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राजनाथ सिंह बोले- देश की सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस हैं NCC कैडेट्स, कंफर्ट जोन से बाहर निकल युवा रचें इतिहास

NCC Cadets Republic Day Camp 2026
NCC Cadets Are India’s Second Line of Defence: Defence Minister Rajnath Singh at Republic Day Camp

NCC Cadets Republic Day Camp 2026: रक्षा मंत्री ने युवाओं से अपील की है कि वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले एनसीसी कैडेट्स से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के लिए हमेशा तैयार रहें। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में देश के युवाओं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत रहना होगा और हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा।

NCC Cadets Republic Day Camp 2026: कैडेट्स को बताया देश की “सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस”

दिल्ली कैंट स्थित एनसीसी रिपब्लिक डे कैंप में देशभर से आए एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब देशभर में मॉक ड्रिल्स आयोजित की गईं, तब एनसीसी कैडेट्स ने आम जनता को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कैडेट्स को देश की “सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस” बताते हुए कहा कि जब पूरा देश सशस्त्र बलों के साथ खड़ा था, तब एनसीसी कैडेट्स ने भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

ऑपरेशन सिंदूर में नहीं पहुंचाया किसी निर्दोष को नुकसान

राजनाथ सिंह ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पीओके में बैठे आतंकियों को करारा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई साहस और संयम के साथ की गई। केवल उन्हीं आतंकियों और ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्होंने भारत को नुकसान पहुंचाया था, किसी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हमारी सेनाएं शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह मजबूत हैं। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

महाभारत के अभिमन्यु से की युवाओं की तुलना

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने युवाओं की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की। उन्होंने कहा कि आज का युवा नया अभिमन्यु है, जो किसी भी तरह के चक्रव्यूह में प्रवेश करना भी जानता है और उससे बाहर निकलना भी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज युवाओं से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और वे देश की अमूल्य धरोहर हैं, जिनके कंधों पर भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी है। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

युवाओं को “अपग्रेड” करती है एनसीसी

राजनाथ सिंह ने एनसीसी को युवाओं को “अपग्रेड” करने का एक बेहतरीन माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया युवाओं को आराम बेच रही है। वीडियो गेम्स, फूड डिलीवरी और तमाम सुविधाएं जीवन को आसान बना रही हैं, लेकिन एनसीसी परेड, ड्रिल और कैंप के जरिए युवाओं को उनके कंफर्ट जोन से बाहर निकालती है। यही प्रक्रिया कैडेट्स को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। इसके साथ-साथ एनसीसी में बच्चों को ऐसी जीवन उपयोगी स्किल्स भी सिखाई जाती हैं, जो आपदा के समय खुद को और दूसरों को बचाने में काम आती हैं। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

रक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीसी कैडेट्स में अनुशासन और देशभक्ति के साथ-साथ फोकस की कमी को दूर करने की क्षमता भी विकसित होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में हर कोई तुरंत सब कुछ चाहता है, लेकिन जीवन की बड़ी लड़ाइयों, देश की बड़ी जिम्मेदारियों और चरित्र निर्माण के लिए धैर्य, निरंतरता और एकाग्रता जरूरी है। एनसीसी यही सिखाती है और यही फोकस आगे चलकर युवाओं के जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है, चाहे वे सशस्त्र बलों में जाएं या डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक या राजनेता बनें। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

NCC Cadets Republic Day Camp 2026
NCC Cadets Are India’s Second Line of Defence: Defence Minister Rajnath Singh at Republic Day Camp

कैडेट्स बनाएं प्लान-ए, प्लान-बी, प्लान-सी

जीवन में योजना के महत्व पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कैडेट्स को सिर्फ प्लान-ए ही नहीं, बल्कि प्लान-बी और प्लान-सी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सेना में हर बड़े कार्यक्रम और ऑपरेशन के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार रहती हैं, क्योंकि सब कुछ हमारे कंट्रोल में नहीं होता। अगर जीवन में केवल एक ही रास्ता हो और वह बंद हो जाए, तो डर और निराशा पैदा होती है। लेकिन जब विकल्प मौजूद होते हैं, तो हालात पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर आज बारिश है, तो कल धूप जरूर निकलेगी।” (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने संविधान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक अधिकारों और कर्तव्यों को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान को समझें और उसके मूल्यों के अनुसार अपने जीवन को ढालें। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेट्स इस पूरे अभियान में ध्वजवाहक की भूमिका निभा सकते हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान एक इन्वेस्टिचर सेरेमनी भी आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए एनसीसी कैडेट्स को रक्षा मंत्री पदक और कमेंडेशन कार्ड्स प्रदान किए। इस वर्ष कैडेट अर्पुन दीप कौर (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख निदेशालय) और कैडेट पाल्देन लेपचा (पश्चिम बंगाल और सिक्किम निदेशालय) को रक्षा मंत्री पदक से सम्मानित किया गया। वहीं कर्नाटक-गोवा, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़, नॉर्थ ईस्टर्न रीजन और उत्तराखंड निदेशालय के कैडेट्स को कमेंडेशन कार्ड्स दिए गए। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

रक्षा मंत्री ने तीनों विंग्स से आए एनसीसी कैडेट्स द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर की समीक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने ग्वालियर के सिंधिया स्कूल के एनसीसी कैडेट्स द्वारा दी गई बैंड परफॉर्मेंस देखी और सभी 17 निदेशालयों के कैडेट्स द्वारा तैयार किए गए फ्लैग एरिया का भी दौरा किया। कार्यक्रम में डीजी एनसीसी लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स सहित रक्षा मंत्रालय और एनसीसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। (NCC Cadets Republic Day Camp 2026)

गणतंत्र दिवस पर सेना को मिला सबसे बड़ा सम्मान पैकेज, हजारों सैनिकों को मिली ऑनररी रैंक

Honorary Rank Republic Day 2026
File Pic

Honorary Rank Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति की तरफ से जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, भारतीय सेना के सैकड़ों जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स (NCOs) को अलग-अलग श्रेणियों में ऑनररी रैंक प्रदान की गई है। ये सम्मान रेगुलेशन फॉर द आर्मी 1987 के पैरा 177, 179 और 180 के तहत दिए गए हैं।

Honorary Rank Republic Day 2026: एक्टिव सर्विस पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट

सबसे पहले बात करें एक्टिव सर्विस पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। तो गजट नोटिफिकेशन संख्या 01 (ई) के तहत एक्टिव ड्यूटी पर कार्यरत जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स को यह सम्मान दिया गया है। इस श्रेणी में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, इंटेलिजेंस, मिलिट्री पुलिस, पायनियर कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी जैसी विभिन्न शाखाओं के 437 सीनियर जेसीओ को ऑनररी कैप्टन और 1804 अधिकारियों को ऑनररी लेफ्टिनेंट बनाया गया है। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया गया है, जिनकी सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह संतोषजनक रही है और जिन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी। (Honorary Rank Republic Day 2026)

इसके बाद दूसरी बड़ी श्रेणी है रिटायरमेंट के समय ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 02 (ई) के अनुसार, इस कैटेगरी में 4014 जेसीओ को उनकी सेवा पूरी होने पर यह मानद रैंक दी गई है। इनमें सूबेदार मेजर, रिसालदार मेजर और सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जो लंबे समय तक सेना की अलग-अलग यूनिट्स और रेजीमेंट्स में सेवा दे चुके हैं। इस सूची में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी के सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हैं। (Honorary Rank Republic Day 2026)

तीसरी और सबसे बड़ी संख्या वाली कैटेगरी है ऑनररी नायब रिसालदार/ऑनररी सूबेदार की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 03 (ई) के तहत, 805 एनसीओ को यह सम्मान दिया गया है। इनमें हवलदार, दफेदार और नायब सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जिन्होंने कई वर्षों तक फील्ड एरिया, सीमावर्ती इलाकों और ऑपरेशनल यूनिट्स में सेवा दी है। यह कैटेगरी संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी रही, जो यह दिखाती है कि सेना अपने निचले और मध्य स्तर के नेतृत्व को भी समान सम्मान देती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो गणतंत्र दिवस 2026 पर हजारों सैनिकों को विभिन्न स्तरों पर ऑनररी रैंक देकर उनकी लंबी, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा को औपचारिक सम्मान दिया गया है। (Honorary Rank Republic Day 2026)

क्या होती है ऑनररी रैंक

ऑनररी रैंक भारतीय सेना में दिया जाने वाला एक विशेष मानद सम्मान है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ देश की सेवा की हो। यह रैंक वास्तविक कमांड या ऑपरेशनल पावर नहीं देती, लेकिन सैनिक की पूरी सेवा को आधिकारिक मान्यता देती है।

ऑनररी रैंक दो तरह से दी जाती है। पहली, एक्टिव सर्विस के दौरान, जैसे ऑनररी कैप्टन या ऑनररी लेफ्टिनेंट। दूसरी, रिटायरमेंट के समय, जब सैनिक अपनी यूनिट से विदा लेता है। आमतौर पर यह सम्मान गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर घोषित किया जाता है। (Honorary Rank Republic Day 2026)

क्या हैं ऑनररी रैंक के फायदे?

