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Nepali Army Command: भारत आए नेपाली सेना के अधिकारी, जाना आधुनिक युद्धक तकनीकों का राज! एलएंडटी और भारत फोर्ज का भी किया दौरा

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

Nepali Army Command: भारत और नेपाल के लंबे समय से मजबूत और दोस्ताना संबंध रहे हैं, जो न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव पर आधारित हैं बल्कि दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर भी आधारित हैं। इसी कड़ी में, नेपाली सेना कमांड और स्टाफ कॉलेज के 41 अधिकारियों का एक दल 15 से 23 जनवरी 2025 के बीच भारत दौरा पर आया हुआ है। इस दौरे में पांच अन्य मित्र देशों के अधिकारी और कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक भी शामिल हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे का उद्देश्य भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों, नौसेना कमांड, वायुसेना स्टेशनों और निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं का अध्ययन करना था। इस दौरे को भारत-नेपाल के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Nepali Army Command: सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा

अधिकारियों के इस दल ने भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा किया। इन दौरों में उन्हें भारतीय सेना के ट्रेनिंग सिस्टम, रणनीति और कार्यशैली को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला। प्रशिक्षण संस्थानों में भारतीय सेना के अनुशासन, तकनीकी कौशल और आधुनिक युद्धक तकनीकों की झलक देखने को मिली, जो आज भारत को दुनिया की अग्रणी सैन्य शक्तियों में शुमार करते हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

पश्चिमी नौसेना कमान और वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा

विदेशी अधकारियों के इस दल ने मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया, जहां उन्हें भारतीय नौसेना की ताकत, युद्धपोत निर्माण और समुद्री सुरक्षा में उसकी रणनीतिक भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद पुणे स्थित वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा किया गया। यहां पर वायुसेना की ताकत और उसकी आधुनिक तकनीकी क्षमताओं के बारे में अधिकारियों ने गहराई से जानकारी प्राप्त की।

Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना प्रमुख का भारत दौरा; गोरखा भर्ती और रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

निजी रक्षा उद्योगों का दौरा

नेपाली दल ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और भारत फोर्ज जैसे भारत के प्रमुख निजी रक्षा उद्योगों का दौरा भी किया। यह दौरा भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग की ताकत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को समझने के लिए आयोजित किया गया था। इन उद्योगों ने रक्षा उपकरणों के उत्पादन, डिज़ाइन और निर्यात में अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

इन उद्योगों में निर्मित उन्नत हथियार प्रणालियों और उपकरणों को देखकर प्रतिनिधिमंडल ने भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता की सराहना की।

दौरे के दौरान, भारतीय अधिकारियों ने नेपाली दल के साथ खुलकर संवाद किया और साझा इतिहास, संस्कृति और सैन्य परंपराओं पर चर्चा की। यह दौरा न केवल सैन्य क्षमताओं और तकनीकी ज्ञान को साझा करने का माध्यम बना, बल्कि भारत और नेपाल के बीच आपसी समझ और सहयोग को और गहराई प्रदान करने का एक अवसर भी साबित हुआ।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। भारत लंबे समय से नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य उपकरण प्रदान करने में मदद करता आ रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए अपने कौशल को साझा करती हैं।

नेपाली अधिकारियों ने इस दौरे को बेहद लाभकारी बताते हुए कहा कि यह उनके दृष्टिकोण और रणनीतिक सोच को व्यापक बनाने में मददगार साबित हुआ है। उन्होंने भारत के रक्षा तंत्र, औद्योगिक क्षमताओं और तकनीकी विकास की प्रशंसा की।

यह दौरा भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। दोनों देशों के बीच इस तरह के अध्ययन दौरों से आपसी समझ और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में, इस तरह की पहल न केवल दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को बढ़ावा देंगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Republic Day Parade: भारतीय नौसेना की झांकी में दिखेगी ‘आत्मनिर्भरता’, पहली बार महिला अग्निवीर बनेंगी नेवी बैंड का हिस्सा!

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!

Republic Day Parade: आगामी 76वें गणतंत्र दिवस पर भारतीय नौसेना की झांकी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की थीम को दर्शाएगी। यह झांकी भारत की समुद्री ताकत और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने रखेगी। इस साल की परेड में भारतीय नौसेना की झांकी का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर ममता सिहाग करेंगी, जो डॉर्नियर 228 मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट की पायलट हैं। साथ ही, पहली बार नौसेना के बैंड में 6 महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी।

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!

इस वर्ष की झांकी में तीन प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म, आईएनएस सूरत (डिस्ट्रॉयर), आईएनएस नीलगिरी (फ्रिगेट) और आईएनएस वाघशीर (पनडुब्बी), का प्रदर्शन किया जाएगा। इन्हें हाल ही में 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कमीशन किया गया था। इन तीनों प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारतीय नौसेना भारत की उभरती समुद्री ताकत और आत्मनिर्भरता का संदेश दुनिया को देगी।

Republic Day Parade: झांकी का नेतृत्व करेंगी महिला अफसर

बुधवार को कोटा हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेवी ने झांकी का एक मॉडल प्रदर्शित किया। नौसेना की झांकी का नेतृत्व करने वालीं लेफ्टिनेंट कमांडर ममता सिहाग ने इस अवसर पर कहा, “हमारी झांकी में समुद्र, आकाश और जल-तल की सभी तीनों आयामों का प्रदर्शन होगा। आत्मनिर्भर भारत के लिए किए गए इन तकनीकी उपलब्धियों को दिखाने का यह एक सुनहरा अवसर है।”

भारतीय नौसेना के कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी ने बताया कि यह झांकी उन नाविकों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करती है, जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए गहराई से लेकर ऊंचाइयों तक दिन-रात तैनात रहते हैं।

Republic Day Parade: नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और बैंड

इस बार नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी में 148 अधिकारी और नाविक शामिल होंगे, जो 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस टुकड़ी का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर साहिल अहलूवालिया करेंगे। इसे ‘मिनी इंडिया’ का प्रतीक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागी शामिल हैं।

Frontline Naval Ships: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर को राष्ट्र को किया समर्पित

इसके अलावा, नौसेना के बैंड में 81 सदस्य भारतीय धुनों को प्रस्तुत करेंगे। खास बात यह है कि इस वर्ष पहली बार नौसेना के बैंड में छह महिला अग्निवीर भी शामिल होंगी। यह कदम महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने का प्रतीक है।

