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Water Supply Shortage: चौंकाने वाला खुलासा! पानी की गंभीर कमी से जूझ रही है भारतीय सेना, वाटर सप्लाई की कमी से ऑपरेशनल तैयारियों पर पड़ रहा असर

Water Supply Shortage: CAG Flags Severe Issues in Indian Army Installations

Water Supply Shortage: भारतीय सेना न केवल देश की सरहदों की रक्षा करती है, वहीं जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों को भी अंजाम देती है। चाहे बाढ़ हो या चक्रवात, हर प्राकृतिक आपदा में वह देशवासियों के साथ खड़ी होती है। तो वहीं जिन इलाकों में पानी की कमी होती है, वहां पानी की सप्लाई भी सुनिश्चित करती है। लेकिन यही भारतीय सेना वाटर सप्लाई की गंभीर समस्या से भी जूझ रही है।

Water Supply Shortage: CAG Flags Severe Issues in Indian Army Installations

हाल ही में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने एक ऑडिट रिपोर्ट जारी की, जिसमें रक्षा प्रतिष्ठानों में पानी की आपूर्ति को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं। 2018-19 से 2020-21 के बीच की इस रिपोर्ट में गारिसन इंजीनियर्स (GEs) द्वारा प्रबंधित सैन्य प्रतिष्ठानों में पानी की कमी पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समस्या का दुष्प्रभाव न केवल सैनिकों पर पड़ सकता है, बल्कि सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 20 गारिसन इंजीनियरों (GEs) का ऑडिट किया गया, उनमें से 15 ने सैन्य स्टेशनों को स्वीकृत मात्रा से कम पानी उपलब्ध कराया। यह कमी 10.13% से लेकर 62.97% तक थी, जो कि चिंताजनक है। यह कमी न केवल सैनिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्रभावित करती है, बल्कि उनकी ऑपरेशनल तैयारियों और मनोबल पर भी असर डाल सकती है।

पानी की कमी का असर डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट में बुनियादी जरूरतों से लेकर ऑपरेशनल कार्यों तक हर स्तर पर देखा जा सकता है। पानी का अभाव न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि फायर सप्रेशन और सैनिटेशन जैसी आवश्यकताओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाहरी जल आपूर्ति एजेंसियों के साथ किए गए समझौते अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहे। इन समझौतों का मकसद डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट पर पानी की सप्लाई को बढ़ाना था, लेकिन 13 में से 12 गारिसन इंजीनियर यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि अनुबंधित मात्रा में पानी मिले। यह विफलता अनुबंध प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन और बाहरी जल स्रोतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पानी केवल एक बुनियादी जरूरत नहीं है बल्कि सैन्य क्षेत्रों में एक रणनीतिक संसाधन है। यह न केवल सैनिकों की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए जरूरी है, बल्कि ऑपरेशनल गतिविधियों जैसे आग बुझाने और स्वच्छता के लिए भी अहम है। वहीं, पानी की कमी सैनिकों के स्वास्थ्य और मनोबल को प्रभावित कर सकती है, जिससे उनकी युद्ध क्षमता और राष्ट्रीय रक्षा की तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Water Supply Shortage: पानी के नुकसान का वित्तीय असर

रिपोर्ट में पानी के रिसाव से होने वाले वित्तीय नुकसान पर भी प्रकाश डाला गया है। तीन वर्षों की अवधि में पानी के रिसाव से लगभग 11.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि इस पानी का उपयोग अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए किया जा सकता था।

रिपोर्ट में उजागर प्रमुख खामियां

  • पानी की अधिकृत आपूर्ति और वास्तविक आपूर्ति के बीच बड़े अंतर।
  • बाहरी जल आपूर्ति एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंध अपेक्षित परिणाम देने में असफल रहे।
  • साथ ही, बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण पानी का भारी रिसाव।

सुधार की सिफारिशें

सीएजी ने इस समस्या को दूर करने के लिए कई सिफारिशें दी हैं। जिनमें जल आपूर्ति समझौतों की बेहतर निगरानी, रिसाव रोकने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश, और वर्षा जल संचयन तथा रीसाइक्लिंग जैसी टिकाऊ जल समाधानों की खोज शामिल है। CAG ने सुझाव दिया है कि रक्षा स्थलों में जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जल संकट को हल करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग और दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। साथ ही, जल रिसाव को रोकने के लिए नई पाइपलाइन और कुशल जल वितरण प्रणाली लागू करनी चाहिए।

रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया का इंतजार

सीएजी की इस रिपोर्ट पर रक्षा मंत्रालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि मंत्रालय इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।

Pinaka MBRL: भारतीय सेना का बड़ा फैसला! पिनाका रॉकेट सिस्टम को देगी तरजीह, महंगी आयातित मिसाइलों से बनाएगी दूरी

Indian Army Pinaka 120 km
File Photo

Pinaka MBRL: भारतीय सेना ने अपनी रणनीतिक ताकत को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। सेना ने महंगी सामरिक मिसाइलों (टैक्टिकल मिसाइल्स) की खरीद को फिलहाल रोककर स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम को अपनाने का फैसला किया है। यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेना की फायरपावर को मजबूती देने के लिए उठाया गया है।

Pinaka MBRL: Indian Army Prioritizes Indigenous Rocket System Over Expensive Imported Missiles!

