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Apache Helicopters: जल्द खत्म होगा इंतजार! भारतीय सेना को दिसंबर 2024 में मिलेगा पहला AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर बैच

Apache Helicopters: Indian Army to Receive First AH-64E Apache Batch by December 2024

Apache Helicopters: भारतीय सेना को दिसंबर 2024 में ‘टैंक किलर’ के नाम से मशहूर पहले तीन AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर (Apache Helicopters) मिलने वाले हैं। यह डिलीवरी पश्चिमी सेक्टर में भारतीय सेना की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करेगा। हालांकि, यह डिलीवरी छह महीने की देरी से हो रही है, जिसका कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई दिक्कतें हैं।

Apache Helicopters: Indian Army to Receive First AH-64E Apache Batch by December 2024

पहले इन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी फरवरी 2024 में होनी थी, लेकिन जरूरी कंपोनेंट्स की सप्लाई में देरी के चलते इसे टालना पड़ा। अब बोइंग ने पुष्टि की है कि नई समय-सीमा के तहत दिसंबर 2024 से डिलीवरी शुरू हो जाएगी। इसके बाद अन्य बैचों की सप्लाई भी तय समयसीमा के मुताबिक की जाएगी।

Apache Helicopters: रेगिस्तानी इलाकों में तैनाती की योजना

अपाचे हेलीकॉप्टरों को पाकिस्तान से सटी भारतीय सेना देश के पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात करेगी। इन इलाकों में बड़े और खुले भूभागों की वजह से ऑपरेशनल चुनौतियां रहती हैं, जिनका सामना अपाचे कर सकता है। यह हेलीकॉप्टर दुश्मन के खिलाफ तेज और सटीक कार्रवाई करने के साथ-साथ जमीनी बलों को एयर सपोर्ट देने में सक्षम है। पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान को जवाब देने के लिए अपाचे हेलीकॉप्टर बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अपाचे हेलीकॉप्टर ने अफगानिस्तान और खाड़ी युद्ध में अपनी ताकत पहले ही साबित की है। रेगिस्तानी और खुले इलाकों में यह हेलीकॉप्टर बेहद प्रभावी साबित होता है।

451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात होंगे अपाचे हेलीकॉप्टर, तैयारियां पूरी

भारतीय सेना के पहले अपाचे स्क्वाड्रन की तैनाती जोधपुर के पास नागतलाओ में स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में की जाएगी। यह स्क्वाड्रन इस साल 15 मार्च को पाकिस्तान की सीमा को ध्यान में रखते हुए स्थापित की गई थी। अपाचे हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए यह बेस पूरी तरह से तैयार है।

बेस पर ट्रेनिंग और तैयारियां पूरी

बेस पर बोइंग की तकनीकी टीम पहले ही ग्राउंड और मेंटेनेंस एयर स्टाफ को जरूरी ट्रेनिंग दे चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, जब यह स्क्वाड्रन बनाई गई थी, तब यह उम्मीद थी कि अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग जल्द ही हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू कर देगी। हालांकि, विभिन्न कारणों से डिलीवरी में देरी होती रही।

सेना में दूसरा अटैक हेलीकॉप्टर

देश में बने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड के बाद, अपाचे भारतीय सेना का दूसरा अटैक हेलीकॉप्टर होगा। इन हेलीकॉप्टरों को सेना की मारक क्षमता बढ़ाने और दुश्मन के खिलाफ तेजी से कार्रवाई के लिए तैनात किया जाएगा। भारतीय सेना 11 और अपाचे हेलीकॉप्टरों की मांग कर रही है। यह मांग सेना की क्षमताओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।

4500 करोड़ का सौदा और अमेरिकी ट्रेनिंग

2020 में रक्षा मंत्रालय ने लगभग 4100 करोड़ रुपये की लागत से छह अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की खरीद का ऑर्डर दिया था। इस समझौते के तहत बोइंग ने भारतीय वायुसेना के छह पायलटों और 24 तकनीशियनों को अमेरिका में ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया था।

स्क्वाड्रन के लिए क्यों है अपाचे खास?

451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन को अपाचे हेलीकॉप्टरों के जरिए भारतीय सेना की ताकत को रेगिस्तानी और सीमावर्ती इलाकों में मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी उन्नत तकनीक, सटीक हमले की क्षमता और दुश्मन की निगरानी के लिए जाने जाते हैं। इनकी तैनाती से भारतीय सेना को जमीनी बलों को हवाई समर्थन देने और दुश्मन के ठिकानों पर त्वरित और सटीक हमले करने में मदद मिलेगी।

डिलीवरी में देरी के बावजूद, स्क्वाड्रन में अपाचे के शामिल होने से भारतीय सेना की हवाई क्षमताओं में बड़ी बढ़ोतरी होगी। यह कदम देश की सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

वायुसेना और सेना के बीच तालमेल

भारतीय वायुसेना (IAF) पहले से ही 22 AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑपरेट कर रही है, जिन्हें 2019 और 2020 के बीच शामिल किया गया था। भारतीय सेना ने 2020 में इन हेलीकॉप्टरों के लिए छह अपाचे का सीधा कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह पहली बार है जब सेना की एविएशन विंग में अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल किए जा रहे हैं। इनसे सेना और वायुसेना के बीच ऑपरेशनल तालमेल और बेहतर होगा, जिससे युद्ध की तैयारियों को और मजबूती मिलेगी।

आपूर्ति में देरी और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

हालांकि अपाचे की डिलीवरी में देरी की मुख्य वजह ग्लोबल सप्लाई चेन में देरी रह रही है, जो कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुई। वहीं, इन हालात ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों के तहत रक्षा उत्पादन को स्थानीय स्तर पर बढ़ाने की जरूरतों को भी जोर दिया है।

बोइंग और टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (TBAL) के बीच हैदराबाद में अपाचे हेलीकॉप्टरों के फ्यूज़लेज निर्माण को लेकर सहयोग एक सकारात्मक पहल है। इससे भारत में रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में विदेशी निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी।

