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Jashimuddin Rahmani: दिसंबर में गुपचुप भारत आया था बांग्लादेश का यह खुंखार आतंकवादी, बड़ी साजिश का हुआ पर्दाफाश

Jashimuddin Rahmani: Bangladeshi Terrorist's Secret India Visit Unveiled
Jashimuddin Rahmani

Jashimuddin Rahmani: बांग्लादेश का कुख्यात आतंकी जशीमुद्दीन रहमानी को लेकर बड़ खुलाासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक रहमानी ने पिछले दिनों भारत का गुपचुप दौरा किया था। अल-कायदा से जुड़े आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) का प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया था।

Jashimuddin Rahmani: Bangladeshi Terrorist's Secret India Visit Unveiled
Jashimuddin Rahmani

इस दौरान उसने भारत में मौजूद अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से जुड़े स्लीपर सेल के सदस्यों से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि रहमानी भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद, अंतरिम सरकार ने रहमानी को जेल से रिहा कर दिया था। रहमानी को 2013 में एक ब्लॉगर की हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया था।

Jashimuddin Rahmani: कैसे की भारत में एंट्री?

खुफिया सूत्रों ने बताया कि आतंकी जशीमुद्दीन रहमानी के अल-कायदा से गहरे संबंध हैं। उसका संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) अलकायदा के ईशारों पर काम करता है। बांग्लादेशी इस्लामी कट्टरपंथी जशीमुद्दीन रहमानी साल 2024 में दिसंबर के आखिरी सप्ताह में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद आया था। वह मुर्शिदाबाद में लगभग साढ़े पांच घंटे भारत में रहा। इस दौरान उसने एबीटी स्लीपर सेल के सदस्यों के साथ मुलाकात की और एक गुप्त जगह पर दो घंटे की बैठक के बाद वह वापस लौट गया। सूत्रों ने बताया कि रहमानी ने भारत में प्रवेश कास्बा बॉर्डर के जरिए किया। उसे एबीटी के जिहादियों ने रिसीव किया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए, जहां बैठक आयोजित की गई।

एबीटी और अल-कायदा: भारत के लिए बढ़ता खतरा

अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) भारत में सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। अल-कायदा के भारतीय उपमहाद्वीप शाखा (AQIS) से जुड़े इस प्रतिबंधित संगठन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी गतिविधियों से भारत और बांग्लादेश के खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मई 2024 की एक सुबह, असम में सुरक्षा बलों ने एक बड़े आतंकी साजिश को विफल कर दिया। जांच से पता चला कि इस साजिश के पीछे एबीटी का हाथ था। एबीटी ने असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में स्लीपर सेल का नेटवर्क तैयार कर रखा है। इस नेटवर्क का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और आतंकी गतिविधियों के लिए उन्हें तैयार करना है।

खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एबीटी ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ हाथ मिलाया है। दोनों भारत में बड़े पैमाने पर हमले की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों संगठनों ने ट्रेनिंग और हथियार भी जुटा लिए हैं। बांग्लादेश में, एबीटी लंबे समय से सक्रिय है। इसे 2016 में शेख हसीना सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन हसीना सरकार गिरने के बाद से ही इस संगठन ने फिर से अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। बांग्लादेश से सटे भारतीय क्षेत्रों में इसका प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

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Jashimuddin Rahmani: बांग्लादेश का करना चाहते हैं तालिबानीकरण

सुरक्षा विशेषज्ञ शफी मोहम्मद मोस्तोफा और नताली जे. डॉयल की रिसर्च के मुताबिक, अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) की उत्पत्ति अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के सहयोगी संगठन के रूप में हुई थी। इसके 3,000 बांग्लादेशी लड़ाकों ने अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो बलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। ये लोग कट्टरपंथी विचारधारा के साथ बांग्लादेश लौटे। उनका उद्देश्य था बांग्लादेश को तालिबानीकृत अफगानिस्तान में बदलना। इसी उद्देश्य के तहत, 1992 में हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी बांग्लादेश (HuJIB) और 1998 में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और जाग्रत मुस्लिम जनता बांग्लादेश (JMJB) का गठन किया गया।

2005 में, जेएमबी ने एक साथ बांग्लादेश के 64 में से 63 जिलों में 459 बम विस्फोट किए। इन हमलों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने जेएमबी और इसके वरिष्ठ नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया सरकार की सख्ती और हुजीब व जेएमबी के कमजोर होने के चलते अल-कायदा ने अपने आंदोलन को नया मोर्चा दिया। उसने बांग्लादेश में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और अंसार अल-इस्लाम (AAI) जैसे संगठनों के जरिए अपनी गतिविधियां जारी रखीं।

ABT के शुरुआती सदस्य अल-कायदा के कट्टरपंथी प्रीचर अनवर अल-अवलाकी से प्रेरित थे। अवलाकी, जिसे 2011 में यमन में मार गिराया गया था, इस्लामिक आतंकवाद के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा रहा था।

बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस्लामी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी को इसी साल अगस्त में रिहा किया था। रहमानी को एक ब्लॉगर राजीब हैदर की हत्या में मदद करने और आतंकी संगठन अल-कायदा व उसके सहयोगी अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) का सक्रिय समर्थक होने का दोषी ठहराया गया था। रहमानी अगस्त 2013 से गाजीपुर स्थित काशिमपुर हाई-सिक्योरिटी सेंट्रल जेल में बंद था। रहमानी को 2013 से 2016 के बीच सेक्युलर ब्लॉगरों और पत्रकारों की टारगेट किलिंग में शामिल पाया गया था। इन हत्याओं की जिम्मेदारी उनके संगठन एबीटी ने ली थी।

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एबीटी के आठ आतंकी तीन राज्यों से हुए थे गिरफ्तार

हाल ही में असम पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 17 और 18 दिसंबर को एक ऑपरेशन के दौरान तीन राज्यों से अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक बांग्लादेशी आतंकी मोहम्मद शाद रादी उर्फ मोहम्मद शाब शेख को केरल से गिरफ्तार किया गया था। वह देशभर में स्लीपर सेल बनाने के लिए नवंबर में भारत आया था। इस ऑपरेशन के तहत दो आतंकियों, मिनारूल शेख और मोहम्मद अब्बास अली, को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया। वहीं, पांच अन्य नूर इस्लाम मंडल, अब्दुल करीम मंडल, मोजीबर रहमान, हमीदुल इस्लाम और एनामुल हक को असम से पकड़ा गया। सूत्रों ने यब भी बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में जसीमुद्दीन शाद रदी के भाई सजीबुल के घर में ठहरा था। वहीं सजीबुल, मुस्तकीम से पूछताछ में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। जसीमुद्दीन ने नउदा क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाया था।

कर चुका है पश्चिम बंगाल को आजाद करने की मांग

हाल ही में जशीमुद्दीन रहमानी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें उसने भारत की अखंडता को चुनौती दी। इस वीडियो में रहमानी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मोदी सरकार से बंगाल को आज़ाद कर, इसे स्वतंत्र घोषित करने की मांग की थी। रहमानी ने अपने विवादित बयान में भारत को “खंडित” करने और दिल्ली में “इस्लामी झंडा फहराने” की धमकी दी थी। यह वीडियो पिछले साल सितंबर के पहले सप्ताह में एक अस्पताल के वार्ड में शूट किया गया था, जिसमें रहमानी ने शेख हसीना के गिरने के एक महीने का जिक्र करते हुए “क्रांति” का संदर्भ अगस्त 5 को समाप्त हुए उन विरोध प्रदर्शनों से किया था, जिसके बाद शेख हसीना देश छोड़कर भाग गई थीं।

चीन के साथ “चिकन नेक” काटने की धमकी

रहमानी ने पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करने और भारत के खिलाफ विभिन्न अलगाववादी आंदोलनों को समर्थन देने की बात कही थी। उसने कहा, “हम ममता बनर्जी से कहेंगे कि बंगाल को मोदी के शासन से आज़ाद करें और इसे स्वतंत्र घोषित करें।” चेतावनी देते हुए उसने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के प्रति आक्रामक रुख अपनाया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। “बांग्लादेश, सिक्किम या भूटान की तरह नहीं है। यह 18 करोड़ मुसलमानों का देश है।

उसने आगे धमकी दी कि अगर भारत ने कोई कदम उठाया, तो वह चीन की मदद से सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे “चिकन नेक” कहा जाता है, को काट देंगे। उन्होंने पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत से अलग होने और “स्वतंत्रता आंदोलन” में शामिल होने के लिए कहा। रहमानी ने कश्मीर को स्वतंत्रता के लिए तैयार होने का संदेश दिया था और पाकिस्तान व अफगानिस्तान से मदद से कश्मीर को आज़ाद करने की बात कही। उसने खालिस्तान आंदोलन का भी समर्थन करते हुए पंजाब में अलगाववाद को प्रोत्साहित करने की बात कही थी।

इससे पहले रक्षा समाचार ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान ने एक मालवाहक जहाज से 70 से ज्यादा प्रशिक्षित आतंकियों को बांग्लादेश भेजा था और ये सभी आतंकी कुछ देर बाद ही रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान, रोहिंग्या शरणार्थियों का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) को सक्रिय करने की कोशिशों में भी जुटा है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि 13 नवंबर को कराची से आए एक कार्गो जहाज से 70 “अज्ञात पाकिस्तानी नागरिक” चटगांव बंदरगाह उतारे गए। ये सभी व्यक्ति कुछ ही घंटों में बिना किसी दस्तावेज़ और ट्रेस के गायब हो गए। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान अब रोहिंग्या मुसलमानों का इस्तेमाल करके जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) को सक्रिय करने की योजना बना रहा है। खासकर उत्तर बांग्लादेश में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (BJI) के माध्यम से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी है।

बांग्लादेश से 70 पाकिस्तानी आतंकवादी हुए लापता!