ऑनररी रैंक का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा पेंशन से जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सूबेदार ऑनररी लेफ्टिनेंट बनता है, तो उसकी पेंशन उच्च रैंक के अनुरूप तय की जाती है। मौजूदा 7वें पे कमीशन और वन रैंक वन पेंशन के तहत यह बढ़ोतरी लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकती है, जो व्यक्ति की सेवा अवधि और अंतिम रैंक पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, सामाजिक और प्रोटोकॉल सम्मान भी एक बड़ा लाभ है। रिटायरमेंट के बाद सैनिक अपने नाम के साथ ऑनररी रैंक का इस्तेमाल कर सकता है, जैसे “ऑनररी कैप्टन” या “ऑनररी सूबेदार”। सैन्य कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में उन्हें उच्च स्थान और सम्मान मिलता है, जिससे परिवार और समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

मेडिकल सुविधाओं और कैंटीन जैसी सुविधाओं की बात करें तो ईसीएचएस मेडिकल स्कीम, सीएसडी कैंटीन और ट्रैवल कंसेशन पहले की तरह जारी रहते हैं। हालांकि रैंक बढ़ने से कुछ मामलों में प्रोटोकॉल और सुविधा स्तर बेहतर हो जाता है। (Honorary Rank Republic Day 2026)

अब यूरोप भी हुआ भारतीय ड्रोन का कायल, टाटा के ALS लॉइटरिंग मुनिशन ने किया मिशन-रेडी डेमो

Tata ALS Loitering Munition
Tata Advanced Systems’ ALS Loitering Munition Demonstrates Mission-Ready Capability in Europe

Tata ALS Loitering Munition: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने हाल ही में स्वदेश में बनाए एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन का यूरोप में सफल लाइव फ्लाइट डेमो पूरा किया। कंपनी के इस डेमो का फोकस अंतरराष्ट्रीय डिफेंस कस्टमर्स हैं, जिसमें इस सिस्टम की मिशन-रेडी क्षमता को रियलटाइम परिस्थितियों में परखा गया। वहीं, इस सफलता ने न सिर्फ एएलएस सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि भारत अब ग्लोबल डिफेंस मार्केट पर फोकस करने के लिए तैयार है।

डेमो में एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन ने उड़ान भरते हुए अपने सभी अहम पैरामीटर्स को पूरा किया। उड़ान के दौरान इसकी स्टेबिलिटी, कंट्रोल, टार्गेट आइडेंटिफिकेशन और एक्युरेसी को परखा गया। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के सामने हुए इस प्रदर्शन का मकसद यह देखना था कि सिस्टम रियल वार-लाइक कंडीशंस में कितना भरोसेमंद है। टीएएसएल के लिए यह डेमो इसलिए भी खास है क्योंकि इसके जरिए कंपनी ने अपने प्रोडक्ट को “मिशन-रेडी” स्तर पर स्थापित किया है। (Tata ALS Loitering Munition)

Tata ALS Loitering Munition: ड्रोन में है वीटीओएल फीचर

लॉइटरिंग मुनिशन को आम भाषा में “कामिकाजे ड्रोन” भी कहा जाता है। यह ऐसा हथियार होता है जो उड़ते हुए टारगेट एरिया में कुछ समय तक मंडराता रहता है और सही मौके पर टारगेट को निशाना बनाता है। एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन इसी आधुनिक सोच का उदाहरण है, जहां निगरानी और हमला, दोनों क्षमताएं एक ही प्लेटफॉर्म में मौजूद हैं। एएलएस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पहले इलाके की जानकारी जुटा सके और फिर जरूरत पड़ने पर सटीक हमला कर सके। (Tata ALS Loitering Munition)

टीएएसएल की एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन की एक बड़ी खासियत इसकी वीटीओएल क्षमता है। यानी यह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो इसे रनवे की जरूरत नहीं होती। यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उठ सकता है और फिर फिक्स्ड-विंग मोड में लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है। इन खूबियों की वजह से यह पहाड़ी इलाकों, सीमित जगहों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। (Tata ALS Loitering Munition)

एएलएस के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक एएलएस-50 वेरिएंट वजन में 50 किलोग्राम से कम है, लेकिन इसकी मारक क्षमता और उड़ान समय काफी अच्छा है। यह 50 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक जा सकता है और करीब एक घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है। (Tata ALS Loitering Munition)

इस सिस्टम में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर लगे हैं, जो दिन और रात दोनों समय टारगेट की पहचान कर सकते हैं। रियल-टाइम वीडियो फीड ऑपरेटर तक पहुंचती है, जिससे वह तुरंत फैसला ले सकता है। एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन की सटीकता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। इसमें ऐसे एल्गोरिदम इस्तेमाल किए गए हैं, जो टारगेट पर बेहद एक्युरेसी से वार करते हैं। (Tata ALS Loitering Munition)

एक और अहम बात यह है कि एएलएस सिस्टम को अलग-अलग तरह के वारहेड्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव किया जा सकता है। जिससे इसे कई तरह के मिशनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें एंटी-जैमिंग फीचर्स भी मौजूद हैं, जिससे यह जीपीएस-डिनाइड माहौल में भी काम कर सकता है। मॉडर्न वॉरफेयर में जहां इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग एक बड़ा खतरा है, वहां इस खूबी का जबरदस्त फायदा मिलेगा।

यूरोप में हुए इस लाइव फ्लाइट डेमो का फायदा भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट नीति को भी मिलेगा। भारत लंबे समय तक रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर रहा है, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। टीएएसएल जैसी कंपनियां स्वदेशी तकनीक विकसित कर उसे वैश्विक बाजार में पेश कर रही हैं। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। (Tata ALS Loitering Munition)

बताया जाता है कि भारतीय वायुसेना को पहले ही एएलएस-50 के कुछ यूनिट्स दिए जा चुके हैं, जहां इसका उपयोग और इवैल्यूएशन किया जा रहा है। अब यूरोप में हुए इस सफल प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसमें दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल टीएएसएल की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि भारत की छवि एक भरोसेमंद डिफेंस सप्लायर के तौर पर भी मजबूत मिलेगी। (Tata ALS Loitering Munition)

गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगा अर्जुन टैंक का नया अवतार, जानें क्या-क्या हुए बदलाव?

Arjun Tank Republic Day 2026
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army showcases upgraded MBT with anti-drone protection

Arjun Tank Republic Day 2026: 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हर भारतीय की नजर भारतीय सेना पर होगी। वहीं, इस बार गणतंत्र दिवस परेड में भारत के मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन की खास मौजूदगी होगी। हालांकि यह टैंक पहले भी कई बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में अर्जुन टैंक की मौजूदगी कुछ अलग है। भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध के नए खतरों को कितनी गंभीरता से समझते हुए और उनसे निपटने के लिए किस तरह जमीन पर ही समाधान तैयार किए हैं।

Arjun Tank Republic Day 2026: मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से किए बदलाव

भारतीय सेना का यह स्वदेशी मेन बैटल टैंक (एमबीटी) इससे पहले भी कई बार कर्तव्य पथ पर दिख चुका है। लेकिन इस बार इसकी पहचान सिर्फ एक स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर होगी, जिसे मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से बदलाव किए गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक अब सीधे तौर पर भारतीय टैंकों में दिखाई देने लगे हैं।

भारतीय सेना की आर्मर्ड डिवीजन के लिए अर्जुन एक भरोसेमंद हथियार रहा है। यह थर्ड-जनरेशन एमबीटी-1 टैंक पहले ही अपनी ताकत, सटीकता और मजबूती साबित कर चुका है। हाल के सालों में दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते लेकिन घातक ड्रोन भारी टैंकों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। ड्रोन आमतौर पर टैंक के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वहां का कवच सामने और साइड की तुलना में पतला होता है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अर्जुन टैंक में एंटी-ड्रोन सुधार किए हैं। (Arjun Tank Republic Day 2026)

Arjun Tank Republic Day 2026
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army showcases upgraded MBT with anti-drone protection

ड्रोन युग के लिए तैयार अर्जुन टैंक

इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए अर्जुन टैंक में कुछ अहम फील्ड-लेवल बदलाव किए गए हैं, जो इस साल गणतंत्र दिवस परेड में साफ नजर आएंगे। सबसे पहली चीज जो लोगों की नजर में आएगी, वह है टैंक के ऊपर लगाया गया कोप-केज, यानी तार की जाली। यह साधारण दिखने वाला स्ट्रक्चर असल में टैंक के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। ड्रोन से गिराए गए हथियार या टॉप-अटैक वारहेड जब इस जाली से टकराते हैं, तो वे या तो समय से पहले फट जाते हैं या उनकी दिशा बदल जाती है। इससे टैंक के अंदर बैठे क्रू की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पश्चिमी सेक्टर में तैनात 75 आर्मर्ड रेजिमेंट के मेजर हितेश मेहता इस साल परेड में शामिल होने वाले एकमात्र अर्जुन टैंक के कमांडर हैं। वह बताते हैं कि यह कम लागत वाला लेकिन बेहद असरदार समाधान है। उनके मुताबिक, ऐसे बैटलफील्ड में जहां हर समय ऊपर से खतरा बना रहता है, यह जाली क्रू का भरोसा बढ़ाती है और उन्हें ज्यादा सुरक्षित महसूस कराती है। इसे तेजी से किसी भी टैंक पर लगाया जा सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन पर अब ड्रोन भी होंगे तैनात

ड्रोन खतरे से निपटने के लिए सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि हमला भी जरूरी है। इसी सोच के तहत अर्जुन टैंक को अब ड्रोन से लैस किया गया है। टैंक पर दो तरह के ड्रोन लगाए गए हैं। पहला ड्रोन हालात की जानकारी लेने के लिए इस्तेमाल होता है। इसकी उड़ान क्षमता करीब 25 से 30 मिनट की है और यह टैंक से कई किलोमीटर दूर जाकर इलाके की स्थिति की जानकारी दे सकता है। कम विजिबिलिटी वाले इलाकों में यह ड्रोन आंखों और कानों की तरह काम करता है।