अपाचे की विशेषताएं और भूमिका

AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक हथियार प्रणाली और उन्नत एवियोनिक्स से लैस हैं। ये हेलीकॉप्टर न केवल दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले कर सकते हैं, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती से भारतीय सेना की पश्चिमी सीमा पर रक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रेगिस्तानी और अर्ध-शुष्क इलाकों में ये प्लेटफॉर्म जमीनी बलों को न केवल हवाई समर्थन देंगे, बल्कि दुश्मन के खिलाफ सटीक हमलों और टोही अभियानों को अंजाम देने में भी मदद करेंगे।

अपाचे हेलीकॉप्टर की विशेषताएं

अपाचे हेलीकॉप्टर को दुनिया के सबसे घातक अटैक हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है।

  1. इंजन और पावर:
    • इसमें जनरल इलेक्ट्रिक के 2 T700-GE-701 टर्बोशाफ्ट इंजन लगे हैं।
    • यह 1409 किलोवॉट की पावर पैदा करते हैं।
    • अधिकतम रफ्तार 293 किलोमीटर प्रति घंटा है।
  2. वजन और क्षमताएं:
    • बिना पेलोड के इसका वजन 5165 किलोग्राम है।
    • यह 10,433 किलोग्राम तक वजन ले जा सकता है।
    • हेलीकॉप्टर की लंबाई 58.2 फीट और ऊंचाई 12.8 फीट है।
  3. अत्याधुनिक हथियार:
    • इसमें 114 हेलफायर और स्टिंगर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।
    • इसमें हाइड्रा रॉकेट और 30 एमएम की चेन गन भी है, जिसमें 1200 राउंड्स होते हैं।
    • दुश्मन के इलाकों को बर्बाद करने के लिए एक हेलीकॉप्टर से ड्रोन भी कंट्रोल किए जा सकते हैं।
  4. नाइटविजन और सेंसर:
    • हेलीकॉप्टर में नोज माउंटेड सेंसर सूट है, जो नाइटविजन की सुविधा प्रदान करता है।
    • यह हेलीकॉप्टर रात के समय भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

बता दें, कि पहले बैच की डिलीवरी के साथ, भारतीय सेना को एडवांस हवाई युद्ध उपकरण मिलेंगे, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। यह देरी भले ही चुनौतीपूर्ण रही हो, लेकिन इससे भारत को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ने का सबक भी मिला है।

SC Slams Centre and Army: सेना और केंद्र पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट? शहीद की विधवा की पेंशन पर सरकार की अपील को बताया ‘अनुचित’

SC Slams Centre and Army: Calls Appeal Against Soldier's Widow's Pension 'Unjust'

SC Slams Centre and Army: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेना को कड़ी फटकार लगाई है। मामला एक शहीद जवान की विधवा को लेकर था, जिनकी पेंशन पर सेना और सरकार ने कोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने इसे “अनुचित और कठोर” करार देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अपील करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि देश के लिए अपनी जान देने वाले जवानों और उनके परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता भी है।

SC Slams Centre and Army: Calls Appeal Against Soldier's Widow's Pension 'Unjust'

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नाइक इंदरजीत सिंह का है, जो 2013 में जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के दौरान एक आतंकवाद विरोधी गश्ती में शामिल थे। कड़ी ठंड और दुर्गम परिस्थितियों में गश्त करते हुए उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। उनके कमांडिंग ऑफिसर ने इसे “युद्ध हताहत” (Battle Casualty) के रूप में वर्गीकृत किया, लेकिन उनकी पत्नी को केवल स्पेशल फैमिली पेंशन दी गई, जिसमें कम फायदे मिलते हैं।

इंदरजीत सिंह की पत्नी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) का रुख किया। 2019 में, न्यायाधिकरण ने सेना को आदेश दिया कि उनकी पत्नी को लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन के साथ-साथ बकाया राशि और मुआवजा दिया जाए। इसके बाद सेना और केंद्र सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले में सरकार की अपील पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “वह इस देश के सैनिक थे और आपके लिए काम कर रहे थे। आप इस तरह के मामले में अपील कैसे कर सकते हैं? यह बहुत कठोर है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अपील करना विधवाओं और उनके परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक पीड़ा का कारण बनता है। न्यायालय ने आगे कहा कि यह मामला उन परिस्थितियों का था, जहां सैनिक ने कठिन मौसम और दुर्गम इलाकों में अपनी ड्यूटी निभाई। ऐसे में उनकी विधवा को लाभ से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।

सरकार की दलील और कोर्ट का जवाब

सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने तर्क दिया कि “युद्ध हताहत” और “शारीरिक हताहत” (Physical Casualty) में अंतर है। उन्होंने कहा कि सभी मामलों में लिबरलाइज्ड पेंशन देना उन सैनिकों के योगदान को कमजोर कर सकता है, जो सीधे युद्ध या दुश्मन की कार्रवाई में मारे गए हैं।

हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अलग है क्योंकि सैनिक ऑपरेशनल ड्यूटी पर थे और कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी जान गंवाई। अदालत ने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि उनकी पत्नी इस पेंशन की हकदार नहीं है। यह बेहद अनुचित है।”

3,000 लंबित अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि रक्षा मंत्रालय द्वारा ऐसी 3,000 अपीलें विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ये सभी मामले मृत्यु और विकलांगता लाभ से संबंधित हैं, जिन्हें विभिन्न न्यायाधिकरणों ने मंजूरी दी थी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी अपीलें केवल विधवाओं और उनके परिवारों पर बोझ बढ़ाती हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह ऐसे मामलों में नियम तय करेगा और सरकार व सेना पर अनावश्यक अपीलों के लिए वास्तविक लागत (Actual Costs) वसूलेगा।

न्यायाधिकरण का आदेश

AFT ने 2019 में दिए गए अपने आदेश में सिंह की मृत्यु को “युद्ध हताहत” मानते हुए उनकी पत्नी को लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन देने का निर्देश दिया था। इसमें जनवरी 2013 से बकाया राशि और एकमुश्त अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) शामिल थी। इसके अलावा, आदेश में देरी होने पर ब्याज का प्रावधान भी रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल शहीद जवानों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान दर्शाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि ऐसे मामलों में न्याय हो। कोर्ट ने कहा कि सरकार और सेना को इन मामलों में संवेदनशीलता और निष्पक्षता दिखाने की जरूरत है। इस दिशा में विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करने का भरोसा देते हुए, शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। वहीं, यह मामला उन हजारों सैनिकों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपने हक के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

