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HAL on Dhruv ALH glitch: ध्रुव हेलिकॉप्टर में तकनीकी गड़बड़ी पर एचएएल ने दी सफाई, कहा- सेना को अभी भी इस प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा

HAL on Dhruv ALH glitch Issued Statement army fleet check

HAL on Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना के ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH Dhruv) में एक बार फिर तकनीकी खामी सामने आने पर हेलिकॉप्टर निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सफाई दी है। एचएएल का कहना है कि वन-टाइम चेक (ओटीसी) एक नियमित मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जो टेल ड्राइव शाफ्ट (टीडीएस) में किसी खराबी के बाद जारी की जाती है। बता दें कि एक उड़ान के दौरान भारतीय सेना के एक हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद सेना ने पूरे एएलएच बेड़े की जांच का आदेश दिया है।

Dhruv ALH glitch: भारतीय सेना का ध्रुव हेलिकॉप्टर फिर हुआ गड़बड़ी का शिकार, पूरे बेड़े की जांच का आदेश, नेवी और कोस्टगार्ड का बढ़ा इंतजार!

HAL on Dhruv ALH glitch: रिपोर्ट को बताया एकतरफा

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अपना बयान जारी करते हुए उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर में एक उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट (TDS) को नुकसान पहुंचा था। यह घटना हाल ही में 4 सितंबर को आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के हेलिकॉप्टर IA-1134 के साथ हुई थी। इस घटना ने एक बार फिर एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव की सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। एचएएल ने इस रिपोर्ट को एकतरफा बताया है।

HAL on Dhruv ALH glitch: वन-टाइम चेक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया

एचएएल की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “वन-टाइम चेक (OTC) एक सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया है, जिसे किसी भी समस्या के सामने आने पर किया जाता है। इस बार टेल ड्राइव शाफ्ट में समस्या आने पर यह आदेश जारी किया गया। एचएएल भारतीय सेना के साथ मिलकर काम कर रहा है और विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए भेजा गया है।”

एचएएल ने यह भी दोहराया कि ध्रुव ALH बेड़े ने अब तक 4.5 लाख से ज्यादा घंटे उड़ान भरी है और पिछले दो दशक से अधिक समय से इसे सेना, वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड और सिविल ऑपरेटर इस्तेमाल कर रहे हैं। यह हेलिकॉप्टर हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर समुद्री इलाकों तक कठिन परिस्थितियों में उड़ान भरता रहा है।

HAL on Dhruv ALH glitch: अभी भी प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा

एचएएल का कहना है कि हेलीकॉप्टरों की निरंतर उड़ान योग्यता के लिए रखरखाव पहलू महत्वपूर्ण हैं और वह इस बात पर ज़ोर देता है कि सभी रखरखाव निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। एचएएल ने कहा कि हाल ही में बाढ़ के चलते कई इलाकों में चल रहे राहत और आपातकालीन बचाव अभियानों में, भारतीय सेना ने फंसे हुए नागरिकों और सीआरपीएफ कर्मियों को निकालने के लिए एएलएच ध्रुव का इस्तेमाल किया। यहां कि बेहद जोखिम वाले हेलीकॉप्टर बचाव अभियान भी चलाए, जो एएलएच ध्रुव की वजह से ही संभव हो पाए। एचएएल का कहना है कि यह बताता है कि सेना को अभी भी इस प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा है।

सेना ने जारी किया पत्र

हेलिकॉप्टर के टेल ड्राइव शाफ्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद सेना की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि उड़ान के दौरान IA-1134 हेलिकॉप्टर में स्टेशन #9A पर TDS बेयरिंग माउंट टूटने की घटना दर्ज की गई। पत्र में लिखा गया कि फ्लाइट सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी ध्रुव हेलिकॉप्टरों में वन-टाइम चेक अनिवार्य रूप से किया जाए।

इस जांच में वायुसेना और नौसेना के ध्रुव हेलिकॉप्टर भी शामिल किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी ALH की जांच टीडीएस बेयरिंग, इलास्टोमेरिक बुश, टेल बूम टॉप फेस शीट और TDS ब्रैकेट की विजुअल जांच के साथ की जाए। इसके लिए 10X मैग्निफाइंग ग्लास के इस्तेमाल का निर्देश भी दिया गया है।

एचएएल का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सही डेटा को देखा जाना चाहिए। कंपनी ने मीडिया से अपील की है कि ध्रुव ALH जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग करते समय गलत और भ्रामक जानकारियों से बचें।
एचएएल का मानना है कि ALH ध्रुव भारतीय सशस्त्र बलों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है और इसकी तकनीकी जांच और सुधार लगातार जारी है।

पोरबंदर हादसे के बाद किया था ग्राउंड

इस साल जनवरी में गुजरात के पोरबंदर में कोस्ट गार्ड का एक एएलएच ध्रुव क्रैश हुआ था, जिसमें दो पायलट और एक एयरक्रू डाइवर की मौत हो गई थी। इसके बाद नौसेना और कोस्ट गार्ड के ध्रुव हेलिकॉप्टरों को ग्राउंडेड कर दिया गया था। पोरबंदर हादसे के बाद बनी हाई-लेवल कमिटी ने पाया था कि स्वाशप्लेट फ्रैक्चर दुर्घटना का कारण था। यह हेलिकॉप्टर के कंट्रोल सिस्टम का अहम हिस्सा है। हालांकि, इसके टूटने की असली वजह का पता नहीं चल सका। इसके बाद एचएएल ने जांच के दायरे को बढ़ाया और बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) को फैटीग टेस्ट करने की जिम्मेदारी दी।

एचएएल ने नौसेना और कोस्ट गार्ड के दो एएलएच हेलिकॉप्टरों पर विशेष उपकरण लगाए हैं ताकि ट्रांसमिशन सिस्टम, गियरबॉक्स और रोटर हब जैसी अहम यूनिट्स का डेटा जुटाया जा सके। माना जा रहा है कि समुद्री माहौल में लंबे समय तक ऑपरेशन करने से एएलएच में तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं।

मई 2025 में गहन जांच के बाद सेना और वायुसेना के लगभग 300 ALH को फिर से उड़ान की अनुमति मिली थी। यह फैसला डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन कमिटी की सिफारिश पर हुआ था। इस कमेटी में CEMILAC (सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन), DG-AQA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस) और एचएएल के अधिकारी शामिल थे। वहीं, नौसेना और कोस्ट गार्ड के ALH अब भी ग्राउंडेड हैं और उन्हें उड़ान की अनुमति नहीं मिली है।

रक्षा समाचार डॉट कॉम को जानकारी देते हुए एचएएल के सीनियर सूत्रों ने बताया था कि जल्द ही नौसेना और कोस्टगार्ड के ध्रुव हेलीकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया था कि अगले महीने तक कुछ ध्रुव उड़ान भरने लगेंगे। उन्हें पहले कुछ परीक्षणों से गुजरना होगा, और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उड़ान भरने की अनुमति मिलेगी।

पिछले पांच सालों में ध्रुव एएलएच हेलिकॉप्टरों के करीब 15 हादसे हो चुके हैं। 2023-24 में ही हेलिकॉप्टर का डिजाइन रिव्यू किया गया और इसके कंट्रोल सिस्टम में बदलाव किए गए। बावजूद इसके, कई बार तकनीकी खामियों के चलते एएलएच को ग्राउंड करना पड़ा।

एएलएच ध्रुव सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन और कॉम्बैट मिशनों के लिए भी इस्तेमाल होता है।

Army Chief on Op Sindoor: आर्मी चीफ बोले- 10 मई को खत्म नहीं हुई थी पाकिस्तान से जंग, थिएटराइजेशन “आज नहीं तो कल जरूर आएगा”

Army Chief on Op Sindoor: War with Pakistan Didn’t End on May 10
General Upendra Dwivedi, COAS, today unveiled the book “Operation SINDOOR: The Untold Story of India's Deep Strikes Inside Pakistan” by Lieutenant General KJS 'Tiny' Dhillon (Retd).

Army Chief on Op Sindoor: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को साफ किया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर 10 मई को खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभियान लंबे समय तक चला और इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े।

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दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “आप सोच रहे होंगे कि जंग 10 मई को खत्म हो गई थी, लेकिन ऐसा नहीं था। यह और लंबे समय तक चला क्योंकि बहुत से अहम फैसले लेने थे। उससे आगे की बात करना मेरे लिए मुश्किल होगा।”

Army Chief on Op Sindoor: जारी रहा ऑपरेशन

सेना प्रमुख ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन की नई किताब “ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ इंडियाज डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान” की लॉन्चिंग के मौके पर बोलते हुए कहा, 6-7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। तीन दिन बाद यानी 10 मई तक इसे खत्म माना गया, लेकिन सेना प्रमुख ने पहली बार स्वीकार किया कि यह ऑपरेशन आगे भी जारी रहा। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अप्रैल 23 से लेकर 16 मई तक कई कठिन फैसले लेने पड़े। लोग सोचते हैं कि जंग 10 मई को खत्म हुई, लेकिन सच यह है कि कई अहम फैसले उसके बाद भी लिए गए। हमें यह तय करना था कि कब शुरू करें, कब रोकें, कितना समय, कितना संसाधन और किस तरह उपयोग करना है। कोई पहले से उदाहरण नहीं था, इसलिए हर फैसला अनुभव और चर्चा के आधार पर लेना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर इसका असर अभी आंकना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, “क्या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद खत्म हो गया? मुझे नहीं लगता, क्योंकि अब भी घुसपैठ की कोशिशें हो रही हैं। कितने आतंकियों को हमने मार गिराया और कितने भाग निकले, यह सब मीडिया में भी सामने आ चुका है।”

Army Chief on Op Sindoor: तालमेल और सिंक्रोनाइजेशन पर फोकस

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को “रिदमिक वेव” यानी लयबद्ध तरंग की तरह बताया। उनके अनुसार, हर जवान और हर अफसर आदेशों से पूरी तरह अवगत था और एकजुट होकर काम कर रहा था।

उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल हथियार ही काम नहीं आते, बल्कि कमांड और कंट्रोल का बेहतर स्ट्रक्चर भी उतना ही अहम होता है। इस दौरान सेंटर ऑफ ग्रेविटी पर लगातार फोकस रखा गया और यह सुनिश्चित किया गया कि हर कदम योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़े।

Army Chief on Op Sindoor: थिएटराइजेशन पर बोली यह अहम बाात

वहीं थिएटराइजेशन पर जनरल द्विवेदी ने अपनी राय रखते हुए कहा, “थिएटराइजेशन आज हो या कल, होना ही है। सवाल सिर्फ यह है कि इसमें कितना वक्त लगेगा। जब हम लड़ते हैं, तो केवल सेना नहीं लड़ती। हमारे पास बीएसएफ, आईटीबीपी, साइबर एजेंसी, स्पेस एजेंसी, कोऑपरेटिव वॉरफेयर एजेंसी, आईएसआरओ, सिविल डिफेंस, रेलवे और स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन जैसी कई संस्थाओं से तालमेल बैठाना होता है। इतने सारे एजेंसियों के बीच तालमेल की स्थिति में थिएटराइजेशन ही जवाब है। हमें एक ही कमांडर चाहिए और यूनिटी ऑफ कमांड सबसे ज्यादा जरूरी है।”

Army Chief on Op Sindoor: War with Pakistan Didn’t End on May 10
COAS General Upendra Dwivedi

बता दें कि हाल के दिनों में थिएटराइजेशन (Theaterisation) पर बहस छिड़ी हुई है। रणसंवाद 2025 में एयरफोर्स चीफ, नेवी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भी इस पर अपने-अपने विचार रखे थे।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड को लेकर कहा था कि अभी थिएटर कमांड लागू करने का समय नहीं है। इस तरह की जल्दबाजी से तीनों सेनाओं की कोर स्ट्रेंथ को नुकसान हो सकता है। उनका कहना था मिलिट्री कॉर्डिनेशन का स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जिसे सीधे तीनों सेनाओं के प्रमुख मिलकर ऑपरेट करें। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर जॉइंट प्लानिंग और फैसले अधिक व्यावहारिक होंगे और इससे अनावश्यक नई परतें जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने आगे बोलते हुए कहा था कि हमें अभी किसी नए स्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। जो सिस्टम मौजूद है, उसी में बेहतर काम हो सकता है। हमें दिल्ली में एक जॉइंट प्लानिंग और कॉर्डिनेशन सेंटर बनाना चाहिए, जहां से योजनाएं तैयार हों और फिर उनका क्रियान्वयन अलग-अलग स्तरों पर किया जाए।

वहीं, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा था कि समुद्री मोर्चे पर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की जरूरत है और इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड ही समाधान है। वहीं सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इस प्रक्रिया को “अनिवार्य” बताया था।

Army Chief on Op Sindoor: जीएसटी सुधारों की तारीफ

सेना प्रमुख ने हाल ही में घोषित जीएसटी सुधारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर को इसका सीधा फायदा मिलेगा और छोटे उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को भी राहत मिलेगी।

उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में तीन चीजें सबसे अहम हैं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और मॉडर्नाइजेशन। रिसर्च एंड डेवलपमेंट में आईडीईएक्स (IDEX) प्रोजेक्ट्स को जीएसटी छूट से सीधा फायदा होगा। ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम्युलेटर अब जीरो जीएसटी पर मिलेंगे, जिससे बड़ी संख्या में इन्हें खरीदा जा सकेगा।

मॉडर्नाइजेशन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारी और हल्के उपकरणों की खरीद में अब बाधाएं कम होंगी। मिलिट्री ड्रोन (UAVs) पर जीएसटी जीरो कर दिया गया है, जिससे आने वाले युद्धों में उनकी अहमियत और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा, “ड्रोन, यूएवी और काउंटर-यूएवी आने वाले समय में युद्ध का चेहरा तय करेंगे। इस सुधार से हमें काफी फायदा होगा।”

Army Chief on Op Sindoor: एलओसी को लेकर बोले आर्मी चीफ

जनरल द्विवेदी ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केजेएस ढिल्लन की नई किताब की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसमें कई ऐसी बातें सामने आई हैं जिन्हें अब तक वर्दीधारी अफसर नहीं बता सकते थे।

उन्होंने कहा, यह किताब सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशंस की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय सेना की हिम्मत, प्रोफेशनलिज्म और अटूट जज्बे को भी सलाम है। उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल की लड़ाई और उससे जुड़े मुद्दों पर हम इतने अभ्यस्त हो गए थे कि उसकी अहमियत, जज्बात, नुकसान, उपलब्धियां और चुनौतियों को हम महसूस ही नहीं कर पाए। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में यही अनकही कहानी सामने आती है। आप जानते हैं कि गलती से जब पाकिस्तान की तरफ से पुरस्कार देने की सूची बाहर आई, तो उसमें साफ दिखा कि सबसे बड़ा श्रेय लाइन ऑफ कंट्रोल को ही जाता है। यहां तक कि उसमें लिखा गया था ‘बहुत हुआ, फाइल छोड़ो और जल्दी से मुजफ्फराबाद भागो’। यह उस जबरदस्त फायर असॉल्ट की गवाही देता है।

उन्होंने कहा कि इस किताब में तीन अहम मुद्दों पर भी चर्चा है, फोर्स विजुअलाइजेशन, फोर्स प्रोटेक्शन और फोर्स एप्लिकेशन। साथ ही इसमें सेंट्रलाइज्ड प्लानिंग और डीसेंट्रलाइज्ड एक्जीक्यूशन पर भी बात की गई है।

उन्होंने कहा, “इस किताब ने वह सब कह दिया जो अब तक अनकहा था। इसने ऑपरेशन सिंदूर की चुनौतियों, भावनाओं, नुकसान और उपलब्धियों को सामने रखा। यह किताब सिर्फ सैन्य ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं बल्कि भारतीय सेना के साहस और प्रोफेशनलिज्म को श्रद्धांजलि भी है।”

Army Chief on Op Sindoor: एनसीईआरटी में शामिल

सेना प्रमुख ने यह भी बताया कि अब ऑपरेशन सिंदूर को एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में शामिल किया गया है। एक हिस्सा कक्षा 1 से 5 और दूसरा कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। यह किताब न सिर्फ़ नींव है बल्कि भविष्य की पढ़ाई और शोध के लिए भी रेफरेंस मटेरियल बनेगी। मिलिट्री स्ट्रैटेजिस्ट भी इसे कोट करेंगे। और आने वाले युद्धों के लिए इससे कई सबक सीखे जाएंगे।”

ले. जन. (रि.) केजेएस ढिल्लन ने कही ये बात

लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) केजेएस ढिल्लन ने अपनी नई किताब बोलते हुए कहा, यह किताब केवल एक मिलिट्री ऑपरेशन का ब्यौरा नहीं है, बल्कि उस राष्ट्रीय ऊर्जा, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य समन्वय का दस्तावेज है जिसने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक जीत सुनिश्चित की।

ढिल्लन ने बताया कि किताब की रूपरेखा 22 अप्रैल से लेकर 6 मई की रात तक की घटनाओं, इंटेलिजेंस इनपुट्स, कूटनीतिक पहल और सैन्य फैसलों पर आधारित है। इसमें टारगेट चुनने से लेकर सही हथियारों के इस्तेमाल और तेजी से किए गए हमलों तक का ब्यौरा है। उन्होंने खास तौर पर लाइन ऑफ कंट्रोल की जंग और नैरेटिव की जंग पर लिखे गए अध्यायों का जिक्र किया, जिन्हें अक्सर मीडिया कवरेज में नजरअंदाज कर दिया गया था। उनके अनुसार, यह वही मोर्चे थे जहां भारतीय सैनिकों का असली जिगरा सामने आया।

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 का रोलआउट अब 2027 तक टला, HAL ने बताई बार-बार टलने की ये बड़ी वजह?

Tejas Mk-2 Rollout Delayed to 2027
LCA Tejas Mk-2

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 (LCA Tejas Mk-2) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सूत्रों के मुताबिक यह अब 2027 में रोलआउट होगा। पहले इसकी समयसीमा 2025 के आखिर तक तय की गई थी, जिसे बाद में 2026 की पहली तिमाही तक बढ़ाया गया। लेकिन अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि इस विमान का पहला प्रोटोटाइप 2027 में ही तैयार होगा।

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यह बदलाव भारतीय वायुसेना के लिए अहम है क्योंकि तेजस मार्क-2 को पुराने मिग-21, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन किया गया है। वायुसेना की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ बनाए रखने और मॉडर्न वॉरफेयर में यह प्रोजेक्ट निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।

Tejas Mk-2 Rollout: बार-बार टल रही समयसीमा

तेजस मार्क-2 के शेड्यूल में यह तीसरा बड़ा बदलाव है। 2025 में इसके रोलआउट का दावा किया गया था, फिर इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया। लेकिन तकनीकी सुधारों की वजह से अब 2027 तय किया गया है। एचएएल सूत्रों ने बताया कि उनके पास फिलहाल 10 GE-414 इंजन हैं, जो तेजस मार्क-2 में लगाए जाने हैं। ये इंजन एडवांस में मंगवा कर रख लिए गए थे।

यह इंजन तेजस मार्क-1 और मार्क-1ए में इस्तेमाल होने वाले जीई एफ-404 इंजन से कहीं अधिक ताकतवर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस इस इंजन को भारत में बनाने के लिए साझेदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, इस इंजन और विमान के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी चल रही है। जिसके चलते देरी हो रही है।

