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क्या म्यांमार ने Coco Islands को लेकर भारत से बोला झूठ? कहा- नहीं हैं चीनी सैनिक, नौसेना के लिए क्यों है चिंता की बात, पढ़ें एक्सप्लेनर

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence (Pic: Google Earth)

Coco Islands: भारत और म्यांमार के बीच डिफेंस डॉयलॉग के दौरान यंगून स्थित जुंटा सरकार ने भारत को भरोसा दिलाया है कि बंगाल की खाड़ी में स्थित कोको द्वीपों पर कोई भी चीनी नागरिक या सैनिक मौजूद नहीं है। यह बयान तब आया जब भारत ने पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी।

म्यांमार की यह सफाई ऐसे समय में आई है जब सैटेलाइट इमेजरी में कोको द्वीपों पर नए निर्माण, लंबे रनवे और कम्यूनिकशन इक्विपमेंट्स की तैनाती देखी गई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह क्षेत्र चीन की समुद्री निगरानी रणनीति का हिस्सा बन सकता है।

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Coco Islands: भारतीय नौसेना को दौरे की नहीं मिली अनुमति

भारत ने कोको द्वीपों का निरीक्षण करने के लिए म्यांमार सरकार से औपचारिक अनुमति मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने “फ्रेंडली विजिट” के तहत वहां एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक जंटा शासन की ओर से कोई मंजूरी नहीं दी गई है।

भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 25 से 27 सितंबर के बीच म्यांमार की यात्रा की थी और वहीं यह मुद्दा उठाया था। यह उनका दूसरा सालाना डिफेंस डॉयलॉग था, जिसमें म्यांमार के सशस्त्र बलों के ट्रेनिंग चीफ मेजर जनरल क्याव को हटिके भी शामिल थे। हालांकि म्यांमार ने यह दोहराया कि “कोको द्वीपों पर एक भी चीनी नागरिक नहीं है,” लेकिन भारत को दौरे की इजाजत न मिलने से संदेह पैदा हो गया है।

Coco Islands: भारत की चिंता: सर्विलांस सेंटर बना सकता है चीन

भारत की मुख्य चिंता यह है कि म्यांमार के इन द्वीपों पर चीन ने सर्विलांस और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) इक्विपमेंट्स तैनात किए हैं। माना जाता है कि यह सेंटर भारत के बालासोर मिसाइल परीक्षण रेंज और रामबिल्ली नौसैनिक अड्डे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

बालासोर और एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा) जहां भारत अपने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करता है, कोको द्वीपों के लगभग समान अक्षांश यानी लेटिट्यूड पर स्थित हैं। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि चीन इस इलाके का इस्तेमाल भारतीय परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइल परीक्षणों को ट्रैक करने के लिए कर सकता है।

Coco Islands: क्या है इसका रणनीतिक महत्व

कोको द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप समूह है। वहीं इनकी दूरी म्यांमार के मुख्य भूमि से करीब 414 किमी दक्षिण में है। जबकि भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से मात्र 55 किलोमीटर दूर है। यह इलाका भारत के अंडमान और निकोबार के भी नजदीक है, जहां भारत का एकमात्र ट्राई-सर्विसेज थिएटर कमांड है और जो हिंद महासागर में भारत की सैन्य मौजूदगी का प्रमुख केंद्र है।

यह द्वीप दो प्रमुख हिस्सों में बंटा है ग्रेट कोको और लिटिल कोको। यहां के रनवे को हाल ही में बढ़ाकर 2,300 मीटर किया गया है, जिससे अब यहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उतर सकते हैं।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का हिस्सा थे Coco Islands

ब्रिटिश शासन के दौरान कोको द्वीप भारत का हिस्सा था। 1948 में म्यांमार की आजादी के बाद ये द्वीप उसके कंट्रोल में आ गए। 1962 के म्यांमार के सैन्य तख्तापलट के बाद, ग्रेट कोको पर एक जेल कॉलोनी बनी, जो 1971 में बंद हो गई। उसके बाद ये म्यांमार नेवी के कब्जे में आ गए।

1990 के दशक में जापानी मीडिया ने रिपोर्ट किया कि चीन म्यांमार को यहां सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद कर रहा है। 1994 में अफवाहें फैलीं कि म्यांमार ने यह द्वीप चीन को 30 साल की लीज पर दे दिया है, ताकि वह यहां रडार और सर्विलांस केंद्र स्थापित कर सके। हालांकि म्यांमार और चीन दोनों ने इससे इनकार किया।

Coco Islands: 2005 में भारत ने किया था दौरा

भारत ने 2005 में तत्कालीन भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कोको द्वीप (Coco Islands) का दौरा किया था। उनके दौरे का मकसद उन अफवाहों की जांच करना था, जिनमें कहा जा रहा था कि चीन ने कोको द्वीप पर सैन्य या सिग्नल इंटेलिजेंस बेस स्थापित किया है। दौरे के बाद, एडमिरल अरुण प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से कहा कि कोको द्वीप पर कोई चीनी सैन्य मौजूदगी नहीं है। उन्होंने इन अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि द्वीप पर केवल म्यांमार की नौसेना की सीमित सुविधाएं हैं, और वहां कोई विदेशी सैन्य गतिविधि या बेस नहीं देखा गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोको द्वीप की सामरिक स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के करीब है।

Coco Islands: सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता

2023 से लेकर अब तक कई अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट एजेंसियों जैसे मैक्सार और प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों में कोको द्वीपों (Coco Islands) पर नए निर्माण दिखाई दिए हैं। इनमें रनवे विस्तार, हैंगर, बैरक और नई सड़कों का निर्माण शामिल है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, यहां अब लगभग 1,500 सैन्यकर्मी तैनात हैं और पास के जेरी आइसलैंड से जुड़ने के लिए एक कॉजवे का निर्माण हो रहा है। इन सभी गतिविधियों ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी हैं।

देखें: गूगल मैप्स में पूरा कोको आइसलैंड 

Coco Islands: भारत की रणनीतिक तैयारी

भारत ने हाल के सालों में अंडमान-निकोबार में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत किया है। यहां नौसेना के जहाजों के लिए नया डॉकयार्ड, एयरबेस और मिसाइल सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, भारत ने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय रक्षा संवाद को तेज किया है ताकि चीन के प्रभाव को सीमित किया जा सके। वहीं क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी हिंद महासागर में समुद्री निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

चीन पर निर्भर म्यांमार

2023 की चैथम हाउस की रिपोर्ट कहती है कि 2021 में म्यांमार में सेना के तख्तापलट के बाद से वहां की जुंटा सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते चीन पर और अधिक निर्भर हो गई है। चीन न सिर्फ म्यांमार का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, बल्कि उसकी सैन्य तकनीक और हथियारों का भी मुख्य स्रोत है। भारत को यह डर है कि इस निर्भरता के चलते म्यांमार चीन को अपने सामरिक ठिकानों तक पहुंच दे सकता है। वहीं, बीजिंग लगातार यह कहता रहा है कि “चीन की कोई सैन्य मौजूदगी कोको द्वीपों (Coco Islands) में नहीं है।”

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence (Pic: Google Earth)

क्या कहती हैं भारत की इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स

भारतीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोको द्वीपों (Coco Islands) पर लगे नए रडार और एंटीना सिस्टम 1,000 किलोमीटर तक की दूरी तक सिग्नल ट्रैक कर सकते हैं। इसका सीधा असर भारत की सामरिक गोपनीयता पर पड़ सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन द्वीपों से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की गतिविधियों की निगरानी करता है, खासकर जब परमाणु-संचालित पनडुब्बियां रामबिल्ली नेवल बेस से निकलती हैं।

रामबिल्ली आंध्र प्रदेश का एक छोटा तटीय गांव है, यह भारत का पहला समर्पित न्यूक्लियर सबमरीन बेस है, जो न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) के लिए बनाया गया है। यह भारत की “सी-बेस्ड न्यूक्लियर डिटरेंट” (समुद्री-आधारित परमाणु प्रतिरोध) को मजबूत करेगा। यह भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड का हिस्सा है। यह नौसेना का सबसे सुरक्षित और आधुनिक सबमरीन बेस है, जो मुख्य रूप से न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह विशाखापत्तनम बंदरगाह को डीकंजेस्ट करने के लिए बनाया गया है, जहां नौसेना और सिविल शिपिंग दोनों का उपयोग होता है। इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और 2026 में कमीशनिंग की उम्मीद है। यहां कालवरी-क्लास सबमरीनों जैसे आईएनएस अरिहंत भी डॉक की जा सकेंगी।

