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India-China Disengagement: देपसांग बल्ज से चीनी सेना की हुई वापसी! लेकिन “नो-डिप्लॉयमेंट जोन” में बनाईं दो पोस्ट, भारतीय सेना के लिए चुनौतियां बरकरार

India-China Disengagement: PLA Withdraws from Depsang Bulge, But New Posts in "No-Deployment Zone" Pose Challenges for Indian Army
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India-China Disengagement: पूर्वी लद्दाख के देपसांग प्लेंस से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की वापसी भारतीय सेना और देश के लिए एक राहत की खबर है। राकी नाला से PLA की वापसी 21 अक्टूबर, 2024 को हुए भारत-चीन पेट्रोलिंग समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने तनावग्रस्त इलाकों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुलाने की बात कही थी। वहीं, अब राकी नाला और बुर्त्सा नाला जैसे विवादित इलाकों में गश्त फिर से शुरू हो गई है।

India-China Disengagement: PLA Withdraws from Depsang Bulge, But New Posts in "No-Deployment Zone" Pose Challenges for Indian Army
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PLA ने बनाईं दो अस्थायी पोस्ट

वहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की पीएलए सेना ने उन क्षेत्रों से अपनी अस्थायी पोस्ट और ऑपरेशनल ट्रैक्स को हटा लिया है, जो पहले भारतीय पेट्रोलिंग रूट्स का हिस्सा थे। इस समझौते के तहत चीनी सेना ने सब सेक्टर नॉर्थ में श्योक नदी के पास स्थित राकी नाला घाटी और बॉटलनेक, वाई-जंक्शन 1 और वाई-जंक्शन 2 के पास से अपनी अस्थायी चौकियां और इंफ्रास्ट्रक्चर को हटा लिया है। वहीं, PLA ने दो अस्थायी पोस्ट को नई जगहों पर स्थानांतरित किया है, एक पोस्ट राकी नाला के स्रोत के पास वाई-जंक्शन से लगभग 7 मील उत्तर-उत्तर-पूर्व में और दूसरी पूर्व दिशा में ऊपरी बुर्त्सा नाला घाटी में बनाई है। इन नई चौकियों को ऑपरेशनल ट्रैक्स से जोड़ा गया है। हालांकि यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन इससे कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

क्या PLA ने LAC पार की?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि PLA ने पूरी तरह से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बाहर के इलाकों से अपनी मौजूदगी हटा ली है। इसके अलावा, “नो-डिप्लॉयमेंट ज़ोन” के भीतर उनके तंबुओं और पोस्ट की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि सैटेलाइट इमेजरी में इन पोस्ट्स की स्थिति स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई दे रही है।

गश्त तो बहाल हुई, लेकिन सीमित

हालांकि भारतीय सेना ने देपसांग क्षेत्र में पेट्रोलिंग को तो फिर से शुरू कर दिया है, लेकिन यह केवल कुछ निश्चित क्षेत्रों तक ही सीमित है। पेट्रोलिंग पॉइंट्स (PP) 10-13 जैसी जगहों पर भारतीय सैनिक 2020 के पहले रेगुलर पेट्रोलिंग पर जाते थे, वे अब चीनी सड़कों और पोस्ट्स के करीब हैं। इससे भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर चुनौतियां बढ़ गई हैं। सैन्य सूत्रों का मानना है कि चीनी सेना ने इन रूट्स पर भारतीय पेट्रोलिंग की पहुंच को सीमित करने के लिए रणनीतिक रूप से अपनी तैनाती को पुनर्गठित किया है। उनका कहना है कि कई पुराने पेट्रोलिंग पॉइंट्स अब चीनी सड़कों और पोस्ट्स के करीब हैं, जो 2010-2013 के बीच बनाए गए थे।

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image by @NatureDesai

राकी नाला और वाई-जंक्शन की स्थिति

राकी नाला घाटी में गश्त शुरू हो गई है, लेकिन बॉटलनेक और वाई-जंक्शन क्षेत्रों में स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि PLA ने इन स्थानों पर अपनी मौजूदगी को “नो डिप्लॉयमेंट ज़ोन” के भीतर स्थानांतरित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक बुर्त्सा नाला और राकी नाला के बीच चीनी सेना के नए ट्रैक्स और अस्थायी चौकियों ने भारतीय सेना के लिए चुनौती बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि यह चीन की रणनीति हो सकती है, ताकि इन इलाकों में उसकी मौजूदगी बरकरार रहे।

डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन की प्रक्रिया

डिसइंगेजमेंट के बाद, डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन को लेकर बातचीत जारी है। ये कदम सीमा पर तनाव कम करने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तभी संभव है जब दोनों पक्ष पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ समझौते का पालन करें। उनका कहना है कि चीनी सेना की नई चौकियां और ट्रैक्स भारतीय सेना के पेट्रोलिंग रूट्स में बाधा पैदा कर सकते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि यहां स्थिति कैसी रहती है।

हालांकि देपसांग प्लेंस से PLA की वापसी एक सकारात्मक पहल है, लेकिन भारतीय सेना और सरकार के सामने अभी भी कई चुनौतियां बरकरार हैं। पेट्रोलिंग रूट्स की बहाली, पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करना न केवल सीमा विवाद के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी जरूरी है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों को ठोस और पारदर्शी प्रयास करने होंगे। व्यापार और आपसी सहयोग के लिए यह जरूरी है कि दोनों देश संघर्ष के हालात से दूर रहें और शांतिपूर्वक समझौते का पालन करें।

New ECHS Advisory: अगर डिस्पेंसरी में नहीं है दवा तो क्या करें? रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी हुए नए दिशा-निर्देश