मेजर मेहता ने बताया कि अगर टैंक किसी सीमित या खतरनाक इलाके में फंसा हो, तो यह ड्रोन उड़ाकर आगे के हालात देखे जा सकते हैं, जिससे बिना जोखिम लिए सही फैसला किया जा सके।

दूसरा ड्रोन कामिकाजे ड्रोन है। इसमें कम से कम 5 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। इसका इस्तेमाल लाइन-ऑफ-साइट से बाहर मौजूद टारगेट पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। यानी अब टैंक सिर्फ सामने दिख रहे खतरे तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर बैठे दुश्मन को भी निशाना बना सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

क्रू की क्या हैं जिम्मेदारियां

अर्जुन टैंक में कुल चार सदस्यीय क्रू होता है। इसमें कमांडर, ड्राइवर, गनर और ऑपरेटर या लोडर शामिल होते हैं। ड्रोन को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी ऑपरेटर की होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कमांडर भी इसे कंट्रोल कर सकता है। वहीं, आधुनिक टैंक सिर्फ भारी हथियार नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।

अर्जुन मूल रूप से 120 मिमी की पावरफुल गन से लैस है, जो दुश्मन के टैंकों और ठिकानों के लिए एक बड़ा खतरा मानी जाती है। अब इसके साथ ड्रोन आधारित ऑफेंसिव और डिफेंसिव जुगाड़ जुड़ जाने से इसकी भूमिका और व्यापक हो गई है। भारतीय सेना भविष्य में टैंक क्रू को एंटी-ड्रोन गन देने पर भी विचार कर रही है, ताकि ड्रोन से आने वाले खतरे को मौके पर ही रोका जा सके। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन में किए 70 से अधिक अहम सुधार

अर्जुन एमके-1ए भारत का एडवांस मेन बैटल टैंक है, जिसके लिए भारतीय सेना ने 118 यूनिट्स का ऑर्डर दिया था। इस टैंक में डीआरडीओ ने 70 से अधिक अहम सुधार किए थे। इनमें कमांडर के लिए बेहतर पैनोरमिक साइट, रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन, मजबूत एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर, आधुनिक थर्मल इमेजिंग, नाइट विजन और ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा टैंक की मोबिलिटी और ट्रांसमिशन सिस्टम को भी बेहतर बनाया गया है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

टी-90 टैंक में भी बदलाव

गणतंत्र दिवस परेड में सिर्फ अर्जुन ही नहीं, बल्कि टी-90 टैंक भी शामिल होंगे। इन टैंकों में भी इसी तरह के बॉडी में बदलाव किए गए हैं, ताकि ड्रोन और टॉप-अटैक हथियारों से बचाव किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने ड्रोन को अब अस्थायी खतरा नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध का स्थायी हिस्सा मान लिया है।

दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते ड्रोन, जिनकी कीमत टैंक के मुकाबले बेहद कम होती है, ऊपर से हमला कर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। टैंकों का फ्रंट और साइड आर्मर भले ही मजबूत हो, लेकिन ऊपर का हिस्सा अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ड्रोन सटीक वार करते हैं। यही वजह है कि अब टैंक डिजाइन और इस्तेमाल दोनों में बदलाव हो रहा है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

Explained: जंग में कैसे लड़ती है भारतीय सेना? गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेगा पूरा बैटल फॉर्मेशन

Battle Array Republic Day 2026- How Indian Army showcases real combat formations at Kartavya Path
Battle Array Republic Day 2026- How Indian Army showcases real combat formations at Kartavya Path

Battle Array Republic Day 2026: इस बार गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ हर साल होने वाले मार्च-पास्ट और हथियारों की झलक तक सीमित नहीं रहेगी। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर पहली बार आम जनता ‘बैटल एरे’ यानी युद्ध जैसी सैन्य संरचना को करीब से देख पाएगी। यह वही क्रम होगा, जिसमें सेना असली युद्ध के समय आगे बढ़ती है, सबसे पहले निगरानी, फिर हमला, उसके बाद सुरक्षा और आखिर में लॉजिस्टिक्स यानी रसद व्यवस्था।

इस बार की परेड इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें पहली बार आम लोग यह देख पाएंगे कि भारतीय सेना युद्ध के समय कैसे आगे बढ़ती है। बैटल एरे के जरिए सेना की जॉइंटनेस, आत्मनिर्भर भारत, और डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन की झलक एक ही जगह देखने को मिलेगी। (Battle Array Republic Day 2026)

Battle Array Republic Day 2026: पहली बार ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन

गणतंत्र दिवस परेड से पहले आयोजित प्रेस ब्रीफ को संबोधित करते हुए दिल्ली एरिया के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों (विशिष्ट सेवा मेडल) ने बताया कि इस बार इंडियन आर्मी का दस्ता ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन में कर्तव्य पथ से गुजरेगा। बैटल एरे का मतलब है युद्ध जैसी रचना, जिसमें सेना के अलग-अलग हिस्से उसी क्रम में आगे बढ़ते हैं, जैसे वे असली लड़ाई में करते हैं।

उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब गणतंत्र दिवस परेड में इस तरह की कॉम्बटाइज्ड प्रेजेंटेशन दिखाई जाएगी। यानी प्लेटफॉर्म सिर्फ खड़े-खड़े नहीं दिखेंगे, बल्कि यह बताया जाएगा कि युद्ध के दौरान कौन-सा हिस्सा पहले आता है और कौन-सा बाद में। (Battle Array Republic Day 2026)

सबसे आगे होंगे निगरानी और टोही दस्ते

बैटल एरे की शुरुआत इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी निगरानी और टोही दस्तों से होगी। इसमें हाई मोबिलिटी रेक्की व्हीकल्स, सर्विलांस ड्रोन, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्स से लैस वाहन शामिल होंगे।

इन दस्तों का काम युद्ध से पहले दुश्मन की स्थिति, मूवमेंट और ठिकानों की जानकारी जुटाना होता है। यही वजह है कि बैटल एरे में इन्हें सबसे आगे रखा गया है। (Battle Array Republic Day 2026)

मैकेनाइज्ड फोर्स और टैंकों की एंट्री

इसके बाद मैकेनाइज्ड फोर्स यानी बख्तरबंद और टैंक यूनिट्स दिखाई देंगी। इस बार परेड में 61 कैवेलरी का माउंटेड कॉलम भी दिखेगा, जो भारतीय सेना की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित कैवेलरी यूनिट है। इसके साथ-साथ टी-90 भीष्म टैंक, एमबीटी अर्जुन, बीएमपी-2 सारथ, और नाग मिसाइल सिस्टम (नामिस-2) को भी उसी क्रम में दिखाया जाएगा, जैसे वे युद्ध के दौरान आगे बढ़ते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर ड्रोन, एटीजीएम काउंटर सिस्टम और एडवांस्ड सेंसर भी माउंटेड दिखाई देंगे। (Battle Array Republic Day 2026)

आसमान से मिलेगा एयर सपोर्ट

बैटल एरे में जमीन के साथ-साथ एयर सपोर्ट भी दिखाया जाएगा। इसमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव, रुद्र, अपाचे-64, और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड शामिल होंगे। इन हेलीकॉप्टरों को दिखाने का मकसद है कि युद्ध के समय जमीनी दस्तों को हवाई कवर कैसे मिलता है। (Battle Array Republic Day 2026)

आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम का दम

इसके बाद परेड में लंबी दूरी की मार करने वाले हथियार दिखाए जाएंगे। इनमें एटीएजीएस (एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम), धनुष 155 एमएम तोप, और यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (यूआरएलएस) और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल शामिल होंगी। यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 150 से 300 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं।

यह हिस्सा दिखाएगा कि किस तरह लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला किया जाता है, ताकि आगे बढ़ रही टुकड़ियों को रास्ता साफ मिले। (Battle Array Republic Day 2026)

बैटल एरे में एयर डिफेंस

बैटल एरे में एयर डिफेंस को भी उसी तरह दिखाया जाएगा, जैसे युद्ध में होता है। इसमें एल-70, आकाश मिसाइल सिस्टम, और बराक-8 जैसे मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम शामिल होंगे। ये सिस्टम जमीन पर मौजूद सैनिकों और प्लेटफॉर्म्स को हवाई हमलों से सुरक्षा देते हैं।

इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर की झलक

बैटल एरे का एक अहम हिस्सा होगा इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर (आईओसी)। यही वह जगह होती है, जहां युद्ध के दौरान अलग-अलग सेंसर, ड्रोन और रडार से मिली जानकारी को एक साथ देखा और समझा जाता है। परेड में इसे प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाएगा, ताकि लोग समझ सकें कि आधुनिक युद्ध में फैसले कैसे लिए जाते हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

ड्रोन, रोबोटिक सिस्टम और नई तकनीक

इस बार परेड में अनमैंड ग्राउंड व्हीकल्स (यूजीवी), ऑल टेरेन व्हीकल (एटीवी), लाइट स्ट्राइक व्हीकल (एलएसवी), रोबोटिक म्यूल्स, और रोबोटिक डॉग्स भी दिखाई देंगे। इसके साथ ड्रोन शक्ति वाहन भी होगा, जो ड्रोन की मरम्मत, बैटरी चार्जिंग और फील्ड सपोर्ट के लिए इस्तेमाल होता है। (Battle Array Republic Day 2026)

