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भारतीय सेना के लाइट टैंक जोरावर की डिलीवरी टली, यूजर ट्रायल्स अब 2026 की गर्मियों में

सूत्रों के मुताबिक, जोरावर प्रोजेक्ट में कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत नहीं है, बल्कि ट्रायल्स के दौरान सामने आए सुधारों और सिस्टम फाइन-ट्यूनिंग की वजह से समय-सीमा बदली गई है...

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📍नई दिल्ली | 7 Jan, 2026, 11:20 AM

Zorawar Light Tank Delay: भारतीय सेना के लिए तैयार किया जा रहा स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर एक बार फिर तय समय पर सेना को नहीं मिल पाएगा। यूजर ट्रायल्स के लिए दो प्रोटोटाइप टैंकों की डिलीवरी की समय-सीमा आगे बढ़ा दी गई है। पहले इन्हें 2025 की शुरुआत में सौंपे जाने की बात कही गई थी, फिर इसे सर्दियों तक टाला गया और अब नई जानकारी के मुताबिक यह डिलीवरी 2026 की गर्मियों में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Zorawar Light Tank Delay: इसलिए बढ़ी डिलीवरी की समयसीमा

सूत्रों के मुताबिक, जोरावर प्रोजेक्ट में कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत नहीं है, बल्कि ट्रायल्स के दौरान सामने आए सुधारों और सिस्टम फाइन-ट्यूनिंग की वजह से समय-सीमा बदली गई है। डीआरडीओ का कहना है कि प्रोजेक्ट सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और टैंक का फुल इंडक्शन 2027 तक शुरू कर दिया जाएगा। (Zorawar Light Tank Delay)

बताया जा रहा है कि जोरावर का एक प्रोटोटाइप पूरी तरह तैयार है, जबकि दूसरा प्रोटोटाइप निर्माण के अंतिम चरण में है। पहले से तैयार प्रोटोटाइप पर डेवलपमेंटल ट्रायल्स पूरे किए जा चुके हैं। इनमें रेगिस्तान, ऊंचाई वाले इलाके और ठंडे मौसम में टैंक की क्षमता को परखा गया।

सितंबर 2024 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में जोरावर के डेजर्ट ट्रायल्स किए गए थे। इसके बाद दिसंबर 2024 में लद्दाख के न्योमा इलाके में हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल्स हुए, जहां माइनस तापमान और कम ऑक्सीजन की स्थिति में टैंक की परफॉर्मेंस जांची गई। इन ट्रायल्स में टैंक की मोबिलिटी, इंजन परफॉर्मेंस और सस्पेंशन सिस्टम को खास तौर पर देखा गया। (Zorawar Light Tank Delay)

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अक्टूबर 2025 में पोखरण में जोरावर पर नाग एमके-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल फायरिंग टेस्ट भी किया गया। यह मिसाइल टॉप-अटैक मोड में टारगेट को भेदने में सफल रही। इसकी मारक क्षमता लगभग 4 से 10 किलोमीटर बताई गई है और यह फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक पर आधारित है। (Zorawar Light Tank Delay)

यूजर ट्रायल्स को पहले सितंबर 2025 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 2026 कर दिया गया है। सेना को दो प्रोटोटाइप मिलने के बाद यूजर ट्रायल्स शुरू होंगे, जो करीब 12 से 18 महीने तक चल सकते हैं। इन ट्रायल्स के दौरान टैंक को गर्मी, सर्दी और ऊंचाई वाले इलाकों में अलग-अलग परिस्थितियों में परखा जाएगा। (Zorawar Light Tank Delay)

जोरावर लाइट टैंक को खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन लगभग 25 टन है, जिससे इसे एयरलिफ्ट करना आसान होता है। भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान से एक साथ दो जोरावर टैंक ले जाए जा सकते हैं। यह क्षमता लद्दाख और अरुणाचल जैसे दूरदराज इलाकों में तेजी से तैनाती के लिए अहम मानी जाती है। (Zorawar Light Tank Delay)

टैंक में फिलहाल 760 हॉर्सपावर का कमिंस इंजन लगाया गया है, जिससे इसका पावर-टू-वेट रेशियो करीब 30 हॉर्सपावर प्रति टन बनता है। यह हाई-एल्टीट्यूड में बेहतर एक्सीलरेशन और मोबिलिटी के लिए जरूरी है। भविष्य में प्रोडक्शन मॉडल्स में ज्यादा ताकतवर इंजन लगाने की भी योजना है।

हथियारों की बात करें तो जोरावर में 105 एमएम की मुख्य गन लगाई गई है, जिसे बेल्जियम की जॉन कॉकरिल कंपनी के टर्रेट के साथ जोड़ा गया है। इसके अलावा इसमें रिमोट-कंट्रोल मशीन गन, एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम और आधुनिक साइटिंग सिस्टम भी शामिल हैं। (Zorawar Light Tank Delay)

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सुरक्षा के लिहाज से टैंक में मॉड्यूलर आर्मर दिया गया है, जिसे जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। लो-प्रोफाइल डिजाइन की वजह से यह दुश्मन की नजर से बचने में भी मदद करता है। आगे चलकर इसमें एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जोड़ने की भी तैयारी है।

जोरावर लाइट टैंक की जरूरत 2020 के पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव के बाद और ज्यादा महसूस की गई थी। उस दौरान यह सामने आया कि भारी टैंक जैसे टी-72 और टी-90, ऊंचाई वाले इलाकों में पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते और उन्हें वहां तक पहुंचाने में काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। दूसरी ओर चीन के पास ऐसे इलाकों के लिए हल्के टैंक पहले से मौजूद हैं। (Zorawar Light Tank Delay)

इसी जरूरत को देखते हुए डीआरडीओ और लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी ने मिलकर जोरावर प्रोजेक्ट शुरू किया। एलएंडटी को टैंक के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी दी गई है। पहले बैच में भारतीय सेना के लिए 59 टैंक बनाए जाने हैं, जबकि कुल जरूरत 350 से ज्यादा टैंकों की बताई जा रही है। पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 17,500 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सूत्रों का कहना है कि डिलीवरी में हो रही देरी का मकसद टैंक को जल्दबाजी में सेना को सौंपना नहीं, बल्कि हर सिस्टम को पूरी तरह परखकर ही आगे बढ़ना है। यूजर ट्रायल्स के दौरान सेना की ओर से जो भी सुझाव मिलेंगे, उन्हें फाइनल डिजाइन में शामिल किया जाएगा। (Zorawar Light Tank Delay)

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