इससे पहले रक्षा समाचार ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान ने एक कार्गो जहाज के जरिए 70 से अधिक प्रशिक्षित आतंकवादियों को बांग्लादेश भेजा, जो कुछ ही समय बाद रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अब रोहिंग्या शरणार्थियों का उपयोग कर बांग्लादेश में जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।

खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 नवंबर को कराची से आए एक मालवाहक जहाज से चटगांव बंदरगाह पर 70 “अज्ञात पाकिस्तानी नागरिक” उतारे गए। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर, ये सभी लोग बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज या ट्रेस के गायब हो गए। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान अब रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल करते हुए जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) को पुनः सक्रिय करने की योजना बना रहा है। यह साजिश खासकर उत्तर बांग्लादेश में, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (BJI) के माध्यम से अंजाम देने की तैयारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की इस रणनीति का उद्देश्य बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाना और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति पैदा करना है। बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय खुफिया नेटवर्क इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं।

Explainer Army Day: जानें इस साल 15 जनवरी को किस शहर में मनाया जाएगा आर्मी डे, क्या है सेना दिवस मनाने की परंपरा?

Explainer Army Day: Pune Gears Up for Historic January 15 Parade

Explainer Army Day: 15 जनवरी 2025 को भारतीय सेना दिवस का आयोजन पुणे में किया जाएगा। यह पहला मौका है जब पुणे इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम की मेजबानी करेगा।  इससे पहले सेना दिवस दिल्ली में आयोजित होता था, लेकिन 2023 से इसे अन्य शहरों में मनाने की परंपरा शुरू की गई। 2023 में बेंगलुरु और 2024 में लखनऊ के बाद पुणे तीसरा शहर है जो इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनेगा। 15 जनवरी को पुणे के बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप (BEG) एंड सेंटर में सेना दिवस का आयोजन किया जाएगा।

Explainer Army Day: Pune Gears Up for Historic January 15 Parade

Explainer Army Day: क्यों चुना गया पुणे?

भारत के रक्षा इतिहास में पुणे का विशेष स्थान है। इसे न केवल “पूर्व का ऑक्सफोर्ड” कहा जाता है, बल्कि यहां राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और दक्षिणी कमान मुख्यालय भी है। पुणे न केवल सैन्य नेतृत्व के प्रशिक्षण का केंद्र है, बल्कि डिफेंस स्ट्रेटेजी को लेकर यहां कई इनोवेशंस भी हुए हैं। वहीं पुणे इस एतिहासिक समारोह के आयोजन का उद्देश्य सेना को जनता के करीब लाना और उन लोगों को सम्मानित करना है जिन्होंने देश की सेना में योगदान दिया है। पुणे को चुनना सेना की ऐतिहासिक जड़ों को वर्तमान समय के साथ जोड़ने की पहल है।

Explainer Army Day: इस बार सेना दिवस पर क्या होगा खास?

पुणे में पहली बार सेना दिवस 2025 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई नई और अनूठी पहलें देखने को मिलेंगी। इस बार कार्यक्रम तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगा: आधुनिकीकरण, समावेशिता और जनभागीदारी। पुणे के सदर्न कमांड परेड ग्राउंड में सेना के अत्याधुनिक हथियारों और टेक्नोलाजी के क्षेत्र में किए गए नए अविष्कारों को दिखाया जाएगा।

इसमें पिनाका मल्टीपल लॉन्चर रॉकेट सिस्टम, अर्जुन Mk-1A टैंक, K9 वज्र होवित्जर और मेक इन इंडिया के तहत विकसित ड्रोन सिस्टम भी शामिल होंगे। बता दें कि यह भारतीय सेना के मॉर्डेनाइजेशन के 2025 रोडमैप का हिस्सा है, जिसमें आधुनिक तकनीकों को अपनाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

Explainer Army Day: Pune Gears Up for Historic January 15 Parade
Robotic Mule

इसके अलावा इस परेड में सबसे खास हैं आठ क्वाड्रुपेडल अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (Q-UGV) , जिन्हें ‘रोबोटिक म्यूल’ भी कहा जाता है। इन रोबोटिक म्यूल्स को नई दिल्ली स्थित एरोआर्क प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया है। ये उपकरण टेली-ऑपरेबल और ऑटोनॉमस दोनों ही तरीकों से चलाए जा सकते हैं। खास बात यह है कि ये कठिन इलाकों और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में भी काम करने में सक्षम हैं। पहले सेना के अभियानों में पारंपरिक म्यूल (खच्चर) अपनी मज़बूत कद-काठी और दुर्गम इलाकों में पहुंचने की क्षमता के चलते अहम भूमिका निभाते थे, लेकिन भविष्य की युद्ध रणनीति में ये रोबोटिक म्यूल बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं।

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वहीं इस बार सेना दिवस पर महिलाओं की भागीदारी इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण होगी। सेना महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिकाओं में शामिल करने के लगातार कोशिश कर रही है। इस पहल के तहत महिला अधिकारियों और सैनिकों की उपलब्धियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि भारतीय सेना सभी को बराबर की निगाह से देखती है।

Explainer Army Day: Pune Gears Up for Historic January 15 Parade
Explainer Army Day: Pune Gears Up for Historic January 15 Parade

आम जनता के लिए इस आयोजन को और भी खास बनाने के लिए पैराशूट जंपिंग, युद्धाभ्यास के लाइव प्रदर्शन और सेना बैंड द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य युवाओं को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना और जनता में सेना के प्रति गर्व की भावना को बढ़ाना है।

पुणे का चयन इस आयोजन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह शहर भारतीय सेना की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और सदर्न कमांड हेडक्वार्टर्स जैसी संस्थाओं के साथ पुणे मिलिट्री ट्रेनिंग और स्ट्रेटेजी का एक बड़ा केंद्र है। इस आयोजन के माध्यम से सेना ने जनता के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने का प्रयास किया है।

Explainer Army Day: क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है, यह उस दिन की याद दिलाता है जब 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला था। यह दिन सैनिकों की वीरता और बलिदान को सम्मानित करने के साथ-साथ सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान को बताता है। इन दिन सेना की वारता औऱ बलिदान को याद किया जाता है। वहीं, इस साल के कार्यक्रम में न केवल भारतीय सेना की ताकत और उपलब्धियों को दिखाया जाएगा, बल्कि इसे जनता के साथ जोड़ने के नए प्रयास भी किए जाएंगे।

ब्रिटिश शासन के दौरान, भारतीय सेना का नेतृत्व ब्रिटिश अधिकारियों के हाथ में रहता था। लेकिन आज़ादी के बाद, करियप्पा के नेतृत्व में सेना ने न सिर्फ अपनी स्वायत्तता हासिल की, बल्कि आधुनिक भारत की सुरक्षा और संरक्षा की नींव भी मजबूत की। 15 जनवरी का दिन इसी महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

शुरुआत में यह समारोह मुख्य रूप से दिल्ली में होता था, जहां करियप्पा परेड ग्राउंड (दिल्ली कैंट) में परेड और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। बाद में, सेना दिवस की शोभा को देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने के लिए इसे अलग-अलग शहरों में मनाया जाने लगा, ताकि देश की बाकी आम जनता भी सेना की बहादुरी और बलिदान के बारे में जान सके।

सेना दिवस पहली बार साल 2023 में दिल्ली से बाहर आयोजित किया गया। उस वर्ष बेंगलुरु को चुना गया, जहां सेना दिवस का आयोजन बड़े ही भव्य पैमाने पर किया गया। बेंगलुरु के मिलिट्री इंस्टिट्यूशन्स और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसी संस्थाओं ने इस आयोजन को और खास बना दिया।

इसके बाद 2024 में लखनऊ को सेना दिवस की मेजबानी करने का अवसर मिला। उत्तर प्रदेश में पूर्व सैनिकों की एक बड़ी आबादी रहती है। लखनऊ में सेना दिवस मनाने से इन पूर्व सैनिकों को भी सम्मान का अवसर मिला।

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K9 Vajra

क्या है भारतीय सेना का 2025 का रोडमैप

भारतीय सेना ने 2025 के लिए आधुनिकरण और रणनीतिक तैयारियों पर आधारित एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। यह रोडमैप सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और साइबर क्षमताओं को अपनाने पर जोर दिया गया है। इन तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य की जटिल युद्ध स्थितियों में तेजी से निर्णय लेने और संचालन की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन इलाकों में एडवांस सर्विलांस सिस्टम और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए तैनात सैनिकों की क्षमता को बढ़ाने की योजना है।

पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में नई योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सैनिकों और उनके परिवारों का जीवन स्तर बेहतर बनाना है।

‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, सेना ने भारतीय स्टार्टअप्स और उद्योगों के साथ मिलकर स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यह कदम आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा और रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता को कम करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेना ने सहयोग को बढ़ाने के लिए संयुक्त अभ्यास और ज्ञान-साझा करने के कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य वैश्विक सैन्य रणनीतियों को समझना और अपनी क्षमताओं को बेहतर करना है।

भारतीय सेना का यह रोडमैप बदलते समय और मॉर्डन वारफेयर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे न केवल सेना की युद्धक क्षमता में वृद्धि होगी बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी प्राथमिकता मिलेगी।

Nimisha Priya Update: निमिषा मामले में आया नया मोड़, इस देश ने बढ़ाया मदद का हाथ, कहा- फांसी की सजा टालने के लिए हूथियों से करेंगे बात

Nimisha Priya Case: Iran Offers Help, Promises Talks with Houthis for Clemency

Nimisha Priya Update: यमन में हत्या के आरोप में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया में नया मोड़ आया है। अब इस मामले में ईरान ने मदद का भरोसा दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम इस नर्स के मामले को उठाएंगे और जो कुछ भी कर सकते हैं, करेंगे।” वहीं ईरान के इस बयान से निमिषा प्रिया के परिवार और उसकी फांसी की सजा टालने के लिए लड़ाई लड़ रहे लोगों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

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Nimisha Priya Update: ईरान का सहयोग क्यों है महत्वपूर्ण?

यमन में ईरान का प्रभाव और हूथी विद्रोहियों के साथ उसके करीबी संबंधों को देखते हुए, ईरान का समर्थन इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में माफी पाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

भारत सरकार की कोशिशें

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार इस मामले में सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बयान में कहा, “हम निमिषा प्रिया की सजा से अवगत हैं। परिवार इस मामले में जरूरी विकल्प तलाश रहा है, और सरकार हर संभव मदद कर रही है।” विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हम यमन में निमिषा प्रिया को दी गई सजा से अवगत हैं। हमें जानकारी है कि प्रिया का परिवार इस मामले में प्रासंगिक विकल्पों की तलाश कर रहा है।

Explainer Nimisha Priya: कौन हैं निमिषा प्रिया और क्यों हो रही है उनकी फांसी की सजा पर चर्चा? क्या ब्लड मनी से बचेगी उनकी जान?