झांकी में आत्मनिर्भरता की झलक

झांकी में प्रदर्शित प्लेटफॉर्म्स भारतीय तकनीकी क्षमता और नौसेना की बहुआयामी भूमिका का प्रतीक हैं। आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर का निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Republic Day Parade: Navy's 'Atmanirbharta' Tableau to Feature Women Agniveers in Band for the First Time!
Indian Navy’s Republic Day parade tableau

वाइस एडमिरल मैकार्थी ने इसे “भारत के नए दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता के प्रतीक” के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2025 का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, जब ये तीन प्रमुख प्लेटफॉर्म कमीशन किए गए।

महिला अग्निवीरों की ऐतिहासिक भागीदारी

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार महिला अग्निवीरों की भागीदारी एक ऐतिहासिक पहल है। नौसेना बैंड में शामिल इन छह महिलाओं ने अपनी कठोर ट्रेनिंग के बाद भारतीय धुनों को प्रस्तुत करने का गौरव हासिल किया है। इससे न केवल महिलाओं की ताकत और क्षमता का प्रदर्शन होगा, बल्कि यह अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी बनेगा।

नौसेना की झांकी और प्रदर्शन यह स्पष्ट करते हैं कि भारतीय नौसेना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी योगदान दे रही है। गणतंत्र दिवस पर इस भव्य प्रदर्शन से न केवल नौसेना की तकनीकी ताकत का परिचय होगा, बल्कि यह भारतीय युवाओं को देश की सेवा के लिए प्रेरित भी करेगा।

Foreign nationals lodged in Assam for ten years, Supreme Court pulls up state for not justifying reasons, ask Chief Secretary to appear virtually

Supreme Court Urges Action on Assam Detention Centers

Assam detention centers: The Supreme Court on Wednesday pulled up state of Assam for poor conditions of foreign nationals who are lodged in detention centres in the state for years together and for not taking steps for their deportation so far.

Supreme Court Urges Action on Assam Detention Centers

Assam detention centers: CHIEF SECRETARY SUMMONED

A visibly angry bench of Justices A S oka and N K Singh summoned the Chief Secretary of Assam to explain as to what steps the state government has taken to deport the foreign nationals.

“We want justification why these detentions are continuing without even process of deportation starting?,” Justice Oka asked counsel appearing for state of Assam.

270 FOREIGN NATIONALS LODGED

Bench went on to pull up state government for failing to give justification as to why 270 foreign nationals were lodged in the state and why no steps being taken to deport them back.

Last year the top court had directed Union Government to take immediate steps for deporting 17 declared foreigners detained in transit camps of Assam, considering no pending cases were registered against them.

STATE CLAIMS DETENTION AFTER FOREIGN TRIBUNAL ORDER

Responding to the query from the bench, advocate appearing for state of Assam tells that, “They were detained only after they were declared foreigners by Foreigners Tribunals.”

At this the bench said, “We want justification why these detentions are continuing without even process of deportation starting?”

SUPREME COURT SEEKS STEPS TAKEN FOR DEPORTATION

The top court summoned the Chief Secretary of Assam virtually and passed the order , “Some foreigners languishing for 10 or more years. The affidavit does not give any justification for detaining…steps taken to deport are not set out. This is gross violation of orders of this court. We direct Chief Secretary to remain present through VC and explain the non-compliance on next date of hearing on February 5.”

Exercise TOPCHI: देवलाली में गूंजी K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड गन, ‘एक्सरसाइज तोपची’ में भारतीय सेना ने दिखाया दम

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali

Exercise TOPCHI: भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट की तरफ से सालाना फायरपावर ट्रेनिंग एक्सरसाइज ‘एक्सरसाइज तोपची’ (Exercise TOPCHI) का आयोजन 21 जनवरी 2025 को देवलाली फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। यह अभ्यास स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने भारतीय सेना की आधुनिक और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का भव्य प्रदर्शन किया।

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali

स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नवनीत सिंह सरना ने बताया, ‘एक्सरसाइज टॉपची’ भारतीय सेना के तोपखाना रेजिमेंट की क्षमता, तोप प्रणाली और हमारे जवानों के उत्कृष्ट प्रशिक्षण मानकों को प्रदर्शित करती है। यह अभ्यास तोपखाना स्कूल में प्रशिक्षण लेने वाले सभी जवानों और अधिकारियों के प्रशिक्षण स्तर को दर्शाता है।

Exercise TOPCHI: Indian Army Showcases K-9 Vajra's Power at Devlali
Lieutenant General Navneet Singh Sarna

उन्होंने बताया, इस अभ्यास में हमारे ज्यादातर उपकरण स्वदेशी हैं, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं। हमारा लक्ष्य है कि देश में निर्मित गोला-बारूद सहित सभी उपकरण स्वदेशी हों। ‘एक्सरसाइज टॉपची’ में हमारे पास मौजूद तोपखाना प्रणालियों, उनकी मारक क्षमता और स्कूल ऑफ आर्टिलरी के उच्च प्रशिक्षण मानकों का प्रदर्शन किया गया। यह अभ्यास भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध तकनीकों और आत्मनिर्भरता की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को बखूबी रेखांकित करता है।

इस कार्यक्रम में रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (वेलिंगटन), रक्षा सेवा तकनीकी स्टाफ पाठ्यक्रम (पुणे), नेपाल सेना स्टाफ कोर्स के छात्र अधिकारियों, विभिन्न प्रशिक्षण अकादमियों के कैडेट्स, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, और सिविल प्रशासन के सदस्य उपस्थित थे।

आधुनिक हथियारों और तकनीकों का प्रदर्शन

अभ्यास के मुख्य आकर्षण में भारतीय सेना की उन्नत तोपखाना प्रणालियों और निगरानी क्षमताओं का लाइव प्रदर्शन शामिल था। इसमें निम्नलिखित आधुनिक हथियारों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया:

  • K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम
  • 155mm M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर
  • 155mm धनुष तोप
  • 155mm FH 77B02 (बोफोर्स)

साथ ही, पिनाका और स्मर्च रॉकेट सिस्टम, स्वार्म ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, और उन्नत ड्रोन क्षमताओं जैसे अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।

यह अभ्यास आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। भारतीय सेना की यह पहल न केवल देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करती है, बल्कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में भी एक कदम है।

एक्सरसाइज तोपची ने न केवल तोपखाना रेजिमेंट की पेशेवर क्षमता को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि सेना किसी भी परिचालन चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस अभ्यास ने सेना की एकीकृत निगरानी और फायरपावर क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया, जो भारत की बढ़ती रक्षा ताकत को दर्शाता है।

इस आयोजन ने सेना की आधुनिक युद्ध तकनीकों के उपयोग में दक्षता और स्वदेशी रक्षा प्रणाली के महत्व को रेखांकित किया। इसे देखकर यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना भविष्य की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

Illegal Indian Migrants: अमेरिका में अवैध घुसपैठ पर ट्रंप सख्त; डंकी रूट से यूएस गए 18,000 भारतीयों को वापस लाएगा भारत!

