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Is Myanmar lying from India to Coco Islands? Say- not Chinese soldier, why is the navy to worry, read expeller

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence

Coco Islands: During the Defence Dolog between India and Myanmar, the Youngon-based Junta government has relied India that no Chinese citizen or soldier exists on the Coco Islands located in the Bay of Bengal. The statement came when India had expressed concern about China’s growing activities over the past several months.

Myanmar’s cleaning has come in time when the deployment of new constructions, long runways and communication equipments has been observed on Coco Islands in Satellite Imagery. Indian security agencies believe that this area can become part of China’s marine monitoring strategy.

INS Androth in Indian Navy: The second anti-submarine warfare shello water craft included in the Indian Navy, 14 and in queue for ship commissioning

Coco Islands: Indian Navy not allowed to visit

India sought formal permission from the Myanmar government to inspect the Coco Islands. According to the sources, the Indian Navy requested to send a delegation there under the "Friendly Visit" but no approval has been made on behalf of the Janta regime so far.

भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 25 से 27 सितंबर के बीच म्यांमार की यात्रा की थी और वहीं यह मुद्दा उठाया था। यह उनका दूसरा सालाना डिफेंस डॉयलॉग था, जिसमें म्यांमार के सशस्त्र बलों के ट्रेनिंग चीफ मेजर जनरल क्याव को हटिके भी शामिल थे। हालांकि म्यांमार ने यह दोहराया कि “कोको द्वीपों पर एक भी चीनी नागरिक नहीं है,” लेकिन भारत को दौरे की इजाजत न मिलने से संदेह पैदा हो गया है।

Coco Islands: भारत की चिंता: सर्विलांस सेंटर बना सकता है चीन

भारत की मुख्य चिंता यह है कि म्यांमार के इन द्वीपों पर चीन ने सर्विलांस और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) इक्विपमेंट्स तैनात किए हैं। माना जाता है कि यह सेंटर भारत के बालासोर मिसाइल परीक्षण रेंज और रामबिल्ली नौसैनिक अड्डे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

बालासोर और एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा) जहां भारत अपने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करता है, कोको द्वीपों के लगभग समान अक्षांश यानी लेटिट्यूड पर स्थित हैं। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि चीन इस इलाके का इस्तेमाल भारतीय परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइल परीक्षणों को ट्रैक करने के लिए कर सकता है।

Coco Islands: क्या है इसका रणनीतिक महत्व

कोको द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप समूह है। वहीं इनकी दूरी म्यांमार के मुख्य भूमि से करीब 414 किमी दक्षिण में है। जबकि भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से मात्र 55 किलोमीटर दूर है। यह इलाका भारत के अंडमान और निकोबार के भी नजदीक है, जहां भारत का एकमात्र ट्राई-सर्विसेज थिएटर कमांड है और जो हिंद महासागर में भारत की सैन्य मौजूदगी का प्रमुख केंद्र है।

यह द्वीप दो प्रमुख हिस्सों में बंटा है ग्रेट कोको और लिटिल कोको। यहां के रनवे को हाल ही में बढ़ाकर 2,300 मीटर किया गया है, जिससे अब यहां ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उतर सकते हैं।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का हिस्सा थे Coco Islands

ब्रिटिश शासन के दौरान कोको द्वीप भारत का हिस्सा था। 1948 में म्यांमार की आजादी के बाद ये द्वीप उसके कंट्रोल में आ गए। 1962 के म्यांमार के सैन्य तख्तापलट के बाद, ग्रेट कोको पर एक जेल कॉलोनी बनी, जो 1971 में बंद हो गई। उसके बाद ये म्यांमार नेवी के कब्जे में आ गए।

1990 के दशक में जापानी मीडिया ने रिपोर्ट किया कि चीन म्यांमार को यहां सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद कर रहा है। 1994 में अफवाहें फैलीं कि म्यांमार ने यह द्वीप चीन को 30 साल की लीज पर दे दिया है, ताकि वह यहां रडार और सर्विलांस केंद्र स्थापित कर सके। हालांकि म्यांमार और चीन दोनों ने इससे इनकार किया।

Coco Islands: 2005 में भारत ने किया था दौरा

भारत ने 2005 में तत्कालीन भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कोको द्वीप (Coco Islands) का दौरा किया था। उनके दौरे का मकसद उन अफवाहों की जांच करना था, जिनमें कहा जा रहा था कि चीन ने कोको द्वीप पर सैन्य या सिग्नल इंटेलिजेंस बेस स्थापित किया है। दौरे के बाद, एडमिरल अरुण प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से कहा कि कोको द्वीप पर कोई चीनी सैन्य मौजूदगी नहीं है। उन्होंने इन अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि द्वीप पर केवल म्यांमार की नौसेना की सीमित सुविधाएं हैं, और वहां कोई विदेशी सैन्य गतिविधि या बेस नहीं देखा गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोको द्वीप की सामरिक स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के करीब है।

Coco Islands: सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता

2023 से लेकर अब तक कई अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट एजेंसियों जैसे मैक्सार और प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों में कोको द्वीपों (Coco Islands) पर नए निर्माण दिखाई दिए हैं। इनमें रनवे विस्तार, हैंगर, बैरक और नई सड़कों का निर्माण शामिल है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, यहां अब लगभग 1,500 सैन्यकर्मी तैनात हैं और पास के जेरी आइसलैंड से जुड़ने के लिए एक कॉजवे का निर्माण हो रहा है। इन सभी गतिविधियों ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी हैं।

देखें: गूगल मैप्स में पूरा कोको आइसलैंड

Coco Islands: भारत की रणनीतिक तैयारी

भारत ने हाल के सालों में अंडमान-निकोबार में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत किया है। यहां नौसेना के जहाजों के लिए नया डॉकयार्ड, एयरबेस और मिसाइल सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, भारत ने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय रक्षा संवाद को तेज किया है ताकि चीन के प्रभाव को सीमित किया जा सके। वहीं क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी हिंद महासागर में समुद्री निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

चीन पर निर्भर म्यांमार

2023 की चैथम हाउस की रिपोर्ट कहती है कि 2021 में म्यांमार में सेना के तख्तापलट के बाद से वहां की जुंटा सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते चीन पर और अधिक निर्भर हो गई है। चीन न सिर्फ म्यांमार का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, बल्कि उसकी सैन्य तकनीक और हथियारों का भी मुख्य स्रोत है। भारत को यह डर है कि इस निर्भरता के चलते म्यांमार चीन को अपने सामरिक ठिकानों तक पहुंच दे सकता है। वहीं, बीजिंग लगातार यह कहता रहा है कि “चीन की कोई सैन्य मौजूदगी कोको द्वीपों (Coco Islands) में नहीं है।”

Coco Islands Chinese Presence
Coco Islands Chinese Presence

क्या कहती हैं भारत की इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स

भारतीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोको द्वीपों (Coco Islands) पर लगे नए रडार और एंटीना सिस्टम 1,000 किलोमीटर तक की दूरी तक सिग्नल ट्रैक कर सकते हैं। इसका सीधा असर भारत की सामरिक गोपनीयता पर पड़ सकता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन द्वीपों से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की गतिविधियों की निगरानी करता है, खासकर जब परमाणु-संचालित पनडुब्बियां रामबिल्ली नेवल बेस से निकलती हैं।

रामबिल्ली आंध्र प्रदेश का एक छोटा तटीय गांव है, यह भारत का पहला समर्पित न्यूक्लियर सबमरीन बेस है, जो न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) के लिए बनाया गया है। यह भारत की “सी-बेस्ड न्यूक्लियर डिटरेंट” (समुद्री-आधारित परमाणु प्रतिरोध) को मजबूत करेगा। यह भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड का हिस्सा है। यह नौसेना का सबसे सुरक्षित और आधुनिक सबमरीन बेस है, जो मुख्य रूप से न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह विशाखापत्तनम बंदरगाह को डीकंजेस्ट करने के लिए बनाया गया है, जहां नौसेना और सिविल शिपिंग दोनों का उपयोग होता है। इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और 2026 में कमीशनिंग की उम्मीद है। यहां कालवरी-क्लास सबमरीनों जैसे आईएनएस अरिहंत भी डॉक की जा सकेंगी।

