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रक्षा मंत्रालय की बड़ी मंजूरी, ‘वीराज’ एंटी-टैंक स्मार्ट माइन और एयर-ड्रॉप्ड ड्रोन स्वार्म सिस्टम को दी हरी झंडी!

नई ‘वीराज’ माइन को ज्यादा एडवांस बनाने की योजना है। इसमें सेंसर आधारित सिस्टम हो सकता है, जो टैंक या भारी वाहन की हलचल को पहचान सके। इसके अलावा इसमें सेल्फ-न्यूट्रलाइजेशन जैसी क्षमता भी हो सकती है...

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📍नई दिल्ली | 7 Apr, 2026, 10:28 PM

Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System: रक्षा मंत्रालय ने ‘मेक-II’ कैटेगरी के तहत दो नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। जिसके तहत एंटी टैंक माइन ‘वीराज’ और एयर-ड्रॉप्ड कैनिस्टराइज्ड स्वार्म सिस्टम को डेवलप किया जाएगा। इन दोनों प्रोजेक्ट्स को ‘मेक-II’ कैटेगरी के तहत इन-प्रिंसिपल अप्रूवल यानी शुरुआती मंजूरी दी गई है। जिसके बाद अब देश की कंपनियां इन सिस्टम्स को डिजाइन और डेवलप करने का काम शुरू कर सकती हैं। ये दोनों सिस्टम सेना और वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं और इनमें खास तौर पर स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया गया है।

Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System: क्या है मेक-II और क्यों अहम है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मेक-II कैटेगरी क्या होती है। यह डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसिजर का हिस्सा है जिसमें सरकार कंपनियों को सीधे पैसे नहीं देती, बल्कि कंपनियां खुद अपने खर्च पर प्रोटोटाइप यानी शुरुआती मॉडल तैयार करती हैं।

अगर वह सफल होता है और सेना की जरूरतों को पूरा करता है, तो बाद में उसी कंपनी को बड़े स्तर पर प्रोडक्शन का ऑर्डर मिल सकता है। इस मॉडल का मकसद यह है कि देश में नई टेक्नोलॉजी डेवलप हो और विदेशों पर निर्भरता कम हो।

इसमें एक शर्त यह भी होती है कि कम से कम 50 फीसदी तकनीक और सामग्री भारत में ही तैयार होनी चाहिए। इसी वजह से इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम माना जाता है। (Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System)

क्या है वीराज’ एंटी-टैंक माइन

‘वीराज’ एंटी-टैंक माइन का इस्तेमाल दुश्मन के टैंक और भारी बख्तरबंद वाहनों को रोकने के लिए किया जाएगा। अभी तक सेना मुख्य रूप से जमीन पर हाथ से या मशीन के जरिए माइंस बिछाती रही है। जिसमें समय लगता है और कई बार जोखिम भी होता है, क्योंकि सैनिकों को दुश्मन के करीब जाकर यह काम करना पड़ता है।

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वहीं नई ‘वीराज’ माइन को ज्यादा एडवांस बनाने की योजना है। इसमें सेंसर आधारित सिस्टम हो सकता है, जो टैंक या भारी वाहन की हलचल को पहचान सके। इसके अलावा इसमें सेल्फ-न्यूट्रलाइजेशन जैसी क्षमता भी हो सकती है, यानी एक तय समय के बाद यह खुद ही डिएक्टिवेट हो जाए।

इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि माइन्स को सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि ड्रोन या अन्य सिस्टम के जरिए भी तेजी से लगाया जा सकेगा। इससे सेना को किसी एरिया को जल्दी से ब्लॉक करने में मदद मिलेगी, जिसे सैन्य भाषा में ‘एरिया डिनायल’ कहा जाता है। इस तरह के सिस्टम से खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन के आगे बढ़ने की गति को रोका जा सकता है।

