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Starlink misuse in India: क्या स्टारलिंक को लेकर झूठ बोला एलन मस्क ने? भारत में आतंकी कर रहे इस्तेमाल, सरकार ने शुरू की जांच

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📍नई दिल्ली | 4 Jan, 2025, 12:22 PM

Starlink misuse in India: स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट डिवाइस (Starlink satellite internet device) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले दिनों मणिपुर से सुरक्षा एजेसियों ने स्टारलिंक डिवाइस को मणिपुर के आतंकी समूहों से बरामद किया था। इस डिवाइस को एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) बनाती है। यह डिवाइस पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नामक आतंकी समूह के ठिकाने से बरामद हुई थी। सुरक्षा बलों ने 13 दिसंबर को सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान इसे जब्त किया था। डिवाइस पर RPF/PLA लिखा हुआ था, जो इस आतंकी संगठन की पहचान है। स्टारलिंक डिवाइस उस वक्त चर्चा में आई थी, जब रूस-यूक्रेन युद्ध में इसके इस्तेमाल की खबरें आई थीं।

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Starlink misuse in India: उग्रवादी समूह कर रहे हैं स्टारलिंक का इस्तेमाल

वहीं गार्जियन अखबार ने खुलासा किया है कि मणिपुर में जारी हिंसा के दौरान उग्रवादी समूहों ने इंटरनेट शटडाउन के बावजूद स्टारलिंक डिवाइस का इस्तेमाल किया था। हालांकि स्टारलिंक को भारत में अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है और इसके ऑपरेशन शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई है। लेकिन म्यांमार में स्टारलिंक की सर्विस जारी है। मणिपुर की सीमा म्यांमार से सटी हुई हैं, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि इन डिवाइसों को तस्करी के जरिए मणिपुर लाया गया।

सूत्रों के अनुसार, यह डिवाइस म्यांमार सीमा पर सक्रिय आतंकी समूहों द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। स्टारलिंक के उपयोग से आतंकियों को सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट तक आसान पहुंच मिल रही है, जिससे उनकी गतिविधियों को अंजाम देना और भी आसान हो गया है।

Starlink misuse in India: एलन मस्क ने किया था इनकार

पिछले साल दिसंबर में जब असम राइफल्स ने मणिपुर के उग्रवादी समूहों से स्टारलिंक के डिश और राउटर को जब्त किया था, उस वक्त एलन मस्क ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट जारी करके कहा था कि “स्टारलिंक भारत में बंद है और इसका उपयोग नहीं हो सकता।” हालांकि, सुरक्षा बलों द्वारा डिवाइस जब्त किए जाने और आतंकियों द्वारा इसके इस्तेमाल की पुष्टि के बाद मस्क का यह दावा सवालों के घेरे में है।

सूत्रों ने बताया कि स्टारलिंक डिवाइस म्यांमार के जरिए भारत में तस्करी कर लाई जाती है। इन डिवाइसों का उपयोग मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में किया जा रहा है, जहां इंटरनेट सेवाएं सरकार द्वारा निलंबित रहती हैं।

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स्टारलिंक में मिलता है अनलिमिटेड डाटा

सूत्रों ने बताया कि मणिपुर के सभी उग्रवादी आदिवासी समूह- मैतयी, नागा और कुकी- सभी स्टारलिंक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें मुख्य रूप से म्यांमार और सीमावर्ती क्षेत्रों से कंट्रोल किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि “म्यांमार स्थित विद्रोही समूह और तस्कर अपने कामों के लिए इस डिवाइस का उपयोग करते हैं क्योंकि स्टारलिंक पर डाटा की कोई लिमिट नहीं है।”

एक सूत्र ने कहा, “हां, यह सच है कि स्टारलिंक का इस्तेमाल दिल्ली, मुंबई या कहीं भी अंदरूनी इलाकों में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि भारत को कंपनी ने खुद ही जियोटैग किया हुआ है, लेकिन यह म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है।”