क्या है Nimisha Priya का मामला?

केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया को 2017 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। यह मामला यमन के उन इलाकों में चल रहा है, जो हूथी विद्रोहियों के नियंत्रण में हैं। हूथी नेतृत्व ने हाल ही में उनकी सजा की पुष्टि कर दी है।

निमिषा प्रिया 2008 में यमन गई थीं और एक नर्स के रूप में काम कर रही थीं। वहां उन्होंने महदी के साथ साझेदारी में एक क्लिनिक खोला। लेकिन जल्द ही उनके रिश्ते खराब हो गए। महदी ने निमिषा के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उन्हें प्रताड़ित किया।

ब्लड मनी: माफी का रास्ता

2020 में सना की अदालत ने निमिषा प्रिया को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, उनके परिवार और वकीलों ने इस सजा के खिलाफ अपील की, लेकिन नवंबर 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बावजूद, यमन के शरिया कानून के तहत “ब्लड मनी” (खून बहाने का मुआवजा) के जरिए माफी की संभावना अब भी बनी हुई है।

यमन में ब्लड मनी, जिसे अरबी में “दीया” कहा जाता है, एक पुरानी परंपरा है। इसके तहत आरोपी मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा देकर अपनी सजा से राहत पा सकता है। इसी विकल्प के तहत निमिषा प्रिया का परिवार और उनके समर्थक अब महदी के परिवार को मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि यदि महदी का परिवार ब्लड मनी स्वीकार कर लेता है, तो निमिषा की फांसी टल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां हैं, जिनमें समय और धन जुटाना सबसे बड़ी बाधा है।

निमिषा के परिवार ने ब्लड मनी के रूप में 70 लाख रुपये की धनराशि जुटाने की पहल शुरू की है। यह प्रयास न केवल समय के खिलाफ है, बल्कि यह दर्शाता है कि मानवता और न्याय की उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं।

समर्थन जुटाने की पहल

निमिषा प्रिया के समर्थन में भारत और विदेश में कई लोग सक्रिय हैं। धन जुटाने के लिए कैंपेन चलाए जा रहे हैं और इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं। निमिषा के परिवार ने भारतीय नागरिकों और सरकार से मदद की अपील की है। उनकी मां ने कहा, “तलाल ने मेरी बेटी को झूठे कागजातों और बंदूक के दम पर प्रताड़ित किया। अगर उसे न्याय नहीं मिला, तो उसकी जान चली जाएगी।”

परिवार का दावा है कि निमिषा ने अपनी जान बचाने के लिए यह कदम उठाया। उनकी मां ने कहा, “महदी ने हमारी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने हमारी बेटी को कैद कर रखा था और हमारे परिवार को तोड़ने की कोशिश की।”

परिवार का यह भी कहना है कि निमिषा ने महदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन महदी के प्रभाव और यमन की व्यवस्था के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिवार ने भारतीय समाज से अपील की है कि वे ब्लड मनी जुटाने और न्याय दिलाने के इस संघर्ष में साथ खड़े हों।

सोशल मीडिया पर #SaveNimishaPriya अभियान

निमिषा प्रिया की कहानी सामने आने के बाद, यह मामला पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया। उनकी फांसी की सजा ने कई सवाल खड़े कर दिए, जिससे मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने उनकी रिहाई के लिए आवाज बुलंद की।

सोशल मीडिया पर #SaveNimishaPriya नाम से एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत लोगों से ब्लड मनी के लिए धन जुटाने की अपील की जा रही है। इस अभियान को पूरे देश से समर्थन मिल रहा है, और हजारों लोग इसे शेयर कर अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं।

कई मानवाधिकार संगठनों ने भी निमिषा को माफी देने और उनकी सजा पर पुनर्विचार करने की मांग की है। वहीं, केरल के कई सामाजिक संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और निमिषा की जान बचाने के लिए हरसंभव कदम उठाएं।

लोगों का मानना है कि निमिषा ने जो किया, वह आत्मरक्षा का प्रयास था। उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए ताकि वे अपने जीवन को नई दिशा दे सकें। इस अभियान ने सामाजिक और कानूनी समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Republic Day Tickets: मात्र 20 रुपये में देखें गणतंत्र दिवस 2025 की परेड, टिकटों की बिक्री हुई शुरू, आज ही करें बुक

Republic Day Tickets: watch Republic Day Parade 2025 Starting at Rs 20!

Republic Day Tickets: इस साल 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस परेड और 29 जनवरी को आयोजित होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए टिकटों की बिक्री शुरू हो गई है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है कि लोग इन टिकटों को ऑनलाइन और दिल्ली के विभिन्न काउंटरों से खरीद सकते हैं।

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इस साल रक्षा मंत्रालय ने टिकट बिक्री में डिजिटल तकनीक का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया है। ‘आमंत्रण’ मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से टिकट खरीदने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इससे लोगों को लंबी कतारों से बचने और आसानी से टिकट खरीदने का मौका मिलेगा।

डिजिटल माध्यमों के उपयोग से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और टिकटों का दुरुपयोग रोका जा सके।

Anti-Drone Ammunition: ड्रोन वॉरफेयर से निपटने को तैयार भारतीय सेना, ZU-23 एंटी-एयरक्राफ्ट गन को देश में ही मिलेगा अपडेटेड गोला-बारूद

Republic Day Tickets: ये हैं टिकटों की कीमतें  

इस बार रक्षा मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट के लिए टिकटों की कीमत काफी सस्ती और सुलभ रखी है। गणतंत्र दिवस परेड के लिए टिकट ₹20 और ₹100 में खरीदे जा सकते हैं।

बीटिंग रिट्रीट की रिहर्सल, जो 28 जनवरी को होगी, के टिकट ₹20 में उपलब्ध होंगे। वहीं, 29 जनवरी को होने वाले मुख्य बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए टिकट ₹100 में मिलेंगे। यह कीमतें सभी वर्गों के लोगों को इन ऐतिहासिक आयोजनों का हिस्सा बनने का मौका देती हैं।

टिकटों की बिक्री 11 जनवरी तक जारी रहेगी, जब तक हर दिन के लिए निर्धारित कोटा खत्म नहीं हो जाता।

Republic Day Tickets: कहां से खरीदें टिकट

टिकट खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक वेबसाइट aamantran.mod.gov.in और ‘आमंत्रण’ मोबाइल ऐप की सुविधा दी है। यह ऐप मोबाइल सेवा ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। ऐप के लिए क्यूआर कोड भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

दिल्ली में निम्नलिखित पांच जगहों पर टिकट खरीदने की सुविधा:
1. सेना भवन (गेट नंबर 2)
2. शास्त्री भवन (गेट नंबर 3 के पास)
3. जन्तर मंतर (मुख्य द्वार)
4. प्रगति मैदान (गेट नंबर 1)
5. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन (गेट नंबर 7 और 8)

इन स्थानों पर टिकट 2 जनवरी से 11 जनवरी के बीच सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे से शाम 4:30 बजे तक खरीदे जा सकते हैं।

चाहिए होगी फोटो आईडी 

गणतंत्र दिवस और बीटिंग रिट्रीट समारोह में शामिल होने के लिए टिकट के साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र की जरूरत होगी। इसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या किसी अन्य सरकारी पहचान पत्र का उपयोग किया जा सकता है।

यह सुनिश्चित किया गया है कि सुरक्षा कारणों से प्रत्येक व्यक्ति की पहचान सत्यापित हो सके। इसलिए, टिकट खरीदने के समय ही फोटो आईडी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी

कार्यक्रम और गणतंत्र दिवस का महत्व

गणतंत्र दिवस समारोह का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण की गौरवशाली यात्रा से जुड़ा हुआ है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश ने खुद को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया।

इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने का उद्देश्य हर नागरिक को यह याद दिलाना है कि भारत की विविधता में एकता और लोकतांत्रिक मूल्य कितने महत्वपूर्ण हैं।

बीटिंग रिट्रीट की परंपरा:

बीटिंग रिट्रीट समारोह की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। यह परंपरा भारतीय सेना द्वारा अपनाई गई और आज इसे एक राष्ट्रीय आयोजन का रूप दिया गया है। यह समारोह 29 जनवरी को विजय चौक पर आयोजित किया जाता है, और इसमें भारतीय बैंड पारंपरिक और आधुनिक धुनों का प्रदर्शन करते हैं।

अधिक जानकारी के लिए

गणतंत्र दिवस समारोह और इससे जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल rashtraparv.mod.gov.in पर विजिट कर सकते हैं।

रक्षा मंत्रालय ने इन आयोजनों के लिए पूरी तैयारी कर ली है। अब यह नागरिकों पर निर्भर है कि वे इन राष्ट्रीय आयोजनों का हिस्सा बनकर इस खास मौके को यादगार बनाएं।

Anti-Drone Ammunition: ‘ड्रोन वॉरफेयर’ से निपटने को तैयार भारतीय सेना, ZU-23 एंटी-एयरक्राफ्ट गन को देश में ही मिलेगा अपडेटेड गोला-बारूद

Anti-Drone Ammunition: Indian Army issued RFI for manufacturing of ZU-23 mm Anti-Drone ammunition

Anti-Drone Ammunition: दुनियाभर में चल रहे हालिया युद्धों में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर तेजी देखी गई है। ड्रोन छोटे आकार, कम लागत और एडवांस टेक्नोलॉजी के चलते दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने और सटीक हमले करने में सक्षम हैं। इन खतरों से निपटने के लिए भारतीय सेना अब बड़ी तैयारी कर रही है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने भारतीय उद्योगों से 23mm एंटी-ड्रोन गोला-बारूद की सप्लाई के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFI) जारी किया है। (RFI) जारी किया है। भारतीय सेना ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे हवाई खतरों से निपटने के लिए अब बड़ी तैयारी में जुट गई है।