लॉजिस्टिक्स और एनिमल कंटिंजेंट

बैटल एरे का आखिरी हिस्सा लॉजिस्टिक्स यानी रसद और सपोर्ट सिस्टम का होगा। इसमें वे वाहन और साधन दिखाए जाएंगे, जो सैनिकों तक गोला-बारूद, ईंधन और जरूरी सामान पहुंचाते हैं।

इसके साथ-साथ एनिमल कंटिंजेंट भी परेड में शामिल होगा। इसमें बैक्ट्रियन कैमल्स, जंस्कार पोनी, और डॉग्स विद हैंडलर्स दिखाए जाएंगे। ये जानवर हिमालय और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में सेना के लिए आज भी बेहद अहम हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

पहली बार भैरव लाइट कमांडो बटालियन

इस साल परेड में भैरव लाइट कमांडो बटालियन भी पहली बार दिखाई देगी। यह यूनिट तेज़ कार्रवाई और विशेष अभियानों के लिए तैयार की गई है।

पूरा प्रदर्शन 15 मिनट का

यह पूरा बैटल एरे प्रदर्शन करीब 15 मिनट में पूरा होगा। परेड में कुल 18 मार्चिंग कंटिंजेंट और 13 बैंड हिस्सा लेंगे। इसके साथ-साथ फ्लाई-पास्ट में राफेल, एसयू-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच और एमआई-17 जैसे विमान और हेलीकॉप्टर अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। (Battle Array Republic Day 2026)

कितने लोग होंगे परेड का हिस्सा

इस साल परेड में करीब 6,050 जवान हिस्सा लेंगे। इसमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता भी शामिल होंगे। कुल मिलाकर सेना के छह मार्चिंग कंटिंजेंट होंगे, जबकि नौसेना और वायुसेना एक-एक मार्चिंग कंटिंजेंट के साथ परेड में शामिल होंगी। (Battle Array Republic Day 2026)

फ्लाई-पास्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम

परेड के दौरान 29 एयरक्राफ्ट का फ्लाई-पास्ट होगा, जिसमें फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। परेड के अंत में करीब 2,500 कलाकारों का सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा, जो भारत की सभ्यता, संस्कृति और प्रगति को दर्शाएगा।

परेड में 514 महिला कैडेट्स

इस वर्ष 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में महिलाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परेड और उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में कुल करीब 514 महिला कैडेट्स और प्रतिभागी शामिल होंगी। इनमें सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सहयोगी दस्तों की महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में महिला कलाकार भाग लेंगी। गणतंत्र दिवस परेड में शामिल महिला कैडेट्स अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिनमें मार्चिंग कंटिंजेंट, सहायक दल और आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं। (Battle Array Republic Day 2026)

गणतंत्र दिवस की शुरुआत कैसे होगी

मेजर जनरल ढिल्लों ने बताया कि 77वीं गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। यह परेड रायसीना हिल्स और विजय चौक से होते हुए कर्तव्य पथ, इंडिया गेट, तिलक मार्ग के रास्ते आगे बढ़ेगी। परेड की कुल अवधि लगभग 90 मिनट होगी।

गणतंत्र दिवस के दिन सबसे पहले देश के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। माननीय प्रधानमंत्री नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को नमन करेंगे। इसके बाद परेड की औपचारिक शुरुआत होगी। माननीय राष्ट्रपति सलामी लेंगी और राष्ट्रगान के दौरान इस वर्ष के मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

इस बार परेड के मुख्य अतिथि यूरोपियन यूनियन से होंगे। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट परेड में मौजूद रहेंगी। यूरोपियन यूनियन का दस्ता कर्नल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में परेड में शामिल होगा। (Battle Array Republic Day 2026)

इस साल गणतंत्र दिवस पर क्यों खास है ऑपरेशन सिंदूर का ट्राई-सर्विस टेबलो, क्यों हो रही है चर्चा

Republic Day Parade 2026
Operation Sindoor Republic Day 2026: Tri-Services tableau showcases India’s joint military power

Republic Day Parade 2026: इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्यपथ पर भारत की सैन्य ताकत और तीनों सेनाओं के आपसी तालमेल की बड़ी झलक देखने को मिलेगी। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से एक विशेष ट्राई-सर्विस झांकी पेश की जाएगी, जिसका नाम है “ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस”। यह टेबलो थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त क्षमता, सटीक मारक शक्ति और स्वदेशी सैन्य प्रणालियों को दर्शाएगा।

हेडक्वॉर्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ-IDS) के एयर कमोडोर मनीष सभरवाल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आज हर बच्चे की जुबान पर है और इसी वजह से इसे गणतंत्र दिवस परेड में एक कॉम्पैक्ट लेकिन प्रभावशाली रूप में दिखाया जा रहा है।

एयर कमोडोर मनीष सभरवाल के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर कोई संयुक्त अभियान किया हो, लेकिन जिस स्तर की जॉइंटनेस यानी आपसी तालमेल इस ऑपरेशन में देखने को मिला, वह पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि झांकी में तीनों सेनाओं के सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक तत्वों को शामिल किया गया है, ताकि लोग समझ सकें कि यह अभियान कैसे अंजाम दिया गया। (Republic Day Parade 2026)

Republic Day Parade 2026: प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ा है ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर को प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण से जोड़ा गया है, जिसमें आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की परिकल्पना शामिल है। इस ऑपरेशन के जरिए यह संदेश दिया गया है कि भारत अब अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए खुद पर निर्भर है और सैन्य शक्ति के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

टेबलो में इस पूरे ऑपरेशन को क्रमबद्ध तरीके से दिखाया जाएगा, ताकि आम लोग भी यह समझ सकें कि तीनों सेनाएं किस तरह एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर काम करती हैं। (Republic Day Parade 2026)

ऑपरेशन की शुरुआत: पहले ही रात में नौ आतंकी ठिकाने ध्वस्त

एयर कमोडोर सभरवाल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण में पहली ही रात नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें से सात ठिकाने थलसेना द्वारा और दो ठिकाने वायुसेना द्वारा नष्ट किए गए। इसके बाद दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, मिलिट्री टारगेट्स और अन्य अहम ठिकानों को भी वायुसेना ने निशाना बनाया। यही पूरा क्रम गणतंत्र दिवस की झांकी में प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाएगा। (Republic Day Parade 2026)

सु-30 एमकेआई और ब्रह्मोस की झलक

झांकी में सु-30 एमकेआई लड़ाकू विमान द्वारा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के प्रतीकात्मक लॉन्च को भी दिखाया गया है। एयर कमोडोर सभरवाल ने बताया कि इस हमले में दुश्मन के एक एयरबेस को नष्ट किया गया और वहां मौजूद हैंगर को भी तबाह कर दिया गया। इन हैंगरों के भीतर कई विमान मौजूद थे, जिन्हें इस हमले में नुकसान पहुंचा। यही दृश्य झांकी में भी साफ तौर पर नजर आएगा। (Republic Day Parade 2026)

एस-400- लॉन्ग रेंज किलर

ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका भी खास रही। एयर कमोडोर सभरवाल के अनुसार, यह पहली बार था जब किसी एयर डिफेंस हथियार से 300 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर सबसे लंबी रेंज का शॉट लिया गया। इस कार्रवाई में दुश्मन के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल (एडब्ल्यूसी) एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया। झांकी में इस सिस्टम को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है।

एयर कमोडोर सभरवाल ने कहा कि झांकी में जो कुछ भी दिखाया गया है, वह पहले से ही जनता की यादों में मौजूद है। यह झांकी उसी संकल्प को एक बार फिर दोहराने का माध्यम है कि अगर देश एकजुट होकर लड़े, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। (Republic Day Parade 2026)

18 से 88 घंटों में ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर 18 से 88 घंटों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया गया। इसमें आतंकी लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर, कमांड एंड कंट्रोल नोड्स, लॉजिस्टिक्स हब, एयर डिफेंस सिस्टम और गोला-बारूद भंडारण ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस पूरे अभियान में यह ध्यान रखा गया कि न्यूनतम कोलेटरल डैमेज हो। (Republic Day Parade 2026)

ट्राई-सर्विस टेबलो में क्या-क्या दिखेगा

HQ-IDS द्वारा प्रस्तुत इस ट्राई-सर्विस टेबलो का पहला हिस्सा भारतीय नौसेना की भूमिका को दिखाएगा। इसमें समुद्री मोर्चे पर नौसेना की पकड़ और समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों को रोकने की क्षमता को दर्शाया जाएगा। यह हिस्सा यह बताता है कि समुद्री सीमा पर भारत की स्थिति मजबूत है और किसी भी विरोधी को समुद्र में खुली छूट नहीं दी जाएगी।

ब्रह्मोस के साथ वायुसेना की ताकत

टेबलो में आगे एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान को दिखाया जाएगा, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लॉन्च करता है। इस हमले के जरिए दुश्मन के मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर को नष्ट करते हुए दिखाया जाएगा। यह भारत की सटीक मारक क्षमता का प्रतीक होगा।