यहां डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के अलावा 8 से 12 न्यूक्लियर सबमरीन रखी जा सकेंगी। इसमें वेरी लो फ्रिक्वेंसी संचार प्रणाली, डीमैग्नेटाइजेशन (पनडुब्बियों को चुंबकीय रूप से न्यूट्रलाइज करने) की सुविधा और हाई-सिक्योरिटी शेल्टर्स हैं। यह यह चीनी हैनान द्वीप के न्यूक्लियर बेस जैसा है, जिसे “लुक ईस्ट पॉलिसी” के तहत बनाया गया, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी गतिविधियों का जवाब है। यह बंगाल की खाड़ी में भारत की पावर प्रोजेक्शन बढ़ाएगा।

म्यांमार ने दिया ये आधिकारिक बयान

हाल ही में म्यांमार के विदेश मंत्रालय ने कहा, “कोको द्वीप (Coco Islands) पर केवल हमारे सैनिक हैं, कोई विदेशी नहीं।” यंगून ने यह भी कहा कि द्वीप पर हो रहा विकास कार्य पूरी तरह नागरिक उद्देश्य के लिए है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि खासकर चिंदविन नदी के पार वाले क्षेत्रों में म्यांमार सरकार का नियंत्रण देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कमजोर है, वहां चीन समर्थित सशस्त्र समूहों का प्रभाव अधिक है।

इंडो-पैसिफिक पर क्या पड़ेगा असर

वहीं, कोको द्वीपों (Coco Islands) का मामला केवल भारत-म्यांमार तक सीमित नहीं है। यह पूरे इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे से जुड़ा मुद्दा है। यह इलाका मलक्का जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ मलक्का) के पास स्थित है, जिससे होकर दुनिया के 25 फीसदी समुद्री व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। अगर चीन यहां अपनी स्थायी उपस्थिति बनाता है, तो वह हिंद महासागर में सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

SAKSHAM CUAS System: भविष्य के युद्धों में ड्रोन खतरों से निपटने में भारतीय सेना होगी ‘सक्षम’, दोस्त और दुश्मन ड्रोन का चुटकियों में चलेगा पता

SAKSHAM Counter UAS System
AI Generated Image

SAKSHAM CUAS System: देश की हवाई सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में भारतीय सेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित सक्षम काउंटर यूएएस सिस्टम (SAKSHAM Counter UAS System) के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया है।

यह अत्याधुनिक सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम न केवल रियल टाइम में ड्रोन की पहचान कर उन्हें ट्रैक करेगा, साथ ही उन्हें मार भी गिराएगा। यह सिस्टम जमीनी युद्धक्षेत्र के ऊपर 3,000 मीटर यानी 10,000 फीट तक के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है, जिसे अब टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस (टीबीएस) कहा जाता है।

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SAKSHAM CUAS System: ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

इस सिस्टम की जरूरत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महसूस हुई, जब पाकिस्तान के ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम भारतीय सीमा में निगरानी और हमले के लिए पहुंचे। इस ऑपरेशन में यह सामने आया कि आधुनिक युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि उससे ऊपर के हवाई क्षेत्र में भी लड़ा जा रहा है। जिसके बाद भारतीय सेना ने पारंपरिक टैक्टिकल बैटल फील्ड (टीबीए) की बजाए टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस पर फोकस किया।

टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस में जमीन के ऊपर 3,000 मीटर की ऊंचाई तक का हवाई क्षेत्र शामिल है, जिसे एयर लिट्टोरल कहा जाता है। इस इलाके पर कंट्रोल बनाए रखना भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी माना जा रहा है। इससे मित्र देशों और अपने एय़र एसेट्स को सुरक्षित उड़ान भरने की सुविधा मिलती है, साथ ही दुश्मन के ड्रोन या विमान को ट्रैक करने के साथ और मार गिराया भी जा सकता है।

SAKSHAM CUAS System: कैसे काम करेगा ‘सक्षम’?

सक्षम (SAKSHAM CUAS System) का पूरा नाम सिचुएशनल अवेयरनेस फोर काइनेटिक सॉफ्ट एंड हार्ड किल असेट्स मैनेजमेंट है। यह एक सॉफ्टवेयर है जिसे हाई लेवल मॉड्यूलर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के तौर पर डेवलप किया गया है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, गाजियाबाद के सहयोग से डिजाइन और तैयार किया गया है।

यह सिस्टम सुरक्षित आर्मी डेटा नेटवर्क (एडीएन) पर काम करती है और रियल टाइम में पूरी टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस में जमीन और हवाई क्षेत्र की सटीक जानकारी सभी मिलिट्री यूनिट्स को उपलब्ध कराती है। सक्षम सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन और अपने सभी अनमैन्ड एरियल सिस्टम डेटा को एक जीआईएस आधारित कॉमन प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट करना, सॉफ्ट और हार्ड किल सिस्टम्स को जोड़ना, और फील्ड कमांडरों को ऑटोमेटेड डिसीजन सपोर्ट और विजुअलाइजेशन की सुविधा देना है।

सैन्य सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) भारतीय सेना के आकाशतीर सिस्टम से भी इनपुट लेगा, जिससे हवाई क्षेत्र में मौजूद सभी ऑब्जेक्ट्स चाहे वे फ्रैंडली हों, न्यूट्रल हों या दुश्मन के हों, उनकी एक स्पष्ट तस्वीर तैयार की जा सकेगी। जो बड़े से मॉनिटर पर दिखेगी।

सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम वायुसेना के इंटीग्रेटिड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और आकाशतीर जैसा ही होगा, लेकिन ये केवल ड्रोन के लिए ही काम करेगा। इसमें मॉनिटर पर फ्रैंडली, न्यूट्रल और दुश्मन के ड्रोन अलग-अलग रंग के दिखाई देंगे। जिससे उन्हें पहचनना आसान होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस – SAKSHAM CUAS System

‘सक्षम’ सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस का इस्तेमाल करता है, जिससे संभावित हवाई खतरों की पहचान पहले से हो जाती है और तेजी से फैसले लेने में आसानी होती है। सक्षम सिस्टम रियल टाइम में रिकॉग्नाइज्ड यूएऍस पिक्चर (RUASP) तैयार कर सकता है। यह कई (काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स) हथियारों और सेंसरों को एक साथ जोड़कर कॉर्डिनेट रेस्पॉन्स देता है।

बॉर्डर Let’s में सभी यूनिट्स में होगा तैनात

सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। बीईएल के बनाए इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए इसे आसानी से अपग्रेड किया जा सकेगा।

SAKSHAM CUAS System  प्रोजेक्ट को फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे तेजी से सेना की सभी फील्ड फॉर्मेशंस में शामिल किया जा सके। अगले एक साल के भीतर सक्षम सिस्टम को फील्ड में उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बॉर्डर इलाके में तैनात सभी यूनिट्स को इस सिस्टम से लैस किया जाएगा।

वहीं, सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) के लागू होने के बाद यह भारतीय सेना के काउंटर काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड की रीढ़ साबित होगी। यह जमीनी और हवाई दोनों तरह के खतरों की इंटीग्रेटेड तस्वीर कमांडरों को देगा। इस सिस्टम की मदद से भारतीय सेना भविष्य के बैटलफील्ड में एक डिजिटल और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कंट्रोल सिस्टम डेवलप करेगी, जो भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032) कार्यक्रम के मुताबिक है, जिसमें युद्ध के सभी डाइमेंशंस में टेक्निकल सुपीरियोरिटी और इंडीजीनस इनोवेशन पर जोर दिया गया है।

Jaish-e-Mohammed women brigade: आतंकी मसूद अजहर बना रहा है महिला ब्रिगेड, बहन को सौंपी कमान, शुरू की भर्ती

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Jaish-e-Mohammed women brigade: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार एक महिला ब्रिगेड बनाई है। इस नए विंग का नाम ‘जमात-उल-मोमिनात’ रखा गया है और इसकी भर्ती 8 अक्टूबर 2025 से बहावलपुर में शुरू कर दी गई है। संगठन ने इस फैसले की घोषणा एक पत्र के जरिए की है। इस पत्र को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर के नाम से जारी किया गया है।

