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Tejas Mk1A की डिलीवरी शुरू करने को लेकर HAL को मिली बड़ी राहत, वायुसेना ने दी शर्तों में दी ‘विशेष’ छूट

सरकार और वायुसेना ने यह फैसला लिया है कि कुछ गैर-जरूरी या कम अहम काम बाद में भी पूरे किए जा सकते हैं, लेकिन जरूरी क्षमताओं के साथ ही विमान को शामिल किया जाएगा...

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📍नई दिल्ली | 21 Feb, 2026, 10:54 PM

Tejas Mk1A Delivery: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए की डिलीवरी को लेकर एक बड़ा फैसला सरकार ने किया है। रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को कुछ शर्तों में छूट देने का फैसला किया है, ताकि इस अहम फाइटर जेट की डिलीवरी जल्द शुरू हो सके।

हालांकि इस पूरे फैसले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान की मुख्य यानी “मस्ट-हैव” क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यानी तेजस एमके1ए की ताकत और लड़ाकू क्षमता पूरी तरह बरकरार रहेगी। (Tejas Mk1A Delivery)

Tejas Mk1A Delivery: देरी के बाद लिया गया बड़ा फैसला

तेजस एमके1ए प्रोग्राम भारत के सबसे महत्वपूर्ण डिफेंस प्रोजेक्ट्स में से एक है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इसकी डिलीवरी लगातार टलती रही। पहले उम्मीद थी कि 2024-25 में यह विमान वायुसेना को मिलने लगेगा, लेकिन अब यह समयसीमा बढ़कर मार्च 2026 से भी आगे खिसक गई है।

इस देरी के पीछे कई वजहें रहीं। सबसे बड़ी समस्या अमेरिका से आने वाले जीई एफ404 इंजन की सप्लाई में देरी रही। इसके अलावा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसे एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और हथियारों के इंटीग्रेशन में भी समय लगा।

इन्हीं कारणों को देखते हुए अब सरकार और वायुसेना ने यह फैसला लिया है कि कुछ गैर-जरूरी या कम अहम काम बाद में भी पूरे किए जा सकते हैं, लेकिन जरूरी क्षमताओं के साथ ही विमान को शामिल किया जाएगा। (Tejas Mk1A Delivery)

क्या मिली है एचएएल को छूट

नई व्यवस्था के तहत एचएएल को कुछ कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है। इसका मतलब यह है कि अगर कुछ ऐसे काम बाकी हैं, जिनका सीधा असर विमान की लड़ाकू क्षमता पर नहीं पड़ता, तो उनके बिना भी विमान की डिलीवरी शुरू की जा सकती है।

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बताया जा रहा है कि पेंडिंग काम को तीन हिस्सों में बांटा गया है, माइनर, मेजर और नॉट एक्सेप्टेबल। इनमें से माइनर और कुछ मेजर कामों पर छूट दी जा सकती है।

वायुसेना इस बात के लिए तैयार है कि ऐसे विमान को स्वीकार किया जाए जिसमें कुछ काम बाद में पूरे किए जाएं, लेकिन यह छूट सिर्फ उन हिस्सों तक सीमित है जो ऑपरेशनल जरूरतों के लिए जरूरी नहीं हैं। (Tejas Mk1A Delivery)

किन चीजों पर कोई समझौता नहीं

इस पूरे फैसले का सबसे अहम हिस्सा यह है कि कुछ क्षमताओं को पूरी तरह जरूरी माना गया है। इनके बिना कोई भी विमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इनमें सबसे पहले आता है मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स। यानी विमान को अपने हथियारों का सही तरीके से इस्तेमाल करना आना चाहिए। (Tejas Mk1A Delivery)

दूसरा, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का सही इंटीग्रेशन। यह आधुनिक युद्ध में बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे विमान दुश्मन के रडार और मिसाइल से बच सकता है।

तीसरा, पूरा वेपन पैकेज। यानी विमान पर लगाए जाने वाले सभी हथियार सिस्टम पूरी तरह काम करने चाहिए।

इन तीनों को “नॉन-कॉम्प्रोमाइज” कैटेगरी में रखा गया है। यानी इन पर किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। (Tejas Mk1A Delivery)

एचएएल की क्या है डिलीवरी की तैयारी

एचएएल का कहना है कि वह डिलीवरी शुरू करने के लिए तैयार है। कंपनी के अनुसार पांच तेजस एमके1ए विमान पूरी तरह तैयार हैं और इनमें सभी जरूरी क्षमताएं शामिल हैं।

इसके अलावा नौ और विमान बनाए जा चुके हैं, लेकिन वे इंजन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

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एचएएल का यह भी कहना है कि जो देरी हुई है, वह सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग की वजह से नहीं है, बल्कि डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े कुछ काम अभी पूरे होने बाकी हैं, जिनमें एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी की भूमिका भी है। (Tejas Mk1A Delivery)

इससे पहले दिसंबर 2025 में इस पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें एचएएल ने अलग-अलग सिस्टम्स को पूरा करने के लिए टाइमलाइन दी थी।

अब अप्रैल 2026 में एक और बड़ी रिव्यू मीटिंग होने की संभावना है, जिसमें यह देखा जाएगा कि कितनी प्रगति हुई है।

इसके बाद मई 2026 में वायुसेना इस प्रोजेक्ट का व्यापक मूल्यांकन करेगी। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो 2026-27 के मध्य तक तेजस एमके1ए की डिलीवरी शुरू हो सकती है। (Tejas Mk1A Delivery)

वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है तेजस

भारतीय वायुसेना इस समय स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। पुराने मिग-21 जैसे विमान तेजी से रिटायर हो रहे हैं, जिससे फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या घट रही है।

ऐसे में तेजस एमके1ए एक अहम भूमिका निभाने वाला है। यह 4.5 जनरेशन का आधुनिक फाइटर जेट है, जिसमें एडवांस्ड रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग जैसी क्षमताएं हैं।

यह न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा। (Tejas Mk1A Delivery)

180 विमानों का बड़ा ऑर्डर

भारत ने तेजस एमके1ए के लिए कुल 180 विमानों का ऑर्डर दिया है। इसमें पहला कॉन्ट्रैक्ट 83 विमानों का 2021 में हुआ था, जिसकी कीमत करीब 48,000 करोड़ रुपये थी।

इसके बाद 2025 में 97 और विमानों का ऑर्डर दिया गया, जिसकी कीमत लगभग 62,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह भारत के डिफेंस सेक्टर में सबसे बड़े स्वदेशी ऑर्डर्स में से एक है। (Tejas Mk1A Delivery)

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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