नौसेना के बाद टेबलो में भारतीय थलसेना की भूमिका दिखाई जाएगी। इसमें एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों को दर्शाया जाएगा, जो सटीक और नियंत्रित फायरपावर के लिए जानी जाती हैं। यह हिस्सा बताता है कि थलसेना किस तरह दुश्मन की मंशा को सटीक हमलों के जरिए निष्क्रिय करती है। इसके साथ ही एस-400, एल-70 सिस्टम जैसे हथियारों की डिटरेंस पोजिशन को दर्शाया गया है। इन तोपों के पीछे आकाश एयर डिफेंस सिस्टम को दिखाया जाएगा, जो भारत की बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा प्रणाली का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जमीन और आसमान दोनों में सुरक्षा को लेकर भारत पूरी तरह सतर्क है। (Republic Day Parade 2026)

टेबलो का मध्य भाग ऑपरेशन सिंदूर के सबसे अहम चरण को दर्शाएगा। इसमें भारत की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की झलक मिलेगी, जिसमें तेज प्रतिक्रिया, सीमित लेकिन प्रभावी कार्रवाई और उच्च सटीकता पर जोर दिया गया है।

इस क्रम में पहले हारोप लॉइटरिंग म्यूनिशन को दिखाया जाएगा, जो दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को नष्ट करता है। यह हिस्सा भारत की मानवरहित और सटीक युद्ध क्षमता को दर्शाता है।

इसके बाद राफेल लड़ाकू विमान, जो स्कैल्प मिसाइल से लैस है, आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करता हुआ दिखाया जाएगा। यह दृश्य यह बताता है कि भारत अब लंबी दूरी से भी सटीक और प्रभावी हमला करने में सक्षम है। (Republic Day Parade 2026)

पूर्व और पश्चिम की प्रतीकात्मक सीमा

झांकी में एक प्रतीकात्मक बॉर्डर भी दिखाया गया है। दाएं से बाएं देखने पर पूरब की ओर भारत और पश्चिम की ओर पाकिस्तान को दर्शाया गया है। इस पूरे मॉडल में ऑपरेशन का क्रम आंखों के सामने खुलता हुआ दिखाई देगा।

ब्रांड इंडिया डिफेंस की ताकत

ऑपरेशन सिंदूर को ब्रांड इंडिया डिफेंस से ताकत मिली। यह झांकी दिखाती है कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब केवल बराबरी नहीं कर रहीं, बल्कि कई मामलों में नेतृत्व कर रही हैं। इसमें ट्राई-सर्विस इंटरऑपरेबिलिटी, सिविल-मिलिट्री फ्यूजन, निर्णायक जवाबी कार्रवाई और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन को भारत की ताकत की रीढ़ के रूप में दिखाया गया है। (Republic Day Parade 2026)

Explainer: क्या है मिलिटरी क्वांटम मिशन? सेना के लिए क्यों अहम है CDS का नया फ्रेमवर्क

Military Quantum Mission Policy Framework released to integrate quantum technologies in Indian Armed Forces
Military Quantum Mission Policy Framework released to integrate quantum technologies in Indian Armed Forces

Military Quantum Mission Policy Framework: भारत की सेनाओं को फ्यूचर फोर्स बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 22 जनवरी को मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह डॉक्यूमेंट भारतीय सेनाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना में क्वांटम टेक्नोलॉजी को लागू करने का रोडमैप तय करेगा। यह फ्रेमवर्क ऐसे समय जारी हुआ है, जब दुनिया भर में सैन्य तकनीक तेजी से बदल रही है और युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। कम्यूनिकेशन, डेटा, सेंसर और कंप्यूटिंग अब युद्ध के अहम हिस्से बन चुके हैं।

क्या है Military Quantum Mission Policy Framework

मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क एक कॉम्प्रीहेंसिव पॉलिसी डॉक्यूमेंट है। इसमें यह बताया गया है कि भारतीय सेनाओं में क्वांटम टेक्नोलॉजी को किस तरह से अपनाया जाएगा, किन क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होगा और इसके लिए किस तरह का इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नीति, रोडमैप और कार्यान्वयन की रूपरेखा भी शामिल है। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी को एक संगठित और संयुक्त तरीके से सेना में शामिल करना है। (Military Quantum Mission Policy Framework)

क्वांटम टेक्नोलॉजी क्या होती है

क्वांटम टेक्नोलॉजी विज्ञान की उस शाखा पर आधारित है, जो बहुत छोटे कणों जैसे इलेक्ट्रॉन और फोटॉन के व्यवहार को समझती है। इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके ऐसी तकनीक विकसित की जाती है, जो पारंपरिक तकनीक से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सटीक होती है।

डिफेंस सेक्टर में क्वांटम टेक्नोलॉजी का मतलब है बेहद सुरक्षित कम्यूनिकेशन, तुरंत फैसले लेने वाली कंप्यूटिंग क्षमता और अत्यधिक सटीक सेंसर। (Military Quantum Mission Policy Framework)

फ्रेमवर्क के चार मुख्य स्तंभ कौन-से हैं

इस नीति दस्तावेज में क्वांटम टेक्नोलॉजी के चार मुख्य स्तंभ तय किए गए हैं। पहला स्तंभ है क्वांटम कम्युनिकेशन। इसका उद्देश्य ऐसी संचार व्यवस्था तैयार करना है, जिसे बिना पता चले कोई सुन या हैक न कर सके। यदि कोई संदेश से छेड़छाड़ करता है, तो उसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है।

दूसरा स्तंभ है क्वांटम कंप्यूटिंग। यह पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेजी से जटिल गणनाएं कर सकती है। सैन्य अभियानों में इससे बड़े डेटा का विश्लेषण और तेज फैसले संभव हो पाते हैं।

तीसरा स्तंभ है क्वांटम सेंसिंग एंड मेट्रोलॉजी। इसमें ऐसे सेंसर शामिल हैं, जो बहुत सूक्ष्म बदलावों को भी पहचान सकते हैं। इससे निगरानी, नेविगेशन और लक्ष्य पहचान में मदद मिलती है।

चौथा स्तंभ है क्वांटम मटेरियल्स एंड डिवाइसेस। इसमें उन खास सामग्री और उपकरणों का विकास शामिल है, जिनसे क्वांटम तकनीक को जमीन पर लागू किया जा सके। (Military Quantum Mission Policy Framework)

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह फ्रेमवर्क

दुनिया भर में युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस, स्पेस और सूचना क्षेत्र में भी होती है। ऐसे में सुरक्षित संचार और तेज निर्णय लेने की क्षमता बेहद जरूरी हो गई है।

मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त का महत्व बढ़ता जाएगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)

नेशनल क्वांटम मिशन से क्या है संबंध

यह सैन्य फ्रेमवर्क नेशनल क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के अनुरूप तैयार किया गया है। नेशनल क्वांटम मिशन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी और इसमें रक्षा बलों को एक अहम भागीदार माना गया है।

सरकार ने इस मिशन के लिए 6003 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो 2030–31 तक लागू रहेगा। मिलिटरी क्वांटम मिशन उसी राष्ट्रीय ढांचे के भीतर सेना की जरूरतों को संबोधित करता है। (Military Quantum Mission Policy Framework)

क्यों जरूरी है क्वांटम टेक्नोलॉजी का सैन्य उपयोग

आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है। संचार, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोसेसिंग और सटीक निगरानी आज युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में क्वांटम टेक्नोलॉजी को रक्षा क्षेत्र में अपनाने की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

मिलिटरी क्वांटम मिशन फ्रेमवर्क इस बात पर जोर देता है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी। सुरक्षित संचार, तेज निर्णय क्षमता और सटीक सेंसिंग के बिना आधुनिक सैन्य अभियान सफल नहीं हो सकते। (Military Quantum Mission Policy Framework)

सिविल-मिलिट्री फ्यूजन पर क्यों दिया गया जोर

फ्रेमवर्क में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन को अहम माना गया है। इसका अर्थ है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी के विकास और उपयोग में केवल सेना ही नहीं, बल्कि सरकारी विभाग, रिसर्च संस्थान, शिक्षण संस्थान और उद्योग भी शामिल होंगे।

दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि इसके लिए अलग-अलग सरकारी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मिलाकर समर्पित गवर्निंग बॉडीज बनाई जाएंगी। इन संस्थाओं का काम क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े लक्ष्यों और माइलस्टोन को तय करना होगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)

तीनों सेनाओं में जॉइंटनेस पर फोकस

मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क में जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन को अहम माना गया है। इसका अर्थ है कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में क्वांटम टेक्नोलॉजी का उपयोग अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा रणनीति के तहत किया जाएगा।

इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और तकनीक को तेजी से अपनाया जा सकेगा। फ्रेमवर्क के अनुसार, क्वांटम टेक्नोलॉजी को अलग-थलग तरीके से लागू करने के बजाय साझा दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। (Military Quantum Mission Policy Framework)

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे मौजूद

मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क के विमोचन के मौके पर सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित उपस्थित थे।

इन सभी अधिकारियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी को तीनों सेनाओं में एक साथ अपनाने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है। (Military Quantum Mission Policy Framework)

यह दस्तावेज आगे क्या भूमिका निभाएगा

मिलिटरी क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क को एक आधार दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है। इसके आधार पर आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में क्वांटम टेक्नोलॉजी को शामिल करने से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। यह डॉक्यूमेंट यह भी बताता है कि आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में क्वांटम तकनीक को किस तरह से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और इसके लिए किन संस्थानों के बीच तालमेल जरूरी होगा। (Military Quantum Mission Policy Framework)

कर्तव्य पथ पर दिखेगी DRDO की सबसे खतरनाक मिसाइल, मैक 10 की रफ्तार से दुश्मन पर करेगी वार

