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Antariksha Abhyas 2024: Defence Space Agency ने दिल्ली में आयोजित किया पहला अंतरिक्ष अभ्यास, सेना के तीनों अंग ले रहे हिस्सा

Antariksha Abhyas 2024: Defence Space Agency Hosts First-Ever Space Exercise in Delhi with Participation from All Three Armed Forces

Antariksha Abhyas 2024: भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भारतीय रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) ने 11 नवम्बर 2024 को दिल्ली में पहली ट्राई सर्विस डिफेंस स्पेस एक्सरसाइज ‘अंतरिक्ष अभ्यास-2024’ का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्घाटन भारतीय रक्षा प्रमुख, जनरल अनिल चौहान (CDS) ने किया।

Antariksha Abhyas 2024: Defence Space Agency Hosts First-Ever Space Exercise in Delhi with Participation from All Three Armed Forces

इस अभ्यास के दौरान, भारतीय सशस्त्र बलों को अंतरिक्ष संसाधनों की सुरक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपट सकें। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस अभ्यास में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने और अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए नई रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में बोलते हुए, CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा, “अंतरिक्ष, जो कभी अंतिम सीमा मानी जाती थी, अब भारत की रक्षा और सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा बन चुका है। हमारे पास अंतरिक्ष अन्वेषण की समृद्ध विरासत और बढ़ती हुई सैन्य क्षमताएं हैं, जिससे हम अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं को चुनौती देने वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।”

जनरल चौहान ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष अब अत्यधिक भीड़-भाड़ वाला, प्रतिस्पर्धात्मक और व्यावसायिक बन चुका है, और इसके मद्देनजर सेना को नवीनता, अत्याधुनिक तकनीकों और प्रणालियों को विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस प्रयास में DRDO, ISRO और अकादमिक संस्थाओं के सहयोग की बात की।

जनरल चौहान ने आगे कहा, “अंतरिक्ष संसाधनों पर नियंत्रण सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है। हमें अंतरिक्ष युद्ध के लिए अपने विचार और प्रक्रियाओं को विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि हम अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कर सकें।”

इस अभ्यास के दौरान, ‘अंतरिक्ष अभ्यास 2024’ के माध्यम से भारत के अंतरिक्ष आधारित संसाधनों और सेवाओं के खतरों को समझने और उनका संचालन करने के तरीके पर गहन मंथन किया जा रहा है। यह तीन दिवसीय अभ्यास 11 से 13 नवम्बर तक आयोजित किया जा रहा है और इसमें भारतीय सशस्त्र बलों के सभी तीन अंगों – सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ रक्षा साइबर एजेंसी, रक्षा खुफिया एजेंसी और रणनीतिक बल कमान के विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं।

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह है कि अंतरिक्ष आधारित सेवाओं और संसाधनों पर निर्भरता को समझा जा सके और यह पहचाना जा सके कि अंतरिक्ष सेवाओं में किसी भी प्रकार की विघ्नता या रुकावट होने पर संचालन में कौन सी कमजोरियां सामने आ सकती हैं। इसके अलावा, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रतिनिधि भी इस अभ्यास में शामिल हैं।

‘अंतरिक्ष अभ्यास 2024’ भारतीय रक्षा एजेंसियों और अंतरिक्ष संसाधनों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भारत की सैन्य संचालन में अंतरिक्ष क्षमताओं को एकीकृत करने में मदद करेगा। इस अभ्यास के माध्यम से, भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हमारे देश का आकाश पूरी तरह से सुरक्षित रहे।

S-400 Air Defence System: भारत को रूस से मिलने वाले बाकी दो एयर डिफेंस सिस्टम के लिए करना होगा लंबा इंतजार, इन विकल्प पर हो रहा है विचार

India Russia S-400 Deal

S-400 air defence system: भारत को रूस से मिलने वाले अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की आखिरी दो यूनिट्स के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। इस बहुप्रतीक्षित सिस्टम की डिलीवरी 2025 तक होने की उम्मीद थी, लेकिन अब संभावना है कि ये यूनिट्स 2026 की शुरुआत में मिलेंगी।

S-400 Air Defence System: India Faces Long Wait for Remaining Two Russian Units, Exploring Alternative

भारत और रूस के बीच 2018 में 5.43 अरब डॉलर की लागत से पांच S-400 यूनिट्स का सौदा हुआ था। यह एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया की सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है, जो 400 किलोमीटर तक की दूरी तक कई हवाई खतरों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।

S-400 प्रणाली की तैनाती और चुनौतियां

भारत में पहली S-400 यूनिट दिसंबर 2021 में पहुंची थी, जिसे तुरंत वेस्टर्न सेक्टर क्षेत्र में तैनात कर दिया गया था। इसके बाद, अगले दो वर्षों में दूसरी और तीसरी यूनिट्स भी तैनात कर दी गईं थीं, जिससे भारत की पश्चिमी और पूर्वी सीमा पर रक्षा व्यवस्था मजबूत हुई। इन यूनिट्स की तैनाती के बाद पाकिस्तान और चीन से होने वाले हवाई खतरों के खिलाफ भारत के डिफेंस सिस्टम को मजबूती मिली है।