यहां डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के अलावा 8 से 12 न्यूक्लियर सबमरीन रखी जा सकेंगी। इसमें वेरी लो फ्रिक्वेंसी संचार प्रणाली, डीमैग्नेटाइजेशन (पनडुब्बियों को चुंबकीय रूप से न्यूट्रलाइज करने) की सुविधा और हाई-सिक्योरिटी शेल्टर्स हैं। यह यह चीनी हैनान द्वीप के न्यूक्लियर बेस जैसा है, जिसे “लुक ईस्ट पॉलिसी” के तहत बनाया गया, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी गतिविधियों का जवाब है। यह बंगाल की खाड़ी में भारत की पावर प्रोजेक्शन बढ़ाएगा।

म्यांमार ने दिया ये आधिकारिक बयान

हाल ही में म्यांमार के विदेश मंत्रालय ने कहा, “कोको द्वीप (Coco Islands) पर केवल हमारे सैनिक हैं, कोई विदेशी नहीं।” यंगून ने यह भी कहा कि द्वीप पर हो रहा विकास कार्य पूरी तरह नागरिक उद्देश्य के लिए है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि खासकर चिंदविन नदी के पार वाले क्षेत्रों में म्यांमार सरकार का नियंत्रण देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कमजोर है, वहां चीन समर्थित सशस्त्र समूहों का प्रभाव अधिक है।

इंडो-पैसिफिक पर क्या पड़ेगा असर

वहीं, कोको द्वीपों (Coco Islands) का मामला केवल भारत-म्यांमार तक सीमित नहीं है। यह पूरे इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे से जुड़ा मुद्दा है। यह इलाका मलक्का जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ मलक्का) के पास स्थित है, जिससे होकर दुनिया के 25 फीसदी समुद्री व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। अगर चीन यहां अपनी स्थायी उपस्थिति बनाता है, तो वह हिंद महासागर में सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

SAKSHAM CUAS System: The Indian army will be in dealing with drone threats in future wars ‘Enabled’, friends and enemy drone jokes will find out

SAKSHAM Counter UAS System
AI Generated Image

SAKSHAM CUAS System: The Indian Army has taken a big step towards further strengthening the country’s air security capacity. The Army has released the RFP i.e. RFP for the Indigenously Developed Competent Counter UAS System.

This state-of-the-art system will track the enemy drones and unmanaged aerial systems not only by identifying the drones in real time, as well as killing them. This system is designed to protect the air area of up to 3,000 m i.e. 10,000 ft above the ground battlefield, now called Tactical Battlefield Space (TBS).

Tethered Surveillance Drones: The operation must be the Indian Army after the shift. These special drones, which keep the enemy continuously for 9 hours, are monitored.

SAKSHAM CUAS System: Operation learnt from the computer

The system needed to be realized during operation shifter, when Pakistan’s drone and unmanaged aerial systems arrived for surveillance and attack in the Indian border. In this operation it came to the fore that the modern war is not only on the ground, but also being fought in the airspace above it. After which the Indian Army focused on the Tactical Battlefield space instead of the traditional Tactical Battle Field (TBA).

The Tactical Battlefield Space includes the aerial area of up to 3,000 meters above the ground, which is called air littoral. Maintaining control over this terrain is being considered necessary for future wars. This allows friends countries and their Ayer Assets to fly safely, as well as to track the enemy drones or plane and kill.

SAKSHAM CUAS System: How to work ‘Enable’?

The full name of the competent (SAKSHAM CUAS System) is the Sichuan Awareness Four Kinetic Soft and Hard Kill Assets Management. This is a software that has been developed as a high level modular command and control system. It is designed and designed in collaboration with India Electronics Limited, Ghaziabad.

This system works on Safe Army Data Network (ADN) and provides accurate information of the ground and airfield in the entire Tactical Battlefield space in Real Time. The aim of the competent system is to integrate the enemy and all its unmanaged aerial system data to a GIS based common platform, add soft and hard kill systems, and facilitate the field commanders to automised decizen support and visualization.

The military sources pointed out that the system (SAKSHAM CUAS System) will also take inputs from the air system of the Indian Army, to create a clear picture of all objects in the airspace whether they are franchises, neutrals or enemies. which will look large on the monitor.

सूत्रों ने बताया कि यह सिस्टम वायुसेना के इंटीग्रेटिड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और आकाशतीर जैसा ही होगा, लेकिन ये केवल ड्रोन के लिए ही काम करेगा। इसमें मॉनिटर पर फ्रैंडली, न्यूट्रल और दुश्मन के ड्रोन अलग-अलग रंग के दिखाई देंगे। जिससे उन्हें पहचनना आसान होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस – SAKSHAM CUAS System

‘सक्षम’ सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड थ्रेट एनालिसिस का इस्तेमाल करता है, जिससे संभावित हवाई खतरों की पहचान पहले से हो जाती है और तेजी से फैसले लेने में आसानी होती है। सक्षम सिस्टम रियल टाइम में रिकॉग्नाइज्ड यूएऍस पिक्चर (RUASP) तैयार कर सकता है। यह कई (काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स) हथियारों और सेंसरों को एक साथ जोड़कर कॉर्डिनेट रेस्पॉन्स देता है।

बॉर्डर Let’s में सभी यूनिट्स में होगा तैनात

सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS System) पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। बीईएल के बनाए इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए इसे आसानी से अपग्रेड किया जा सकेगा।

SAKSHAM CUAS System प्रोजेक्ट को फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे तेजी से सेना की सभी फील्ड फॉर्मेशंस में शामिल किया जा सके। अगले एक साल के भीतर सक्षम सिस्टम को फील्ड में उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बॉर्डर इलाके में तैनात सभी यूनिट्स को इस सिस्टम से लैस किया जाएगा।

वहीं, सक्षम सिस्टम (SAKSHAM CUAS SYSTEM) के लागू होने के बाद यह भारतीय सेना के काउंटर काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स ग्रिड की रीढ़ साबित होगी। यह जमीनी और हवाई दोनों तरह के खतरों की इंटीग्रेटेड तस्वीर कमांडरों को देगा। इस सिस्टम की मदद से भारतीय सेना भविष्य के बैटलफील्ड में एक डिजिटल और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कंट्रोल सिस्टम डेवलप करेगी, जो भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032) कार्यक्रम के मुताबिक है, जिसमें युद्ध के सभी डाइमेंशंस में टेक्निकल सुपीरियोरिटी और इंडीजीनस इनोवेशन पर जोर दिया गया है।

Jaish-e-Mohammed women brigade: Panic Masood Ajhar is making female brigade, delegation entrusted to sister, initially recruited

Jaish-e-Mohammed women’s brigade: Masood Azhar’s sister leads Jamaat-ul-Mominaat, recruitment begins in Bahawalpur

Jaish-e-Mohammed women brigade: The terror organization Jaish-e-Mohammed has created a female brigade for the first time making a big change in his strategy. The new wing has been named ‘Jamat-ul-Momat’ and has been recruited from 8 October 2025 at Bahwalpur. The organization has announced this decision through a letter. The letter has been issued in the name of the Terrorist Maulana Masood Azhar, Surgana of Jash-e-Mohmmad and the UN declared.

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: The ISIS is alive in Balochistan preparing to bring together Pakistan, Lashkar, Jash and Daish

According to intelligence sources, the recruitment has been started in the Markj Usman-O-Ali, Bahwalpur, Pakistan, from which Jaish-A-Mohammed has taken up women to join their network. The command of this female brigade (Jaish-e-Mohammed women brigade) is near Sadiya Azhar’s sister. Sadiya’s husband Joseph Azhar died in May 2025 during operation shifts, when Indian forces attacked Marakj Subhanahalah, headquarters of Jaish in Bahwalpur.