Tejas Mk-2 Rollout: भारत में बनाया जाना है GE-414 इंजन

इस इंजन का निर्माण भारत में होगा, जो मेक इन इंडिया पहल का हिस्सा है। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान एचएएल और जीई एयरोस्पेस के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत जीई एफ-414 इंजन का 80 पीसदी ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी भारत को मिलेगा। पहले यह तकनीकी हस्तांतरण 58 फीसदी तक सीमित था, लेकिन लंबी बातचीत के बाद इसे बढ़ाकर 80 फीसदी किया गया। यह इंजन बेंगलुरु में एचएएल की फैसिलिटी में बनाया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि अमेरिका से सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं, और जल्द ही भारत में इस इंजन का उत्पादन शुरू होगा। अगले तीन महीने में इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में जीई एयरोस्पेस और एचएएल मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्थानीय इंजीनियरों और तकनीशियनों की भागीदारी होगी।

Tejas Mk-2 Rollout: AMCA में भी इस्तेमाल होगा ये इंजन

जीई एफ-414 इंजन के निर्माण के लिए एचएएल ने बेंगलुरु में एक नई प्रोडक्शन लाइन तैयार की है। यह सुविधा तेजस मार्क-1ए और मार्क-2 दोनों के लिए इंजनों और विमानों के प्रोडक्शन में मदद करेगी। सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीनों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद 2026 तक पहला प्रोटोटाइप इंजन तैयार हो सकता है। यह इंजन न केवल तेजस मार्क-2 के लिए, बल्कि भविष्य में अन्य स्वदेशी विमानों, जैसे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

Tejas Mk-2 Rollout: सर्टिफिकेशन है जरूरी

तेजस मार्क-2 और इसके जीई एफ-414 इंजन के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। सर्टिफिकेशन का काम सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन (सीईएमआईएलएसी) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) द्वारा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में इंजन और विमान की सुरक्षा, प्रदर्शन, और युद्धक क्षमताओं का कड़ाई से परीक्षण होता है। तेजस मार्क-2 का पहला प्रोटोटाइप 2027 के मध्य तक रोलआउट होने की उम्मीद है, और इसके बाद इसके टैक्सी ट्रायल होंगे। इस दौरान इंजन के ग्राउंड टेस्ट, फ्लाइट टेस्ट, और सिस्टम इंटीग्रेशन की जांच की जाएगी। सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इंजन और विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों, जैसे वेपन इंटीग्रेशन और एडवांस एवियॉनिक्स को पूरा करते हैं।

सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं। पहले चरण में इंजन का ग्राउंड टेस्ट होगा, जिसमें इसकी थ्रस्ट, फ्यूल एफिशिएंसी की जांच होगी। इसके बाद, विमान के साथ इंजन का इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्ट होंगे। इन टेस्टों में विमान की रफ्तार, मैन्यूवरेबिलिटी, और हथियार प्रणालियों की सटीकता की जांच होगी। सीईएमआईएलएसी यह सुनिश्चित करेगा कि इंजन और विमान अंतरराष्ट्रीय मानकों, जैसे मिलिट्री स्टैंडर्ड (MIL-STD), को पूरा करते हैं। इस प्रक्रिया में एक-दो साल का समय लग सकता है, जिसके बाद तेजस मार्क-2 का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा।

Tejas Mk-2 Rollout: जानें कितना ताकतवर है जीई एफ-414 इंजन

तेजस मार्क-2 में लगने वाला जीई एफ-414 इंजन एक ट्विन-स्पूल, लो-बायपास टर्बोफैन इंजन है। यह इंजन 98 किलोन्यूटन का थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस मार्क-1 के जीई एफ-404 इंजन (84 किलोन्यूटन) की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। यह इंजन विमान को 2,385 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक 1.8) की अधिकतम रफ्तार देता है। इसकी मदद से तेजस मार्क-2 2,500 किलोमीटर की रेंज और 1,500 किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज हासिल कर सकता है। यह इंजन विमान को 56,758 फीट की ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम है। जीई एफ-414 को कम रखरखाव लागत, और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के लिए डिजाइन किया गया है। यह इंजन पहले से ही अमेरिकी नौसेना के एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट और स्वीडन के साब जेएएस 39 ग्रिपेन जैसे विमानों में इस्तेमाल हो रहा है।

Tejas Mk-2 Rollout: तेजस मार्क-2 की खूबियां

तेजस मार्क-2, तेजस मार्क-1 और मार्क-1ए का एडवांस और ज्यादा ताकतवर वर्जन है। इसे 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल सुपरसोनिक लड़ाकू विमान कहा जा रहा है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन अंजाम देने में सक्षम होगा। इस विमान का आकार मार्क-1ए से बड़ा है। इसकी लंबाई करीब 47 फीट, विंगस्पैन 27 फीट और ऊंचाई 15 फीट रखी गई है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 17,500 किलोग्राम तक होगा। तेजस मार्क-2 लगभग 6,500 किलोग्राम का पेलोड लेकर उड़ान भर सकेगा। इसमें 13 हार्ड पॉइंट होंगे जिन पर मिसाइल, बम और ईंधन टैंक लगाए जा सकते हैं।

Tejas Mk-2 Rollout: एडवांस रडार और एवियोनिक्स

तेजस मार्क-2 में स्वदेश में बना उत्तम AESA रडार लगाया जाएगा। यह रडार 150-160 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के विमानों और जमीनी लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम होगा। इसके साथ ही, इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और ग्लास कॉकपिट दिया जाएगा। कॉकपिट नाइट विजन गॉगल्स के अनुरूप होगा, जिससे पायलट रात में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकेगा। एवियोनिक्स पैकेज को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि विमान किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जामिंग या साइबर हमले के दौरान भी सुरक्षित तरीके से काम कर सके।

लगा सकेंगे ये हथियार

तेजस मार्क-2 की हथियार क्षमता इसे और भी घातक बनाती है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें जैसे मेटियोर, असराम, मिका और स्वदेशी एस्ट्रा मिसाइल लगाई जा सकेंगी। इसके अलावा, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों में ब्रह्मोस-एनजी, स्टॉर्म शैडो और DRDO की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल शामिल होगी।

इसमें एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम 1, 2 और 3 भी इंटीग्रेट की जाएंगी, जो दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने में सक्षम होंगी। इसके अलावा, विमान स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड बम जैसे स्पाइस और डीआरडीओ के ग्लाइड बम भी ले जा सकेगा।

Tejas Mk-1A Price Hike: अब 97 नए तेजस मार्क-1ए को महंगे दामों पर बेचेगी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड! जानें HAL ने क्यों बढ़ाईं कीमतें?

New 97 Tejas Mk-1A Price Hike by Rs 102 Crore by HAL

Tejas Mk-1A Price Hike: भारतीय वायुसेना को मिलने वाले स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट अब पहले से महंगे हो गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की है कि नए करार में तेजस की कीमत में लगभग 17.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में हुए पिछले सौदे में एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है। तेजस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

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Tejas Mk-1A Price Hike: वायुसेना को मिलेगा 97 नए तेजस तेजस मार्क-1ए का बेड़ा

हाल ही में 19 अगस्त को सरकार ने भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 97 नए तेजस मार्क-1A (मार्क वन अल्फा) फाइटर जेट्स का ऑर्डर दिया था। यह डील करीब 62,000 करोड़ रुपये की है और इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तैयार करेगी। इस सौदे की पुष्टि 21 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी की।

इससे पहले 2021 में वायुसेना ने 83 तेजस Mk-1A का ऑर्डर दिया था जिसकी कीमत करीब 48,000 करोड़ रुपये थी। यानी अब तक कुल 180 तेजस Mk-1A का ऑर्डर हो चुका है। ये विमान धीरे-धीरे भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 जेट्स की जगह लेंगे।

Tejas Mk-1A Price Hike: एचएएल सूत्रों ने की बढ़ी हुईं कीमतों की पुष्टि

एचएएल के वरिष्ठ सूत्रों ने रक्षा समाचार को इस बात की पुष्टि की है कि नए करार में तेजस Mk-1A की प्रति विमान लागत पहले के मुकाबले बढ़ गई है। 2021 में हुए करार के मुताबिक एक विमान की औसत कीमत करीब 578 करोड़ रुपये थी। अब नए करार में यह बढ़कर लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति एयरक्राफ्ट हो गई है।

इस तरह हर विमान की कीमत में करीब 102 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी लगभग 17.6 फीसदी है।

Tejas Mk-1A Price Hike: क्यों बढ़ी कीमतें

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण गिनाए हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों में यह इजाफा न केवल महंगाई और ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों का नतीजा है, बल्कि नए तकनीकी अपग्रेड और आधुनिक रडार सिस्टम के शामिल होने की वजह से भी हुआ है।

उन्होंने पहला कारण गिनाते हुए कहा कि ग्लोबल महंगाई और सप्लाई चेन में बाधा बड़ी वजह रही है। 2021 के बाद से कच्चे माल, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी की वजह टेक्निकल अपग्रेड भी है। सूत्रों ने बताया कि नए तेजस Mk-1A विमानों में कई अत्याधुनिक फीचर्स जोड़े जाएंगे। इनमें ‘उत्तम’ AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, और आधुनिक हथियारों को इंटीग्रेट करने की क्षमता शामिल है।

वहीं तीसरा कारण उन्होंने सपोर्ट पैकेज को बताया। इसमें ग्राउंड सपोर्ट उपकरण, पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। ये सभी चीजों के चलते करार की कुल लागत में बढ़ोतरी हुई है।

Tejas Mk-1A Price Hike: अतिरिक्त इंजन खरीदने पर बातचीत

97 तेजस Mk-1A को उड़ाने के लिए अतिरिक्त GE-404 इंजनों की जरूरत होगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस के बीच 113 अतिरिक्त इंजन खरीदने की डील पर भी बातचीत चल रही है। इस इंजन डील की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,300 करोड़) बताई जा रही है। जल्द ही इस डील को अंतिम स्वरूप दे दिया जाएगा।

इससे पहले 2021 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 99 इंजन का ऑर्डर दिया था। मार्च 2025 तक जीई ने पहला इंजन डिलीवर भी कर दिया है। अनुमान है कि हर साल लगभग 20 इंजन भारत को दिए जाएंगे।