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम (Pinaka MBRL) को दुनिया के सबसे बेहतरीन सिस्टमों में से एक माना जाता है। इसकी खूबियों और प्रभावी क्षमताओं के कारण कई देश इसे अपने डिफेंस सिस्टम में शामिल करने की इच्छा जता रहे हैं।

भारतीय सेना ने एलान किया है कि पिनाका सिस्टम को इस साल के अंत तक तैनात किया जाएगा। इस कदम से सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) की क्षमता में काफी सुधार होगा। पिनाका का एडवांस वर्जन न केवल अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम है, बल्कि इसकी सटीकता और घातकता भी इसे खास बनाती है।

सूत्रों के मुताबिक DRDO को पिनाका सीरीज (Pinaka MBRL) को एक्सपेंड करने और इसके दो नए संस्करण डेवलप करने को कहा गया है। भारतीय सेना ने दो लंबी रेंज के पिनाका MBRL की मंजूरी दी है। इन दोनों संस्करणों को एडवांस गाइडेंस सिस्टम से लैस किया जाएगा। ये संस्करण 120 किलोमीटर और 300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम होंगे। पुणे स्थित डीआरडीओ की लैब, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE), इन रॉकेटों को डिजाइन कर रही है। एक बार जब ये संस्करण तैयार हो जाएंगे, तो म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) इन्हें डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत निर्माण करेगी।

Pinaka MBRL: पिनाका रॉकेट सिस्टम हुआ और भी ताकतवर, पहले आर्मेनिया ने खरीदा, अब फ्रांस भी दिखा रहा रूचि

सूत्रों का कहना है कि 300 किलोमीटर की रेंज वाला संस्करण सेना के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है। इसका बड़ा आकार न केवल भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होगा, बल्कि यह मौजूदा लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ भी पूरी तरह अनुकूल रहेगा। यह संस्करण दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने और उनके सैन्य ढांचे को नष्ट करने में मददगार साबित होगा।

Pinaka MBRL: पिनाका सिस्टम की खूबियां

  • गाइडेड पिनाका अब आधुनिक नेविगेशन, नियंत्रण और गाइडेंस तकनीकों से लैस है, जो इसे उच्च सटीकता प्रदान करती है।
  • पहले जहां पिनाका की रेंज 40 किलोमीटर तक सीमित थी, वहीं अब इसके एडवांस संस्करण 120 से 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं।
  • यह सिस्टम एक बार में कई रॉकेट दाग सकता है, जो इसे दुश्मन के ठिकानों को तेजी से नष्ट करने में सक्षम बनाता है।
  • पिनाका को DRDO के मार्गदर्शन में भारतीय रक्षा कंपनियों द्वारा निर्मित किया जा रहा है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक युद्ध में सटीकता और कम नुकसान सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, और पिनाका इस आवश्यकता को पूरा करता है।

पिनाका सिस्टम ने तीन अलग-अलग चरणों में ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पास किया है। इन ट्रायल्स में इसकी रेंज, सटीकता, और फायरिंग दर का गहन निरीक्षण किया गया। इन गाइडेड रॉकेट्स को धीरे-धीरे पुराने, अनगाइडेड वेरिएंट्स की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है।

पिनाका बनाम टेक्टिकल मिसाइलें

पिनाका की तुलना में सामरिक मिसाइलें काफी महंगी होती हैं। भारतीय सेना के अनुसार, पिनाका जैसे सस्ते और प्रभावी विकल्प न केवल लागत को कम करते हैं, बल्कि उनकी फायरिंग गति और व्यापक कवरेज के कारण सामरिक बढ़त भी देते हैं। भारतीय सेना के इस निर्णय से टैक्टिकल मिसाइलों पर निर्भरता कम होगी, जो महंगे और आयातित होते हैं। इसके बदले पिनाका जैसे स्वदेशी समाधान न केवल लागत प्रभावी होंगे, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को भी मजबूत करेंगे।

DRDO ‘Raksha Kavach’: गणतंत्र दिवस 2025 परेड में DRDO का ‘रक्षा कवच’, पहली बार कर्तव्यपथ पर दिखेगा प्रलय वेपन सिस्टम

DRDO 'Raksha Kavach' Tableau to Debut at Republic Day Parade 2025

DRDO ‘Raksha Kavach’: गणतंत्र दिवस 2025 के मौके पर कर्तव्य पथ पर देश की ताकत और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अपनी उन्नत रक्षा तकनीकों और प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा। DRDO ने इस साल अपने झांकी विषय “रक्षा कवच” के जरिए भारत की रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी प्रौद्योगिकी पर जोर दिया है।

DRDO 'Raksha Kavach' Tableau to Debut at Republic Day Parade 2025

DRDO की झांकी में कई एडवांस सिस्टम को शामिल किया गया है। इनमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, 155 मिमी/52 कैलिबर एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम, ड्रोन डिटेक्ट, डिटर और डिस्ट्रॉय तकनीक, सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली, मीडियम पावर रडार “अरुध्र”, और लेजर-आधारित डाइरेक्ट एनर्जी वेपन शामिल हैं।

प्रलय वेपन सिस्टम: स्वदेशी मिसाइल की शक्ति

इसके अलावा, झांकी में पहली बार “प्रलय” वेपन सिस्टम भी दिखाया जाएगा, जो सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक मिसाइल प्रणाली है। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों के साथ विकसित की गई है और भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देती है।

INS Arihant K-4 SLBM: क्या भारत ने गुपचुप किया है INS अरिहंत से K-4 मिसाइल का टेस्ट? DRDO और रक्षा मंत्रालय ने क्यों नहीं किया सार्वजनिक एलान?

