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Indian Navy की बड़ी उपलब्धि: स्वदेशी एयर ड्रॉप कंटेनर का सफल परीक्षण, मिग-29 फाइटर जेट अब होगा सुपरसोनिक रैंपेज मिसाइल से लैस

Indian Navy Tests Air-Drop Container, MiG-29 Gets Supersonic Rampage Missiles

Indian Navy: भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में तैनात भारतीय नौसेना ने हाल ही में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। गोवा के तट पर एयर ड्रॉपेबल कंटेनर का सफल परीक्षण और सुपरसोनिक रैंपेज मिसाइल को मिग-29 लड़ाकू विमानों में शामिल करना, नौसेना की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है।

Indian Navy Tests Air-Drop Container, MiG-29 Gets Supersonic Rampage Missiles

Indian Navy: एयर ड्रॉपेबल कंटेनर का सफल परीक्षण

24 जनवरी को गोवा के तट पर एयर ड्रॉपेबल कंटेनर (एडीसी-150) का सफल परीक्षण किया गया। इस तकनीक की मदद से युद्धपोतों को तटीय इलाकों पर लौटे बिना ही जरूरी रसद, उपकरण और दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकेंगी। भारतीय नौसेना के पी8आई टोही विमान के जरिए इस कंटेनर को समुद्री मोर्चे पर गिराया गया।

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यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है और इसे युद्ध और शांति दोनों समय में उपयोग किया जा सकता है। डीआरडीओ की तीन प्रयोगशालाओं—विशाखापट्टनम की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लैबोरेटरी, आगरा की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट और बेंगलुरु की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट—ने इसे विकसित किया है।

डीआरडीओ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। डीआरडीओ ने बताया कि यह ‘एयर ड्रॉपेबल कंटेनर’ समुद्र में शांति और युद्धकालीन दोनों परिस्थितियों में तैनात नौसेना के जहाजों तक रसद और जरूरी उपकरण पहुंचाने में सक्षम है। इस परीक्षण के दौरान कंटेनर को समुद्र में निर्धारित स्थान पर गिराया गया।

डीआरडीओ द्वारा विकसित यह कंटेनर पूरी तरह से स्वदेशी है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना को तटीय इलाकों पर वापस आए बिना लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने में मदद करना है। यह क्षमता भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत बनाएगी।

समुद्री ऑपरेशंस में होगा फायदा

भारतीय नौसेना का क्षेत्रीय ऑपरेशन इंडियन ओशन, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक फैला है। ऐसे में तट से 2000 किमी या उससे अधिक दूरी पर तैनात जहाजों को तत्काल रसद पहुंचाना एक चुनौती भरा कार्य होता है। एयर ड्रॉपेबल कंटेनर के विकसित होने से युद्धपोत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकेंगे और उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

मिग-29 लड़ाकू विमानों के लिए रैंपेज मिसाइल

वहीं, भारतीय नौसेना ने अपनी हवाई क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए सुपरसोनिक रैंपेज मिसाइल को मिग-29 लड़ाकू विमानों में शामिल किया है। यह मिसाइल दुश्मन के रडार, एयरस्ट्रिप और अन्य सामरिक ठिकानों पर सटीक निशाना साध सकती है।

रैंपेज मिसाइल को इजराइल ने डेवलप किया है। यह मिसाइल 2019 के बालाकोट हवाई हमले में इस्तेमाल की गई स्पाइस 2000 से अधिक दूरी तक मार कर सकती है। इसे हाल ही में आईएनएस विक्रांत पर भी ट्रायल के दौरान इस्तेमाल किया गया।

नौसेना की बढ़ती ताकत

भारत की समुद्री सीमाओं पर बढ़ते खतरे और चीन के साथ सीमा विवाद के बीच, भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत कर रही है। लंबी दूरी तक निगरानी के लिए पी8आई विमान और नई तकनीकों को शामिल करने से नौसेना की तैयारियों में बड़ा बदलाव आया है।

रैंपेज मिसाइल और एयर ड्रॉपेबल कंटेनर जैसी तकनीकों का उपयोग यह साबित करता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यह न केवल देश की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है बल्कि मित्र देशों के साथ साझेदारी और सहयोग को भी बढ़ावा देता है।

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Robotic Mules: पुणे में सेना दिवस परेड के दौरान जब भारतीय सेना ने अपने नए रोबोटिक म्यूल्स यानी खच्चरों को पहली बार आम जनता के सामने पेश किया, तो नजारा देखने लायक था। दशकों तक भारतीय सेना के पहाड़ी इलाकों और दुर्गम रास्तों पर रसद पहुंचाने वाले खच्चरों ने अपना फर्ज निभाया। लेकिन अब भारतीय सेना ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए अपनी ऐतिहासिक ‘म्यूल कॉर्प्स’ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोटिक खच्चरों से बदलने का फैसला किया है।

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Robotic Mules: खच्चरों ने हर चुनौती में दिया साथ

भारतीय सेना के लिए खच्चरों का योगदान असाधारण रहा है। बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर घने जंगलों तक, खच्चरों ने अपनी पीठ पर राशन, गोला-बारूद, और दवाइयों का भार उठाया। चाहे वह कारगिल का युद्ध हो या सियाचिन की ठंडी बर्फीली हवाएं, खच्चरों ने हर चुनौती में सैनिकों का साथ दिया।