जैश के प्रचार मंच अल-कलम मीडिया के जरिए जारी पत्र में इस महिला ब्रिगेड का नाम और भर्ती की तिथि सार्वजनिक की गई। खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन ने अपनी भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले अपने वरिष्ठ कमांडरों की पत्नियों को शामिल किया है। इसके अलावा, बहावलपुर, कराची, मुझफ्फराबाद, कोटली, हरीपुर और मंसेहरा में मौजूद अपने मदरसों में पढ़ रही आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को भी इस ब्रिगेड में जोड़ा जा रहा है।

देवबंदी विचारधारा से प्रभावित यह आतंकी संगठन अब तक महिलाओं को आतंकी अभियानों या जिहाद में शामिल करने से बचता रहा है। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। सूत्रों का कहना है कि मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल-सैफ ने मिलकर महिलाओं को संगठन की कार्यवाही में शामिल करने का फैसला किया। इसी के बाद ‘जमात-उल-मोमिनात’ (Jaish-e-Mohammed women brigade) नामक महिला ब्रिगेड की नींव रखी गई।

आतंकी संगठनों के इतिहास में महिलाओं की भूमिका नई नहीं है। आईएसआईएस, बोको हराम, हमास और एलटीटीई जैसे संगठनों ने पहले भी महिला आत्मघाती हमलावरों को तैनात किया है। लेकिन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों ने अब तक इस रणनीति से दूरी बनाए रखी थी। अब माना जा रहा है कि जमात-उल-मोमिनात की स्थापना, जैश के भविष्य में महिला आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षण और हमलों में शामिल करने की दिशा में एक संकेत है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, बहावलपुर में भर्ती के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें महिलाओं (Jaish-e-Mohammed women brigade) को वैचारिक प्रशिक्षण, धार्मिक शिक्षण और संगठन के प्रोपेगेंडा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। संगठन की कोशिश है कि इन महिलाओं को संगठन के अंदरूनी नेटवर्क में अहम भूमिकाएं दी जाएं और आगे चलकर इन्हें आतंकवादी अभियानों में शामिल किया जाए।

भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस कदम पर नजर रखी हुई है। बहावलपुर पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed women brigade) का पारंपरिक गढ़ रहा है। यहीं से संगठन ने कई बार भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिनमें 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। अब उसी शहर से महिला ब्रिगेड की भर्ती शुरू होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि सादिया अजहर का परिवार जैश की गतिविधियों में वर्षों से सक्रिय रहा है। यूसुफ अजहर की मौत के बाद सादिया को संगठन में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जा रहा है। वह महिलाओं के बीच संगठन के संदेश को फैलाने और उन्हें वैचारिक रूप से तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

जैश-ए-मोहम्मद ने इस महिला ब्रिगेड (Jaish-e-Mohammed women brigade) की घोषणा ऐसे समय की है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी भी तेज हुई है। इसके बावजूद संगठन द्वारा खुले तौर पर महिलाओं की भर्ती शुरू करना बताते है कि अंदर ही अंदर जैश कोई बड़ी आतंकी वारदात की तैयारी कर रहा है।

Air Force Day 2025 arrived at Hindon Air Base from this fantastic historic car at Airforce Chief, registration number is also very special.

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car

Air Force Day 2025: भारतीय वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस आज गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर पूरे गौरव और परंपरा के साथ मनाया गया। यह दिन 8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। इस बार का समारोह कई मायनों में खास रहा। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पूर्व एयर चीफ मार्शल प्रताप चंद्र लाल (पीसी लाल) की 1967 मॉडल की विंटेज फोर्ड सैलून कार में बैठ कर समारोह पहुंचे।

IAF Day 2025 got the Golden Aeroze, S-400 and Brahmos Squadron unit sitetion for operation shifter

Air Force Day 2025: 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में हुई शामिल

क्रीम रंग की यह क्लासिक फोर्ड सैलून भारतीय वायुसेना की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यह वही कार है जिसे 1969 में एयर चीफ मार्शल पीसी लाल ने पहली बार इस्तेमाल किया था। पीसी लाल 1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो थे और उन्होंने पाकिस्तान के ऑपरेशन ऑपरेशन चंगेज खान के जवाब में वायुसेना को निर्णायक जीत दिलाई थी। यह कार 30 जुलाई 1969 को वायुसेना में शामिल हुई थी। एयर चीफ मार्शल पीसी लाल थे 1969 से 1973 तक 7वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस जैसे सम्मान भी मिले। रिटायरमेंट के बाद वे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के एमडी रहे थे।

Air Force Day 2025: 1967 फोर्ड सैलून कार

1967 की यह फोर्ड सैलून कार अमेरिकी फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा बनाई गई एक लग्जरी सैलून थी। इसमें 390 वी8 इंजन लगा है, जो 8 सिलेंडर का है और 4600 आरपीएम पर 315 ब्रेक हॉर्सपावर की ताकत देता है। उस दौर में यह कार न सिर्फ आरामदायक थी बल्कि लंबी दूरी के सफर के लिए बेहतरीन थी। कार के डिजाइन की बात करें, तो सामने चार गोल हेलोजन हेडलाइट्स, क्रोम बंपर और फोर्ड का चमकता हुआ बैज इसे खास बनाते हैं।

Air Force Day 2025: रजिस्ट्रेशन नंबर “IAF 1”

इस कार की रजिस्ट्रेशन प्लेट भी “IAF 1” है। यह लेफ्ट-हैंड ड्राइव मॉडल है, जिसमें एयर कंडीशनिंग, एएम रेडियो और पावर विंडोज जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। 1969 से लेकर 1992 तक यह कार कई वायुसेना प्रमुखों की आधिकारिक स्टाफ कार रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार में 10 से अधिक एयर चीफ मार्शल ने सफर किया है, जिनमें पीसी लाल के अलावा ओम प्रकाश मेहरा, लाल चंद्र धूत और इदरीस हसन लतिफ जैसे नाम शामिल हैं।

Indian Air Force Day 2025: IAF Chief AP Singh Arrives in Historic 1967 Ford Car
Historic 1967 Ford Car in Palam Museum.

Air Force Day 2025: पालम म्यूजियम में है यह कार

1992 के बाद इस कार को रिटायर कर दिल्ली स्थित पालम एयर फोर्स म्यूजियम में रख दिया गया। यह विंटेज कार अब रोजमर्रा के उपयोग में नहीं है। इसे विशेष अवसरों, जैसे वायुसेना दिवस या ऐतिहासिक आयोजनों के लिए ही बाहर निकाला जाता है। सामान्य तौर पर इसे पालम एयर फोर्स म्यूजियम, नई दिल्ली में रखा जाता है। म्यूजियम में वायुसेना के पुराने विमान, हथियार और वाहन भी शोकस हैं। इस कार की नियमित मेंटेनेंस की जाती है ताकि इसकी पुरानी मशीनरी सही स्थिति में बनी रहे। हिंडन एयर बेस जैसे इवेंट्स (Air Force Day 2025) के लिए इसे म्यूजियम से लाया जाता है।

IAF Day 2025 got the Golden Aeroze, S-400 and Brahmos Squadron unit sitetion for operation shifter

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: On the occasion of 93rd Indian Air Force Day, many units of Air Force were given special military honors. A total of 97 awards and 6 units were provided this year with a number of major squadrons associated with the country’s air defense and strike capacity. It is important that all of these units had caused tremendous injury to Pakistan by showing unprecedented pollen during operation shifts.

Air Force Day 2025: Air Chief Bole- Operation Cindoor showed how air power can change the direction of the war, disciplined training, accurate planning is of great example

IAF Day 2025: Honored for Operation Shifter

The IAF Chief Air Chief Marshal AP Singh in the program provided Galentry Awards and Sites (Certificate of Electoral Service). The officers who have got 9 gallops of Indian Air Force in Operation Sindoor were given the site for strike, interception and air superiority. These included Group Captain Ranjit Singh Sidhu, Group Captain Manish Arora, Group Captain Animesh Patney, Group Captain Kunal Ranga, Wing Commander Joy Chandra, Squadron Leader Sarthak Kumar, Squadron Leader Theory Singh, Squadron Leader Rijwan Malik and Flight Lieutenant Ashvir Singh Thakur. These officers had played an important role in dropping S-400 systems, Rafael Strikes and 5 Pakistani jets during operation shifts.