साथ ही, DRDO की झांकी में 2024 की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी दर्शाया जाएगा। इनमें लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल, हल्के बुलेट प्रूफ जैकेट “अभेद”, “दिव्यास्त्र” – मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल, और “ज़ोरावर” लाइट टैंक शामिल हैं। इन उपलब्धियों ने भारत की रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है।

इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों के मार्चिंग टुकड़ियों में भी DRDO द्वारा विकसित नाग मिसाइल प्रणाली, पिनाका रॉकेट सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम और आकाश वेपन सिस्टम का प्रदर्शन किया जाएगा।

समारोह की अन्य मुख्य झलकियां

  • परेड का शुभारंभ राष्ट्रीय गान और गुब्बारों के साथ होगा, जिन पर भारतीय संविधान के 75वें वर्ष का प्रतीक चिन्ह होगा।
  • आयोजन का समापन 47 विमानों के भव्य फ्लाईपास्ट के साथ होगा।
  • परेड में सेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियां अपने अद्वितीय कौशल और शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।

इस साल गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन “स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” विषय पर केंद्रित होगा। इस परेड में देश के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की 31 झांकियां शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ियां और उनके साथ इंडोनेशिया की 160 सदस्यीय मार्चिंग टुकड़ी और 190 सदस्यीय बैंड टुकड़ी भी शामिल होगी।

इस वर्ष की परेड में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि होंगे। यह परेड भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत का संगम होगी। परेड के समापन पर 47 विमानों का भव्य फ्लाईपास्ट होगा, जो गणतंत्र दिवस के उत्सव को और अधिक रोमांचक बनाएगा।

Gurpatwant Pannun: ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन? खालिस्तानी आतंकी पन्नू को शपथग्रहण में बुला कर क्या संदेश चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?

Gurpatwant Pannun at Trump Inauguration: Friend or Foe to India?

Gurpatwant Pannun: अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने भारत के राजनयिक और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी। इस हाई-प्रोफाइल आयोजन में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को देखा गया। समारोह में पन्नू ने “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वही पन्नू है जिसे भारत में आतंकवादी घोषित किया गया है और जिसकी गतिविधियां भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जाती हैं। हाल ही में पन्नू ने महाकुंभ में बम ब्लास्ट की धमकी भी दी थी।

Gurpatwant Pannun at Trump Inauguration: Friend or Foe to India?

Gurpatwant Pannun: ‘लिबर्टी बॉल’ का इनवाइट

खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि उसे ट्रंप के एक गुट से आमंत्रण मिला था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, पन्नू ने किसी संपर्क के माध्यम से टिकट खरीदा और इस समारोह में प्रवेश किया। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हॉल और उसके बाद आयोजित ‘लिबर्टी बॉल’ में हुआ।

पन्नू का दावा और वीडियो का सच

20 जनवरी को ट्रंप ने 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर पन्नू को समारोह स्थल के अंदर “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए देखा गया। एक वीडियो में वह भीड़ के बीच अपना मोबाइल कैमरा ऑन कर नारे लगाते हुए नजर आ रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, पन्नू को इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। वह समारोह में मौजूद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से काफी दूर खड़ा था।

सूत्रों का कहना है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, और भारत में खालिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उसने कई बार भारत विरोधी बयान दिए हैं और हिंसा भड़काने की कोशिश की है। पन्नू का उद्देश्य खुद को अमेरिकी प्रशासन के करीब दिखाकर वह अपनी उपयोगिता साबित करना चाहता है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

वीडियो के वायरल होने के बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे एक आतंकी, जिसने भारतीय राजनयिकों और एयर इंडिया की फ्लाइट्स पर बम धमाके की धमकी दी थी, उसे इस तरह के हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई।

हालांकि न ही अमेरिकी विदेश विभाग और न ही भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

Trump Presidency 2.0: क्या ट्रंप 2.0 में ड्रग्स तस्करी की पाकिस्तानी साजिशों पर लगेगी लगाम? पाक सेना और ड्रग्स कार्टेल के राज खोलेगी ये किताब

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो साझा करते हुए भारत सरकार से इस मामले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या भारत सरकार सिर्फ मूकदर्शक बनी रहेगी? क्या यह उचित है कि एक ऐसे व्यक्ति को अमेरिका में जगह दी जाए जो भारत की अखंडता के खिलाफ काम कर रहा है?”

2023 में अमेरिका ने भारत सरकार पर पन्नू पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था। अमेरिका ने दावा किया था कि यह साजिश न्यूयॉर्क में रची गई थी, जिसमें भाड़े के शूटर का उपयोग किया जाना था। इस घटना ने भारत-अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में विवाद को और बढ़ा दिया था।

वहीं, भारत ने इस पर कहा था कि वह अमेरिका और अन्य देशों के साथ सहयोग कर रहा है ताकि खालिस्तानी आतंकवाद को रोका जा सके। भारतीय जांच एजेंसियों ने पन्नू के खिलाफ कई वारंट जारी किए हैं और उसकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गई हैं। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि खालिस्तानी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, यह घटना एब भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। वह “सिख्स फॉर जस्टिस” (SFJ) नामक संगठन का नेतृत्व करता है, जो खालिस्तान के गठन के लिए अभियान चलाता है। जुलाई 2020 में, भारत सरकार ने पन्नू को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया था।

पन्नू ने कई बार भारत के राजनयिकों और संस्थानों को धमकी दी है। उसने एयर इंडिया की उड़ानों को निशाना बनाने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी हैं। इसके बावजूद, वह अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में स्वतंत्र रूप से घूमता है, जहां उसे इन देशों की नागरिकता प्राप्त है।

Nepali Army Command: भारत आए नेपाली सेना के अधिकारी, जाना आधुनिक युद्धक तकनीकों का राज! एलएंडटी और भारत फोर्ज का भी किया दौरा

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

Nepali Army Command: भारत और नेपाल के लंबे समय से मजबूत और दोस्ताना संबंध रहे हैं, जो न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव पर आधारित हैं बल्कि दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर भी आधारित हैं। इसी कड़ी में, नेपाली सेना कमांड और स्टाफ कॉलेज के 41 अधिकारियों का एक दल 15 से 23 जनवरी 2025 के बीच भारत दौरा पर आया हुआ है। इस दौरे में पांच अन्य मित्र देशों के अधिकारी और कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक भी शामिल हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे का उद्देश्य भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों, नौसेना कमांड, वायुसेना स्टेशनों और निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं का अध्ययन करना था। इस दौरे को भारत-नेपाल के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Nepali Army Command: सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा

