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भारतीय सेना के ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ में जुटेंगे सेना-स्टार्टअप और इंडस्ट्री, ड्रोन, AI और नई टेक्नोलॉजी पर फोकस

यह सिम्पोजियम भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड और सेंट्रल कमांड मिलकर आयोजित कर रही हैं। इसमें सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) भी सहयोग कर रही है...

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📍नई दिल्ली | 25 Mar, 2026, 7:54 PM

North Tech Symposium 2026: भारतीय सेना अब भविष्य की युद्ध तैयारी को ध्यान में रखते हुए नई टेक्नोलॉजी की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। भारतीय सेना ने नॉर्थ टेक सिम्पोजियम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सेना, इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी सेक्टर को एक साथ लाकर आधुनिक जरूरतों के अनुसार समाधान तैयार करना है। नई दिल्ली में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम के जरिए इस बड़े आयोजन की घोषणा की गई, जो इस साल मई में प्रयागराज में होगा।

इस कार्यक्रम में भारतीय सेना, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स, एकेडेमिया, डीपीएसयू, पैरामिलिट्री फोर्स और रक्षा मंत्रालय से जुड़े कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। इसका मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस सिम्पोजियम में हिस्सा लें और रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक पर मिलकर काम करें।

North Tech Symposium 2026: सेना और इंडस्ट्री को जोड़ने की कोशिश

यह सिम्पोजियम भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड और सेंट्रल कमांड मिलकर आयोजित कर रही हैं। इसमें सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) भी सहयोग कर रही है। कार्यक्रम में सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और नॉर्दन कमांड जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनके अलावा इंडस्ट्री और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

इस सिम्पोजियम का मुख्य उद्देश्य सेना की जरूरतों और देश में बन रही तकनीक के बीच तालमेल बैठाना है, ताकि जो टेक्नोलॉजी बनाई जा रही है, वह सीधे मैदान में काम आ सके।

क्या है ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ थीम

इस बार सिम्पोजियम की थीम रखी गई है “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और सैनिक एक साथ आते हैं।” इसका मतलब है कि सेना, प्राइवेट कंपनियां, स्टार्टअप्स और पढ़ाई-लिखाई से जुड़े संस्थान एक प्लेटफॉर्म पर आएं और मिलकर नई रक्षा तकनीक विकसित करें।

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प्रयागराज में यह आयोजन इसलिए रखा गया है क्योंकि यह गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का प्रतीक है। उसी तरह यह सिम्पोजियम भी तीन क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश है।

सिम्पोजियम में क्या होगा खास

इस सिम्पोजियम में देश की कई कंपनियां और स्टार्टअप्स अपनी नई टेक्नोलॉजी दिखाएंगे। ये तकनीक सेना की जरूरतों के आधार पर तैयार की गई हैं। कर्टेन रेजर के दौरान जो “प्रॉब्लम डिफिनिशन स्टेटमेंट” जारी किए गए हैं, उन्हीं के आधार पर इंडस्ट्री अपनी तकनीक लेकर आएगी। इसके अलावा अलग-अलग सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सेना, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के विशेषज्ञ मिलकर चर्चा करेंगे।

दो बड़े सेमिनार होंगे आयोजित

इस कार्यक्रम में दो खास सेमिनार रखे गए हैं। पहला सेमिनार “संगम” नाम से होगा, जिसमें नई पीढ़ी की तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग पर बात होगी। दूसरा सेमिनार “ध्रुवा” नाम से होगा, जिसमें रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। इन सेमिनारों में नई टेक्नोलॉजी, रिसर्च और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

किन-किन तकनीकों पर रहेगा फोकस

सिम्पोजियम में कई अहम क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें ड्रोन सिस्टम, रोबोटिक्स, कम्युनिकेशन सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सर्विलांस जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही हाई एल्टीट्यूड एरिया में काम आने वाली तकनीक, सैनिकों की सुरक्षा से जुड़ी डिवाइस और विशेष ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी दिखाए जाएंगे।

नॉर्थ टेक सिम्पोजियम से पहले भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। 2023 में इसका पहला आयोजन आईआईटी जम्मू में हुआ था, जहां इंडस्ट्री और एकेडेमिया ने मिलकर सेना की जरूरतों के समाधान खोजे थे। इसके बाद 2024 में लेह में “हिम टेक” कार्यक्रम हुआ था, जिसमें हाई एल्टीट्यूड एरिया में काम आने वाली तकनीकों पर फोकस किया गया था।

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अब 2026 का यह सिम्पोजियम इन दोनों अनुभवों को आगे बढ़ाने का प्रयास है। इस सिम्पोजियम का एक बड़ा उद्देश्य यह है कि सेना को जो भी तकनीक चाहिए, वह देश में ही विकसित की जाए।

इसके लिए इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को सीधे सेना की जरूरतों के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे उसी के अनुसार समाधान तैयार कर सकें। इससे न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी। सेना चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस क्षेत्र में जुड़ें और मिलकर ऐसे समाधान तैयार करें जो भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

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