Anti-Drone Ammunition: Indian Army issued RFI for manufacturing of ZU-23 mm Anti-Drone ammunition
Shilka एंटी-एयरक्राफ्ट गन

क्या है ZSU-23-4 Shilka एंटी-एयरक्राफ्ट गन

ZSU-23-4 शिल्का वेपन सिस्टम एक ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट गन सिस्टम है, जिसे सोवियत संघ ने डिजाइन किया था। इसमें चार 23 मिमी की ऑटोमौटिक तोपें (2A7) लगी हैं, जो तेज रफ्तार से फायरिंग करने और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों जैसे लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को मार गिरा सकती हैं। इसकी प्रभावी फायरिंग रेंज 2.5 किमी है और फायरिंग स्पीड 4,000 राउंड प्रति मिनट तक पहुंच सकती है।

शिल्का प्रणाली में इन-बिल्ट रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम है, जो दिन और रात के किसी भी समय दुश्मन के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसे किसी भी गाड़ी पर लगाया जा सकता है, जिससे इसे आसानी से सीमावर्ती क्षेत्रों और ऊंचाई वाले स्थानों पर तैनात किया जा सकता है।

Anti-Drone Ammunition: Indian Army issued RFI for manufacturing of ZU-23 mm Anti-Drone ammunition
ZU 23mm

Anti-Drone Ammunition: क्या है ZU 23mm सिस्टम

ZU 23mm सिस्टम एक डबल बैरल एंटी-एयरक्राफ्ट ऑटोकैनन है, जिसे रूसी मूल का माना जाता है। इसका पूरा नाम “जेनिटनाया उस्तानोवका” है। भारतीय सेना के पास लगभग 470 ZU-23 सिस्टम हैं, जिन्हें सोवियत संघ से खरीदा गया था और भारत में ही अपग्रेड किया गया। इस अपग्रेड में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़ा गया, जो दुश्मन को ट्रैक कर उसकी पहचान करने और सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करता है।

यह सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को खत्म करने में सक्षम है। इसका काम करने का तरीका “गैस ऑपरेटेड एक्शन” पर आधारित है। इस ऑटोकैनन का वजन लगभग 0.95 टन है, जबकि इसकी लंबाई 10 फीट और बैरल की लंबाई 6.5 फीट है, जो इसे लंबी दूरी तक मारक क्षमता प्रदान करती है। पूरे सिस्टम की चौड़ाई 9.5 फीट और ऊंचाई 4 फीट है।

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इस सिस्टम को संचालित करने के लिए दो लोगों की जरूरत होती है- एक गनर और एक कमांडर। यह 23 मिमी कैलिबर के गोले दागने में सक्षम है और माइनस 10 डिग्री से प्लस 90 डिग्री तक के कोण पर हमला कर सकता है। इसके अलावा, यह 360 डिग्री घूमकर दुश्मन के हर दिशा में निशाना साध सकता है।

यह सिस्टम एक मिनट में 2,000 गोलियां दागने की क्षमता रखता है। इसके गोले 50 राउंड की बेल्ट में लोड किए जाते हैं। इसकी मारक दूरी ढाई किलोमीटर तक होती है, जहां यह सटीकता के साथ हमला कर सकता है।

ZU 23mm सिस्टम को किसी भी गाड़ी पर लगाया जा सकता है, जिससे इसे आसानी से सीमा पर तैनात किया जा सकता है। इसे ट्रक से बांधकर या विमान में लोड करके ऊंचाई वाले स्थानों तक पहुंचाया जा सकता है।

भारत में इस सिस्टम के 320 यूनिट खींचकर तैनात करने वाले सिस्टम हैं, जबकि बाकी ट्रकों पर लगाए गए हैं। यह बहुमुखी सिस्टम दुश्मन के हवाई खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार है, जो सेना की ताकत को बढ़ाता है।

Anti-Drone Ammunition: क्यों चाहिए 23mm एंटी-ड्रोन गोला-बारूद?

23mm एंटी-ड्रोन गोला-बारूद मौजूदा ZU-23 और शिल्का हथियार प्रणालियों जैसे एंटी-एयरक्राफ्ट गन के साथ इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन इनसे दागे जाने वाले मौजूदा गोला-बारूद के हिट करने का संभावित औसत काफी कम है। इन गनों के ऑपरेट करने में इंसानों की भूमिका होने की वजह से सटीकता की कमी रहती है। इस कमी को पूरा करने के लिए 23 मिमी एंटी-ड्रोन गोला-बारूद तैयार किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। बता दें कि इन एंटी-एयरक्राफ्ट गन में 23 मिमी आर्मर पियर्सिंग इनसेन्डियरी ट्रेसर (एपीआईटी) और हाई एक्सप्लोसिव इनसेन्डियरी ट्रेसर (एचईआईटी) एम्युनिशन का इस्तेमाल किया जाता है।

यहां देखें सेना की तरफ से जारी RFI

ये गोला-बारूद छोटे आकार और कम रडार क्रॉस-सेक्शन वाले ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम होने चाहिए। मौजूदा गोला-बारूद की तुलना में इसमें हाई “हिट प्रॉबेबिलिटी” होगी, जिससे यह मॉर्डन वारफेयर में ज्यादा प्रभावी साबित होगा। भारतीय सेना के पास ZU 23 मिमी और शिल्का हथियार प्रणाली जैसे एंटी-एयरक्राफ्ट गन हैं, लेकिन इनसे दागे जाने वाले मौजूदा गोला-बारूद का हिट करने का संभावित औसत कम है।

Anti-Drone Ammunition: होनी चाहिए ये खूबियां

23 मिमी एंटी-ड्रोन गोला-बारूद का डिज़ाइन भारतीय सेना की जरूरतों और मॉर्डन वारफेयर की चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया गया है। इस गोला-बारूद को ZU 23 मिमी और शिल्का सिस्टम जैसे मौजूदा हथियारों के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इन गोला-बारूद में एक प्रॉक्सिमिटी या टाइम्ड फ्यूज सिस्टम होगा, जैसे ही यह ड्रोन के पास पहुंचेगा यह सक्रिय हो जाएगा। टाइम्ड फ्यूज को पहले से प्रोग्राम किया जाएगा ताकि यह निश्चित दूरी (जैसे 1000 मीटर, 1500 मीटर, 2500 मीटर आदि) पर विस्फोट कर सके। इससे दुश्मन के ड्रोन को नष्ट करने में आसानी होगी।

प्री-फ्रैगमेंटेड शेल का डिज़ाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि इसके टुकड़े बड़े क्षेत्र में फैलकर दुश्मन के ड्रोन को अधिकतम नुकसान पहुंचा सकें। ये टुकड़े उचित आकार, संख्या और डेनसिटी में होंगे, जिससे ड्रोन को नष्ट करने की संभावना बढ़ जाएगी।

वहीं, इस गोला-बारूद की शेल्फ लाइफ कम से कम 10 साल तक होनी चाहिए। इसका मतलब यह है कि यह लंबे समय तक बिना किसी खराबी के स्टोरेज में रखा जा सकता है। इससे भारतीय सेना की लॉजिस्टिक्स और कॉस्ट मैनेजमेंट में भी मदद मिलेगी।

साथ ही, यह गोला-बारूद -30°C से +45°C के बीच के तापमान में पूरी क्षमता से काम करने की खूबी होनी चाहिए। इसके अलावा, इसे बिना किसी स्पेशल स्टोरेज सिस्टम के कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित रखा जा सके। भारत की जलवायु और सैन्य हालातों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है।

रूस ने बनाया “ड्रोन किलर” सिस्टम

बता दें कि जेडएसयू-23-4 शिल्का सिस्टम का उपयोग पहले से ही रूसी सेना में किया जाता रहा है। इसकी फायरिंग रेंज 2.5 किमी है और यह तेजी से फायर कर सकता है। वहीं यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध को देखते हुए रूस ने “ड्रोन किलर” सिस्टम लॉन्च किया है। रूस ने ड्रोन से मुकाबला करने के लिए बीटीआर-82 व्हीकल पर ज़ेडएसयू-23-4 शिल्का सिस्टम की दो 23 मिमी एंटी-एयरक्राफ्ट गन लगााई हैं। यह सिस्टम विशेष रूप से ड्रोन जैसे आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।

‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा

रक्षा मंत्रालय के इस प्रस्ताव के तहत, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (DPSUs) और निजी उद्योगों को अपने-अपने सॉल्यूशंस पेश करने का मौका दिया गया है। मंत्रालय ने कंपनियों से आग्रह किया है कि वे इसमें हिस्सा लें और भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीकी जानकारी और प्रपोजल साझा करें।

भारतीय सेना ने इस परियोजना के लिए एक “सिंगल स्टेज-टू बिड सिस्टम” अपनाया है। इसका मतलब है कि टेक्निकल और कॉमर्शियल प्रपोजल अलग-अलग लिफाफों में जमा किए जाएंगे। सभी तकनीकी प्रस्तावों का मूल्यांकन एक टेक्निकल इवैल्यूएशन कमेटी द्वारा किया जाएगा। वहीं, आरएफआई जमा करने की अंतिम तिथि 17 फरवरी 2025 तय की गई है।

Indian Navy warships: नए साल पर नौसेना को बड़ी सौगात, 15 जनवरी को नेवी को मिलेंगे तीन नए योद्धा- नीलगिरि, सूरत और वाग्शीर

indian Navy warships: Nilgiri, Surat, Vaghsheer to Join Fleet on Jan 15

Indian Navy warships: 15 जनवरी 2025 भारतीय नौसेना के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। इस दिन नौसेना के बेड़े में तीन अत्याधुनिक युद्धपोत और पनडुब्बी – ‘नीलगिरि’, ‘सूरत’ और ‘वाग्शीर’ को शामिल किया जाएगा। यह आयोजन मुंबई के नौसैनिक डॉकयार्ड में होगा। यह पहली बार है जब एक ही दिन में तीन प्रमुख युद्ध प्लेटफॉर्म्स को कमीशन किया जाएगा। आइए, जानते हैं इन तीनों के बारे में विस्तार से।

indian Navy warships: Nilgiri, Surat, Vaghsheer to Join Fleet on Jan 15

नए कमीशन किए जाने वाले युद्धपोतों में सबसे विशाल है 7,400 टन वजनी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘सूरत’। इसके बाद आता है 6,670 टन वजनी स्टील्थ फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ और 1,600 टन वजनी पनडुब्बी ‘वाग्शीर’। ये सभी अत्याधुनिक सेंसर और शक्तिशाली हथियारों से लैस हैं, जो इन्हें दुश्मनों के लिए बेहद खतरनाक बनाते हैं। हाल ही में मुंबई के मझगांव डॉक (MDL) ने सूरत और नीलगिरी को भारतीय नौसेना को सौंप दिया है।