वहीं इस दौरान वायुसेना प्रमुख ने कुल 97 मेडल्स और 6 यूनिट साइटेशन वायुवीरों को प्रदान किए। साइटेशन मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी और सेवा के लिए दिए गए। जिन स्क्वॉड्रनों को यूनिट साइटेशन दिया गया है, उनमें एस-400 एयर डिफेंस यूनिट, राफेल स्क्वॉड्रन नंबर 17 ‘गोल्डन एरोज’, सुखोई स्क्वॉड्रन, ब्रह्मोस से लैस 222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन और लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट शामिल हैं।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

IAF Day 2025: गोल्डन एरोज को यूनिट साइटेशन

हरियाणा के अंबाला में स्थित भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध नंबर 17 स्क्वॉड्रन, जिसे ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वॉड्रन को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी के नेतृत्व में इस स्क्वॉड्रन ने 9 आतंकवादी ट्रेनिंग कैंपों और पाकिस्तानी वायुसेना के 11 प्रमुख एयरबेस पर सटीक हवाई हमले किए थे। बता दें कि यह स्क्वॉड्रन भारत के सबसे एडवांस 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट्स राफेल से लैस है।

राफेल लड़ाकू विमानों से लैस गोल्डन एरोज ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के भीतर तक जाकर स्ट्राइक की थी। यह स्क्वॉड्रन भारतीय वायुसेना की आधुनिक एयर पावर का प्रतीक मानी जाती है। वायुसेना प्रमुख की उपस्थिति में ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी को यूनिट साइटेशन प्रमाण पत्र और प्रशस्ति प्रदान किया गया।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

222 ‘टाइगरशार्क्स’ स्क्वॉड्रन को ब्रह्मोस के लिए सम्मान

‘टाइगरशार्क्स’ के नाम से मशहूर नंबर 222 स्क्वॉड्रन को भी सम्मानित किया। यह भारतीय वायुसेना की एकमात्र स्क्वॉड्रन है जो ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से लैस है। इस स्क्वॉड्रन को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह स्क्वॉड्रन सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम है।

222 स्क्वॉड्रन की कमान ग्रुप कैप्टन वरुण भोज के पास है और वारंट ऑफिसर धीरज कुमार सहित यूनिट के अन्य अधिकारियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इन स्क्वॉड्रन ने भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक रेंज को कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

S-400 की स्क्वॉड्रन 2601 एयर डिफेंस यूनिट को भी मिला साइटेशन

भारतीय वायु सेना प्रमुख एसीएम एपी सिंह ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की स्क्वाड्रन संख्या 2601 ‘ट्रायंफ’ को भी यूनिट प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस यूनिट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय के हवाई क्षेत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभाई थी। एस-400 सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर सकता है।

अगस्त में आर्मी वॉर कॉलेज, महू में रण संवाद के दौरान, एसीएम एपी सिंह ने एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम की तारीफ की थी और इसे “गेम-चेंजर” कहा। उन्होंने कहा कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन को अपनी सीमा के अंदर भी काम करने की आजादी नहीं दी।

Loweringmission 2232 केस्ट्रेल्स यूनिट को भी मिला सम्मान

वायुसेना की लोइटरिंग म्यूनिशन यूनिट 2232 केस्ट्रेल्स को भी इस वर्ष यूनिट साइटेशन प्रदान किया गया। यह यूनिट आधुनिक युद्ध में निगरानी और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस यूनिट ने रियल टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए भारतीय स्क्वॉड्रनों को अचूक टारगेटिंग में मदद की थी।

इसके अलावा उन्होंने यूनिट साइटेशन स्क्वॉड्रन नंबर 43 ‘आईबेक्सेस’ को प्रदान किया, जो एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ऑपरेट करती है। साथ ही 7 बीआरडी (BRD) को भी यूनिट साइटेशन दिया गया, जहां रडार और गाइडेड वेपन्स सिस्टम रखे और ऑपरेट किए जाते हैं।

Indian Air Force Unit Citation to Rafale Golden Arrows, S-400 & BrahMos Squadrons on IAF Day 2025

एमआई-17 हेलीकॉप्टरों का ‘ध्वज’ फॉर्मेशन

बुधवार को उत्तर प्रदेश के हिंडन एयर बेस (गाजियाबाद) पर आयोजित कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा सीडीएस जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी भी मौजूद थे। हालांकि इस बार फ्लाइपास्ट तो नहीं हुआ, लेकिन परेड का आयोजन किया गया था। सुबह 9 बजे से समारोह शुरू हुआ। परेड की शुरुआत प्रेसिडेंट्स कलर्स के मार्च-इन से हुई। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने परेड का निरीक्षण किया और गार्ड ऑफ ऑनर को सलामी दी। परेड में आईएएफ के मार्चिंग कंटिंजेंट्स शामिल थे। इसके बाद एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने ‘ध्वज’ फॉर्मेशन में उड़ान भरकर हवाई सलामी दी।

इस वायुसेना दिवस (IAF Day 2025) समारोह में हेरिटेज फ्लाइट का शानदार हवाई प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहा। इस प्रदर्शन में ऐतिहासिक ‘टाइगर मॉथ’ और ‘एचटी-2’ विमानों ने संयुक्त रूप से उड़ान भरी, जिसके बाद पुराने ‘हार्वर्ड’ विमान ने सोलो डिस्प्ले पेश किया। पारंपरिक फ्लाईपास्ट और एयर डिस्प्ले का आयोजन 9 नवंबर 2025 को गुवाहाटी में किया जाएगा।

वहीं, स्टैटिक डिस्प्ले में आधुनिक विमानों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। इनमें सी-17 ग्लोबमास्टर, सुखोई-30 एमकेआई, अपाचे, मिग-29, मिग-21 बाइसन, राफेल, एचएलएच मार्क-3, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, आकाश मिसाइल सिस्टम और रोहिणी रडार शामिल थे।

AIM-120 Missiles: If Pakistan fires on Indian fighter jets, then how will India’s fatal system give the smash?

AIM-120 Missiles
The Indian Air Force jets have been launched by the Indian Air Force jets. On the ground, India’s S-400 air defence systems have been launched, showcasing a layered air defence response.

AIM-120 Missiles: The operation shifted in May 2025 showed that India has the ability to move air strikes by up to 300 kilometers inside the culinary without crossing the Pakistan border. In this operation, the military infrastructure of Pakistan and the terror bases present in the POKs caused tremendous damage. Now that the US has approved Pakistan to deliver AIM-120 advanced medium-range air-to-air missiles. The question arises in how India will respond if Pakistan has attacked India using these missiles in the future.

AIM-120 AMRAAM: The operation is nervous by losing JF-17 and F-16 in the sinter Pakistan knows India’s arms and gangs are extremely difficult to avoid

The U.S. administration has recently approved Pakistan to sell AIM-120 Bids Visual Range Advanced Medium-Range Air-to-Air Missiles. The U.S. is now going to give Pakistan an AIM-120C-8 version, with a range of up to 160 kms and can also distinguish the missile latest electronic jamming.

This deal is part of the large air-to-air wapness package worth $41.6 billion, including countries like Japan, UK and Turkey with Pakistan. Pakistan will put these missiles on its F-16 block 52 jets, after which it is expected that its ‘Beoned Visual Range’ (BVR) airstrike capacity will increase significantly.

India has AIM-120 deal with intjam

India’s air defense system is multi layered, with the ability to destroy goals ranging from long distances to short distances. It consists of Russian S-400 Triumph System, Indigenous Sky Missile System, Israeli Medium Range Strophe to Air Missile, Spreader and Latest Electronic Warfare Grid.

The S-400 trimph system is considered as the backbone of India’s air defense. 40N6 missiles of the S-400 system can kill enemy jets and missiles up to 400 kms. The S-400 triumph system has a merit that it can simultaneously make 36 multi-target engagement. The S-400 in the operation centre saw its strength by dropping Pakistani F-16 and JF-17 at 300 kms away.