यह भी पढ़ें: Pantsir air defence missile-gun system: भारत आ रहा है यह खास एयर डिफेंस सिस्टम, भारत डायनामिक्स लिमिटेड और रूस की Rosoboronexport के बीच हुआ समझौता

हालांकि, पूरी तैनाती के रास्ते में कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। COVID-19 महामारी के कारण सप्लाई चेन में बाधा आई, जिससे शुरुआती डिलीवरी में देरी हुई। इसके अलावा, यूक्रेन संकट ने रूस की डिफेंस इंडस्ट्री को भी प्रभावित किया, जिससे डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने की क्षमता पर असर पड़ा है।

देरी से टेंशन में आई भारतीय वायु सेना!

इन अंतिम दो S-400 यूनिट्स की देरी ने भारतीय वायु सेना (IAF) में चिंताएं बढ़ा दी हैं। IAF और रक्षा मंत्रालय ने इस देरी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक समाधान तलाशने शुरू कर दिए हैं, जिनमें अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर विचार किया जा रहा है। इसके जरिए सीमाओं पर उच्च तैयारियों को बनाए रखा जा सकेगा, विशेषकर तब जब चीन के साथ संबंधों में 2020 के बाद से तनाव बना हुआ है।

वर्तमान में तैनात S-400 प्रणाली की तीन यूनिट्स ने भारत की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को पहले ही मजबूती प्रदान की है। इनके जरिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी और खतरे का सामना करने की क्षमता बढ़ गई है। हालांकि, पूरी प्रणाली की तैनाती रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर क्षेत्रीय सुरक्षा में हो रहे बदलाव और चीन की सैन्य प्रगति को देखते हुए।

भारत को चाहिए एस-400 का पूरा सेट

भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे तनाव ने एक मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क बनाए रखने की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। S-400 की देरी भारत के लिए एक चुनौती है, जो अपनी प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना चाहता है।

चीन के एडवांस मिसाइल सिस्टम और पाँचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स में निवेश के बीच भारत के लिए S-400 सिस्टम का पूरा सेट होना जरूरी है, ताकि भारत अपनी रक्षा में एक महत्वपूर्ण बढ़त बनाए रख सके।

S-400 सिस्टम की खरीद 2018 में भारत के रक्षा बलों को आधुनिक बनाने और उनकी कमजोरियों को कम करने के प्रयास का हिस्सा था। लेकिन 2026 तक इस सिस्टम की डिलीवरी में संभावित विस्तार ने भारत की रक्षा रणनीति को एक नाजुक मोड़ पर ला कर खड़ा किया है।

इस देरी के बीच, भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वह सीमाओं को सुरक्षित बनाए रखने के लिए वैकल्पिक एयर डिफेंस सॉल्यूशंस की खरीद करें, ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा सेंध का मजबूती से सामना कर सके। भारत इस चुनौती के बावजूद अपने राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

Akashteer: भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को नई ताकत देगी आकाशतीर टेक्नोलॉजी, सेना को अब तक मिले 107 सिस्टम

Akashteer- Boosting India's Air Defense System with Advanced Technology, 107 Units Delivered to Army

Akashteer: देश की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में भारतीय सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। “आकाशतीर परियोजना” (Akashteer) के तहत वायु रक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। सेना के “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” और “इयर ऑफ टेक एब्जॉर्प्शन” का हिस्सा यह परियोजना भारत को एक सशक्त और सक्षम वायु रक्षा नेटवर्क प्रदान करने की दिशा में अग्रसर है, जो आधुनिक हवाई खतरों से निपटने में न केवल सक्षम है, बल्कि प्रतिक्रिया में भी त्वरित है।

Akashteer- Boosting India's Air Defense System with Advanced Technology, 107 Units Delivered to Army

हाल ही में, आकाशतीर का एक वास्तविक समय में मूल्यांकन किया गया, जिसमें भविष्य के युद्धों की संभावना को ध्यान में रखते हुए परीक्षण किए गए। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मूल्यांकन को देखा और परियोजना की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने इसे भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उछाल बताते हुए टीम की मेहनत की तारीफ की।

परियोजना की विशेषताएं और रणनीतिक लाभ

आकाशतीर परियोजना पूरी तरह से स्वचालित और एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली प्रस्तुत करती है। आइए जानते हैं इस परियोजना की कुछ मुख्य विशेषताओं के बारे में:

  1. संपूर्ण सेंसर फ्यूजन: आकाशतीर ने सभी वायु रक्षा सेंसरों का “नीचे से ऊपर तक” एकीकरण किया है, जिसमें थल सेना और वायु सेना के भूमि-आधारित सेंसर सम्मिलित हैं। यह न केवल एक सुसंगठित हवाई चित्र प्रदान करता है, बल्कि सेना की वायु रक्षा इकाइयों को सटीक स्थिति की जानकारी भी देता है।
  2. स्वचालित संचालन से तेज प्रतिक्रिया: वायु रक्षा में हर क्षण महत्वपूर्ण होता है। आकाशतीर की स्वचालन प्रणाली मैनुअल डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे त्वरित और कुशल प्रतिक्रिया संभव हो पाती है। उदाहरण के लिए, एक सुपरसोनिक विमान एक मिनट में 18 किलोमीटर तक उड़ सकता है—आकाशतीर सुनिश्चित करता है कि इस दौरान रक्षा की पूरी तत्परता बनी रहे।
  3. विकेन्द्रीकृत निर्णय लेने का अधिकार: आकाशतीर ने युद्धक विमान पर हमला करने का अधिकार विकेन्द्रीकृत किया है, जिससे अग्रिम पंक्ति पर तैनात इकाइयां त्वरित निर्णय ले सकती हैं। यह विशेषता उत्तर और पूर्वी कमांड में तैनात इकाइयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां आकाशतीर पहले ही तैनात किया जा चुका है।
  4. वास्तविक समय में वायु चित्रण: आकाशतीर विभिन्न स्रोतों जैसे 3D टैक्टिकल रडार, लो-लेवल लाइटवेट रडार, और आकाश हथियार प्रणाली से डेटा एकत्रित करता है। यह एक समग्र हवाई चित्रण प्रदान करता है, जो रणनीतिक योजनाओं और त्वरित प्रतिक्रिया में सहायक होता है।
  5. मजबूत संचार और स्केलेबिलिटी: यह प्रणाली अत्यधिक परिस्थितियों में भी संचार बनाए रखने के लिए डिजाइन की गई है। साथ ही, इसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को अपग्रेड करने की क्षमता भी है, जिससे यह भविष्य के तकनीकी बदलावों के लिए भी तैयार रहती है।
  6. लचीली तैनाती: आकाशतीर को विशेष रूप से विभिन्न सैन्य संरचनाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह प्रणाली देश की कई सीमाओं पर सुरक्षा को मजबूत बनाती है।

प्रणाली की तैनाती और भविष्य की तैयारियां

आकाशतीर की तैनाती चरणबद्ध तरीके से हो रही है। कुल 455 प्रणालियों में से 107 का वितरण हो चुका है, और मार्च 2025 तक 105 और प्रणालियां प्रदान कर दी जाएंगी। शेष प्रणालियों का वितरण मार्च 2027 तक पूरा हो जाएगा।

आकाशतीर परियोजना के माध्यम से भारतीय सेना वायु रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह उपलब्धि भारत की रक्षा ताकत को मजबूत करने के साथ-साथ हमारी सेना के प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है कि वे आधुनिक खतरों के सामने पूरी तरह से सजग और सक्षम हैं।

Defense Manufacturing: राजस्थान में रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता पर सेमिनार का आयोजन, सप्त शक्ति कमांड ने निभाई अहम भूमिका

Defense Manufacturing Self-Reliance- Seminar on Opportunities in Rajasthan Organized by 7th Shakti Command and FICCI-1

Defense Manufacturing: सप्त शक्ति कमांड जयपुर के ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (जीएसटीटी) द्वारा “रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता: राजस्थान में अवसर” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से 11 नवंबर 2024 को जयपुर मिलिट्री स्टेशन में हुआ।

Defense Manufacturing Self-Reliance- Seminar on Opportunities in Rajasthan Organized by 7th Shakti Command and FICCI-1

इस अवसर पर राजस्थान के माननीय उद्योग और वाणिज्य, आईटी और संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, और फिक्की के सह-अध्यक्ष श्री अंकित मेहता प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने इस सेमिनार को संबोधित किया।

ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (जीएसटीटी) का उद्देश्य और योगदान

ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (जीएसटीटी) एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे सप्त शक्ति कमांड ने बौद्धिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रक्षा संबंधित चर्चाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, और रणनीतिक दृष्टिकोणों को विकसित करने के लिए स्थापित किया है। यह मंच पूर्व सैनिकों, विद्वानों, शिक्षाविदों, सरकार और उद्योग के प्रयासों को समन्वित करने का कार्य करता है, ताकि देश की सुरक्षा और विकास को बढ़ावा मिल सके।

Defense Manufacturing Self-Reliance- Seminar on Opportunities in Rajasthan Organized by 7th Shakti Command and FICCI-1

रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में राजस्थान की भूमिका

सेमिनार का मुख्य उद्देश्य था राजस्थान राज्य की रक्षा मैन्युफैक्चरिंग पारिस्थितिकी तंत्र में संभावनाओं की पहचान करना और इस दिशा में सभी हितधारकों को एकजुट करना। फिक्की के सहयोग से यह सेमिनार राजस्थान को रक्षा विनिर्माण, रखरखाव और मरम्मत केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में जीएसटीटी की स्थापना और इसे राज्य में रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए एक अहम कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रयास से राजस्थान में रक्षा क्षेत्र का विकास होगा और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। साथ ही, उन्होंने राज्य में रक्षा हब स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्थान में रक्षा क्षेत्र के विकास की अपार संभावनाएं

सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने अपने संबोधन में राजस्थान की सामरिक और भौगोलिक स्थिति की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “राजस्थान के पास पश्चिमी सीमा, अच्छी सड़क, रेल और हवाई संपर्क तथा पर्याप्त भूसंपदा जैसी विशेषताएँ हैं, जो इसे रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उपयुक्त बनाती हैं।” साथ ही, उन्होंने राज्य में एमएसएमई की भूमिका को और अधिक मजबूत करने और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया।

Defense Manufacturing Self-Reliance- Seminar on Opportunities in Rajasthan Organized by 7th Shakti Command and FICCI-1

मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप सेमिनार

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने यह भी कहा कि यह सेमिनार मुख्यमंत्री के “राइजिंग राजस्थान” दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत राज्य को 2029 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योगों और एमएसएमई की भागीदारी

इस सेमिनार में 29 से अधिक उद्योगों और एमएसएमई ने भाग लिया और रक्षा क्षेत्र में विभिन्न क्षमताओं और पहलों को प्रदर्शित करते हुए 23 स्टॉल लगाए गए। इससे यह साबित होता है कि राजस्थान रक्षा मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है, और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

“रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता: राजस्थान में अवसर” सेमिनार ने राज्य के रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक नई दिशा दिखाई है। इस आयोजन ने न केवल राज्य के विकास में रक्षा क्षेत्र की भूमिका को स्पष्ट किया, बल्कि राजस्थान को रक्षा हब बनाने के लिए आवश्यक कदमों को भी उजागर किया।

1971 India-pakistan War: 1971 भारत-पाक युद्ध के ऐतिहासिक समझौते के गवाह वीर विंग कमांडर महा बिर ओझा का निधन, भारतीय सेना की जीत के थे साक्षी

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

1971 India-Pakistan War: भारत के गौरवमयी सैन्य इतिहास में एक और धरोहर सदा के लिए शांत हो गई है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर योद्धा और पाकिस्तान के आत्मसमर्पण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के गवाह, विंग कमांडर महा बिर ओझा का 11 नवंबर 2024 को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

वह उस ऐतिहासिक दिन के प्रत्यक्षदर्शी थे जब पाकिस्तान ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, और यह उनके जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण था। अपने योगदान और वीरता के लिए देश ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया।

उनका अंतिम संस्कार छत्तीसगढ़ के रायपुर में HQ छत्तीसगढ़ और उड़ीसा सब-एरिया द्वारा आयोजित एक भावुक कार्यक्रम में किया गया, जहां उनके योगदान और वीरता को याद करते हुए सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भारतीय सेना ने इस अवसर पर शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा, “हम एक नायक को अंतिम विदाई दे रहे हैं, और हम उनके उत्साह और देश के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाएंगे।”

विंग कमांडर ओझा का निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा भारतीय सेना और जनमानस में सदा जीवित रहेगी। उनके अद्वितीय साहस और समर्पण ने न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि भारत के हर नागरिक के दिल में अपनी जगह बनाई है।

विंग कमांडर महा बिर ओझा, भारतीय वायु सेना के एक वीर और प्रेरणास्त्रोत अधिकारी थे, जिनका जीवन देश के प्रति समर्पण और वीरता की मिसाल था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी भूमिका अद्वितीय थी, और वह इस युद्ध के एक महत्वपूर्ण क्षण के गवाह बने, जब पाकिस्तान ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

1971 India-Pakistan War- Heroic Wing Commander Maha Bir Ojha, Witness to Historic Surrender Agreement, Passes Away

भारत-पाक युद्ध 1971 और Instrument of Surrender पर हस्ताक्षर

विंग कमांडर ओझा को युद्ध के दौरान पाकिस्तान द्वारा आत्मसमर्पण दस्तावेज़ (Instrument of Surrender) पर हस्ताक्षर करते हुए देखा गया। यह दस्तावेज़ 16 दिसंबर 1971 को ढाका में हस्ताक्षरित हुआ था, जो भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी द्वारा पाकिस्तान को हराने के बाद बंगाल की मुक्ति का प्रतीक बना। उस ऐतिहासिक दिन की गवाहता ने महा बिर ओझा को एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया, क्योंकि उन्होंने युद्ध के अंतिम पल देखे और भारतीय सेना की जीत के साक्षी बने।

LCA Tejas MK1: तेजस फाइटर जेट को इंजन सप्लाई में हो रही देरी को देखते हुए HAL चलाएगा ‘जुगाड़’ से काम, बनाया ये खास प्लान

HAL Tejas Mk1A Engine Delivery: HAL receives fourth GE-F404-IN20 engine, moves closer to IAF handover
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LCA Tejas MK1: भारत के स्वदेशी हल्के फाइटर एयरक्राफट एलसीए तेजस को अमेरिकी कंपनी जीई की तरफ से इंजन सप्लाई में हो रही देरी को देखते हुए इसे बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बड़ा फैसला किया है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अपने तेजस Mk1A फाइटर एयरक्राफ्ट के उत्पादन में GE F-404 इंजन की आपूर्ति में और देरी को देखते हुए खास इमरजेंसी प्लान बनाया है। पहले इस इंजन की डिलीवरी अप्रैल 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अब इसकी आपूर्ति में और देरी के कारण HAL को एक आपातकालीन योजना लागू करनी पड़ी है, जिसके तहत तेजस Mk1A के शुरुआती प्रोडक्शन मॉडल के लिए Category B F-404 इंजन का उपयोग किया जाएगा।