Indian Navy warships: नीलगिरि (Project 17A स्टील्थ फ्रिगेट)

नीलगिरि, भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17A का पहला युद्धपोत है। यह शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स का एडवांस वर्जन है और इसे अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीकों के साथ तैयार किया गया है। इसका डिज़ाइन ऐसा है कि इसे दुश्मन के रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल होगा।

indian Navy warships: Nilgiri, Surat, Vaghsheer to Join Fleet on Jan 15 ‘नीलगिरी’ प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित हो रहे सात मल्टी-रोल फ्रिगेट्स में पहला है। इन अत्याधुनिक फ्रिगेट्स में से चार को मुंबई के मझगांव डॉक (MDL) में और तीन को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में तैयार किया जा रहा है। लगभग 45,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे इन फ्रिगेट्स को विशेष रूप से ऐसे डिज़ाइन किया गया है कि इन्हें दुश्मन के लिए ट्रैक करना बेहद कठिन हो।

Indian Navy Warships: भारतीय नौसेना के लिए नया साल होगा खास, 2025 में दो वारशिप और एक पनडुब्बी होगी कमीशन

‘नीलगिरी’ और इसके साथ के सभी सात फ्रिगेट्स को 2026 के अंत तक नौसेना में शामिल करने का लक्ष्य है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा में बड़ी मजबूती आएगी।

  • रडार से बचने की क्षमता। (Reduced Radar Signature)।
  • एडवांस सेंसर और वीपन सिस्टम।
  • हेलीकॉप्टर संचालन के लिए आधुनिक सुविधाएं, जिसमें सी किंग, चेतक, ALH और MH-60R जैसे हेलीकॉप्टर शामिल
  • महिला अधिकारियों और नौसैनिकों के लिए विशेष आवास की व्यवस्था।

Indian Navy warships: सूरत – प्रोजेक्ट 15बी का अंतिम डेस्ट्रॉयर

सूरत, प्रोजेक्ट 15बी के तहत चौथी और आखिरी स्टील्थ डेस्ट्रॉयर है। यह कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर (प्रोजेक्ट 15ए) का एडवांस वर्जन है। इसका डिज़ाइन और निर्माण प्रक्रिया भी पूरी तरह से स्वदेशी है।

indian Navy warships: Nilgiri, Surat, Vaghsheer to Join Fleet on Jan 15

‘सूरत’ भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से सुसज्जित है। इस आधुनिक युद्धपोत की तैनाती से नौसेना की संचालन क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। ‘सूरत’ के निर्माण में 72% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती प्रदान करता है। इसकी लंबाई 164 मीटर है और यह 4,000 नॉटिकल मील तक का सफर करने में सक्षम है।

यह शक्तिशाली युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76mm सुपर रैपिड गन, और पनडुब्बी रोधी हथियार जैसे रॉकेट और टॉरपीडो से लैस है, जो इसे बेहद घातक और अद्वितीय बनाते हैं।

  • अत्याधुनिक हथियार और सेंसर से लैस।
  • लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले की क्षमता।
  • हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस के लिए एडवांस सुविधाएं।
  • दुश्मन के जहाज और पनडुब्बियों का पता लगाने और नष्ट करने की क्षमता

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Indian Navy warships: वाग्शीर (स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बी)

वाग्शीर, कलवरी क्लास के तहत बनने वाली छठी और आखिरी पनडुब्बी है। इसे अत्याधुनिक स्कॉर्पीन डिजाइन पर बनाया गया है और यह एक बहुमुखी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है। इसका डिज़ाइन इसे बेहद शांत और दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है। इसे मझगांव डॉक और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाया गया है।

‘वाग्शीर’ फ्रांसीसी डिजाइन पर आधारित स्कॉर्पीन या कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बी को 23,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-75 के तहत तैयार किया गया है। यह पनडुब्बी अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी क्षमताओं का अद्भुत संगम है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी।

भारत और फ्रांस फिलहाल तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण के लिए समझौता वार्ता कर रहे हैं। योजना के अनुसार, पहली नई पनडुब्बी छह वर्षों में तैयार होगी, इसके बाद हर साल एक पनडुब्बी नौसेना में शामिल की जाएगी। यह कदम भारतीय नौसेना की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

  • एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वारफेयर की क्षमता।
  • वायर-गाइडेड टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइल।
  • क्षेत्र निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की खूबी।
  • भविष्य में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक को शामिल करने की संभावना।
  • यह पनडुब्बी वायर-गाइडेड टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से लैस है, जो इसे समुद्र में बेहद खतरनाक बनाती हैं।

ये तीनों युद्धपोत और पनडुब्बी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) , मुंबई में पूरी तरह से भारत में डिज़ाइन और निर्मित किए गए हैं। यह भारतीय रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है।

स्टील्थ तकनीक का फायदा

स्टील्थ तकनीक के उपयोग से युद्धपोतों और पनडुब्बियों की रडार पर पकड़ कम हो जाती है, जिससे वे दुश्मन के हमलों से सुरक्षित रहते हैं। नीलगिरि और सूरत में इस तकनीक का इस्तेमाल उनकी प्रभावशीलता को और बढ़ाता है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम

इन जहाजों पर महिला अधिकारियों और नौसैनिकों के लिए विशेष आवास की व्यवस्था की गई है। यह भारतीय नौसेना के महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रोजेक्ट 17 और 17A

शिवालिक क्लास (Project 17): 2000 के दशक की शुरुआत में, शिवालिक क्लास के फ्रिगेट्स को नौसेना में शामिल किया गया। ये युद्धपोत आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम से लैस थे।
प्रोजेक्ट 17A, शिवालिक क्लास का एडवांस वर्जन है, जिसमें स्टील्थ तकनीक और बेहतर डिज़ाइन शामिल हैं।

प्रोजेक्ट 15, 15A और 15B

1990 के दशक में दिल्ली क्लास (Project 15) के साथ शुरुआत हुई। इसके बाद कोलकाता क्लास (Project 15A) और अब सूरत क्लास (Project 15B) को डिज़ाइन किया गया है। ये सभी डेस्ट्रॉयर अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम से लैस हैं।

स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना (Project 75)

कलवरी क्लास: फ्रांस की मदद से यह परियोजना शुरू हुई और भारत ने अब तक पांच स्कॉर्पीन पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की हैं। वाग्शीर छठी और अंतिम पनडुब्बी है।

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मार्च के पहले सप्ताह तक आएगा INS तुशील

भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए 3,900 टन वजनी रूसी निर्मित फ्रिगेट INS तुशील अपनी लंबी यात्रा पर है। यह फ्रिगेट बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर से होते हुए भारत आ रही है। अगले साल, मार्च-अप्रैल 2025 में, रूस से एक और फ्रिगेट INS तामल की डिलीवरी की जाएगी, जिससे नौसेना की क्षमता और बढ़ेगी। फिलहाल वह मोरक्को के कासाब्लांका पोर्ट पर है।

वर्तमान में भारतीय नौसेना 130 से अधिक युद्धपोतों और 251 विमानों व हेलीकॉप्टरों का संचालन कर रही है। इसके अलावा, देश के शिपयार्ड में 60 नए युद्धपोत और जहाज निर्माणाधीन हैं। भविष्य की योजना के तहत 31 और युद्धपोतों को मंजूरी दी गई है, जिनमें सात नई पीढ़ी के फ्रिगेट, आठ कॉर्वेट और छह स्टील्थ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हैं।

2030 तक युद्धपोतों की संख्या में कमी का खतरा

हालांकि, मौजूदा बेड़े और निर्माण योजनाओं के बावजूद, 2030 तक भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की संख्या केवल 155-160 तक ही पहुंचने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण भारतीय शिपयार्ड में निर्माण की धीमी प्रक्रिया और पुराने युद्धपोतों का चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटना है।

यह स्थिति नौसेना के लिए बड़ी चुनौती है, खासकर तब जब क्षेत्रीय समुद्री ताकतें अपने बेड़ों का तेजी से विस्तार कर रही हैं। भारतीय नौसेना के सामने अब आवश्यकता है कि वह निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाए और अपनी दीर्घकालिक समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए।

The Indian Navy warships are renowned for their exceptional capabilities and strategic importance in the region. Their advanced technology and skilled crew make them a formidable force in maritime operations. With their presence, the Indian Navy upholds national security and contributes to maintaining peace in the waters.

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Credit: Indian Army

Indian Armed Forces ADC reform: भारतीय सशस्त्र बलों में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के तहत, अब सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के लिए पर्सनल स्टााफ ऑफिसर यानी एड्स-डे-कैंप यानी Aides-de-Camp (ADC) अब उनकी खुद की सेवा से नहीं, बल्कि दूसरी सर्विसेज से नियुक्त किए जाएंगे। यह नई व्यवस्था 1 जनवरी से लागू हो गई है और इसे तीनों सेवाओं के प्रमुखों ने स्वीकार भी कर लिया है। यह कदम तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

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Indian Armed Forces ADC reform: क्या काम करते हैं ADC?