Teaser missile: इजरायल भारत में क्यों बनाना चाहता है यह घातक मिसाइल? साझेदारी के लिए ढूंढ रहा लोकल पार्टनर

Teaser Missile: Why Israel Wants to Manufacture This Lethal Weapon in India, Seeking Local Partners

Teaser missile: इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने हाल ही में एक अत्याधुनिक ‘टीजर’ मिसाइल को पेश किया है, जिसे गाइडेड हथियारों की दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह मिसाइल अपनी अनोखी गाइडेंस टेक्नोलॉजी के चलते चर्चा में है। आम गाइडेड मिसाइलों से अलग, ‘टीजर’ एक बाहरी ऑप्टिकल साइट पर बेस्ड है, न कि बिल्ट-इन होमिंग सेंसर पर। इस तकनीक ने इसे हल्की और सामरिक मिसाइलों की श्रेणी में खास मुकाम हासिल हुआ है। IAI ने इसे बनाने और बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए भारत जैसे देशों के साथ साझेदारी करने की इच्छा जताई है।

Teaser Missile: Why Israel Wants to Manufacture This Lethal Weapon in India, Seeking Local Partners

क्या है ‘टीजर’ मिसाइल की खासियत

टीजर मिसाइल को खासतौर पर इन्फैंट्री यूनिट्स और विशेष सैन्य अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन पांच पाउंड से भी कम है और इसे कंधे पर रखकर लॉन्च किया जा सकता है। इसकी यही खासियत ही इसे ग्राउंड फोर्सेस के लिए खास बनाती है।

टीजर में ऑटोमैटिक कमांड टू लाइन-ऑफ-साइट (ACLOS) गाइडेंस तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह ऑपरेटर द्वारा एक बाहरी उपकरण, जिसे ‘टीजर-साइट’ कहा जाता है, की मदद से कंट्रोल होती है। इस मिसाइल की अधिकतम मारक क्षमता 2.5 किलोमीटर (करीब 1.6 मील) है।

इसके गाइडेंस सिस्टम की एक और खासियत यह है कि इसे GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) पर निर्भर नहीं होना पड़ता। इसका मतलब यह है कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान इस मिसाइल पर GNSS जैमिंग और स्पूफिंग का कोई असर नहीं पड़ता। वहीं, टीजर की गति 200 मीटर प्रति सेकंड है, जो इसे हल्के ऑर्मर्ड व्हीकल्स, लाइट स्ट्रक्चर्स और एंटी पर्सनल टारगेट्स को मार गिराने में सक्षम बनाती है।

भारत को प्राथमिकता क्यों?

IAI ने टीजर मिसाइल के पहले डेवलपमेंट फेज को पूरा कर लिया है और अब उत्पादन बढ़ाने के लिए साझेदार ढूंढ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि उत्पादन की क्षमता को वैश्विक स्तर पर फैलाया जाए, ताकि स्थानीय मांग के साथ-साथ निर्यात को भी पूरा किया जा सके। भारत को IAI ने उत्पादन के लिए प्राथमिकता दी है, क्योंकि यहां रक्षा क्षेत्र में बढ़ते अवसर और सहयोग के अनुकूल माहौल मौजूद है।

इस साझेदारी की जरूरत इसलिए भी महसूस हो रही है क्योंकि इजरायल के घरेलू उत्पादन केंद्र गाजा और लेबनान में चल रहे सैन्य अभियानों की वजह से दबाव में हैं। ऐसे में, भारत के साथ मिलकर उत्पादन शुरू करना IAI के लिए एक रणनीतिक और व्यावसायिक रूप से फायदेमंद कदम हो सकता है।

भारत-इजरायल रक्षा सहयोग की मजबूती

भारत और इजरायल का रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहा है। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक है, अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में IAI के साथ ‘टीजर’ मिसाइल का निर्माण करना भारत के लिए न केवल एक तकनीकी सफलता होगी, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को भी मजबूत करेगा।

भारत में सस्ती उत्पादन लागत और अनुकूल सरकारी नीतियां IAI के लिए इसे एक आदर्श साझेदार बनाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से न केवल इजरायल को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत को अत्याधुनिक रक्षा तकनीक हासिल करने और वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिलेगा।

नई साझेदारी से मजबूत होंगे संबंध

यह सहयोग भारत और इजरायल के बीच एक नई साझेदारी को जन्म देगा, जो दोनों देशों की ताकतों को जोड़ने का काम करेगा। जहां एक ओर भारतीय कंपनियों को नई तकनीकों को सीखने और समझने का मौका मिलेगा, वहीं इजरायल को अपने अत्याधुनिक हथियारों के उत्पादन में बढ़त मिलेगी।

भारत जैसे देश, जो अपनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है, उसके लिए यह मिसाइल तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। ‘टीजर’ का निर्माण न केवल भारतीय सेना को नई क्षमताओं से लैस करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक हथियार उद्योग में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भी स्थापित करेगा।

IAI और भारत के बीच इस संभावित सहयोग से दोनों देशों को सामरिक, आर्थिक और तकनीकी लाभ मिलेगा। यह एक ऐसी पहल है जो केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे स्थानीय उत्पादन, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी मजबूती मिलेगी। ‘टीजर’ मिसाइल का भारत में उत्पादन रक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत कर सकता है।

Indian Army Pension Tax Rebate: सर्विस/फैमिली पेंशनर्स के लिए खुशखबरी, SAPCS का आदेश; वेटरंस की पेंशन पर नहीं लगेगा इनकम टैक्स

Indian Army Pension Tax Rebate: Good news for service/family pensioners as SAPCS issues order; veterans' pensions to be exempt from income tax

Indian Army Pension Tax Rebate: डिफेंस ऑफिस कंप्लेक्शन सेक्शन ने हाल ही में देश के रक्षा पेंशनर्स और उनके परिवारों के लिए नई टैक्स गाइडलाइन जारी की है। इस एडवाइजरी में पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स के लिए इनकम टैक्स रेजाइम में नए विकल्पों को समझाया गया है। इसमें यह बताया गया है कि उनके लिए ओल्ड और न्यू टैक्स रेजाइम में से कौन सा बेहतर रहेगा और उनकी इनकम के आधार पर टैक्स कैसा लगाया जाएगा।

Indian Army Pension Tax Rebate: Good news for service/family pensioners as SAPCS issues order; veterans' pensions to be exempt from income tax

क्या है ओल्ड और न्यू टैक्स रेजाइम का फर्क?