करीब दो शताब्दियों तक खच्चर भारतीय सेना के अहम सहयोगी रहे हैं। उन्होंने हिमालय की ऊंचाईयों से लेकर बर्मा के घने जंगलों और कठिन युद्धक्षेत्रों तक, रसद और हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी लगभग 4,000 खच्चरों की ताकत वाली म्यूल कॉर्प्स सेना की लॉजिस्टिक जरूरतों का अहम हिस्सा है।

सेना के एक पूर्व अधिकारी, कर्नल विक्रम सिंह, ने याद करते हुए कहा, “जब रास्ते बर्फ से ढके होते थे, तब खच्चरों की मदद के बिना सामान पहुंचाना असंभव था। ये जानवर हमारे साथी थे, जो कभी थकते नहीं थे। उनकी मेहनत और निष्ठा ने हमें कई बार युद्ध में जीत दिलाई।”

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वहीं, अब सेना ने खच्चरों की जगह ‘मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट’ (MULE) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोट को अपनाया है। 51 किलो वजनी ये रोबोट एडवाांस नेविगेशन सिस्टम से लैस हैं, जो दुर्गम इलाकों में भी आसानी से काम कर सकते हैं। इन्हें राशन, दवाइयां, गोला-बारूद, और अन्य सामग्रियों को सैनिकों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

ये रोबोटिक म्यूल आम खच्चरों की तुलना में अधिक एफिशिएंसी एंड स्टेबिलिटी प्रदान करते हैं। इनकी ऑटोनोमी एंड एक्यूरेसी दुर्गम इलाकों में रसद आपूर्ति को सुरक्षित और प्रभावी बनाती है। जहां पारंपरिक खच्चर की रफ्तार औऱ क्षमता सीमित होती है, वहीं ये रोबोटिक इक्विपमेंट्स अधिक भार उठाने और तेजी से काम करने में सक्षम हैं।

जब खच्चर बन जाते थे दोस्त

लेकिन सेना के इस बदलाव कई पूर्व सैन्य अधिकारी भी भावुक हैं। सियाचिन में तैनात रहे हवलदार मोहन सिंह ने कहा, “खच्चर केवल सामान ढोने वाले जानवर नहीं थे। वे हमारी टीम का हिस्सा थे। जब रास्ता मुश्किल होता था और मौसम खराब होता था, तो वे हमारी आखिरी उम्मीद बनते थे।”

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उनका कहना था कि खच्चरों के साथ बिताए गए पल कभी भुलाए नहीं जा सकते। जब एक सैनिक खच्चर के साथ ऊंचाई पर चढ़ता था, तो दोनों के बीच एक अनकहा दोस्ताना संबंध बन जाता था।

रोबोटिक खच्चरों की एंट्री ने सेना में एक नई शुरुआत की है, लेकिन यह बदलाव परंपराओं के अंत का भी संकेत है। खच्चरों से जुड़ी कहानियां और उनकी वीरता अब इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। उनके साहस और निष्ठा की कहानियां पीढ़ियों तक सैनिकों की प्रेरणा रही हैं।

क्या भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे रोबोट?

हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या रोबोट वही भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे जो खच्चर देते थे? सैनिकों के लिए खच्चर केवल काम करने वाले साथी नहीं थे, बल्कि वे कठिन समय में उनके मानसिक सहारे के तौर पर भी काम करते थे।

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जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, युद्ध के मैदान में जानवरों की भूमिका कम होती जा रही है। रोबोटिक खच्चरों का इस्तेमाल न केवल रसद पहुंचाने में किया जाएगा, बल्कि भविष्य में यह निगरानी और अन्य सामरिक उद्देश्यों में भी सहायक हो सकते हैं।

INS Tushil: नामीबिया के वाल्विस बे में पहुंचा INS तुशील, भारतीय नौसेना ने लिखा समुद्री दोस्ती का नया अध्याय

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS Tushil: भारतीय नौसेना के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS तुशील ने हाल ही में नामीबिया के वाल्विस बे का दौरे पर पहुंचा था। भारतीय नौसेना के लिए यह दौरा इसलिए भी एतिहासिक रहा, क्योंकि तुशील ने पहली बार अफ्रीका के पश्चिमी तट पर पेट्रोलिंग करते हुए खाड़ी ऑफ गिनी को सफलतापूर्वक पार किया। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और नामीबिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी समझ को बढ़ाना था।

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS तुशील (INS Tushil) की इस यात्रा के दौरान भारतीय और नामीबियाई नौसेना के बीच कई आधिकारिक, पेशेवर और खेल संबंधी गतिविधियां आयोजित की गईं। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन पीटर वर्गीस ने वाल्विस बे की उप-मेयर सारा न्डापेवोशाली म्यूटोंडोका और नामीबियाई नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल एरेटस लाजरुस से मुलाकात की। इ

इस यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल प्लानिंग, क्रॉस-विज़िट्स, और विशेषज्ञों के बीच विचारों के आदान-प्रदान जैसे कई प्रोफेशनल कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके साथ ही, INS तुशील के क्रू और नामीबियाई नौसेना के सदस्यों के बीच एक फ्रेंडली वॉलीबॉल मैच और एक जॉइंट योगा सेशन भी आयोजित किया गया।