LCA Tejas Mk1A Project- HAL Adopts Contingency Plan Amid Engine Delays to Ensure Timely Production
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तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें एडवांस एवियोनिक्स और रडार सिस्टम शामिल हैं, जो इसकी फ्लोट क्षमता को और बढ़ाते हैं। हालांकि, इन इंजन की आपूर्ति में हो रही देरी से IAF के भीतर इसकी ऑपरेशनल रेडीनेस को लेकर चिंता बढ़ गई है।

हालांकि, प्रोडक्शन को बनाए रखने के लिए HAL ने Category B इंजन का सिलेक्शन किया है, जो प्री डिलीवरी फ्लाइट टेस्ट और गुणवत्ता जांच के लिए काफी हैं। यह इंजन परीक्षणों के दौरान विमान को उड़ान योग्य बनाए रखेंगे, जब तक कि GE F-404 इंजन नहीं मिल जाते।

HAL के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमारा उद्देश्य उत्पादन या रेडीनेस में कोई कमी नहीं होने देना है। Category B इंजन का उपयोग हमें आवश्यक उड़ान परीक्षण करने की अनुमति देता है और हम अपने उत्पादन लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं। जैसे ही GE इंजन उपलब्ध होंगे, हम उन्हें विमान में पूरी तरह से समाहित कर लेंगे।”

इंजन की आपूर्ति में देरी को आपूर्ति श्रृंखला में हो रही अड़चनों के साथ जोड़ा जा रहा है। हालांकि, HAL का यह रणनीतिक निर्णय इसके उत्पादन शेड्यूल को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि तेजस Mk1A IAF को समय पर सौंपा जा सके।

एक बार GE F-404 इंजन उपलब्ध हो जाने के बाद, HAL IAF के साथ मिलकर 2-3 प्री-डिलीवरी फलाइट टेस्ट करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमान सभी प्रदर्शन मानकों को पूरा करता है।

एचएएल के इस कदम तेजस Mk1A के रोलआउट में हो रहे वर्तमान बाधाओं को हल करने के लिए एक व्यावहारिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, ताकि इस विमान की समय पर डिलीवरी हो सके। यह परियोजना भारत की वायु सेना को स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के साथ आधुनिक बनाने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Indian Army: लद्दाख की कड़ी सर्दी में भारतीय सेना की चुनौती; LAC पर हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

Indian Army: Facing Tough Winter in Ladakh, Fully Prepared to Tackle Challenges Along LAC

Indian Army: लद्दाख की ऊँचाई पर स्थित, जो दुनिया के सबसे कठिन सैन्य तैनाती क्षेत्रों में से एक है, भारतीय सेना एक और चुनौतीपूर्ण सर्दी का सामना करने के लिए तैयार हो रही है। यह क्षेत्र समुद्रतल से 17,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, और चीन के साथ गश्ती समझौते के बावजूद यहाँ स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

Indian Army: Facing Tough Winter in Ladakh, Fully Prepared to Tackle Challenges Along LAC

हाल ही में, भारतीय सेना के लेह स्थित चौदहवीं कोर द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, सैनिकों को 1,200 किलोग्राम वजनी एक उन्नत वायु रक्षा तोप को ऊँची चोटी तक ले जाते हुए देखा गया। यह वीडियो भारतीय सेना की तैयारियों को दर्शाता है, जो किसी भी आकस्मिक स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है।

यह भारतीय सेना की लद्दाख में पाँचवीं सर्दी तैनाती है, जो LAC की सुरक्षा में उसके रणनीतिक ध्यान को और मजबूत करती है।

यह क्षेत्र कठिन और खतरनाक भौगोलिक स्थितियों से भरा हुआ है, और यहाँ की सर्दी -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकती है। ऐसे में सैनिकों को न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

भारतीय सेना ने अपने सैनिकों को अत्यधिक ऊँचाई वाले युद्ध के लिए विशेष उपकरण दिए हैं, जिसमें इंसुलेटेड जैकेट, जूते और स्लीपिंग बैग शामिल हैं। इसके अलावा, सेना ने बर्फ पर चलने वाले वाहन जैसे स्नोमोबाइल्स, स्नो ट्रैक्टर और मोबाइल शेल्टर भी तैनात किए हैं ताकि सैनिक इन कठोर परिस्थितियों में सुरक्षित रहें।

इन उपकरणों के अलावा, सैनिकों को ऊँचाई पर युद्ध की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें उन्नत युद्धकला, पहाड़ी क्षेत्रों में त्वरित गति से मूवमेंट और -40 डिग्री सेल्सियस जैसे तापमान में जीवित रहने की ट्रेनिंग शामिल होती है।