ADC यानी पर्सनल स्टाफ ऑफिसर का काम चीफ की आधिकारिक बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेना, शेड्यूलिंग, पत्राचार और अन्य प्रशासनिक कामकाज देखना शामिल है। अब ADC अन्य सर्विसेज से नियुक्त किए जाने पर, यह उम्मीद की जा रही है कि इससे सेवाओं के बीच गहरी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले, परंपरागत रूप से सेवा प्रमुख अपने ADC को अपनी ही सेवा से चुनते थे, अक्सर उन्हीं यूनिटों से जिनसे उनका व्यक्तिगत जुड़ाव होता था। मॉर्डन मिलिट्री ऑपरेशंस में एकीकृत दृष्टिकोण की जरूरत को देखते हुए यह पहल एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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सैन्य सूत्रों ने बताया कि इस नए सिस्टम का उद्देश्य सेना के भीतर एक ज्वाइंटनेस (एकजुटता) की संस्कृति को बढ़ावा देना है। डिफेंस सर्विसेज के स्टाफ कॉलेज में पहले ही एक विशेष जॉइंट डिवीजन स्थापित किया गया है, जहां तीनों सेवाओं के अधिकारियों को इंटीग्रेटेड स्ट्रेटेजी और आपसी सहयोग पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

Indian Armed Forces ADC reform: इतिहास में ADC की परंपरा

ADC की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। उस समय, ADC का चयन मुख्यतः उनकी यूनिट की प्रतिष्ठा और सेवा प्रमुख के साथ उनके संबंधों के आधार पर किया जाता था। सरल शब्दों में कहें तो इतिहास में अब तक, तीनों सेवाओं के प्रमुख अपने ADC को अपनी-अपनी शाखाओं से ही चुनते थे। अक्सर यह चयन उन यूनिट्स से होता था, जिनसे प्रमुखों का व्यक्तिगत जुड़ाव रहा हो। उदाहरण के लिए, एक आर्मी चीफ अपने पुराने रेजिमेंट से किसी अधिकारी को ADC के रूप में चुनते थे। यह न केवल उस प्रमुख की यूनिट के प्रति सम्मान और गर्व का प्रतीक होता था, बल्कि एक तरह से उनकी सर्विस की पहचान भी बनता था।

भारतीय स्वतंत्रता के बाद भी, इस परंपरा को जारी रखा गया। ADC की नियुक्ति एक प्रतिष्ठित जिम्मेदारी मानी जाती थी, जिसमें युवा अधिकारियों को अपने प्रमुख के साथ घनिष्ठ रूप से काम करने और नेतृत्व के गुण सीखने का अवसर मिलता था।

CDS का 200-पॉइंट सुधार एजेंडा

यह नया फैसला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की तरफ से सुझाए गए 200-पॉइंट सुधार एजेंडा का हिस्सा है। इस एजेंडा का मुख्य उद्देश्य आर्मर्ड फोर्सेज के बीच एकजुटता और सामंजस्य को बढ़ावा देना है। ADC की नियुक्ति में यह बदलाव भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो तीनों सेवाओं के अधिकारियों को एक-दूसरे के कार्य पद्धति को समझने का अवसर देगा।

बता दें कि CDS ने पहले भी कई बार यह स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में वार ऑपरेशंस के लिए तीनों सेनाओं के बीच सामूहिकता और एकीकृत दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

सूत्रों ने बताया कि तीनों सेनाओं – थलसेना, नौसेना और वायुसेना – के बीच तालमेल आज के समय में और भी जरूरी हो गया है। मॉर्डर्न वारफेयर सिस्टम में आपसी कॉर्डिनेशन और इनफॉरमेशन का साझा करना बेहद जरूरी हो गया है। इसीलिए, ADC की इस नई व्यवस्था से सेवाओं के बीच एक नई समझ और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत, ADC अब विभिन्न सेवाओं से आएंगे, जिससे उन्हें अन्य सेवाओं के कामकाज और कार्यशैली को जानने और समझने का मौका मिलेगा। इससे सेवा प्रमुखों और ADC के बीच एक व्यापक दृष्टिकोण विकसित होगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान करेगा।

थिएटर कमांड्स की शुरुआत

भारतीय सशस्त्र बलों में इंटीग्रेटेड कल्चर की शुरुआत हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। थियेटर कमांड्स की थ्योरी में जहां तीनों सेनाओं के ऑपरेशंस को एकसाथ लाने पर जोर दिया जा रहा है, इसका प्रमुख उदाहरण है। ADC के इस बदलाव को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

Indian Armed Forces ADC reform: क्या होंगे फायदे?

यह पहल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि इससे तीनों सेवाओं के अधिकारियों को एक-दूसरे की कार्यशैली और संस्कृति को समझने का मौका भी मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी आर्मी चीफ का ADC वायुसेना से आता है, तो वह सेना की प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल के साथ-साथ वायुसेना की ताकतों और तरीकों को भी करीब से देख और समझ सकता है।

तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इस पहल का स्वागत किया है। सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख ने इसे अपनी स्वीकृति देते हुए कहा कि यह तीनों सेनाओं के बीच सहयोग और तालमेल को मजबूत करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ADC का अन्य सेवा से चयन, न केवल सशस्त्र बलों की एकता को बढ़ावा देगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।”

सशस्त्र बलों में सुधार की दिशा में अन्य कदम

एडीसी को लेकर उटाया गया यह कदम अकेला नहीं है। इसके साथ ही, सशस्त्र बलों में कई अन्य सुधार किए जा रहे हैं:
1. संयुक्त थिएटर कमांड : तीनों सेवाओं को एकीकृत करने के लिए थिएटर कमांड की स्थापना पर विचार हो रहा है।
2. साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम : तीनों सेवाओं के अधिकारियों को साझा प्रशिक्षण देने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं।
3. तकनीकी सहयोग : आधुनिक तकनीकों और उपकरणों को साझा रूप से उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।

नए कदम की चुनौतियां और संभावनाएं

जानकारों का कहना है कि हालांकि यह कदम सशस्त्र बलों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, लेकिन इसके लागू करने में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। उदाहरण के लिए, अलग-अलग सेवाओं के अधिकारियों के बीच प्राथमिकताओं और कार्यशैली में अंतर हो सकता है। लेकिन इसे दूर करने के लिए नियमित संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम मददगार हो सकते हैं।

The Indian Armed Forces are currently undergoing a reform in their ADC system. This reform aims to enhance the efficiency and effectiveness of the Armed Forces by streamlining the ADC process. As part of this reform, comprehensive measures are being implemented to ensure a smooth transition and improved performance. The Indian Armed Forces are optimistic that these reforms will significantly contribute to their overall operational capabilities.

ECHS card suspension: ECHS ने पेंशनर्स को क्यों जारी किया ‘कारण बताओ नोटिस’, बंद होगा कार्ड, लौटाना होगा इलाज का खर्च?

ECHS Card Suspension: Why Pensioners Received ‘Show Cause Notices’?
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ECHS card suspension: भारतीय सेना के रिटायर्ड जवानों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा सुविधाओं की रीढ़ कहे जाने वाले ECHS (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) ने हाल ही में ऐसा कदम उठाया है, जिसने पेंशनर्स के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। कई पेंशनर्स को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा गया है, जिसमें उनसे पूछा गया है कि उन्होंने इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों का चुनाव क्यों किया। इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि उनकी चिकित्सा पर हुए खर्च को वापस लिया जा सकता है।

ECHS Card Suspension: Why Pensioners Received ‘Show Cause Notices’?
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ECHS card suspension: Why did ECHS send notice? : क्यों भेजे ECHS ने नोटिस

ECHS भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है, जो पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। योजना के तहत, पेंशनर्स और उनके परिवारों को सरकारी या ECHS सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है।

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हालांकि, हाल ही में कई पेंशनर्स को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजे गए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कुछ पेंशनर्स ने योजना के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना निजी अस्पतालों में इलाज करवाया। ECHS अधिकारियों का कहना है कि ये कदम योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।

ECHS card suspension: नोटिस भेजने के पीछे की वजह

ECHS के नियम कहते हैं कि इलाज केवल सूचीबद्ध अस्पतालों में होना चाहिए। अगर किसी आपातकालीन स्थिति में प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना पड़े, तो इसका खर्चा ECHS से मंजूर कराना होगा। लेकिन, ECHS को शिकायतें मिलीं कि कई पेंशनर्स ने निजी अस्पतालों में इलाज कराकर बढ़े हुए खर्चे का दावा किया है।

ECHS ने ऐसे पेंशनर्स को नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा है कि क्यों न उनका कार्ड अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाए।

पेंशनर्स की ये हैं दिक्कतें

कई पेंशनर्स का कहना है कि ECHS क्लीनिक में अक्सर डॉक्टर मौजूद नहीं होते, दवाइयों की कमी रहती है और कई जरूरी टेस्ट वहां उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि उन्हें प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। पेंशनर्स का यह भी कहना है कि क्लेम प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि उसमें कई बार तकनीकी खामियां रह जाती हैं। उनका यह भी कहना है कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें यह तय करने में मुश्किल होती है कि ECHS क्लीनिक जाएं या सीधे प्राइवेट अस्पताल।

राजस्थान के एक रिटायर्ड मेजर का कहना है, “मैंने कई बार ECHS क्लीनिक में कोशिश की, लेकिन मुझे हर बार किसी ना किसी कारण से लौटा दिया गया। मजबूरी में मुझे प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा। अब अगर ये नोटिस मुझे खर्च वापस करने को कहते हैं, तो मैं क्या करूं?”

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सरकारी अस्पतालों में लंबी वेटिंग

ECHS योजना में कई सरकारी और पैनल में शामिल अस्पतालों को जोड़ा गया है, लेकिन इनकी सेवाएं सीमित हैं। सरकारी अस्पतालों में लंबी वेटिंग लिस्ट और जरूरी संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

दूसरी ओर, प्राइवेट अस्पताल मरीजों को तत्काल सुविधाएं देते हैं, लेकिन इसके बदले में मोटी फीस लेते हैं। पेंशनर्स के अनुसार, “अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी हो और ECHS सुविधाएं उपलब्ध न हों, तो हमारे पास और क्या विकल्प बचता है?”