INS Tushil Visits Namibia's Walvis Bay, Strengthens Maritime Ties

INS Tushil ने अपने आउटरीच कार्यक्रम के तहत वाल्विस बे के निवासियों के लिए अपने दरवाजे खोले। स्थानीय समुदाय को भारतीय नौसेना के इस आधुनिक युद्धपोत की क्षमताओं को देखने और समझने का अनूठा मौका मिला। इस पहल ने भारतीय नौसेना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहित करने में मदद की।

INS तुशील की यह यात्रा के जरिए भारतीय नौसेना ने यह संदेश दिया कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अफ्रीका के पश्चिमी तट पर गश्त और नामीबियाई नौसेना के साथ साझा अभ्यास ने दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाई दी।

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INS तुशील की इस यात्रा ने भारत और नामीबिया के संबंधों को मजबूत किया है और भविष्य में दोनों देशों के बीच और भी गहरे समुद्री सहयोग की नींव रखी है। इस ऐतिहासिक यात्रा के जरिए भारत ने यह साबित किया है कि वह अपने मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्थिरता में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Pralay Ballistic Missile: विदेशी की बजाय स्वदेशी लॉन्चर पर नजर आई प्रलय मिसाइल, 2026 तक BEML-TATRA व्हीकल्स की होगी छुट्टी

Pralay Ballistic Missile Indigenous Launcher Replaces Foreign Tatra Vehicles by 2026

Pralay Ballistic Missile: गणतंत्र दिवस 2025 की रिहर्सल परेड के अभ्यास के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदमों की झलक पेश की। दशकों से भारतीय सेना चेक गणराज्य में बने टैट्रा ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर्स (Tatra Transporter Erector Launchers) पर निर्भर रही है, लेकिन अब इनकी जगह स्वदेशी विकल्प ले रहे हैं। रिहर्सल परेड के दौरान अशोक लीलैंड के 12×12 हेवी-ड्यूटी व्हीकल पर “प्रलय” टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल को ले जाते देखा गया।

Pralay Ballistic Missile Indigenous Launcher Replaces Foreign Tatra Vehicles by 2026

टैट्रा ट्रकों की भारतीय सेना में अहम भूमिका रही है। ये वाहन अपनी मजबूती और दुर्गम इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। हिमालय जैसे कठिन पहाड़ी इलाकों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक, टैट्रा ट्रकों ने हमेशा अपनी उपयोगिता साबित की है। इनका इस्तेमाल पिनाका, ब्रह्मोस और पृथ्वी जैसी मिसाइलों को ले जाने और तैनात करने के लिए भी किया जाता है। लेकिन “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत, भारत अब विदेशी उपकरणों पर निर्भरता को कम करने और स्वदेशी विकल्पों को प्राथमिकता देने की कोशिशों में जुटा है।

Pralay Ballistic Missile: अशोक लीलैंड ले रहा जगह

“आत्मनिर्भर भारत” पहल में अशोक लीलैंड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कंपनी ने भारतीय सेना के लिए 12×12 कॉन्फिगरेशन वाला हेवी-ड्यूटी व्हीकल तैयार किया है, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से एडवांस है बल्कि पूरी तरह से भारत में निर्मित है। इस वाहन की झलक गणतंत्र दिवस परेड के अभ्यास के दौरान देखने को मिली, जहां यह “प्रलय” मिसाइल को ले जाते हुए यह ट्र्क नजर आया। वहीं, प्रलय जैसी मिसाइल को स्वदेशी व्हीकल पर ले जाकर भारत ने यह साबित किया है कि अब वह भारी वाहनों के निर्माण में भी वैश्विक मानकों को पूरा करने में सक्षम है।

टैट्रा से स्वदेशी वाहनों तक का सफर

सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने अपने BEML-TATRA 12×12 हाई-मोबिलिटी स्पेशल मिलिट्री वाहनों (HMSMV) को स्वदेशी रूप से विकसित नए वाहनों से बदलने की योजना बनाई है। यह बदलाव 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

BEML-TATRA 12×12 वाहन सेना की लॉजिस्टिक बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। टैट्रा ट्रकों का उपयोग भारतीय सेना में दशकों से हो रहा है। चाहे वह हिमालय की बर्फीली चोटियां हों या राजस्थान के रेतीले रास्ते, टैट्रा ट्रक हमेशा सेना की प्राथमिकता रहे हैं।  ये विशेष वाहन भारी वजन को चुनौतीपूर्ण इलाकों में ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनकी 42 टन की पेलोड क्षमता और 13 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म उन्हें बड़े और भारी सैन्य उपकरणों को ले जाने के लिए उपयुक्त बनाता है। स्वचालित ट्रांसमिशन और उत्कृष्ट ऑफ-रोड क्षमताओं के कारण ये वाहन कठिन परिस्थितियों में भी कुशलता से काम करते हैं।