ECHS Scam: New Guidelines Issued to Prevent Frauds, Key for Beneficiaries
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New ECHS Advisory: रक्षा मंत्रालय के इंटीग्रेटेड हेडक्वॉर्टर (सेना) की तरफ से 12 नवंबर 2024 को जारी किए गए पत्र में, ईसीएचएस (एक्स-सर्विसमैन कंज्यूमर हेल्थकेयर स्कीम) से जुड़े सभी क्षेत्रीय केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नॉन-सीडीएल यानी Non–Common Drug List दवाओं के लिए एनए (नॉट अवेलेबल) पॉलिसी का सख्ती से पालन करें।

New ECHS Advisory: What to Do If Medicines Are Not Available at Dispensaries? New Guidelines Issued by the Army
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क्या है नई नीति?

ईसीएचएस से जुड़े सभी पीसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) और उनकी डिस्पेंसरी में यदि किसी दवा की उपलब्धता नहीं है, तो संबंधित अधिकारी (ओआईसी) को एक नई गाइडलाइन जारी की गई है। अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवा उपलब्ध नहीं है, तो वे या तो अधिकृत स्थानीय केमिस्ट (Authorized Local Chemist) से दवाइयाँ खरीद सकते हैं, बशर्ते वह नगरपालिका की सीमा के भीतर स्थित हो। यदि केमिस्ट बाहर स्थित है, तो यह प्रक्रिया 72 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी। यदि निर्धारित दवा फिर भी उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो ईसीएचएस लाभार्थी को पर्चे पर नॉट अवेलेबल जारी किया जाएगा। इसके बाद, लाभार्थी स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीद सकते हैं और बाद में सीओ ईसीएचएस के दिशा-निर्देशों के अनुसार दवा की खरीद के बिल का दावा कर सकते हैं।

CE-ECHS ने क्यों लिखा पत्र

ईसीएचएस के प्रमुख ने इस पत्र में स्पष्ट किया कि केवल वही दवाइयां, जो ईसीडीएल-2024 (ईसीएचएस ड्रग लिस्ट) के अंतर्गत आती हैं, उनके लिए नॉट अवेलेबल जारी किया जा सकता है। यदि किसी दवा की डिमांड ईसीडीएल-2024 के बाहर से की जाती है, तो उसका एनए पास नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि वह दवा अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण हो। ऐसी स्थिति में SEMO (सैन्य चिकित्सा अधिकारी) की मंजूरी के बाद ही दवा को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, और बाद में उस दवा को ईसीएचएस ड्रग लिस्ट में शामिल करने के लिए CO ECHS के पास भेजा जा सकता है।

 नॉट अवेलेबल (एनए) और इसके महत्व पर जोर

इस नई नीति के तहत, केवल सिस्टम द्वारा जनरेटेड एनए को ही मान्यता दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि रीजनल सेंटर्स को किसी भी तरह से अन्यथा एनए पास करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी दवा की मांग लगातार बढ़ रही है, तो इसे प्राथमिकता देते हुए आवश्यक मंजूरी के बाद ईसीएचएस सूची में शामिल किया जा सकता है।

New ECHS Advisory: What to Do If Medicines Are Not Available at Dispensaries? New Guidelines Issued by the Army

क्या है इसका उद्देश्य?

इस नीति का मुख्य उद्देश्य ईसीएचएस प्रणाली को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना है, ताकि लाभार्थियों को तुरंत और बिना किसी रुकावट के उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं के अनुसार दवाइयां मिल सकें। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वही दवाइयां दी जाएं, जो सही दिशा-निर्देशों और अप्रूवल के तहत हों, जिससे सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बनी रहे और समयबद्ध तरीके से सेवा प्रदान की जा सके।

वहीं, इस नए निर्देश से ईसीएचएस लाभार्थियों के लिए दवाइयों की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इसके साथ ही, सिस्टम जनरेटेड एनए की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि सभी लाभार्थियों को उनकी जरूरत की दवाइयां समय पर मिल सकें। यह नीति ईसीएचएस के तहत सेवा देने वाले सभी संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है और इस पर सख्त पालन किया जाएगा।

One Month of India-China Disengagement: क्या चीन LAC पर रहा है पेट्रोलिंग समझौते का पालन? नियमित गश्त को लेकर यह बात आई सामने

One Month of India-China Disengagement: Has China Adhered to Patrolling Agreement on LAC? Regular Patrols Proceeding Smoothly
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One Month of India-China Disengagement: भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट के एक महीने बाद, दोनों देशों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर स्थित डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। यह पेट्रोलिंग निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हो रही है, जो 21 अक्टूबर को समझौते के बाद फिर से शुरू हुई है।

One Month of India-China Disengagement: Has China Adhered to Patrolling Agreement on LAC? Regular Patrols Proceeding Smoothly
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सूत्रों के अनुसार, डिसएंगेजमेंट समझौता होने के बाद, दोनों देशों ने डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में साप्ताहिक पेट्रोलिंग की योजना बनाई थी। इस प्रोटोकॉल के तहत, दोनों देश हर सप्ताह एक-एक पेट्रोलिंग करेंगे, जिसके चलते दोनों देशों की तरफ से सप्ताह में दो पेट्रोलिंग की जा रही है।