Republic Day 2026 DRDO
File Photo

Republic Day 2026 DRDO: इस साल 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत अपनी डिफेंस पावर और स्वदेशी तकनीक का भव्य प्रदर्शन करने जा रहा है। इस बार डीआरडीओ देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कई अहम और अत्याधुनिक तकनीकों को कर्तव्य पथ और भारत पर्व में प्रदर्शित करेगा। इनमें सबसे प्रमुख हैं लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (एलआर-एएसएचएम) और डीआरडीओ का विशेष टेबल्यू– ‘कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक तकनीक’।

Republic Day 2026 DRDO: कर्तव्य पथ पर हाइपरसोनिक मिसाइल की ताकत

डीआरडीओ पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में एलआर-एएसएचएम मिसाइल को उसके लॉन्चर के साथ कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित करेगा। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और चलती दोनों तरह की मैरीटाइम टार्गेट्स को निशाना बनाने में सक्षम है।

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पूरी तरह स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और ज्यादा सटीकता वाले सेंसर पैकेज लगाए गए हैं। डीआरडीओ के अनुसार, यह मिसाइल अलग-अलग प्रकार के पेलोड ले जा सकती है। (Republic Day 2026 DRDO)

मैक 10 की रफ्तार से दुश्मन पर वार

एलआर-एएसएचएम मिसाइल क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर उड़ान भरती है। इसकी शुरुआती रफ्तार मैक 10 तक जाती है और उड़ान के दौरान यह औसतन मैक 5 की रफ्तार बनाए रखती है। यह मिसाइल कई बार “स्किप” करते हुए आगे बढ़ती है, जिससे इसका पता लगाना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।

डीआरडीओ ने इसमें ऐसे स्वदेशी सेंसर लगाए हैं, जो अंतिम चरण में चलते हुए टारगेट को भी सटीकता से पहचान सकते हैं। कम ऊंचाई पर बेहद तेज रफ्तार और ज्यादा मैन्युवर क्षमता के चलते यह मिसाइल अपने अधिकांश मार्ग में दुश्मन के जमीनी और जहाज आधारित रडार की पकड़ से बाहर रहती है। (Republic Day 2026 DRDO)

दो स्टेज प्रोपल्शन सिस्टम

एलआर-एएसएचएम मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन रॉकेट मोटर सिस्टम लगाया गया है। पहले स्टेज का काम मिसाइल को जरूरी हाइपरसोनिक रफ्तार तक पहुंचाना होता है। जब पहली स्टेज का काम पूरा कर हो जाता है, तो वह अलग हो जाता है। इसके बाद दूसरे चरण के खत्म होने पर मिसाइल बिना इंजन के वातावरण में ग्लाइड करते हुए आवश्यक मोड़ लेती है और टारगेट पर हमला करती है। (Republic Day 2026 DRDO)

भारत पर्व में नौसेना की पनडुब्बी शक्ति का प्रदर्शन

डीआरडीओ का विशेष टेबल्यू भारत पर्व में 26 जनवरी से 31 जनवरी तक लाल किले पर आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इस टेबल्यू की थीम है ‘कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक तकनीक’। इसमें भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की ताकत बढ़ाने वाली स्वदेशी प्रणालियों को दिखाया जाएगा।

इनमें प्रमुख रूप से इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (आईसीएस), वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो (डब्ल्यूजीएचडब्ल्यूटी) और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्रणाली शामिल हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

क्या है इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट

आईसीएस एक आधुनिक पनडुब्बी आधारित डिफेंस सिस्टम है, जो पानी के अंदर युद्ध और एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए बेहद अहम मानी जाती है। यह “सिस्टम ऑफ सिस्टम्स” के रूप में काम करती है और पनडुब्बी को चारों ओर की स्थिति की पूरी जानकारी देती है।

इस प्रणाली के जरिए खतरे की तस्वीर साफ मिलती है, जिससे हथियारों के चयन, लॉन्च और गाइडेंस जैसे सामरिक फैसले आसानी से लिए जा सकते हैं। आईसीएस को विकसित करने में डीआरडीओ की आठ प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया है, जिसमें देशभर के करीब 150 उद्योग और एमएसएमई भी शामिल रहे हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

हैवी वेट टॉरपीडो से समुद्र में बढ़ेगी मारक क्षमता

वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो एक आधुनिक पनडुब्बी से छोड़ा जाने वाला हथियार है, जिसे दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह एंटी-सबमरीन युद्ध में एक बेहद घातक हथियार माना जाता है और सभी पनडुब्बियों का मुख्य हथियार होता है।

भारतीय नौसेना अपने सबमरीन बेड़े का लगातार विस्तार कर रही है, ताकि खुले समुद्र यानी ब्लू वॉटर नेवल वॉरफेयर में बढ़त बनाए रखी जा सके। इसके लिए तेज गति, लंबी दूरी और अधिक समय तक काम करने वाले स्वदेशी टॉरपीडो की जरूरत है, जिसे डीआरडीओ पूरा कर रहा है। (Republic Day 2026 DRDO)

एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन से बढ़ेगी पनडुब्बियों की क्षमता

एआईपी सिस्टम से पनडुब्बियों को लंबे समय तक पानी के नीचे रहने की क्षमता मिलती है, जिससे उनकी स्टेल्थ यानी छिपकर काम करने की ताकत बढ़ जाती है। यह प्रणाली फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल पर आधारित है और इसमें ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर लगाया गया है।

यह सिस्टम हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के जरिए बिजली पैदा करता है। तैयार बिजली को पनडुब्बी की पावर लाइन में भेजा जाता है, जिससे पनडुब्बी बिना शोर किए पानी के नीचे आगे बढ़ती है। यह तकनीक मॉड्यूलर है और भविष्य की पनडुब्बियों में भी इस्तेमाल की जा सकती है। (Republic Day 2026 DRDO)

परेड में दिखेंगे डीआरडीओ के बाकी हथियार

कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में सशस्त्र बलों की टुकड़ियों के साथ डीआरडीओ द्वारा विकसित कई अन्य सिस्टम भी दिखाए जाएंगे। इनमें अर्जुन मेन बैटल टैंक, नाग मिसाइल सिस्टम (नामिस-II), एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल शामिल हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भारतीय वायुसेना दिखाएगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन, ‘प्रहार’ में तीनों सेनाएं आएंगी एकसाथ

Republic Day 2026 Flypast

Republic Day 2026 Flypast: इस साल गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ के ऊपर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर खास फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। भारतीय वायुसेना ने फ्लाइपास्ट और एरियल फॉर्मेशन को इस तरह डिजाइन किया है, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की झलक मिलेगी। पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में वायुसेना के साथ भारतीय सेना और नौसेना के प्लेटफॉर्म भी उड़ान भरते दिखेंगे, जो दिखाएंगे कि तीनों सेनाए अब जॉइंटनेस की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। इस वर्ष का रिपब्लिक डे फ्लाइपास्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला गणतंत्र दिवस है।

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर राजेश देशवाल ने बतायाकि इस बार का फ्लाइपास्ट कुल आठ फॉर्मेशन में होगा, जिसमें 29 एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे। इनमें 16 फाइटर एयरक्राफ्ट, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 9 हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। कर्तव्य पथ पर फ्लाई पास्ट में ध्वज, प्रहार, वरुण, अर्जुन, बजरंग और विजय जैसे फॉर्मेशन में एयर क्राफ्ट फ्लाई करेंगे। इनमें सबसे खास ऑपेरशन सिंदूर फॉर्मेशन होगा। इसमें दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई 30 और एक जगुवार हिस्सा लेंगे। ये सभी वे एयरक्राफ्ट हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लिया था। (Republic Day 2026 Flypast)

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Republic Day 2026 Flypast: दो हिस्सों में बंटा फ्लाइपास्ट

विंग कमांडर राजेश देशवाल के मुताबिक फ्लाइपास्ट को दो ब्लॉक में बांटा गया है। पहला ब्लॉक परेड के दौरान होगा और दूसरा ब्लॉक परेड समाप्त होने के बाद। पहले ब्लॉक में चार फॉर्मेशन होंगी, जो परेड के साथ तालमेल में आसमान में दिखाई देंगी। दूसरा ब्लॉक भी चार फॉर्मेशन का होगा, जिसमें हाई-इम्पैक्ट एरियल मैन्यूवर्स दिखाए जाएंगे।

पहले ब्लॉक की शुरुआत ध्वज फॉर्मेशन से होगी। इसमें चार सी-17 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ान भरेंगे। लीड एयरक्राफ्ट राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ान भरेगा, जबकि पीछे के तीन एयरक्राफ्ट थल सेना, नौसेना और वायुसेना के ध्वज के साथ आसमान में दिखाई देंगे। इस दौरान दो एयरक्राफ्ट दर्शकों पर फूलों की वर्षा भी करेंगे। (Republic Day 2026 Flypast)

इसके बाद प्रहार फॉर्मेशन आएगी, जिसमें तीन एएलएच हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। इनमें दो हेलिकॉप्टर भारतीय थल सेना के और एक वायुसेना का होगा। यह फॉर्मेशन जमीनी लड़ाई में हेलिकॉप्टरों की भूमिका और इंटर-सर्विस कोऑर्डिनेशन को दर्शाएगी।

इसके तुरंत बाद गरुड़ फॉर्मेशन दिखाई देगी। इसमें एक एएलएच, एक अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और एक एलसीएच शामिल होगा। यह फॉर्मेशन बताती है कि कैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म एक साथ मिलकर युद्ध के मैदान में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। (Republic Day 2026 Flypast)