2020 में बजट के दौरान सरकार ने न्यू टैक्स रेजाइम पेश किया था, जिसमें कई प्रकार की छूटें हटाकर सरल टैक्स स्लैब दिए गए थे। इसके तहत:

  • 7 लाख रुपये तक की आय टैक्स मुक्त है।
  • इसके बाद, 7-10 लाख रुपये तक 10%, 10-12 लाख रुपये तक 15%, 12-15 लाख रुपये तक 20% और 15 लाख रुपये से अधिक आय पर 30% टैक्स लगेगा।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन अब 50,000 रुपये से बढ़ाकर 55,000 रुपये कर दिया गया है।

ओल्ड टैक्स रेजाइम के तहत, आप एचआरए, एलटीए, होम लोन ब्याज, और धारा 80C, 80D आदि के तहत कई कटौतियां प्राप्त कर सकते थे। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये थी।

किन्हें क्या चुनना चाहिए?

यदि आपकी आय 7.75 लाख रुपये तक है, तो न्यू टैक्स रेजाइम फायदेमंद है क्योंकि इसमें किसी प्रकार का टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन, यदि आपकी इनकम ज्यादा है और आप अधिक कटौतियों का लाभ ले सकते हैं, तो ओल्ड टैक्स रेजाइम बेहतर हो सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग पेंशन पर निर्भर हैं और जिनकी कुल डिडक्शन 3.75 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें ओल्ड रेजाइम अपनाना चाहिए। इसके विपरीत, यदि आपकी डिडक्शन 1.5 लाख रुपये से कम है, तो न्यू रेजाइम पर जाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स के लिए विशेष प्रावधान

  1. फैमिली पेंशनर्स:
    • पहले तक फैमिली पेंशन पर 15,000 रुपये तक की छूट मिलती थी। अब यह बढ़कर 25,000 रुपये कर दी गई है।
    • यदि आप डिफेंस फैमिली पेंशन लेते हैं, तो इसे टैक्स स्लैब के तहत जोड़कर टैक्स भरा जाएगा।
  2. सेना कर्मियों का प्रोविडेंट फंड:
    • प्रोविडेंट फंड पर अर्जित ब्याज और निकासी पूरी तरह से टैक्स मुक्त है।
  3. लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी:
    • नॉन-गवर्नमेंट कर्मचारियों के लिए लीव इनकैशमेंट सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।

डिफेंस ऑफिस की सलाह

डिफेंस ऑफिस 19 नवंबर को जारी (C/7099/Policy/SAPCS/2024) एडवाइजरी में कहा है कि पेंशनर्स अपने फॉर्म 16 के आधार पर आईटीआर फाइल करने से पहले, यह सुनिश्चित करें कि उनका टैक्स स्लैब उनके आय स्रोत और डिडक्शन के अनुसार सही हो। यदि किसी पेंशनर को भ्रम है, तो वह इनकम टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग कर सकता है, जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।

क्या करें?

  1. यदि आपकी आय कम है और आप किसी बड़े टैक्स डिडक्शन का लाभ नहीं लेते हैं, तो न्यू टैक्स रेजाइम बेहतर विकल्प है।
  2. जिनकी कुल आय अधिक है और वे कई कटौतियों का लाभ लेते हैं, उन्हें ओल्ड टैक्स रेजाइम चुनना चाहिए।
  3. किसी भी टैक्स संबंधित सवाल के लिए, अपने क्षेत्र के डिफेंस ऑफिस या कर सलाहकार से संपर्क करें।

बता दें, कि टैक्स रेजाइम का चुनाव व्यक्ति की आय और उसके खर्चों पर निर्भर करता है। सरकार की नई गाइडलाइन पेंशनर्स को बेहतर विकल्प चुनने में मदद करेगी, जिससे उन्हें कम से कम टैक्स देना पड़े और बचत अधिक हो सके।

China in Pakistan: पाकिस्तान में CEPC प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा को लेकर चीन कर रहा बड़ी तैयारी, अपने नागरिकों पर हमले रोकने के लिए तैनात करेगा चीनी सैनिक

China in Pakistan: Beijing Plans Troop Deployment to Secure CPEC Projects and Protect Its Nationals
File Photo

China in Pakistan: चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉॉरिडोर (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे अपने इंजीनियरों और कर्मचारियों पर बढ़ते आतंकी हमलों के बीच चीन ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। चीन ने तीन प्राइवेट कंपनियों के साथ सिक्योरिटी और मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट्स पर दस्तखत किए हैं, जिनके तहत पाकिस्तानी भूमि पर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

China in Pakistan: Beijing Plans Troop Deployment to Secure CPEC Projects and Protect Its Nationals
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तीन सुरक्षा कंपनियां संभालेंगी जिम्मेदारी

चीन ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए Dewe Security Frontier Service Group, China Overseas Security Group, और Huaxin Zhongshan Security Service को तैनात किया है। इन कंपनियों का मुख्य कार्य पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा करना होगा।

हाल ही में 6 अक्टूबर को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के आत्मघाती हमले में दो चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी। ऐसे हमलों की बढ़ती घटनाओं ने चीन को अपनी सुरक्षा नीति पर फिर से विचार करने पर मजबूर किया है।

पाकिस्तान में चीनी सैनिकों की तैनाती की संभावना

खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अब अपने सैनिकों को भी पाकिस्तान में तैनात कर सकता है। इसका उद्देश्य CPEC परियोजनाओं में लगे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

चीन की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर पाकिस्तान ने भी अपने रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की है। अगस्त में, पाकिस्तान ने “ऑपरेशन अज़्म-ए-इस्तेखाम” के तहत 60 अरब रुपये और हाल ही में चीनी नागरिकों और CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त 90 अरब रुपये स्वीकृत किए।