पहले कैसे बिछाई जाती थीं माइंस

अब तक माइंस बिछाने का तरीका काफी पारंपरिक रहा है। सैनिक या तो खुद जाकर माइंस लगाते थे या फिर विशेष वाहन के जरिए इन्हें जमीन पर फैलाया जाता था। इसमें समय ज्यादा लगता था और कई बार दुश्मन को पहले ही इसका अंदाजा हो जाता था। इसके अलावा पुरानी माइंस में स्मार्ट फीचर्स नहीं होते थे, जिससे उन्हें हटाना या इनएक्टिव करना भी आसान हो जाता था। नई ‘वीराज’ माइन इन कमियों को दूर करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। (Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System)

क्या है ड्रोन स्वार्म सिस्टम

दूसरा प्रोजेक्ट एयर-ड्रॉप्ड कैनिस्टराइज्ड स्वार्म सिस्टम यानी एडीसी-एस से जुड़ा है। यह एक ऐसा सिस्टम है जिसमें एक साथ कई ड्रोन हवा में छोड़े जा सकते हैं और वे मिलकर हमला कर सकते हैं।

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उदाहरण के तौर पर, एक बड़ा विमान हवा में एक कंटेनर गिराएगा और उस कंटेनर के अंदर से कई छोटे-छोटे ड्रोन बाहर निकलेंगे। ये ड्रोन अलग-अलग दिशा में जाकर अपने-अपने टारगेट पर हमला कर सकते हैं। जिसे इसे स्वार्म टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इसमें ड्रोन एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और मिलकर काम करते हैं। (Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System)

कैसे काम करेगा यह सिस्टम

इस सिस्टम को बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे सी-17, सी-130 या सी-295 से इस्तेमाल किया जा सकता है। विमान सुरक्षित दूरी से ही इस कैनिस्टर को गिराएगा और उसके बाद अंदर मौजूद ड्रोन एक्टिव होकर अपने टारगेट की ओर बढ़ेंगे।

इन ड्रोनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेविगेशन सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे वे बिना जीपीएस के भी काम कर सकें। यह खास तौर पर तब जरूरी होता है जब दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। हर ड्रोन अपने साथ विस्फोटक ले जा सकता है और सटीक तरीके से टारगेट पर हमला कर सकता है।

अभी तक लंबी दूरी से हमला करने के लिए फाइटर जेट्स या मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था। फाइटर जेट्स को दुश्मन के इलाके के करीब जाना पड़ता था, जिससे खतरा बढ़ जाता था। वहीं, मिसाइलें महंगी होती हैं और हर स्थिति में उनका इस्तेमाल आसान नहीं होता। ड्रोन स्वार्म सिस्टम इन दोनों समस्याओं का समाधान देता है। इसमें एक साथ कई छोटे ड्रोन इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को कन्फ्यूज्ड कर सकते हैं।

स्वार्म टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। इसमें कई ड्रोन एक साथ काम करते हैं और दुश्मन के सिस्टम को ओवरलोड कर देते हैं। अगर दुश्मन एक-दो ड्रोन को रोक भी ले, तो बाकी ड्रोन अपने टारगेट तक पहुंच सकते हैं।

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इन दोनों प्रोजेक्ट्स के साथ एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को इसमें शामिल होने का मौका दिया गया है। वे अपने स्तर पर इन सिस्टम्स को डिजाइन और डेवलप कर सकते हैं। अगर उनका मॉडल सफल होता है, तो उन्हें बड़े स्तर पर उत्पादन का मौका मिल सकता है। इससे देश में डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और नई तकनीक तेजी से विकसित हो सकेगी। (Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System)

किस चरण में हैं ये प्रोजेक्ट

फिलहाल ये दोनों प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में हैं। इन्हें इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है, यानी डिजाइन और डेवलपमेंट की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके बाद कंपनियां अपने प्रोटोटाइप बनाएंगी, उनका ट्रायल होगा और फिर सेना की जरूरतों के हिसाब से अंतिम सिस्टम तैयार किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया समय लेती है, क्योंकि इसमें तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होता है। (Viraj Anti Tank Mine Drone Swarm System)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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