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Finally justice to 1965 War Veteran: Punjab and Haryana High court comes to his rescue, pulls up Indian Army for Unnecessary litigation

Liberalised Family Pension
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Finally justice to 1965 War Veteran: Pulling the Indian Army for its unnecessary litigation, the Punjab and Haryana High court had directed Centre to pay an additional 15 percent on the arrears of war injury pension to an army captain decorated with the Veer chakra in the 1965 Indo- Pak war.

Finally justice to 1965 War Veteran: Punjab and Haryana High court comes to his rescue, pulls up Indian Army for Unnecessary litigation
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A bench of Justices Sanjeev Prakash Sharma and Meenakshi Mehta expressed their shock that a war veteran was dragged into an unnecessary litigation for years and asked Indian army to pay an additional 15 percent on the arrears of war injury to captain Reet M P Singh of 8 cavalry.

The bench also expressed surprise as to how the 2018 judgment passed by the AFT was being challenged and directed that additional interest be recovered from the officers responsible for delaying the payment to the war hero.

CASE OF CAPTAIN SINGH

Captain singh had 80 disability and lost an eye in the 1965 war but had not been granted enhanced benefits by broad-banding of disability percentage in accordance with a policy introduced by the Centre with effect from 1996.

Disability Pension: Over 3000 appeals by MoD pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

This was subsequently challenged

Ministry of Defence had earlier granted enhanced benefits only to invalidation cases post-1996, denying them to pre-1996 cases. Additionally, those who were released with disability pension or war injury pension upon the completion of their term, voluntary retirement or superannuation were also refused these benefits.

Supreme Court had struck down the cut-off date and quashed the distinction based on the manner of exit from service and had directed the payment of benefits with arrears from 1996 with 8 per cent interest to all affected disabled retired personnel.

TOP COURT SLAPPED FINE ON CENTRE FOR UNNECESSARY LITIGATION

Last month, top court had also slapped penalty of Rs 50,000 on the Union government and the Indian Army for forcing a soldier’s widow into unnecessary litigation. She had to fight for years to secure a family pension after her husband, Naik Inderjeet Singh, died during a counter terrorism patrol in Jammu and Kashmir.

SUCH CASES IMPACT MORALE OF ARMED FORCES

A bench of Justices A S Oka and Ujjal Bhuyan while criticising the Union government for dragging armed forces personnel and their families to the top court over disputes related to pensions highlighted the adverse impact of such litigation on morale within the armed forces.

CENTRE SHOULD COME OUT WITH POLICY

Asking the Centre to come out with a policy to avoid such litigation stressed that personnel who have served the nation should not be subjected to unnecessary legal battles and said, “As it is, there are only a few people willing to serve in the armed forces.”

“Why should the Union drag such people to this court? They have served the Union after all. Day in and day out, these matters are brought here,” the bench observed.

Republic Day Parade 2025: इस बार कर्तव्यपथ पर ये रही सर्वश्रेष्ठ झांकी, पहले नंबर पर रहा ये मार्चिंग कंटिंगेंट

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttar Pradesh (Mahakumbh 2025 - Swarnim Bharat: Virasat aur Vikas)

Republic Day Parade 2025: गणतंत्र दिवस परेड 2025 के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट और झांकियों के विजेताओं का आधिकारिक एलान कर दिया गया है। इस वर्ष की परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और ऐतिहासिक धरोहर का भव्य प्रदर्शन किया गया। परेड में भाग लेने वाली झांकियों और मार्चिंग दस्तों के प्रदर्शन का मूल्यांकन तीन अलग-अलग ज्यूरी पैनलों द्वारा किया गया, जिन्होंने विजेताओं की सूची जारी की।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttar Pradesh (Mahakumbh 2025 – Swarnim Bharat: Virasat aur Vikas)

Republic Day Parade 2025: सेवाओं और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट

इस वर्ष की परेड में जम्मू और कश्मीर राइफल्स कंटिंगेंट को सेवाओं की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल के रूप में चुना गया। वहीं, दिल्ली पुलिस के मार्चिंग दस्ते को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और अन्य सहायक बलों की श्रेणी में पहला स्थान मिला। दोनों दस्तों ने अनुशासन, तालमेल और बेहतरीन परेड प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttarakhand (Uttarakhand: Cultural Heritage and Adventure Sports)

Republic Day Parade 2025: सर्वश्रेष्ठ झांकियां (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों के मूल्यांकन के बाद शीर्ष तीन झांकियों की घोषणा की गई:

उत्तर प्रदेश – “महाकुंभ 2025 – स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (पहला स्थान)

त्रिपुरा – “अनंत श्रद्धा: त्रिपुरा में 14 देवताओं की पूजा – खार्ची पूजा” (दूसरा स्थान)

आंध्र प्रदेश – “एतिकोप्पका बोम्मालु – इको-फ्रेंडली वुडन टॉयज” (तीसरा स्थान)

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Gujarat (Swarnim Bharat: Virasat Aur Vikas)

उत्तर प्रदेश की झांकी को महाकुंभ 2025 की भव्यता और भारतीय आध्यात्मिक धरोहर को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए पहला स्थान दिया गया। त्रिपुरा की झांकी ने अपनी धार्मिक परंपराओं को जीवंत तरीके से दर्शाया, जबकि आंध्र प्रदेश की झांकी ने पारंपरिक खिलौनों और हस्तशिल्प कला की महत्ता को उजागर किया।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Ministry of Women & Child Development (Multifaceted journey of women and children nurtured under the Ministry’s comprehensive schemes)

सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय मंत्रालय/विभाग की झांकी

केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियों में जनजातीय मामलों के मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स) की झांकी को “जनजातीय गौरव वर्ष” की थीम पर आधारित शानदार प्रस्तुति के लिए प्रथम स्थान दिया गया। इसके अलावा, दो विशेष पुरस्कार भी दिए गए:

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) – “भारत के संविधान के 75 वर्ष”

‘जयति जय ममः भारतम्’ नृत्य समूह – विशेष सांस्कृतिक प्रदर्शन के लिए

जनता की पसंद के विजेता

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में जनता को भी अपनी पसंद के सर्वश्रेष्ठ झांकी और मार्चिंग दस्ते को चुनने का अवसर दिया गया। MyGov पोर्टल पर 26 से 28 जनवरी 2025 तक ऑनलाइन मतदान कराया गया, जिसके नतीजे इस प्रकार रहे।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Best Marching Contingent among Services – Signals Contingent

जनता की पसंद के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट

सेनाओं की श्रेणी में – सिग्नल्स कंटिंगेंट

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की श्रेणी में – CRPF मार्चिंग कंटिंगेंट