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खुफिया सूत्रों के मुताबिक यह भर्ती पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित मरकज उस्मान-ओ-अली में शुरू की गई है, जहां से जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की मुहिम छेड़ी है। इस महिला ब्रिगेड (Jaish-e-Mohammed women brigade) की कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के पास है। सादिया के पति यूसुफ अजहर की मौत मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी, जब भारतीय सेनाओं ने बहावलपुर में जैश के मुख्यालय मरकज सुब्हानअल्लाह पर हवाई हमले किए थे।

जैश के प्रचार मंच अल-कलम मीडिया के जरिए जारी पत्र में इस महिला ब्रिगेड का नाम और भर्ती की तिथि सार्वजनिक की गई। खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन ने अपनी भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले अपने वरिष्ठ कमांडरों की पत्नियों को शामिल किया है। इसके अलावा, बहावलपुर, कराची, मुझफ्फराबाद, कोटली, हरीपुर और मंसेहरा में मौजूद अपने मदरसों में पढ़ रही आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी इस ब्रिगेड में जोड़ा जा रहा है।

देवबंदी विचारधारा से प्रभावित यह आतंकी संगठन अब तक महिलाओं को आतंकी अभियानों या जिहाद में शामिल करने से बचता रहा है। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। सूत्रों का कहना है कि मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल-सैफ ने मिलकर महिलाओं को संगठन की कार्यवाही में शामिल करने का फैसला किया। इसी के बाद ‘जमात-उल-मोमिनात’ (Jaish-e-Mohammed women brigade) नामक महिला ब्रिगेड की नींव रखी गई।

आतंकी संगठनों के इतिहास में महिलाओं की भूमिका नई नहीं है। आईएसआईएस, बोको हराम, हमास और एलटीटीई जैसे संगठनों ने पहले भी महिला आत्मघाती हमलावरों को तैनात किया है। लेकिन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों ने अब तक इस रणनीति से दूरी बनाए रखी थी। अब माना जा रहा है कि जमात-उल-मोमिनात की स्थापना, जैश के भविष्य में महिला आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण और हमलों में शामिल करने की दिशा में एक संकेत है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बहावलपुर में भर्ती के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें महिलाओं (Jaish-e-Mohammed women brigade) को वैचारिक प्रशिक्षण, धार्मिक शिक्षण और संगठन के प्रोपेगेंडा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। संगठन की कोशिश है कि इन महिलाओं को संगठन के अंदरूनी नेटवर्क में अहम भूमिकाएं दी जाएं और आगे चलकर इन्हें आतंकवादी अभियानों में शामिल किया जाए।

भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस कदम पर नजर रखी हुई है। बहावलपुर पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed women brigade) का पारंपरिक गढ़ रहा है। यहीं से संगठन ने कई बार भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिनमें 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। अब उसी शहर से महिला ब्रिगेड की भर्ती शुरू होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि सादिया अजहर का परिवार जैश की गतिविधियों में वर्षों से सक्रिय रहा है। यूसुफ अजहर की मौत के बाद सादिया को संगठन में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जा रहा है। वह महिलाओं के बीच संगठन के संदेश को फैलाने और उन्हें वैचारिक रूप से तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

जैश-ए-मोहम्मद ने इस महिला ब्रिगेड (Jaish-e-Mohammed women brigade) की घोषणा ऐसे समय की है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी भी तेज हुई है। इसके बावजूद संगठन द्वारा खुले तौर पर महिलाओं की भर्ती शुरू करना बताते है कि अंदर ही अंदर जैश कोई बड़ी आतंकी वारदात की तैयारी कर रहा है।

Air Force Day 2025 पर इस शानदार एतिहासिक कार से हिंडन एयर बेस पहुंचे एयरफोर्स चीफ, रजिस्ट्रेशन नंबर भी है बेहद खास

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car

Air Force Day 2025: भारतीय वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस आज गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर पूरे गौरव और परंपरा के साथ मनाया गया। यह दिन 8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। इस बार का समारोह कई मायनों में खास रहा। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पूर्व एयर चीफ मार्शल प्रताप चंद्र लाल (पीसी लाल) की 1967 मॉडल की विंटेज फोर्ड सैलून कार में बैठ कर समारोह पहुंचे।

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Air Force Day 2025: 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में हुई शामिल

क्रीम रंग की यह क्लासिक फोर्ड सैलून भारतीय वायुसेना की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यह वही कार है जिसे 1969 में एयर चीफ मार्शल पीसी लाल ने पहली बार इस्तेमाल किया था। पीसी लाल 1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो थे और उन्होंने पाकिस्तान के ऑपरेशन ऑपरेशन चंगेज खान के जवाब में वायुसेना को निर्णायक जीत दिलाई थी। यह कार 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में शामिल हुई थी। एयर चीफ मार्शल पीसी लाल थे 1969 से 1973 तक 7वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस जैसे सम्मान भी मिले। रिटायरमेंट के बाद वे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के एमडी रहे थे।

Air Force Day 2025: 1967 फोर्ड सैलून कार

1967 की यह फोर्ड सैलून कार अमेरिकी फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा बनाई गई एक लग्जरी सैलून थी। इसमें 390 वी8 इंजन लगा है, जो 8 सिलेंडर का है और 4600 आरपीएम पर 315 ब्रेक हॉर्सपावर की ताकत देता है। उस दौर में यह कार न सिर्फ आरामदायक थी बल्कि लंबी दूरी के सफर के लिए बेहतरीन थी। कार के डिजाइन की बात करें, तो सामने चार गोल हेलोजन हेडलाइट्स, क्रोम बंपर और फोर्ड का चमकता हुआ बैज इसे खास बनाते हैं।

Air Force Day 2025: रजिस्ट्रेशन नंबर “IAF 1”

इस कार की रजिस्ट्रेशन प्लेट भी “IAF 1” है। यह लेफ्ट-हैंड ड्राइव मॉडल है, जिसमें एयर कंडीशनिंग, एएम रेडियो और पावर विंडोज जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। 1969 से लेकर 1992 तक यह कार कई वायुसेना प्रमुखों की आधिकारिक स्टाफ कार रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार में 10 से अधिक एयर चीफ मार्शल ने सफर किया है, जिनमें पीसी लाल के अलावा ओम प्रकाश मेहरा, लाल चंद्र धूत और इदरीस हसन लतिफ जैसे नाम शामिल हैं।

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
Historic 1967 Ford Car in Palam Museum.

Air Force Day 2025: पालम म्यूजियम में है यह कार

1992 के बाद इस कार को रिटायर कर दिल्ली स्थित पालम एयर फोर्स म्यूजियम में रख दिया गया। यह विंटेज कार अब रोजमर्रा के उपयोग में नहीं है। इसे विशेष अवसरों, जैसे वायुसेना दिवस या ऐतिहासिक आयोजनों के लिए ही बाहर निकाला जाता है। सामान्य तौर पर इसे पालम एयर फोर्स म्यूजियम, नई दिल्ली में रखा जाता है। म्यूजियम में वायुसेना के पुराने विमान, हथियार और वाहन भी शोकस हैं। इस कार की नियमित मेंटेनेंस की जाती है ताकि इसकी पुरानी मशीनरी सही स्थिति में बनी रहे। हिंडन एयर बेस जैसे इवेंट्स (Air Force Day 2025) के लिए इसे म्यूजियम से लाया जाता है।

IAF Day 2025 पर ऑपरेशन सिंदूर के लिए गोल्डन एरोज, S-400 और ब्रह्मोस स्क्वॉड्रन को मिला यूनिट साइटेशन

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: 93वें भारतीय वायुसेना दिवस के मौके पर इस बार वायुसेना की कई यूनिट्स को विशेष सैन्य सम्मान दिए गए। कुल 97 पुरस्कार और 6 यूनिट को इस साल साइटेशन प्रदान किए गए, जिनमें देश के एयर डिफेंस और स्ट्राइकिंग क्षमता से जुड़ीं कई प्रमुख स्क्वॉड्रन शामिल हैं। खास बात यह है कि इन सभी यूनिट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अभूतपूर्व पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान को जबरदस्त चोट पहुंचाई थी।

Air force Day 2025: एयर चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कैसे एयर पॉवर बदल सकती है युद्ध की दिशा, अनुशासित ट्रेनिंग, सटीक योजना का है शानदार उदाहरण