Its active electronically scanned Array- AESA radar AIM-120-like Mac-4 speed i.e. around 4,240 kilometres per hour (hypersonic to hypersonic) speeds up the speed and direction of missiles easily tracked. This can intercept any of Pakistan’s missiles significantly before the Indian border due to deployment in Delhi, Amritsar, Jodhpur and Pathankot.

Indigenous missiles are India’s strength

In addition to S-400, India also has captive missile systems hit in the indigenous and other foreign surface-to-air, which can make the AIM-120 a first failure. DRDO’s built-in sky missile system can drop targets from 30 to 70 kilometres and destroy AIM-120 in mid-cores. Its automated command and control system recognizes threats in real-time and responds promptly.

Furthermore, the Medium Range Surface to Air Missile System (MRSAM) built together with Israel is able to kill high-speed missiles and drones in a range of up to 70 kilometres. MRSAM in Operation Sindoor targeted more than 600 drones and missiles.

While India has a SPYDER system purchased from Israel for short distances, which can also intercept rapidly changing missiles. which is for a short distance of 15-20 kilometres, specializes in preventing rapid-manufacturing missiles. All these systems together make India’s air defence an impenetrable wall. These three systems in operation shifter together had eliminated Pakistani drones and missiles in air.

India is ready in air-to-air comparison

While, imagine that if Pakistan stains an AIM-120 missile from F-16, India also has options like mitior, Astra and R-77 in air-to-air missiles.

The mitior missile deployed on Raphael can target targets up to 150-200 kilometres. It has capabilities like Ramjet Engine and No-Escape Zone, which are far ahead of AIM-120. The mitior in operation syntre dropped the Pakistani F-16 and JF-17.

Astra Mark1 missile, which is built by DRDO, is positioned on Suno-30 and Tejas and can hit the range of 110 kilometres. This missile is equipped with the "Fire-End-Forgate" technique and can outrange the Pakistani F-16. While the upgrade version of Astra Mark2 took place in 2025 and its range is 160-200 kilometres. While Astra Mark3 (Gandiev), which is based on Solid Fuel Ducted Ramjet Technology, will be able to kill the enemy for a distance of 300+ kilometres. These missiles can outrange Pakistan’s F-16 before their launch zone.

IACCS will never forget Pakistan

The Integrated Air Defense System of India i.e. IACCS (Integrated Air Command and Control System) operation was proved to be the gamechanger in the shifter. This system takes accountable action in real-time by adding data received from radar, satellite and other sensors via sensor fusion. IACCS tracked Pakistani jets and missiles at 300 kms away and played a significant role in destroying them. Air Force Air Chief Marshal AP Singh reported that the system had limited Pakistan to its terrain.

Simultaneously, electronic warfare systems such as accommodation and attention can jam the radar homeping of the AIM-120, allowing the missile target to wander. Dickoys like flairs and chaffs can be confusing AIM-120 in a wrong direction.

Counter-Unmanned Aerial Systems Grid

India’s Integrated Counter-Unmanned Aerial Systems Grid, which includes a network of radars, sensors and jammers, scans 1,800 kilometres of airspace. This grid in Operation Sindoor failed Pakistani Swarm Attacks, including hundreds of drones and missiles. This technique already recognizes the dangers like AIM-120 and takes action immediately to devastate them. This makes it possible to attack the respondent in time.

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AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat

AIM-120 AMRAAM: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान बेहद घबराया हुआ है। जिस तरह से ऑपरेशन के दौरान भारत ने हवा में ही पाकिस्तान के पांच-छह 5 हाई-टेक फाइटर जेट्स को हवा में गिराया गया था, जिनमें एफ-16 के अलावा जेएफ-17 थंडर भी शामिल थे। ये वही थंडर जेट थे जिनमें चीनी पीएल-15 मिसाइलें लगी हुई थीं। वहीं एफ-16 फाइटर जेट्स को हवा में मार गिराने से पाकिस्तान सकते में है। जिसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका जाकर एफ-16 फाइटर जेट्स के लिए AIM-120 एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल- AMRAAM मांगी थी। वहीं अमेरिका ने इन मिसाइल को बेचने की मंजूरी दे दी है। हालांकि ये मिसाइल काफी एडवांस हैं, लेकिन भारत पहले ही इन मिसाइलों की काट की तैयारी कर चुका है।

Astra BVRAAM: Indigenous Cayer, DRDO and Air Force, imposed in Astra Missile, Successful Test

मिग-21 को बनाया था निशाना

AIM-120 वही मिसाइल है जिसने 2019 में बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी एफ-16 से डॉग फाइट के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के मिग-21 बाइसन को टारगेट किया था। वहीं, इस सौदे के बाद पाकिस्तान को आधुनिक रडार-गाइडेड मिसाइलें मिलेंगी, जिनकी रेंज 150 किलोमीटर से अधिक है और जिन्हें “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक से बनाया गया है।

सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर पाकिस्तान को उन 30 देशों की सूची में शामिल किया है जो रेथियन कंपनी से AIM-120 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) खरीद सकते हैं। कुल सौदे की कीमत 41.6 अरब डॉलर बताई जा रही है, जो दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा एयर-टू-एयर मिसाइल एक्सपोर्ट पैकेज है। इस सूची में ब्रिटेन, जापान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश भी शामिल हैं। इस सौदे से पाकिस्तान को AIM-120C8 वर्जन की मिसाइलें मिलेंगी, जो अमेरिकी वायुसेना के AIM-120D मॉडल का एक्सपोर्ट वर्जन है। इस मिसाइल को एफ-16, यूरोफाइटर टाइफून, एफ-22 रैप्टर और एफ-35 के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने में सक्षम

AIM-120C8 मिसाइल (AIM-120 AMRAAM) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पायलट एक बार मिसाइल दागने के बाद अपने विमान को सुरक्षित दिशा में मोड़ सकता है और मिसाइल अपने रडार से टारगेट को ट्रैक कर मार गिराती है। इस मिसाइल में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव के लिए टू वे डेटा लिंक्स, एडवांस गाइडेंस सिस्टम, जीपीएस असिस्टेंस और हाई-स्पीड टारगेट्स को ट्रैक करने की क्षमता है। यह मिसाइल एफ-16 फाइटर जेट के साथ ही इंटीग्रेट हो सकती है।

पाकिस्तान के पास 66 एफ-16

पाकिस्तान के पास इस समय करीब 66 एफ-16ए/बी और 19 एफ-16सी/डी फाइटर जेट हैं, जो चार स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। इन विमानों में AIM-120 मिसाइलों को इंटीग्रेट करने से पाकिस्तान की बियोंड विजुअल रेंज यानी BVR यानी दृश्य सीमा से बाहर लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। पाकिस्तान पहले से ही AIM-120C5 वर्जन (AIM-120 AMRAAM) का इस्तेमाल कर चुका है, जिसने मिग-21 को निशाना बनाया था।

इसके अलावा पाकिस्तान चीन से पीएल-15 मिसाइल भी खरीद चुका है, जिसे उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने का दावा किया था। पीएल-15 की रेंज 200 किलोमीटर के करीब है। अब अमेरिकी AIM-120 मिसाइल मिलने से पाकिस्तान के पास दो एडवांस बीवीआर मिसाइल सिस्टम होंगे। जिन्हें वो एफ-16 और जेएफ-17 पर लगाएगा।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
Gandiva Missile

भारत की अस्त्र और गांडीव तैयार

वहीं, भारत के एस्ट्रा एमके1 का एडवांस वर्जन एस्ट्रा एमके2 मिसाइल और गांडीव (एस्ट्रा एमके3) तैयार कर रहा है। एस्ट्रा एमके2 को डीआरडीओ ने डेवलप किया है। यह स्वदेशी बियोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है जिसकी रेंज 160 से 200 किलोमीटर तक है। यह भी “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है और इसमें डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है, जिससे यह मैक 4 यानी लगभग 4,940 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती है।