पिछले महीने में भारतीय सैनिकों ने अब तक आठ पेट्रोलिंग पूरी की हैं, और यह सभी पेट्रोलिंग डिसएंगेजमेंट योजना के अनुसार सही तरीके से की गई हैं। भारतीय सैनिक उन सभी स्थानों पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं, जहां वे अप्रैल 2020 से पहले नियमित रूप से गश्त करते थे। डेपसांग में पांच पेट्रोलिंग पॉइंट्स (PPs) निर्धारित हैं, जबकि डेमचोक में दो पॉइंट्स पर पेट्रोलिंग की योजना बनाई गई है।

सूत्रों ने बताया, “प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं आई है। पेट्रोलिंग की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और यह निर्धारित योजना के अनुसार की जा रही है।”

इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के मौजूदा सत्र में LAC की स्थिति पर एक बयान देने की योजना बनाई है। इसमें डिसएंगेजमेंट और पेट्रोलिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी। उनके बयान से क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में और भी जानकारी मिलने की संभावना है।

डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट और पेट्रोलिंग की नियमित प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो LAC पर सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में अहम है। यह LAC पर 2020 में गालवान घाटी की झड़प के बाद से चल रही तनावपूर्ण स्थिति को शांत करने की ओर बढ़ाया गया कदम है।

हालांकि, वर्तमान समझौता सीमा विवाद को सुलझाने में एक अहम पड़ाव साबित हुआ है, लेकिन अभी भी सभी तनावपूर्ण बिंदुओं पर पूरी तरह से डि-एस्केलेशन नहीं हुआ है। आगामी महीनों में दोनों देशों के बीच इस प्रोटोकॉल का पालन जारी रहने की उम्मीद है, जो LAC पर हालात को स्थिर रखने के लिए विश्वास बहाली के कदम के तौर पर कार्य करेगा।

LAC पर चल रहे पेट्रोलिंग समझौते के बावजूद, भारतीय सेना क्षेत्र में अपनी तैनाती बनाए रखे हुए है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए भारतीय सैनिक पूरी तरह से तैयार रहें।

भारत और चीन के बीच LAC पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया जारी है और यह दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने के लिए एक अहम कदम साबित हो सकता है।

ARMY CHIEF: मिलिट पुणे में युवा सैन्य अधिकारियों से मिले सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, मॉर्डन वारफेयर की चुनौतियों पर साझा किए विचार

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

ARMY CHIEF GENERAL UPENDRA DWIVEDI: पुणे स्थित Military Institute of Technology (MILIT) मिलिट संस्थान के मेहरा ऑडिटोरियम में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का भाषण सेना के युवा कमांडरों और अगली पीढ़ी के सैन्य नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। रक्षा सेवा तकनीकी कर्मचारी पाठ्यक्रम (DSTSC) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सेना के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने उन्हें मॉर्डन वारफेयर के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आत्मविश्वास और जोश से सामना करने के लिए प्रेरित किया।

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

 

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने युद्ध के परिदृश्य में हो रहे तेजी से बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य तैयारियां केवल एक आवश्यकता नहीं हैं, बल्कि एक कला है। उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें रणनीति और सटीकता की आवश्यकता होती है। भारतीय संदर्भ में सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे बदलावों और सुधारों पर प्रकाश डाला। जनरल द्विवेदी ने अधिकारियों से कहा कि वे लचीलापन, अनुकूलता और दृढ़ संकल्प के साथ परिवर्तन को अपनाएं, जो कि सेना सुधारों का हिस्सा हैं।

जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना के राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान पर गर्व व्यक्त करते हुए सेना की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि सेना प्राकृतिक आपदाओं के समय मानवीय सहायता प्रदान करने में अग्रणी रही है। इसके अलावा, भारतीय सेना संकटग्रस्त इलाकों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी आगे रही है। जो दिखाता है कि भारतीय सेना केवल लड़ाई में ही नहीं, बल्कि मानवीय कार्यों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देती है।

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

जनरल द्विवेदी ने सैन्य-राजनयिक सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाहरी खतरों का मुकाबला करने के लिए एकता और समन्वय महत्वपूर्ण हैं। ऑपरेशनल रेडिनेस, रणनीतिक समन्वय और एकजुटता ही एक मजबूत सेना की नींव हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सैन्य युद्ध विधियों के उपकरणों और तकनीकों को नए दृष्टिकोण से देखें और फिर से कल्पना करें।

सैन्य प्रमुख ने मिलिट संस्थान की भूमिका की सराहना की, जो न केवल भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बल्कि मित्रवत विदेशी देशों (FFCs) के लिए भी नेताओं का निर्माण करता है। उन्होंने मिलिट को उत्कृष्टता का प्रतीक माना, जहां आने वाले कल के नेता दिमाग, चरित्र और उद्देश्य के साथ तैयार होते हैं, जिससे फैकल्टी और छात्रों दोनों को प्रेरणा मिलती है।

मिलिट के कमांडेंट रियर एडमिरल नेल्सन डी’सूजा, एनएम ने जनरल द्विवेदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके शब्दों ने स्टाफ और छात्र अधिकारियों में एक नया उत्साह और उद्देश्य की भावना जागृत की है, जो उन्हें महान ऊंचाइयों तक पहुंचने में मार्गदर्शन करेंगे। यह साहस और समर्पण के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

K9 Vajra Guns: भारतीय सेना को जल्द मिल सकती हैं 100 और K-9 वज्र तोपें, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के सामने प्रपोजल पेश करने की तैयारी

K9 Vajra Artillery Guns: K9 Vajra Guns, Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

K9 Vajra Guns: भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 100 और K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्ज़र तोपों की मांग का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के सामने रखा जाएगा। इस प्रस्ताव पर फैसला होते ही लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को इन तोपों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने का आदेश जारी किया जाएगा।

K9 Vajra Guns: Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

 