Illegal Indian Migrants: Trump Cracks Down, India to Repatriate 18,000 from US via Donkey Route!

Illegal Indian Migrants: भारत सरकार ने डंकी रूट से अमेरिका गए अवैध प्रवासियों को वापस लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन के साथ सहयोग करने की योजना बनाई है। यह कदम नई दिल्ली द्वारा ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों को बनाए रखने और संभावित व्यापार युद्ध से बचने की रणनीति का हिस्सा है।

Illegal Indian Migrants: Trump Cracks Down, India to Repatriate 18,000 from US via Donkey Route!

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने लगभग 18,000 भारतीय नागरिकों की पहचान की है, जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं और जिन्हें भारत वापस भेजा जाएगा। हालांकि, यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि अवैध भारतीय प्रवासियों की सही संख्या का अनुमान जुटाना कठिन है।

ट्रंप प्रशासन से तालमेल बैठाने की कोशिश

अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई ट्रंप के चुनावी वादों का हिस्सा रही है। ट्रंप ने अपने आदेश में साफ किया कि अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले प्रवासियों को वापस उनके देश भेजा जाएगा। उनकी घोषणा ने भारतीय समुदाय में खलबली मचा द हैी, क्योंकि अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले करीब 7.5 लाख भारतीय प्रवासियों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। अपने शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही, ट्रंप ने कदम उठाते हुए नागरिकता कानून और बॉर्डर सिक्योरिटी पर सख्त फैसले लिए। इस बीच, भारत ने भी यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि ट्रंप प्रशासन खासकर छात्र वीजा और एच-1बी वीजा जैसे प्रोग्राम के लिए भारतीयों के लीगल माइग्रेशन के रास्ते खुले रखे।

एच-1बी वीजा के मामले में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। 2023 में जारी किए गए कुल 3,86,000 वीजा में से लगभग तीन-चौथाई भारतीय नागरिकों को दिए गए।

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Illegal Indian Migrants: अवैध प्रवासियों के मामले में तीसरे नंबर पर है भारत

अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या की बात करें, तो भारत तीसरे नंबर पर है। 2024 में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोलिंग अधिकारियों द्वारा पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या कुल का केवल 3 फीसदी थी। हालांकि, हाल के वर्षों में यह आंकड़ा उत्तरी अमेरिकी सीमा पर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक अमेरिका में लगभग 2,20,000 अवैध भारतीय प्रवासी रह रहे थे।

अवैध प्रवासी रचते हैं भारत के खिलाफ साजिश

भारत सरकार ने अवैध प्रवासियों की वापसी के लिए अमेरिका के साथ सहयोग को एक अवसर के रूप में देखा है। यह कदम केवल अवैध प्रवासन को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत के विदेश में अलगाववादी आंदोलनों, जैसे खालिस्तान आंदोलन, को कमजोर करने के उद्देश्य से भी देखा जा रहा है। खालिस्तान आंदोलन के कुछ समर्थक अमेरिका और कनाडा में रह रहे हैं, जिनमें से कई को अवैध प्रवासी माना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंधों के बावजूद, भारत अमेरिका से किसी भी अप्रत्याशित कदम को लेकर सतर्क है। ट्रंप ने बार-बार भारत की इंपोर्ट ड्यूटी की आलोचना की है और अमेरिकी व्यापार पर इसके असर का हवाला देते हुए जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी है।

उत्तरी अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासी

यह बात भी सामने आई है कि उत्तरी अमेरिका की सीमा पर भारतीय प्रवासियों का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी सीमा गश्ती आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी सीमा पर पकड़े गए अवैध भारतीय प्रवासियों की संख्या अन्य किसी भी देश से अधिक है।

इसकी वजह 2023 में अल सल्वाडोर द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रैवल को खत्म करना और कनाडा के लिए भारतीय नागरिकों के ट्रैवल करने में आसानी शामिल हो सकती है।

वहीं, अगर भारत अवैध प्रवासियों की वापसी का कदम उठाता है, तो यहां देश के भीतर भी विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव डाल सकते हैं। अवैध प्रवासियों की वापसी से भारत में रोजगार संकट बढ़ सकता है, क्योंकि पहले से ही देश में नौकरियों की कमी है।

अमेरिका ने 519 भारतीय अवैध प्रवासियों को किया वापस

तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 7 दिसंबर 2024 को लोकसभा में जानकारी दी कि अमेरिका ने 2023-24 के बीच 519 अवैध भारतीय प्रवासियों को कमर्शियल और चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारत वापस भेजा।

अमेरिका के कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 के बीच हर घंटे करीब 10 भारतीयों ने अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने का प्रयास किया। इस दौरान, 90,000 से अधिक भारतीयों को सीमा पर गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 50 फीसदी गुजरात से थे।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2020 से 2022 के बीच करीब 1 लाख भारतीयों ने अवैध रूप से अमेरिका जाने की कोशिश की। इनमें से अधिकांश ने ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया, जो दक्षिण अमेरिका से अमेरिका तक का खतरनाक मार्ग है। इस मार्ग पर शाहरुख खान की फिल्म “डंकी” भी बनी है, जिसने इस समस्या को चर्चा में लाया।

इन अवैध प्रवासियों में से कई अपनी जमीन बेचकर और कर्ज लेकर बेहतर जीवन की तलाश में अमेरिका जाते हैं। हालांकि, ऐसे कदम न केवल खतरनाक हैं बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