एस्ट्रा एमके2 में स्वदेशी कु-बैंड आरएफ सीकर, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और डेटा लिंक शामिल हैं। इसके जरिए यह इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स को झेलते हुए भी लक्ष्य को सटीक रूप से भेद सकती है। इसे सुखोई-30एमकेआई, एलसीए तेजस मार्क1ए के अलावा और भविष्य के एएमसीए में लगाया जा सकेगा। 2025 में इसके कई यूजर ट्रायल सफल रहे हैं, जिनमें 160 किमी से अधिक दूरी पर हाई-स्पीड यूएवी टारगेट्स को निशाना बनाया है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan: How India’s Astra Mk2 & Gandiva Counter “MiG-21 Killer” Threat
ASTRA MK2

गांडीव के 2026 से फुल एयर ट्रायल

वहीं गांडीव यानी एस्ट्रा एमके3 की बात करें तो यह एस्ट्रा परिवार की सबसे एडवांस मिसाइल है, जिसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम है। यह तकनीक मिसाइल को लगातार हाई-स्पीड पर उड़ान बनाए रखने में सक्षम बनाती है। इसकी रेंज 300–350 किलोमीटर तक मानी जा रही है, जो अमेरिकी AIM-120 और चीनी पीएल-15 दोनों से अधिक है। गांडीव को अवॉक्स, रिफ्यूलिंग टैंकर और स्टेल्थ फाइटर जैसे हाई-वैल्यू टारगेट्स को दूर से ही तबाह करने के लिए डेवलप किया जा रहा है। 2025 में इसके ग्राउंड और फ्लाइट टेस्ट सफल रहे हैं और 2026 से इसका फुल एयर ट्रायल शुरू होने की तैयारी है।

AIM-120 AMRAAM Missiles To Pakistan
meteor missile rafale

राफेल में है घातक मिटिओर

वहीं राफेल भी बियोंड विजुअल रेंज हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइल मिटिओर से लैस है। जिसे यूरोप की एमबीडीए कंपनी ने बनाया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी 150 से 200 किलोमीटर की लंबी रेंज है, जिससे यह दुश्मन के विमानों को दूर से ही निशाना बना सकती है। मिटिओर में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे मैक4 से ज्यादा की रफ्तार दे सकता है। यह “फायर-एंड-फॉरगेट” मिसाइल है, यानी इसे दागने के बाद पायलट को लक्ष्य पर नजर रखने की जरूरत नहीं होती। इसमें लगा एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम और डेटा लिंक दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग को भी फेल कर देता है। मिटिओर का “नो-एस्केप जोन” काफी बड़ा है, जिससे लक्ष्य का बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यह हर मौसम में और दिन-रात काम करने में सक्षम है।

मिटिओर ने गिराए जेएफ-17 और एफ16

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जेट्स से दागी गई मिटिओर ने पाकिस्तानी जेएफ-17 थंडर ब्लॉक III और एफ16 जेट्स को 150-200 किमी दूर से मार गिराया था। 7 मई की शुरुआती हवाई हमलों में, जब पीएएफ ने पीएल-15 मिसाइलों से जवाब दिया, तो मिटिओर के “नो-एस्केप जोन” में 2-3 पाकिस्तानी जेएफ-17 और 1 एफ-16 जेट्स फंस गए थे, जो हवा में मिटिओर का निशाना बन गए थे। ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान एयर फोर्स ने जब ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक किए, लेकिन मिटिओर ने राफेल के स्पैक्ट्रा इलैक्टॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ मिलकर इनमें से कई को बेकार कर दिया। यह मिटिओर ही थी जिसमें भारतीय वायुसेना को “फर्स्ट शॉट-फर्स्ट किल” एज दी, जिसके से पाकिस्तान एयर फोर्स को पीछे हटना पड़ा और 10 मई को सीजफायर के लिए पाकिस्तान को मजबूर किया।

अमेरिका-पाकिस्तान डील से भारत को चुनौती

फरवरी 2025 में अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के एफ-16 फ्लीट के रखरखाव के लिए 397 मिलियन डॉलर की सहायता को मंजूरी दी थी। जुलाई में पाकिस्तान एयर चीफ ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके बाद मिसाइल सौदे का रास्ता साफ हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान को यह भरोसा दिलाया कि मिसाइलों का इस्तेमाल केवल आतंकवाद-रोधी अभियानों में किया जाएगा, लेकिन भारत में सुरक्षा एजेंसियां इसे लेकर सतर्क हैं।

इस डील का समय भी अहम है। 2024 में भारत-अमेरिका रक्षा संबंध चरम पर थे। एमक्यू-9बी ड्रोन, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल और अन्य रक्षा तकनीक सौदे हुए। लेकिन 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। इस मिसाइल सौदे को भारत के सुरक्षा हलकों में रणनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

India-South Korea Maritime Exercise: India and South Korea’s Navalties First Time in Incheon to United Marine War exercises

India South Korea Maritime Exercise

South Korea Maritime Exercise: The Indian Navy and South Korea Navy are going to exercis a historic bilateral maritime in Incheon for the first time at the end of this month, strengthening India’s ‘Acct East Policy’. This exercise will be done in the Hindu-Pacific region. The special thing will take the Indian Navy’s state-of-the-art battleship INS Sahadri (INS Sahyadri) part, which is currently on Operational Deployment in North West Pacific Region and South China Sea.

INS Androth in Indian Navy: The second anti-submarine warfare shello water craft included in the Indian Navy, 14 and in queue for ship commissioning

India-South Korea Maritime Exercise will strengthen both countries

INS Sahadri is at this time positioned in Malaysia, where he is on the mission of strengthening India-Malaysia naval cooperation, enhancing interoperability between both navy. Malaysia is one of the five countries that have been controversy with China in South China C, so the naval presence of India in this region is considered to be extremely important strategically.

India-South Korea Maritime Exercise रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना और रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के बीच यह पहला मौका होगा जब दोनों देश औपचारिक रूप से द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास कर रहे हैं। इससे पहले दोनों नौसेनाएं केवल मैरीटाइम पार्टनरशिप में एक्सरसाइज में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन अब इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है।

यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित होगा हार्बर फेज और सी फेज। हार्बर फेज में दोनों नौसेनाओं के बीच रणनीतिक बातचीत, पेशेवर इंटरैक्शन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और योजनाओं पर काम होगा। इसके बाद समुद्र में प्रैक्टिकल एक्सरसाइज की जाएंगी जिनमें सी बैटल स्ट्रेटेजी, मैन्युवर्स और जॉइंट ऑपरेशंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे नौसैनिक संबंधों को दर्शाता है।

आईएनएस सह्याद्री का यह अभियान केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहेगा। नौसेना सूत्रों के अनुसार, आईएनएस सह्याद्री अगले महीने जापान और पापुआ न्यू गिनी की नौसेनाओं के साथ भी संयुक्त अभ्यास करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के मल्टीलेटरल सुरक्षा सहयोग को और व्यापक रूप देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। दोनों देशों ने 2003 में पहला द्विपक्षीय रक्षा संवाद और 2005 में पहला विदेश नीति और सुरक्षा संवाद आयोजित किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ता गया है।

भारतीय नौसेना की ओर से यह भी पुष्टि की गई है कि दक्षिण कोरियाई नौसेना को फरवरी 2026 में भारत के पूर्वी तट पर आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह आयोजन ग्लोबल नेवल फोर्सेस के लिए बड़ी एग्जीबिशन होता है, जिसमें भारत अपनी नौसैनिक क्षमता और रणनीतिक पहुंच को प्रदर्शित करता है।

India-South Korea Maritime Exercise है अहम दोनों देशों के लिए

आईएनएस सह्याद्री की भूमिका इस पूरे अभियान में बेहद अहम है। शिवालिक क्लास का यह स्वदेशी रूप से निर्मित मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट जुलाई 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल की गया था। यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है और इसे सतह तथा वायु दोनों से आने वाले खतरों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें, मीडियम और शॉर्ट रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विभिन्न कैलिबर की ताकतवर गनें लगी हैं। इसके अलावा इसमें दो मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर भी रखे जा सकते हैं, जिससे यह निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों और आपातकालीन स्थितियों में भी सक्षम है।