K9 Vajra Guns: भारत की सीमा सुरक्षा का मजबूत हथियार

K-9 वज्र तोपें 155 मिमी, 52-कैलिबर की ट्रैक सेल्फ-प्रोपेल्ड गन हैं। इन्हें पहले ही चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात किया जा चुका है। इन तोपों ने अत्यधिक गर्मी और ठंडे मौसम में अपनी उपयोगिता साबित की है।

गुजरात के “आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स” में L&T इन तोपों को बना रही है। इन्हें बनाने की टेक्नोलॉजी दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनी हनवा डिफेंस से ली गई है, लेकिन इसे भारत में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर कई कंपोनेंट्स के साथ बनाया गया है। K-9 वज्र, हनवा डिफेंस के बनाए K-9 थंडर सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर का एक कस्टमाइज्ड वैरिएंट है। एलएंडटी डिफेंस ने भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए K-9 थंडर को भारत के मुताबिक तैयार किया है। इस कस्टमाइजेशन में 18,000 से अधिक भारत में निर्मितत कंपोनेंट्स का उपयोग किया गया है।

वज्र तोपों की खासियत

  • एक K-9 वज्र तोप का वजन लगभग 50 टन है।
  • यह तोप 50 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक गोलाबारी कर सकती है।
  • आधुनिक तकनीक से लैस यह तोप भारतीय सेना की फायर पावर को कई गुना बढ़ा सकती है।

वहीं, भारतीय सेना भी K-9 वज्र की प्रदर्शन क्षमताओं से संतुष्ट है। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए, इसके नए बैच में विशेष विंटर क्लाइमेटाइजेशन किट्स लगाई जाएंगी, जो इन्हें लद्दाख के सर्दियों के कठोर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने में उपयोगी बनाएंगी।

2017 के बाद दूसरी बड़ी डील

L&T को 2017 में पहली बार 100 K-9 वज्र तोपों का ऑर्डर मिला था, जिसे 2021 में तय समय से पहले पूरा कर लिया गया। यह डील लगभग 4500 करोड़ ररुपये की थी। हालांकि, इस बार 100 तोपों की लागत इससे अधिक होने की संभावना है।

K9 Vajra Guns: Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

प्रस्ताव में देरी की वजह

सूत्रों के मुताबिक, सेना ने एक साल पहले ही इन तोपों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के कारण इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम

L&T ने K-9 वज्र तोपों में बड़ी संख्या में स्वदेशी घटकों को शामिल कर इसे “मेक इन इंडिया” का हिस्सा बनाया है। यह कदम न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत स्थान दिलाने में भी मदद करता है।

सेना की फायर पावर में बढ़ोतरी

K-9 वज्र तोपों का नया बैच सेना की ताकत को और बढ़ाएगा। इन तोपों की तैनाती से भारत की सीमा सुरक्षा और मजबूत होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव बना रहता है। वहीं, भारतीय सेना का यह कदम न केवल उसकी रणनीतिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि यह भारत के रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना होगा कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी इस प्रस्ताव को कब मंजूरी देती है और भारतीय सेना को कब ये नई तोपें मिलती हैं।

Border Tourism: जल्द ही पर्यटकों के लिए खुलेगा गलवान! टूरिज्म बढ़ाने के लिए सेना खोलेगी कई सीमा से सटे इलाके

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

Border Tourism: भारतीय सेना ने सीमा से इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। जल्द ही, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास के कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है। यह कदम न केवल देश की सीमाओं को लोगों के करीब लाने का प्रयास है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

Border Tourism: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत पहल

सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत यह पहल की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना में गलवान मेमोरियल को पर्यटकों के लिए खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। बता दें कि रेजांग ला वॉर मेमोरियल पहले से ही पर्यटकों के लिए खुला है। इसके अलावा, लद्दाख के त्रिशूल और रंगला जैसे स्थानों को भी पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। इन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर

भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने पिछले चार वर्षों में सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।

  • 8500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण: खासकर एलएसी के पास।
  • 400 स्थायी पुलों का निर्माण: इसमें सेला और शिंकुन ला सुरंगों जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।
  • भारत नेट कार्यक्रम के तहत हाई-स्पीड इंटरनेट: 1,500 गांवों तक इंटरनेट की सुविधा दी गई है, जिससे 7,000 से अधिक सीमावर्ती गांवों को जोड़ा गया है।

बुनियादी ढांचा में ये सुधार न केवल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाएंगे, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देंगे।

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

पर्यटकों की बढ़ती रुचि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में बताया कि पिछले चार वर्षों में लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे बेहतर बुनियादी ढांचा और सीमाई पर्यटन के प्रति बढ़ती दिलचस्पी मुख्य कारण हैं।

स्थानीय समुदायों को मदद

सीमाई इलाकों में केवल बुनियादी ढांचे का विकास ही नहीं हो रहा, बल्कि भारतीय सेना स्थानीय समुदायों की मदद में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • स्वास्थ्य सेवाएं और राहत कार्य: सेना ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सहायता और आपदा राहत सेवाएं प्रदान कर रही है।
  • जीवन स्तर सुधारने का प्रयास: सेना की यह पहल सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बना रही है।

मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोलने का यह निर्णय सीमावर्ती इलाकों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके जरिए इन इलाकों की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा भारतीय सेना और सरकार की यह पहल न केवल सीमा क्षेत्रों को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि देशवासियों को अपनी सीमाओं और वहां की जीवनशैली से जोड़ने में भी मदद करेगी। इस फैसले से न केवल इन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों का भी सशक्तिकरण होगा।