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नए स्वदेशी वाहनों को BEML-TATRA 12×12 के प्रदर्शन मानकों के बराबर या उससे बेहतर होना होगा। इनमें 42 टन की पेलोड क्षमता, लंबा प्लेटफॉर्म, ऑफ-रोड गतिशीलता और एडवांस ऑटौमिटक ट्रांसमिशन जैसी खूबियों को शामिल करना होगा।

यह पहल सरकार के “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। स्वदेशी हाई-मोबिलिटी वाहनों को शामिल करके भारतीय सेना न केवल अपनी लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि देश की रक्षा निर्माण क्षमता को भी प्रोत्साहित करेगी।

Pralay Ballistic Missile की विशेषताएं

प्रलय एक टैक्टिकल क्वासी-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 150 से 500 किलोमीटर है। प्रलय मिसाइल 350 से 700 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसे सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर से पावर मिलती है। इसका गाइडेंस सिस्टम इसे 10 मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) प्रदान करता है। इसमें हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन, पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट (PCB), और रनवे डिनायल सबम्यूनिशन (RDPS) जैसे वॉरहेड ऑप्शन हैं।

इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स का हिस्सा है प्रलय

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों ने अपनी सीमाओं पर मिसाइल सिस्टम को उन्नत किया है। पाकिस्तान ने चीनी HQ-9 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम और चीन ने समान सिस्टम तैनात किए हैं। इसके जवाब में, भारत ने प्रलय मिसाइलों की तैनाती को मंजूरी दी है।

भारतीय वायुसेना ने 2022 में 120 प्रलय मिसाइलों का ऑर्डर दिया था, जबकि 2023 में भारतीय सेना ने 250 और मिसाइलें मंगवाईं। इन मिसाइलों का उद्देश्य चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमाओं पर भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। प्रलय को इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF) का हिस्सा बनाया गया है, जिसमें ब्रह्मोस, निर्भय और पिनाका जैसे सिस्टम भी शामिल हैं।

प्रलय में कई देशों की दिलचस्पी

प्रलय मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मांग बढ़ रही है। भारत के रक्षा मंत्रालय ने इस मिसाइल के निर्यात को मंजूरी दी है। खबरों के मुताबिक, आर्मेनिया के साथ इसके निर्यात पर बातचीत चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, निर्यात वेरिएंट की रेंज को 300 किलोमीटर और पेलोड को 500 किलोग्राम तक सीमित किया जाएगा।

Republic Day 2025: इंडोनेशिया राष्ट्रपति के भारत दौरे में ब्रह्मोस डील पर लगेगी अंतिम मुहर, खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर रहेगा फोकस

Republic Day 2025: BrahMos Deal Likely Finalized During Indonesian President's India Visit

Republic Day 2025: इस साल 76वें गणतंत्र दिवस इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबिआंतो मुख्य अतिथि होंगे। यह सम्मान भारत उन देशों को देता है जिनके साथ उसके मजबूत संबंध होते हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों का फोकस खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे विषयों पर रहेगा।

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डिप्लोमेटिक सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया को वर्तमान में 1,60,000 डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेता माना जाता है। नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति सुबिआंतो की बैठक के दौरान भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि भारत इंडोनेशिया को स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर सकता है।

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गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशियाई दल की भागीदारी

यह चौथी बार है जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि बनेंगे। इससे पहले 1950, 2011, और 2018 में भी इंडोनेशियाई राष्ट्राध्यक्ष मुख्य अतिथि रह चुके हैं। इस बार विशेष रूप से, इंडोनेशिया की सैन्य टुकड़ी गणतंत्र दिवस पर कर्तव्यपथ पर मार्च करेगी।

सीईओ फोरम और अन्य समझौते

इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान तीसरे सीईओ फोरम का आयोजन भी होगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं की उम्मीद है। यह फोरम व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

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ब्राह्मोस मिसाइल पर बातचीत की संभावना

कूटनीतिक सूत्रों ने यह भी संकेत दिए हैं कि ब्राह्मोस मिसाइल समझौते पर चर्चा जारी है। इंडोनेशिया की प्राथमिकता इस समझौते में तकनीकी हस्तांतरण पर है। पिछले महीने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भी इस विषय पर बातचीत हुई थी।

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्जाफ्री स्जामसूद्दीन ने एक पोस्ट में लिखा, “एडवांस तकनीकी सहयोग जैसे ब्राह्मोस, इंडोनेशिया को सीखने और बढ़ने के अवसर प्रदान करता है।”

अंडमान और आचे संपर्क योजना

भारत और इंडोनेशिया के बीच अंडमान और आचे के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा होगी। हालांकि, आचे में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इस योजना में कुछ देरी हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीधी हवाई और बंदरगाह कनेक्टिविटी स्थापित करना है।

आचे को 2005 के शांति समझौते के बाद से विशेष स्वायत्तता प्राप्त है। इसके अलावा, दिल्ली और जकार्ता के बीच सीधी उड़ानों पर भी फोकस होगा, हालांकि दिल्ली और मुंबई से बाली के लिए सीधी उड़ानें पहले से ही संचालित हो रही हैं। जकार्ता जैसी व्यावसायिक राजधानी से सीधा संपर्क दोनों देशों के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