इसके साथ ही, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच GE-414 इंजन की जॉइंट प्रोडक्शन पर भी बातचीत हो रही है। ये इंजन तेजस Mk-2 के लिए होंगे और इसमें 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा।

अक्टूबर में दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सूत्रों ने बताया कि दो साल की देरी के बाद अगले महीने अक्टूबर में दो तेजस Mk-1A वायुसेना को डिलीवर कर दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस महीने तेजस मार्क-1A का फाइनल फायरिंग टेस्ट पूरा करेगा। इन परीक्षणों में देश में विकसित बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल अस्त्र, शॉर्ट रेंज मिसाइल ASRAAM, ब्रह्मोस एनजी और लेजर-गाइडेड बम का फायरिंग टेस्ट किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर ही विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जीई अगले साल मार्च 2026 तक 10 इंजन और फिर दिसंबर 2026 तक 20 और इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को डिलीवर करेगी।

इससे पहले रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 30 अगस्त 2025 को एक डिफेंस कॉन्क्लेव में तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी को लेकर कहा था कि लगभग 38 तेजस विमान पहले से ही सेवा में हैं, और 80 से अधिक का निर्माण चल रहा है। इनमें से 10 विमान तैयार हैं, और दो इंजन अब तक डिलीवर किए जा चुके हैं। उम्मीद है कि इनमें से पहले दो विमान सितंबर 2025 के आखिर तक डिलीवर कर दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा था कि हम अगले महीने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत करेंगे, जिसकी कीमत 67,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

वायुसेना की स्क्वॉड्रन स्ट्रेंथ

भारतीय वायुसेना चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वायुसेना को हर साल कम से कम 35-40 नए फाइटर जेट्स की जरूरत है। इस समय वायुसेना के पास केवल 31 स्क्वॉड्रन हैं।

26 सितंबर को मिग-21 के दो स्क्वॉड्रन रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी। जबकि टू-फ्रंट वॉर की संभावना (पाकिस्तान और चीन) को देखते हुए वायुसेना के पास 42 स्क्वॉड्रन होना जरूरी माना गया है।

60 फीसदी स्वदेशी कंपोनेंट

तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम में 60 फीसदी से अधिक कंपोनेंट भारत में बने हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ-साथ कई निजी कंपनियां भी इसमें जुड़ी हैं। लार्सन एंड टुब्रो, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज और VEM टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां इसमें अहम योगदान दे रही हैं।

तेजस मार्क-1ए की रफ्तार और रेंज

तेजस मार्क-1ए एक सुपरसोनिक फाइटर जेट है, जिसकी अधिकतम गति मैक 1.6 यानी करीब 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह जेट हवा में तेजी से ऊंचाई पकड़ सकता है और दुश्मन के विमान या मिसाइल को बहुत कम समय में चुनौती देने में सक्षम है। इसकी कॉम्बैट रेंज लगभग 500 किलोमीटर तक है, जबकि फेरी रेंज यानी बिना हथियार के लंबी दूरी की उड़ान क्षमता 1,700 किलोमीटर से अधिक है।

तेजस मार्क-1ए आधुनिक हथियारों से लैस है। इसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल एस्ट्रा, ASRAAM जैसी शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें, लेजर-गाइडेड बम और प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन (PGM) लगाए जा सकते हैं। साथ ही, इसमें ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन) जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। तेजस पर 3,500 किलोग्राम तक का हथियार लोड किया जा सकता है, जिसमें एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं।

रडार सिस्टम की बात करें, तेजस मार्क-1ए को उत्तम AESA रडार से लैस किया गया है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। यह गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से ट्रैक और टारगेट करने में सक्षम है। AESA रडार एक साथ कई लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी बचाता है। इसके अलावा, विमान में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल गाइडेंस को चकमा दे सकता है।

तेजस मार्क-1ए का डिजाइन हल्का और एयरोडायनामिक है, जिससे इसे एजिलिटी मिलती है। इसका फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम इसे बेहद स्थिर और सुरक्षित बनाता है। इसके साथ ही इसमें नाइट विजन कंपैटिबल ग्लास कॉकपिट, हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले (HMD) और मल्टी-फंक्शनल डिस्प्ले (MFDs) लगे हैं, जिससे पायलट को मिशन के दौरान तुरंत जानकारी मिलती है।

Tejas Mk-1A delivery India: भारतीय वायुसेना को मिलेगा दीपावली गिफ्ट, अक्टूबर में मिलेंगे दो तेजस-मार्क 1A, जीई से 113 इंजनों की खरीद का सौदा जल्द

Tejas Mk1A Delivery
File Photo

Tejas Mk-1A delivery India: अगर सब कुछ ठीक रहा हो तो अक्टूबर के महीने में भारतीय वायुसेना के लिए गुड न्यूज आने वाली है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने संकेत दिया है कि इस महीने दो तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स को सौंप दिए जाएंगे। यह डिलीवरी लगभग दो साल की देरी के बाद हो रही है।

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सूत्रों के अनुसार, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इसी महीने तेजस-मार्क 1A के फायरिंग टेस्ट पूरे करेगा। इन ट्रायल्स में बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल एस्ट्रा, शॉर्ट रेंज मिसाइल ASRAAM और लेजर गाइडेड बॉम्ब का इस्तेमाल किया जाएगा। सफल परीक्षणों के बाद ही एयरफोर्स को विमान सौंपे जांएगे।

हालांकि इससे पहले भी तेजस के फायरिंग टेस्ट किए गए थे। उस दौरान शुरुआती परीक्षण सफल रहे, लेकिन बाद में तकनीकी गड़बड़ियों के चलते एक टेस्ट असफल रहा। इसके बाद सॉफ्टवेयर में अहम बदलाव किए गए। अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को उम्मीद है कि सभी परीक्षण सफल रहेंगे और अक्टूबर में दो तेजस एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हो जाएंगे।

साथ ही, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक इस वित्त वर्ष मार्च 2026 तक 10 इंजन और दिसंबर 2026 तक 20 और इंजन डिलीवर करेगी। इससे तेजस की सप्लाई में रफ्तार आएगी और इंडियन एयरफोर्स की स्क्वाड्रनों की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकेगी।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल ही में कहा था कि इंडियन एयरफोर्स को हर साल 35 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। मौजूदा स्थिति में एयरफोर्स के पास 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं। 26 सितंबर को मिग-21 की दो स्क्वाड्रन रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर केवल 29 रह जाएगी। बता दें कि मिग-21 इस महीने 26 सितंबर को रिटायर हो जाएगा।

दरअसल, एयरफोर्स के लिए 42 स्क्वाड्रन की संख्या “सैंक्शनड स्ट्रेंथ” मानी जाती है। यह क्षमता इसलिए तय की गई थी ताकि भारत टू-फ्रंट वॉर यानी पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ाई की स्थिति में भी तैयार रह सके।

Tejas Mk-1A delivery India: 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद

सरकार ने हाल ही में 97 नए तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। यह सौदा लगभग 62,000 करोड़ रुपये का है। इससे पहले फरवरी 2021 में एयरफोर्स ने 83 तेजस मार्क-1A का ऑर्डर 48,000 करोड़ रुपये में दिया था।

इन्हीं विमानों के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने पहले 99 GE-404 इंजनों का ऑर्डर किया था। जीई ने मार्च 2025 में पहला इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौंपा। अगले साल तक 12 इंजन और उसके बाद हर साल 20-20 इंजन डिलीवर किए जाएंगे।

अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद का नया सौदा लगभग 1 बिलियन डॉलर का होने वाला है। यह ऑर्डर हाल ही में मंजूर किए गए 97 नए विमानों के लिए होगा।

GE-414 पर चल रही बात

तेजस मार्क-1A के अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच एक और अहम प्रोजेक्ट पर बातचीत चल रही है। इसमें भारत में ही GE-414 इंजन का संयुक्त उत्पादन करने की योजना है। यह इंजन तेजस मार्क-2 प्रोग्राम के लिए इस्तेमाल होगा। इस सौदे के तहत लगभग 80% तकनीक का ट्रांसफर भारत को मिलेगा। इसकी कीमत भी लगभग 1 बिलियन डॉलर मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस प्रोजेक्ट को “मेक इन इंडिया डिफेंस सेक्टर” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने जेट इंजन देश में ही बनाने होंगे।

तेजस Vs मिग-21

तेजस मार्क-1A का सबसे बड़ा रोल पुराने मिग-21 फाइटर जेट्स को रिप्लेस करना है। मिग-21, जो 1960 के दशक से इंडियन एयरफोर्स का हिस्सा रहे हैं, अब रिटायरमेंट की कगार पर हैं। 26 सितंबर को मिग-21 की अंतिम दो स्क्वाड्रन भी सेवा से बाहर हो जाएंगी।

तेजस मार्क-1A में आधुनिक एवियोनिक्स, मल्टी-रोल क्षमता और इंडिजिनस हथियार सिस्टम हैं। खासतौर पर DRDO द्वारा विकसित एस्ट्रा मिसाइल और रुद्रम मिसाइल को इसमें इंटीग्रेट किया जा रहा है। इससे एयरफोर्स की “बियॉन्ड विजुअल रेंज” क्षमता और दुश्मन के एयर डिफेंस को दबाने की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

एयरफोर्स की मौजूदा चुनौती

इंडियन एयरफोर्स इस समय “नंबर गैप” की समस्या से जूझ रही है। कई पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जा रहा है, जबकि नए विमानों की डिलीवरी अपेक्षित समय पर नहीं हो पा रही है। तेजस मार्क-1A की सप्लाई में देरी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

हालांकि, आने वाले महीनों में तेजस की डिलीवरी बढ़ने की संभावना है। जीई इंजनों की समय पर आपूर्ति और एचएएल की उत्पादन क्षमता में सुधार से एयरफोर्स को धीरे-धीरे नई ताकत मिलेगी।