आधुनिक हथियार और तकनीक भी भारतीय सेना की रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। हाल की फुटेज में सैनिकों को एंटी-एयरक्राफ्ट गन के साथ दिखाया गया है, जो भारतीय सेना की हवाई हमलों, खासकर ड्रोन हमलों के खिलाफ तत्परता को दर्शाता है।

इसके साथ ही, सेना ड्रोन, थर्मल इमेजिंग सिस्टम और सैटेलाइट इमेजरी जैसी निगरानी उपकरणों का उपयोग करती है ताकि LAC पर वास्तविक समय में खुफिया जानकारी हासिल की जा सके।

भले ही यह क्षेत्र कठिन हो, और यहाँ की सर्दी अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो, भारतीय सेना की उपस्थिति लद्दाख में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

लद्दाख के बर्फ से ढके पहाड़ और चट्टानी चूने न केवल पारंपरिक युद्ध के लिए चुनौतीपूर्ण हैं, बल्कि यह चीन के साथ सीमा पर महत्वपूर्ण स्थानों को नियंत्रित करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, पूर्वी लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में सेनाओं के डिसएंगेजमेंट (वापसी) की प्रक्रिया में प्रगति हुई है, फिर भी कुछ क्षेत्र संवेदनशील बने हुए हैं, जहाँ सैनिकों की तैनाती अभी भी महत्वपूर्ण है।

Army Help Line 155306: वेटरन और सैनिकों के लिए भारतीय सेना ने शुरू की नई इमरजेंसी हेल्पलाइन सुविधा; इस्तेमाल करने से पहले पढ़ लें ये शर्तें

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use
Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use

Army Help Line 155306: भारतीय सेना ने अपने जवानों और वेटरन (पूर्व सैनिकों) के लिए एक नई और महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। यह कदम उन सैनिकों और वेटरन के लिए राहत का कारण बनेगा जो किसी आपात स्थिति में सहायता के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। यह हेल्पलाइन नंबर, 155306, एक “न्यूमेनिक सर्विस” की तरह काम करेगा, जो पूरी तरह से इमरजेंसी के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use
(File Photo)

क्या है यह हेल्पलाइन?

यह हेल्पलाइन सेवा किसी भी समय और किसी भी जगह से उपयोग की जा सकती है। सेना की यह हेल्पलाइन सेवा 155306- अब 24/7 सक्रिय होगी और इसमें कॉलर की पहचान के लिए कॉल रिकॉर्डिंग सुविधा भी होगी। कॉल करने पर, कॉलर से उसका नाम, स्थान और जरूरत की जानकारी ली जाएगी, ताकि सही सहायता भेजी जा सके। यह सेवा सिर्फ सैन्य कर्मियों और वेटरन के लिए है, जो किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में फंसे हुए हैं, चाहे वह शारीरिक हमला हो, प्राकृतिक आपदा हो या अन्य कोई आपातकालीन स्थिति हो।

साथ ही, इस हेल्पलाइन को ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों से जोड़ा जाएगा जैसे कि स्थानीय पुलिस स्टेशन, सीएमपी यूनिट, और अन्य सरकारी विभागों। इस सुविधा के माध्यम से कॉलर को उनके पास के सैनिकों और पुलिस से जोड़ा जाएगा, जो तुरंत स्थिति की गंभीरता का आकलन करेंगे और मौके पर पहुंचने के लिए तैयार होंगे।

Army Help Line 1536: Indian Army Launches New Emergency Helpline for Veterans and Soldiers – Important Terms to Know Before Use

कैसे काम करेगा हेल्पलाइन नंबर?

जब कोई सैनिक या वेटरन इस नंबर पर कॉल करेगा, तो उस कॉल का जवाब मिलिट्री पुलिस द्वारा दिया जाएगा। इसके बाद, संबंधित यूनिट को सूचना भेजी जाएगी ताकि तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। खास बात यह है कि यह हेल्पलाइन हर इलाके में फैली हुई आर्मी यूनिट्स और सिविल नेटवर्क से जुड़ी होगी, जिससे कि सहायता देने में कोई देरी न हो।

क्या नहीं करना होगा?

यह हेल्पलाइन केवल इमरजेंसी मामलों के लिए है, इसलिए इसके माध्यम से व्यक्तिगत मामलों या छोटे विवादों की शिकायत नहीं की जा सकती। जैसे कि भूमि विवाद, पारिवारिक समस्याएं, या किसी सामान्य सूचना का आदान-प्रदान इस हेल्पलाइन का हिस्सा नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल सेना के जवानों और उनके परिवारों को मुसीबत के समय त्वरित सहायता प्रदान करना है।

कैसे पहुंचेगी मदद?