IAF Day 2025: ऑपरेशन सिंदूर के लिए किया सम्मानित

कार्यक्रम में आईएएफ चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने गैलेंट्री अवॉर्ड्स और साइटेशंस (उल्लेखनीय सेवा के प्रमाण-पत्र) प्रदान किए। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना के 9 वीर चक्र पाने वाले अधिकारियों को स्ट्राइक, इंटरसेप्शन और एयर सुपीरियरिटी के लिए साइटेशन दिया गया। इनमें ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा, ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी, ग्रुप कैप्टन कुणाल कलरा, विंग कमांडर जॉय चंद्रा, स्क्वाड्रन लीडर सरथक कुमार, स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह, स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट आर्शवीर सिंह ठाकुर शामिल थे। इन अधिकारियों ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 सिस्टम, राफेल स्ट्राइक्स और 5 पाकिस्तानी जेट्स गिराने में अहम भूमिका निभाई थी।

वहीं इस दौरान वायुसेना प्रमुख ने कुल 97 मेडल्स और 6 यूनिट साइटेशन वायुवीरों को प्रदान किए। साइटेशन मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी और सेवा के लिए दिए गए। जिन स्क्वॉड्रनों को यूनिट साइटेशन दिया गया है, उनमें एस-400 एयर डिफेंस यूनिट, राफेल स्क्वॉड्रन नंबर 17 ‘गोल्डन एरोज’, सुखोई स्क्वॉड्रन, ब्रह्मोस से लैस 222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन और लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट शामिल हैं।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: गोल्डन एरोज को यूनिट साइटेशन

हरियाणा के अंबाला में स्थित भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध नंबर 17 स्क्वॉड्रन, जिसे ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वॉड्रन को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी के नेतृत्व में इस स्क्वॉड्रन ने 9 आतंकवादी ट्रेनिंग कैंपों और पाकिस्तानी वायुसेना के 11 प्रमुख एयरबेस पर सटीक हवाई हमले किए थे। बता दें कि यह स्क्वॉड्रन भारत के सबसे एडवांस 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट्स राफेल से लैस है।

राफेल लड़ाकू विमानों से लैस गोल्डन एरोज ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के भीतर तक जाकर स्ट्राइक की थी। यह स्क्वॉड्रन भारतीय वायुसेना की आधुनिक एयर पावर का प्रतीक मानी जाती है। वायुसेना प्रमुख की उपस्थिति में ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी को यूनिट साइटेशन प्रमाण पत्र और प्रशस्ति प्रदान किया गया।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन को ब्रह्मोस के लिए सम्मान

‘टाइगरशार्क्स’ के नाम से मशहूर नंबर 222 स्क्वॉड्रन को भी सम्मानित किया। यह भारतीय वायुसेना की एकमात्र स्क्वॉड्रन है जो ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से लैस है। इस स्क्वॉड्रन को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह स्क्वॉड्रन सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम है।

222 स्क्वॉड्रन की कमान ग्रुप कैप्टन वरुण भोज के पास है और वारंट ऑफिसर धीरज कुमार सहित यूनिट के अन्य अधिकारियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इन स्क्वॉड्रन ने भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक रेंज को कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

S-400 की स्क्वॉड्रन 2601  एयर डिफेंस यूनिट को भी मिला साइटेशन

भारतीय वायु सेना प्रमुख एसीएम एपी सिंह ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की स्क्वाड्रन संख्या 2601 ‘ट्रायंफ’ को भी यूनिट प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस यूनिट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय के हवाई क्षेत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभाई थी। एस-400 सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर सकता है।

अगस्त में आर्मी वॉर कॉलेज, महू में रण संवाद के दौरान, एसीएम एपी सिंह ने एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम की तारीफ की थी और इसे “गेम-चेंजर” कहा। उन्होंने कहा कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन को अपनी सीमा के अंदर भी काम करने की आजादी नहीं दी।

लोइटरिंग म्यूनिशन 2232 केस्ट्रेल्स यूनिट को भी मिला सम्मान

वायुसेना की लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट 2232 केस्ट्रेल्स को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह यूनिट आधुनिक युद्ध में निगरानी और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस यूनिट ने रियल टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए भारतीय स्क्वॉड्रनों को अचूक टारगेटिंग में मदद की थी।

इसके अलावा उन्होंने यूनिट साइटेशन स्क्वॉड्रन नंबर 43 ‘आईबेक्सेस’ को प्रदान किया, जो एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है। साथ ही 7 बीआरडी (BRD) को भी यूनिट साइटेशन दिया गया, जहां रडार और गाइडेड वेपन्स सिस्टम रखे और ऑपरेट किए जाते हैं।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

एमआई-17 हेलीकॉप्टरों का ‘ध्वज’ फॉर्मेशन

बुधवार को उत्तर प्रदेश के हिंडन एयर बेस (गाजियाबाद) पर आयोजित कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा सीडीएस जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी भी मौजूद थे। हालांकि इस बार फ्लाइपास्ट तो नहीं हुआ, लेकिन परेड का आयोजन किया गया था। सुबह 9 बजे से समारोह शुरू हुआ। परेड की शुरुआत प्रेसिडेंट्स कलर्स के मार्च-इन से हुई। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने परेड का निरीक्षण किया और गार्ड ऑफ ऑनर को सलामी दी। परेड में आईएएफ के मार्चिंग कंटिंजेंट्स शामिल थे। इसके बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने ‘ध्वज’ फॉर्मेशन में उड़ान भरकर हवाई सलामी दी।

इस वायुसेना दिवस (IAF Day 2025) समारोह में हेरिटेज फ्लाइट का शानदार हवाई प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहा। इस प्रदर्शन में ऐतिहासिक ‘टाइगर मॉथ’ और ‘एचटी-2’ विमानों ने संयुक्त रूप से उड़ान भरी, जिसके बाद पुराने ‘हार्वर्ड’ विमान ने सोलो डिस्प्ले पेश किया। पारंपरिक फ्लाईपास्ट और एयर डिस्प्ले का आयोजन 9 नवंबर 2025 को गुवाहाटी में किया जाएगा।

वहीं, स्टैटिक डिस्प्ले में आधुनिक विमानों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। इनमें सी-17 ग्लोबमास्टर, सुखोई-30 एमकेआई, अपाचे, मिग-29, मिग-21 बाइसन, राफेल, एचएलएच मार्क-3, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, आकाश मिसाइल सिस्टम और रोहिणी रडार शामिल थे।

AIM-120 Missiles: अगर पाकिस्तान ने भारतीय फाइटर जेट्स पर दागीं ये मिसाइलें, तो कैसे भारत का ये घातक सिस्टम देगा मुंहतोड़ जवाब?

AIM-120 Missiles
Pakistani F-16 fighter jets are seen launching AIM-120 missiles towards Indian Air Force jets, while Indian Rafale and Su-30MKI aircraft respond with counter fire in the skies. On the ground, India’s S-400 and Akash air defence systems launch missiles, showcasing a layered air defence response. (AI Image)

AIM-120 Missiles: मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि भारत के पास पाकिस्तान सीमा को पार किए बिना पाक के भीतर 300 किलोमीटर तक अंदर तक जाकर एयर स्ट्राइक करने की क्षमता है। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। अब जब अमेरिका ने पाकिस्तान को एआईएम-120 एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें देने की मंजूरी दे दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर पाकिस्तान भविष्य में इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर भारत पर हमला किया है तो भारत इसका जवाब कैसे देगा।

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अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में पाकिस्तान को एआईएम-120 बियोंड विजुअल रेंज एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें मिसाइलें बेचने की मंजूरी दी है। अमेरिका इस बार पाकिस्तान को एआईएम-120सी-8 वर्जन देने वाला है, जिसकी रेंज 160 किलोमीटर तक है और यह मिसाइल लेटेस्ट इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग को भी भेद सकती है।

यह डील 41.6 बिलियन डॉलर के बड़े एयर-टू-एयर वेपन पैकेज का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान के साथ जापान, ब्रिटेन और तुर्की जैसे देश भी शामिल हैं। पाकिस्तान इन मिसाइलों को अपने F-16 ब्लॉक 52 जेट्स पर लगाएगा, जिसके बाद उसे उम्मीद है कि उसकी ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) हवाई हमले की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

भारत के पास है AIM-120 से निपटने के पुख्ता इंतजाम

भारत का एयर डिफेंस सिस्टम मल्टी लेयर्ड है, जिसमें लंबी दूरी से लेकर छोटी दूरी तक के लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता है। इसमें रूसी एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम, स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, इजरायली मीडियम रेंज सरफेट टू एयर मिसाइल, स्पायडर और लेटेस्ट इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ग्रिड शामिल हैं।

एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम को भारत की एयर डिफेंस की रीढ़ माना जाता है। एस-400 सिस्टम की 40N6 मिसाइलें 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के जेट्स और मिसाइलों को मार गिरा सकती हैं। एस-400 ट्रायम्फ सिस्टम की खूबी है कि यह एक साथ 36 मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने 300 किलोमीटर दूर पाकिस्तानी एफ-16 और जेएफ-17 को गिराकर अपनी ताकत दिखाई थी।

इसका एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अर्रे- एईएसए रडार एआईएम-120 जैसी मैक-4 स्पीड यानी लगभग 4,240 किलोमीटर प्रति घंटा (सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक) स्पीड से आने वाली मिसाइलों की रफ्तार और डायरेक्शन आसानी से ट्रैक कर लेता है। दिल्ली, अमृतसर, जोधपुर और पठानकोट में तैनाती के चलते यह पाकिस्तान की किसी भी मिसाइल को भारतीय सीमा से काफी पहले ही इंटरसेप्ट कर सकता है।

स्वदेशी मिसाइलें हैं भारत की ताकत

एस-400 के अलावा, भारत के पास स्वदेशी और अन्य विदेशी सतह-से-हवा में में मार कपने वाले मिसाइल सिस्टम भी हैं, जो एआईएम-120 को पहले की नाकाम कर सकते हैं। डीआरडीओ का बनाया आकाश मिसाइल सिस्टम 30 से 70 किलोमीटर की दूरी तक टारगेट को गिरा सकता है और एआईएम-120 को मिड-कोर्स में ही नष्ट कर सकता है। इसका ऑटोमेटेड कमांड और कंट्रोल सिस्टम रीयल-टाइम में खतरों को पहचानता है और तुरंत जवाब देता है।

इसके अलावा इजरायल के साथ मिलकर बनाया मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम (MRSAM) 70 किलोमीटर तक की रेंज में हाई-स्पीड मिसाइलों और ड्रोन्स को मार गिराने में सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर में MRSAM ने 600 से अधिक ड्रोन्स और मिसाइलों को निशाना बनाया था।

वहीं, छोटी दूरी के लिए भारत के पास इजरायल से खरीदा SPYDER सिस्टम है, जो तेजी से दिशा बदलने वाली मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है। जो 15-20 किलोमीटर की छोटी दूरी के लिए है, तेजी से मैन्युएवर करने वाली मिसाइलों को रोकने में माहिर है। ये सभी सिस्टम मिलकर भारत की हवाई रक्षा को एक अभेद्य दीवार बनाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में इन तीनों सिस्टम ने मिलकर पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दिया था।

हवा-से-हवा मुकाबले में भारत है तैयार

वहीं, कल्पना कीजिए कि अगर पाकिस्तान एफ-16 से एआईएम-120 मिसाइल दागता है, तो भारत के पास हवा-से-हवा मिसाइलों में मीटियोर, एस्ट्रा और आर-77 जैसे विकल्प भी हैं।

राफेल पर तैनात मीटियोर मिसाइल 150-200 किलोमीटर की दूरी तक टारगेट को निशाना बना सकती है। इसमें रैमजेट इंजन और नो-एस्केप जोन जैसी क्षमताएं हैं, जो एआईएम-120 से कहीं आगे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में मीटियोर ने पाकिस्तानी एफ-16 और जेएफ-17 को मार गिराया था।

एस्ट्रा मार्क1 मिसाइल, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है, वह सुकोई-30 और तेजस पर तैनात है और 110 किलोमीटर की रेंज तक मार कर सकती है। यह मिसाइल “फायर-एंड-फॉरगेट” तकनीक से लैस है और पाकिस्तानी एफ-16 को आउटरेंज कर सकती है। वहीं इसका अपग्रेड वर्जन एस्ट्रा मार्क2 का ट्रायल 2025 में हुआ था और इसकी रेंज 160-200 किलोमीटर है। जबकि एस्ट्रा मार्क3 (गांडीव), जो सोलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट टेक्नोलॉजी पर आधारित है, 300+ किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन को मारने में सक्षम होगी। ये मिसाइलें पाकिस्तान के एफ-16 को उनके लॉन्च जोन से पहले ही आउटरेंज कर सकती हैं।

IACCS को कभी नहीं भूल पाएगा पाकिस्तान

भारत का इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम यानी IACCS (इंटीग्रेटिड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम) ऑपरेशन सिंदूर में गेमचेंजर साबित हुआ था। यह सिस्टम सेंसर फ्यूजन के जरिए रडार, सैटेलाइट और अन्य सेंसर से प्राप्त डेटा को जोड़कर रीयल-टाइम में जवाबी कार्रवाई करता है। IACCS ने पाकिस्तानी जेट्स और मिसाइलों को 300 किलोमीटर दूर से ट्रैक किया और उन्हें नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एयर फोर्स एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया था कि इस सिस्टम ने पाकिस्तान को उसके ही इलाके में सीमित कर दिया था।

इसके साथ ही, सम्युक्त और ध्रुति जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम एआईएम-120 के रडार होमिंग को जाम कर सकते हैं, जिससे मिसाइल लक्ष्य से भटक जाती है। फ्लेयर्स और चाफ जैसे डिकॉय एआईएम-120 को भ्रमित कर गलत दिशा में भेज सकते हैं।

काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड

भारत का इंटीग्रेटेड काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड, जिसमें रडार, सेंसर और जैमर्स का नेटवर्क शामिल है, 1,800 किलोमीटर के हवाई क्षेत्र को स्कैन करता है। ऑपरेशन सिंदूर में इस ग्रिड ने पाकिस्तानी स्वार्म अटैक्स को विफल किया था, जिसमें सैकड़ों ड्रोन्स और मिसाइलें शामिल थीं। यह तकनीक एआईएम-120 जैसे खतरों को पहले ही पहचान लेती है और उन्हें तबाह करने के लिए तुरंत एक्शन लेती है। जिससे समय पर जवाबी हमला देना संभव हो जाता है।

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर में जेएफ-17 और एफ-16 खोने से घबराया हुआ है पाकिस्तान, जानता है भारत के अस्त्र और गांडीव से बचना है बेहद मुश्किल, इसलिए की ये डील

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान बेहद घबराया हुआ है। जिस तरह से ऑपरेशन के दौरान भारत ने हवा में ही पाकिस्तान के पांच-छह 5 हाई-टेक फाइटर जेट्स को हवा में गिराया गया था, जिनमें एफ-16 के अलावा जेएफ-17 थंडर भी शामिल थे। ये वही थंडर जेट थे जिनमें चीनी पीएल-15 मिसाइलें लगी हुई थीं। वहीं एफ-16 फाइटर जेट्स को हवा में मार गिराने से पाकिस्तान सकते में है। जिसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका जाकर एफ-16 फाइटर जेट्स के लिए AIM-120 एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल- AMRAAM मांगी थी। वहीं अमेरिका ने इन मिसाइल को बेचने की मंजूरी दे दी है। हालांकि ये मिसाइल काफी एडवांस हैं, लेकिन भारत पहले ही इन मिसाइलों की काट की तैयारी कर चुका है।

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मिग-21 को बनाया था निशाना

AIM-120 वही मिसाइल है जिसने 2019 में बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी एफ-16 से डॉग फाइट के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के मिग-21 बाइसन को टारगेट किया था। वहीं, इस सौदे के बाद पाकिस्तान को आधुनिक रडार-गाइडेड मिसाइलें मिलेंगी, जिनकी रेंज 150 किलोमीटर से अधिक है और जिन्हें “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक से बनाया गया है।

सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर पाकिस्तान को उन 30 देशों की सूची में शामिल किया है जो रेथियन कंपनी से AIM-120 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) खरीद सकते हैं। कुल सौदे की कीमत 41.6 अरब डॉलर बताई जा रही है, जो दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज है। इस सूची में ब्रिटेन, जापान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश भी शामिल हैं। इस सौदे से पाकिस्तान को AIM-120C8 वर्जन की मिसाइलें मिलेंगी, जो अमेरिकी वायुसेना के AIM-120D मॉडल का एक्सपोर्ट वर्जन है। इस मिसाइल को एफ-16, यूरोफाइटर टाइफून, एफ-22 रैप्टर और एफ-35 के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने में सक्षम

AIM-120C8 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पायलट एक बार मिसाइल दागने के बाद अपने विमान को सुरक्षित दिशा में मोड़ सकता है और मिसाइल अपने रडार से टारगेट को ट्रैक कर मार गिराती है। इस मिसाइल में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव के लिए टू वे डेटा लिंक्स, एडवांस गाइडेंस सिस्टम, जीपीएस असिस्टेंस और हाई-स्पीड टारगेट्स को ट्रैक करने की क्षमता है। यह मिसाइल एफ-16 फाइटर जेट के साथ ही इंटीग्रेट हो सकती है।