अधिकारियों के इस दल ने भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा किया। इन दौरों में उन्हें भारतीय सेना के ट्रेनिंग सिस्टम, रणनीति और कार्यशैली को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला। प्रशिक्षण संस्थानों में भारतीय सेना के अनुशासन, तकनीकी कौशल और आधुनिक युद्धक तकनीकों की झलक देखने को मिली, जो आज भारत को दुनिया की अग्रणी सैन्य शक्तियों में शुमार करते हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

पश्चिमी नौसेना कमान और वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा

विदेशी अधकारियों के इस दल ने मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया, जहां उन्हें भारतीय नौसेना की ताकत, युद्धपोत निर्माण और समुद्री सुरक्षा में उसकी रणनीतिक भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद पुणे स्थित वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा किया गया। यहां पर वायुसेना की ताकत और उसकी आधुनिक तकनीकी क्षमताओं के बारे में अधिकारियों ने गहराई से जानकारी प्राप्त की।

Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना प्रमुख का भारत दौरा; गोरखा भर्ती और रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

निजी रक्षा उद्योगों का दौरा

नेपाली दल ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और भारत फोर्ज जैसे भारत के प्रमुख निजी रक्षा उद्योगों का दौरा भी किया। यह दौरा भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग की ताकत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को समझने के लिए आयोजित किया गया था। इन उद्योगों ने रक्षा उपकरणों के उत्पादन, डिज़ाइन और निर्यात में अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

इन उद्योगों में निर्मित उन्नत हथियार प्रणालियों और उपकरणों को देखकर प्रतिनिधिमंडल ने भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता की सराहना की।

दौरे के दौरान, भारतीय अधिकारियों ने नेपाली दल के साथ खुलकर संवाद किया और साझा इतिहास, संस्कृति और सैन्य परंपराओं पर चर्चा की। यह दौरा न केवल सैन्य क्षमताओं और तकनीकी ज्ञान को साझा करने का माध्यम बना, बल्कि भारत और नेपाल के बीच आपसी समझ और सहयोग को और गहराई प्रदान करने का एक अवसर भी साबित हुआ।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। भारत लंबे समय से नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य उपकरण प्रदान करने में मदद करता आ रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए अपने कौशल को साझा करती हैं।

नेपाली अधिकारियों ने इस दौरे को बेहद लाभकारी बताते हुए कहा कि यह उनके दृष्टिकोण और रणनीतिक सोच को व्यापक बनाने में मददगार साबित हुआ है। उन्होंने भारत के रक्षा तंत्र, औद्योगिक क्षमताओं और तकनीकी विकास की प्रशंसा की।

यह दौरा भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। दोनों देशों के बीच इस तरह के अध्ययन दौरों से आपसी समझ और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में, इस तरह की पहल न केवल दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को बढ़ावा देंगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Republic Day Parade: भारतीय नौसेना की झांकी में दिखेगी ‘आत्मनिर्भरता’, पहली बार महिला अग्निवीर बनेंगी नेवी बैंड का हिस्सा!

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!

Republic Day Parade: आगामी 76वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय नौसेना की झांकी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की थीम को दर्शाएगी। यह झांकी भारत की समुद्री ताकत और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने रखेगी। इस साल की परेड में भारतीय नौसेना की झांकी का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर ममता सिहाग करेंगी, जो डॉर्नियर 228 मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट की पायलट हैं। साथ ही, पहली बार नौसेना के बैंड में 6 महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी।

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!

इस वर्ष की झांकी में तीन प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म, आईएनएस सूरत (डिस्ट्रॉयर), आईएनएस नीलगिरी (फ्रिगेट) और आईएनएस वाघशीर (पनडुब्बी), का प्रदर्शन किया जाएगा। इन्हें हाल ही में 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कमीशन किया गया था। इन तीनों प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारतीय नौसेना भारत की उभरती समुद्री ताकत और आत्मनिर्भरता का संदेश दुनिया को देगी।

Republic Day Parade: झांकी का नेतृत्व करेंगी महिला अफसर

बुधवार को कोटा हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेवी ने झांकी का एक मॉडल प्रदर्शित किया। नौसेना की झांकी का नेतृत्व करने वालीं लेफ्टिनेंट कमांडर ममता सिहाग ने इस अवसर पर कहा, “हमारी झांकी में समुद्र, आकाश और जल-तल की सभी तीनों आयामों का प्रदर्शन होगा। आत्मनिर्भर भारत के लिए किए गए इन तकनीकी उपलब्धियों को दिखाने का यह एक सुनहरा अवसर है।”

भारतीय नौसेना के कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी ने बताया कि यह झांकी उन नाविकों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करती है, जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए गहराई से लेकर ऊंचाइयों तक दिन-रात तैनात रहते हैं।

Republic Day Parade: नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और बैंड

इस बार नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी में 148 अधिकारी और नाविक शामिल होंगे, जो 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस टुकड़ी का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर साहिल अहलूवालिया करेंगे। इसे ‘मिनी इंडिया’ का प्रतीक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागी शामिल हैं।

Frontline Naval Ships: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर को राष्ट्र को किया समर्पित

इसके अलावा, नौसेना के बैंड में 81 सदस्य भारतीय धुनों को प्रस्तुत करेंगे। खास बात यह है कि इस वर्ष पहली बार नौसेना के बैंड में छह महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी। यह कदम महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने का प्रतीक है।

झांकी में आत्मनिर्भरता की झलक

झांकी में प्रदर्शित प्लेटफॉर्म्स भारतीय तकनीकी क्षमता और नौसेना की बहुआयामी भूमिका का प्रतीक हैं। आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर का निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!
Indian Navy’s Republic Day parade tableau