इंडोनेशिया और भारत के बीच यह यात्रा केवल सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों को मजबूत करने का नहीं, बल्कि व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने का एक मौका है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों की एक और मजबूत मिसाल पेश करेगा। यह यात्रा भारत-इंडोनेशिया संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है, जहां दोनों देश अपनी क्षमता और संसाधनों का उपयोग करके वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ खड़े हैं।

Water Supply Shortage: चौंकाने वाला खुलासा! पानी की गंभीर कमी से जूझ रही है भारतीय सेना, वाटर सप्लाई की कमी से ऑपरेशनल तैयारियों पर पड़ रहा असर

Water Supply Shortage: CAG Flags Severe Issues in Indian Army Installations

Water Supply Shortage: भारतीय सेना न केवल देश की सरहदों की रक्षा करती है, वहीं जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों को भी अंजाम देती है। चाहे बाढ़ हो या चक्रवात, हर प्राकृतिक आपदा में वह देशवासियों के साथ खड़ी होती है। तो वहीं जिन इलाकों में पानी की कमी होती है, वहां पानी की सप्लाई भी सुनिश्चित करती है। लेकिन यही भारतीय सेना वाटर सप्लाई की गंभीर समस्या से भी जूझ रही है।

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हाल ही में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने एक ऑडिट रिपोर्ट जारी की, जिसमें रक्षा प्रतिष्ठानों में पानी की आपूर्ति को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं। 2018-19 से 2020-21 के बीच की इस रिपोर्ट में गारिसन इंजीनियर्स (GEs) द्वारा प्रबंधित सैन्य प्रतिष्ठानों में पानी की कमी पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समस्या का दुष्प्रभाव न केवल सैनिकों पर पड़ सकता है, बल्कि सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनल क्षमताओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 20 गारिसन इंजीनियरों (GEs) का ऑडिट किया गया, उनमें से 15 ने सैन्य स्टेशनों को स्वीकृत मात्रा से कम पानी उपलब्ध कराया। यह कमी 10.13% से लेकर 62.97% तक थी, जो कि चिंताजनक है। यह कमी न केवल सैनिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्रभावित करती है, बल्कि उनकी ऑपरेशनल तैयारियों और मनोबल पर भी असर डाल सकती है।

पानी की कमी का असर डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट में बुनियादी जरूरतों से लेकर ऑपरेशनल कार्यों तक हर स्तर पर देखा जा सकता है। पानी का अभाव न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि फायर सप्रेशन और सैनिटेशन जैसी आवश्यकताओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाहरी जल आपूर्ति एजेंसियों के साथ किए गए समझौते अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहे। इन समझौतों का मकसद डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट पर पानी की सप्लाई को बढ़ाना था, लेकिन 13 में से 12 गारिसन इंजीनियर यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि अनुबंधित मात्रा में पानी मिले। यह विफलता अनुबंध प्रबंधन, गुणवत्ता आश्वासन और बाहरी जल स्रोतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पानी केवल एक बुनियादी जरूरत नहीं है बल्कि सैन्य क्षेत्रों में एक रणनीतिक संसाधन है। यह न केवल सैनिकों की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए जरूरी है, बल्कि ऑपरेशनल गतिविधियों जैसे आग बुझाने और स्वच्छता के लिए भी अहम है। वहीं, पानी की कमी सैनिकों के स्वास्थ्य और मनोबल को प्रभावित कर सकती है, जिससे उनकी युद्ध क्षमता और राष्ट्रीय रक्षा की तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Water Supply Shortage: पानी के नुकसान का वित्तीय असर

रिपोर्ट में पानी के रिसाव से होने वाले वित्तीय नुकसान पर भी प्रकाश डाला गया है। तीन वर्षों की अवधि में पानी के रिसाव से लगभग 11.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि इस पानी का उपयोग अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए किया जा सकता था।

रिपोर्ट में उजागर प्रमुख खामियां

  • पानी की अधिकृत आपूर्ति और वास्तविक आपूर्ति के बीच बड़े अंतर।
  • बाहरी जल आपूर्ति एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंध अपेक्षित परिणाम देने में असफल रहे।
  • साथ ही, बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण पानी का भारी रिसाव।

सुधार की सिफारिशें

सीएजी ने इस समस्या को दूर करने के लिए कई सिफारिशें दी हैं। जिनमें जल आपूर्ति समझौतों की बेहतर निगरानी, रिसाव रोकने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश, और वर्षा जल संचयन तथा रीसाइक्लिंग जैसी टिकाऊ जल समाधानों की खोज शामिल है। CAG ने सुझाव दिया है कि रक्षा स्थलों में जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जल संकट को हल करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग और दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। साथ ही, जल रिसाव को रोकने के लिए नई पाइपलाइन और कुशल जल वितरण प्रणाली लागू करनी चाहिए।

रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया का इंतजार

सीएजी की इस रिपोर्ट पर रक्षा मंत्रालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि मंत्रालय इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।

Pinaka MBRL: भारतीय सेना का बड़ा फैसला! पिनाका रॉकेट सिस्टम को देगी तरजीह, महंगी आयातित मिसाइलों से बनाएगी दूरी

Indian Army Pinaka 120 km
File Photo

Pinaka MBRL: भारतीय सेना ने अपनी रणनीतिक ताकत को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। सेना ने महंगी सामरिक मिसाइलों (टैक्टिकल मिसाइल्स) की खरीद को फिलहाल रोककर स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम को अपनाने का फैसला किया है। यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेना की फायरपावर को मजबूती देने के लिए उठाया गया है।

Pinaka MBRL: Indian Army Prioritizes Indigenous Rocket System Over Expensive Imported Missiles!