संयुक्त सुरक्षा कंपनी का प्रस्ताव

चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक संयुक्त सुरक्षा कंपनी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य CPEC से जुड़े कामगारों और निवेश की सुरक्षा को बेहतर बनाना है। साथ ही, चीन ने पाकिस्तान से आतंकवाद-विरोधी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है।

इस प्रस्ताव से बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी उपस्थिति बढ़ने की संभावना है, जहां अलगाववादी गुट चीनी हितों को निशाना बना रहे हैं।

नए सुरक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी

CPEC के दूसरे चरण में, चीन ने सुरक्षा के लिए नई परियोजनाएं शामिल करने का सुझाव दिया है। इनमें मोबाइल सुरक्षा उपकरण और बुलेटप्रूफ वाहन जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य चीनी नागरिकों को सुरक्षित माहौल में काम करने की सुविधा प्रदान करना है।

संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास

चीन और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में “वारियर-VIII” नामक संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास चल रहा है, जो 11 दिसंबर तक जारी रहेगा। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा।

30,000 चीनी नागरिक CPEC परियोजनाओं पर कार्यरत

वर्तमान में पाकिस्तान में लगभग 30,000 चीनी नागरिक CPEC से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में काम कर रहे हैं। इनमें इंजीनियर, तकनीशियन, निर्माण कार्यकर्ता और अन्य पेशेवर शामिल हैं। खासकर बलूचिस्तान और ग्वादर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति ने सुरक्षा को एक बड़ी चुनौती बना दिया है।

चीन-पाकिस्तान साझेदारी का नया अध्याय

सुरक्षा चिंताओं को लेकर दोनों देशों के बीच एक आतंकवाद-विरोधी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता चीन को अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान में सैनिक तैनात करने का औपचारिक आधार प्रदान कर सकता है।

यह घटनाक्रम न केवल चीन और पाकिस्तान की साझेदारी को गहरा करेगा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा।

Indian Army Internship Program: भारतीय सेना ने लॉन्च किया इंटर्नशिप प्रोग्राम, नई उभरती टेक्नोलॉजी में युवाओं को देगी ट्रेनिंग

Indian Army Internship Program: Empowering Youth with Training in Emerging Technologies
Deputy Chief of Army Staff (DCOAS) Lt. Gen. Rakesh Kapoor

Indian Army Internship Program: भारतीय सेना ने अपने मॉर्डेनाइजेशन के प्रयासों को जारी रखते हुए युवाओं के लिए खास इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया है, जो तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को सेना के साथ उभरती हुई तकनीकों के क्षेत्र में काम करने का अवसर प्रदान करेगा। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को नई तकनीकों, जैसे साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), और सूचना युद्ध के क्षेत्र में ट्रेनिंग देना है। यह कदम सेना को भविष्य की युद्ध रणनीतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Indian Army Internship Program: Empowering Youth with Training in Emerging Technologies
Deputy Chief of Army Staff (DCOAS) Lt. Gen. Rakesh Kapoor

तकनीक को लेकर क्या सोचती है सेना

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में भारतीय सेना के उप प्रमुख (सूचना प्रणाली और संचार) लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि सेना अब केवल विशेषज्ञों की भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटर्नशिप कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 2024-25 को “Technology Absorption Year” घोषित किया गया है।

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उन्होंने कहा, “यूक्रेन युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि साइबर और डिजिटल युद्ध रणनीतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए सेना ने ऐसे विशेषज्ञों को जोड़ने का निर्णय लिया है, जो इन टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट हों।”

भर्ती प्रक्रिया और नई जरूरतें

इस कार्यक्रम के तहत सेना न केवल नियमित बलों में, बल्कि टेरिटोरियल आर्मी (TA) में भी साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की भर्ती कर रही है। अधिकारियों के लिए पोस्टग्रेजुएट डिग्री और जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCO) के लिए ग्रेजुएट डिग्री आवश्यक है।

भर्ती प्रक्रिया के अलावा, सेना ने अपने इंटर्नशिप कार्यक्रम को प्रधानमंत्री इंटर्नशिप मिशन (PM Internship Scheme 2024) के तहत भी शामिल किया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को सेना की तकनीकी आवश्यकताओं से जोड़ना और उन्हें रक्षा प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना है।

इंटर्नशिप का महत्व

यह कार्यक्रम युवा पेशेवरों और छात्रों को सेना की साइबर सुरक्षा टीमों, AI रिसर्च यूनिट्स, और इनोवेशंस सेल्स के साथ काम करने का मौका देगा। इसके अलावा, इंटर्न को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान और “सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज” जैसे क्षेत्रों में योगदान का अवसर मिलेगा।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं को सेना की आधुनिक तकनीकी परियोजनाओं से जोड़ना और उन्हें रोबोटिक्स, 5G, और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

अन्य देशों से प्रेरणा

पूरी दुनिया में कई देश इस तरह के प्रोग्राम चला रहे हैं। अमेरिका और इजराइल जैसे देश पहले ही साइबर सुरक्षा और डिजिटल युद्ध क्षेत्रों में विशेषज्ञों को जोड़ने के लिए प्रभावी कार्यक्रम चला रहे हैं। भारतीय सेना भी इन देशों से प्रेरणा लेते हुए नई प्रतिभाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

भारतीय सेना का यह कदम युवाओं को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाते हुए उन्हें सेना की भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। यह कार्यक्रम न केवल सेना को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने का अवसर भी प्रदान करेगा।

भारतीय सेना का यह इंटर्नशिप कार्यक्रम न केवल युवाओं के लिए एक सीखने का मंच बनेगा, बल्कि उन्हें देश की सुरक्षा में योगदान देने का गौरव भी प्रदान करेगा।

SIG-716i Rifles: अब भारत में ही राइफलें और गोला-बारूद बनाएगी यह अमेरिकी कंपनी, मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

SIG-716i Rifles: SIG Sauer to Manufacture Rifles and Ammunition in India, Partnership with Nibe Defence Boosts Make in India Initiative

SIG-716i Rifles: भारत में स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका की हथियार निर्माता कंपनी एसआईजी (SIG) ने भारतीय कंपनी नाइब डिफेंस के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत एसआईजी-716i राइफल और उससे संबंधित गोला-बारूद का निर्माण भारत में किया जाएगा। इस कदम से न केवल भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारतीय सेना की स्वदेशी हथियार निर्माण क्षमता भी मजबूत होगी।