वाइस एडमिरल मैकार्थी ने इसे “भारत के नए दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता के प्रतीक” के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2025 का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, जब ये तीन प्रमुख प्लेटफॉर्म कमीशन किए गए।

महिला अग्निवीरों की ऐतिहासिक भागीदारी

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार महिला अग्निवीरों की भागीदारी एक ऐतिहासिक पहल है। नौसेना बैंड में शामिल इन छह महिलाओं ने अपनी कठोर ट्रेनिंग के बाद भारतीय धुनों को प्रस्तुत करने का गौरव हासिल किया है। इससे न केवल महिलाओं की ताकत और क्षमता का प्रदर्शन होगा, बल्कि यह अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी बनेगा।

नौसेना की झांकी और प्रदर्शन यह स्पष्ट करते हैं कि भारतीय नौसेना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी योगदान दे रही है। गणतंत्र दिवस पर इस भव्य प्रदर्शन से न केवल नौसेना की तकनीकी ताकत का परिचय होगा, बल्कि यह भारतीय युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित भी करेगा।

Foreign nationals lodged in Assam for ten years, Supreme Court pulls up state for not justifying reasons, ask Chief Secretary to appear virtually

Supreme Court Urges Action on Assam Detention Centers

Assam detention centers: The Supreme Court on Wednesday pulled up state of Assam for poor conditions of foreign nationals who are lodged in detention centres in the state for years together and for not taking steps for their deportation so far.

Supreme Court Urges Action on Assam Detention Centers

Assam detention centers: CHIEF SECRETARY SUMMONED

A visibly angry bench of Justices A S oka and N K Singh summoned the Chief Secretary of Assam to explain as to what steps the state government has taken to deport the foreign nationals.

“We want justification why these detentions are continuing without even process of deportation starting?,” Justice Oka asked counsel appearing for state of Assam.

270 FOREIGN NATIONALS LODGED

Bench went on to pull up state government for failing to give justification as to why 270 foreign nationals were lodged in the state and why no steps being taken to deport them back.

Last year the top court had directed Union Government to take immediate steps for deporting 17 declared foreigners detained in transit camps of Assam, considering no pending cases were registered against them.

STATE CLAIMS DETENTION AFTER FOREIGN TRIBUNAL ORDER

Responding to the query from the bench, advocate appearing for state of Assam tells that, “They were detained only after they were declared foreigners by Foreigners Tribunals.”

At this the bench said, “We want justification why these detentions are continuing without even process of deportation starting?”

SUPREME COURT SEEKS STEPS TAKEN FOR DEPORTATION

The top court summoned the Chief Secretary of Assam virtually and passed the order , “Some foreigners languishing for 10 or more years. The affidavit does not give any justification for detaining…steps taken to deport are not set out. This is gross violation of orders of this court. We direct Chief Secretary to remain present through VC and explain the non-compliance on next date of hearing on February 5.”

Exercise TOPCHI: देवलाली में गूंजी K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड गन, ‘एक्सरसाइज तोपची’ में भारतीय सेना ने दिखाया दम

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali

Exercise TOPCHI: भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट की तरफ से सालाना फायरपावर ट्रेनिंग एक्सरसाइज ‘एक्सरसाइज तोपची’ (Exercise TOPCHI) का आयोजन 21 जनवरी 2025 को देवलाली फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। यह अभ्यास स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने भारतीय सेना की आधुनिक और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का भव्य प्रदर्शन किया।

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali

स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना ने बताया, ‘एक्सरसाइज टॉपची’ भारतीय सेना के तोपखाना रेजिमेंट की क्षमता, तोप प्रणाली और हमारे जवानों के उत्कृष्ट प्रशिक्षण मानकों को प्रदर्शित करती है। यह अभ्यास तोपखाना स्कूल में प्रशिक्षण लेने वाले सभी जवानों और अधिकारियों के प्रशिक्षण स्तर को दर्शाता है।

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali
Lieutenant General Navneet Singh Sarna

उन्होंने बताया, इस अभ्यास में हमारे ज्यादातर उपकरण स्वदेशी हैं, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं। हमारा लक्ष्य है कि देश में निर्मित गोला-बारूद सहित सभी उपकरण स्वदेशी हों। ‘एक्सरसाइज टॉपची’ में हमारे पास मौजूद तोपखाना प्रणालियों, उनकी मारक क्षमता और स्कूल ऑफ आर्टिलरी के उच्च प्रशिक्षण मानकों का प्रदर्शन किया गया। यह अभ्यास भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध तकनीकों और आत्मनिर्भरता की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को बखूबी रेखांकित करता है।

इस कार्यक्रम में रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (वेलिंगटन), रक्षा सेवा तकनीकी स्टाफ पाठ्यक्रम (पुणे), नेपाल सेना स्टाफ कोर्स के छात्र अधिकारियों, विभिन्न प्रशिक्षण अकादमियों के कैडेट्स, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, और सिविल प्रशासन के सदस्य उपस्थित थे।

आधुनिक हथियारों और तकनीकों का प्रदर्शन

अभ्यास के मुख्य आकर्षण में भारतीय सेना की उन्नत तोपखाना प्रणालियों और निगरानी क्षमताओं का लाइव प्रदर्शन शामिल था। इसमें निम्नलिखित आधुनिक हथियारों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया:

  • K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम
  • 155mm M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर
  • 155mm धनुष तोप
  • 155mm FH 77B02 (बोफोर्स)

साथ ही, पिनाका और स्मर्च रॉकेट सिस्टम, स्वार्म ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, और उन्नत ड्रोन क्षमताओं जैसे अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।

यह अभ्यास आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। भारतीय सेना की यह पहल न केवल देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करती है, बल्कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में भी एक कदम है।

एक्सरसाइज तोपची ने न केवल तोपखाना रेजिमेंट की पेशेवर क्षमता को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि सेना किसी भी परिचालन चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस अभ्यास ने सेना की एकीकृत निगरानी और फायरपावर क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया, जो भारत की बढ़ती रक्षा ताकत को दर्शाता है।

इस आयोजन ने सेना की आधुनिक युद्ध तकनीकों के उपयोग में दक्षता और स्वदेशी रक्षा प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया। इसे देखकर यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना भविष्य की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

Illegal Indian Migrants: अमेरिका में अवैध घुसपैठ पर ट्रंप सख्त; डंकी रूट से यूएस गए 18,000 भारतीयों को वापस लाएगा भारत!