MiG-21 retirement India: 63 सालों की सेवा के बाद 26 सितंबर को रिटायर होगा मिकोयान-गुरेविच-21, त्रिशूल से लेकर तलवार तक मिले कई नाम

Mig-21 Retirement: IAF’s First Supersonic Jet to Bid Farewell After 62 Years
Photo: IAF

MiG-21 retirement India: भारतीय वायुसेना (IAF) की शान रहे सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 अब इतिहास बनने जा रहे हैं। 62 साल तक आकाश में अपनी ताकत का परिचय देने के बाद ये विमान 26 सितंबर 2025 को चंडीगढ़ में आयोजित एक भव्य समारोह में विदाई लेंगे। वायुसेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह दिन मिग-21 की लंबी और गौरवशाली यात्रा का अंतिम पड़ाव होगा।

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MiG-21 retirement India: मिले ये नाम

आधिकारिक तौर पर इसे हमेशा मिकोयान-गुरेविच-21 (MiG-21) कहा गया। लेकिन भारतीय वायुसेना और पायलटों ने इसे कई नाम दिए। 2000 के दशक में रूस की मदद से अपग्रेड हुए इसके संस्करण को मिग-21 बाइसन नाम मिला, जिसमें लेटेस्ट एवियोनिक्स और नई तकनीकें जोड़ी गईं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में जब इसने दुश्मन को मात दी, तब इसे ‘विजय’ और ‘त्रिशूल’ जैसे नामों से भी नवाजा गया। इसकी तेज रफ्तार और हमलावर क्षमता के चलते इसे ‘तलवार’ भी कहा गया। वहीं, 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी विमानों के खिलाफ इसकी सफलता ने इसे ‘गन विद विंग्स’ यानी ‘पंखों वाली तोप’ भी नाम दिया गया था।

Mig-21 Retirement: IAF’s First Supersonic Jet to Bid Farewell After 62 Years
Photo: IAF

MiG-21 retirement India: केवल दो स्क्वॉड्रन बचे सेवा में

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास मिग-21 के सिर्फ दो स्क्वॉड्रन बचे हैं, नंबर 23 स्क्वॉड्रन (Panthers) और नंबर 3 स्क्वॉड्रन (Cobras)। दोनों राजस्थान के बिकानेर स्थित नल एयरबेस पर तैनात हैं। इन विमानों की जगह अब धीरे-धीरे स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस एमके-1ए ले रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने 97 नए तेजस एमके-1ए की खरीद के लिए 66,000 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी दी है।

MiG-21 retirement India: 1963 में आया था सर्विस में

मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक जेट था, जिसे 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। आने वाले दशकों में वायुसेना ने इसके कई वर्जन इस्तेमाल किए, जिनमें टाइप 77 (मिग-21एफएल), टाइप 96 (मिग-21 एम), और टाइप 75 (मिग-21 पीएफ) शामिल थे। इन विमानों ने 1965 और 1971 के युद्धों में भी पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। साथ ही, 1999 के कारगिल युद्ध में भी इन विमानों ने अहम भूमिका निभाई।

MiG-21 retirement India: जब एक मिग-21 ने चार साबरे को पछाड़ा

एयर मार्शल (रिटायर्ड) पृथ्वी सिंह बरार उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, “1971 में मैंने पाकिस्तान के रफीकुल एयरबेस पर 500 किलो के दो बम गिराए। वापसी के दौरान देखा कि चार अमेरिकी साबरे फाइटर जेट मेरे पीछे पड़ गए। मुझे लगा अब बचना मुश्किल है, लेकिन मिग-21 की स्पीड और मेरी ट्रेनिंग ने कमाल कर दिया। पाकिस्तानी विमान पीछा नहीं कर पाए और मैं सुरक्षित लौट आया।” बरार का मानना है कि मिग-21 केवल एक फाइटर जेट नहीं था, बल्कि हर पायलट का साथी और भरोसेमंद दोस्त था।

Mig-21 Retirement: IAF’s First Supersonic Jet to Bid Farewell After 62 Years
Photo: IAF

MiG-21 retirement India: फ्लाइंग कॉफिन का टैग

मिग-21 का इतिहास गौरवशाली होने के साथ-साथ विवादों से भी घिरा रहा। बार-बार हुए हादसों के चलते मीडिया ने इसे फ्लाइंग कॉफिन और विडो मेकर जैसे नाम भी दिए। 2013 में संसद में उस समय के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बताया था कि 1963 से 2012 के बीच मिग-21 के 482 हादसे हुए और इनमें 171 पायलटों की जान गई। हालांकि, एयर मार्शल बरार कहते हैं, “पायलटों की शहादत दुखद है, लेकिन मिग-21 ने कभी हमें ऑपरेशन्स में निराश नहीं किया। अगर हादसे हुए, तो उनके पीछे कई वजह थीं। दुनिया की दूसरी वायु सेनाओं में भी हादसों की दर कम नहीं रही है।”

2019 में F-16 को मार गिराया

मिग-21 बाइसन की एयर पावर का एक और उदाहरण 2019 में देखने को मिला। उस समय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने अपने मिग-21 से पाकिस्तान के F-16 को मार गिराया। हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे से इंकार किया, लेकिन भारत ने असलियत दुनिया के सामने रखी। यहां तक कि इस घटना के बाद अमेरिका भी अचंभे में पड़ गया था। क्योंकि अमेरिका का मानना था कि उसके एफ-16 फााइटर जेट को गिराना इतना आसान नहीं है।

400 से अधिक मिग-21

एक समय ऐसा था जब भारतीय वायुसेना के पास 19 स्क्वॉड्रन में 400 से अधिक मिग-21 तैनात थे। 2017 से 2024 के बीच कम से कम चार स्क्वॉड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया। असल में मिग-21 को 2022 तक रिटायर किया जाना था, लेकिन स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की धीमी डिलीवरी के चलते इसे कुछ साल और सेवा में बनाए रखा गया।

मिग-21 को हमेशा उसकी तेज रफ्तार और चुस्ती के लिए पहचाना गया। यही वजह थी कि इसे लंबे समय तक भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना गया। यह विमान इतनी रफ्तार से उड़ सकता था कि दुश्मन को पलभर में मात दे दे। इस सुपरसोनिक जेट की टॉप स्पीड 2,174 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिसे मैक 1.76 कहा जाता है। यानी यह ध्वनि की गति से लगभग दोगुना तेज उड़ सकता था। इसका स्ट्रक्चर 14.7 मीटर लंबा और 7.15 मीटर चौड़ा (विंगस्पैन) था। ऊंचाई की बात करें तो यह विमान 18,000 मीटर तक उड़ान भरने में सक्षम था।

ईंधन के मामले में मिग-21 में 3,831 लीटर क्षमता वाला टैंक था, जिससे यह लंबी दूरी भी तय कर सकता था। इसके अलावा, यह विमान 9,800 किलोग्राम तक का अधिकतम भार लेकर उड़ सकता था। इसमें हथियार, मिसाइल और अन्य जरूरी उपकरण शामिल रहते थे।

Mig-21 Retirement: IAF’s First Supersonic Jet to Bid Farewell After 62 Years
Photo: IAF

HAL ने बनाया भारत का मिग-21

हालांकि यह विमान सोवियत संघ में डिजाइन हुआ था, लेकिन भारत में इसकी असेंबली और उत्पादन का जिम्मा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने उठाया। भारत में 1,200 से अधिक मिग-21 तैयार किए गए, जो वायुसेना की रीढ़ साबित हुए।
2000 के दशक में भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने मिग-21 में बड़ा अपग्रेड भी किया। पुराने इंजनों की खामियों को सुधारा गया और आधुनिक उपकरण लगाए गए। इस अपग्रेडेड संस्करण को मिग-21 बाइसन नाम दिया गया। 2001 में इसके आधुनिक रूप को पहली बार शामिल किया गया और इसकी पहली स्क्वॉड्रन बनी 3 स्क्वॉड्रन कोबरा।

क्या होती है नंबर प्लेटिंग?

वायुसेना की भाषा में नंबर प्लेटिंग का मतलब है कि कोई स्क्वॉड्रन अस्थायी तौर पर सक्रिय नहीं रहती। उसका नाम, इतिहास और परंपरा सुरक्षित रखी जाती है। जब भविष्य में नए एयरक्राफ्ट उपलब्ध होते हैं, तो उसी स्क्वॉड्रन को फिर से उसी नाम और पहचान के साथ सक्रिय किया जाता है। इस बार मिग-21 के रिटायरमेंट के बाद जब स्क्वॉड्रन को नए स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए मिलेंगे, तो वही स्क्वॉड्रन अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं के साथ फिर से उड़ान भरेंगी।

वायुसेना प्रमुख ने उड़ान भर दी श्रद्धांजलि

मिग-21 की विदाई से पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद इस विमान में उड़ान भरी। राजस्थान के नाल एयरबेस से उन्होंने मिग-21 में उड़ान भरी। दिलचस्प बात यह है कि एयर चीफ ने अपने फ्लाइंग करियर की शुरुआत भी मिग-21 से ही की थी। इस उड़ान से पहले एयर चीफ ने एक दिन तक मिग-21 की पूरी ट्रेनिंग ली और फिर अगले दिन सोलो उड़ान भरी। उन्होंने मिग-21 को फॉर्मेशन उड़ान में भी शामिल किया। यह दो मिग-21 विमानों की फॉर्मेशन थी, जिसमें एक विमान को स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया उड़ा रही थीं और दूसरा एयर चीफ़ खुद संभाल रहे थे। इस फॉर्मेशन की कमान स्क्वॉड्रन लीडर प्रिया के हाथों में थी। इस उड़ान के साथ एयर चीफ मार्शल सिंह ने न सिर्फ अपने करियर की यादों को ताजा किया बल्कि मिग-21 को एक सम्मानजनक विदाई भी दी।