अमेरिका जाने के लिए डंकी रूट

अमेरिका में अवैध रूप से घुसने वाले भारतीयों के लिए ‘डंकी रूट’ एक प्रमुख रास्ता बन गया है। इस रूट के जरिए लोग भारत से दक्षिण अमेरिका के देशों, जैसे मेक्सिको या पनामा, तक पहुंचते हैं और वहां से जंगलों और खतरनाक बॉर्डर्स को पार करते हुए अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

हाल ही में हरियाणा और गुजरात के कई परिवारों ने अपने बच्चों को इस रास्ते से अमेरिका भेजा, लेकिन यह यात्रा खतरों से भरी है। कई लोगों ने इस दौरान अपनी जान गंवाई।

अवैध रूप से अमेरिका जाने वाले भारतीय कई बार मानव तस्करी का शिकार हो जाते हैं। एजेंट लाखों रुपये लेकर उन्हें खतरनाक रास्तों से अमेरिका भेजने का वादा करते हैं। गुजरात और पंजाब से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को जंगलों, समुद्र और बर्फीले इलाकों के जरिए अमेरिका पहुंचाया गया।

2023 में, मेहसाणा जिले के एक परिवार की कनाडा-अमेरिका बॉर्डर पार करते समय मौत हो गई। वे भी डंकी रूट का सहारा ले रहे थे।

भारत में रोजगार की कमी: पलायन का मुख्य कारण

अमेरिका जाने वाले अधिकांश भारतीय युवाओं का कहना है कि भारत में बेरोजगारी और आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें इस तरह के खतरनाक कदम उठाने पड़े। हरियाणा के एक युवा ने बताया कि उसने अपनी जमीन बेचकर और 50 लाख रुपये कर्ज लेकर अमेरिका जाने का जोखिम उठाया। वह अमेरिका में ट्रक चला रहा है और हर महीने 2.5 लाख रुपये कमा रहा है।

भारत में छोटी फैक्ट्री या बिजनेस शुरू करने को लेकर उसने कहा, “भारत में बिजनेस सफल होना मुश्किल है। यहां महंगाई और बेरोजगारी ने जीवन कठिन बना दिया है।”

नागरिकता कानून में बदलाव 

डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। अमेरिका में 150 साल से यह कानून लागू है कि अगर कोई बच्चा अमेरिकी जमीन पर पैदा होता है, तो वह स्वतः रूप से अमेरिका का नागरिक बन जाता है। इसके लिए यह मायने नहीं रखता कि उसके माता-पिता कौन हैं, कहां से आए हैं, या उनकी नागरिकता का क्या दर्जा है। इस नीति का उद्देश्य ‘बर्थ टूरिज्म’ को रोकना है, जहां लोग सिर्फ अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए वहां जाते हैं।

1868 के संविधान संशोधन के तहत यह प्रावधान किया गया था कि जो भी अमेरिका में जन्म लेता है, या अपनी मूल नागरिकता छोड़कर अमेरिका की नागरिकता के लिए आवेदन करता है, उसे अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। इस कानून के चलते पिछले डेढ़ सौ वर्षों में करोड़ों लोगों को अमेरिका की नागरिकता मिली है।

प्रोटेक्टिंग द मीनिंग एंड वैल्यू ऑफ अमेरिकन सिटीजनशिप कानून यह भी सुनिश्चित करता है कि अगर माता-पिता के पास सही दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन बच्चा अमेरिका में जन्म लेता है, तो उसे समान अधिकार और सुरक्षा प्राप्त होगी। हालांकि, ट्रंप के इस नए आदेश ने इस प्रावधान में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब इस आदेश के तहत जन्म के आधार पर नागरिकता पाने की परंपरा पर विराम लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो लंबे समय से अमेरिका में विवाद का विषय रही है।

क्या भारत वापस भेजेगा अवैध बंग्लादेशी?

भारत में नागरिकता को लेकर कितनी बहसें हुईं, यह याद करना जरूरी है। धर्म के आधार पर नागरिकता देने का कानून जब पास हुआ, तब देश में व्यापक हिंसा हुई थी। इस कानून को लागू कराने के दौरान जो उथल-पुथल मची, वह आज भी लोगों के जेहन में है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इस कानून के पास होने के पांच साल बाद जाकर इसके नियम बनाए गए।

अवैध घुसपैठियों का पता लगाने के लिए असम में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू किया गया, लेकिन उससे कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। और अंत में, एनआरसी को औपचारिक रूप से स्वीकार भी नहीं किया गया। यह एक विडंबना है कि जब भारत में अवैध प्रवासियों को रोकने की कोशिशें इस तरह अधूरी रहीं, तब नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि आज अमेरिका में अवैध प्रवासियों का तीसरा सबसे बड़ा समूह भारतीयों का बन चुका है।

Indian Air Force: पूर्व वायुसेना ग्रुप कैप्टन की चेतावनी; अगले 3-4 दशकों तक चीन को युद्ध में नहीं हरा सकता भारत, बताई ये बड़ी वजह

Indian Air Force: Ex-IAF Captain Warns India Can't Defeat China Militarily for Next 3-4 Decades

Indian Air Force: भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में चेतावनी दी है कि आने वाले तीन से चार दशकों तक भारत चीन को नहीं हरा सकता है। उन्होंने वायुसेना के कम होते स्क्वाड्रन क्षमता और लड़ाकू विमानों की सप्लाई में देरी पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ का कम होना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अहलावत जोर दिया कि भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy) बनाने की जरूरत है, ताकि भारत की रक्षा नीतियों और आर्म्ड फोर्सेस के बीच सामंजस्य बनाया जा सके।

Indian Air Force: Ex-IAF Captain Warns India Can't Defeat China Militarily for Next 3-4 Decades
Former Indian Air Force (IAF) Group Captain Ajay Ahlawat

Indian Air Force: आजादी के बाद से अब तक का सबसे कम स्क्वाड्रन

ग्रुप कैप्टन अहलावत ने वायुसेना की मौजूदा स्थिति को ‘खतरनाक रूप से कमजोर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत की वायुसेना के पास आजादी के बाद से अब तक का सबसे कम स्क्वाड्रन हैं। “हमारे पास कुल 17 स्क्वाड्रन की योजना है, जिसमें LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के तीन स्क्वाड्रन, LCA Mk 1A के चार स्क्वाड्रन, Mk 2 के चार स्क्वाड्रन और AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के छह स्क्वाड्रन शामिल हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से सिर्फ तीन स्क्वाड्रन फिलहाल तैयार हैं। Mk-2 अभी कागज पर है, और AMCA की पहली ट्रायल उड़ान 2028 तक होने की उम्मीद है।”