प्राइवेट अस्पतालों और पेंशनर्स के बीच मिलीभगत

ECHS अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में यह देखा गया है कि प्राइवेट अस्पतालों और पेंशनर्स के बीच मिलीभगत चल रही है। इसमें फर्जी बिल तैयार किए जाते हैं और योजना का दुरुपयोग होता है। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस जारी करने का उद्देश्य ऐसे मामलों की जांच करना और योजना की पारदर्शिता बनाए रखना है। ECHS अधिकारियों ने कहा है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य पेंशनर्स को स्वास्थ्य सेवाएं देना है।

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ECHS card suspension: क्या ECHS कार्ड का होगा निलंबन

जिन पेंशनर्स को नोटिस मिला है, उनके लिए ECHS ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर वे उचित जवाब नहीं दे पाए, तो उनका कार्ड अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि वे ECHS की स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। ECHS ने यह भी संकेत दिया है कि यदि पेंशनर्स की दलीलें संतोषजनक नहीं हुईं, तो उन्हें इलाज का खर्च खुद वहन करना पड़ सकता है। इससे पेंशनर्स के बीच चिंता का माहौल बन गया है।

ECHS ने कहा है कि सभी पेंशनर्स को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। लेकिन अगर पेंशनर्स उचित कारण दे पाते हैं, तो उनके कार्ड को निलंबित नहीं किया जाएगा। वहीं, भविष्य में नियमों को स्पष्ट करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

देश के लिए अपनी जिंदगी दी, अब इलाज का पैसा वापस मांग रहे

वहीं, कई पेंशनर इस नोटिस के आने के बाद से परेशान हैं। कई पेंशनर्स को पहले ही अपने इलाज पर मोटा खर्च उठाना पड़ता है। अब अगर उन्हें वह खर्च वापस करना पड़ा, तो यह उनके लिए और भी मुश्किल हो जाएगा।

रिटायर्ड कर्नल अशोक शर्मा कहते हैं कि उन्होंने हाल ही में ECHS के जरिए इलाज करवाया था, वह बताते हैं,

“मेरे क्षेत्र में ECHS का नजदीकी अस्पताल 40 किलोमीटर दूर है। जब मेरी पत्नी को अचानक स्वास्थ्य समस्या हुई, तो मुझे नजदीकी प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा। अब मुझे नोटिस मिला है कि मैंने नियम तोड़ा है। यह मेरे लिए बहुत कठिनाई पैदा कर रहा है।”

वहीं रिटायर्ड सूबेदार राम सिंह का कहना है, “ECHS के नियम इतने जटिल हैं कि उन्हें समझना आसान नहीं है। मेरे इलाज का बिल 80,000 रुपये था, लेकिन अब ECHS कह रही है कि मैं इसे खुद भरूं। यह अन्यायपूर्ण है।”

दिल्ली के एक रिटायर्ड सूबेदार ने बताया, “हमने देश के लिए अपनी जिंदगी दी। अब जब हमें स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है, तो यह योजना ही हमारे खिलाफ हो गई है। मैं अपनी पेंशन से इलाज का खर्चा कैसे वापस कर सकता हूं?”

क्या कहते हैं जानकार?

ECHS के इस फैसले पर विशेषज्ञ भी अपनी राय दे रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकार कर्नल (सेवानिवृत्त) मनोज त्रिपाठी का कहना है, “ECHS एक महत्वपूर्ण योजना है, लेकिन इसके संचालन में पारदर्शिता और सरलता होनी चाहिए। पेंशनर्स को अनावश्यक परेशान करना सही नहीं है।”

वहीं, ECHS से जुड़े अस्पतालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कई पेंशनर्स का कहना है कि सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती। इसके अलावा, कई बार अस्पताल जरूरी सेवाएं देने में भी असमर्थ रहते हैं।

The ECHS card suspension has raised concerns about the role of ECHS-affiliated hospitals. Many pensioners claim that the quality of treatment in listed hospitals is not satisfactory. Additionally, hospitals often struggle to provide essential services.

Explainer Nimisha Priya: कौन हैं निमिषा प्रिया और क्यों हो रही है उनकी फांसी की सजा पर चर्चा? क्या ‘ब्लड मनी’ से बचेगी उनकी जान?

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Explainer Nimisha Priya: भारत ने मंगलवार को कहा कि वह यमन में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स निमिषा प्रिया के मामले में सभी संभावित विकल्पों को तलाशने में हरसंभव मदद कर रहा है। निमिषा प्रिया पर एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है और उन्हें इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हम यमन में निमिषा प्रिया को दी गई सजा से अवगत हैं। हमें जानकारी है कि प्रिया का परिवार इस मामले में प्रासंगिक विकल्पों की तलाश कर रहा है। हालांकि, उनकी जिंदगी एक अप्रत्याशित मोड़ लेगी, यह किसी ने सोचा नहीं था। निमिषा का नाम एक हत्या के मामले में आया, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। आईए जानते हैं कौन हैं निमिषा प्रिया?

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Explainer Nimisha Priya: कौन हैं निमिषा प्रिया

दरअसल निमिषा प्रिया एक भारतीय नर्स हैं, जो केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर जीवन जीने के सपने के साथ, वह 2008 में यमन चली गईं। भारत में नर्सों के लिए खाड़ी देशों में काम करना बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ के लिए एक बड़ा मौका होता है। वहां उन्होंने हेल्थ सेक्टर में काम किया और वहां एक अच्छे करियर की शुरुआत की। निमिषा का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था; उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे, और उनके पति व बेटी 2014 में आर्थिक तंगी के चलते भारत लौट आए।

यमन में काम करने के दौरान, निमिषा ने कई अस्पतालों में नौकरी दी और 2015 में अपना खुद का क्लिनिक खोलने की योजना बनाई। इसके लिए उन्हें एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की मदद लेनी पड़ी, क्योंकि यमन के कानून के अनुसार केवल वहां के नागरिक ही क्लिनिक खोल सकते हैं।

यमन में शुरू किया खुद का क्लिनिक

2015 में, तलाल महदी ने निमिषा के साथ मिलकर क्लिनिक शुरू किया। हालांकि, इस साझेदारी में सब कुछ ठीक नहीं रहा और यह साझेदारी जल्द ही कड़वाहट में बदल गई। निमिषा के परिवार के अनुसार, निमिषा के परिवार का आरोप है कि महदी ने दस्तावेजों में हेरफेर कर क्लिनिक का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और निमिषा को उनका हिस्सा देने से इनकार कर दिया। उसने यह भी दावा किया कि निमिषा उसकी पत्नी हैं, और इसके लिए उसने निमिषा की शादी की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल भी किया। तलाल ने निमिषा का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया, जिससे वह यमन छोड़कर भारत नहीं आ सकीं।

निमिषा की शिकायत पर पुलिस ने दिखाई बेरुखी

2017 में, दोनों के बीच कड़वाहट औऱ बढ़ गई। तलाल ने न केवल निमिषा के पैसे और गहने हड़प लिए, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। निमिषा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन यमन की पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। इसके उलट, उन्हें छह दिन तक जेल में रखा गया। जेल से लौटने के बाद, तलाल का उत्पीड़न और बढ़ गया।

पासपोर्ट पाने के लिए तलाल को खिलाई बेहोशी की दवा

तलाल से अपना पासपोर्ट वापस पाने की कोशिश में, निमिषा ने कथित तौर पर उसे बेहोशी की दवा दी। दुर्भाग्यवश, दवा की अधिक मात्रा के कारण तलाल की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, निमिषा यमन से भागने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2018 में उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया और 2020 में सना की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। निमिषा ने इसे आत्मरक्षा का कदम बताया, क्योंकि महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और वह उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। वहीं, महदी के परिवार ने निमिषा पर हत्या का आरोप लगाया। यमन पुलिस ने निमिषा को गिरफ्तार कर लिया, और उन्हें 2018 में हत्या का दोषी ठहराया गया।

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मौत की सजा और “ब्लड मनी”

2020 में, सना की अदालत ने निमिषा प्रिया को फांसी की सजा सुनाई। उनके परिवार और वकीलों ने अपील की, लेकिन नवंबर 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने उनकी अपील खारिज कर दी। लेकिन “ब्लड मनी” (खून बहाने का मुआवजा) के जरिए माफी की संभावना खुली रखी। यमन की शरिया कानून व्यवस्था के तहत, यदि पीड़ित का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले, तो आरोपी की सजा माफ की जा सकती है।

ब्लड मनी: अंतिम उम्मीद

यमन में ब्लड मनी एक प्राचीन प्रथा है, जिसे अरबी में “दीया” कहा जाता है। जहां आरोपी मृतक के परिवार को आर्थिक मुआवजा देकर माफी मांग सकता है। निमिषा का परिवार और समर्थक अब महदी के परिवार को ब्लड मनी के जरिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले से जुड़े एक वकील का कहना है कि यदि महदी का परिवार ब्लड मनी स्वीकार कर लेता है, तो निमिषा की फांसी टल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में समय और बड़ा धनराशि जुटाना एक बड़ी चुनौती है। निमिषा के परिवार ने ब्लड मनी के रूप में मुआवजा देने की पेशकश की है। इसके लिए उन्होंने करीब 70 लाख रुपये जुटाने की कोशिश शुरू की है।

भारत सरकार से मदद की गुहार

भारत सरकार इस मामले में सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने यमन सरकार के साथ संपर्क किया है। साथ ही, यमन स्थित भारतीय दूतावास निमिषा को कानूनी मदद उपलब्ध करा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने कहा, “सरकार इस मामले में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। भारत सरकार ने निमिषा के मामले को गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार इस मामले में सभी संभव मदद कर रही है। यमन में भारतीय दूतावास निमिषा की कानूनी सहायता और अन्य विकल्पों पर काम कर रहा है।”

निमिषा के परिवार ने भी भारतीय नागरिकों और सरकार से मदद की अपील की है। उनकी मां ने कहा, “तलाल ने मेरी बेटी को झूठे कागजातों और बंदूक के दम पर प्रताड़ित किया। अगर उसे न्याय नहीं मिला, तो उसकी जान चली जाएगी।”

निमिषा की मां का कहना है कि उनकी बेटी ने अपनी जान बचाने के लिए यह कदम उठाया। वह कहती हैं, “महदी ने हमारी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने हमारे परिवार को तोड़ने की कोशिश की और हमारी बेटी को बंदी बना रखा था।”

परिवार का दावा है कि निमिषा ने यमन पुलिस से शिकायत भी की थी, लेकिन महदी के प्रभाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सोशल मीडिया पर अभियान

जब निमिषा प्रिया की कहानी भारत में आई, तो यह मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। कई लोगों ने उनकी फांसी की सजा को लेकर सवाल उठाए। मानवाधिकार संगठनों और उनके परिवार ने उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई। सोशल मीडिया पर #SaveNimishaPriya नामक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों से मुआवजे के लिए धन जुटाने की अपील की जा रही है। कई मानवाधिकार संगठनों ने भी निमिषा को माफी दिए जाने की मांग की है। केरल में कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से अपील की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे। लोगों का मानना है कि निमिषा के साथ न्याय होना चाहिए और उन्हें एक और मौका मिलना चाहिए।

क्या होगा आगे?