मिग-21 उड़ाने वाले एयरफोर्स चीफ्स

भारतीय वायुसेना में मिग-21 का सफर सिर्फ पायलटों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वायुसेना प्रमुखों के करियर का भी सााथी रह। पूर्व एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने अपने रिटायरमेंट से महज 15 दिन पहले इस लड़ाकू विमान में आखिरी उड़ान भरी थी। 13 सितंबर 2021 को उन्होंने हलवारा स्थित 23 स्क्वॉड्रन से मिग-21 उड़ाया। दिलचस्प बात यह रही कि भदौरिया का फ्लाइंग करियर भी इसी ‘पैंथर्स’ स्क्वॉड्रन से मिग-21 उड़ाते हुए शुरू हुआ था और उसी स्क्वॉड्रन, उसी एयरबेस और उसी विमान के साथ उनका करियर पूरा हुआ।

इससे पहले, सितंबर 2019 में तत्कालीन एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने भी अपने रिटायरमेंट से पहले मिग-21 में उड़ान भरी। यह उड़ान उन्होंने उस समय के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान के साथ मिग-21 के दो-सीटर वर्जन में भरी थी। धनोआ का मिग-21 से रिश्ता करगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा। 1999 में उन्होंने फ्रंटलाइन ग्राउंड अटैक स्क्वॉड्रन की कमान संभाली थी।

मई 2019 में, करगिल युद्ध में शहीद हुए स्क्वॉड्रन लीडर अजय आहूजा को श्रद्धांजलि देने के लिए धनोआ ने मिग-21 से ‘मिसिंग मैन’ फॉर्मेशन में उड़ान भरी थी। उस समय उन्होंने मिग-21 टाइप 96 उड़ाया। जनवरी 2017 में भी उन्होंने उत्तरलाई एयरबेस से सिंगल-सीटर मिग-21 उड़ाया था।

धनोआ से पहले, किसी एयरफोर्स चीफ ने अकेले मिग-21 उड़ान 2000-2001 में भरी थी। उस वक्त एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस (सेवानिवृत्त) ने बरेली और चंडीगढ़ से मिग-21 में उड़ान भरकर यह संदेश दिया था कि डेल्टा-विंग वाला यह विमान पूरी तरह सक्षम है और अपने समय में वायुसेना की रीढ़ रहा है।

Modi Xi Putin SCO: ट्रंप ने दिया रूस, भारत और चीन को मल्टीपोलर दुनिया बनाने का मौका, क्या फिर से जिंदा हो गया है RIC?

Modi Xi Putin SCO Meeting in Tianjin Sparks Buzz, What is RIC?

Modi Xi Putin SCO: तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फोटो वायरल हुई। इस फोटो में दुनिया की तीन महाशक्तियां एक साथ नजर आ रही हैं। वहीं इन तस्वीरों के अलग-अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं। इस तस्वीर को न्यू ग्लोबल ऑर्डर से जोड़ कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ न लगाते तो, तीनों का इस तरह साथ आना मुश्किल था। वहीं इस तस्वीर को आरआईसी यानी रूस, इंडिया और चीन स्ट्रक्चर से जोड़ कर देखा जा रहा है, जिसकी प्रस्तावना खुद रूस ने ही लिखी थी।

SCO Summit: चीन से बातचीत में राजनाथ सिंह ने सुनाई खरी-खरी, कहा- “सीमा विवाद का स्थायी हल जरूरी”, सुझाया ये चार-सूत्रीय प्लान

Modi Xi Putin SCO: ट्रंप ने भारत को किया मजबूर

ट्रंप ने जब से व्हाइट हाउस में वापसी की है, उन्होंने भारत पर 50% तक भारी टैरिफ लगा दिए हैं। इस वजह से भारत की स्टील, ऑटोमोबाइल और दवा जैसी इंडस्ट्रीज को लगड़ा झटका लगा है। ट्रंप के सलाहकारों ने सार्वजनिक तौर पर मोदी सरकार की नीतियों को “अनफेयर” और “लूट” तक कह दिया। ट्रंप ने खुद कहा, “इंडिया हमें बहुत बड़ा चूना लगा रहा है, अब हमें सख्त जवाब देना होगा।”

भारत ने ट्रंप के इन कदमों का जवाब ट्रेड वार से नहीं दिया, बल्कि दरवाजा बातचीत के लिए खुला रखा। संदेश साफ था कि दशकों से बने भारत-अमेरिका रिश्तों को एक राष्ट्रपति की आक्रामक नीतियों के कारण खराब नहीं किया जाएगा।

लेकिन ट्रंप सरकार की टैरिफ और लगातार हो रही बयानबाजी ने भारत को नई रणनीतिक सोच अपनाने पर मजबूर किया। भारत अब मल्टीपोलर और मल्टीलेटरल व्यवस्था का पक्षधर बनकर उभर रहा है, जिसमें वह रूस और चीन के साथ मिलकर वैश्विक संतुलन की दिशा तय करने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे शीत युद्ध के बाद भारत-अमेरिका संबंध सामान्य हुए थे, वैसे ही आज की परिस्थितियां भी रणनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से भारत को नए रास्ते चुनने पर मजबूर कर रही हैं। भारत और चीन के नजदीक आने की बड़ी वजह भी ट्रंप की विनाशकारी नीतियां हैं, जो न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि एससीओ का यह फोटो अमेरिका को लंबे समय तक परेशान करेगा। ट्रंप को इसके लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, क्योंकि उनकी टैरिफ नीति ही नए ग्लोबल ऑर्डर की शुरुआत का मोड़ साबित हो रही है।

Modi Xi Putin SCO: भारत-रूस-चीन (RIC) की अहमियत

भारत, रूस और चीन का पुराना आरआईसी स्ट्रक्चर और एससीओ अब ऐसे मंच बनते दिख रहे हैं, जहां भारत खुद को अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों के मुकाबले एक स्वतंत्र ताकत के रूप में पेश कर रहा है। जुलाई में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “बहुध्रुवीय दुनिया हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें देखना होगा कि ब्रिक्स आने वाले समय में इसका मार्गदर्शन कैसे कर सकता है।” वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी भारत का समर्थन करते हुए कहा था, “हम एकतरफा संरक्षणवाद का विरोध करने में एकजुट खड़े हैं।”

Modi Xi Putin SCO: RIC को जिंदा करने की कोशिश

रूस की मध्यस्थता को समझने के लिए RIC यानी रूस-भारत-चीन त्रिकोण की पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। इस विचार को 1998 में रूस के प्रधानमंत्री रहे येवगेनी प्रिमाकोव ने पेश किया था। उनका मानना था कि यह त्रिपक्षीय सहयोग अमेरिकी प्रभुत्व का संतुलन बना सकता है। तब से मास्को इस मंच को मजबूत करने की कोशिश करता आ रहा है।

2025 के हालात में भी रूस फिर से उसी आरआईसी को जिंदा करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत के साथ रिश्तों में तनाव पैदा किया है। व्यापार पर 50% तक के शुल्क ने नई दिल्ली को परेशान किया और वॉशिंगटन ने बार-बार भारत की डिफेंस पॉलिसी की आलोचना की।

इसी माहौल में रूस ने भारत को साधने का प्रयास तेज किया है। मास्को जानता है कि अगर भारत उसके साथ बना रहता है, तो पश्चिमी देशों का दबाव कम किया जा सकता है। यही वजह है कि पुतिन और लावरोव बार-बार आरआईसी को पुनर्जीवित करने की बात करते हैं।

2020-2021 के बाद आरआईसी काफी हद तक निष्क्रिय हो गया। कोविड महामारी और भारत-चीन तनाव ने इसे कमजोर किया। लेकिन 2024-2025 में इसे पुनर्जीवित करने की कोशिशें शुरू हुईं। मई 2025 में रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने अपनी भारत यात्रा के दौरान आरआईसी को बहाल करने की अपील की। चीन ने इसका समर्थन किया, लेकिन भारत ने सावधानी बरती।

रूस का दांव और “ग्रेटर यूरेशिया”

दरअसल मास्को लंबे समय से चाहता है कि भारत और चीन के बीच स्थिरता बनी रहे ताकि वह अपने ‘ग्रेटर यूरेशिया’ विजन को आगे बढ़ा सके। इस विजन को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2015 में सामने रखा था। इसके तहत रूस चाहता है कि एशिया-यूरोप के बड़े देश और क्षेत्रीय संगठन एक साझा धुरी पर काम करें। भारत, चीन और रूस इस धुरी के सबसे अहम हिस्से हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजन कुमार का मानना है कि रूस द्वारा रूस-भारत-चीन (RIC) प्रारूप को दोबारा शुरू करने की कोशिश “रूस की केवल इच्छाशक्ति हो सकती है, जो मौजूदा वास्तविक दुनिया और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में संभव नहीं दिखती।” हालांकि, उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की इस चेतावनी से सहमति जताई कि पश्चिमी देश भारत-चीन संबंधों को “फूट डालो और राज करो” की नीति के जरिए कमजोर करना चाहते हैं।

Modi-Xi Meeting in Tianjin: क्या भारत से अपनी शर्तों पर अच्छे संबंध चाहता है चीन? सीमा विवाद क्यों है अब भी बड़ी चुनौती?

Modi-Xi Meeting in Tianjin: Border Peace Still a Challenge Despite Progress

Modi-Xi Meeting in Tianjin: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान तियानजिन में हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में ट्रंप प्रशासन की टैरिफ पॉलिसी के चलते तनाव आया है। लिहाजा, इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं।

China role in Op Sindoor: भारतीय सेना ने बताया ऑपरेशन सिंदूर में एक नहीं तीन थे दुश्मन! चीन की भूमिका का किया खुलासा, पाकिस्तान को मोहरा बना की हथियारों की टेस्टिंग!