Women COs in Indian Army: भारतीय सेना में महिला कमांडिंग अफसर को लेकर चिंताएं, कोर कमांडर ने लिखा रिव्यू करें पॉलिसी, बढ़ रहे इगो प्रॉब्लम के मामले

Women COs in Indian Army: Concerns Raised, Corps Commander Calls for Policy Review Amid Growing Ego Issues

Women COs in Indian Army: भारतीय सेना में महिला कमांडिंग अधिकारियों (सीओ) की भूमिका को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। सेना की 17वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी ने सेना के ईस्टर्न आर्मी कमांडर सहित सेना के एमएस (मिलिट्री सेक्रेटरी) और एजी (Adjutant General)) को भेजे गए फीडबैक में कहा है कि महिला अधिकारियों को सेना की यूनिट कमांड करते हुए एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है। यह जरूरी है कि उनकी परफॉर्मेंशन का प्रैक्टिकल तरीके से मूल्यांकन किया जाए। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी ने महिला सीओ के प्रदर्शन और उनसे जुड़े मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए हैं। यह पत्र उन्होंने 17वीं कोर के कोर कमांडर के रूप में पूर्वी कमान के जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी को लिखा था।

Women COs in Indian Army: Concerns Raised, Corps Commander Calls for Policy Review Amid Growing Ego Issues

1 अक्टूबर 2024 को लिखा गए इस पत्र में लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने महिला अधिकारियों के प्रदर्शन के एक साल का विश्लेषण लिखा है। पत्र में उठाए गए मुद्दों ने सेना और रक्षा विशेषज्ञों के बीच महिला नेतृत्व को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। पत्र में महिला अधिकारियों के नेतृत्व में आने वाली चुनौतियों और कमियों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

1. आपसी संबंध और संवाद की कमी

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि महिला सीओ के नेतृत्व वाली यूनिटों में ऑफिसर मैनेजमेंट की समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने इसे महिला अधिकारियों की पर्सनल और प्रोफेशनल जरूरतों को समझने में कमी से जोड़ा। उनका कहना था कि महिला सीओ अक्सर विवादों को संवाद से हल करने की बजाय अधिकारवादी दृष्टिकोण अपनाती हैं।

2. बार-बार शिकायतें करना

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला सीओ छोटी-छोटी समस्याओं को सीनियर अधिकारियों तक ले जाती हैं, बजाय इसके कि वे उन्हें अपनी यूनिट में हल करें। इसे ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट की कमी के रूप में देखा गया।

3. केंद्रीकृत नेतृत्व शैली

महिला सीओ के नेतृत्व में निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधीनस्थ अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाता। पत्र में इसे “My Way or Highway” मानसिकता कहा गया, जो अधीनस्थ अधिकारियों में असंतोष का कारण बनती है।

4. अधिकार और एंपैथी का संतुलन

पत्र में कुछ घटनाओं का जिक्र है, जहां महिला सीओ ने व्यक्तिगत सुविधाओं को प्राथमिकता दी। उदाहरण के तौर पर, एक महिला सीओ ने यूनिट के सूबेदार मेजर से अपनी गाड़ी का दरवाजा खोलने को कहा। यह अपने अधिकारों के अनुचित इस्तेमाल का संकेत है।

5. एंपैथी की कमी

पत्र में कहा गया कि महिला सीओ संवेदनशीलता की कमी के कारण अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को समझने में असफल रहीं हैं।

6. नेतृत्व में अधिक सख्ती

महिला अधिकारी, पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान वातावरण में खुद को साबित करने के प्रयास में, अधिक सख्त नेतृत्व शैली अपनाती हैं, जो संतुलित नेतृत्व में बाधा डालती है।

7. छोटी उपलब्धियों का अधिक उत्सव

महिला अधिकारियों की छोटी-छोटी उपलब्धियों का ज्यादा जश्न मनाने की प्रवृत्ति ने गलत उम्मीदें पैदा की हैं, जिससे नेतृत्व की गतिशीलता प्रभावित होती है।

सुधारात्मक उपायों के सुझाव

पत्र में इन समस्याओं को हल करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं:

  • जेंडर-न्यूट्रल पोस्टिंग नीति: महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक समान नीति लागू की जाए।
  • बेहतर प्रशिक्षण: महिला अधिकारियों को नेतृत्व और निर्णय लेने के कौशल में बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए।
  • प्रतीकात्मकता कम करना: महिला अधिकारियों को केवल सशक्तिकरण दिखाने के लिए प्रतीकात्मक भूमिकाओं में नहीं रखा जाए।
  • स्पाउस कोऑर्डिनेटेड पोस्टिंग पर पुनर्विचार: इस नीति को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए।

चर्चा और विवाद

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी का यह पत्र सेना के भीतर और रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह पत्र तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महिला अधिकारियों को कमांड भूमिकाओं में नियुक्त किया गया है।

हालांकि, सेना के कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह पत्र सिर्फ लेफ्टिनेंट जनरल पुरी के व्यक्तिगत अवलोकन हो सकते हैं, क्योंकि इसका आधार 17वीं कोर की केवल 7 महिला अधिकारियों पर आधारित है। सेना में वर्तमान में लगभग 100 महिला अधिकारी कमांडिंग भूमिकाओं में हैं।

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को नेतृत्व भूमिकाएं देना लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में है और इसमें सुधार की गुंजाइश है। वहीं, महिला अधिकारियों के सामने आईं चुनौतियां न केवल उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत करने की जरूरत को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि सेना को अपनी नीतियों और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा। यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सेना को अधिक मजबूत और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Fire Fury Corps: हाई एल्टीट्यूड इलाकों सियाचिन और DBO की बर्फीली ऊंचाइयों में अब मिलेगी ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी; फायरफ्यूरी कॉर्प्स के सिग्नलर्स ने रचा इतिहास

