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LCA Tejas Mk1A Engine: ऑनलाइन मिल रहा तेजस का GE-F404 इंजन! यूजर बोले- “HAL को कैश ऑन डिलीवरी ऑप्शन दे दो, अब शायद समय पर इंजन मिल जाए”

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📍नई दिल्ली | 21 Dec, 2024, 1:01 PM

LCA Tejas Mk1A Engine: भारत के स्वदेशी फाइटर जेट LCA तेजस Mk1A को अमेरिकी एरोस्पेस कंपनी GE की तरफ से समय पर इंजन सप्लाई न किए जाने से भारतीय वायु सेना को यह फाइटर जेट मिलने में डिलीवरी का सामना करना पड़ रहा है। यह डिलीवरी इस साल मार्च-अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन इसकी डेडलाइन लगातार आगे बढती जा रही है। वहीं, इसमें लगने वाले GE F-404 इंजन को लेकर एक मजेदार वाकया सामने आया है। तेजस को बनाने वाली देश की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भले ही जीई कंपनी की तरफ से इसकी सप्लाई में देरी की जा रही है, लेकिन यह इंजन ऑनलाइन उपलब्ध है। इस इंजन को इंडिया मार्ट (India Mart) वेबसाइट पर लिस्ट किया गया है। यह प्लेटफॉर्म आमतौर पर व्यावसायिक सामानों के लिए जाना जाता है, न कि एडवांस मिलिट्री हाईवेयर के लिए।

LCA Tejas Mk1A Engine: GE-F404 Engine Available on Indian Mart

GE F-404 इंजन दुनिया भर में अपनी विश्वसनीयता और प्रदर्शन के लिए जाना जाता है और इसे मुख्य रूप से हल्के लड़ाकू विमानों के लिए डिजाइन किया गया है।

LCA Tejas Mk1A Engine: सोशल मीडिया की पर लोग ले रहे चुटकियां

जैसे ही यह खबर फैली, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कंपनी को ट्रोल करना शुरू कर किया। इस पर अपनी मजेदार प्रतिक्रियाएं देते हुए किसी यूजर ने लिखा, “अगर HAL को GE से इंजन नहीं मिल रहा है, तो शायद अब उन्हें इंडिया मार्ट से ऑर्डर करना चाहिए।” वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “इंडिया मार्ट के कस्टमर सर्विस वाले जल्द ही HAL को कॉल करके पूछेंगे, ‘कितने पीस चाहिए?'” एक यूजर ने लिखा, “अगर HAL को डिलीवरी में इतनी दिक्कत हो रही है, तो इंडिया मार्ट पर उपलब्धता का क्या मतलब?” दूसरे ने टिप्पणी की, “यह GE का एक विज्ञापन हो सकता है, ताकि कीमत को लेकर सौदेबाजी की जा सके।”

LCA Tejas: भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस के प्रोडक्शन में तेजी लाने पर जोर, संसदीय समिति ने रक्षा मंत्रालय को दिए निर्देश

इस पर कई मीम्स भी वायरल हो रहे हैं, जैसे:

  • “अगर GE F-404 मिल सकता है, तो F-35 का भी एक कोटेशन मांग लेते हैं, मज़े के लिए।”
  • “HAL को कैश ऑन डिलीवरी ऑप्शन दे दो, अब शायद समय पर इंजन मिल जाए।”
  • “यह इंजन कितना माइलेज देता होगा?”
  • एक यूजर ने कहा, “HAL को यह जानने में देर हो गई कि सही प्रोडक्ट कहां से खरीदना है।”
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कुछ यूजर्स ने चुटकी लेते हुए लिखा:

  • “HAL को यह बात पता होती कि सही इंजन कहां मिलेगा, तो शायद वे इंडिया मार्ट से ही खरीद लेते।”
  • “सर, हम सिर्फ बल्क डिलीवरी करते हैं। एक या दो पीस के लिए आप अमेज़न या नजदीकी स्टोर देख लें।”
  • “ड्राइविंग लाइसेंस के साथ आर्डर करें, वरना डिलीवरी नहीं होगी।”

HAL और GE की चुनौतीपूर्ण साझेदारी

तेजस Mk1A प्रोजेक्ट के लिए यह इंजन बेहद अहम है, क्योंकि यह भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम की रीढ़ है। 2021 में HAL ने GE के साथ 99 F-404 इंजनों की डील साइन की थी, जिसकी डिलीवरी 2029 तक पूरी होनी थी। लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण इसकी डिलीवरी में देरी हो रही है। हालांकि GE का कहना है कि वह इंजन की सप्लाई को लेकर प्रतिबद्ध है।

HAL को LCA Tejas की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के निर्देश

हाल ही में, भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के लिए, संसद की रक्षा पर स्थायी समिति ने रक्षा मंत्रालय (MoD) को निर्देश दिया है कि वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लड़ाकू विमानों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए कहे। यह बात समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कही गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन के साथ संभावित दो-फ्रंट युद्ध की तैयारी के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 31 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं, जिनमें प्रत्येक में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं।

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समिति ने तेजस विमानों की देरी से डिलीवरी को लेकर भी चिंता जताई। HAL को 83 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया था, जिसकी कुल लागत 48,000 करोड़ रुपये है। मार्च 2024 से इनकी डिलीवरी शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं सौंपा गया है।

 

Author

  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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