Illegal Indian Migrants: Trump Cracks Down, India to Repatriate 18,000 from US via Donkey Route!

Illegal Indian Migrants: भारत सरकार ने डंकी रूट से अमेरिका गए अवैध प्रवासियों को वापस लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन के साथ सहयोग करने की योजना बनाई है। यह कदम नई दिल्ली द्वारा ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों को बनाए रखने और संभावित व्यापार युद्ध से बचने की रणनीति का हिस्सा है।

Illegal Indian Migrants: Trump Cracks Down, India to Repatriate 18,000 from US via Donkey Route!

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों की पहचान की है, जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं और जिन्हें भारत वापस भेजा जाएगा। हालांकि, यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि अवैध भारतीय प्रवासियों की सही संख्या का अनुमान जुटाना कठिन है।

ट्रंप प्रशासन से तालमेल बैठाने की कोशिश

अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई ट्रंप के चुनावी वादों का हिस्सा रही है। ट्रंप ने अपने आदेश में साफ किया कि अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले प्रवासियों को वापस उनके देश भेजा जाएगा। उनकी घोषणा ने भारतीय समुदाय में खलबली मचा द हैी, क्योंकि अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले करीब 7.5 लाख भारतीय प्रवासियों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। अपने शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही, ट्रंप ने कदम उठाते हुए नागरिकता कानून और बॉर्डर सिक्योरिटी पर सख्त फैसले लिए। इस बीच, भारत ने भी यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि ट्रंप प्रशासन खासकर छात्र वीजा और एच-1बी वीजा जैसे प्रोग्राम के लिए भारतीयों के लीगल माइग्रेशन के रास्ते खुले रखे।

एच-1बी वीजा के मामले में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। 2023 में जारी किए गए कुल 3,86,000 वीजा में से लगभग तीन-चौथाई भारतीय नागरिकों को दिए गए।

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Illegal Indian Migrants: अवैध प्रवासियों के मामले में तीसरे नंबर पर है भारत

अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या की बात करें, तो भारत तीसरे नंबर पर है। 2024 में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोलिंग अधिकारियों द्वारा पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या कुल का केवल 3 फीसदी थी। हालांकि, हाल के वर्षों में यह आंकड़ा उत्तरी अमेरिकी सीमा पर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक अमेरिका में लगभग 2,20,000 अवैध भारतीय प्रवासी रह रहे थे।

अवैध प्रवासी रचते हैं भारत के खिलाफ साजिश

भारत सरकार ने अवैध प्रवासियों की वापसी के लिए अमेरिका के साथ सहयोग को एक अवसर के रूप में देखा है। यह कदम केवल अवैध प्रवासन को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत के विदेश में अलगाववादी आंदोलनों, जैसे खालिस्तान आंदोलन, को कमजोर करने के उद्देश्य से भी देखा जा रहा है। खालिस्तान आंदोलन के कुछ समर्थक अमेरिका और कनाडा में रह रहे हैं, जिनमें से कई को अवैध प्रवासी माना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंधों के बावजूद, भारत अमेरिका से किसी भी अप्रत्याशित कदम को लेकर सतर्क है। ट्रंप ने बार-बार भारत की इंपोर्ट ड्यूटी की आलोचना की है और अमेरिकी व्यापार पर इसके असर का हवाला देते हुए जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी है।

उत्तरी अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासी

यह बात भी सामने आई है कि उत्तरी अमेरिका की सीमा पर भारतीय प्रवासियों का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी सीमा गश्ती आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी सीमा पर पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या अन्य किसी भी देश से अधिक है।

इसकी वजह 2023 में अल सल्वाडोर द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रैवल को खत्म करना और कनाडा के लिए भारतीय नागरिकों के ट्रैवल करने में आसानी शामिल हो सकती है।

वहीं, अगर भारत अवैध प्रवासियों की वापसी का कदम उठाता है, तो यहां देश के भीतर भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव डाल सकते हैं। अवैध प्रवासियों की वापसी से भारत में रोजगार संकट बढ़ सकता है, क्योंकि पहले से ही देश में नौकरियों की कमी है।

अमेरिका ने 519 भारतीय अवैध प्रवासियों को किया वापस

तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 7 दिसंबर 2024 को लोकसभा में जानकारी दी कि अमेरिका ने 2023-24 के बीच 519 अवैध भारतीय प्रवासियों को कमर्शियल और चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारत वापस भेजा।

अमेरिका के कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 के बीच हर घंटे करीब 10 भारतीयों ने अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने का प्रयास किया। इस दौरान, 90,000 से अधिक भारतीयों को सीमा पर गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 50 फीसदी गुजरात से थे।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2020 से 2022 के बीच करीब 1 लाख भारतीयों ने अवैध रूप से अमेरिका जाने की कोशिश की। इनमें से अधिकांश ने ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया, जो दक्षिण अमेरिका से अमेरिका तक का खतरनाक मार्ग है। इस मार्ग पर शाहरुख खान की फिल्म “डंकी” भी बनी है, जिसने इस समस्या को चर्चा में लाया।