‘सिंदूर’ फॉर्मेशन: मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट भरेंगे उड़ान

इस साल का सबसे बड़ा आकर्षण ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन होगी। यह एक सिंगल लेकिन बेहद शक्तिशाली कॉम्पोजिट फॉर्मेशन होगी, जिसमें भारत के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट एक साथ उड़ान भरेंगे। इसमें दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई 30 और एक जगुवार हिस्सा लेंगे।

ये सभी फाइटर एक स्पीयरहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे, जो भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल डोमिनेंस और कॉम्बैट रेडीनेस का प्रतीक होगा। यह फॉर्मेशन सीधे तौर पर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित है और यह संदेश देती है कि वायुसेना किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। (Republic Day 2026 Flypast)

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दूसरे ब्लॉक में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट

दूसरे ब्लॉक की शुरुआत ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट फॉर्मेशन से होगी, जिसमें सी-130 और सी-295 शामिल होंगे। इसके बाद समुद्री निगरानी और फाइटर सपोर्ट की भूमिका दिखाने वाली फॉर्मेशन आएगी, जिसमें पी-8आई और सुखोई-30 एमकेआई साथ उड़ान भरेंगे।

इसके बाद वजरंग फॉर्मेशन दिखाई देगी, जिसमें फाइटर एयरक्राफ्ट एरोबेटिक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। यह फॉर्मेशन पायलटों की ट्रेनिंग, स्किल और तकनीकी क्षमता को दर्शाएगी। (Republic Day 2026 Flypast)

फ्लाइपास्ट का समापन एक सिंगल राफेल फाइटर से होगा, जिसका कॉलसाइन ‘विजय’ होगा। यह एयरक्राफ्ट राष्ट्रपति के सामने पहुंचकर वर्टिकल क्लाइम्ब करेगा और अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा। यह क्षण पूरे फ्लाइपास्ट का सबसे रोमांचक पल माना जाता है। (Republic Day 2026 Flypast)

झांकी में क्या होगा खास: ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’

इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर डिफेंस सर्विसेज वेटरंस टेबल्यू भी खास आकर्षण होगा। इस झांकी की थीम है ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’, जिसे भारतीय वायुसेना ने कॉन्सेप्चुअलाइज और डिजाइन किया है। झांकी को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।

झांकी के आगे वाले हिस्से में देश के सभी सैन्य संघर्षों को दर्शाया गया है। सबसे ऊपर अमर जवान ज्योति की आकृति होगी, जो बलिदान का प्रतीक है। इसके ठीक नीचे एक घूमती हुई सिलिंड्रिकल दीवार होगी, जिस पर 1965 और 1971 के युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष को थ्री-डायमेंशनल रूप में दिखाया जाएगा। हर युद्ध को करीब 10 सेकंड का समय मिलेगा, जिससे दर्शक साफ तौर पर अलग-अलग युद्धों की झलक देख सकें। (Republic Day 2026 Flypast)

1965 के युद्ध में इस्तेमाल हुए टैंक और वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट, 1971 में टी-55 टैंक और आईएनएस राजपूत द्वारा पााकिस्तान की पनडुब्बी आईएनएस गाजी को डुबाने की घटना, और कारगिल युद्ध में मिराज-2000 और जगुआर की भूमिका को खास तौर पर दर्शाया जाएगा।

झांकी का पिछला हिस्सा युद्ध के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों के योगदान को दिखाएगा। इसमें स्वदेशी रक्षा निर्माण, इंडस्ट्री, मेडिकल सेवाएं, योग, कृषि और आपदा राहत कार्यों में वेटरन्स की भूमिका को दर्शाया जाएगा। इस हिस्से में एलईडी लाइटिंग और घूमते हुए गियर ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को मजबूत करेंगे। (Republic Day 2026 Flypast)

झांकी में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल छह वेटरंस भी मौजूद रहेंगे, जो दर्शकों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन करेंगे। यह हिस्सा दर्शकों के लिए एक भावनात्मक सरप्राइज होगा।

इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में

भारतीय वायुसेना के डायरेक्टोरेट ऑफ सेरेमोनियल हेडक्वार्टर्स से एयर कमोडोर इमरान जैदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष वायुसेना लीड सर्विस की भूमिका में है। गणतंत्र दिवस समारोह की हर गतिविधि को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और निर्णय लेने की ताकत साफ तौर पर दिखाई दे। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से होगी शुरुआत

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि समारोह से होगी, जहां प्रधानमंत्री देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करेंगे। इसके बाद एक इंटर-सर्विस गार्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना से सात-सात जवान शामिल होंगे। इस संयुक्त गार्ड की अगुवाई इस वर्ष वायुसेना करेगी और इसकी कमान स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कल्याण के हाथों में होगी। (Republic Day 2026 Flypast)

राष्ट्रपति के आगमन के साथ परेड की औपचारिक शुरुआत

कर्तव्य पथ पर रिपब्लिक डे परेड की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सलामी दिए जाने के साथ होगी। इस दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति का आगमन भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ की आवाज़ में घोषित किया जाएगा, जो इस समारोह का एक विशेष और गौरवपूर्ण क्षण होगा।

भारतीय वायुसेना का मार्चिंग कंटिंजेंट

भारतीय वायुसेना का सेरेमोनियल मार्चिंग कंटिंजेंट इस वर्ष खास तौर पर आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस कंटिंजेंट में चार अधिकारी और 144 एयर वॉरियर्स शामिल होंगे, जो 12 रो और 12 कॉलम की बॉक्स फॉर्मेशन में मार्च करेंगे। इस कंटिंजेंट का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार करेंगे। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर लिखिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश भी अधिकारी के रूप में शामिल रहेंगे।

इन एयर वॉरियर्स का चयन भारतीय वायुसेना के अलग-अलग यूनिट्स से एक कड़े और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के जरिए किया गया है। परेड में शामिल होने से पहले इन जवानों ने लगभग दो महीने तक रोजाना 7 से 8 घंटे की कठिन प्रैक्टिस की है, जो सुबह 4 बजे से शुरू होती है। इसी अनुशासन और समर्पण की वजह से वायुसेना पहले भी कई बार बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट का खिताब जीत चुकी है। (Republic Day 2026 Flypast)

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एयरफोर्स बैंड: पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार

मार्चिंग के दौरान 75 सदस्यीय भारतीय वायुसेना बैंड अपने शानदार संगीत से माहौल को देशभक्ति से भर देगा। इस बैंड में 66 अग्निवीर और पहली बार 9 महिला अग्निवीर संगीतकार भी शामिल होंगी। बैंड का नेतृत्व चीफ एरॉनिस्ट डैनियल करेंगे, जो एक अनुभवी और कुशल ड्रम मेजर हैं।

बैंड द्वारा ‘साउंड बैरियर’, ‘वायु शक्ति’, ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘लीडर योद्धा’, ‘सारे जहां से अच्छा’, ‘फ्लाइंग स्टार’ और ‘एयर बैटल’ जैसे मार्शल ट्यून्स बजाए जाएंगे। जब वायुसेना का कंटिंजेंट राष्ट्रपति के सामने से गुजरेगा, तब खास तौर पर ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाई जाएगी, जो इस परेड का यादगार क्षण बनती है। (Republic Day 2026 Flypast)

पहलगाम के बाद पाकिस्तान ने AI से फैलाई थीं झूठी कहानियां, फर्जी नैरेटिव के लिए बना रहे CDS, सेना प्रमुख और IAF चीफ के डीफ फेक वीडियोज

Pahalgam AI fake narrative

Pahalgam AI fake narrative: कश्मीर के पहलगाम में जब आतंकी घटना हुई, तब हालात केवल जमीन पर ही नहीं बिगड़े, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी एक अलग तरह की जंग शुरू हो गई। यह जंग बंदूक और बम से नहीं, बल्कि एआई-आधारित फेक नैरेटिव यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए झूठे कंटेंट से लड़ी गई। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जनवरी 2026 में जारी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फैलाई जा रही गलत सूचनाएं आज के दौर में सबसे खतरनाक सुरक्षा चुनौतियों में से एक बन चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई से बने फेक वीडियो, नकली सैटेलाइट इमेज और झूठे सैन्य दावे किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में हालात को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं।

सिपरी ने खास तौर पर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत–पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए चेताया है कि इन्फॉर्मेशन डोमेन में फैला झूठ जमीनी हालात से अलग एक नकली तस्वीर बना देता है, जिससे गलत आकलन और जल्दबाजी में लिए गए फैसले बड़े सैन्य टकराव की वजह बन सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर एआई आधारित डिसइन्फॉर्मेशन को समय रहते पहचाना और रोका नहीं गया, तो यह “मल्टी-डोमेन एस्केलेशन” को जन्म दे सकता है, जहां साइबर, सूचना और पारंपरिक सैन्य मोर्चे एक साथ भड़क सकते हैं। पहलगाम हमले के बाद सामने आए फेक नैरेटिव इसी खतरे का ताजा उदाहरण माने जा रहे हैं, जहां डिजिटल झूठ ने वास्तविक स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ही घंटों के भीतर ऐसी तस्वीरें, वीडियो और दावे वायरल होने लगे, जिनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन उनका मकसद साफ था डर फैलाना, भ्रम पैदा करना और हालात को और भड़काना। (Pahalgam AI fake narrative)

Pahalgam AI fake narrative: फेक नैरेटिव क्या होता है?