अहलावत की यह टिप्पणी उस समय आई है जब वायुसेना में स्क्वाड्रन की संख्या बेहद कम है। आजादी के बाद से यह अब तक का सबसे निचला स्तर है। वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि यह संख्या 42 होनी चाहिए।

चीन से मुकाबले की चुनौती

“हमारा चीन के साथ विवाद सांस्कृतिक नहीं है, यह सीमा विवाद है। दोनों देशों के पास अपनी-अपनी अलग धारणाएं हैं।अगर दोनों पक्ष किसी बीच के मार्ग पर सहमत हो सकें, तो इससे समस्या का समाधान हो सकता है। इसे बातचीत और समझौतों के जरिए ही हल करना होगा। डोकलाम संकट के बाद हमने अपनी ओर से समाधान की इच्छा जताई थी।”

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अहलावत ने कहा कि चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन ने 2000 के दशक में एक स्पष्ट सैन्य रणनीति अपनाई और 2035 तक अमेरिका जैसी ताकत बनने का लक्ष्य तय किया। “चीन ने 2035 तक अमेरिका जितना मजबूत बनने का लक्ष्य रखा और फिर उन्होंने अपनी सेना का पुनर्गठन शुरू किया। वे तीन अतिरिक्त क्षेत्रों – अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में भी काम कर रहे हैं। वहीं, हम अभी भी पारंपरिक जल-थल-नभ यानी सेना, नौसेना और वायुसेना के ढांचे में ही फंसे हुए हैं।”

उन्होंने बताया कि चीन की रॉकेट फोर्स इतनी मजबूत है कि यह दुश्मन के एयरफील्ड को निष्क्रिय कर सकती है। “चीन की रॉकेट फोर्स सबसे पहले एयरफील्ड्स को निशाना बनाएगी। वे अंतरिक्ष में कुछ ऐसे ऑर्बिटल पोजिशन पर काम कर रहे हैं, जो पहाड़ों में ऊंचाई पर कब्जा करने के बराबर है।”

लड़ाकू विमान और ‘तेजस’ की डिलीवरी में देरी

भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ‘तेजस’ प्रोजेक्ट, जिसे पुराने मिग-21 विमानों को बदलने के लिए डिजाइन किया गया था, अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई में देरी से जूझ रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल ही में तेजस के उत्पादन में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि 2009-2010 में 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन अभी तक ये डिलीवर नहीं किए गए हैं।

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अहलावत ने इस देरी के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों कारणों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “1984 में तेजस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। 2001 में इसका पहला ट्रायल हुआ, और इसे वायुसेना में शामिल करने में 15 साल और लग गए। इसके बाद 2016 तक भी वायुसेना को एक भी स्क्वाड्रन नहीं मिला। देरी की बड़ी वजह 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध थे। वहीं, अब यह देरी GE इंजनों से जुड़ी समस्याओं के कारण हो रही है।”

आयात किया जाए या स्वदेश में बनाया जाए

अहलावत ने सुझाव दिया कि वायुसेना की ताकत बनाए रखने के लिए आयात को लेकर कुछ लोग सवाल खड़े कर सकते हैं, लेकिन यह उपयुक्त समाधान है। उन्होंने कहा, “सरकार जब सेना को युद्ध के लिए भेजती है, तो उम्मीद करती है कि वह युद्ध जीते। अगर घरेलू उद्योग समय पर विमानों की आपूर्ति नहीं कर सकते, तो हमें उन इक्विपमेंट्स की जरूरत है, जो युद्ध के दौरान इस्तेमाल हो सकें। हमें आज एक तैनात करने योग्य वायुसेना चाहिए।”

उन्होंने उदाहरण दिया कि करगिल युद्ध में बोफोर्स गन और मिराज 2000 जैसे आयातित हथियारों ने भारत को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि भारत को वर्तमान में राफेल विमानों की संख्या बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। “राफेल हमारे पास पहले से मौजूद हैं। हमारे पास इनकी मैंटेनेंस की सुविधा, प्रशिक्षित क्रू और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार है। ऐसे में राफेल संख्या बढ़ाना एक तात्कालीक समाधान हो सकता है।”

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बनाने की जरूरत

अहलावत ने जोर दिया कि भारत को अपनी रक्षा रणनीति को व्यापक रूप से पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। “हमें एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता है, जो सभी सशस्त्र बलों को राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्य की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करे। यह रणनीति यह तय करेगी कि चीन हमारे लिए क्या है – एक दोस्त, एक प्रतिस्पर्धी, या एक सैन्य दुश्मन।”

उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए विमान और तकनीक के विकास पर भी निवेश करना चाहिए। हालांकि, मौजूदा हालात में भारत को आयात पर निर्भर रहना होगा ताकि वायुसेना की ताकत बनी रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में न पड़े।

Explainer: क्या है भारतीय सेना का ‘संभव’ स्मार्टफोन? LAC पर चीन से बातचीत के दौरान जवान करते हैं इस डिवाइस का इस्तेमाल

Explainer Sambhav smartphones used by Indian Army

Explainer Sambhav smartphones: भारतीय सेना ने अपने अधिकारियों को सिक्योर कम्यूनिकेशन के लिए करीब 30,000 ‘संभव’ स्मार्टफोन (‘Sambhav’ smartphones) उपलब्ध कराए हैं। इन स्मार्टफोन्स का उपयोग विशेष ऐप्स के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन फोन्स का इस्तेमाल अक्टूबर 2024 में चीन के साथ हुई बातचीत के दौरान भी किया गया। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन फोन्स के इस्तेमाल का खुलासा किया था।

Explainer Sambhav smartphones used by Indian Army

‘संभव’, का मतलब है Secure Army Mobile Bharat Version। यह एक पूरी तरह से स्वदेशी ‘एंड-टू-एंड सिक्योर मोबाइल इकोसिस्टम’ है। यह स्मार्टफोन 5G तकनीक पर आधारित है और पूरी तरह एन्क्रिप्टेड है, जिससे किसी भी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रूप से साझा किया जा सकता है। यह प्रोजेक्ट 2023 में शुरू किया गया था और अब इसे सेना के ऑपरेशंस का अहम हिस्सा बना दिया गया है।

कैसे काम करता है ‘Sambhav’ smartphone?

