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INS Sindhughosh Decommissioned: 40 साल बाद हुई नौसेना के ‘ब्लैक होल’ की विदाई, भारत को मिली थी अंडरवॉटर स्ट्राइक पावर

भारत ने कुल 10 सिंधुघोष क्लास पनडुब्बियां खरीदी थीं। ये सभी 1986 से 2000 के बीच नौसेना में शामिल हुईं। पिछले कुछ वर्षों में उम्र पूरी कर चुकी कुछ पनडुब्बियों को धीरे-धीरे सेवा से हटाया जा रहा है...

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📍मुंबई | 20 Dec, 2025, 6:36 PM

INS Sindhughosh Decommissioned: भारतीय नौसेना के इतिहास का एक अहम अध्याय शुक्रवार को समाप्त हो गया। भारतीय नौसेना में ‘ब्लैक होल’ के नाम से मशहूर आईएनएस सिंधुघोष (S55) को औपचारिक रूप से सेवा से मुक्त कर दिया गया। मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में सूर्यास्त के समय हुई इस परंपरागत सेरेमनी के साथ ही 40 साल तक समुद्र की गहराइयों में देश की सुरक्षा करने वाली इस पनडुब्बी ने अंतिम सलामी ली। यह वही पनडुब्बी थी, जिसने 1986 से लेकर 2025 तक भारतीय समुद्री सीमाओं की चुपचाप, लेकिन बेहद मजबूत तरीके से सुरक्षा की।

INS Sindhughosh Decommissioned: सिंधुघोष क्लास की लीड सबमरीन

आईएनएस सिंधुघोष उस दौर की पनडुब्बी है, जब भारत ने अंडरवॉटर वॉरफेयर में अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसे भारतीय नौसेना की सिंधुघोष क्लास की लीड सबमरीन माना जाता है, जो रूसी किलो-क्लास डिजाइन पर बेस्ड थी। चार दशक की सेवा के दौरान इस पनडुब्बी ने कई अहम मिशन, लंबी पेट्रोलिंग, हथियार परीक्षण और कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में हिस्सा लिया।

19 दिसंबर की शाम जैसे ही सूरज ढलने लगा, नौसेना की पुरानी परंपरा के अनुसार नेवल डॉकयार्ड में डीकमीशनिंग पेनेंट को नीचे उतारा गया। यह वही क्षण होता है, जब किसी युद्धपोत या पनडुब्बी को आधिकारिक रूप से ‘पे-ऑफ’ किया जाता है। इस मौके पर पश्चिमी नौसेना कमान के शीर्ष अधिकारी, पूर्व नौसैनिक अधिकारी, वेटरंस और सिंधुघोष पर सेवा कर चुके कई पुराने क्रू मेंबर्स मौजूद थे।

सेरेमनी के दौरान अधिकारियों ने पनडुब्बी के संग बिताए अहम पलों को याद किया। इन लोगों ने कभी इसी पनडुब्बी के अंदर महीनों तक समुद्र की गहराइयों में ड्यूटी की थी। उनके लिए यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने जीवन के एक हिस्से को विदा करने जैसा था।

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INS Sindhughosh Decommissioned: 1986 से शुरू हुआ सफर

आईएनएस सिंधुघोष को 30 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत यूनियन के रीगा शिपयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। उस समय भारत अपनी पुरानी फॉक्सट्रॉट क्लास पनडुब्बियों को बदलने की तैयारी कर रहा था और सिंधुघोष क्लास इस दिशा में बड़ी पहल थी। यह पनडुब्बियां डीजल-इलेक्ट्रिक थीं, यानी सतह पर डीजल इंजन और पानी के नीचे बैटरियों से चलती थी।

करीब 72 मीटर लंबी यह पनडुब्बी सतह पर लगभग 2300 टन और पानी के नीचे करीब 3000 टन वजनी थी। यह 300 मीटर तक गहराई में गोता लगा सकती थी और लगभग 45 दिनों तक समुद्र में ऑपरेट कर सकती थी। इसमें करीब 53 नौसैनिकों का दल इस पर तैनात रहता था।