जनता की पसंद की सर्वश्रेष्ठ झांकियां (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)

गुजरात – “स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (पहला स्थान)

उत्तर प्रदेश – “महाकुंभ 2025 – स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (दूसरा स्थान)

उत्तराखंड – “उत्तराखंड: सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेल” (तीसरा स्थान)

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
· Best Marching Contingent among CAPFs/other auxiliary Forces – CRPF Marching Contingent

जनता की पसंद की सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय मंत्रालय/विभाग की झांकी

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय – “मंत्रालय की व्यापक योजनाओं के तहत महिलाओं और बच्चों की बहुआयामी यात्रा”

गणतंत्र दिवस परेड 2025 का भव्य समापन

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में भारत की संस्कृति, सैन्य शक्ति और विकास की झलक देखने को मिली। मार्चिंग कंटिंगेंट, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस परेड को ऐतिहासिक बना दिया। विशेष रूप से, जनता द्वारा चुने गए विजेताओं ने दर्शाया कि नागरिकों की भागीदारी इस आयोजन को और अधिक शानदार बना सकती है।

हर साल की तरह, इस वर्ष भी परेड में देश की विविधता और एकता का संदेश दिया गया। अगले वर्ष के लिए और भी भव्य आयोजन की उम्मीद की जा रही है, जहां भारत की समृद्ध विरासत और विकास की यात्रा को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।

India-China Border: सर्दियों में भी LAC पर जारी हैं चीन की नापाक सैन्य गतिविधियां, सैटेलाइट तस्वीरों में हुआ ये बड़ा खुलासा

Eastern Ladakh LAC Update: Indian Army winter deployment remains unchanged
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India-China Border: भारत और चीन के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बावजूद, चीन लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने सैन्य ढांचे को मजबूत कर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में देपसांग और डेमचोक से सैनिकों के हटने के बावजूद, पूर्वी लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक चीन अपनी गतिविधियों को तेजी से बढ़ा रहा है।

India-China: Chinese Military Activities Continue Along LAC Despite Winter, Satellite Images Reveal
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सैन्य सूत्रों के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) कई जगहों पर मिलिट्री कैंप्स और सड़क निर्माण में लगी हुई है। खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में चीन रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। यहां भारत को रणनीतिक बढ़त हासिल है, लेकिन चीन नई सड़कों और सैन्य सुविधाओं के जरिए अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

India-China Border: सर्दियों में भी सड़क बनाने में जुटा चीन

सैटेलाइट विश्लेषक @NatureDesai के अनुसार, चीन सर्दियों के मौसम में भी यांग्त्से क्षेत्र में दो नई सड़कों का निर्माण कर रहा है। इनमें से एक सड़क लैम्पुग से टांगवु की ओर बनाई जा रही है। PLA ने न केवल नए सैन्य कैंप बनाए हैं, बल्कि तवांग सेक्टर में टांगवू गांव से एलएसी तक एक पक्की सड़क का निर्माण भी किया है। इसके अलावा, इलाके में कुछ कच्चे रास्तों को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे चीन जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में सैनिकों को जल्दी तैनात कर सके। चीन यांग्त्से क्षेत्र में भारतीय सेना की टैक्टिकल एज को खत्म करने के लिए तेजी से निर्माण कार्य में जुटा हुआ है। सेटेलाइट तस्वीरों से भी खुलासा हुआ है कि चीन ने पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में दो नई सड़कें बनाई हैं, जिससे उसके सैनिकों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलेगा।

India-China: Chinese Military Activities Continue Along LAC Despite Winter, Satellite Images Reveal
Photo: Naturedesai

India-China Border: पीएलए का फोकस तवांग, नाकू ला पर

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलए का फोकस तवांग, नाकू ला (उत्तर सिक्किम) और अरुणाचल प्रदेश के अन्य संवेदनशील इलाकों में आखिरी बिंदु तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है। ये इलाके पहले से ही भारत-चीन के बीच विवाद का केंद्र रहे हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन लगातार यांग्त्से क्षेत्र में नई सड़कें और पुल बना रहा है, जिससे उसके सैनिकों को ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर पहुंच मिल रही है। इससे भारतीय सेना की पेट्रोलिंग और चौकसी प्रभावित हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से, असफिला और सुबनसिरी नदी घाटी इलाकों में चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। इन इलाकों में भारतीय सेना का नियंत्रण दशकों से रहा है, लेकिन चीन बार-बार इस क्षेत्र पर अपना दावा जताता रहा है।

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उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में भी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा चीन

चीन केवल अरुणाचल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के क्षेत्रों में भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। नई सड़कों, पुलों, हेलिपैड और आर्टिलरी के निर्माण की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। पूर्वी लद्दाख में देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में चीन की सैन्य गतिविधियां भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों के बीच इन स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद चीन की नई तैयारियों के चलते सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ है।

1. पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख) में एलएसी के पास चीन ने कई नए सैन्य शिविर और लॉजिस्टिक सपोर्ट बेस बनाए हैं। सीमा पर तोपखाने और मिसाइल सिस्टम की तैनाती बढ़ा दी गई है। वहीं, पैंगोंग झील क्षेत्र में चीनी सैनिकों की उपस्थिति बनी हुई है।

2. मध्य सेक्टर (उत्तराखंड-हिमाचल) की बात करें, तो बाराहोटी क्षेत्र में चीन की गतिविधियां बढ़ी हैं। यहां नई सड़कें बनाई गई हैं, जिससे सैनिकों की आवाजाही तेज हो गई है।

3. पूर्वी सेक्टर (सिक्किम-अरुणाचल) के तवांग सेक्टर में चीन लगातार सड़क निर्माण और सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है। यांग्त्से और असफिला जैसे संवेदनशील इलाकों में PLA की नई संरचनाएं देखी गई हैं। चीन की नई सड़कों और ब्रिज निर्माण से भारतीय पोस्ट्स और सैन्य ठिकानों की निगरानी करना आसान हो जाएगा।

भारतीय सेना के अधिकारियों के अनुसार, चीन और भारत दोनों ही अपनी उत्तरी सीमाओं पर समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहे हैं। हालांकि, चीन द्वारा किसी भी प्रकार के समझौतों के उल्लंघन की स्थिति में भारत उचित स्तर पर इसका विरोध भी दर्ज करा रहा है।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में कहा था कि भारत ने किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में चीनी सेना को “पेट्रोलिंग राइट्स” नहीं दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सभी कॉर्प्स कमांडरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे छोटी-मोटी बॉर्डर पेट्रोलिंग और चरागाहों से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही सुलझा सकें, ताकि वे बाद में गंभीर विवाद का रूप न लें।