भारतीय सेना के ‘संभव’ स्मार्टफोन्स का डिजाइन इस तरह से किया गया है कि यह आधुनिक तकनीक के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। इन फोन्स में M-Sigma जैसे विशेष ऐप्स प्रीलोडेड होते हैं, जो WhatsApp जैसे पॉपुलर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का सुरक्षित विकल्प हैं। M-Sigma का उपयोग संदेश, दस्तावेज़, फोटो और वीडियो को सुरक्षित तरीके से साझा करने के लिए किया जाता है।

इन फोन्स की खासियत यह है कि सभी जरूरी कॉन्टैक्ट नंबर पहले से ही इनमें सेव होते हैं। इससे अधिकारियों को नंबर मैन्युअली सेव करने की जरूरत नहीं पड़ती। इन फोन्स को भारतीय सेना ने प्रमुख शैक्षिक संस्थानों और इंडस्ट्री विशेषज्ञों के सहयोग से डेवलप किया है।

सिक्योरिटी और कनेक्टिविटी पर खास जोर

संभव स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल के बाद न केवल भारतीय सेना का कम्यूनिकेशन नेटवर्क तेज हुआ है, बल्कि पहले से ज्यादा सुरक्षित भी हुआ है। सैन्यू सूत्रों का कहना है कि इसके बाद जानकारी लीक होने की घटनाओं पर भी लगाम लगाई है। पहले सेना के कई अधिकारी WhatsApp जैसे एप्स का उपयोग करते थे, जिससे जानकारी के लीक होने की घटनाएं सामने आईं। लेकिन अब, इन नए स्मार्टफोन्स के जरिए ऐसी समस्याओं को पूरी तरह रोका जा सकता है।

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सेना ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ये स्मार्टफोन्स देश के प्रमुख मोबाइल नेटवर्क, जैसे जिओ और एयरटेल, के साथ पूरी तरह से काम करें। यह डिवाइस ऐसे क्षेत्रों में भी काम करने में सक्षम हैं, जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी चुनौतीपूर्ण होती है।

LAC पर चीन से बातचीत में ‘संभव’ की अहम भूमिका

पिछले साल अक्टूबर में चीन के साथ हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के दौरान भारतीय सेना ने ‘संभव’ स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया। सेना प्रमुख ने कहा कि इस तकनीक ने सिक्योर कम्यूनिकेशन सुनिश्चित किया और संवेदनशील जानकारी को लीक होने से बचाया। यह कदम खासकर उस समय महत्वपूर्ण हो जाता है, जब सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती के दौरान आधुनिक तकनीक और सुरक्षा दोनों की जरूरत होती है।

संभव स्मार्टफोन की खूबियां

  • संभव स्मार्टफोन 5G टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिससे तेज़ और भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलती है।
  • यह फुल एन्क्रिप्शन डिवाइस है, जो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड है, जिससे जानकारी सुरक्षित रहती है।
  • मोबाइल नेटवर्क्स में ईव्सड्रॉपिंग (जानकारी चोरी) का खतरा रहता है। लेकिन ‘संभव’ की एन्क्रिप्टेड तकनीक इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाती है।
  • यह स्मार्ट नेटवर्क एग्नॉस्टिक है, यानी कि यह डिवाइस किसी भी नेटवर्क पर आसानी से काम कर सकती है।
  • वहीं इस फोन में इंस्टेंट कनेक्टिविटी का फीचर है, जिससे यह चलते-फिरते भी सुरक्षित और सुपर फास्ट कम्यूनिकेशन मिलता है।

भारतीय सेना को मिले संभव स्मार्टफोन ने न केवल संचार को पूरी तरह सुरक्षित बनाया है, वहीं दूसरी ओर यह मॉर्डन वायरफेयर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। एक अधिकारी ने कहा, “मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानकारी चोरी होने का खतरा हमेशा बना रहता है। संभव स्मार्टफोन के जरिए इस चुनौती को प्रभावी तरीके से हल किया गया है।”

Indian Army Job Alert: इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए सेना में निकली बंपर वैकेंसी, सैलरी मिलेगी 2,50,000 रुपये तक, जानें क्या है योग्यता

Indian Army Job Alert: Engineering Graduates Can Earn Up to Rs 2.5 Lakh, Apply Now!

Indian Army Job Alert: भारतीय सेना ने अविवाहित पुरुष और महिला इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स (Unmarried Engineering Graduates) के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के तहत शॉर्ट सर्विस कमीशन (Short Service Commission) के 381 पदों पर आवेदन मांगे गए हैं। इच्छुक उम्मीदवार 5 फरवरी 2025 तक आवेदन कर सकते हैं।

Indian Army Job Alert: Engineering Graduates Can Earn Up to Rs 2.5 Lakh, Apply Now!
File Photo

Indian Army Job Alert: आयु सीमा 20 से 27 वर्ष

एसएससी इंजीनियरिंग के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा 20 से 27 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही, जो उम्मीदवार इंजीनियरिंग डिग्री पूरी कर चुके हैं या अंतिम वर्ष में हैं, वे आवेदन करने के पात्र हैं। आवेदन करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे भारत के नागरिक हों। इसके अलावा, वीर नारियां भी भर्ती के लिए आवेदन कर सकती हैं।

Indian Army Job Alert: इंजीनियरिंग के इन क्षेत्रों में वैकेंसी

भारतीय सेना ने इस भर्ती में पुरुष और महिला दोनों के लिए अलग-अलग पद तय किए हैं। इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, और अन्य क्षेत्रों में कुल 381 पद उपलब्ध हैं। पुरुषों के लिए 350 पदों की व्यवस्था की गई है, जिनमें सिविल इंजीनियरिंग में 75, कंप्यूटर साइंस में 60, इलेक्ट्रिकल में 33, इलेक्ट्रॉनिक्स में 64, और मैकेनिकल में 101 पद शामिल हैं। वहीं, महिलाओं के लिए कुल 29 पद हैं, जिनमें सिविल के 7, कंप्यूटर साइंस के 4, इलेक्ट्रिकल के 3, और मैकेनिकल के 9 पद शामिल हैं।

