मिलेगी रफ्तार

एचएएल ने अपनी सोशल मीडिया हेंडल एक्स पर बताया है कि यह कॉन्ट्रैक्ट 97 तेजस एमके-1ए के इंजन के लिए किया गया है। वहीं इंजन डिलीवरी 2027 से 2032 तक की जाएगी। तेजस एमके-1ए भारत में तैयार किया जाने वाला चौथी पीढ़ी का मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन और डेवलप किया गया है। जून 2025 में कैबिनेट ने 97 अतिरिक्त तेजस को मंजूरी दी थी, जिसके तहत इस साल सितंबर में एचएएल के साथ 65,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था। अभी तक वायुसेना 180 तेजस एमके 1ए के ऑर्डर दे चुकी है। वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि अब वह तेजस एमके 1ए के और ऑर्डर नहीं देगी और तेजस एमके 2 पर फोकस करेगी।

इस समझौते में भारत को न केवल इंजन मिलेंगे बल्कि इनके साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सेवाओं के लिए सपोर्ट पैकेज भी शामिल है। इसका मतलब यह है कि इन इंजनों की सर्विसिंग और तकनीकी रखरखाव अब भारत में ही किया जाएगा।

इन विमानों में इस्तेमाल होने वाला एफ404 इंजन 84 किलो न्यूटन का थ्रस्ट पैदा करता है। तेजस एमके-1ए का निर्माण एचएएल की नासिक और बेंगलुरु यूनिट में हो रहा है। इससे पहले 2021 में एचएएल ने जीई के साथ 99 एफ404 इंजन खरीदे थे। जिसकी कुल लागत 716 मिलियन डॉलर थी। इसके तहत 83 एलसीए तेजस एमके 1ए बनाए जाने थे और जहाजों की डिलीवरी पिछले साल मार्च में शुरू की जानी थी। लेकिन जीई की तरफ इस साल अप्रैल में इंजन आने शुरू हुए। अभी तक चार इंजन भारत आ चुके हैं। पहला इंजन अप्रैल में, दूसरा इंजन जुलाई में, तीसरा इंजन सितंबर में और चौथा इंजन पहली अक्टूबर को भारत पहुंच चुका है।

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वहीं अभी तक एक भी तेजस एमके 1ए फाइटर जेट की डिलीवरी भारतीय वायुसेना को नहीं की है। इससे पहले सितंबर में एचएएल ने दावा किया था कि इस साल अक्टूबर में पहले तेजस की डिलीवरी कर दी जाएगी। 17 अक्टूबर को एचएएल ने अपने नासिक प्लांट से तेजस एमके 1ए के पहले प्रोटोटाइप ने उड़ान भी भरी थी। एचएएल ने कहा था कि तेजस के फायरिंग टेस्ट के बाद वायुसेना को डिलीवरी कर दी जाएगी। इन फायरिंग टेस्ट में देश में बने बियोन्ड विजुअल रेंज मिसाइल अस्त्र, शॉर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइल, ब्रह्मोस एनजी और लेजर-गाइडेड बम का टेस्ट किया जाना था। लेकिन इंटीग्रेशन संबंधित दिक्कतों के चलते अब यह डिलीवरी अगले साल मार्च 2026 तक के लिए टल गई है। सूत्रों का कहना है कि सर्टिफिकेशन में देरी हो रही है, जिसकी वजह से डिलीवरी अगले साल तक के लिए टल गई है।

वहीं इंजन को लेकर एचएएल का कहना है कि चालू वित्त वर्ष के आखिर तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक तौर पर तेजस की डिलीवरी को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था, “भूखे मुंह तैयार हैं, हम सिर्फ भोजन का इंतजार कर रहे हैं।” उनका इशारा तेजस विमानों के जल्दी प्रोडक्शन और डिलीवरी की तरफ था। उन्होंने कहा था कि वायुसेना की क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल 30 से 40 विमान तैयार होने चाहिए, यानी दो स्क्वाड्रन हर साल तैयार होनी चाहिए।

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