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अब बड़े प्रोजेक्ट्स की तैयारी! नौसेना के लिए जहाज बनाने वाली कंपनी गोवा शिपयार्ड को मिला ‘A’ कैटेगरी का दर्जा

जीएसएल न केवल घरेलू जरूरतों बल्कि यह फ्रेंडली फॉरेन कंट्रीज के लिए भी जहाज बना रहा है। इससे भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल रहा है...

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📍नई दिल्ली | 2 Mar, 2026, 7:06 PM

GSL Schedule A Upgrade: भारत के डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) को भारत सरकार ने ‘शेड्यूल बी’ से ‘शेड्यूल ए’ कैटेगरी में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला 25 फरवरी को वित्त मंत्रालय के तहत डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज ने लिया। इस अपग्रेडेशन को कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के अंतर्गत आता है, पिछले कई सालों से भारतीय नौसेना और इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए युद्धपोत और अन्य जहाज तैयार कर रहा है। कंपनी की इस उपलब्धि को उसकी मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, लगातार ग्रोथ और ऑपरेशनल एक्सीलेंस का परिणाम माना जा रहा है।

GSL Schedule A Upgrade: शेड्यूल ए स्टेटस का क्या मतलब है

भारत में सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज को अलग-अलग कैटेगरीज में बांटा जाता है, जिनमें शेड्यूल ए सबसे ऊंची कैटेगरी होती है। इस कैटेगरी में वही कंपनियां आती हैं जिनका स्ट्रैटेजिक महत्व ज्यादा होता है और जिनकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत होती है।

अब जीएसएल को इस श्रेणी में शामिल किए जाने का मतलब है कि कंपनी को बड़े फैसले लेने में ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही बड़े प्रोजेक्ट्स को संभालने, फंडिंग जुटाने और ऑपरेशंस को विस्तार देने में भी आसानी होगी। इससे कंपनी की क्षमता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगी।

मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े प्रोजेक्ट्स

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के पास इस समय 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर बुक है। कंपनी एक साथ 20 से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रही है, जो उसकी उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।

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इन प्रोजेक्ट्स में भारतीय नौसेना के लिए नेक्स्ट जनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स शामिल हैं, जिनकी संख्या 7 है और जिनकी कुल वैल्यू करीब 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन जहाजों की डिलीवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा कंपनी इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल वेसल्स, फास्ट पेट्रोल वेसल्स और अन्य प्लेटफॉर्म भी तैयार कर रही है। हाल ही में श्रीलंका नौसेना के लिए एक फ्लोटिंग ड्राई डॉक भी लॉन्च किया गया था।

इसके अलावा साल 2018 में जीएसएल ने फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप के साथ एक समझौते और लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया था। नेवल ग्रुप ने भारत की स्कॉर्पीन क्लास अटैक सबमरीन डिजाइन की हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य पनडुब्बियों के लिए एडवांस सिमुलेटर्स और ट्रेनिंग सिस्टम्स तैयार करना था।

इन सिमुलेटर्स में थ्रीडी सिमुलेटर और ट्रेनिंग सूट्स शामिल हैं, जिनकी मदद से नेवी के जवानों को असली पनडुब्बी जैसी परिस्थितियों में ट्रेनिंग दी जा सकती है। इससे बिना वास्तविक मिशन के भी क्रू को ऑपरेशन की पूरी तैयारी कराई जा सकती है।

जीएसएल ने नेवल ग्रुप के साथ मिलकर भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे ट्रेनिंग सिस्टम्स विकसित करने की योजना बनाई थी। यह साझेदारी आज भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि जीएसएल को सिमुलेटर और ट्रेनिंग टेक्नोलॉजी में अच्छी पकड़ हासिल है।

डिफेंस और एक्सपोर्ट दोनों पर फोकस

जीएसएल न केवल घरेलू जरूरतों बल्कि यह फ्रेंडली फॉरेन कंट्रीज के लिए भी जहाज बना रहा है। इससे भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल रहा है।

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कंपनी का फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर है। इससे विदेशी निर्भरता कम होती है और देश के भीतर ही रक्षा उपकरण तैयार किए जा रहे हैं।

कंपनी भविष्य में अपने ऑपरेशंस को और बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में एक नया शिपबिल्डिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है। इससे बड़े युद्धपोत बनाने की क्षमता बढ़ेगी और हजारों रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

इसके अलावा आने वाले समय में नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स और अन्य एडवांस्ड युद्धपोतों के ऑर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर ये ऑर्डर मिलते हैं तो कंपनी का ऑर्डर बुक 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा तक पहुंच सकता है।

फाइनेंशियल प्रदर्शन और ग्रोथ

जीएसएल का हाल का प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया। साथ ही कंपनी पर कर्ज नहीं होने की स्थिति भी उसकी मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ को दिखाती है। सरकार द्वारा शेड्यूल ए कैटेगरी का दर्जा दिए जाने को इसी प्रदर्शन की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

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