चीन नहीं चाहता डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन

पिछले साल अक्टूबर में जब देपसांग और डेमचोक में चीन ने सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति जताई थी, तब उम्मीद जताई गई थी कि आगे भी तनाव कम होगा। लेकिन अब तक चीन ने पूरी तरह डी-एस्केलेशन (तनाव कम करने) और डी-इंडक्शन (सैनिकों की वापसी) पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसके विपरीत, चीन ने एलएसी पर अपनी उपस्थिति और मजबूत कर ली है।

हालांकि भारत ने भी चीन की इन गतिविधियों के जवाब में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हाल ही में भारतीय सेना ने पूर्वोत्तर और लद्दाख क्षेत्रों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। आधुनिक हथियारों और सर्विलांस सिस्टम से लैस एडवांस पोस्ट बनाई जा रही हैं। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना भी एलएसी पर लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी अप्रत्याशित गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सेना और वायुसेना के कॉर्डिनेशन से स्ट्रैटेजिक तौर पर महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

Beating Retreat ceremony: विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में पेश की जाएंगी ये मुधर धुनें, इस तरह होगा 76वें गणतंत्र दिवस समारोह का समापन

Beating Retreat Ceremony 2026

Beating Retreat ceremony: 76वें गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी, 2025 को विजय चौक पर आयोजित भव्य बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ होगा। इस अवसर पर तीनों सेनाओं भारतीय सेना (IA), भारतीय नौसेना (IN), और भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के बैंड्स द्वारा 30 भारतीय धुनें प्रस्तुत की जाएंगी। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों व जनता की उपस्थिति में होगा।

Beating Retreat Ceremony: Melodious Tunes to Mark the Culmination of 76th Republic Day at Vijay Chowk

रायसीना हिल्स की पृष्ठभूमि में ढलते सूरज के साथ जब विजय चौक भारतीय धुनों से गूंजेगा, तो यह क्षण न केवल गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होगा, बल्कि देशवासियों के दिलों में गर्व और देशभक्ति का नया जोश भी भर देगा।

‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से होगी शुरुआत

सेरेमनी (Beating Retreat ceremony) की शुरुआत मास्ड बैंड की धुन ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से होगी। इसके बाद पाइप्स और ड्रम्स बैंड द्वारा ‘अमर भारती’, ‘इंद्रधनुष’, ‘जय जनम भूमि’, ‘नटी इन हिमालयन वैली’, ‘गंगा जमुना’ और ‘वीर सियाचिन’ जैसी मनमोहक धुनें प्रस्तुत की जाएंगी।

Robotic Mules: भारतीय सेना के वेटरंस बोले- जब खच्चर बन जाते थे दोस्त! क्या भावनात्मक जुड़ाव दे पाएंगे रोबोटिक म्यूल्स?

CAPF बैंड्स ‘विजय भारत’, ‘राजस्थान ट्रूप्स’, ‘ऐ वतन तेरे लिए’ और ‘भारत के जवान’ जैसी देशभक्ति से ओतप्रोत धुनों से समां बांधेंगे।

भारतीय वायुसेना और नौसेना की प्रस्तुति

भारतीय वायुसेना के बैंड द्वारा ‘गैलेक्सी राइडर’, ‘स्ट्राइड’, ‘रूबरू’ और ‘मिलेनियम फ्लाइट फैंटेसी’ जैसे आधुनिक और प्रेरक धुनें प्रस्तुत की जाएंगी। वहीं, भारतीय नौसेना का बैंड ‘राष्ट्रीय प्रथम’, ‘निष्क निष्पाद’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्प्रेड द लाइट ऑफ फ्रीडम’, ‘रिद्म ऑफ द रीफ’ और ‘जय भारती’ जैसी धुनें पेश करेगा।

भारतीय सेना का बैंड ‘वीर सपूत’, ‘ताकत वतन’, ‘मेरा युवा भारत’, ‘ध्रुव’ और ‘फौलाद का जिगर’ जैसी धुनों से कार्यक्रम में समा बांधेगा।

मास्ड बैंड के कलाकार कार्यक्रम के अंत में ‘प्रियम भारतम’, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, और ‘ड्रमर्स कॉल’ की धुनें बजाएंगे। इसके बाद ‘सारे जहां से अच्छा’ की धुन पर बग्लर्स की प्रस्तुति के साथ सेरेमनी समाप्त होगी। यह धुन राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान की भावना को दर्शाएगी।

इस आयोजन के प्रमुख संचालक कमांडर मनोज सेबेस्टियन होंगे। भारतीय सेना बैंड का संचालन सुबेदार मेजर (मानद कैप्टन) बिशन बहादुर करेंगे, जबकि नौसेना और वायुसेना बैंड्स का नेतृत्व क्रमशः एम एंटनी और वारंट ऑफिसर अशोक कुमार करेंगे। CAPF बैंड का संचालन हेड कांस्टेबल जीडी महाजन कैलाश माधव राव करेंगे।

पाइप्स और ड्रम्स बैंड सुबेदार मेजर अभिलाष सिंह के निर्देशों के तहत प्रदर्शन करेंगे, जबकि बग्लर्स का नेतृत्व नायब सुबेदार भूपाल सिंह करेंगे। इनके समन्वय और संगीत की जादुई धुनों के माध्यम से यह सेरेमनी एक अविस्मरणीय अनुभव बनने की ओर अग्रसर है।

हर वर्ष की तरह, बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat ceremony) भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और सैन्य गौरव का प्रतीक होगी। इस बार सभी धुनें पूरी तरह भारतीय होंगी, जो देश की संगीत परंपरा और समकालीन ध्वनियों का अद्भुत संगम पेश करेंगी।

Aero India 2025: भारत के सबसे बड़े एरो शो में हिस्सा नहीं लेंगे अमेरिकी वायुसेना के F-35 और F-16 फाइटर जेट, ये है बड़ी वजह

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

Aero India 2025: एरो इंडिया 2025 में अमेरिकी वायुसेना (USAF) के एफ-35 और एफ-16 लड़ाकू विमानों की डेमो फ्लाइट नहीं होगी। यह चौंकाने वाला एलान आधिकारिक तौर पर अमेरिकी वायुसेना की वेबसाइट पर किया गया है। यह शो 10 फरवरी से 14 फरवरी 2025 के बीच बेंगलुरु के येलाहांका एयर बेस में आयोजित होने वाला है। वहीं इस फैसले से एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस शो में आने वाली कंपनियों और एविएशन लवर्स को निराशा हो सकती है। क्योंकि कई एविएशन प्रेमी और रक्षा विशेषज्ञ दूर-दूर से एफ-35 और एफ-16 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की उड़ानें देखने के लिए एय़र शो में पहुंचते हैं।