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम (Pinaka MBRL) को दुनिया के सबसे बेहतरीन सिस्टमों में से एक माना जाता है। इसकी खूबियों और प्रभावी क्षमताओं के कारण कई देश इसे अपने डिफेंस सिस्टम में शामिल करने की इच्छा जता रहे हैं।

भारतीय सेना ने एलान किया है कि पिनाका सिस्टम को इस साल के अंत तक तैनात किया जाएगा। इस कदम से सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) की क्षमता में काफी सुधार होगा। पिनाका का एडवांस वर्जन न केवल अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम है, बल्कि इसकी सटीकता और घातकता भी इसे खास बनाती है।

सूत्रों के मुताबिक DRDO को पिनाका सीरीज (Pinaka MBRL) को एक्सपेंड करने और इसके दो नए संस्करण डेवलप करने को कहा गया है। भारतीय सेना ने दो लंबी रेंज के पिनाका MBRL की मंजूरी दी है। इन दोनों संस्करणों को एडवांस गाइडेंस सिस्टम से लैस किया जाएगा। ये संस्करण 120 किलोमीटर और 300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम होंगे। पुणे स्थित डीआरडीओ की लैब, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE), इन रॉकेटों को डिजाइन कर रही है। एक बार जब ये संस्करण तैयार हो जाएंगे, तो म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) इन्हें डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत निर्माण करेगी।

Pinaka MBRL: पिनाका रॉकेट सिस्टम हुआ और भी ताकतवर, पहले आर्मेनिया ने खरीदा, अब फ्रांस भी दिखा रहा रूचि

सूत्रों का कहना है कि 300 किलोमीटर की रेंज वाला संस्करण सेना के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है। इसका बड़ा आकार न केवल भारी पेलोड ले जाने में सक्षम होगा, बल्कि यह मौजूदा लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ भी पूरी तरह अनुकूल रहेगा। यह संस्करण दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने और उनके सैन्य ढांचे को नष्ट करने में मददगार साबित होगा।

Pinaka MBRL: पिनाका सिस्टम की खूबियां

  • गाइडेड पिनाका अब आधुनिक नेविगेशन, नियंत्रण और गाइडेंस तकनीकों से लैस है, जो इसे उच्च सटीकता प्रदान करती है।
  • पहले जहां पिनाका की रेंज 40 किलोमीटर तक सीमित थी, वहीं अब इसके एडवांस संस्करण 120 से 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं।
  • यह सिस्टम एक बार में कई रॉकेट दाग सकता है, जो इसे दुश्मन के ठिकानों को तेजी से नष्ट करने में सक्षम बनाता है।
  • पिनाका को DRDO के मार्गदर्शन में भारतीय रक्षा कंपनियों द्वारा निर्मित किया जा रहा है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक युद्ध में सटीकता और कम नुकसान सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, और पिनाका इस आवश्यकता को पूरा करता है।

पिनाका सिस्टम ने तीन अलग-अलग चरणों में ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पास किया है। इन ट्रायल्स में इसकी रेंज, सटीकता, और फायरिंग दर का गहन निरीक्षण किया गया। इन गाइडेड रॉकेट्स को धीरे-धीरे पुराने, अनगाइडेड वेरिएंट्स की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है।

पिनाका बनाम टेक्टिकल मिसाइलें

पिनाका की तुलना में सामरिक मिसाइलें काफी महंगी होती हैं। भारतीय सेना के अनुसार, पिनाका जैसे सस्ते और प्रभावी विकल्प न केवल लागत को कम करते हैं, बल्कि उनकी फायरिंग गति और व्यापक कवरेज के कारण सामरिक बढ़त भी देते हैं। भारतीय सेना के इस निर्णय से टैक्टिकल मिसाइलों पर निर्भरता कम होगी, जो महंगे और आयातित होते हैं। इसके बदले पिनाका जैसे स्वदेशी समाधान न केवल लागत प्रभावी होंगे, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को भी मजबूत करेंगे।

DRDO ‘Raksha Kavach’: गणतंत्र दिवस 2025 परेड में DRDO का ‘रक्षा कवच’, पहली बार कर्तव्यपथ पर दिखेगा प्रलय वेपन सिस्टम

DRDO 'Raksha Kavach' Tableau to Debut at Republic Day Parade 2025

DRDO ‘Raksha Kavach’: गणतंत्र दिवस 2025 के मौके पर कर्तव्य पथ पर देश की ताकत और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अपनी उन्नत रक्षा तकनीकों और प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा। DRDO ने इस साल अपने झांकी विषय “रक्षा कवच” के जरिए भारत की रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी प्रौद्योगिकी पर जोर दिया है।