आईएनएस सह्याद्री की तैनाती नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है। यह क्षेत्र एशिया-प्रशांत में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक हितों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रुख के बीच भारत की नौसेना की सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता और संतुलन के लिए अहम मानी जाती है।

वहीं, भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को केवल राजनीतिक और आर्थिक मंचों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसे रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से लागू कर रहा है। दक्षिण कोरिया, जापान और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों के साथ लगातार सैन्य सहयोग बढ़ाकर भारत क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इंचियोन में होने वाला यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों नौसेनाओं को न केवल एक-दूसरे की परिचालन क्षमता को समझने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में जॉइंट ऑपरेशंस के लिए तालमेल भी विकसित करेगा।

India-South Korea Maritime Exercise भारतीय नौसेना ने पिछले कुछ वर्षों में अपने युद्धपोतों को रणनीतिक रूप से उन क्षेत्रों में तैनात करना शुरू किया है जो भारत के सामरिक हितों से सीधे जुड़े हैं। नॉर्थ वेस्ट पैसिफिक में आईएनएस सह्याद्री की मौजूदगी यही बताती है कि भारत न केवल सामरिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि सहयोगी देशों के साथ उसके रिश्तों को भी नई दिशा दे रहा है।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: The ISIS is alive in Balochistan preparing to bring together Pakistan, Lashkar, Jash and Daish

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: The terror in the Balochistan province of Pakistan has emerged a big revealing. The Pakistani intelligence agency Inter-Services Intelligence (ISI) has appointed the Chordinator of arms and logistic supply to the ISIS (Islamic State in Iraq and Syria) and ISKJP (Islamic State Khorasan Province) to a notorious confession leader named Mir Shafiq-ur-Rahman Mengal.

Lashkar-e-Taiba in KPK: After the operation shift, Lashkar has replaced terrorism, with the help of ISI, Khabar will operate from Pakshakva. 

Mir Shafiq is an influential confession leader of Khuzdarshi who has long been considered to be the closest to the Pakistani ISI. Intelligence sources pointed out that it has been entrusted with the secret responsibility of bringing together organizations such as Lashkar-e-Taiba, Jash-e-Mohammed, ISIS and Daish i.e. "Al-Dula al-Islamia Phil-Iraq Wall-Sham". The appointment was made at the time when the army of Pakistan in Balochistan is constantly violence. According to reports, Shafiq has been tasked with strengthening the terror network, running recruitment campaigns, arrange safe bases and handling logistic supply chains.

मीर शफीक का नाम पहले भी हिंसा, गुमशुदगियों और कथित डेथ स्क्वाड्स से भी जुड़ा रहा है। 2008 में जब पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में ‘किल एंड डंप’ नीति लागू की, तब आईएसआई ने स्थानीय मिलिशिया गठित की। इन्हीं दिनों शफीक को खुजदारमें एक ब्रिगेडियर ने भर्ती किया और उसे “एसेट” घोषित किया गया। उन्होंने बलूच मुसल्लाह डिफ़ा तंजीम नामक मिलिशिया बनाई, जिसने अपहरण, यातनाएं और सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया। 2011 में तोटक गांव में सेना के ऑपरेशन के बाद उसे वहां का कंट्रोल भी सौंपा गया। इसी दौरान 82 वर्षीय मोहम्मद राहिम खान कलंदरानी और उनके परिवार के 16 सदस्यों का अपहरण हुआ और बाद में कई शव सामूहिक कब्रों में पाए गए।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan
Mir Shafiq with CM Balochistan sarfaraz Bugti. Ex PM Pakistan Anwar ul haq kakad, and a top Army officer. Mir Shafiq is responsible of bombing on Lawyers in Quetta killed 100’s, also bnp gathering were targeted past month killed dozens.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के जनरल हेडक्वार्टर ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और दूसरे जिहादी संगठनों को बलूचिस्तान में एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठित किया है। इन संगठनों को न केवल बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए बल्कि अफगानिस्तान, भारत और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan

Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan मीर शफीक का आईएसआईएस से जुड़ाव भी नया नहीं है। 2016 में सिंध के शिकारपुर में पकड़े गए एक आत्मघाती हमलावर उस्मान ब्रोही ने कबूल किया कि उसे शफीक के शिविर में आईएसआईएस के लिए ट्रेनिंग दी गई गई थी। उसी साल आईएसआईएस ने बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी का ऐलान किया और शफीक को अपना खासमखास बताया। 2017 में रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में एक पाकिस्तानी लड़के ने बताया कि वह वाध इलाके में शफीक के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण ले रहा था। सितंबर 2025 में क्वेटा के शाहवानी स्टेडियम में हुए आईएसकेजेपी आत्मघाती हमले में 15 लोगों की मौत हुई। इस हमले के पीछे भी शफीक का नेटवर्क सक्रिय था।

खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान को एक “कंट्रोल्ड कॉन्फ्लिक्ट जोन” में तब्दील कर रहा है। उद्देश्य यह है कि इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी जाए, पश्चिमी देशों से आतंकवाद-रोधी मदद ली जाए और सारी हिंसा का दोष आईएसआईएस पर डालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “डिनाएबिलिटी” बरकरार रखी जाए। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan एजेंसियों की योजनाा है कि निकट भविष्य में होने वाले कुछ धमाकों को आईएसआईएस के नाम पर किया जाए।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि मीर शफीक पिछले दो दशकों से आईएसआई के संरक्षण में इस क्षेत्र में चरमपंथी नेटवर्क चला रहे हैं। सरदार अख्तर मेंगल ने भी जुलाई 2023 में उन पर अपने घर पर मोर्टार हमला करने का आरोप लगाया था।

मीर शफीक के पिता नसीर मेंगल बलूचिस्तान के अंतरिम मुख्यमंत्री रहे थे, जबकि उनके भाई अत्ता-उर-रहमान मेंगल को जून 2025 में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मार गिराया। बीएलए ने इसे “राज्य-प्रायोजित डेथ स्क्वाड” के खिलाफ कार्रवाई बताया। जुलाई 2023 में वाध में उसके समर्थकों और बीएनपी-एम के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में चार लोग मारे गए थे।

शफीक की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया एक्स पर अफगान और भारतीय यूजर्स का कहना है कि यह पाकिस्तान की “हाइब्रिड वॉरफेयर” रणनीति है। उनका कहना है कि आईएसआई ईरान और अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए ऐसे संगठनों को औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसकेजेपी अब बलूच राष्ट्रवादियों को निशाना बना रहा है और इसमें आईएसआई का सीधा हाथ है।

मीर शफीक ने लाहौर के एलीट एचिसन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक दाओबंदी मदरसे में दाखिला लिया, जहां वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा। 2020 में उसे इस्लामाबाद बुलाकर नई जिम्मेदारी दी गई। इसके कुछ ही महीनों बाद उसने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसने स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जेम्सटाउन फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में उसे “पाकिस्तान का सबसे घातक मर्सनरी लीडर” बताया।

अमेरिका, यूएई और अन्य देशों ने आईएसआईएस की पाकिस्तान में गतिविधियों पर और Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan चिंता जताई है। बलूचिस्तान पोस्ट ने शफीक को “राज्य का घातक हथियार” करार दिया। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के संरक्षण में पनप रहा यह नेटवर्क न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिकोण क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

Tejas Mk1A Order: Why does the air force from the new order of MK1A? Preparation of LCA Mark2 to ‘Workhours’!

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force not willing New Procurement Amid Delivery Delays and Production Challenges

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force has taken a big decision on indigenous Light Combat Aircraft LCA Tejas MK1A. Indian Air Force has now decided not to issue new orders of Domestic Combat Aircraft Tejas MK1A. Orders of 180 Tejas MK1A fighter aircraft in two steps yet Tejas Mk1A Order given. But there has not yet been the delivery of a fighter jet. At the same time, the first two Tejas MK1A is to be delivered in October.

