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Armed Forces Tribunals: सुप्रीम कोर्ट बोला- श्रीनगर, जम्मू, शिमला और धर्मशाला में बनें AFT की बेंच, तारीखों पर पेशी के लिए नहीं करना पड़े लंबा सफर

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📍नई दिल्ली | 6 Jan, 2025, 7:10 PM

Armed Forces Tribunals: आर्म्ड फोर्सेज से रिटायर कर्मियों और उनके परिवारों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों Armed Forces Tribunal (एएफटी) की अधिक रीजनल बेंच बनाने की बात कही है। न्यायालय ने सुझाव दिया कि सर्किट बेंचों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर न्याय उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि आर्म्ड फोर्स  के सदस्यों और उनके परिवारों को लंबी यात्रा और भारी खर्च से बचाया जा सके।

Armed Forces Tribunals: SC Suggests Benches in Srinagar, Jammu, Shimla, and Dharamshala

चंडीगढ़ में Armed Forces Tribunal की केवल एक बेंच

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने चंडीगढ़ के बारे में कहा कि यह क्षेत्र सशस्त्र बलों में योगदान के लिए जाना जाता है। यहां आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल की केवल एक बेंच होने के कारण, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के मामलों को निपटाने में दिक्कत होती है।

Armed Forces Tribunals: श्रीनगर, जम्मू, शिमला और धर्मशाला में बनाएं बेंच

बेंच ने सुझाव दिया कि सर्किट बेंचों को श्रीनगर, जम्मू, शिमला और धर्मशाला जैसे स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है, जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हिमाचल के मामले शिमला और धर्मशाला में सुने जा सकते हैं। जबकि जम्मू और श्रीनगर में भी सर्किट बेंच स्थापित की जा सकती हैं। इससे न केवल मुकदमेबाजी की लागत कम होगी, बल्कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “यदि रीजनल बेंच स्थापित की जाए और स्थानीय बार को इसमें शामिल किया जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और किफायती बनाया जा सकता है।”

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मद्रास बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि एएफटी में अभी भी कई पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा, “चंडीगढ़ में केवल एक बेंच है और एक सदस्य का तबादला हो चुका है, लेकिन उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने कई बार नियुक्तियों का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रगति न के बराबर है।”

भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि एएफटी के अध्यक्ष आंतरिक प्रशासनिक मुद्दों से अवगत हैं और चयन प्रक्रिया पूरे साल चलती रहती है। हालांकि, उन्होंने रिक्त पदों को समय पर भरने की प्राथमिकता पर जोर दिया।

एडवांस सिलेक्शन प्रोसेस पर विचार करे सरकार

बेंच ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एडवांस सिलेक्शन प्रोसेस पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “किसी सदस्य के पद छोड़ने की तारीख की पहले से जानकारी होती है। अगर समय पर नियुक्तियां हो जाएं तो न्याय प्रक्रिया में देरी से बचा जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने सर्किट बेंच के माध्यम से आर्म्ड फोर्स के सदस्यों को जस्टिस मिलने में आसानी होगी। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में शिमला और धर्मशाला में सर्किट बेंच स्थापित की जा सकती हैं। इस पहल से सैनिकों और पूर्व सैनिकों को चंडीगढ़ तक यात्रा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में रिक्तियों की स्थिति और चयन प्रक्रिया की जानकारी देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सशस्त्र बलों के न्याय से जुड़े मामलों को त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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