SIG-716i Rifles: SIG Sauer to Manufacture Rifles and Ammunition in India, Partnership with Nibe Defence Boosts Make in India Initiative

एसआईजी-716i राइफल और भारतीय सेना की जरूरतें

भारतीय सेना वर्तमान में एसआईजी-716i राइफल का इस्तेमाल कर रही है, जिसकी संख्या 145,400 से अधिक है। 2019 में भारत सरकार ने SIG Sauer को 72,400 SIG-716 राइफलों का ऑर्डर दिया था, इसके बाद SIG Sauer को अतिरिक्त 73,000 राइफलों की आपूर्ति का आदेश भी दिया गया था। यह राइफल भारतीय सेना के विभिन्न सशस्त्र बलों में प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रही है।

इस समझौते के साथ, अब एसआईजी-716i राइफल और उससे संबंधित गोला-बारूद का निर्माण भारत में होगा। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय उद्योगों को भी एक बड़ी संजीवनी मिलेगी। इस पहल के साथ ही भारत का रक्षा क्षेत्र न केवल मजबूत होगा, बल्कि वह आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से बढ़ेगा।

मेक इन इंडिया’ के तहत एक ऐतिहासिक साझेदारी

SIG Sauer के अध्यक्ष रॉन कोहेन ने इस समझौते का एलान करते हुए कहा, “SIG Sauer की अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए हम दुनियाभर में महत्वपूर्ण साझेदारियों को मजबूत कर रहे हैं। भारत में Nibe Defence के साथ हमारा यह नया गठबंधन आने वाले दशकों में भारत के रक्षा क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को पूरा करने में मदद करेगा।” इस सहयोग के तहत SIG Sauer को भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और भारतीय रक्षा उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए नई अवसरों का लाभ मिलेगा।

रॉन कोहेन ने इस साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “हम भारत में Nibe Defence के साथ इस साझेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह साझेदारी हमारे लिए भारत के रक्षा उद्योग में योगदान करने का एक शानदार अवसर है।”

Nibe Defence और SIG Sauer के बीच यह साझेदारी भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। इसी महीने नवंबर 2024 में पुणे में आयोजित एक औपचारिक समारोह में Nibe Defence और SIG Sauer के अधिकारियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वहीं, इस समझौते से भारतीय सेना को कई फायदे होंगे। सबसे पहले, स्वदेशी उत्पादन होने से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे लागत में भी कमी आएगी। दूसरा, भारतीय जवानों को उच्च गुणवत्ता वाले और तेजी से उपलब्ध हथियार मिलेंगे, जो कि उनकी तैयारियों और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

SIG-716i Rifles: SIG Sauer to Manufacture Rifles and Ammunition in India, Partnership with Nibe Defence Boosts Make in India Initiative

बता दें कि Nibe Defence और Aerospace Limited एक प्रमुख डिफेंस इक्विपमेंट्स बनाने वाली कंपनी है, जिसका प्लांट चाकन, पुणे में स्थित है। यह कंपनी भारतीय सेना और अन्य रक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण इक्विपमेंट्स का निर्माण करती है। कंपनी का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश में रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ाना और भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

वहीं, SIG SAUER, Inc. एक प्रसिद्ध अमेरिकी कंपनी है जो हथियार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स, गोला-बारूद, एयरगन्स, सप्रेसर्स, रिमोट-कंट्रोल्ड वेपन्स स्टेशनों और प्रशिक्षण उपकरणों का निर्माण करती है। 250 साल पुरानी यह कंपनी यू.एस. मिलिट्री, वैश्विक रक्षा समुदाय, पुलिस, प्रतिस्पर्धी शूटरों, शिकारियों और जिम्मेदार नागरिकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा, SIG SAUER अपने SIG SAUER अकादमी में विशेष हथियारों का प्रशिक्षण और रणनीतिक प्रशिक्षण भी देती है।

SIG SAUER का मुख्यालय न्यूइंगटन, न्यू हैम्पशायर में है, और इसके पास अमेरिका में तीन राज्यों में सोलह स्थान और चार अन्य देशों में भी सुविधाएं हैं। इस कंपनी के पास 3,400 से अधिक कर्मचारी हैं। SIG SAUER को “ग्रेट प्लेस टू वर्क™” का प्रमाणपत्र भी मिला हुआ है।

India-Australia Pact: भारत और ऑस्ट्रेलिया की रॉयल एयर फोर्स के बीच हुआ अहम करार, दोनों देश एक-दूसरे के विमानों की करेंगे एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग

India-Australia Pact: Royal Australian Air Force and Indian Air Force Sign Key Agreement for Air-to-Air Refueling of Each Other’s Aircraft

India-Australia Pact: ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए, दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई रॉयल एयर फोर्स (RAAF) और भारतीय सशस्त्र बल अब एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग (वायु-से-वायु ईंधन भरने) का संचालन करेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

India-Australia Pact: Royal Australian Air Force and Indian Air Force Sign Key Agreement for Air-to-Air Refueling of Each Other’s Aircraft

21 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया के रक्षा उद्योग और क्षमता वितरण मंत्री, माननीय पैट कोंरॉय MP और भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत, RAAF का एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान, KC-30A मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट, भारतीय सशस्त्र बलों के विमानों को रिफ्यूलिंग करने में सक्षम होगा।

ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना के डिप्टी चीफ एयर वाइस मार्शल हार्वी रेनॉल्ड्स ने 19 नवंबर को नई दिल्ली में हुए ऑस्ट्रेलिया-भारत एयर स्टाफ वार्ता के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। एयर वाइस मार्शल रेनॉल्ड्स ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा, “भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए एक शीर्ष सुरक्षा साझेदार है, और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत हम ऐसे व्यावहारिक और ठोस सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में योगदान करता है।”

“एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता भारतीय सशस्त्र बलों के साथ हमारी इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाती है और हमें विभिन्न परिदृश्यों में अधिक प्रभावी रूप से सहयोग करने का अवसर देती है।”