Fire Fury Corps: Optical Fiber Connectivity Now Reached Siachen & DBO's Snowy Heights; A Historic Feat by Fire Fury Corps Signallers

Fire Fury Corps: भारतीय सेना के फायरफ्यूरी कॉर्प्स के सिग्नलर्स ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सियाचिन और दौलत बेग ऑल्डी (DBO) की बर्फीली ऊँचाइयों पर ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी स्थापित की है। 18,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित हाई एल्टीट्यूड इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल्स को बिछाने का यह मिशन न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि यह इन क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरा किया गया।

Fire Fury Corps: Optical Fiber Connectivity Now Reached Siachen & DBO's Snowy Heights; A Historic Feat by Fire Fury Corps Signallers

बर्फीले और क्रेवास बने बाधा

सुपर हाई एल्टीट्यूड सियाचिन और DBO जैसे क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियां बेहद कठोर होती हैं। यहाँ की बर्फीली हवाएँ, हड्डियाँ जमा देने वाली ठंड, और खतरनाक दरारों (क्रेवास) के बीच ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना एक मुश्किल काम था, क्योंकि इसके लिए ना केवल तकनीकी कौशल की आवश्यकता थी, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होने की भी जरूरत थी।

लेकिन भारतीय सेना के सिग्नलर्स ने यह साबित किया कि अगर दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता पार किया जा सकता है। उन्होंने इन बर्फीली ऊँचाइयों पर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को बिछाने के लिए उन खतरनाक दरारों को पार किया, जहाँ कभी-कभी बर्फ के नीचे विशाल दरारें छुपी होती हैं।

प्रयास और समर्पण की मिसाल

यह कार्य तकनीकी तौर पर बेहद मुश्किल था। लेकिन अपना तकनीकी कौशल दिखाते हुए जवानों ने अपने प्र.ास औऱ  समर्पण की नई मिसाल पेश की। सियाचिन जैसे कठिन क्षेत्र में, जहां हर कदम पर जान जोखिम में डालनी पड़ती है, वहां सिग्नलर्स ने एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बिना किसी डर के, कठोर से कठोर परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी को निभाया और ऑप्टिकल फाइबर को बिछाया।

सिग्नलर्स ने बर्फीले तूफानों, तेज हवाओं और जमा देने वाली सर्दी के बावजूद यह सुनिश्चित किया कि रिमोट इलाकों को जोड़ा जाए और उनसे संपर्क की एक सशक्त और निरंतर कड़ी स्थापित की जाए।

कनेक्टिविटी के फायदे

ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के बिछाए जाने से भारतीय सेना को कई रणनीतिक लाभ मिलेंगे। यह नेटवर्क न केवल सामरिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे भारतीय सेना के अभियानों को और भी सशक्त बनाया जाएगा। इन क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सैनिकों को अब तुरंत जानकारी मिलेगी, जिससे उनकी रेस्पॉन्स क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, इस कनेक्टिविटी का उपयोग सैनिकों को आपातकालीन स्थितियों में सहायता प्रदान करने के लिए भी किया जाएगा।

सियाचिन और DBO जैसे मुश्किल इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना एक अद्वितीय मिशन था, जिसे अंजाम देने में सिग्नलर्स ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि मनुष्य की इच्छाशक्ति की कोई सीमा नहीं होती। यह न केवल एक तकनीकी सफलता थी, बल्कि यह भारतीय सेना के हर सैनिक की मेहनत और समर्पण का प्रतीक भी बन गया।

इस सफलता से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय सेना ने एक बार फिर साबित किया है कि वह किसी भी कठिनाई को पार करने की क्षमता रखती है। सियाचिन और DBO जैसी खतरनाक जगहों पर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की सफलता भारतीय सेना की तकनीकी और शारीरिक मजबूती का प्रतीक है। यह न केवल भारतीय सेना के लिए गर्व की बात है, बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है।

Russia Sukhoi Su-57: क्या अल्जीरिया गुपचुप रूस से खरीद रहा SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट? बनेगा पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान खरीदने वाला पहला अफ्रीकी देश!

Su-57 fighter jet India
Su-57 Stealth Fighter

Russia Sukhoi Su-57: 13 नवंबर को, रूस की रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Rosoboronexport के प्रमुख, अलेक्जेंडर मिखीव ने रूस के पत्रकारों के सामने एक महत्वपूर्ण एलान किया। उन्होंने बताया कि रूस के Su-57 Felon फाइटर जेट के लिए एक विदेशी ऑपरेटर के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस खबर के बाद से इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिरकार यह पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट किस देश को बेचा जाएगा।

Russia Sukhoi Su-57: Is Algeria secretly buying Russian stealth fighter, becoming Africa’s first fifth-gen buyer?