इन अवैध प्रवासियों में से कई अपनी जमीन बेचकर और कर्ज लेकर बेहतर जीवन की तलाश में अमेरिका जाते हैं। हालांकि, ऐसे कदम न केवल खतरनाक हैं बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

अमेरिका जाने के लिए डंकी रूट

अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले भारतीयों के लिए ‘डंकी रूट’ एक प्रमुख रास्ता बन गया है। इस रूट के जरिए लोग भारत से दक्षिण अमेरिका के देशों, जैसे मेक्सिको या पनामा, तक पहुंचते हैं और वहां से जंगलों और खतरनाक बॉर्डर्स को पार करते हुए अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

हाल ही में हरियाणा और गुजरात के कई परिवारों ने अपने बच्चों को इस रास्ते से अमेरिका भेजा, लेकिन यह यात्रा खतरों से भरी है। कई लोगों ने इस दौरान अपनी जान गंवाई।

अवैध रूप से अमेरिका जाने वाले भारतीय कई बार मानव तस्करी का शिकार हो जाते हैं। एजेंट लाखों रुपये लेकर उन्हें खतरनाक रास्तों से अमेरिका भेजने का वादा करते हैं। गुजरात और पंजाब से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को जंगलों, समुद्र और बर्फीले इलाकों के जरिए अमेरिका पहुंचाया गया।

2023 में, मेहसाणा जिले के एक परिवार की कनाडा-अमेरिका बॉर्डर पार करते समय मौत हो गई। वे भी डंकी रूट का सहारा ले रहे थे।

भारत में रोजगार की कमी: पलायन का मुख्य कारण

अमेरिका जाने वाले अधिकांश भारतीय युवाओं का कहना है कि भारत में बेरोजगारी और आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें इस तरह के खतरनाक कदम उठाने पड़े। हरियाणा के एक युवा ने बताया कि उसने अपनी जमीन बेचकर और 50 लाख रुपये कर्ज लेकर अमेरिका जाने का जोखिम उठाया। वह अमेरिका में ट्रक चला रहा है और हर महीने 2.5 लाख रुपये कमा रहा है।

भारत में छोटी फैक्ट्री या बिजनेस शुरू करने को लेकर उसने कहा, “भारत में बिजनेस सफल होना मुश्किल है। यहां महंगाई और बेरोजगारी ने जीवन कठिन बना दिया है।”

नागरिकता कानून में बदलाव 

डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। अमेरिका में 150 साल से यह कानून लागू है कि अगर कोई बच्चा अमेरिकी जमीन पर पैदा होता है, तो वह स्वतः रूप से अमेरिका का नागरिक बन जाता है। इसके लिए यह मायने नहीं रखता कि उसके माता-पिता कौन हैं, कहां से आए हैं, या उनकी नागरिकता का क्या दर्जा है। इस नीति का उद्देश्य ‘बर्थ टूरिज्म’ को रोकना है, जहां लोग सिर्फ अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए वहां जाते हैं।

1868 के संविधान संशोधन के तहत यह प्रावधान किया गया था कि जो भी अमेरिका में जन्म लेता है, या अपनी मूल नागरिकता छोड़कर अमेरिका की नागरिकता के लिए आवेदन करता है, उसे अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। इस कानून के चलते पिछले डेढ़ सौ वर्षों में करोड़ों लोगों को अमेरिका की नागरिकता मिली है।

प्रोटेक्टिंग द मीनिंग एंड वैल्यू ऑफ अमेरिकन सिटीजनशिप कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि अगर माता-पिता के पास सही दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन बच्चा अमेरिका में जन्म लेता है, तो उसे समान अधिकार और सुरक्षा प्राप्त होगी। हालांकि, ट्रंप के इस नए आदेश ने इस प्रावधान में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब इस आदेश के तहत जन्म के आधार पर नागरिकता पाने की परंपरा पर विराम लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो लंबे समय से अमेरिका में विवाद का विषय रही है।

क्या भारत वापस भेजेगा अवैध बंग्लादेशी?

भारत में नागरिकता को लेकर कितनी बहसें हुईं, यह याद करना जरूरी है। धर्म के आधार पर नागरिकता देने का कानून जब पास हुआ, तब देश में व्यापक हिंसा हुई थी। इस कानून को लागू कराने के दौरान जो उथल-पुथल मची, वह आज भी लोगों के जेहन में है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इस कानून के पास होने के पांच साल बाद जाकर इसके नियम बनाए गए।

अवैध घुसपैठियों का पता लगाने के लिए असम में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू किया गया, लेकिन उससे कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। और अंत में, एनआरसी को औपचारिक रूप से स्वीकार भी नहीं किया गया। यह एक विडंबना है कि जब भारत में अवैध प्रवासियों को रोकने की कोशिशें इस तरह अधूरी रहीं, तब नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि आज अमेरिका में अवैध प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समूह भारतीयों का बन चुका है।

Indian Air Force: पूर्व वायुसेना ग्रुप कैप्टन की चेतावनी; अगले 3-4 दशकों तक चीन को युद्ध में नहीं हरा सकता भारत, बताई ये बड़ी वजह

Indian Air Force: Ex-IAF Captain Warns India Can't Defeat China Militarily for Next 3-4 Decades

Indian Air Force: भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में चेतावनी दी है कि आने वाले तीन से चार दशकों तक भारत चीन को नहीं हरा सकता है। उन्होंने वायुसेना के कम होते स्क्वाड्रन क्षमता और लड़ाकू विमानों की सप्लाई में देरी पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ का कम होना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अहलावत जोर दिया कि भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy) बनाने की जरूरत है, ताकि भारत की रक्षा नीतियों और आर्म्ड फोर्सेस के बीच सामंजस्य बनाया जा सके।

Indian Air Force: Ex-IAF Captain Warns India Can't Defeat China Militarily for Next 3-4 Decades
Former Indian Air Force (IAF) Group Captain Ajay Ahlawat