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

एक्सपर्ट्स और एविएशन लवर्स को निराशा

एरो इंडिया एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस आयोजनों में से एक है, जो हर साल दुनियाभर से रक्षा विशेषज्ञों, एविएशन इंड्स्ट्री के एक्सपर्ट्स और एविएशन लवर्स को आकर्षित करता है। इस शो का उद्देश्य न केवल मिलिट्री और सिविल एविएशन टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करना है, बल्कि डिफेंस सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भी है।

Aero India 2025: बेंगलुरु में जुटेंगी दुनियाभर की डिफेंस कंपनियां, मेक इन इंडिया को मिलेंगे पंख

हालांकि, अमेरिकी वायुसेना यानी U.S. Air Force (USAF) ने एफ-35 और एफ-16 की डेमो फ्लाइट करने की वजह का खुलासा नहीं किया है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला संभवतः टेक्निकल औऱ डिप्लोमेटिक वजहों या फिर लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते लिया गया होगा। वहीं अगर ये विमान एरो शो में आते तो इसे डिफेंस कोऑपरेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलता। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे एय़र शो में अमेरिकी वायुसेना के विमानों की मौजूदगी से लोगों में दिलचस्पी बढ़ती है।

Aero India 2025: U.S. Air Force F-35 and F-16 Jets to Skip India’s Biggest Airshow – Here’s Why

सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी विमानों की गैरमौजूदगी एय़र शो (Aero India 2025) में जरूर खलेगी, लेकिन एरो इंडिया 2025 में अन्य रोमांचक हवाई प्रदर्शन और तकनीकी प्रदर्शन दर्शकों को आकर्षित करने में कोई कमीं नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि अमेरिकी विमानों की अनुपस्थिति से शो की प्रासंगिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारतीय वायुसेना के विमानों की तकनीकी क्षमता और प्रदर्शन इस शो का मुख्य आकर्षण रहेगा। आयोजक अब इस कमी को पूरा करने के लिए अन्य डोमेस्टिक या इंटरनेशनल पर्फॉर्मन्सेस जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।

वहीं, अमेरिकी विमानों की गैरमौजूदगी के बीच, भारत को अपनी स्वदेशी तकनीकों और रक्षा उपकरणों को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मौका मिल सकता है। यह आयोजन ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने और डोमेस्टिक एविएशन इंडस्ट्री को वैश्विक मंच पर मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

एरो इंडिया अब तक न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की डिफेंस और एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है। हर दो साल पर आयोजित होने वाला यह शो दुनियाभर से सरकारों, उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाता है। इस बार भी, आयोजन स्थल पर अत्याधुनिक विमानों की प्रदर्शनी, ड्रोन शो, और लाइव हवाई प्रदर्शन दर्शकों के लिए रोमांचक अनुभव होंगे।

Su-57 Felon बन सकता है एरो इंडिया शो का हिस्सा

भारत में अमेरिकी दूतावास में रक्षा अताशे रियर एडमिरल माइकल एल. बेकर का कहना है कि नई दिल्ली एफ-35 पर निर्णय लेने के “बहुत शुरुआती चरण” में है। लेकिन कहानी कुछ और है। सूत्रों ने बताया कि इसकी असल वजह है रूस का Su-57 Felon, जो इस बार एरो इंडिया शो (Aero India 2025) का हिस्सा हो सकता है। रूसी राष्ट्रपति फरवरी में भारत पर होंगे और वे Su-57 स्टेल्थ फाइटर भारत को देने की पेशकश कर सकते हैं। Su-57 भारत में आएगा। इससे पहले नवंबर 2024 में, इसने चीन में झुहाई एयर शो में भाग लिया था, जो किसी विदेशी देश में इसका पहला एयर शो था।

रूस को उम्मीद है कि उसका अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमान, अमेरिकी F-35 और चीनी J-20 माइटी ड्रैगन का जवाब है, और भारतीय वायुसेना की स्टील्थ विमान की जरूरत पूरी कर सकता है। वहीं, एरो इंडिया शो में एफ-35,  एफ-16 के साथ Su-57 लड़ाकू विमान की मौजूदगी से दोनों में क्लैश हो सकता है। हो सकता है कि इसी वजह से अमेरिका ने एफ-35,  एफ-16 को न भेजने का फैसला लिया हो।

पांचवी पीढ़ी का Su-57 फाइटर जेट का प्रोडक्शन काफी सीमित रहा है। 2010 में इसकी पहली उड़ान के बाद से 14 साल हो चुके हैं, और 40 से भी कम विमान अभी तक डिलीवर किए गए हैं। यह मुख्य रूप से डिजाइन और डेवलपमेंट में देरी और पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते इसके उत्पादन पर असर पड़ा है। वहीं रूस-युक्रेन वार के चलते इसका उत्पादन 2019 तक भी शुरू भी नहीं हो पाया था।

ISI in Bangladesh: बांग्लादेश आर्मी चीफ को हटाकर ULFA के जरिए ‘चिकन नेक’ पर कब्जा करना चाहती है ISI, रंगपुर में रची ये बड़ी साजिश

ISI in Bangladesh: Plot to Use ULFA for 'Chicken Neck' Control, Conspires to Remove Bangladesh Army Chief

ISI in Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि हाल ही में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने  बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। ये अधिकारी भारत के “चिकन नेक” क्षेत्र के पास देखे गए थे, जो पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ता है। वहीं, इस दौरे के बाद भारत सर्तक हो गया है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य और खुफिया सहयोग की खबरें सामने आ रही हैं, ऐसे में पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों का वहां जाना किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है।

ISI in Bangladesh: Plot to Use ULFA for 'Chicken Neck' Control, Conspires to Remove Bangladesh Army Chief

ISI in Bangladesh: एमिरात की फ्लाइट से ढाका पहुंचे थे आईएसआई चीफ

21 जनवरी 2025 को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक ने ढाका का दौरा किया था। वे ढाका के रैडिसन ब्लू होटल में रुके थे। जहां उनके साथ पाकिस्तान के दो वरिष्ठ अधिकारी भी थे—इनमें मेजर जनरल शाहिद अमीर अफसर, डीजी ए; और मेजर जनरल आलम अमीर अवान, डीजी एसएंडए। ये अधिकारी एमिरात की फ्लाइट (EK-586) से आए थे और चुपचाप होटल की तीसरी मंजिल पर रुके थे। वहीं, पाकिस्तान के खुफिया अफसरों की अगुवानी बांग्लादेश सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान ने की थी। पाकिस्तानी ISI के अधिकारियों ने बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी DGFI के प्रमुख मेजर जनरल जाहांगीर आलम से भी मुलाकात की थी। रहमान को कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा का समर्थक माना जाता है।