DRDO 'Raksha Kavach' Tableau to Debut at Republic Day Parade 2025

DRDO की झांकी में कई एडवांस सिस्टम को शामिल किया गया है। इनमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, 155 मिमी/52 कैलिबर एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम, ड्रोन डिटेक्ट, डिटर और डिस्ट्रॉय तकनीक, सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली, मीडियम पावर रडार “अरुध्र”, और लेजर-आधारित डाइरेक्ट एनर्जी वेपन शामिल हैं।

प्रलय वेपन सिस्टम: स्वदेशी मिसाइल की शक्ति

इसके अलावा, झांकी में पहली बार “प्रलय” वेपन सिस्टम भी दिखाया जाएगा, जो सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक मिसाइल प्रणाली है। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों के साथ विकसित की गई है और भारत की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देती है।

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साथ ही, DRDO की झांकी में 2024 की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी दर्शाया जाएगा। इनमें लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल, हल्के बुलेट प्रूफ जैकेट “अभेद”, “दिव्यास्त्र” – मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल, और “ज़ोरावर” लाइट टैंक शामिल हैं। इन उपलब्धियों ने भारत की रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है।

इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों के मार्चिंग टुकड़ियों में भी DRDO द्वारा विकसित नाग मिसाइल प्रणाली, पिनाका रॉकेट सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम और आकाश वेपन सिस्टम का प्रदर्शन किया जाएगा।

समारोह की अन्य मुख्य झलकियां

  • परेड का शुभारंभ राष्ट्रीय गान और गुब्बारों के साथ होगा, जिन पर भारतीय संविधान के 75वें वर्ष का प्रतीक चिन्ह होगा।
  • आयोजन का समापन 47 विमानों के भव्य फ्लाईपास्ट के साथ होगा।
  • परेड में सेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियां अपने अद्वितीय कौशल और शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।

इस साल गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन “स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” विषय पर केंद्रित होगा। इस परेड में देश के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की 31 झांकियां शामिल होंगी। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ियां और उनके साथ इंडोनेशिया की 160 सदस्यीय मार्चिंग टुकड़ी और 190 सदस्यीय बैंड टुकड़ी भी शामिल होगी।

इस वर्ष की परेड में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि होंगे। यह परेड भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत का संगम होगी। परेड के समापन पर 47 विमानों का भव्य फ्लाईपास्ट होगा, जो गणतंत्र दिवस के उत्सव को और अधिक रोमांचक बनाएगा।

Gurpatwant Pannun: ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन? खालिस्तानी आतंकी पन्नू को शपथग्रहण में बुला कर क्या संदेश चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?

Gurpatwant Pannun at Trump Inauguration: Friend or Foe to India?

Gurpatwant Pannun: अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने भारत के राजनयिक और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी। इस हाई-प्रोफाइल आयोजन में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को देखा गया। समारोह में पन्नू ने “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वही पन्नू है जिसे भारत में आतंकवादी घोषित किया गया है और जिसकी गतिविधियां भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जाती हैं। हाल ही में पन्नू ने महाकुंभ में बम ब्लास्ट की धमकी भी दी थी।

Gurpatwant Pannun at Trump Inauguration: Friend or Foe to India?

Gurpatwant Pannun: ‘लिबर्टी बॉल’ का इनवाइट

खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि उसे ट्रंप के एक गुट से आमंत्रण मिला था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, पन्नू ने किसी संपर्क के माध्यम से टिकट खरीदा और इस समारोह में प्रवेश किया। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हॉल और उसके बाद आयोजित ‘लिबर्टी बॉल’ में हुआ।

पन्नू का दावा और वीडियो का सच

20 जनवरी को ट्रंप ने 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर पन्नू को समारोह स्थल के अंदर “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए देखा गया। एक वीडियो में वह भीड़ के बीच अपना मोबाइल कैमरा ऑन कर नारे लगाते हुए नजर आ रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, पन्नू को इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। वह समारोह में मौजूद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से काफी दूर खड़ा था।

सूत्रों का कहना है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, और भारत में खालिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उसने कई बार भारत विरोधी बयान दिए हैं और हिंसा भड़काने की कोशिश की है। पन्नू का उद्देश्य खुद को अमेरिकी प्रशासन के करीब दिखाकर वह अपनी उपयोगिता साबित करना चाहता है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

वीडियो के वायरल होने के बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे एक आतंकी, जिसने भारतीय राजनयिकों और एयर इंडिया की फ्लाइट्स पर बम धमाके की धमकी दी थी, उसे इस तरह के हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई।

हालांकि न ही अमेरिकी विदेश विभाग और न ही भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

Trump Presidency 2.0: क्या ट्रंप 2.0 में ड्रग्स तस्करी की पाकिस्तानी साजिशों पर लगेगी लगाम? पाक सेना और ड्रग्स कार्टेल के राज खोलेगी ये किताब

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो साझा करते हुए भारत सरकार से इस मामले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या भारत सरकार सिर्फ मूकदर्शक बनी रहेगी? क्या यह उचित है कि एक ऐसे व्यक्ति को अमेरिका में जगह दी जाए जो भारत की अखंडता के खिलाफ काम कर रहा है?”