पाकिस्तान के पास 66 एफ-16

पाकिस्तान के पास इस समय करीब 66 एफ-16ए/बी और 19 एफ-16सी/डी फाइटर जेट हैं, जो चार स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। इन विमानों में AIM-120 मिसाइलों को इंटीग्रेट करने से पाकिस्तान की बियोंड विजुअल रेंज यानी BVR यानी दृश्य सीमा से बाहर लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। पाकिस्तान पहले से ही AIM-120C5 वर्जन (AIM-120 AMRAAM) का इस्तेमाल कर चुका है, जिसने मिग-21 को निशाना बनाया था।

इसके अलावा पाकिस्तान चीन से पीएल-15 मिसाइल भी खरीद चुका है, जिसे उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने का दावा किया था। पीएल-15 की रेंज 200 किलोमीटर के करीब है। अब अमेरिकी AIM-120 मिसाइल मिलने से पाकिस्तान के पास दो एडवांस बीवीआर मिसाइल सिस्टम होंगे। जिन्हें वो एफ-16 और जेएफ-17 पर लगाएगा।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
Gandiva Missile

भारत की अस्त्र और गांडीव तैयार

वहीं, भारत के एस्ट्रा एमके1 का एडवांस वर्जन एस्ट्रा एमके2 मिसाइल और गांडीव (एस्ट्रा एमके3) तैयार कर रहा है। एस्ट्रा एमके2 को डीआरडीओ ने डेवलप किया है। यह स्वदेशी बियोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है जिसकी रेंज 160 से 200 किलोमीटर तक है। यह भी “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है और इसमें डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है, जिससे यह मैक 4 यानी लगभग 4,940 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है।

एस्ट्रा एमके2 में स्वदेशी कु-बैंड आरएफ सीकर, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और डेटा लिंक शामिल हैं। इसके जरिए यह इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स को झेलते हुए भी लक्ष्य को सटीक रूप से भेद सकती है। इसे सुखोई-30एमकेआई, एलसीए तेजस मार्क1ए के अलावा और भविष्य के एएमसीए में लगाया जा सकेगा। 2025 में इसके कई यूजर ट्रायल सफल रहे हैं, जिनमें 160 किमी से अधिक दूरी पर हाई-स्पीड यूएवी टारगेट्स को निशाना बनाया है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
ASTRA MK2

गांडीव के 2026 से फुल एयर ट्रायल

वहीं गांडीव यानी एस्ट्रा एमके3 की बात करें तो यह एस्ट्रा परिवार की सबसे एडवांस मिसाइल है, जिसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम है। यह तकनीक मिसाइल को लगातार हाई-स्पीड पर उड़ान बनाए रखने में सक्षम बनाती है। इसकी रेंज 300–350 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जो अमेरिकी AIM-120 और चीनी पीएल-15 दोनों से अधिक है। गांडीव को अवॉक्स, रिफ्यूलिंग टैंकर और स्टेल्थ फाइटर जैसे हाई-वैल्यू टारगेट्स को दूर से ही तबाह करने के लिए डेवलप किया जा रहा है। 2025 में इसके ग्राउंड और फ्लाइट टेस्ट सफल रहे हैं और 2026 से इसका फुल एयर ट्रायल शुरू होने की तैयारी है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan
meteor missile rafale

राफेल में है घातक मिटिओर

वहीं राफेल भी बियोंड विजुअल रेंज हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइल मिटिओर से लैस है। जिसे यूरोप की एमबीडीए कंपनी ने बनाया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी 150 से 200 किलोमीटर की लंबी रेंज है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को दूर से ही निशाना बना सकती है। मिटिओर में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे मैक4 से ज्यादा की रफ्तार दे सकता है। यह “फायर-एंड-फॉरगेट” मिसाइल है, यानी इसे दागने के बाद पायलट को लक्ष्य पर नजर रखने की जरूरत नहीं होती। इसमें लगा एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम और डेटा लिंक दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग को भी फेल कर देता है। मिटिओर का “नो-एस्केप जोन” काफी बड़ा है, जिससे लक्ष्य का बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यह हर मौसम में और दिन-रात काम करने में सक्षम है।

मिटिओर ने गिराए जेएफ-17 और एफ16

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जेट्स से दागी गई मिटिओर ने पाकिस्तानी जेएफ-17 थंडर ब्लॉक III और एफ16 जेट्स को 150-200 किमी दूर से मार गिराया था। 7 मई की शुरुआती हवाई हमलों में, जब पीएएफ ने पीएल-15 मिसाइलों से जवाब दिया, तो मिटिओर के “नो-एस्केप जोन” में 2-3 पाकिस्तानी जेएफ-17 और 1 एफ-16 जेट्स फंस गए थे, जो हवा में मिटिओर का निशाना बन गए थे। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान एयर फोर्स ने जब ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक किए, लेकिन मिटिओर ने राफेल के स्पैक्ट्रा इलैक्टॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ मिलकर इनमें से कई को बेकार कर दिया। यह मिटिओर ही थी जिसमें भारतीय वायुसेना को “फर्स्ट शॉट-फर्स्ट किल” एज दी, जिसके से पाकिस्तान एयर फोर्स को पीछे हटना पड़ा और 10 मई को सीजफायर के लिए पाकिस्तान को मजबूर किया।

अमेरिका-पाकिस्तान डील से भारत को चुनौती

फरवरी 2025 में अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के एफ-16 फ्लीट के रखरखाव के लिए 397 मिलियन डॉलर की सहायता को मंजूरी दी थी। जुलाई में पाकिस्तान एयर चीफ ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके बाद मिसाइल सौदे का रास्ता साफ हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान को यह भरोसा दिलाया कि मिसाइलों का इस्तेमाल केवल आतंकवाद-रोधी अभियानों में किया जाएगा, लेकिन भारत में सुरक्षा एजेंसियां इसे लेकर सतर्क हैं।

इस डील का समय भी अहम है। 2024 में भारत-अमेरिका रक्षा संबंध चरम पर थे। एमक्यू-9बी ड्रोन, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल और अन्य रक्षा तकनीक सौदे हुए। लेकिन 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। इस मिसाइल सौदे को भारत के सुरक्षा हलकों में रणनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

India-South Korea Maritime Exercise: भारत और दक्षिण कोरिया की नौसेनाएं पहली बार इंचियोन में करेंगी संयुक्त समुद्री युद्धाभ्यास

India South Korea Maritime Exercise

India-South Korea Maritime Exercise: भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मजबूती देते हुए भारतीय नौसेना और दक्षिण कोरिया की नौसेना इस महीने के अंत में पहली बार इंचियोन में एक ऐतिहासिक बाइलेटरल मैरीटाइम एक्सरसाइज करने जा रही हैं। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किया जाएगा। खास बात यह होगी इसमें भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस सह्याद्री (INS Sahyadri) हिस्सा लेगा, जो फिलहाल नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट पर है।

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India-South Korea Maritime Exercise से दोनों देशों की संबंध होंगे मजबूत

आईएनएस सह्याद्री इस समय मलेशिया में तैनात है, जहां वह भारत-मलेशिया नौसैनिक सहयोग को मजबूत बनाने, दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के मिशन पर है। मलेशिया उन पांच देशों में से एक है जिनका साउथ चाइना सी में चीन के साथ समुद्री क्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में भारत की नौसैनिक उपस्थिति सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

India-South Korea Maritime Exercise रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना और रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के बीच यह पहला मौका होगा जब दोनों देश औपचारिक रूप से द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास कर रहे हैं। इससे पहले दोनों नौसेनाएं केवल मैरीटाइम पार्टनरशिप में एक्सरसाइज में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन अब इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है।

यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित होगा हार्बर फेज और सी फेज। हार्बर फेज में दोनों नौसेनाओं के बीच रणनीतिक बातचीत, पेशेवर इंटरैक्शन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और योजनाओं पर काम होगा। इसके बाद समुद्र में प्रैक्टिकल एक्सरसाइज की जाएंगी जिनमें सी बैटल स्ट्रेटेजी, मैन्युवर्स और जॉइंट ऑपरेशंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे नौसैनिक संबंधों को दर्शाता है।