इस समझौते को महत्वपूर्ण कदम मानते हुए, उन्होंने कहा, “यह समझौता हमारे भारत के साथ रिश्ते को और आगे बढ़ाएगा और हमारे कर्मचारियों को करीबी सहयोग, ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने, विश्वास और समझ बनाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।”

RAAF भारतीय नौसेना के P-8I नेप्च्यून निगरानी विमान के साथ भी प्रशिक्षण और सहयोग गतिविधियाँ आयोजित करता है। इस समझौते के तहत, KC-30A विमान P-8I को रिफ्यूल करेगा, जिससे भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पहुंच और स्थायित्व बढ़ेगा।

भारत और ऑस्ट्रेलिया का यह रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना के लिए नए अवसर खोलती है, जिससे वे लंबे समय तक और अधिक प्रभावी ढंग से अभियानों का संचालन कर सकते हैं।

इस समझौते के माध्यम से, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच इस प्रकार के समझौतों से न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती मिलती है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक साझी प्रतिबद्धता भी मजबूत होती है।

इस महत्वपूर्ण समझौते के साथ, भारत और ऑस्ट्रेलिया अब और अधिक समन्वय से काम करेंगे, और उनके सैन्य बल वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे।

Indian Army: फ्यूचर वॉरफेयर के लिए भारतीय सेना कर रही बड़ी तैयारी, पहली बार होगी डोमेन एक्सपर्ट्स की भर्ती, युवाओं के लिए खुलेंगे नए रास्ते

Indian Army Internship Program: Empowering Youth with Training in Emerging Technologies
Deputy Chief of Army Staff (DCOAS) Lt. Gen. Rakesh Kapoor

Indian Army: भारतीय सेना ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य के खतरों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत, सेना पहली बार नियमित कैडर में डोमेन विशेषज्ञों की भर्ती करने जा रही है। अब सेना में भाषा विशेषज्ञ और साइबर योद्धाओं की भर्ती की जाएगी, जिसमें चीनी भाषा विशेषज्ञों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद बनीं परिस्थितियों को देखते हुए की जा रही है।

Indian Army: Preparing for Future Warfare, First-Time Recruitment of Domain Experts, New Opportunities for Youth
Deputy Chief of Army Staff (DCOAS) Lt. Gen. Rakesh Kapoor

चीनी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता

चीनी भाषा के इंटरप्रिटर्स की भर्ती से भारत और चीन के बीच सीमा बैठक (बॉर्डर पर्सनल मीटिंग – BPM) के दौरान बेहतर कम्यूूनिकेशन स्थापित करने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद को मजबूत करना और विवादों का शांति से हल निकालना है। यह पहल भारत-चीन सीमा पर आपसी विश्वास बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

साइबर सुरक्षा में विशेषज्ञों की अहमियत

तेजी से बदलते खतरों के दौर में, साइबर सुरक्षा सेना के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी है। भारतीय सेना ने साइबर खतरों का पता लगाने, उन्हें रोकने और उनका जवाब देने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती शुरू की है।

एक सिक्योरिटी एनालिस्ट ने बताया, “यह पहल सेना की डिजिटल रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगी और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।” सेना ने अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता को अपनाते हुए खुद को उभरते खतरों से आगे बनाए रखने का संकल्प लिया है।

रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध से सीखे सबक

रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-गाजा संघर्ष ने आधुनिक युद्ध में साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखाया कि साइबर हमले किसी देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को कितनी बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। हैकिंग और गलत जानकारी फैलाने जैसे साइबर युद्ध के तरीकों ने इस संघर्ष को और भी मुश्किल बना दिया। वहीं, इजरायल-गाजा के बीच रहे युद्ध में साइबर हमलों ने मिलिट्री ऑपरेशंस में व्यवधान डालने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने की क्षमता को दर्शाया।

भारतीय सेना ने इन वैश्विक घटनाओं से सबक लेते हुए अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और विशेषज्ञों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

साइबर विशेषज्ञों की भर्ती: समय की मांग

सेना ने साइबर विशेषज्ञों को अपनी टेरिटोरियल आर्मी के माध्यम से भर्ती करने का अभियान शुरू किया है। सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि साइबर सुरक्षा अब केवल एक सहायक पहलू नहीं, बल्कि मॉर्डन डिफेंस स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है।

सेना की यह पहल दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल उभरते खतरों का सामना करने के लिए तैयार है, बल्कि संवाद और सहयोग के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। साइबर सुरक्षा में निवेश और विशेषज्ञों की भर्ती भारत की संप्रभुता की रक्षा करने और डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अलावा भारतीय सेना ने भविष्य के युद्धों और नई ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करने के लिए पहली बार नियमित कैडर में डोमेन विशेषज्ञों की भर्ती करने जा रही है। सेना ने दुुनिया में चल रहे दो संघर्षों और तकनीकी विकास पर नजर रखते हुए यह फैसला लिया है कि सूचना युद्ध, साइबर सुरक्षा, और भाषाई विशेषज्ञता जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत है। इन डोमेन विशेषज्ञों का चयन अधिकारी और एनसीओ (नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स) स्तर पर किया जाएगा।

डोमेन विशेषज्ञों में शामिल होंगे:

  • सूचना युद्ध विशेषज्ञ (Information Warfare Experts)
  • भाषाई विशेषज्ञ (Linguistic Experts)
  • साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ (Cybersecurity Experts)
  • आईटी विशेषज्ञ (IT Specialists)

भर्ती प्रक्रिया का प्रारूप

  1. योग्यता स्तर:
    • अधिकारियों के लिए पोस्टग्रेजुएट डिग्री की आवश्यकता होगी।
    • जवानों के लिए ग्रेजुएट स्तर की योग्यता अनिवार्य होगी।
  2. चयन प्रक्रिया:
    • उम्मीदवारों का चयन एसएसबी इंटरव्यू (Services Selection Board) के माध्यम से किया जाएगा।
  3. प्रारंभिक भर्ती:
    • पहले चरण में 17 नई एंट्रीज लाई जाएंगी, जिनमें से 5 स्थान रणनीतिक भाषाई विशेषज्ञों के लिए आरक्षित होंगे।

प्रारंभिक पायलट प्रोजेक्ट की सफलता

इस भर्ती प्रक्रिया का एक पायलट प्रोजेक्ट पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा, सेना पहले से ही टेरिटोरियल आर्मी (TA) के माध्यम से डोमेन विशेषज्ञों को शामिल कर रही है।