क्या निमिषा प्रिया अपनी फांसी की सजा से बच पाएंगी? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। निमिषा की सजा को लेकर अंतिम फैसला यमन सरकार और खालिद के परिवार की सहमति पर निर्भर करेगा। भारत सरकार और सामाजिक संगठन लगातार इस मामले पर नजर रख रहे हैं। निमिषा प्रिया का मामला सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी सवाल खड़ा करता है। यह घटना उन महिलाओं के लिए भी एक उदाहरण है, जो विदेशों में काम करते हुए मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती हैं।

Explainer Nimisha Priya is currently a topic of discussion due to her sentencing to death. The article aims to shed light on who Nimisha Priya is and why she is facing capital punishment. Will her life be spared from ‘Blood Money’?

LCA Tejas Mk2 delay: तेजस Mk-2 प्रोजेक्ट के लिए नई चुनौती! बढ़ सकती हैं GE-414 इंजन की कीमतें, वायुसेना की तैयारियों पर पड़ेगा असर!

LCA Tejas Mk2 Delayed: Rising GE-414 Engine Costs Impact IAF Readiness!

LCA Tejas Mk2 delay: जहां चीन एक तरफ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की टेस्टिंग कर रहा है, वहीं भारत के चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स के डेवलपमेंट की राह में रोड़े खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA Tejas Mk2 के लिए अमेरिकी कंपनी से GE-414 इंजन की सप्लाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से इंजन की सप्लाई को लेकर की गई डील में अब नए GE-414 इंजन की कीमत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कीमतों को लेकर अब अमेरिकी कंपनी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच इस पर चर्चा जारी है।

LCA Tejas Mk2 Delayed: Rising GE-414 Engine Costs Impact IAF Readiness!

बता दें कि LCA Mark-1A में इस्तेमाल होने वाले GE-404 इंजन की सप्लाई में पहले ही 18 महीने से अधिक की देरी हो चुकी है। अब यह सप्लाई मार्च 2025 से पहले शुरू होने की उम्मीद नहीं है। सूत्रों के अनुसार, GE-414 इंजन सौदे की कीमत इस देरी और सप्लाई चेन की चुनौतियों के कारण बढ़ सकती है। अमेरिकी निर्माता कंपनी ने सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को इस देरी की वजह बताया है।

The delay in the development of LCA Tejas Mk2 is primarily due to the necessary integration of the GE-414 engine. The incorporation of this engine is crucial for enhancing the performance and capabilities of the aircraft.

क्यों जरूरी है GE-414 इंजन?

GE-414 इंजन प्रोजेक्ट भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए बेहद अहम है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत को 4th जनरेशन का लड़ाकू विमान विकसित करने में आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, GE-404 इंजन की देरी और अन्य तकनीकी दिक्कतों के चलते यह कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।

GE-414 इंजन 98 किलो न्यूटन की ताकत वाला एडवांस इंजन है, जिसे LCA Mk 2 के लिए डिजाइन किया गया है। भारतीय वायुसेना को अपनी ऑपरेशनल कैपेबिलिटी बनाए रखने और मॉर्डर्न वारफेयर का सामना करने के लिए इन विमानों की सख्त जरूरत है।

इंजन आपूर्ति में देरी का असर न केवल LCA मार्क 1A और मार्क 2 परियोजनाओं पर पड़ा है, बल्कि इंजन सप्लाई में हो रही देरी ने भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारियों को भी प्रभावित किया है। HAL और रक्षा मंत्रालय के बीच चल रही चर्चाओं के बावजूद, समय पर इंजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में चुनौतियां बनी हुई हैं। वायुसेना ने पहले ही 83 LCA Mark-1A विमानों का ऑर्डर दिया है और 97 और विमानों की आवश्यकता पर काम चल रहा है।

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तेजस के प्रोडक्शन में देरी पर संसदीय समिति ने जताई नाराजगी

भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से संसद की स्थायी रक्षा समिति ने तेजस लड़ाकू विमानों के उत्पादन में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की है। समिति ने शीतकालीन सत्र के दौरान रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाए। यह सिफारिश समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में पेश की गई रिपोर्ट में की गई है।

HAL को वायुसेना के लिए 83 तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया गया था, जिसकी कुल लागत 48,000 करोड़ रुपये है। इन विमानों की डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक एक भी विमान वायुसेना को सौंपा नहीं गया है। समिति ने इस देरी पर गहरी चिंता जताई है और HAL को अपनी उत्पादन क्षमता में सुधार करने का निर्देश दिया है।

LCA Tejas Mk2 delay: वायुसेना में स्क्वाड्रन की कमी

रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन के साथ संभावित दो-फ्रंट युद्ध की तैयारी के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, फिलहाल वायुसेना के पास केवल 31 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं, जिनमें प्रत्येक में 16-18 लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह कमी भारतीय सुरक्षा रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

1983 में शुरू हुआ था LCA कार्यक्रम

भारत के हल्के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम 1983 में शुरू हुआ था। तेजस LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है, जिसे 2001 में पहली बार उड़ाया गया। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना को स्वदेशी तकनीक से लैस करना और विदेशी विमानों पर निर्भरता को कम करना था। तेजस के डेवलपमेंट में कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन HAL और DRDO ने मिलकर इसे सफल बनाया। वर्तमान में LCA मार्क 1A भारतीय वायुसेना का हिस्सा है और मार्क 2 तथा AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) परियोजनाएं प्रगति पर हैं।

हालांकि, इंजन का मुद्दा लंबे समय से इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। शुरुआत में डीआरडीओ के बनाए स्वदेशी Kaveri इंजन का इस्तेमाल करने की योजना थी, लेकिन वह तकनीकी कमियों और जरूरी थ्रस्ट पावर न होने के कारण यह सफल नहीं हो पाया। इसके बाद भारत ने अमेरिकी GE-404 और GE-414 इंजन पर भरोसा जताया।

31 मार्च 2024 तक सौंपा जाना था पहला तेजस Mk-1A

भारतीय वायुसेना (IAF) को पहला तेजस Mk-1A विमान 31 मार्च 2024 तक सौंपा जाना था, लेकिन यह समय सीमा पूरी नहीं हो पाई। देरी के मुख्य कारणों में कुछ जरूरी सर्टिफिकेशन में बाधा और GE की ओर से समय पर इंजन की आपूर्ति न होना शामिल है। अमेरिकी कंपनी GE को वित्तीय वर्ष 2023-24 में HAL को छह F404 इंजन सप्लाई करने थे, लेकिन सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण यह पूरा नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, GE ने मैसाचुसेट्स स्थित लिन में F404 इंजन की प्रोडक्शन लाइन को कुछ साल पहले बंद कर दिया था। इसे फिर से शुरू करने पर पुर्जों और कंपोनेंट्स के सर्टिफिकेशन से जुड़ी दिक्कतें सामने आईं। अब GE ने इन समस्याओं का समाधान कर लिया है और HAL के अधिकारियों ने भी इस महीने GE के सप्लायर्स के साथ चर्चा की है।

LCA Tejas Mk1A Engine: ऑनलाइन मिल रहा तेजस का GE-F404 इंजन! यूजर बोले- HAL को कैश ऑन डिलीवरी ऑप्शन दे दो, अब शायद समय पर इंजन मिल जाए

तेजस Mk-1A पुराने Mk-1 वर्जन के मुकाबले ज्यादा आधुनिक है। इसमें उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं। वहीं, HAL ने तेजस विमानों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नासिक में नई प्रोडक्शन लाइन स्थापित की है। यह लाइन सालाना 24 विमान बनाने की क्षमता रखती है, जबकि बेंगलुरु में मौजूदा प्रोडक्शन लाइन 16 विमान सालाना तैयार कर सकती है।

HAL और GE एयरोस्पेस ने तेजस Mk-2 के लिए F414 इंजन के संयुक्त उत्पादन का समझौता किया है। इस समझौते के तहत GE भारत में 80% तकनीकी हस्तांतरण (ToT) करेगा। यह पहल न केवल स्वदेशी जेट इंजनों के विकास को बढ़ावा देगी बल्कि निर्यात के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगी। वहीं, तेजस Mk-1A वायुसेना के आधुनिकीकरण के रोडमैप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय वायुसेना ने अगले दशक में 350 तेजस विमानों (Mk-1, Mk-1A और Mk-2) को शामिल करने की योजना बनाई है। यह विमान वायुसेना की भविष्य की युद्धक क्षमताओं का आधार बनेगा।

AMCA में अभी देरी

भारत के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम में LCA Mark-1A और Mark-2 के साथ-साथ पांचवीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का विकास भी शामिल है। AMCA प्रोजेक्ट को भविष्य में भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जा रहा है। यह विमान स्टेल्थ तकनीक, सुपरक्रूज़ क्षमता और एडवांस हथियार प्रणालियों से लैस होगा।

DRDO और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के अधिकारियों के अनुसार, AMCA के प्रोटोटाइप की पहली टेस्टिंग फ्लाइट साल 2026-27 तक होने की उम्मीद है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, तो इसका उत्पादन वर्ष 2032 तक शुरू हो सकता है।

AMCA की खासियतें
  • स्टेल्थ डिजाइन: दुश्मन के रडार से बचने के लिए आधुनिक स्टेल्थ तकनीक।
  • सुपरक्रूज़ क्षमता: बिना आफ्टरबर्नर के आवाज की गति से तेज उड़ान।
  • सेंसर फ्यूजन: वास्तविक समय पर डेटा साझा करने की उन्नत प्रणाली।
  • डुअल रोल: हवा से हवा और हवा से जमीन तक हमला करने की क्षमता।
  • स्वदेशी इंजन: GE के साथ साझेदारी में बनाए जा रहे इंजन के साथ ToT (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर)।