वीर नारियों के लिए भी इस भर्ती में दो विशेष पद हैं। तकनीकी क्षेत्र में एक और गैर-तकनीकी क्षेत्र में एक पद शामिल है। वीर नारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष तय की गई है।

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इस भर्ती प्रक्रिया में चयन का आधार उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और मेरिट पर होगा। चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण केंद्रों में भेजा जाएगा, जहां उन्हें जरूरी आर्मी ट्रेनिंग दी जाएगी। फाइनल चयन से पहले उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण भी किया जाएगा।

‘ऑफिसर एंट्री अप्लिकेशन/लॉगिन’ पर क्लिक करें

भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाना होगा। यहां उन्हें ‘ऑफिसर एंट्री अप्लिकेशन/लॉगिन’ पर क्लिक करना होगा और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद, उम्मीदवार ‘अप्लाई ऑनलाइन’ के माध्यम से आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म भरते समय हर सेक्शन को सेव करते हुए आगे बढ़ना होगा। सभी जानकारियों की पुष्टि के बाद, उम्मीदवार फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।

Indian Army Job Alert: 56,100 से 2,50,000 रुपये तक का वेतन

इस भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 56,100 से 2,50,000 रुपये तक का वेतन मिलेगा। लेफ्टिनेंट रैंक पर नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को 56,100 से 1,77,500 रुपये तक का मासिक वेतन मिलेगा। वहीं, सेना प्रमुख (COAS) के पद पर वेतन 2,50,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, विभिन्न रैंकों पर अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

सेना के सैलरी स्ट्रक्चर में हर रैंक के अधिकारियों के लिए अलग-अलग ग्रेड और स्तर निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, कैप्टन का वेतन 61,300 से 1,93,900 रुपये तक है, जबकि मेजर का वेतन 69,400 से 2,07,200 रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा, लेफ्टिनेंट कर्नल और कर्नल रैंक के अधिकारियों को क्रमशः 1,21,200 से 2,12,400 रुपये और 1,30,600 से 2,15,900 रुपये तक का वेतन मिलता है। ब्रिगेडियर और मेजर जनरल जैसे वरिष्ठ पदों पर वेतन 1,39,600 से 2,18,200 रुपये तक हो सकता है। सेना प्रमुख जैसे उच्चतम रैंक पर वेतन 2,50,000 रुपये तक होता है, जो फिक्स्ड होता है।

भारतीय सेना का यह कदम न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अपने देश की सेवा का अनूठा अवसर भी देता है। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है, जो देशभक्ति और अपने करियर को एक साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारतीय सेना में शामिल होने का यह मौका न केवल वित्तीय सुरक्षा बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी देता है।

सेना में शामिल होकर उम्मीदवारों को सिर्फ वेतन ही नहीं मिलता, बल्कि आवास, परिवहन, चिकित्सा, और अन्य भत्ते जैसी कई सुविधाएं भी मिलती हैं। सेना में करियर न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल है, बल्कि यह अपने परिवार और देश के लिए गर्व का विषय भी बनता है।

Pakistan Army: कंगाल पाकिस्तान की सेना के जवानों और अफसरों की कितनी है सैलरी? जान कर चौंक जाएंगे

Pakistan Army: Shocking Salaries of Soldiers and Officers in Cash-Strapped Pakistan

Pakistan Army: 12 लाख से ज्यादा जवानों वाली भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में शुमार है। वहीं भारतीय सेना के मुकाबले पाकिस्तान की सेना आधी है। पाकिस्तान की सेना में लगभग 6,54,000 सक्रिय सैनिक हैं। लेकिन यह सवाल अक्सर उठता है कि कंगाली के हाल में जी रहा पाकिस्तान अपने जवानों को कितनी सेलरी देता है। पाकिस्तानी सेना के  जनरलों-अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने की खबरें अक्सर आती हैं। खुद पाकिस्तानी भी सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के हुक्मरानों को भ्रष्टाचार के लिए कोसते रहते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान को भुखमरी के कगार पर ला कर खड़ दिया। आइए जानते हैं कि पाकिस्तानी सेना में काम करने वाले सैनिकों और अधिकारियों को कितनी सैलरी मिलती है?

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Pakistan Army का सेलरी स्ट्रक्चर

पाकिस्तानी सेना के सेलरी स्ट्रक्चर की बात करें, तो वहां की सरकार के अन्य विभागों की तरह बेसिक पे स्केल (BPS) सिस्टम के तहत तय किया जाता है। सेना के हर रैंक के लिए अलग-अलग बीपीएस ग्रेड निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर वेतन तय होता है। इसके अलावा, सेना के अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं, जो उनकी आय में इजाफा करती हैं।

जेसीओ की सैलरी

पाकिस्तानी सेना में शुरुआती स्तर के अधिकारियों, जैसे जूनियर कमीशन ऑफिसर्स (JCOs), की मासिक सैलरी उनके अनुभव और जिम्मेदारियों के आधार पर तय होती है। जेसीओ की सैलरी बीपीएस 7 श्रेणी में आती है, और वे 20,000 से 40,000 पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपयों में 6,000 से 12,000 रुपये) तक प्रति माह कमाते हैं।

इसके अलावा, नॉन-कमीशन ऑफिसर्स (NCOs) जैसे लांस नायक और नायक रैंक वाले अधिकारियों की सैलरी बीपीएस 5 और बीपीएस 6 श्रेणियों में आती है। इनकी मासिक सैलरी 18,000 से 30,000 पाकिस्तानी रुपये (भारतीय रुपये में 450 से 7500 रुपये) के बीच होती है।

मेजर-कैप्टन की सेलरी

मध्य स्तर के अधिकारियों, जैसे कि सेना के कैप्टन और मेजर रैंक के अधिकारी, की सैलरी बीपीएस 17 और बीपीएस 18 श्रेणियों में आती है। एक कैप्टन का मासिक वेतन 50,000 से 90,000 पाकिस्तानी रुपये (14000 से 25200 भारतीय रुपये) के बीच होता है, जबकि मेजर रैंक के अधिकारी की सैलरी 60,000 से 100,000 पाकिस्तानी रुपये (17400 से 29000 भारतीय रुपये) तक होती है।