ISI in Bangladesh: बांग्लादेश सेना प्रमुख के खिलाफ विद्रोह की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान, वही शख्स हैं, जो मौजूदा बांग्लादेश आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमां को हटाने की योजना बना रहे हैं। और उसमें उन्हें पाकिस्तान की आईएसआई का मजबूत समर्थन मिल रहा है। वकार-उज-जमां को भारत के साथ सहयोगी नीति अपनाने वाला नेता माना जाता है। वहीं, पिछले हफ्ते पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ असीम मलिक के ढाका दौरे ने इस साजिश को और हवा दी। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात का उद्देश्य बांग्लादेशी सेना को भारत विरोधी नीतियों की ओर मोड़ना और खुफिया नेटवर्क को मजबूत करना था। सूत्रों ने बताया कि अब वकार-उज-जमां की स्थिति कमजोर होती जा रही है। रहमान ने सेना के भीतर कट्टरपंथी धड़ा मजबूत कर लिया है और डीजीएफआई (बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। भले ही रहमान के पास कोई ट्रूप्स कमांड नहीं है, लेकिन वे डीजीएफआई का समर्थन पाने की पूरी कोशिशों में जुटे हुए हैं।

भारत के “चिकन नेक” इलाके का दौरा किया आईएसआई चीफ ने

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक और बांग्लादेश सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान से मुलाकात के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने और सामरिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। आईएसआई के अधिकारियों ने बांग्लादेश की सीमा से सटे भारत के “चिकन नेक” इलाके का दौरा भी किया। यह इलाका भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

Indo-Bangladesh border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर नागरिकों को हथियार चलाना सिखा रही BGB, BSF को निशाना बनाने की है बड़ी तैयारी!

सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई के अधिकारियों ने बांग्लादेश के रंगपुर जिले का दौरा किया, जो भारत के चिकन नेक क्षेत्र से महज 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी ले जाया गया। यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच इस दौरे के बाद भारत पूरी तरह से सचेत हो गया है।ॉ

आठ पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क है चिकन नेक से

वहीं, चिकन नेक की बात करें, तो इस क्षेत्र से भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क शेष देश से जुड़ा हुआ है। पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में से चार – असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय – बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करते हैं। इन राज्यों के भारत के बाकी हिस्सों से जुड़ने का एकमात्र मार्ग सिलिगुड़ी कॉरिडोर या “चिकन नेक” है, जो महज 22 किलोमीटर चौड़ा है। पाकिस्तानी अधिकारियों का सीमावर्ती इलाकों का दौरा करना, और वह भी ऐसे समय में जब भारत और बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं, भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की ISI लंबे समय से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है। इस क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को पाकिस्तान के समर्थन के सबूत पहले भी मिल चुके हैं। अब, बांग्लादेश के माध्यम से भारत को घेरने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है कि यहां पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता या अवैध गतिविधि भारत के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण इस क्षेत्र में आतंकवाद और तस्करी जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका है।

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आईएसआई चीफ के साथ दिखा जसीमुद्दीन रहमानी 

सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थानीय निवासियों ने आतंकी संगठन अंसार-उल-बांग्ला टीम (जो अल कायदा से जुड़ा हुआ है) के नेता जसीमुद्दीन रहमानी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेशी सेना के अधिकारियों के साथ देखा है। जसीमुद्दीन रहमानी, जो कई आतंकवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात है, पहले से ही बांग्लादेशी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है। रंगपुर डिवीजन भारत की उत्तर-पूर्व सीमा के करीब है।

पाकिस्तान के साथ गलबहियां कर रहा है बांग्लादेश

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों में रिश्तों में नया मोड़ आया है। 2024 में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद से, बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ा है। वर्तमान अंतरिम सरकार, जिसमें मोहम्मद यूनुस प्रमुख भूमिका में हैं, भारत के प्रति सख्त और पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अपना रही है। हाल ही में, बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ वीजा नियमों में ढील दी थी और दोनों देशों के बीच पहली बार कार्गो शिप का संचालन शुरू हुआ। इसके अलावा, बांग्लादेशी सेना के जवान अब पाकिस्तानी सेना से ट्रेनिग लेंगे, और बांग्लादेश “अमन 2025” नौसैनिक अभ्यास में भी भाग लेगा। यह एक्सरसाइज कराची में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा बांग्लादेश के वायुसेना पायलट अब चीन और पाकिस्तान द्वारा विकसित लड़ाकू विमान JF-17 की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

उल्फा चीफ परेश बुरुआ से मिले आईएसआई अफसर

सूत्रों ने बताया कि आईएसआई चीफ ने उल्फा चीफ परेश बुरुआ से भी मुलाकात की थी। शेख हसीना ने भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्र में अहम समझौते किए थे। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश ने भारत विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाई थी। 2009 से 2015 के बीच बांग्लादेश ने भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों जैसे उल्फा (ULFA) के कई नेताओं को भारत के सुपुर्द किया था। उल्फा को भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों का समर्थन मिलता रहा है। उल्फा  नेता परेश बरुआ ने कई बार पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया है।

एक रिटायर्ड बांग्लादेशी जनरल ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बांग्लादेशी और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की यात्राएं वाकई चौंकाने वाली हैं। यह संकेत देती हैं कि किसी सैन्य-सुरक्षा उद्देश्य को बहुत कम समय में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि इन लगातार बैठकों और बांग्लादेश में इनके संभावित उद्देश्यों पर भारत की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों और महीनों में क्या होगी।”

बांग्लादेश ने 2009 से 2015 के बीच भारत को ULFA नेताओं को सौंपा

सूत्रों ने बताया कि 2009 से 2015 के बीच, बांग्लादेश ने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ नेताओं को भारत को सौंपा। इन नेताओं में संगठन के महासचिव अनूप चेतिया, अध्यक्ष अरबिंद राजखोवा, विदेश सचिव सशधर चौधरी, वित्त सचिव चित्रबान हजारिका और सैन्य अभियानों के उप प्रमुख राजू बरुआ शामिल थे।
2023 में जब ULFA और भारत सरकार के बीच शांति समझौता हुआ, तो विद्रोही नेताओं ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश की ‘प्रो-इंडिया’ अवामी लीग सरकार द्वारा भारतीय उग्रवादी समूहों पर कड़ी कार्रवाई ने उन्हें 2011 में सरकार के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए मजबूर किया।