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर सहमति बनी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को भी बहाल किया जा रहा है। 2.8 अरब लोगों के हित आपसी सहयोग से जुड़े हैं। भारत रिश्तों को आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर आगे ले जाना चाहता है।”

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “दुनिया परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। भारत और चीन दो सबसे प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दोनों ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। ड्रैगन और एलिफेंट का साथ आना एशिया और पूरी दुनिया के लिए जरूरी है।”

Modi-Xi Meeting in Tianjin: सीमा पर क्या हैं हालात: शांति लेकिन नहीं है भरोसा

हालांकि भारत और चीन ने डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हालात अब भी चिंताजनक हैं। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “गलवान और पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर अस्थायी बफर जोन बनाए गए थे। इन्हें अस्थायी कहा गया था, लेकिन अब तक गश्त पूरी तरह बहाल नहीं हुई। भारतीय जवान उन इलाकों में नहीं जा पा रहे जिन्हें वे पहले नियमित रूप से गश्त करते थे।”

एक अन्य अधिकारी ने बताया, “पीएलए की कई ब्रिगेड अब भी आगे की चौकियों पर मौजूद हैं। उनके पास टैंक, तोपें और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम तैनात हैं। उन्होंने अपने डिफेंस रेजिमेंट्स को पीछे नहीं हटाया है। यह भरोसा न होने की सबसे बड़ी वजह है।”

पूर्वी लद्दाख में तैनात एक अधिकारी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता पैट्रोलिंग राइट्स को बहाल करना है। जब तक हमारे जवान पारंपरिक इलाकों में गश्त नहीं कर पाते, तब तक सीमा पर स्थायी शांति की बात अधूरी रहेगी।”

पूर्वी लद्दाख में 2020 से 2022 के बीच बने “नो पैट्रोल बफर जोन” भारत के लिए नुकसानदेह साबित हुए हैं। इनमें गलवान, पैंगोंग त्सो का उत्तर किनारा, कैलाश रेंज और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ये बफर जोन अस्थायी तौर पर बनाए गए थे, जिनकी चौड़ाई 3 से 10 किलोमीटर तक है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, इन्हें केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर स्वीकार किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

Modi-Xi Meeting in Tianjin: सीमा विवाद अब भी वहीं का वहीं

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ रिटायर्ड कोमोडर सी. उदय भास्कर ने कहा, “तियानजिन में जो हुआ उसे प्रगति तो कहा जा सकता है, लेकिन इसे ‘ब्रेकथ्रू’ कहना सही नहीं होगा। सीमा विवाद अब भी वहीं का वहीं है। दोनों देशों की कोशिश फिलहाल संवाद बनाए रखने और रिश्तों को स्थिर करने तक ही सीमित है।”

उन्होंने कहा, तियानजिन बैठक का नतीजा सावधानी से स्वागत करने लायक है। यह दोनों नेताओं का उस सहमति को राजनीतिक स्तर पर समर्थन था, जो अगस्त की शुरुआत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की दिल्ली यात्रा के दौरान बनी थी। भारत सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया कि “दोनों नेताओं ने पिछले साल रूस के कजान में हुई मुलाकात के बाद से रिश्तों में सकारात्मक प्रगति और स्थिरता का स्वागत किया।”

Modi-Xi Meeting in Tianjin: संदेह और अविश्वास कायम है

पूर्व राजनयिक विजय गोखले का कहना है, तियानजिन में सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को न केवल दिल्ली बल्कि दुनिया की कई राजधानियों में गंभीरता से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से चाहता है कि चीन के साथ कामकाजी रिश्ते बने रहें। लेकिन 2020 की गलवान झड़प ने उस प्रक्रिया को झटका दिया था। अब तियानजिन की बैठक को उसी प्रक्रिया की बहाली माना जा रहा है। फिर भी संदेह और अविश्वास कायम है।”

वह कहते हैं, राजीव गांधी के बाद से भारत के हर प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चीन के साथ स्थिर रिश्ते बनाए रखने की कोशिश की है। नरेंद्र मोदी भी इससे अलग नहीं हैं। हालांकि यह सच है कि मौजूदा भारत-चीन संबंध हाल के दशकों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन हर प्रधानमंत्री को यही उम्मीद रही है कि वे सीमा पर स्थिरता लाएंगे और चीन के साथ संबंधों को सही दिशा में मोड़ेंगे।

उन्होंने कहा, हालांकि, यह भी सच है कि भारत-चीन संबंधों ने कई बार गंभीर झटके खाए हैं। 2017 का डोकलाम संकट, 2020 की गलवान झड़प ने इस दिशा में हुई प्रगति को बाधित किया है। इस बार भी, तिआनजिन की बैठक से उम्मीद की जा रही है कि यह फिर से दोनों देशों के बीच भरोसे का माहौल बना सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि भारत और चीन, दो बड़े एशियाई देश, वैश्विक अस्थिरता के दौर में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक साझा इच्छा रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत को अब देखना होगा कि चीन के शब्दों के पीछे ठोस कार्रवाई भी होती है या नहीं। चीन ने पहले भी कहा है कि भारत को कृषि उत्पाद, दवा उद्योग और आईटी सेवाओं के लिए बड़ा बाजार मिलेगा। लेकिन जब भी भारत ने अपने निर्यात को बढ़ाने की कोशिश की, तो चीन ने गैर-शुल्क बाधाओं और “प्रतिबंधों” का सहारा लिया।

वह आगे कहते हैं, भारत को यह समझना होगा कि अमेरिका अगर अपनी विदेश नीति को केवल अपने स्वार्थ के आधार पर पुन: संतुलित करता है, तो भारत को भी चीन के साथ रणनीतिक पुनर्संतुलन तलाशने का अधिकार है। भारत के लिए अब सवाल यह है कि क्या वह चीन और अमेरिका दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रख सकता है। तिआनजिन की बैठक इस बात का संकेत हो सकती है कि भारत एक नए संतुलन की ओर बढ़ रहा है, जहां भारत-चीन संबंध और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी साथ-साथ चलें।

Modi-Xi Meeting in Tianjin: कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने इस बैठक पर सवाल उठाए। पार्टी नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, “गलवान में 20 जवानों की शहादत के बावजूद मोदी सरकार चीन के साथ सुलह की राह पर है। प्रधानमंत्री ने चीन की आक्रामकता को नजरअंदाज कर दिया है।”

कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किया गया, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन पाकिस्तान की मदद कर रहा था। फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाईं।”

चीनी सेना अभी भी अग्रिम मोर्चों पर

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा, “चीनी सेना की कुछ ब्रिगेड जरूर 100 किलोमीटर पीछे हटी हैं, लेकिन कई अब भी अग्रिम मोर्चों पर मौजूद हैं। इसका मतलब यह है कि वे किसी भी वक्त अपनी स्थिति बदल सकते हैं। हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होता है। डिप्लोमेसी जरूरी है, लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए हम तैयार रहें।” एक कॉम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड में लगभग 4,500 से 5,000 सैनिक होते हैं, जिनके पास टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाना और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें होती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “चीनी सेना ने सीमा पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है। नई सड़कें, पुल और एयरबेस बनाए हैं। हमें बराबरी पर खड़े रहने के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।” उन्होंने साफ कहा, “भले ही सीमा पर अब स्थिति पहले जैसा ‘हाई अलर्ट’ नहीं है, लेकिन अविश्वास बना हुआ है। जब तक डिएस्केलेशन और डी-इंडक्शन पूरा नहीं होता, तब तक कोई भी पक्ष ढील नहीं देगा।”

व्यापार असंतुलन का क्या होगाा?

तियानजिन में हुई बैठक में आर्थिक मुद्दों पर भी बात हुई। भारत ने व्यापार असंतुलन का मुद्दा उठाया। चीन भारत से कम खरीदता है जबकि भारत चीन से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रोजमर्रा की चीजें बड़ी मात्रा में आयात करता है।

इसके अलावा, चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) पर विशाल जलविद्युत परियोजना बनाए जाने की योजना पर भारत ने अपनी चिंता जताई। सूत्र मानते हैं कि इसका असर असम और अरुणाचल प्रदेश के जल संसाधनों पर पड़ सकता है। क्योंकि चीन ने हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयर करने को लेकर कुछ भी नहीं कहा है।

Operation Sindoor IAF weapons: बड़ा खुलासा! वायुसेना के 50 से भी कम हथियारों के आगे झुका था पाकिस्तान, घबरा कर बंद कर दिए थे रडार

Operation Sindoor IAF weapons: Air Marshal Tiwari reveals IAF used fewer than 50 weapons to force Pakistan to truce
Indian Air Force Vice Chief Air Marshal Narmdeshwar Tiwari

Operation Sindoor IAF weapons: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने शनिवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने न केवल इस सैन्य अभियान के कई नए फुटेज शेयर किए बल्कि यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना ने 50 से भी कम हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को सीज फायर की मेज पर बैठने पर मजबूर कर दिया।

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दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट के दौरान एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सामने कई विकल्प थे। वायुसेना के पास टारगेट्स की लंबी सूची मौजूद थी, लेकिन इनमें से नौ प्रमुख ठिकानों को चुनकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, “सबसे अहम बात यह है कि 50 से कम हथियारों के इस्तेमाल करके हमने इस युद्ध को समाप्त कर दिया। यही इस अभियान का सबसे बड़ा सबक है।”

Operation Sindoor IAF weapons: पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन की तैयारी

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि जवाब कड़ा और साफ-साफ नजर आने वाला होना चाहिए। जिसके बाद 7 मई को भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए।

एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि 24 अप्रैल तक सभी विकल्पों पर चर्चा पूरी हो चुकी थी और नौ टारगेट तय कर लिए गए थे। बस राजनीतिक मंजूरी का इंतजार था। 7 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी और मिलिट्री ठिकानों पर हमला किया। इसके लिए सुखोई-30 एमकेआई, राफेल और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से ब्रहमोस, स्कैल्प, क्रिस्टल मेज-2 और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं।