वहीं, खरीदारों में अल्जीरिया का नाम सबसे ज्यादा उभरकर सामने आ रहा है। अफ्रीका, एशिया और यूरोप से आई रिपोर्ट्स में यह संभावना जताई जा रही है कि अल्जीरिया Su-57 Felon फाइटर जेट का पहला विदेशी ग्राहक हो सकता है। हालांकि इस बात की कोई स्पष्ट पुष्टि तो नहीं पाई है, लेकिन अंदाजा इस बात से भी लगाया जा रहा है कि हाल ही में अल्जीरिया ने अपनी सेना में शामिल पुराने रूस के MiG-29 विमानों को सूडानी वायुसेना को सौंपे जाने की बात कही थी।

X अकाउंट पर “Kad-Ghani” नामक एक यूजर ने दावा किया कि अल्जीरिया Su-57 का पहला विदेशी ऑपरेटर बन रहा है। “अल्जीरिया फिर से इतिहास बना रहा है! पहले MiG-25 का ग्राहक, अब Su-57 का पहला ग्राहक,” उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा। हालांकि, इस पोस्ट में कोई स्पष्ट स्रोत नहीं दिया गया है, जिससे इस जानकारी की सत्यता पर सवाल उठते हैं।

अल्जीरियाई वायुसेना के लिए Su-57 के भविष्य में उपयोग की संभावना विभिन्न सूत्रों से सामने आई है, लेकिन कोई भी इस दावे की पुष्टि नहीं कर पाया है। डच वेबसाइट Scramble ने भी लिखा है, हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, फिर भी “अफवाहें” अल्जीरिया को पहला निर्यात ग्राहक बताते हुए सामने आ रही हैं।

क्या हैं अल्जीरिया के Russia Sukhoi Su-57 खरीदने के कयास?

अल्जीरिया को लेकर कयासों की शुरुआत 2020 में हुई थी। उस समय, अल्जीरियाई सेना के प्रमुख सईद चेंगरीहा ने अचानक रूस के डिमिट्री शुगायव, जो कि सैन्य-तकनीकी सहयोग के निदेशक हैं, से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में Su-57 की खरीद को लेकर चर्चा की गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, चेंगरीहा को Su-57 का एक मॉडल भी दिया गया था। उस वक्त अफवाहें सामने आई थीं कि अल्जीरिया को 14 Su-57 विमान लगभग 2 बिलियन डॉलर में बेचे जाएंगे, लेकिन इनकी पुष्टि नहीं हो सकी।

कुछ समय पहले तक, विशेषज्ञों का मानना था कि चीन शायद यह विमान खरीदने वाला देश हो सकता है, लेकिन अब यह संभावना काफी कम नजर आती है। चीन के पास पहले ही Chengdu J-20 जैसा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो लगभग Su-57 जैसा ही है।

रूस पर निर्भर है अल्जीरिया

अल्जीरिया के लिए Su-57 खरीदने की संभावना कई दृष्टिकोणों से सही नजर आती है। पहली तो यह कि अल्जीरिया और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने और मजबूत संबंध हैं। अल्जीरिया वायुसेना पहले से ही रूसी उपकरणों पर निर्भर है, जिसमें Su-30 और MiG-29 जैसे विमान शामिल हैं। इस कारण, अल्जीरिया के पास पहले से ही ऐसे विमान रखने का अनुभव है।

वहीं, आर्थिक दृष्टि से भी अल्जीरिया में इस विमान को खरीदने की क्षमता है। रूस से यह विमान खरीदने के लिए अल्जीरिया के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं, खासकर प्राकृतिक गैस और तेल निर्यात से होने वाली आय के कारण।

सूडान को MiG-29s कर रहा है दान

अरब मीडिया प्लेटफॉर्म ‘डिफेंस अरेबिक’ ने हाल ही में खबर दी थी कि अल्जीरियाई रक्षा मंत्रालय रूस के पुराने MiG-29 विमानों को जल्द ही सूडानी वायुसेना को सौंप सकता है। उस समय कहा गया था अल्जीरिया अपने हवाई बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए Su-57 जेट्स और 70 Su-30 लड़ाकू विमानों की खरीद कर सकता है।

खास बात यह है कि ये MiG-29s अल्जीरिया की वर्तमान युद्धक विमान क्षमता का अहम हिस्सा हैं। अल्जीरियाई वायुसेना कथित तौर पर आगे और अधिक आधुनिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है और इस दशक के अंत तक रूस से पांचवी पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना है।

1999 में, अल्जीरियाई रक्षा मंत्रालय ने 31 MiG-29 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अनुरोध किया था। यह डिलीवरी अगले वर्ष रूस और बेलारूस के साथ कॉन्ट्रैक्ट के तहत हुई थी। हालांकि, 2006 में MiG-29SMT विमानों की खरीद रद्द कर दी गई, जिसके बाद ये विमान रूस को वापस कर दिए गए।

अल्जीरियाई वायुसेना Su-30MKA लड़ाकू विमानों को प्राथमिकता देती है। अल्जीरिया का कहना है कि Su-30MKA वर्तमान में अल्जीरियाई वायुसेना के प्रमुख विमान हैं, MiG-29 से कहीं अधिक प्रभावी है। हालांकि 2020 के बाद से, अल्जीरिया ने अपने पुराने MiG-29 विमानों को सेवा से बाहर करना शुरू कर दिया था। इसके स्थान पर, देश ने 14 MiG-29M विमानों और अतिरिक्त 16 Su-30MKA विमानों की खरीद की। MiG-29M में एक पूरी तरह से नया एयरफ्रेम लगा है, जो किफायती होने के साथ ऑपरेशन में भी अधिक प्रभावी है।

वहीं, अगर अल्जीरिया Su-57 खरीदता है और सूडान MiG-29 प्राप्त करता है, तो क्षेत्रीय सैन्य और भू-राजनीतिक गतिशीलता में भारी बदलाव हो सकता है। सबसे पहले, अल्जीरिया की सैन्य ताकत में Su-57 के साथ उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मिलिट्री विशेषज्ञों का कहना है कि Su-57 खरीदने के बाद अल्जीरिया उत्तर अफ्रीका में एक प्रमुख सैन्य ताकत बन जाएगा। इससे पड़ोसी देशों जैसे मोरक्को और ट्यूनीशिया को भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी।

Russia Sukhoi Su-57: Is Algeria secretly buying Russian stealth fighter, becoming Africa’s first fifth-gen buyer?

