📍बीकानेर/श्रीगंगानगर | 18 Dec, 2025, 10:01 PM
Sapta Shakti Command: पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को और मजबूत करने के लिए सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने राजस्थान के बिरधवाल क्षेत्र में स्थित सर्वदा अग्रणी ब्रिगेड का दौरा किया। यह दौरा ब्रिगेड के चल रहे कॉम्बैट इंजीनियरिंग ट्रेनिंग कैंप के दौरान किया गया, जहां रीयल टाइम वॉर जैसी परिस्थितियों में यूनिट की तैयारियों और क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय सेना पश्चिमी मोर्चे पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है। निरीक्षण का उद्देश्य यह देखना था कि ब्रिगेड युद्ध जैसी परिस्थितियों में कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकती है।
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The Army… pic.twitter.com/Vk6PO5uuuk
— SouthWesternCommand_IA (@SWComd_IA) December 18, 2025
दौरे के दौरान आर्मी कमांडर ने कॉम्बैट इंजीनियरिंग से जुड़े कई अभ्यासों को देखा। इनमें बाधाएं हटाने, रास्ते बनाने, फील्ड फोर्टिफिकेशन तैयार करने और सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े अभ्यास शामिल थे। इन अभ्यासों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किया गया, ताकि सैनिकों की प्रतिक्रिया क्षमता और समन्वय की सही जांच हो सके। इससे यह साफ हुआ कि ब्रिगेड कठिन हालात में भी तेजी से और सटीक तरीके से काम करने में सक्षम है।
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह को ब्रिगेड की भूमिका, मौजूदा तैयारियों और सप्त शक्ति कमांड के तहत उसकी जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि आधुनिक तकनीक और नए इंजीनियरिंग उपकरणों के इस्तेमाल से ब्रिगेड की कार्यक्षमता में लगातार सुधार हो रहा है। आधुनिक संचार साधन और तकनीकी उपकरण सैनिकों को तेजी से फैसले लेने में मदद कर रहे हैं।
आर्मी कमांडर ने ब्रिगेड में चल रहे क्षमता विकास कार्यों की भी समीक्षा की। इन प्रयासों का मकसद सैनिकों की गति, सुरक्षा और संचालन क्षमता को और बेहतर बनाना है, खासकर रेगिस्तानी इलाकों में जहां चुनौतियां अलग तरह की होती हैं।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स और जवानों से बातचीत की और उनके अनुशासन, मेहनत और उच्च मनोबल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए नियमित और यथार्थवादी प्रशिक्षण बहुत जरूरी है। साथ ही नई तकनीक को जल्दी अपनाना और सभी रैंकों के बीच तालमेल बनाए रखना भी उतना ही अहम है।
डिफेंस पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल निखिल धवन ने बताया कि यह दौरा भारतीय सेना की उस सोच को दिखाता है, जिसके तहत हर फॉर्मेशन की तैयारियों को समय-समय पर परखा जाता है। बिरधवाल में चल रहा यह प्रशिक्षण शिविर इस बात को सुनिश्चित करता है कि कॉम्बैट इंजीनियर यूनिट्स किसी भी परिस्थिति में अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों को पूरा समर्थन दे सकें।