Operation Sindoor IAF weapons: यह थे तीन उद्देश्य

एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि नई दिल्ली से सेना को तीन साफ-साफ निर्देश मिले थे। पहला, जवाब इतना मजबूत होना चाहिए कि दुश्मन और दुनिया दोनों इसे साफ देख सकें। दूसरा, यह कार्रवाई भविष्य के लिए एक संदेश बने और आतंकवादी हमले दोहराने की हिम्मत कोई न कर सके। तीसरा, तीनों सेनाओं को पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता दी गई, ताकि हालात बिगड़ने पर वे पूरी तरह से युद्ध के लिए भी तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि वायुसेना की सटीक कार्रवाई से यह संदेश साफ चला गया कि भारत आतंकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।

Operation Sindoor IAF weapons: चलाया SEAD/DEAD अभियान

हमले के उसी दिन शाम को पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन भारतीय सीमाओं की ओर भेजे गए। एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि करीब 300 से ज्यादा ड्रोन और हाइपरसोनिक CM-400 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन भारत के इंटग्रेटेड डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया।

भारतीय वायुसेना ने इसके जवाब में “SEAD/DEAD अभियान” चलाया। यानी दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को टारगेट किया गया। इसमें पाकिस्तान के कई राडार और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम (SAM) को निशाना बनाया गया।

तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर अपना एयरस्पेस बंद नहीं किया था ताकि भारत पर किसी नागरिक विमान को गिराने का आरोप लगाया जा सके। लेकिन भारतीय वायुसेना ने बेहद सावधानी बरतते हुए केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया।

Operation Sindoor IAF weapons: सटीकता से कार्रवाई

8 और 9 मई को पाकिस्तान ने और बड़े पैमाने पर ड्रोन और हथियार दागे। उनका मकसद भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम को थका देना था। लेकिन भारतीय वायुसेना ने न सिर्फ इसे विफल किया बल्कि पाकिस्तान के अहम एयरबेस और रडार ठिकानों को तबाह कर दिया।

भारतीय हमलों में चकला, सरगोधा, रहिम यार खान, साकर और मुरिदके जैसे ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया। तिवारी ने बताया कि पाकिस्तान ने कई रडार डर के मारे खुद ही बंद कर दिए गए ताकि वे भारतीय हमलों से बच सकें।

उन्होंने कहा, “हमारे हथियार इतने सटीक थे कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आरोप भी नहीं लगा पाया कि नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ है।”

ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना की रणनीति

एयर मार्शल तिवारी ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर में केवल हथियारों की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके सही इस्तेमाल पर ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि नौ ठिकानों को चुनकर सटीक हमले किए गए और इन्हीं हमलों से पाकिस्तान को संघर्ष विराम के लिए राजी होना पड़ा।

वायुसेना के मुताबिक, कम समय में तेज और निर्णायक हमले करने की क्षमता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इस पूरे अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं के बीच तालमेल और टेक्टिकल प्लानिंग का लेवल स्तर देखने को मिला जिसने पाकिस्तान को चौंका दिया। उन्होंने खुलासा किया कि मई 2025 में चले इस अभियान में वायुसेना ने 50 से भी कम एयर-लॉन्च हथियारों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के एयरबेस, राडार साइट और कमांड सेंटर को तबाह कर दिया। इनमें से कई ठिकाने परमाणु प्रतिष्ठानों के नजदीक भी थे।

एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि यह पूरा अभियान एक “टेक्स्टबुक उदाहरण” था कि कैसे सीमित संसाधनों से सटीक और निर्णायक वार किया जा सकता है। उन्होंने इसे “कोएर्सिव डिप्लोमेसी” यानी दबाव डालने वाली कूटनीति और लागत प्रभावी वायु शक्ति का बेहतरीन नमूना बताया।

एयर मार्शल तिवारी ने कहा, “यह पहली बार हुआ कि इतने कम हथियारों से हमने इस जंग को खत्म कर दिया। इससे हमारी योजना और एयरपावर की क्षमता का पता चलता है।”

तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि एयरपावर का इस्तेमाल अगर सटीक और योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो बड़े नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपने तरीके से देने में सक्षम है।

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव को कैसे हथियार बना रहा पाकिस्तान, कैसे किसान आंदोलन, दिल्ली हिंसा और पहलगाम हमला हैं “सॉफ्ट पावर वॉर” का हिस्सा? भारत को कमजोर करने की साजिश

Pakistan Narrative Warfare: Was Pahalgam Attack a Trap by Pakistan? Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad
Maj Gen SP Vishwasrao at Ran Samvad 2025

Pakistan Narrative Warfare: मऊ (मध्य प्रदेश) में आयोजित पहले ट्राई-सर्विसेज कॉन्क्लेव ‘रण संवाद 2025’ में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल एसपी विश्वसराव ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और नैरेटिव बिल्डिंग की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने इसे “Weaponising the Narrative” यानी नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया बताया, जो न सिर्फ युद्ध के मैदान बल्कि जनता की सोच और दुश्मन के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान की तरफ से भारत को जाल में फंसाने की कोशिश हो सकती है।

Ran Samwad 2025 Doctrine: युद्ध का मैदान बने इंसानी दिमाग से ऐसे जंग लड़ेंगे स्पेशल फोर्सेज के जवान! ऑपरेशन सिंदूर के बाद सौंपा गया नया काम

वेस्टर्न सेक्टर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल रिक्रूटमेंट मेजर जनरल विश्वसराव पहले पाकिस्तान में भारत के डिफेंस अताशे रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद भारत को उकसाना और सीमा पर तनाव बढ़ाना था। उन्होंने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर अपने संबोधन के दौरान बताया कि आतंकियों ने हिंदुओं को चुनकर निशाना बनाया और बचे हुए लोगों से कहा कि यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना। उनके मुताबिक यह सीधा-सीधा राजनीतिक और सांप्रदायिक संदेश था, जिसका लक्ष्य भारत में विभाजनकारी स्थिति पैदा करना था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता था कि भारत गुस्से में आकर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कोई बड़ी कार्रवाई करे और इसके लिए शायद पाकिस्तान पहले से तैयार भी था।

बता दें कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और स्वयंभू फील्डमार्शल जनरल आसिम मुनीर अपने कट्टरपंथी इस्लामी विचारों के लिए जाने जाते हैं। मुनीर पहले आईएसआई के प्रमुख भी रह चुके हैं और पुलवामा हमले के दौरान वे इसी पद पर थे। उनकी सोच अपने पूर्ववर्ती जनरल बाजवा से अलग है। बाजवा डॉक्ट्रिन में भारत से कामकाजी रिश्तों पर जोर दिया गया था, जबकि मुनीर फिर से वैश्विक मंच पर कश्मीर मुद्दे को उभारना चाहते हैं।

Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव वॉरफेयर कितनी है जरूरी

मेजर जनरल विश्वसराव ने नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया (Weaponising the Narrative) विषय पर बोलते हुए बताया कि कैसे आज की दुनिया में युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि विचारों और सूचनाओं से भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से स्ट्रैटेजिक कम्यूनिकेशन को तीनों सेनाओं में एकसाथ जोड़ा जा सकता है और इससे दुश्मन की सोच पर दबाव बनाया जा सकता है।

उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एनालिसिस और टेक्नोलॉजी बेस्ड इनफॉरमेशन सेल अब जरूरी हो गए हैं, ताकि भारत अपनी कहानी और अपना नैरेटिव मजबूती से दुनिया के सामने रख सके। उन्होंने कहा कि Neocortical Warfare यानी ‘नैरेटिव को हथियार की तरह इस्तेमाल करना’ शांति बनाए रखने और भारत की रणनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने का अहम साधन बन सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: किसान आंदोलन ‘नैरेटिव वॉर’ का हिस्सा!

मेजर जनरल विश्वसराव ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध, दिल्ली हिंसा, जम्मू-कश्मीर, यमुना और मणिपुर के हालात की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा कि यह सब भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा थे। उन्होंने इसे कलर रिवोल्यूशन (Colour Revolution) की तरह बताया, जिसमें “कलर रिवोल्यूशन” जैसी रणनीतियों के जरिए समाज में अस्थिरता पैदा की जाती है और विरोध प्रदर्शनों को एक नैरेटिव की शक्ल दी जाती है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद और हिंसा का इस्तेमाल केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे “सॉफ्ट पावर वॉर” यानी नैरेटिव के जरिए भारत को अस्थिर करने के लिए भी इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही प्रयोग पहले बांग्लादेश में हुआ था और अब भारत में भी विरोध प्रदर्शनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, 2008-2010 और 2016 में कश्मीर में जो हिंसक आंदोलन हुए, वे भी इसी रणनीति का हिस्सा थे।

उन्होंने दुश्मन की “Centre of Gravity” यानी उसकी असली ताकत और हौसले के स्रोत को निशाना बनाने की बात कही। मतलब, जहां से दुश्मन को ताकत और आत्मविश्वास मिलता है, अगर उसी को कमजोर कर दिया जाए, तो उसका पूरा ढांचा हिल सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: ऑपरेशन सिंदूर का नैरेटिव

अपने संबोधन में मेजर जनरल विश्वसराव ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने भारतीय सेना को यह सबक दिया कि सूचना युद्ध (Information Warfare) कितनी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नैरेटिव पर कंट्रोल रखना और सही समय पर सही संदेश देना युद्ध के मैदान में हथियारों जितना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, नाटो-रूस संघर्ष, आर्टिकल 370 हटना, गलवान झड़प, बलूचिस्तान और तालिबान के हालात, पाकिस्तान की राजनीति और जम्मू-कश्मीर चुनाव, इन सबका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ नैरेटिव वॉर में करता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में सिर्फ टैंक, जहाज और लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि साइबर ऑपरेशन्स, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) जैसे हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सूचना और नैरेटिव को कंट्रोल करना दुश्मन को मानसिक तौर पर कमजोर करने का तरीका है। इससे न केवल देश एकजुट रहता है बल्कि ऑपरेशनल क्षमता भी और मजबूत होती है।