आईएनएस सह्याद्री का यह अभियान केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहेगा। नौसेना सूत्रों के अनुसार, आईएनएस सह्याद्री अगले महीने जापान और पापुआ न्यू गिनी की नौसेनाओं के साथ भी संयुक्त अभ्यास करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के मल्टीलेटरल सुरक्षा सहयोग को और व्यापक रूप देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। दोनों देशों ने 2003 में पहला द्विपक्षीय रक्षा संवाद और 2005 में पहला विदेश नीति और सुरक्षा संवाद आयोजित किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ता गया है।

भारतीय नौसेना की ओर से यह भी पुष्टि की गई है कि दक्षिण कोरियाई नौसेना को फरवरी 2026 में भारत के पूर्वी तट पर आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह आयोजन ग्लोबल नेवल फोर्सेस के लिए बड़ी एग्जीबिशन होता है, जिसमें भारत अपनी नौसैनिक क्षमता और रणनीतिक पहुंच को प्रदर्शित करता है।

India-South Korea Maritime Exercise है अहम दोनों देशों के लिए

आईएनएस सह्याद्री की भूमिका इस पूरे अभियान में बेहद अहम है। शिवालिक क्लास का यह स्वदेशी रूप से निर्मित मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट जुलाई 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल की गया था। यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और इसे सतह तथा वायु दोनों से आने वाले खतरों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें, मीडियम और शॉर्ट रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विभिन्न कैलिबर की ताकतवर गनें लगी हैं। इसके अलावा इसमें दो मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर भी रखे जा सकते हैं, जिससे यह निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों और आपातकालीन स्थितियों में भी सक्षम है।

आईएनएस सह्याद्री की तैनाती नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है। यह क्षेत्र एशिया-प्रशांत में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक हितों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रुख के बीच भारत की नौसेना की सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन के लिए अहम मानी जाती है।

वहीं, भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को केवल राजनीतिक और आर्थिक मंचों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसे रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से लागू कर रहा है। दक्षिण कोरिया, जापान और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों के साथ लगातार सैन्य सहयोग बढ़ाकर भारत क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इंचियोन में होने वाला यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों नौसेनाओं को न केवल एक-दूसरे की परिचालन क्षमता को समझने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में जॉइंट ऑपरेशंस के लिए तालमेल भी विकसित करेगा।

India-South Korea Maritime Exercise भारतीय नौसेना ने पिछले कुछ वर्षों में अपने युद्धपोतों को रणनीतिक रूप से उन क्षेत्रों में तैनात करना शुरू किया है जो भारत के सामरिक हितों से सीधे जुड़े हैं। नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक में आईएनएस सह्याद्री की मौजूदगी यही बताती है कि भारत न केवल सामरिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि सहयोगी देशों के साथ उसके रिश्तों को भी नई दिशा दे रहा है।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: बलूचिस्तान में आईएसआईएस को जिंदा कर रहा है पाकिस्तान, लश्कर, जैश और दाएश को एक साथ लाने की है तैयारी

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंक एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने मीर शफीक-उर-रहमान मेंगल नाम के एक कुख्यात कबायली नेता को आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया) और आईएसकेजेपी (इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस) के लिए हथियारों और लॉजिस्टिक सप्लाई का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया है।

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मीर शफीक खुजदारजिले का एक प्रभावशाली कबायली नेता है, जो लंबे समय से पाकिस्तानी आईएसआई का नजदीकी माना जाता है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि उसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, आईएसआईएस और दाएश यानी “अल-दौला अल-इस्लामिया फिल-इराक वाल-शाम” जैसे संगठनों को बलूचिस्तान में एक साथ लाने की गुप्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति उस समय की गई जब बलूचिस्तान में पााकिस्तान की सेना लगातार हिंसा कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, शफीक को आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने, भर्ती अभियान चलाने, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करने और लॉजिस्टिक सप्लाई चैन को संभालने का काम सौंपा गया है।

मीर शफीक का नाम पहले भी हिंसा, गुमशुदगियों और कथित डेथ स्क्वाड्स से भी जुड़ा रहा है। 2008 में जब पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में ‘किल एंड डंप’ नीति लागू की, तब आईएसआई ने स्थानीय मिलिशिया गठित की। इन्हीं दिनों शफीक को खुजदारमें एक ब्रिगेडियर ने भर्ती किया और उसे “एसेट” घोषित किया गया। उन्होंने बलूच मुसल्लाह डिफ़ा तंजीम नामक मिलिशिया बनाई, जिसने अपहरण, यातनाएं और सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया। 2011 में तोटक गांव में सेना के ऑपरेशन के बाद उसे वहां का कंट्रोल भी सौंपा गया। इसी दौरान 82 वर्षीय मोहम्मद राहिम खान कलंदरानी और उनके परिवार के 16 सदस्यों का अपहरण हुआ और बाद में कई शव सामूहिक कब्रों में पाए गए।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan
Mir Shafiq with CM Balochistan sarfaraz Bugti. Ex PM Pakistan Anwar ul haq kakad, and a top Army officer. Mir Shafiq is responsible of bombing on Lawyers in Quetta killed 100’s, also bnp gathering were targeted past month killed dozens.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के जनरल हेडक्वार्टर ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और दूसरे जिहादी संगठनों को बलूचिस्तान में एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठित किया है। इन संगठनों को न केवल बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए बल्कि अफगानिस्तान, भारत और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan मीर शफीक का आईएसआईएस से जुड़ाव भी नया नहीं है। 2016 में सिंध के शिकारपुर में पकड़े गए एक आत्मघाती हमलावर उस्मान ब्रोही ने कबूल किया कि उसे शफीक के शिविर में आईएसआईएस के लिए ट्रेनिंग दी गई गई थी। उसी साल आईएसआईएस ने बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी का ऐलान किया और शफीक को अपना खासमखास बताया। 2017 में रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में एक पाकिस्तानी लड़के ने बताया कि वह वाध इलाके में शफीक के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण ले रहा था। सितंबर 2025 में क्वेटा के शाहवानी स्टेडियम में हुए आईएसकेजेपी आत्मघाती हमले में 15 लोगों की मौत हुई। इस हमले के पीछे भी शफीक का नेटवर्क सक्रिय था।

खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान को एक “कंट्रोल्ड कॉन्फ्लिक्ट जोन” में तब्दील कर रहा है। उद्देश्य यह है कि इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी जाए, पश्चिमी देशों से आतंकवाद-रोधी मदद ली जाए और सारी हिंसा का दोष आईएसआईएस पर डालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “डिनाएबिलिटी” बरकरार रखी जाए। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan एजेंसियों की योजनाा है कि निकट भविष्य में होने वाले कुछ धमाकों को आईएसआईएस के नाम पर किया जाए।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि मीर शफीक पिछले दो दशकों से आईएसआई के संरक्षण में इस क्षेत्र में चरमपंथी नेटवर्क चला रहे हैं। सरदार अख्तर मेंगल ने भी जुलाई 2023 में उन पर अपने घर पर मोर्टार हमला करने का आरोप लगाया था।

मीर शफीक के पिता नसीर मेंगल बलूचिस्तान के अंतरिम मुख्यमंत्री रहे थे, जबकि उनके भाई अत्ता-उर-रहमान मेंगल को जून 2025 में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मार गिराया। बीएलए ने इसे “राज्य-प्रायोजित डेथ स्क्वाड” के खिलाफ कार्रवाई बताया। जुलाई 2023 में वाध में उसके समर्थकों और बीएनपी-एम के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में चार लोग मारे गए थे।

शफीक की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया एक्स पर अफगान और भारतीय यूजर्स का कहना है कि यह पाकिस्तान की “हाइब्रिड वॉरफेयर” रणनीति है। उनका कहना है कि आईएसआई ईरान और अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए ऐसे संगठनों को औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसकेजेपी अब बलूच राष्ट्रवादियों को निशाना बना रहा है और इसमें आईएसआई का सीधा हाथ है।

मीर शफीक ने लाहौर के एलीट एचिसन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक दाओबंदी मदरसे में दाखिला लिया, जहां वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा। 2020 में उसे इस्लामाबाद बुलाकर नई जिम्मेदारी दी गई। इसके कुछ ही महीनों बाद उसने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसने स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जेम्सटाउन फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में उसे “पाकिस्तान का सबसे घातक मर्सनरी लीडर” बताया।

अमेरिका, यूएई और अन्य देशों ने आईएसआईएस की पाकिस्तान में गतिविधियों पर और Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan  चिंता जताई है। बलूचिस्तान पोस्ट ने शफीक को “राज्य का घातक हथियार” करार दिया। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के संरक्षण में पनप रहा यह नेटवर्क न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिकोण क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

Tejas Mk1A Order: वायुसेना क्यों कर रही तेजस MK1A के नए ऑर्डर से तौबा? LCA मार्क2 को ‘वर्कहॉर्स’ बनाने की तैयारी!