इसके अलावा मध्य स्तर के अधिकारियों को बेसिक सैलरी के अलावा आवास, परिवहन, और उपयोगिताओं जैसे अतिरिक्त भत्ते भी दिए जाते हैं।

कर्नल और ब्रिगेडियर की सैलरी

जैसे-जैसे रैंक बढ़ता है, सैलरी भी बढ़ती है। पाकिस्तानी सेना के कर्नल और ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों की सैलरी बीपीएस 19 और बीपीएस 20 श्रेणियों में आती है। कर्नल रैंक के अधिकारी 80,000 से 150,000 पाकिस्तानी रुपये (20,000 से 37,500 भारतीय रुपये) प्रति माह कमाते हैं। ब्रिगेडियर का मासिक वेतन इसी रेंज में होता है, लेकिन इसमें अन्य भत्ते और लाभ भी शामिल होते हैं।

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इन वरिष्ठ अधिकारियों को सैलरी के अलावा फर्निश्ड आवास, परिवहन की सुविधा, और उनके परिवारों के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। उनके बच्चे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई करते हैं और अधिकारियों को विशेष सामाजिक क्लबों में प्रवेश का भी अधिकार मिलता है।

कितनी होती है जनरलों की सैलरी 

पाकिस्तानी सेना के जनरल्स, जो सेना के सबसे ऊंचे पदों पर होते हैं, अन्य रैंकों की तुलना में सबसे अधिक सैलरी और सुविधाएं प्राप्त करते हैं। जनरल रैंक के अधिकारी बीपीएस 21 और उससे ऊपर की श्रेणियों में आते हैं। इनकी मासिक सैलरी 200,000 पाकिस्तानी रुपये (57,999 भारतीय रुपये) से शुरू होती है और अनुभव और सेवा के वर्षों के आधार पर बढ़ती जाती है।

जनरल्स को आलीशान आवास, उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, और विशेष आर्मी क्लबों में प्रवेश जैसी अनन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। इसके अलावा, उन्हें सेना के भीतर कई अन्य विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जो निचले रैंकों के अधिकारियों को नहीं मिलते।

विशेषज्ञों और अन्य कर्मियों की सैलरी

पाकिस्तानी सेना में केवल लड़ाकू सैनिक ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ, जैसे कि चिकित्सा अधिकारी और इंजीनियर भी शामिल होते हैं। इनकी सैलरी आमतौर पर बीपीएस 18 से 19 श्रेणियों में होती है। ये अधिकारी 60,000 से 120,000 पाकिस्तानी रुपये (17,400 से 34,800 भारतीय रुपये) प्रति माह कमाते हैं। इनके अलावा, आईटी विशेषज्ञ, तकनीकी स्टाफ, और अन्य सहायक कर्मी को भी उनकी विशेषज्ञता के आधार पर तनख्वाह मिलती है।

सैलरी के अलावा, पाकिस्तानी सेना के जवानों और अधिकारियों को कई भत्ते और सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें बच्चों की शिक्षा भत्ता, आवासीय भत्ता, स्वास्थ्य भत्ता, और यात्रा भत्ता शामिल हैं। उच्च रैंक के अधिकारियों को वाहन और ड्राइवर जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

पाकिस्तानी सेना के सैलरी स्ट्रक्चर से यह स्पष्ट है कि हर रैंक के अनुसार वेतन और सुविधाओं में अंतर होता है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल ऊंची सैलरी मिलती है, बल्कि उनके पास कई विशेष सुविधाएं भी होती हैं। दूसरी ओर, निचले स्तर के अधिकारियों और सैनिकों को सीमित वेतन के साथ कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।

Disability Pension: Over 3000 appeals by MoD pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

NFU for Armed Forces

Disability Pension: Strange it may sound but over 3000 appeals by Ministry of Defence alone is pending in Supreme Court of India and High Courts across the country against the death and disability benefits to armed forces personnels.

Disability Pension: Over 3000 appeals by Ministry of Defence pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

SUCH CASES IMPACT MORALE OF ARMED FORCES

A bench of Justices A S Oka and Ujjal Bhuyan while criticising the Union government for dragging armed forces personnel and their families to the top court over disputes related to pensions highlighted the adverse impact of such litigation on morale within the armed forces.

CENTRE SHOULD COME OUT WITH POLICY

Asking the Centre to come out with a policy to avoid such litigation stressed that personnel who have served the nation should not be subjected to unnecessary legal battles and said, “As it is, there are only a few people willing to serve in the armed forces.”

“Why should the Union drag such people to this court? They have served the Union after all. Day in and day out, these matters are brought here,” the bench observed.

WHY APPROACH SUPREME COURT WHEN AFT IS THERE

The top court was hearing an appeal by Centre against the Armed Forces Tribunal (AFT) order which had granted disability pension to a retired Indian Air Force officer diagnosed with hypertension and diabetes.

“What was the purpose of setting up the AFT if all matters were to be brought here? These are your own people. They have served the Union after all,” the bench said while dismissing the appeal by Centre

WHAT WAS THE CASE

The officer, who served for over three decades, was diagnosed with Type 2 Diabetes Mellitus and Primary Hypertension after 30 years of service. While the Release Medical Board (RMB) initially denied attributing these conditions to his service, AFT found that the rigorous Air Force training and associated stress and strain likely contributed to their development.

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AFT granted the officer the benefit of rounding off his disability pension percentage to 50%, citing a prior Supreme Court judgment that extended this benefit to retired personnel.

TOP COURT SLAPPED FINE ON CENTRE FOR UNNECESSARY LITIGATION

Last month, top court had also slapped penalty of Rs 50,000 on the Union government and the Indian Army for forcing a soldier’s widow into unnecessary litigation. She had to fight for years to secure a family pension after her husband, Naik Inderjeet Singh, died during a counter terrorism patrol in Jammu and Kashmir.

NEED FOR MORE BENCHES OF AFT

Earlier this month, the top court had mooted to have more regional benches of AFT and had said, “Can we have the regional bench in Chandigarh, and then like we have done in Family Courts, they can hold circuit bench in Jammu, Srinagar, that will give opportunity to local Bar to assist them. It will also lead to cost-effectivity, access to justice for Himachal matters, they can go to Shimla and Dharamshala basic infrastructure is available. High Courts can also provide some that kind of system can help expedite hearings and reduce cost of litigation also. A retired army official coming all the way to Chandigarh, that also can be avoided.”