Tejas Mk1A Engine Delivery: The 4th F404 engine from GE to HAL, the Air Force will soon deliver two fast jets

Delayed impact on strategic plans

Air Force sources pointed out that it has been decided to delay the production of Tejas MK1A (Tejas Mk1A Order) and the indications of engine supply. Air Force’s high officials say that not timely delivery by Hindustan Aeronautics Limited has impacted Air Force’s strategic plans. He reported that the delivery of orders of 83 Tejas MK1A aircraft in 2021 was not yet complete, while the order of new 97 aircraft has been issued.

No scope to place new orders of Mark1A

सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2021 में हुए 48,000 करोड़ रुपये के पहले सौदे के तहत 83 विमानों (73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर) की डिलीवरी मूल रूप से मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन देरी से यह मार्च 2025 तक खिसक गई। वहीं इनमें से दो विमान की डिलीवरी अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित है, और वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 12 विमान वायुसेना को मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों ने कहा कि डिलीवरी में देरी इतनी हो चुकी है कि फिलहाल तेजस मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) के नए ऑर्डर देने की कोई गुंजाइश ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब वायुसेना का पूरा फोकस तेजस मार्क2 पर है। जिसके प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2026 के आखिर तक या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसका प्रोडक्शन 2028 से शुरू हो जाएगा, जो 2035 तक चलेगा।

एयर चीफ ने भी की मार्क2 की वकालत

हाल ही में 93वें एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि तेजस भविष्य की हल्के लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए हमारी रीढ़ है। उन्होंने कहा कि एलसीए मार्क2 मेरी नजर में मार्क1ए का ही एक एक्सटेंशन है। यह एक बड़ा प्लेटफॉर्म होगा, जो अधिक हथियार ले जा सकेगा, लंबी दूरी और ज्यादा समय तक ऑपरेट कर सकेगा और बड़े हथियार ले जाने में सक्षम होगा। इसलिए यह वायुसेना की योजनाओं में बड़ी अहमियत रखता है।

उन्होंने कहा कि अगर एमके2 प्रोग्राम समय पर होता, तो संभव है कि एलसीए मार्क1ए (Tejas Mk1A Order) की कुछ अगली खेप मार्क2 के रूप में ऑर्डर की जाती। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस पर विचार हो सकता है। तेजस मार्क1ए की टाइमलाइन पर उन्होंने कहा कि यह विमान वायुसेना की दी गई क्वॉलिफिकेशन रिक्वायरमेंट्स के अनुसार डेवलप किया जा रहा है, और जैसे ही एचएएल इसे सर्टीफाइड करेगा, वायुसेना इसे शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि उत्पादन शुरू हो चुका है, कुछ वादे किए गए हैं, कुछ रिसर्च और डेवलपमेंट का काम बाकी है। जैसे ही यह पूरा होगा, हम विमान लेने के लिए तैयार हैं।

प्रोडक्शन स्पीड है असली चुनौती

हालांकि, एयर चीफ ने साफ कहा कि असली चुनौती प्लेटफॉर्म की नहीं बल्कि प्रोडक्शन स्पीड की है। उन्होंने कहा, “वायुसेना को हर साल कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी 30 से 40 फाइटर विमान चाहिए ताकि पुरानी हो चुकी फ्लीट को समय रहते बदला जा सके।” वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जो उसकी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की ताकत से काफी कम है। पुराने मिग-21, मिग-27 और जैगुआर विमानों के तेजी से रिटायर होने के कारण यह अंतर और बढ़ता जा रहा है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “AMCA की पहली उड़ान 2028 के आसपास और इंडक्शन 2035 तक का लक्ष्य है। अगर फोकस बनाए रखा जाए तो यह समयसीमा पूरी हो सकती है या उससे भी बेहतर प्रदर्शन हो सकता है। हमें अब स्पष्ट रूप से पता है कि हमें कौन-सी तकनीक चाहिए और वह कहां उपलब्ध है।”

एमके2 पर शिफ्ट कर दें 97 विमानों का ऑर्डर – Tejas Mk1A Order

वहीं सूत्रों का कहना है कि एमके1ए के 97 विमानों के दूसरे ऑर्डर को एमके2 पर शिफ्ट कर देना चाहिए। अगर हम जल्दी ऑर्डर देते हैं, तो दोनों का प्रोडक्शन साथ शुरू हो सकता है, जिससे समय और क्षमता दोनों में बड़ा अंतर आएगा।”

एमके2 में अधिक पेलोड, लंबी रेंज और एडवांस्ड एवियोनिक्स होंगे, जिससे यह अगले दशक में भारत की सामरिक बढ़त बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म साबित होगा। भारतीय वायुसेना और सरकार अब तेजस एमके1, एमके1ए और एमके2 के तीनों वेरिएंट्स में कुल 350 से अधिक स्वदेशी एलसीए को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

83 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था 2021 में – Tejas Mk1A Order

फरवरी 2021 में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 83 तेजस एमके1ए विमानों के ऑर्डर को मंजूरी दी थी, जिसमें 73 सिंगल-सीटर और 10 ट्रेनर शामिल थे। इस सौदे की कुल लागत 48,898 करोड़ रुपये थी और प्रति विमान की कीमत लगभग 579 करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसमें हथियार, रखरखाव और ट्रेनिंग का खर्च शामिल था। इसके लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ अगस्त 2021 में 5,375 करोड़ रुपये की सौदे के तहत 99 जीई-एफ404 टर्बोफैन इंजन देने का करार किया गया था।

सितंबर 25 में दूसरा ऑर्डर

वहीं, इस साल 25 सितंबर को रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस मार्क1ए की खरीद का ऑर्डर जारी किया, जिसकी कुल लागत 62,370 करोड़ रुपये थी। इन विमानों में 68 लड़ाकू और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर शामिल हैं। वहीं, इस डील के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और अगले छह सालों में 2034 तक पूरी की जानी है। जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जीई के बीच 113 अतिरिक्त इंजनों की खरीद का नया सौदा लगभग 1 बिलियन डॉलर का होने वाला है।

एचएएल ने बढ़ाई क्षमता

Chlenge Tejas Mk1A Order तेजस एमके1ए की डिलीवरी फरवरी 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन जनरल इलेक्ट्रिक के एफ-404 इंजनों की सप्लाई चेन समस्या के चलते डिलीवरी की तारीख आगे खिसकती रही जो इस साल मार्च 2025 तक पहुंच गई। इस साल अक्तूबर तक चार एफ404 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहुंच चुके हैं। और साल के अंत तक सात और आने की उम्मीद है।

एचएएल के मुताबिक अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए। एचएएल का कहना है कि मार्च 2026 तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

2031-32 तक 180 एमके1ए की डिलीवरी

सूत्रों का कहना है कि एचएएल की मौजूदा रफ्तार का आकलन करें तो अकेले 83 विमानों का सौदा 2028-29 तक पूरा हो सकेगा। वहीं, दूसरे सौदे की डिलीवरी 2028 से शुरू होगी, और 2031 तक पूरी होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, 2031-32 तक 180 एमके1ए वायुसेना में शामिल हो जाएंगे, जिससे कुल एलसीए तेजस फ्लीट 220 तक पहुंचेगी।

तेजस मार्क1 के दो एक्टिव स्क्वाड्रन

Tejas Mk1A Order वहीं, तेजस मार्क 1 की बात करें तो 2009-2010 में वायुसेना ने 40 तेजस एमके1 विमानों का पहला ऑर्डर दिया था, जिसकी लागत 8,802 करोड़ रुपये थी। प्रति विमान लगभग 220 करोड़ रुपये पड़े। इनमें से 32 सिंगल-सीट इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस कॉन्फिगरेशन में थे, जो 2016 में इंडक्ट हुए। दूसरा ऑर्डर 2016 में 20 फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस विमानों का था, जिसकी कीमत 6,500 करोड़ रुपये थी। ये तेजस मार्क 1 वायुसेना की दो स्क्वाड्रन नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ में तैनात हैं, जो तमिलनाडु के सुलुर एयर फोर्स स्टेशन में है।