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force not willing New Procurement Amid Delivery Delays and Production Challenges

Tejas Mk1A Order: भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एलसीए तेजस एमके1ए को लेकर बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना ने अब घरेलू लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के नए ऑर्डर जारी नहीं करने का फैसला किया है। अभी तक दो चरणों में 180 तेजस एमके1ए फाइटर एयरक्राफ्ट के ऑर्डर Tejas Mk1A Order दिए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से अभी तक एक भी फाइटर जेट की डिलीवरी नहीं हुई है। वहीं, अक्टूबर में पहले दो तेजस एमके1ए की डिलीवरी की जानी है।

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देरी से रणनीतिक योजनाओं पर पड़ा असर

वायुसेना सूत्रों ने बताया कि तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A Order) के उत्पादन में देरी और इंजन सप्लाई की दिक्कतों के चलते यह फैसला लिया गया है। वायुसेना के उच्च अधिकारियों का कहना है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा समय पर डिलीवरी न होने से वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि 2021 में दिए गए 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर की डिलीवरी अभी पूरी नहीं हुई, जबकि नए 97 विमानों का ऑर्डर जारी हो चुका है।

मार्क1ए के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश नहीं

सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2021 में हुए 48,000 करोड़ रुपये के पहले सौदे के तहत 83 विमानों (73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर) की डिलीवरी मूल रूप से मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन देरी से यह मार्च 2025 तक खिसक गई। वहीं इनमें से दो विमान की डिलीवरी अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित है, और वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 12 विमान वायुसेना को मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों ने कहा कि डिलीवरी में देरी इतनी हो चुकी है कि फिलहाल तेजस मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब वायुसेना का पूरा फोकस तेजस मार्क2 पर है। जिसके प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2026 के आखिर तक या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसका प्रोडक्शन 2028 से शुरू हो जाएगा, जो 2035 तक चलेगा।

एयर चीफ ने भी की मार्क2 की वकालत

हाल ही में 93वें एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि तेजस भविष्य की हल्के लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए हमारी रीढ़ है। उन्होंने कहा कि एलसीए मार्क2 मेरी नजर में मार्क1ए का ही एक एक्सटेंशन है। यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म होगा, जो अधिक हथियार ले जा सकेगा, लंबी दूरी और ज्यादा समय तक ऑपरेट कर सकेगा और बड़े हथियार ले जाने में सक्षम होगा। इसलिए यह वायुसेना की योजनाओं में बड़ी अहमियत रखता है।

उन्होंने कहा कि अगर एमके2 प्रोग्राम समय पर होता, तो संभव है कि एलसीए मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) की कुछ अगली खेप मार्क2 के रूप में ऑर्डर की जाती। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस पर विचार हो सकता है। तेजस मार्क1ए की टाइमलाइन पर उन्होंने कहा कि यह विमान वायुसेना की दी गई क्वॉलिफिकेशन रिक्वायरमेंट्स के अनुसार डेवलप किया जा रहा है, और जैसे ही एचएएल इसे सर्टीफाइड करेगा, वायुसेना इसे शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उत्पादन शुरू हो चुका है, कुछ वादे किए गए हैं, कुछ रिसर्च और डेवलपमेंट का काम बाकी है। जैसे ही यह पूरा होगा, हम विमान लेने के लिए तैयार हैं।

प्रोडक्शन स्पीड है असली चुनौती

हालांकि, एयर चीफ ने साफ कहा कि असली चुनौती प्लेटफॉर्म की नहीं बल्कि प्रोडक्शन स्पीड की है। उन्होंने कहा, “वायुसेना को हर साल कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी 30 से 40 फाइटर विमान चाहिए ताकि पुरानी हो चुकी फ्लीट को समय रहते बदला जा सके।” वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की ताकत से काफी कम है। पुराने मिग-21, मिग-27 और जैगुआर विमानों के तेजी से रिटायर होने के कारण यह अंतर और बढ़ता जा रहा है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “AMCA की पहली उड़ान 2028 के आसपास और इंडक्शन 2035 तक का लक्ष्य है। अगर फोकस बनाए रखा जाए तो यह समयसीमा पूरी हो सकती है या उससे भी बेहतर प्रदर्शन हो सकता है। हमें अब स्पष्ट रूप से पता है कि हमें कौन-सी तकनीक चाहिए और वह कहां उपलब्ध है।”

एमके2 पर शिफ्ट कर दें 97 विमानों का ऑर्डर – Tejas Mk1A Order

वहीं सूत्रों का कहना है कि एमके1ए के 97 विमानों के दूसरे ऑर्डर को एमके2 पर शिफ्ट कर देना चाहिए। अगर हम जल्दी ऑर्डर देते हैं, तो दोनों का प्रोडक्शन साथ शुरू हो सकता है, जिससे समय और क्षमता दोनों में बड़ा अंतर आएगा।”

एमके2 में अधिक पेलोड, लंबी रेंज और एडवांस्ड एवियोनिक्स होंगे, जिससे यह अगले दशक में भारत की सामरिक बढ़त बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म साबित होगा। भारतीय वायुसेना और सरकार अब तेजस एमके1, एमके1ए और एमके2 के तीनों वेरिएंट्स में कुल 350 से अधिक स्वदेशी एलसीए को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

83 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था 2021 में – Tejas Mk1A Order

फरवरी 2021 में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर को मंजूरी दी थी, जिसमें 73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर शामिल थे। इस सौदे की कुल लागत 48,898 करोड़ रुपये थी और प्रति विमान की कीमत लगभग 579 करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसमें हथियार, रखरखाव और ट्रेनिंग का खर्च शामिल था। इसके लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ अगस्त 2021 में 5,375 करोड़ रुपये की सौदे के तहत 99 जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन देने का करार किया गया था।

सितंबर 25 में दूसरा ऑर्डर

वहीं, इस साल 25 सितंबर को रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस मार्क1ए की खरीद का ऑर्डर जारी किया, जिसकी कुल लागत 62,370 करोड़ रुपये थी। इन विमानों में 68 लड़ाकू और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। वहीं, इस डील के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और अगले छह सालों में 2034 तक पूरी की जानी है। जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद का नया सौदा लगभग 1 बिलियन डॉलर का होने वाला है।

एचएएल ने बढ़ाई क्षमता

Chlenge Tejas Mk1A Order तेजस एमके1ए की डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-404 इंजनों की सप्लाई चेन समस्या के चलते डिलीवरी की तारीख आगे खिसकती रही जो इस साल मार्च 2025 तक पहुंच गई। इस साल अक्तूबर तक चार एफ404 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहुंच चुके हैं। और साल के अंत तक सात और आने की उम्मीद है।

एचएएल के मुताबिक अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए। एचएएल का कहना है कि मार्च 2026 तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

2031-32 तक 180 एमके1ए की डिलीवरी

सूत्रों का कहना है कि एचएएल की मौजूदा रफ्तार का आकलन करें तो अकेले 83 विमानों का सौदा 2028-29 तक पूरा हो सकेगा। वहीं, दूसरे सौदे की डिलीवरी 2028 से शुरू होगी, और 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, 2031-32 तक 180 एमके1ए वायुसेना में शामिल हो जाएंगे, जिससे कुल एलसीए तेजस फ्लीट 220 तक पहुंचेगी।

तेजस मार्क1 के दो एक्टिव स्क्वाड्रन

Tejas Mk1A Order वहीं, तेजस मार्क 1 की बात करें तो 2009-2010 में वायुसेना ने 40 तेजस एमके1 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था, जिसकी लागत 8,802 करोड़ रुपये थी। प्रति विमान लगभग 220 करोड़ रुपये पड़े। इनमें से 32 सिंगल-सीट इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस कॉन्फिगरेशन में थे, जो 2016 में इंडक्ट हुए। दूसरा ऑर्डर 2016 में 20 फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस विमानों का था, जिसकी कीमत 6,500 करोड़ रुपये थी। ये तेजस मार्क 1 वायुसेना की दो स्क्वाड्रन नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ में तैनात हैं, जो तमिलनाडु के सुलुर एयर फोर्स स्टेशन में है।