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Rafale Marine Jets: राफेल-M को लेकर क्यों टेंशन में भारतीय नौसेना? INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर ऑपरेट करने हो सकती हैं ये दिक्कतें!

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📍नई दिल्ली | 1 Feb, 2025, 5:44 PM

Rafale Marine Jets: भारतीय नौसेना ने अपने विमानवाहक पोतों INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत के लिए राफेल M (Rafale Marine) फाइटर जेट को चुना है। अभी सीसीएस यानी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी बाकी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस दौरे के दौरान इनके खरीदने को लेकर फैसला हो सकता है। वहीं अब इन विमानों को चुनने के बाद इसकी ऑपरेशनल चुनौतियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने आशंका जताई है कि इस फाइटर जेट को उन्हीं दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे पहले मिग-29K जूझ चुका है।

Rafale Marine Jets: Challenges for Indian Navy in Operating Rafale-M on INS Vikrant & INS Vikramaditya!

Rafale Marine Jets: राफेल-M में लगे हैं नॉन-फोल्डेबल विंग्स

भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी चिंता राफेल M के बिना-मुड़ने वाले पंख (Non-Foldable Wings) को लेकर है। यह डिज़ाइन INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे सीमित डेक स्पेस वाले एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। क्योंकि जब लड़ाकू विमानों के फोल्डेबल नहीं होते हैं, तो वे डेक और हैंगर में ज्यादा जगह घेरते हैं, जिससे कैरियर पर तैनात किए जाने वाले विमानों की संख्या में कमी हो सकती है। इससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर असर पड़ सकता है और युद्ध जैसी हालात में यह एक बड़ी परेशानी बन सकता है।

 

नेवी सूत्रों ने बताया कि यह दिक्कत पहले मिग-29K के साथ भी देखी गई थी, जहां विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात करने और ऑपरेशन के दौरान दिक्कतें आती थीं। ऐसे में राफेल M को भारतीय नौसेना के मौजूदा एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए पूरी तरह अनुकूल बनाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

Rafale Marine Jets: राफेल M की ट्रेनिंग में होगी दिक्कत

इसके अलावा, राफेल M का ट्विन-सीटर ट्रेनर वेरिएंट भी एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है। भारतीय नौसेना के लिए कैरियर ऑपरेशन में एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए कैटापल्ट और अरेस्टेड रिकवरी टेक्नोलॉजी (CATOBAR) के तहत ट्रेनिंग जरूरी होती है, जिससे नौसेना के पायलटों को असली परिस्थितियों में ट्रेनिंग करने का मौका मिलता है। राफेल M का ट्रेनर वेरिएंट कैरियर-ऑपरेशनल नहीं है, जिससे नौसेना के पायलटों को पूरी तरह जमीन पर (Land-Based Training) ट्रेनिंग लेनी होगी। हालांकि, जमीन पर दी गई ट्रेनिंग और सिमुलेशन पायलटों को मदद तो दे सकती है, लेकिन वे समुद्र में वास्तविक टेकऑफ और लैंडिंग की स्थितियों को पूरी तरह से दोहरा नहीं सकते।

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Rafale Marine Jets: INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य में स्की-जंप टेकऑफ सिस्टम

भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य स्की-जंप टेकऑफ सिस्टम (Ski-Jump Takeoff System) का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, राफेल M को कैटापल्ट असिस्टेड टेकऑफ (Catapult-Assisted Takeoff) और अरेस्टेड लैंडिंग (CATOBAR) सिस्टम के लिए डिज़ाइन किया गया है। सूत्रों का कहना है कि राफेल M को भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर्स के हिसाब से पूरी तरह से ऑप्टिमाइज़ नहीं किया गया है, जिससे उसके परफॉमेंस और एफिशिएंसी पर असर पड़ सकता है।

पूरी तरह कैरीयर-कम्पेटिबल था मिग-29KUB ट्रेनर वेरिएंट

सूत्रों के मुताबिक मिग-29KUB ट्रेनर वेरिएंट पूरी तरह कैरीयर-कम्पेटिबल था, जिससे नौसेना के पायलटों को सीधे कैरियर पर ट्रेनिंग मिलती थी। लेकिन मिग-29K के लगातार हादसों और मेंटेनेंस चुनौतियों के चलते नौसेना को नए विकल्पों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया। अब राफेल M के बिना ट्रेनर वेरिएंट के, नौसेना को या तो सिमुलेटर टेक्नोलॉजी पर भरोसा करना होगा या फिर अन्य ट्रेनिंग ऑप्शंस को चुनना होगा।

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पहली डिलीवरी 2030 तक

भारतीय नौसेना के एक अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर बताया कि राफेल M की खरीद का फैसला लॉजिस्टिक्स और फाइनेंसियल वजहों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल जेट्स ऑपरेट कर रही है, जिससे दोनों सेनाओं में कॉमन सप्लाई चैन और मेंटेनेंस में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इस वजह से भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए कॉमन वेपन सिस्टम्स और इंजन मेंटेनेंस करना आसान होगा, जिससे लॉजिस्टिक खर्च कम किया जा सकेगा।

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सूत्रों ने बताया कि राफेल-M डील अगर 2025 की शुरुआत में साइन हो जाती है, तब भी इसकी पहली डिलीवरी 2030 तक शुरू होने की उम्मीद है।

सरकार-से-सरकार (G2G) डील

पिछले साल 2 दिसंबर को नेवी डे के मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह डील अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा,
_”यह सिर्फ औपचारिकताओं को पूरा करने का मामला है। हमें उम्मीद है कि राफेल-M डील पर जल्द ही दस्तखत हो जाएंगे।” एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए जाएंगे, और क्योंकि यह सरकार-से-सरकार (G2G) डील है, इसे तेजी से लागू किया जाएगा।

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भारतीय नौसेना को आधुनिक और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है, और इसी रणनीति के तहत राफेल-M को नौसेना के INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत पर तैनात करने की योजना बनाई गई है। इस 60,000 करोड़ रुपये (USD 7.2 बिलियन) की डील के तहत भारतीय नौसेना को 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर राफेल-M जेट्स मिलेंगे, जिससे नौसेना की युद्धक क्षमता में इजाफा होगा।

अत्याधुनिक हथियारों और एडवांस फीचर्स से लैस है राफेल-M

राफेल-M को Short Take-Off But Arrested Recovery (STOBAR) ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। यह जेट कई आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस है, जो इसे एक घातक फाइटर जेट बनाते हैं। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मेटेओर (Meteor) मिसाइल, एंटी-शिप मिशन के लिए एक्ज़ोसेट (Exocet) मिसाइल, सटीक जमीनी हमलों के लिए स्कैल्प (SCALP) मिसाइल, टार्गेट की पहचान और ट्रैकिंग के लिए AESA रडार और स्टील्थ और सर्वाइवल क्षमता को बढ़ाने के लिए स्पेक्टरा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है।

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राफेल-M की अधिकतम रफ्तार 2,222 किमी/घंटा

राफेल-M की अधिकतम रफ्तार Mach 1.8 (लगभग 2,222 किमी/घंटा) है और यह 1,850 किमी से अधिक की कॉम्बैट रेंज प्रदान करता है। इसके अलावा, मिड-एयर रीफ्यूलिंग क्षमता इसकी ऑपरेशनल रीच को और बढ़ा देती है, जिससे यह सुदूर स्थित मैरीटाइम ऑपरेसंस के लिए बेहद कारगर है।

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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