2023 में अमेरिका ने भारत सरकार पर पन्नू पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था। अमेरिका ने दावा किया था कि यह साजिश न्यूयॉर्क में रची गई थी, जिसमें भाड़े के शूटर का उपयोग किया जाना था। इस घटना ने भारत-अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में विवाद को और बढ़ा दिया था।

वहीं, भारत ने इस पर कहा था कि वह अमेरिका और अन्य देशों के साथ सहयोग कर रहा है ताकि खालिस्तानी आतंकवाद को रोका जा सके। भारतीय जांच एजेंसियों ने पन्नू के खिलाफ कई वारंट जारी किए हैं और उसकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गई हैं। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि खालिस्तानी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, यह घटना एब भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। वह “सिख्स फॉर जस्टिस” (SFJ) नामक संगठन का नेतृत्व करता है, जो खालिस्तान के गठन के लिए अभियान चलाता है। जुलाई 2020 में, भारत सरकार ने पन्नू को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया था।

पन्नू ने कई बार भारत के राजनयिकों और संस्थानों को धमकी दी है। उसने एयर इंडिया की उड़ानों को निशाना बनाने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी हैं। इसके बावजूद, वह अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में स्वतंत्र रूप से घूमता है, जहां उसे इन देशों की नागरिकता प्राप्त है।

Nepali Army Command: भारत आए नेपाली सेना के अधिकारी, जाना आधुनिक युद्धक तकनीकों का राज! एलएंडटी और भारत फोर्ज का भी किया दौरा

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

Nepali Army Command: भारत और नेपाल के लंबे समय से मजबूत और दोस्ताना संबंध रहे हैं, जो न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव पर आधारित हैं बल्कि दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर भी आधारित हैं। इसी कड़ी में, नेपाली सेना कमांड और स्टाफ कॉलेज के 41 अधिकारियों का एक दल 15 से 23 जनवरी 2025 के बीच भारत दौरा पर आया हुआ है। इस दौरे में पांच अन्य मित्र देशों के अधिकारी और कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक भी शामिल हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे का उद्देश्य भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों, नौसेना कमांड, वायुसेना स्टेशनों और निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं का अध्ययन करना था। इस दौरे को भारत-नेपाल के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Nepali Army Command: सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा

अधिकारियों के इस दल ने भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा किया। इन दौरों में उन्हें भारतीय सेना के ट्रेनिंग सिस्टम, रणनीति और कार्यशैली को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला। प्रशिक्षण संस्थानों में भारतीय सेना के अनुशासन, तकनीकी कौशल और आधुनिक युद्धक तकनीकों की झलक देखने को मिली, जो आज भारत को दुनिया की अग्रणी सैन्य शक्तियों में शुमार करते हैं।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

पश्चिमी नौसेना कमान और वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा

विदेशी अधकारियों के इस दल ने मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया, जहां उन्हें भारतीय नौसेना की ताकत, युद्धपोत निर्माण और समुद्री सुरक्षा में उसकी रणनीतिक भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद पुणे स्थित वायुसेना स्टेशन लोहेगांव का दौरा किया गया। यहां पर वायुसेना की ताकत और उसकी आधुनिक तकनीकी क्षमताओं के बारे में अधिकारियों ने गहराई से जानकारी प्राप्त की।

Nepal Army chief India visit: नेपाल सेना प्रमुख का भारत दौरा; गोरखा भर्ती और रक्षा सहयोग पर रहेगा जोर

निजी रक्षा उद्योगों का दौरा

नेपाली दल ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और भारत फोर्ज जैसे भारत के प्रमुख निजी रक्षा उद्योगों का दौरा भी किया। यह दौरा भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग की ताकत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को समझने के लिए आयोजित किया गया था। इन उद्योगों ने रक्षा उपकरणों के उत्पादन, डिज़ाइन और निर्यात में अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

इन उद्योगों में निर्मित उन्नत हथियार प्रणालियों और उपकरणों को देखकर प्रतिनिधिमंडल ने भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता की सराहना की।

दौरे के दौरान, भारतीय अधिकारियों ने नेपाली दल के साथ खुलकर संवाद किया और साझा इतिहास, संस्कृति और सैन्य परंपराओं पर चर्चा की। यह दौरा न केवल सैन्य क्षमताओं और तकनीकी ज्ञान को साझा करने का माध्यम बना, बल्कि भारत और नेपाल के बीच आपसी समझ और सहयोग को और गहराई प्रदान करने का एक अवसर भी साबित हुआ।

Nepali Army Command Visits India, Explores Modern Warfare Tech!

इस दौरे ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। भारत लंबे समय से नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य उपकरण प्रदान करने में मदद करता आ रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए अपने कौशल को साझा करती हैं।

नेपाली अधिकारियों ने इस दौरे को बेहद लाभकारी बताते हुए कहा कि यह उनके दृष्टिकोण और रणनीतिक सोच को व्यापक बनाने में मददगार साबित हुआ है। उन्होंने भारत के रक्षा तंत्र, औद्योगिक क्षमताओं और तकनीकी विकास की प्रशंसा की।

यह दौरा भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। दोनों देशों के बीच इस तरह के अध्ययन दौरों से आपसी समझ और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में, इस तरह की पहल न केवल दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को बढ़ावा देंगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।