यदि किसी सैनिक या वेटरन को आपात स्थिति में मदद की आवश्यकता होती है, तो वह सीधे इस हेल्पलाइन पर कॉल करेगा। इसके बाद, संबंधित अधिकारी और यूनिट्स को सूचित किया जाएगा और वे तुरंत सक्रिय होकर संबंधित स्थान पर मदद भेजेंगे। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और ट्रैकिंग होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायता सही समय पर पहुंच रही है।

सैन्य और समाज का जुड़ाव बढ़ेगा

इस हेल्पलाइन सेवा से यह भी सुनिश्चित होगा कि हमारे सैनिकों और वेटरन के बीच एक मजबूत नेटवर्क बने, जो उन्हें हर संकट में एक दूसरे का सहारा देने के लिए तैयार रहे। यह पहल सेना के भीतर एक मजबूत समुदाय और विश्वास का निर्माण करेगी, जो देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के लिए तत्पर रहता है।

भारतीय सेना द्वारा शुरू की गई यह हेल्पलाइन सेवा वेटरन और सैनिकों के लिए एक अमूल्य सुविधा साबित होगी। इससे न सिर्फ सैन्य परिवारों को सुरक्षा का अहसास होगा, बल्कि उनके लिए एक मजबूत समर्थन प्रणाली भी बनेगी, जो कभी भी और कहीं भी उनकी मदद के लिए तैयार रहेगी। इस पहल से सेना और समाज के बीच का संबंध और मजबूत होगा, और सैनिकों के प्रति समाज का सम्मान और स्नेह और भी बढ़ेगा।

आपात स्थिति में मदद पाने के लिए यह हेल्पलाइन नंबर – 155306 – अब आपके मोबाइल में सेव करना जरूरी है।

OROP: वन रैंक वन पेंशन को लेकर अब जवानों के ‘मन’ की बात सुनेगी सरकार; भेजा बुलावा, लेकिन ये है शर्त

Commutation of Pension: How the 15-year restoration period is under scrutiny, veterans seek reduction to 12 years
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OROP: देश के जवानों की कुर्बानी और सेवा का मान रखते हुए, सरकार अब सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है। हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा एक पत्र जारी किया गया है जिसमें केवल गैर-अधिकारी (एनसीओ) और जवानों से बातचीत करने की मंशा जाहिर की गई है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश हैं कि इस संवाद प्रक्रिया में कोई अधिकारी या जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिसर) शामिल नहीं होंगे। इस पहल के पीछे सरकार का उद्देश्य जवानों की ज़मीनी समस्याओं और अनुभवों को सीधे सुनना है, जो वन रैंक वन पेंशन (OROP) से लाभान्वित हुए हैं।

OROP: Government to Hear Soldiers' Concerns Directly, but with Conditions

वन रैंक वन पेंशन: लाभान्वित जवानों से संवाद का प्रयास

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि उन जवानों को शामिल किया जाए जिन्हें वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना का सबसे अधिक लाभ मिला है। रक्षा मंत्रालय को चाहिए कि एक हवलदार, एक नायक और तीन सिपाहियों के नाम भेजे जाएं, जिनकी पहचान ऐसे लाभार्थियों के रूप में की गई हो जिन्हें OROP से आर्थिक राहत मिली हो। यह एक दुर्लभ अवसर है जब जवानों के अनुभवों को सरकारी नीति निर्माण के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

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ओआरओपी (OROP) योजना के लाभ और समस्याएँ

OROP योजना ने जवानों के लिए निश्चित रूप से फायदेमंद कदम उठाए हैं, लेकिन यह भी सच है कि कुछ जवानों और अधिकारियों को इससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। कई रैंक और ट्रेड के जवान, जिनमें सीनियर सिपाही, ऑनरेरी लेफ्टिनेंट और कैप्टन शामिल हैं, आज भी आर्थिक असमानताओं का सामना कर रहे हैं। इन मुद्दों पर पहले भी रक्षा मंत्री से कई बार संवाद हुए हैं, लेकिन अधिकतर समय जवानों को निराशा ही हाथ लगी है। सरकार द्वारा एक तरफ OROP के सबसे लाभान्वित लोगों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन जवानों के सवाल अब भी अनसुलझे हैं, जिन्हें OROP के तहत कम लाभ मिला या नुकसान हुआ।

OROP: Government to Hear Soldiers' Concerns Directly, but with Conditions

जवानों की मांग: सभी के लिए बराबरी का लाभ

जवानों के दिल में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार जवानों के फायदे और नुकसान को बराबरी से देख रही है। क्या यह संवाद सिर्फ कुछ लाभान्वित जवानों की आवाज़ सुनने तक सीमित रहेगा, या उन सभी की पीड़ा को भी समझा जाएगा जिनकी आर्थिक स्थिति अब भी बेहतर नहीं हुई है? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है जो जवानों की आकांक्षाओं और उनकी मेहनत को सीधे छूता है।

सरकार के कदम और जवानों की उम्मीदें

सरकार ने वन मैन ज्यूडिशल कमेटी का गठन तो किया, लेकिन उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में जवानों में यह उम्मीद है कि सरकार इस रिपोर्ट को सामने लाएगी और सिफारिशों को लागू करेगी ताकि सभी को बराबरी का हक मिले। ये जवान हर समय देश की सेवा में तत्पर रहते हैं और अब वे भी सरकार से समानता और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