Starlink misuse in India: ड्रग तस्करी में हो रहा है इस्तेमाल

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब स्टालिंक डिवाइस पकड़ी गई हो। इससे पहले भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले साल नवंबर में स्टारलिंक डिवाइस बरामद की थी। नवंबर के अंत में अंडमान और निकोबार पुलिस ने म्यांमार की एक नाव में 6,000 किलोग्राम से अधिक मेथामफेटामाइन के अलावा एक स्टारलिंक मिनी इंटरनेट डिवाइस जब्त की थी यह डिवाइस तस्करों द्वारा नेविगेशन और वाई-फाई हॉटस्पॉट बनाने के लिए उपयोग की जा रही थी। अंडमान के डीजीपी हरगोबिंदर सिंह धालीवाल ने पुष्टि की कि तस्करों ने सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर इंटरनेट हॉटस्पॉट बनाए थे, जो उनकी गतिविधियों को आसान बना रहे थे।

सरकार ने मांगी थी जानकारी, कंपनी ने किया था इनकार

सूत्रों ने बताया कि वहीं, जब भारत सरकार ने स्टारलिंक से जब इन उपकरणों के मूल खरीदारों की जानकारी मांगी, लेकिन कंपनी ने डेटा गोपनीयता कानूनों का हवाला देते हुए सहयोग करने से इनकार कर दिया। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “तस्करी के मामले में जब्त इन उपकरणों के मालिकों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन स्टारलिंक ने सहयोग से मना कर दिया।”

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स्टारलिंक डिवाइस का उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों, जैसे तस्करी और आतंकवाद में होने से भारत में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक स्टारलिंक अपने सुरक्षा उपायों और डेटा प्रबंधन पर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देती, तब तक उसे भारत में ऑपरेंशंस शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भारत सरकार ने डॉट (DoT) और MHA से स्टारलिंक की तकनीकी और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कंपनी से सुरक्षा उपायों पर जानकारियां मांगी जा रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तकनीक का दुरुपयोग न हो।

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भारत में लाने की कोशिश कर रहे हैं एलन मस्क

एलोन मस्क लंबे समय से स्टारलिंक को भारत जैसे विशाल बाजार में लाने की कोशिश कर रहे हैं। नवंबर 2024 में, भारत सरकार ने पुष्टि की थी कि स्टारलिंक आवश्यक सुरक्षा अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। हालांकि, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट जैसी सेवाओं पर सख्त नियंत्रण है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारलिंक का उपयोग इंटरनेट शटडाउन को दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।

स्टारलिंक: क्या है इसकी खूबियां?

स्टारलिंक की वेबसाइट के अनुसार, “वह दुनिया का पहला और सबसे बड़ा उपग्रह समूह” है, जो LEO उपग्रहों का उपयोग करके ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करता है। यह सेवा स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल जैसे उच्च-बैंडविड्थ कार्यों को सुचारू रूप से सपोर्ट करने में सक्षम है। अधिकांश पारंपरिक उपग्रह इंटरनेट सेवाएं 35,786 किमी की ऊंचाई पर स्थित भूस्थिर उपग्रहों पर निर्भर करती हैं। इसके कारण उपयोगकर्ता और उपग्रह के बीच डेटा के राउंड-ट्रिप समय (विलंबता) में काफी देरी होती है। यह विलंबता 600 मिलीसेकंड या उससे अधिक हो सकती है, जिससे ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल जैसी गतिविधियों के लिए यह सिस्टम उपयुक्त नहीं बन पाता।

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वहीं स्टारलिंक ने इस समस्या को हल करते हुए विलंबता को घटाकर केवल 25 मिलीसेकंड तक कर दिया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसके उपग्रह पृथ्वी के बेहद करीब, सिर्फ 550 किमी की ऊंचाई पर परिक्रमा करते हैं। इस तरह यह पूरी दुनिया को कवर करता है।

जून 2024 में सिएरा लियोन, अफ्रीका में सेवाएं शुरू होने के बाद, स्टारलिंक अब 100 देशों में सक्रिय हो चुकी है। कंपनी भारत में भी अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में है। भारत में स्टारलिंक को भारती एंटरप्राइजेज के स्वामित्व वाली यूटेलसैट वनवेब, रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियोस्पेसफाइबर, और अमेज़न के कुइपर सिस्टम्स जैसे कंपनियों से मुकाबला करना होगा। वहीं, स्टारलिंक की योजना है कि 42,000 उपग्रहों का एक विशाल तारामंडल (Megaconstellation) बनाना है। इसके मुकाबले, यूटेलसैट वनवेब के नेटवर्क में 1,200 किमी की LEO कक्षा में लगभग 630 उपग्रह शामिल हैं।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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