ISI और अफगान मुजाहिदीन के साथ ULFA के संबंध

साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के अनुसार, ULFA के विद्रोहियों ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और अफगान मुजाहिदीन के साथ संबंध बनाए थे। अनुमान है कि लगभग 200 ULFA कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रशिक्षण लिया था। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ कि बांग्लादेश की डिफेंस फोर्सेस इंटेलिजेंस (DFI) ने सिलहट जिले में ULFA कैडरों को प्रशिक्षण दिया था।

करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान का समर्थन भी किया था ULFA ने

ISI ने ULFA नेताओं, विशेष रूप से परेश बरुआ, को कई पासपोर्ट प्राप्त करने में मदद की। इसके अलावा, कई ULFA कैडरों को पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई। इसमें रॉकेट लॉन्चर्स, विस्फोटक और असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण शामिल था। यहां तक कि ULFA के शीर्ष नेतृत्व ने पाकिस्तान के उच्चायोग की मदद से कराची की यात्रा की, जहां उन्हें ISI संचालित आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों में ले जाया गया। बता दें कि ULFA ने 1999 के करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान का समर्थन भी किया था।

बांग्लादेश द्वारा ULFA के खिलाफ उठाए गए कदमों ने पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा को मजबूत किया और विद्रोही नेताओं को शांति वार्ता के लिए मजबूर किया। बांग्लादेश की अवामी लीग सरकार की यह नीति भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई थी।

चीन से गतिविधियां चला सकता है परेश बरुआ

वहीं, बांग्लादेश में मौजूदा राजनीतिक हालात परेश बरुआ के नेतृत्व वाले ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) गुट के लिए एक नया सहारा बन सकते हैं। यह गुट शांति वार्ता का विरोध करता रहा है और भारत-म्यांमार सीमा के जंगलों में सक्रिय है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, परेश बरुआ अब चीन में रहकर अपनी गतिविधियां चला सकता है। 2004 के चटगांव हथियार बरामदगी मामले में बांग्लादेश की एक हाईकोर्ट बेंच ने परेश बरुआ की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। यह घटना भारत के पड़ोस में सबसे बड़ी अवैध हथियारों की जब्ती में से एक थी। चटगांव बंदरगाह पर पकड़े गए 10 ट्रक अवैध हथियारों और गोला-बारूद में शामिल थे: इनमें 4,930 फायर आर्म्स, 27,020 ग्रेनेड, 840 रॉकेट लॉन्चर, 300 रॉकेट, 2,000 ग्रेनेड लॉन्चिंग ट्यूब, 6,392 मैगजीन और 11 लाख से ज्यादा गोलियां शामिल थीं। इन हथियारों को चीन से तस्करी कर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पहुंचाने की योजना थी।

मणिपुर में हिंसा बढ़ने की आशंका

सूत्रों का कहना है कि उल्फा का आईएसआई से मिलना बड़ी कहानी बयां कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों में फिर से तेजी आ सकती है। म्यांमार के गृहयुद्ध प्रभावित इलाकों में सुरक्षित ठिकानों के खत्म होने के चलते 2023 में मणिपुर के मैतेई-प्रभुत्व वाले यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) ने सरकार के साथ संघर्ष विराम समझौता किया था। सैकड़ों विद्रोही आत्मसमर्पण कर चुके थे। वहीं, UNLF के वार्ता-विरोधी गुट और असंतुष्ट सदस्य अब बांग्लादेश में नया ठिकाना तलाश सकते हैं। यह स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती हैं।

Indo-Bangladesh border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर नागरिकों को हथियार चलाना सिखा रही BGB, BSF को निशाना बनाने की है बड़ी तैयारी!

Indo-Bangladesh Border: BGB Training Civilians in Weapons Use, Targeting BSF Alleged!

Indo-Bangladesh border: बांग्लादेश ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास रह रहे नागरिकों को हथियारों की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश ने सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है, जिससे सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के लिए खतरा पैदा हो गया है। वहीं, बांग्लादेश के इस कदम के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने गैर-घातक संधि (Non-Lethal Treaty) की समीक्षा की मांग उठाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अधिक स्वतंत्रता देकर सीमा पर बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

Indo-Bangladesh Border: BGB Training Civilians in Weapons Use, Targeting BSF Alleged!

Indo-Bangladesh border: बड़े टकराव की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश ने सीमा पर रहने वाले नागरिकों को छोटे हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। यह आशंका जताई जा रही है कि इन नागरिकों को सीमा पर टकराव या भारत के सीमा बलों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्र में बांग्लादेश का दबदबा स्थापित करने और बांग्लादेश की तरफ से चलाई जा रहीं अवैध गतिविधियों जैसे तस्करी पर भारतीय जवानों की कार्रवाई को रोकने के लिए उठाया गया हो सकता है।

BSF को जवाबी कार्रवाई में हो सकती है दिक्कत

सूत्रों के मुताबिक भारत-बांग्लादेश सीमा बेहद संवेदनशील है और यहां तस्करी, मानव तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों बेहद आम हैं। वहीं, नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने से बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से एक गैर-घातक संधि (Non-Lethal Treaty) लागू है, जिसके तहत सीमा पर हथियारों का इस्तेमाल कम करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और वहां रहने वाले लोगों की जानमाल की हानि न हो, इसलिए लागू की गई थी। हालांकि, बांग्लादेश के इस कथित कदम के बाद सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस संधि से BSF को आगे जवाबी कार्रवाई करने में दिक्कत हो सकती है, जिससे बीएसएफ कर्मियों और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

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Indo-Bangladesh border: BSF को मिलें ज्यादा अधिकार

सुरक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारी अब गैर-घातक संधि की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में BSF को अधिक अधिकार मिलने चाहिए। यदि बांग्लादेश हथियारबंद नागरिकों को सीमा के पास तैनात कर रहा है, तो भारतीय सुरक्षा बलों को प्रभावी तरीके से जवाब देने के लिए पर्याप्त संसाधन और अधिकार मिलने चाहिए।

बता दें कि पिछले साल अगस्त में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। अंतरिम सरकार द्वारा लगातार भारत विरोधी बयान दिए जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास बढ़ी है।

बांग्लादेशी सैनिक बना रहे बंकर

इससे पहले पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के सुखदेवपुर गांव के पास भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं थीं। भारतीय किसानों ने बांग्लादेश पर आरोप लगाया है कि उसने सीमा पर बंकर बनाया है, जिसमें बांग्लादेशी सैनिक हथियारों के साथ तैनात हैं।

