📍नई दिल्ली | 7 Jan, 2026, 9:40 PM
Indian Army Drone Warfare: आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को तेजी से मजबूत कर रही है। सेना ने बड़ा फैसला लेते हुए 25 शक्तिबाण रेजिमेंट खड़ी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये नई रेजिमेंट पूरी तरह अनमैन्ड वॉरफेयर यानी ड्रोन आधारित युद्ध के लिए तैयार की जा रही हैं। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ये रेजिमेंट 5 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट्स पर हमला कर सकेंगी।
यह बड़ा फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग प्लान भारतीय सेना के मॉडर्नाइजेशन प्लान का हिस्सा है, जो थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का विजन है। इसका मकसद भविष्य की लड़ाइयों के लिए सेना को तकनीक आधारित, तेज और ज्यादा अचूक बनाना है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, शक्तिबाण रेजिमेंट आर्टिलरी रेजिमेंट का हिस्सा होंगी और इनकी शुरुआती यूनिट्स को ऑपरेशनल भी किया जा चुका है। (Indian Army Drone Warfare)
Indian Army Drone Warfare: शामिल होंगे लंबी दूरी वाले कामिकाजे ड्रोन
भारतीय सेना लंबे समय से यह महसूस कर रही थी कि 50 से 500 किलोमीटर की रेंज में स्ट्राइक की उसकी क्षमता में एक बड़ा गैप है। पारंपरिक आर्टिलरी सिस्टम और मिसाइलों के बीच यह दूरी ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के जरिए भरी जा सकती है। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं। इन रेजिमेंट्स में स्वार्म ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी कामिकाजे ड्रोन और लंबी दूरी तक मार करने वाले यूएवी शामिल होंगे। (Indian Army Drone Warfare)
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, 400 से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के टारगेट्स के लिए सेना के पास पहले से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसी ताकत मौजूद है। वहीं आर्टिलरी रेजिमेंट को 120 किलोमीटर रेंज वाले पिनाका रॉकेट सिस्टम भी मिल रहे हैं। लेकिन 50 से 500 किलोमीटर के बीच की दूरी में ड्रोन आधारित सिस्टम से सेना को कम समय में हमला करने की क्षमता मिलेगी। स्वार्म ड्रोन्स के जरिए एक साथ कई लक्ष्यों पर दबाव बनाया जा सकेगा, जबकि लॉइटरिंग म्यूनिशन्स दुश्मन के इलाके में मंडराते हुए सही समय पर हमला कर सकेंगे। (Indian Army Drone Warfare)
शक्तिबाण रेजिमेंट को तैयार करने के लिए भारतीय सेना जल्द ही फास्ट-ट्रैक प्रोसीजर के तहत एक बड़ा टेंडर जारी करने जा रही है। इस टेंडर के जरिए करीब 850 लॉइटरिंग म्यूनिशन और उनसे जुड़े लॉन्चर खरीदे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि इन ड्रोन सिस्टम्स की सप्लाई भारतीय कंपनियों से ही की जाएगी। (Indian Army Drone Warfare)
रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय इंडस्ट्री इन ड्रोन सिस्टम्स की आपूर्ति अगले दो वर्षों के भीतर करने की स्थिति में है। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस, अदाणी डिफेंस और राफेएम जैसी भारतीय कंपनियों के इस परियोजना में भाग लेने की संभावना जताई जा रही है। सेना पहले ही एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटर्स का पूल तैयार कर चुकी है और अब इन्हें आधुनिक हथियारों और प्लेटफॉर्म्स से लैस किया जा रहा है। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी बड़े ड्रोन इकोसिस्टम का अहम हिस्सा होंगी। (Indian Army Drone Warfare)
बनाई जा रहीं दिव्यास्त्र बैटरियां
सिर्फ शक्तिबाण रेजिमेंट ही नहीं, बल्कि आर्टिलरी रेजिमेंट के तहत करीब 35 से 40 दिव्यास्त्र बैटरियां भी बनाई जा रही हैं। इन बैटरियों में अलग-अलग तरह के ड्रोन शामिल होंगे, जिनमें घातक स्ट्राइक करने की क्षमता होगी। ये बैटरियां आर्टिलरी डिवीजनों का हिस्सा बनेंगी और युद्ध के दौरान ड्रोन से सटीक हमला करने में मदद करेंगी।
इन्फैंट्री यानी पैदल सेना में भी बदलाव किए जा रहे हैं। हर इन्फैंट्री बटालियन में अश्नि प्लाटून बनाए जा रही हैं, ताकि फ्रंटलाइन पर तैनात जवान भी ड्रोन का इस्तेमाल कर निगरानी और हमले कर सकें। इसके अलावा कोर मुख्यालय स्तर पर नई भैरव स्पेशल कमांडो फोर्स बनाई गई है। इस फोर्स का हर ऑपरेटर ड्रोन लॉन्च कर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है। (Indian Army Drone Warfare)
ड्रोन युद्ध की यह तैयारी हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर भी आधारित है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय बलों ने नागास्त्र, स्काई स्ट्राइकर, हार्पी और हारोप जैसे लॉइटरिंग म्यूनिशन्स का इस्तेमाल कर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया था। इन अभियानों से मिले अनुभवों ने सेना को ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को और तेज़ी से विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। (Indian Army Drone Warfare)
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि आज की लड़ाई सिर्फ बंदूक और टैंक की नहीं रह गई है। ड्रोन, सेंसर, रियल टाइम डेटा और सटीक स्ट्राइक अब युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। शक्तिबाण रेजिमेंट इसी बदले हुए युद्ध के स्वरूप को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, ताकि भारतीय सेना हर मोर्चे पर तकनीक के साथ आगे रह सके। (Indian Army Drone Warfare)