सेना ने पुष्टि की है कि टेरिटोरियल आर्मी के जरिए डोमेन विशेषज्ञों की भर्ती जारी रहेगी, जबकि नियमित कैडर में भर्ती के लिए अलग से विज्ञापन जारी किए जाएंगे।

तकनीकी और रणनीतिक उन्नति पर ध्यान

सेना के उप प्रमुख (DCOAS), लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि भविष्य के युद्ध तकनीकी कौशल और डोमेन विशेषज्ञता पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा, “सेना को न केवल लड़ाई के मैदान में बल्कि साइबर और सूचना युद्ध जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता विकसित करनी होगी।”

भाषाई विशेषज्ञों की भूमिका

इस भर्ती में भाषाई विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वे न केवल विभिन्न भाषाओं के अनुवाद और व्याख्या में मदद करेंगे, बल्कि दुश्मन की रणनीतियों को समझने और संचार बाधाओं को तोड़ने में भी सहायक होंगे।

भर्ती के लिए जल्द विज्ञापन

भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन जल्द ही जारी किए जाएंगे। यह पहल भारतीय सेना को एक आधुनिक और प्रौद्योगिकी-आधारित बल के रूप में मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वहीं, सेना का यह कदम भारतीय सेना को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगा। डोमेन विशेषज्ञों की भर्ती से सेना न केवल भविष्य के युद्धों के लिए तैयार होगी, बल्कि अपने ऑपरेशनल ढांचे को भी और मजबूत करेगी।

भर्ती प्रक्रिया की घोषणा के साथ, उम्मीद है कि योग्य और प्रेरित युवा इस अवसर का लाभ उठाकर देश की सेवा में योगदान देंगे। भारतीय सेना की यह पहल न केवल तकनीकी उन्नति को प्रोत्साहित करती है, बल्कि यह दिखाती है कि देश की सुरक्षा के लिए सेना हर मोर्चे पर तैयार है।

One Rank One Pension: OROP-3 में पेंशन विसंगतियों से नाराज हैं सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी, 401 JCOs ने रक्षा मंत्रालय और नेवी चीफ को भेजा कानूनी नोटिस

Commutation of Pension: How the 15-year restoration period is under scrutiny, veterans seek reduction to 12 years
File Photo

One Rank One Pension: भारत के सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त कर्मी, विशेषकर भारतीय नौसेना के ऑनरेरी कमीशंड ऑफिसर यानी मानद कमीशन प्राप्त अधिकारी (AGHCOs), इन दिनों अपनी मूल पेंशन में हो रही विसंगतियों को लेकर चिंतित हैं। यह मामला वन रैंक, वन पेंशन (OROP-3) योजना के तहत पेंशन में विसंगतियों और असमानता से जुड़ा है। जिसके चलते ये अधिकारी कानूनी लड़ाई लड़ने की योजना बना रहे हैं। ऐसे लगभग 401 अधिकारियों ने रक्षा  मंत्रालय और नेवी चीफ को कानूनी नोटिस भेजा है।

One Rank One Pension: Discontent Among Retired Military Personnel Over OROP-3 Pension Discrepancies, 401 JCOs Send Legal Notice to Defence Ministry and Navy Chief

क्या है वजह?

इस मामले में कानूनी नोटिस भेजने वाले नौसेना में 34 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए लेफ्टिनेंट (रिटायर्ड) जोगी राम और उनके जैसे लगभग 400 अन्य अधिकारियों का कहना है कि OROP-3 के तहत उनकी पेंशन का निर्धारण समान रैंक और सेवा अवधि के अन्य बलों के अधिकारियों से कम किया गया है।

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OROP-3 के अनुसार, जोगी राम और अन्य AGHCOs को 46,300 रुपये प्रति माह की मूल पेंशन मिलनी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता में उन्हें केवल 41,352 रुपये प्रति माह की पेंशन ही मिल रही है। उनका कहना है कि इस अंतर से न केवल उन्हें वित्तीय नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इसे संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन माना जा रहा है।

समान रैंक में असमानता

AGHCOs का कहना है कि उनकी सहयोगी सेवाओं, जैसे भारतीय वायुसेना के मानद फ्लाइंग ऑफिसर्स और फ्लाइट लेफ्टिनेंट्स, को समान सेवा अवधि के बावजूद पूरी पेंशन दी जा रही है। यह असमानता न केवल आर्थिक स्तर पर अन्यायपूर्ण है, बल्कि सशस्त्र बलों के भीतर समानता और सम्मान की भावना को भी ठेस पहुंचाती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के वकील सुरेश कुमार पालटा ने इस मामले में AGHCOs की ओर से रक्षा मंत्रालय, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW), और नौसेना प्रमुख को कानूनी नोटिस भेजा है।

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इस नोटिस में मांग की गई है कि 30 दिनों के भीतर पेंशन विसंगतियों को सुधारा जाए और AGHCOs को OROP-3 के तहत उनके हक का भुगतान किया जाए। याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे।

संविधान का उल्लंघन

नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह विसंगति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन करती है, जो समानता और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। यह मुद्दा न केवल पेंशन का है, बल्कि उन सैनिकों की गरिमा का भी है जिन्होंने देश की सेवा में अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित किया।

AGHCOs का कहना है कि उन्होंने देश के लिए अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाया है। वहीं अब सरकार को भी उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। जोगी राम का कहना है, “यह सिर्फ पैसे की बात नहीं है। यह हमारे बलिदान की मान्यता और हमारे साथ न्याय का मामला है।”

बता दें, OROP-3 योजना की विसंगतियां एक रिटायर्ड सैनिकों के एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। यह मामला केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सवाल सरकार और सैनिकों के बीच पनप रहे अविश्वास का भी है। इस मामे में नोटिस भेजने वाले पूर्व सैनिकों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान करके सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अपने दायित्व को पूरा करेंगे।

पूर्व सैनिकों का कहना है कि जिन सैनिकों ने देश के लिए अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय दिया है, वे सम्मान और न्याय के हकदार हैं। उनके मुद्दों को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान करना सरकार का कर्तव्य है।