सुखदेवपुर के किसानों का दावा है कि बांग्लादेशी सैनिक न केवल सीमा पर बंकर बना रहे हैं, बल्कि भारतीय जमीन पर घुसपैठ करने वालों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी सैनिक सीमा पर बाड़ लगाने के काम में भी बाधा डालते हैं और भारतीय किसानों को गोली मारने की धमकी देते हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच 4096 किलोमीटर की सीमा है, जिसमें पश्चिम बंगाल का बड़ा हिस्सा शामिल है। हाल ही में बांग्लादेश ने इस बात पर आपत्ति जताई कि भारत सीमा पर बाड़ या कटीले तार लगा रहा है।

बांग्लादेशी सीमा रक्षक (BGB) द्वारा भारतीय किसानों को धमकाने और बाड़ लगाने के काम को रोकने की कोशिशों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल

इस बीच, बांग्लादेश सरकार ने अपने सीमा रक्षकों को साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस जैसे गैर-घातक हथियार देने का फैसला किया है। बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में इस फैसले की पुष्टि की।

चौधरी ने कहा, “हमने बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) के लिए साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले खरीदने की मंजूरी दे दी है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस कदम पर नकारात्मक प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत पहले से ही अपनी सीमा पर इसी तरह के गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल करता है।

हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को सीमा विवाद पर तलब किया। बांग्लादेश ने आरोप लगाया कि भारत पांच स्थानों पर सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिश कर रहा है, जो एक द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन है। इसके जवाब में, भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त नुरल इस्लाम को तलब किया और सीमा पर बढ़ते तनाव पर चर्चा की।

BSF का ‘ऑप्स अलर्ट’ अभियान शुरू

वहीं, भारत ने 76वें गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए बांग्लादेश सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने 10 दिन का ‘ऑप्स अलर्ट’ अभियान शुरू किया है। यह अभियान 22 जनवरी से 31 जनवरी, 2025 तक चलेगा।  BSF ने जानकारी दी है कि यह अभियान भारत-बांग्लादेश सीमा के सभी फील्ड फॉर्मेशनों में चलाया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों, विशेष रूप से नदी किनारे और बिना बाड़ वाले क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करना और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए तत्पर रहना है।

Made in India स्मार्टफोन से क्यों घबराया पाकिस्तान? पाकिस्तान की कैबिनेट ने नागरिकों को जारी की ये बड़ी चेतावनी

Why Is Pakistan Worried About Made in India Smartphones? Cabinet Issues Warning

Made in India: इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मेड इन इंडिया इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और स्मार्टफोन, जिनमें iPhones भी शामिल हैं, उन्हें देश की साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा घोषित किया है। पाकिस्तान के कैबिनेट डिवीजन ने सभी संघीय मंत्रालयों, डिवीजनों और प्रांतीय मुख्य सचिवों को एक पत्र जारी कर इस संबंध में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

Why Is Pakistan Worried About Made in India Smartphones? Cabinet Issues Warning

 

पाकिस्तानी सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारतीय उत्पादों से पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इनफॉमेशन सिस्टम पर साइबर हमले की आशंका बढ़ गई है। इसमें डेटा चोरी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संवेदनशील जानकारी तक पहुंच और एप्पल-पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी सेवाओं का उपयोग शामिल है।

Made in India: डेटा चोरी और साइबर हमले की आशंका

सूत्रों ने चेतावनी दी है कि मेड इन इंडिया उपकरणों और स्मार्टफोन्स के जरिए पाकिस्तानी उपभोक्ताओं के डेटा की चोरी का खतरा बढ़ गया है। इन उत्पादों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर स्तर पर छेड़छाड़, वायरस या स्पायवेयर के मौजूद होने का भी जोखिम है।

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साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय उत्पादों के माध्यम से डेटा इंटरसेप्शन और टारगेटेड साइबर गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है। इसके अलावा, हैकर्स भारतीय टेक्निकल सपोर्ट एजेंट या सर्विस सेंटर्स का भेष बनाकर ग्राहकों को धोखा दे सकते हैं।

सावधानी बरतने की सलाह

कैबिनेट डिवीजन द्वारा जारी पत्र में पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे एपल के उत्पादों को केवल ऑथराइज्ड रीसेलर्स से खरीदें और डिवाइस की सील और पैकेजिंग को अच्छी तरह जांच लें। इसके अलावा, उपकरणों को समय-समय पर एपल के आधिकारिक ऑपरेटिंग सिस्टम से अपडेट करने का सुझाव दिया गया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ता अपनी संचार सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड सेवाओं का उपयोग करें। साथ ही, फोन में मजबूत पासवर्ड लगाएं और एंटीवायरस एप्लिकेशन इंस्टॉल करें।

पाकिस्तानी सरकार का मानना है कि भारत में बने उपकरणों के जरिए न केवल व्यक्तिगत डेटा बल्कि देश के संवेदनशील जानकारी को भी खतरा हो सकता है। इसके चलते सरकारी अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय कीकोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।  ।

Explained: What does Indian law says about Illegal Indian Immigrants, will they prosecute in India after return?

Explained: What Indian Law Says About Illegal Indian Immigrants and Prosecution After Return
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Illegal Indian Immigrants: With the Donald Trump taking over as the President of US, one of his first announcement over illegal immigrants has raised concerns over millions of illegal undocumented residents and their future.

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According to an estimate, US has around 11.7 million illegal residents without proper documentation.

Trump, who had made illegal immigration one of his key campaign issues, has taken this up as a priority.

A significant number of Indians have been repatriated from the US, with around 1,100 individuals returning between October 2023 and September 2024 through charter and commercial flights. This development comes amidst a substantial increase in deportations of Indians from the US, with numbers rising five-fold in four years, from 292 in 2021 to 1,529 last year, as per ICE’s 2024 Annual Report.

Illegal Indian Migrants: अमेरिका में अवैध घुसपैठ पर ट्रंप सख्त; डंकी रूट से यूएस गए 18,000 भारतीयों को वापस लाएगा भारत!

The Indian government is keen on maintaining friendly relations with the US, particularly under the new administration. A key area of concern is the protection of student visas and the H-1B program, which is crucial for skilled Indian workers. Interestingly, Indians accounted for nearly 75% of all 386,000 H-1B visas granted in 2023.

US has been deporting individuals to various countries, including India, as part of its efforts to enforce immigration laws.

INDIA’S STAND ON ILLEGAL INDIAN IMMIGRANTS

Ministry of External Affairs spokesperson Randhir Jaiswal on Friday had said India is against illegal immigration as it is connected to organised crime.

“For Indian nationals, whether in the United States or elsewhere, if they are overstaying or residing in a country without proper documentation, we will bring them back, provided the necessary documents to verify their nationality are shared with us,” Jaiswal said.