Indian Air Force: आजादी के बाद से अब तक का सबसे कम स्क्वाड्रन

ग्रुप कैप्टन अहलावत ने वायुसेना की मौजूदा स्थिति को ‘खतरनाक रूप से कमजोर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत की वायुसेना के पास आजादी के बाद से अब तक का सबसे कम स्क्वाड्रन हैं। “हमारे पास कुल 17 स्क्वाड्रन की योजना है, जिसमें LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के तीन स्क्वाड्रन, LCA Mk 1A के चार स्क्वाड्रन, Mk 2 के चार स्क्वाड्रन और AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के छह स्क्वाड्रन शामिल हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से सिर्फ तीन स्क्वाड्रन फिलहाल तैयार हैं। Mk-2 अभी कागज पर है, और AMCA की पहली ट्रायल उड़ान 2028 तक होने की उम्मीद है।”

अहलावत की यह टिप्पणी उस समय आई है जब वायुसेना में स्क्वाड्रन की संख्या बेहद कम है। आजादी के बाद से यह अब तक का सबसे निचला स्तर है। वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि यह संख्या 42 होनी चाहिए।

चीन से मुकाबले की चुनौती

“हमारा चीन के साथ विवाद सांस्कृतिक नहीं है, यह सीमा विवाद है। दोनों देशों के पास अपनी-अपनी अलग धारणाएं हैं।अगर दोनों पक्ष किसी बीच के मार्ग पर सहमत हो सकें, तो इससे समस्या का समाधान हो सकता है। इसे बातचीत और समझौतों के जरिए ही हल करना होगा। डोकलाम संकट के बाद हमने अपनी ओर से समाधान की इच्छा जताई थी।”

LCA Tejas Delivery: क्या मार्च तक मिल पाएगा तेजस फाइटर जेट? वायुसेना को फटाफट डिलीवरी के लिए HAL कर रहा ये बड़ी तैयारी

अहलावत ने कहा कि चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन ने 2000 के दशक में एक स्पष्ट सैन्य रणनीति अपनाई और 2035 तक अमेरिका जैसी ताकत बनने का लक्ष्य तय किया। “चीन ने 2035 तक अमेरिका जितना मजबूत बनने का लक्ष्य रखा और फिर उन्होंने अपनी सेना का पुनर्गठन शुरू किया। वे तीन अतिरिक्त क्षेत्रों – अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में भी काम कर रहे हैं। वहीं, हम अभी भी पारंपरिक जल-थल-नभ यानी सेना, नौसेना और वायुसेना के ढांचे में ही फंसे हुए हैं।”

उन्होंने बताया कि चीन की रॉकेट फोर्स इतनी मजबूत है कि यह दुश्मन के एयरफील्ड को निष्क्रिय कर सकती है। “चीन की रॉकेट फोर्स सबसे पहले एयरफील्ड्स को निशाना बनाएगी। वे अंतरिक्ष में कुछ ऐसे ऑर्बिटल पोजिशन पर काम कर रहे हैं, जो पहाड़ों में ऊंचाई पर कब्जा करने के बराबर है।”

लड़ाकू विमान और ‘तेजस’ की डिलीवरी में देरी

भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ‘तेजस’ प्रोजेक्ट, जिसे पुराने मिग-21 विमानों को बदलने के लिए डिजाइन किया गया था, अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई में देरी से जूझ रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल ही में तेजस के उत्पादन में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि 2009-2010 में 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन अभी तक ये डिलीवर नहीं किए गए हैं।

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अहलावत ने इस देरी के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों कारणों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “1984 में तेजस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। 2001 में इसका पहला ट्रायल हुआ, और इसे वायुसेना में शामिल करने में 15 साल और लग गए। इसके बाद 2016 तक भी वायुसेना को एक भी स्क्वाड्रन नहीं मिला। देरी की बड़ी वजह 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध थे। वहीं, अब यह देरी GE इंजनों से जुड़ी समस्याओं के कारण हो रही है।”

आयात किया जाए या स्वदेश में बनाया जाए

अहलावत ने सुझाव दिया कि वायुसेना की ताकत बनाए रखने के लिए आयात को लेकर कुछ लोग सवाल खड़े कर सकते हैं, लेकिन यह उपयुक्त समाधान है। उन्होंने कहा, “सरकार जब सेना को युद्ध के लिए भेजती है, तो उम्मीद करती है कि वह युद्ध जीते। अगर घरेलू उद्योग समय पर विमानों की आपूर्ति नहीं कर सकते, तो हमें उन इक्विपमेंट्स की जरूरत है, जो युद्ध के दौरान इस्तेमाल हो सकें। हमें आज एक तैनात करने योग्य वायुसेना चाहिए।”

उन्होंने उदाहरण दिया कि करगिल युद्ध में बोफोर्स गन और मिराज 2000 जैसे आयातित हथियारों ने भारत को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि भारत को वर्तमान में राफेल विमानों की संख्या बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। “राफेल हमारे पास पहले से मौजूद हैं। हमारे पास इनकी मैंटेनेंस की सुविधा, प्रशिक्षित क्रू और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार है। ऐसे में राफेल संख्या बढ़ाना एक तात्कालीक समाधान हो सकता है।”

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बनाने की जरूरत

अहलावत ने जोर दिया कि भारत को अपनी रक्षा रणनीति को व्यापक रूप से पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। “हमें एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता है, जो सभी सशस्त्र बलों को राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्य की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करे। यह रणनीति यह तय करेगी कि चीन हमारे लिए क्या है – एक दोस्त, एक प्रतिस्पर्धी, या एक सैन्य दुश्मन।”

उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए विमान और तकनीक के विकास पर भी निवेश करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा हालात में भारत को आयात पर निर्भर रहना होगा ताकि वायुसेना की ताकत बनी रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में न पड़े।