फेक नैरेटिव का मतलब सिर्फ झूठी खबर नहीं होता। यह एक सोची-समझी रणनीति होती है, जिसे इस तरह पेश किया जाता है कि लोग उसे सच मान लें। इसमें आधी सच्चाई, भावनात्मक भाषा और डर पैदा करने वाले विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। पहलगाम मामले में भी ऐसा ही हुआ। कुछ पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया गया है, कहीं यह बताया गया कि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ है, तो कहीं पूरी तरह से नकली तस्वीरें दिखाकर माहौल को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई।

एआई की मदद से यह काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब किसी को घंटों फोटो एडिटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सेकंड में डीपफेक वीडियो, एआई-जनरेटेड इमेज और नकली ऑडियो तैयार हो जाता है, जो असली जैसा दिखता है। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम के बाद सोशल मीडिया पर क्या हुआ?

घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। कुछ अकाउंट्स ने दावा किया कि यह हमला किसी बड़े युद्ध की शुरुआत है। कुछ ने यह दिखाने की कोशिश की कि हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। यहां तक कि कुछ वीडियो ऐसे भी वायरल हुए, जो किसी और देश या पुराने संघर्ष से जुड़े थे, लेकिन उन्हें पहलगाम का बताकर शेयर किया गया।

समस्या यह थी कि इन पोस्ट्स को देखकर आम लोग घबरा गए। कई लोगों ने बिना जांचे-परखे इन्हें आगे शेयर कर दिया। देखते-ही-देखते फेक नैरेटिव सैकड़ों-हजारों लोगों तक पहुंच गया। यही वह बिंदु है जहां सूचना युद्ध खतरनाक बन जाता है। (Pahalgam AI fake narrative)

डीजीआईएसपीआर ने फैलाईं फेक न्यूज

ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन डीपफेक वीडियो, एडिट किए गए फुटेज और झूठी जानकारियां सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि ऑफिशियल चैनलों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक के जरिए फैलाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान ने सूचना के जरिये हमला करने की रणनीति अपनाई और यह सब पकिस्तानी सेना की एजेंसी डीजीआईएसपीआर (DGISPR) के जरिए किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक

ऑपरेशन सिंदूर वाले दिन पाकिस्तान की तरफ से 7 एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) साइबर ग्रुप्स सक्रिय थे और 7 मई को एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक किए गए। यही नहीं, ऑपरेशन के पहले दिन ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर करीब 3 करोड़ साइबर हमले दर्ज किए गए।

पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में यूट्यूब चैनल, एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स और सरकारी हैंडल्स का इस्तेमाल फेक न्यूज फैलाने के लिए किया गया। हैरानी की बात यह थी कि 30 से 40 मिनट के अंदर एक जैसी भाषा और एक जैसे मैसेज बड़ी संख्या में पोस्ट किए गए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 43 समान थ्रेड्स से एक लाख से ज्यादा वीडियो तैयार कर दिए गए, ताकि एक ही झूठी कहानी को बार-बार फैलाया जा सके।

इस सूचना युद्ध में इन्फ्लुएंसर्स के जरिए लोगों की राय बदलने की कोशिश की गई। इस संदर्भ में ज्योति मल्होत्रा केस का जिक्र किया जा सकता है जो यह दिखाता है कि किस तरह प्रभावशाली चेहरों का इस्तेमाल किया गया। (Pahalgam AI fake narrative)

सेना प्रमुख से जुड़े 23 डीपफेक वीडियोज

ऑपरेशन सिंदूर के आठ महीने बाद भी यह सिलसिला अभी भी रुका नहीं है।  पिछले चार महीनों में 217 डीपफेक मामलों सामने आए, जिनमें से 164 भारतीय सेना से जुड़े थे। इनमें सीडीएस से जुड़े 9, थलसेना प्रमुख से जुड़े 23, वायुसेना प्रमुख से जुड़े 4 और नौसेना प्रमुख से जुड़े 3 डीपफेक शामिल हैं।

आज हालात ऐसे हो गए हैं कि जब भी कोई सैन्य प्रमुख किसी मंच से बोलता है, तो आधे घंटे के भीतर उसका एआई-आधारित डीपफेक वीडियो तैयार कर दिया जाता है, जिसमें बस थोड़े-बहुत बदलाव किए जाते हैं, ताकि वह पूरी तरह असली लगे। यह आज के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बन चुका है। (Pahalgam AI fake narrative)

एआई कैसे बना रहा है झूठ को और खतरनाक?

पहले झूठी खबरें पहचानना थोड़ा आसान था। फोटो धुंधली होती थी, वीडियो की क्वालिटी खराब होती थी या भाषा में साफ गलती दिख जाती थी। लेकिन अब एआई ने यह फर्क लगभग खत्म कर दिया है। डीपफेक टेक्नोलॉजी किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हाव-भाव इतनी सफाई से कॉपी कर सकती है कि आम आदमी के लिए सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

पहलगाम से जुड़े कुछ वीडियो में सुरक्षाबलों की कार्रवाई को गलत तरीके से दिखाया गया। कुछ में ऐसे बयान जोड़ दिए गए, जो कभी दिए ही नहीं गए थे। इन सबका मकसद सिर्फ एक था लोगों के दिमाग में शक और डर पैदा करना। (Pahalgam AI fake narrative)

क्यों होता है ऐसा फेक नैरेटिव?

फेक नैरेटिव यूं ही नहीं फैलता। इसके पीछे कई मकसद होते हैं। पहला मकसद होता है अफरा-तफरी फैलाना। जब लोग डरते हैं, तो वे तर्क से नहीं, भावना से फैसले लेते हैं। दूसरा मकसद होता है राजनीतिक या रणनीतिक दबाव बनाना। अगर यह दिखा दिया जाए कि हालात बहुत खराब हैं, तो सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ता है।

तीसरा और सबसे खतरनाक मकसद होता है एस्केलेशन यानी टकराव को बढ़ाना। अगर झूठे दावों के आधार पर कोई गलत फैसला लिया जाए, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

पहलगाम और मल्टी-डोमेन खतरा

आज की जंग सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब इसमें साइबर, स्पेस और इन्फॉर्मेशन डोमेन भी शामिल हो चुके हैं। यही बात अंतरराष्ट्रीय रिसर्च संस्थाएं भी लगातार कह रही हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की जनवरी 2026 की एक पॉलिसी पेपर में साफ कहा गया है कि एआई-आधारित डिसइन्फॉर्मेशन जैसे मल्टी-डोमेन टूल्स परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच भी हालात को खतरनाक मोड़ पर ले जा सकते हैं। खास तौर पर भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह जोखिम और ज्यादा है ।

इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर फेक नैरेटिव्स को समय रहते नहीं रोका गया, तो वे वास्तविक सैन्य हालात को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं, जिससे गलत आकलन और गलत फैसले हो सकते हैं। (Pahalgam AI fake narrative)

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

पहलगाम के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती थी। एक तरफ जमीन पर हालात को काबू में रखना और दूसरी तरफ डिजिटल दुनिया में फैल रहे झूठ को रोकना। यह काम आसान नहीं होता, क्योंकि फेक कंटेंट सेकंडों में फैल जाता है, जबकि सच तक पहुंचने में वक्त लगता है।

कई बार एजेंसियों को अपना कीमती समय और संसाधन सिर्फ इस बात पर लगाने पड़ते हैं कि कौन-सी खबर फर्जी है और उसे कैसे काउंटर किया जाए। यही वजह है कि आजकल सुरक्षा एजेंसियां इन्फ़ॉर्मेशन वॉरफेयर को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही हैं, जितनी पारंपरिक सुरक्षा को। (Pahalgam AI fake narrative)

मीडिया और आम लोगों की भूमिका

फेक नैरेटिव के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार या सेना नहीं जीत सकती। इसमें मीडिया और आम लोगों की भूमिका सबसे अहम है। पहलगाम के मामले में भी देखा गया कि कुछ जिम्मेदार मीडिया संस्थानों ने बिना पुष्टि के खबरें नहीं चलाईं। उन्होंने आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया और अफवाहों से दूरी बनाए रखी।

वहीं आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे हर वायरल पोस्ट पर भरोसा न करें। किसी भी वीडियो या तस्वीर को शेयर करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि इसका सोर्स क्या है और क्या यह जानकारी किसी भरोसेमंद जगह से आई है। (Pahalgam AI fake narrative)

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा

फेक नैरेटिव का सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि लोग कुछ देर के लिए गुमराह हो जाते हैं। असली खतरा यह है कि यह भरोसे को कमजोर कर देता है। जब लोग यह नहीं समझ पाते कि क्या सच है और क्या झूठ, तो वे हर जानकारी पर शक करने लगते हैं। इससे समाज में तनाव बढ़ता है और हालात और बिगड़ते हैं।

पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में यह खतरा और ज्यादा होता है, क्योंकि यहां की हर खबर का असर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है। (Pahalgam AI fake narrative)

कैसे रोका जाए एआई-फेक नैरेटिव?

आने वाले समय में एआई-आधारित फेक नैरेटिव और भी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए इससे निपटने के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। सबसे पहले, टेक्नोलॉजी के स्तर पर ऐसे टूल्स विकसित करने होंगे, जो डीपफेक और फर्जी कंटेंट को जल्दी पहचान सकें।

दूसरा, लोगों को डिजिटली एजुकेट करना होगा, ताकि वे खुद समझ सकें कि कौन-सी जानकारी भरोसेमंद है और कौन-सी नहीं। तीसरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी, ताकि वे फेक कंटेंट को फैलने से पहले रोक सकें। (Pahalgam AI fake narrative)