WHAT DOES INDIAN LAW SAY ABOUT ILLEGAL MIGRANTS

First and foremost requirement under the Indian law is to analyse various factors of an Indian illegal migrants – circumstances of migration, conduct abroad and whether they have violated any indian or international law.

Explained: What Indian Law Says About Illegal Indian Immigrants and Prosecution After Return
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VIOLATION UNDER THE PASSPORT ACT

  • Section 12 of the Act states that leaving India without a valid passport or travel document may lead to penalties, including imprisonment of up to 2 years and a fine.
  • If an Indian citizen traveled abroad using fraudulent documents, they might face additional charges for forgery under the Indian Penal Code (IPC).

OFFENCE COMMITTED ON FOREIGN LAND

  • If the individual committed criminal offenses in another country (e.g., working illegally, overstaying visas), they might face prosecution there before being deported.
  • Indian authorities could investigate their activities to ensure no national security concerns or international violations are involved.

WHAT ACTION INDIA CAN TAKE ON RETURN

  • Re-entry Verification: Authorities may verify the individual’s identity, travel history, and documents upon return.
  • Deportation Record: If the migrant was deported, Indian authorities might scrutinize their record for potential violations of Indian laws.
  • Interrogation: Returnees might be questioned by Indian immigration and intelligence agencies about their activities abroad, particularly if they come from sensitive regions.
  • Charges that can be imposed: Offenses like using false documents, human trafficking involvement, or working abroad without authorization could result in prosecution.
  • Use of Forged Documents: If forged documents were used, the individual could face charges under the IPC for forgery and cheating.

India-France Deal: अगले हफ्ते मिल सकती है 26 राफेल-M और तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बी डील को CCS की मंजूरी, फरवरी में पेरिस जाएंगे पीएम मोदी

India-France Deal: CCS Approval Likely Next Week for 26 Rafale-M Jets and 3 Scorpene Submarines, PM Modi to Visit Paris in February
Source @macaskeel

India-France Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में फ्रांस की यात्रा पर जा सकते हैं, जहां वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट में भाग लेंगे। इस यात्रा के दौरान, भारत और फ्रांस के बीच दो बड़े रक्षा समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। ये समझौते राफेल-M लड़ाकू विमानों और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद को लेकर हैं।

India-France Deal: CCS Approval Likely Next Week for 26 Rafale-M Jets and 3 Scorpene Submarines, PM Modi to Visit Paris in February
Source @macaskeel

सूत्रों के अनुसार, इन रक्षा सौदों की कुल लागत 10 अरब डॉलर (83,000 करोड़ रुपये) से अधिक होगी। इनमें भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। अगले हफ्ते कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) इन समझौतों की अपनी मंजूरी दे सकती है।

India-France Deal: 10-11 फरवरी को पेरिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट

फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने पहले ही पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री मोदी को 10-11 फरवरी को आयोजित होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट के लिए आमंत्रित किया गया है। यह समिट वैश्विक AI क्षेत्र को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने पर केंद्रित होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। उम्मीद की जा रही है कि इन दौरान इन रक्षा सौदों पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।

भारतीय नौसेना को चाहिए राफेल-M जैसे फाइटर जेट

भारतीय नौसेना को राफेल-M जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है। ये विमान नौसेना के दो विमान वाहक पोतों आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे। इस डील में 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर राफेल-M जेट्स शामिल होंगे।

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पनडुब्बियों की बात करें, तो तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के बेड़े को मजबूत करेंगी। मौजूदा स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से हो रहा है। पहले हुए अनुबंध में शामिल छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में से पांच पहले ही नौसेना में शामिल हो चुकी हैं। वहीं, छठी पनडुब्बी, आईएनएस वागशीर  को इसी महीने 15 जनवरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

इन सौदों के अलावा, भारत रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में, रक्षा मंत्रालय ने दो स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए 2,867 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर किए, जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन मॉड्यूल और भारी टॉरपीडो जैसे स्वदेशी उपकरण शामिल हैं।

राफेल-M और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का सौदा भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल भारतीय नौसेना को और सक्षम बनाएगा, बल्कि भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को भी नई दिशा देगा। इन सौदों से भारतीय नौसेना अपने मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगी।

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इससे पहले पिछले साल दो दिसंबर को नेवी डे के मौके नौसेना प्रमुख एडमिरल एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने अपने सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों डील अंतिम चरण में हैं और अगले महीने तक पूरी हो सकती हैं। उन्होंने बताया, “यह केवल औपचारिकताओं को पूरा करने का मामला है। हमें उम्मीद है कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी और राफेल-M डील पर जल्द ही दस्तखत हो जाएंगे।

उन्होंने कहा राफेल-M डील के बारे में कहा था कि यह CCS की मंजूरी से एक कदम दूर है। मंजूरी मिलते ही समझौता साइन कर लिया जाएगा, और क्योंकि यह सरकार-से-सरकार का सौदा है, इसे तेजी से लागू किया जाएगा। राफेल-M डील में 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और चार ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। यह सौदा नौसेना की तत्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए है, जब तक कि स्वदेशी ट्विन-इंजन डेक आधारित फाइटर तैयार नहीं हो जाता।

नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत 

भारतीय नौसेना वर्तमान में दो विमानवाहक पोत संचालित करती है आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत। इन पर राफेल-M जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बेहद जरूरी है। साथ ही, aging fleet और प्रोजेक्ट-75I के तहत छह एडवांस पनडुब्बियों की देरी को देखते हुए, तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियां नौसेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगी।

चीप, पाकिस्तान पर कही थी ये बात

एडमिरल त्रिपाठी ने पाकिस्तानी नौसेना को लेकर कहा था, “हम जानते हैं कि पाकिस्तान 50 जहाजों वाली नौसेना बनाने की कोशिश कर रहा है। उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह आश्चर्यजनक है कि वे इस विस्तार के लिए फंड कहां से ला रहे हैं। वहीं, एडमिरल ने भारतीय महासागरीय क्षेत्र (Indian Ocean Region) में चीन की गतिविधियों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नौसेना ने पिछले 12 महीनों में पीएलए नेवी (PLA Navy) के जहाजों और अनुसंधान पोतों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी है। उन्होंने कहा, “महासागर सभी के लिए खुले हैं, जब तक वे हमारी सुरक्षा को प्रभावित नहीं करते।”

एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया था कि भारतीय शिपयार्डों में फिलहाल 62 जहाज और एक पनडुब्बी निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, 31 नए जहाजों और पनडुब्बियों के निर्माण के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से सभी को भारत में ही बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “2025 में हर महीने एक नया जहाज नौसेना में शामिल किया जाएगा।”