उत्तरी अफ्रीका में बढ़ेगी हथियारों की होड़

अल्जीरिया का सुखोई Su-57 खरीदना न केवल उसकी वायुसेना को मजबूत करेगा, बल्कि यह उसे उत्तरी अफ्रीका में सैन्य शक्ति में बढ़त भी दिलाएगा, विशेष रूप से मोरक्को जैसे देशों के मुकाबले। मोरक्को ने हाल ही में अमेरिका और इजराइल के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को बढ़ाया है। ऐसे में, Su-57 अल्जीरिया को सैन्य रूप से एक बड़ा फायदा दे सकता है।

इसके अलावा, यह कदम अल्जीरिया की बाहरी रक्षा नीति को भी मजबूत करेगा। यह संकेत देता है कि अल्जीरिया अपने सैन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जिसके चलते अल्जीरिया के Su-57 खरीदने की संभावनाएं मजबूत नजर आ रही हैं। इसके साथ ही, अगर अल्जीरिया वास्तव में इस विमान को अपनी वायुसेना में शामिल करता है, तो यह अफ्रीका और मध्य-पूर्व में सैन्य शक्ति के संदर्भ में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

Indian Army Chief Nepal Visit: क्या नेपाली गोरखा भारतीय सेना में होंगे शामिल? जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों से की मुलाकात

Indian Army Chief Nepal Visit: Will Nepali Gorkhas Join as Agniveers in Indian Army? General Upendra Dwivedi Meets Gorkha Veterans in Nepal

Indian Army Chief Nepal Visit: भारत और नेपाल के बीच गहरे भाईचारे और मजबूत रक्षा सहयोग को और भी मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में नेपाल का पांच दिवसीय सफल दौरा किया। इस दौरे ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी, जिसमें सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों के साथ-साथ सुरक्षा संबंधों को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया।

Indian Army Chief Nepal Visit: Will Nepali Gorkhas Join as Agniveers in Indian Army? General Upendra Dwivedi Meets Gorkha Veterans in Nepal

Indian Army Chief Nepal Visit: गोरखा भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से मुलाकात

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पोखरा में भारतीय सेना के गोरखा पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से मिलकर उनका हाल-चाल लिया। इस दौरान, उन्होंने भारतीय सेना के प्रति उनके आभार को स्वीकार किया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना उनके कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगी। जनरल द्विवेदी ने ईसीएचएस (ECHS) नेटवर्क के विस्तार के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें नेपाल में नए पॉलीक्लिनिक खोले जाएंगे और अस्पतालों का पैनल भी बढ़ाया जाएगा।

नेपाल के सेना प्रमुख को भारत आने का निमंत्रण

दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। यह निमंत्रण दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को और बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया।

यह भी पढ़ें: Army chief General Upendra Dwivedi: भारत-नेपाल सैन्य संबंधों को और मजबूत करेगा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का नेपाल दौरा

नेपाल-भारत संबंधों की गहरी जड़ें

नेपाल के पूर्व सैनिकों ने भारतीय सेना की अडिग मदद और समर्थन के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और नेपाल के बीच दोस्ती और आपसी सम्मान की मजबूत नींव है, जो समय के साथ और भी गहरी होती जा रही है। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के प्रमुख के साथ एक भावुक पुनर्मिलन भी हुआ, जब उन्होंने अपनी बटालियन के सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन गोपाल बहादुर थापा से मुलाकात की। यह व्यक्तिगत मुलाकात भारतीय सेना के भीतर के संबंधों की गहरी मानवीयता और स्नेह को दर्शाती है।

भारत-नेपाल रक्षा सहयोग पर जोर

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली, और रक्षा मंत्री मंभीर राय से उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस दौरान, उन्होंने दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग, और क्षमता विकास के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। जनरल द्विवेदी ने नेपाल सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल के साथ भी बातचीत की और दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य संबंधों की दिशा पर विचार किया।

Indian Army Chief Nepal Visit: Will Nepali Gorkhas Join as Agniveers in Indian Army? General Upendra Dwivedi Meets Gorkha Veterans in Nepal

नेपाल में भारतीय सेना के सम्मान में विशेष सम्मान समारोह

नेपाल दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने बिर स्मारक, तुंडिखेल पर नेपाल के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने नेपाली सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी भी ली। इस यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी को नेपाल सेना का मानद जनरल रैंक प्रदान किया गया, जो दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों की गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक साझेदारी का प्रतीक है।

संस्कृति और सामाजिक संबंधों की नई दिशा

इस यात्रा के दौरान, जनरल द्विवेदी ने भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने शिवपुरी स्थित नेपाल सेना कमांड और स्टाफ कॉलेज में “युद्ध की बदलती प्रकृति” पर एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व को साझा चुनौतियों और अवसरों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का नेपाल दौरा भारतीय सेना और नेपाली सेना के बीच मजबूत और स्थिर साझेदारी को और भी मजबूत करने का एक ऐतिहासिक अवसर था। इस यात्रा ने न केवल सैन्य संबंधों को बढ़ाया बल्कि भारत और नेपाल के लोगों के बीच दोस्ती और सम्मान की एक नई मिसाल पेश की है।

यह दौरा भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच सहयोग और साझा सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को सशक्त करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच एक मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध स्थापित होगा।