आईएनएस सिंधुघोष को कहते थे ‘ब्लैक होल’

सिंधुघोष क्लास को दुनिया की सबसे शांत पनडुब्बियों में गिना जाता है। नाटो देशों ने इन्हें ‘ब्लैक होल’ तक कहा, क्योंकि इनका नॉइज सिग्नेचर बेहद कम होता है। दुश्मन के सोनार के लिए इन्हें पकड़ना आसान नहीं होता। यही वजह थी कि भारतीय नौसेना के लिए यह पनडुब्बियां अंडरवॉटर स्ट्राइक और सर्विलांस का मजबूत हथियार बनी रहीं।

आईएनएस सिंधुघोष ने कई बार लंबी गश्त के दौरान अपनी स्टेल्थ क्षमता साबित की। बिना शोर किए दुश्मन के इलाके के पास जाकर निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर हमले की तैयारी रखना, इसका मुख्य रोल था।

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पहली बार क्रूज मिसाइल से लैस

आईएनएस सिंधुघोष की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह थी कि यह भारतीय नौसेना की पहली पनडुब्बी बनी, जिसे क्लब-एस क्रूज मिसाइल सिस्टम से लैस किया गया। 2003–04 के मिड-लाइफ रिफिट के दौरान इस पनडुब्बी में यह क्षमता जोड़ी गई। इसके बाद यह न केवल दुश्मन के जहाजों, बल्कि जमीन पर मौजूद टारगेट्स को भी सटीकता से निशाना बना सकती थी।

इस अपग्रेड के बाद सिंधुघोष की स्ट्राइक रेंज और मारक क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ। बाद के सालों में क्लब मिसाइलों की टेस्ट फायरिंग और अभ्यासों में भी इस पनडुब्बी की अहम भूमिका रही।

चार दशकों की सेवा में आईएनएस सिंधुघोष ने कई ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट्स पूरे किए। इसने हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी को मजबूत किया। मल्टीनेशनल एक्सरसाइज में हिस्सा लेकर इसने दूसरी नौसेनाओं के साथ इंटरऑपरेबिलिटी भी दिखाई।

हालांकि आईएनएस सिंधुघोष 2008 में एक मर्चेंट शिप से भी टकरा गई थी, लगभग एक महीने तक सेवा से बाहर रहने के बाद यह फिर वापस लौट आई। 2013 में पास ही खड़ी आईएनएस सिंधुरक्षक में हुए विस्फोट से इसे मामूली नुकसान पहुंचा था, लेकिन यह दोबारा ऑपरेशनल हो गई।

खरीदी थीं 10 सिंधुघोष क्लास पनडुब्बियां

भारत ने कुल 10 सिंधुघोष क्लास पनडुब्बियां खरीदी थीं। ये सभी 1986 से 2000 के बीच नौसेना में शामिल हुईं। पिछले कुछ वर्षों में उम्र पूरी कर चुकी कुछ पनडुब्बियों को धीरे-धीरे सेवा से हटाया जा रहा है। आईएनएस सिंधुध्वज (S56) को 2022 में और आईएनएस सिंधुरक्षक (S63) को पहले ही डीकमीशन किया जा चुका है। अब आईएनएस सिंधुघोष के जाने के बाद इस क्लास की केवल सात पनडुब्बियां ही ऑपरेशनल हैं।

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इन पनडुब्बियों ने दशकों तक भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर ताकत की रीढ़ का काम किया। इन्हीं के दम पर भारत ने समुद्र के नीचे चुपचाप निगरानी और स्ट्राइक की क्षमता विकसित की।

भारतीय नौसेना का फोकस अब नई पीढ़ी की पनडुब्बियों पर है, जिनमें ज्यादा स्टेल्थ, ज्यादा एंड्योरेंस और आधुनिक हथियार सिस्टम होंगे। स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियां, आने वाला प्रोजेक्ट-75 (आई) और परमाणु पनडुब्बियां इसी दिशा में कदम हैं।

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