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यह पहल एक अच्छा कदम है, लेकिन यह तब ही सफल होगी जब सभी जवानों की आवाज़ को बराबर सम्मान मिलेगा। क्योंकि OROP (वन रैंक वन पेंशन) के हालिया संशोधन के तहत बहुत से पूर्व सैनिकों ने निराशा जताई है, क्योंकि उनकी पेंशन में मामूली या बिल्कुल भी वृद्धि नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2024 से OROP का तीसरा संस्करण (OROP-3) लागू किया और रक्षा मंत्रालय ने 4 सितंबर 2024 को इसकी संशोधित पेंशन दरों के साथ एक अधिसूचना जारी की थी।

कई पूर्व सैनिक, विशेषकर जेसीओ रैंक के नीचे के जवानों की पेंशन में मामूली बढ़ोतरी के कारण असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, असम के ऑनरी कैप्टन लक्षी नाथ सैकिया ने बताया कि 33 साल की सेवा के बावजूद उनकी पेंशन में कोई वृद्धि नहीं हुई। इसी तरह, पूर्व सैनिक समित्तर सिंह ने बताया कि उनकी पेंशन केवल 1 रुपये बढ़ी और दो महीने का एरियर केवल 2 रुपये रहा, जिससे उनका परिवार अत्यधिक निराश हुआ।

OROP-Pension

 

नौसेना के रिटायर्ड जवान अखिल राय और वायुसेना से रिटायर्ड तोमर ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि ओआरओपी-3 संशोधन के दौरान MACP को ध्यान में नहीं रखा गया, जिससे एयर वेटरंस की पेंशन निचले स्तर पर संशोधित हुई। वहीं, वीर नारियों की फैमिली पेंशन में भी बढ़ोतरी न होने से परिवारजनों ने निराशा जताई है। त्रिपुरा की वीर नारी रंजना शर्मा के पुत्र ने इस पर सरकार से सवाल किए।

भूतपूर्व सैनिकों का मानना है कि OROP का यह नया संशोधन सरकार के पेंशन खर्च को कम करने की योजना का हिस्सा है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रकाश सिंह विर्क और अन्य सैनिकों का कहना है कि सरकार अग्निवीर योजना को लागू करके पेंशन खर्च बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि इस कदम से सेना की ऑपरेशनल तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।

पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी पेंशन और भर्ती के मसले पर अपने विचार व्यक्त किए हैं, जिससे यह मुद्दा और गहराई से सामने आया है।

Exercise GARUD SHAKTI 24: भारतीय सेना के विशेष बलों का दल इंडोनेशिया के लिए रवाना, ‘गरुड़ शक्ति’ संयुक्त अभ्यास में लेगा हिस्सा

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

Exercise GARUD SHAKTI 24: भारतीय सेना के विशेष बलों का एक दल, जिसमें 25 सैनिक शामिल हैं, इंडोनेशिया के जकार्ता के सिजांतुंग के लिए रवाना हो गया है। यहां भारतीय और इंडोनेशियाई सेनाओं के बीच 9वां संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘गरुड़ शक्ति 24’ (GARUD SHAKTI 24) आयोजित किया जा रहा है, जो 1 से 12 नवंबर 2024 तक चलेगा।

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

इस सैन्य अभ्यास में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के जवान कर रहे हैं, जबकि इंडोनेशियाई सेना की ओर से 40 सैनिकों का दल कोपासस (Kopassus इंडोनेशियाई विशेष बल) का हिस्सा बनेगा। दोनों देशों के विशेष बलों के बीच आपसी समझ, सहयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है।

सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

अभ्यास ‘गरुड़ शक्ति 24’ का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के विशेष बलों को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं से परिचित कराना और रणनीतिक रूप से उनकी क्षमताओं को और मजबूत करना है। इस अभ्यास के तहत विशेष सैन्य अभियानों की योजना और उनके क्रियान्वयन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक जंगल क्षेत्र में विशेष अभियानों, आतंकवादी शिविरों पर हमला करने, और विभिन्न सामरिक युद्धक कौशलों का अभ्यास करेंगे।

Indian Army Special Forces Head to Indonesia for Joint Exercise 'Garud Shakti 24

तकनीकी ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान

यह अभ्यास सिर्फ सैन्य रणनीतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हथियारों, उपकरणों, नवाचारों, रणनीतियों और प्रक्रियाओं पर जानकारी का आदान-प्रदान भी होगा। इसके अलावा, दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की जीवनशैली और सांस्कृतिक पहलुओं को भी समझने का प्रयास करेंगे, जिससे न सिर्फ सैन्य सहयोग बढ़ेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता भी गहरी होगी।

संयुक्त सुरक्षा लक्ष्यों की ओर एक कदम

इस संयुक्त सैन्य अभ्यास से दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की बेहतरीन कार्य प्रणालियों को समझने का अवसर मिलेगा। यह भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ साझा सुरक्षा उद्देश्यों की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों देशों के लिए यह मंच है जहां वे न केवल अपने सैन्य कौशल का विकास करेंगे, बल्कि आपसी विश्वास और सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भी सहायक साबित होंगे।